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कोरबा

जिला पंचायत सामान्य सभा की बैठक से कटघोरा डीएफओ निशांत कुमार लगातार अनुपस्थित : जनप्रतिनिधियों का भड़का आक्रोश

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जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन ने कहा – डीएफओ की अनुपस्थिति से नहीं हो पा रही समीक्षा
कोरबा। त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की लगातार उपेक्षा करना कोरबा के अधिकारियों का ट्रैंड बन गया है। जिला पंचायत के जनप्रतिनिधियों को अधिकारी तवज्जो तक नहीं देते, यहां तक कि जिला पंचायत सीईओ द्वारा खास निर्देश दिया गया है कि सभी विभाग प्रमुख जिला पंचायत की सामान्य सभा में उपस्थित हों, ताकि विभागों की समीक्षा हो सके। कटघोरा डीएफओ निशांत कुमार की हिटलरशाही यहां भी देखने को मिल रहा है। वे लगातार सामान्य सभा की बैठक से नदारद रहते हैं। इस बार की बैठक में सदस्यों ने इसे गंभीरता से लिया और कड़ी नराजगी जाहिर की। डीएफओ के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। सामान्य सभा ने कटघोरा डीएफओ को अल्टीमेटम भी दिया और अपनी कार्यशैली नहीं सुधारने पर शासन से शिकायत की भी बात कही।
गुरुवार को जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में भी ऐसा ही हुआ। यहां कटघोरा वनमंडल के डीएफओ नहीं पहुंचे, जिससे जिला पंचायत के सदस्यों ने कड़ी नाराजगी जताई। अध्यक्ष की अगुवाई में डीएफओ के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया है, इसे शासन को भी प्रेषित किया जाएगा।
सदस्यों ने कहा-आने वाले दिनों में डीएफओ कटघोरा नहीं आएंगे तो हम उनके कार्यालय में जाकर ही जिला पंचायत की बैठक करेंगे।
सदस्यों ने सामने रखी अपनी समस्या
जिला पंचायत के अलग-अलग सदस्यों ने अपनी समस्याएं सामने रखी। बैठक में यह भी बात उठी कि जैसा निर्देश दिया जाता है, वैसा काम नहीं किया जाता, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोग काफी नाराज रहते हैं। खास तौर पर हाथियों से परेशानी होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र की जनता नाराज है। हाथी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं, इसका मुआवजा काफी कम है, वह भी समय पर नहीं मिलता।
कटघोरा डीएफओ निशांत के खिलाफ शिकायत शासन को
जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ पवन सिंह ने कहा कि कटघोरा डीएफओ निशांत कुमार निर्देश के बाद भी सामान्य सभा की बैठक में नहीं आते। वे लगातार तीन बार से बैठक में नहीं आ रहे हैं। सदस्यों ने जिला पंचायत सीईओ के सामने कड़ी नाराजगी जाहीर की और निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव शासन को भी भेजा जाएगा। 5-5 विभागों की समीक्षा हम सामान्य सभा में रखते हैं। आज भी पांच विभागों की समीक्षा थी। कटघोरा डीएफओ लगातार तीसरी बार बैठक से गायब थे। सदस्यों ने नाराजगी जाहिर की है। हम ग्रामीण क्षेत्र के जनप्रतिनिधि हैं, इसलिए हमारा ज्यादातर काम वन मंडल पर ही आश्रित रहता है। अधिकारी अपने अधीनस्थ एसडीओ को भेज देते हैं, जिन्हें कुछ जानकारी नहीं रहती है। हर महीने हमारी एक बैठक होती है। पहले भी हमने इसकी जानकारी दी है। त्रिस्तरीय पंचायती राज का सर्वोच्च सदन सामान्य सभा होता है। इसके बाद भी अधिकारी अनुपस्थित रहते हैं। अधिकारियों का यहां आना अनिवार्य होता है।
पानी हमारा, लाभ दूसरे जिले को
अध्यक्ष ने यह भी बताया कि बांगो बांध जरूर हमारे जिले में है, लेकिन कोरबा जिले का सिंचित रकबा काफी कम है। ज्यादातर खेती बारिश के पानी पर ही आश्रित है। आज प्रधानमंत्री नल जल योजना के तहत पाइपलाइन के जरिए पानी घर-घर पहुंच रहा है, लेकिन खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। नहर और अन्य निर्माण के जरिए हम ग्रामीण क्षेत्र का सिंचित रकबा बढ़ाने का प्रयास करेंगे, आने वाली बैठकों में अधिकारियों के साथ मिलकर इस दिशा में भी योजना बनाई जाएगी। पानी हमारे जिले का है, लेकिन इसका फायदा जांजगीर, सक्ती, रायगढ़ को मिलता है।
बैठक व्यवस्था नहीं होने से नाराजगी


सदस्यों ने जिला पंचायत सीईओ पर भी नाराजगी जताई। आगंतुकों के लिए कक्ष न होने के कारण सदस्यों ने इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन सीईओ ने ध्यान नहीं दिया और सदस्य भड़क उठे। अध्यक्ष, सदस्यों की अनुपस्थिति में उनके कक्षों में ताला बंद कर दिया जाता है, आगंतुक कक्ष को हमेशा बंद रखा जाता है। सदस्यों ने इस ्समस्या से कलेक्टर अजीत बसंत को भी अवगत कराया।
शिक्षा विभाग में अटैचमेंट का खेल
डीईओ को घेरा

सामान्य सभा की बैठक में शिक्षा विभाग की भी समीक्षा हुई। युक्तियुक्तकरण के संबंध में सवाल पूछे जाने पर विभाग की ओर से सभा को लिस्ट दी गई। इसमें जिले के 26 शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने युक्तियुक्तकरण के बाद कार्यभार अब तक नहीं लिया है। इसके अलावा शिक्षकों के अटैचमेंट का भी मुद्दा उठा। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की सूची और संलग्न संस्था की जानकारी दी है। वर्तमान में 36 शिक्षक किसी न किसी संस्था में संलग्न हंै। इसके अलावा शिक्षा विभाग के 82 प्राथमिक शाला ऐसे हैं, जो अब भी एकल शिक्षकीय हैं। जबकि तीन माध्यमिक शाला ऐसे हैं, जो एकल शिक्षकीय हैं। सदस्यों ने डीईओ टी पी उपाध्याय को घेरा, सदस्यों के प्रश्न पर उपाध्याय ने मामले को देखने की बात कही।
शासन के निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं डीईओ
शासन का सख्त निर्देश है कि शिक्षकों का अटैचमेंट कहीं भी न हों, इसका ध्यान रखा जाए। सचिव ने सभी कलेक्टरों को पत्र भी लिखा है, लेकिन कोरबा डीईओ साहब को शासन के निर्देशों से कोई मतलब नहीं। अटैचमेंट का खेल पोड़ी-उपरोड़ा में जमकर खेला जा रहा है, लेकिन डीईओ ने अब तक कोई कार्यवाही नहीं की। अटैचमेंट के खेल में कहीं डीईओ साहब का संरक्षण तो नहीं!

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कोरबा

छत्तीसगढ़ में 125 अफसरों का ट्रांसफर:अपर-डिप्टी और संयुक्त कलेक्टर भी बदले, पुलक भट्टाचार्य को सूडा के अतिरिक्त CEO का प्रभार

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के 125 अधिकारियों का तबादला किया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने मंगलवार को तबादला आदेश जारी किया। अधिकारियों को प्रशासनिक आधार पर नई पदस्थापना दी गई है।

तबादला सूची में अपर कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर और प्रवर श्रेणी के अधिकारी शामिल हैं। कई जिलों के संयुक्त कलेक्टर भी बदले गए हैं। जिलों से लेकर मंत्रालय स्तर तक अधिकारियों का फेरबदल किया गया है।

पुलक भट्टाचार्य को सूडा के अतिरिक्त CEO का प्रभार दिया गया है।

पुलक भट्टाचार्य को सूडा के अतिरिक्त CEO का प्रभार दिया गया है।

पुलक भट्टाचार्य को सूडा के अतिरिक्त CEO का प्रभार

पुलक भट्टाचार्य सामान्य प्रशासन विभाग में उप सचिव के पद पर पदस्थ हैं। वे पीएमओटी मिशन कर्मयोगी के समन्वयक और नगरीय प्रशासन-विकास संचालनालय में अपर संचालक के अतिरिक्त प्रभार में हैं।

आदेश के अनुसार, वर्तमान दायित्वों के साथ उन्हें राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा), रायपुर के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

विपुल गुप्ता को कर्मकार मंडल का अतिरिक्त प्रभार

विपुल कुमार गुप्ता श्रम विभाग में उप सचिव के पद पर पदस्थ हैं। उन्हें वर्तमान दायित्वों के साथ सचिव, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, रायपुर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

विनायक शर्मा को नवा रायपुर विकास प्राधिकरण में प्रबंधक बनाया

विनायक शर्मा छत्तीसगढ़ राज्य शिष्टाचार कार्यालय में राज्य शिष्टाचार अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं। उनके पास उप सचिव, खनिज साधन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी है।

आदेश के अनुसार, उन्हें नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण में प्रबंधक के पद पर पदस्थ किया गया है।

डॉ. ऋतु वर्मा को उच्च शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार

डॉ. ऋतु वर्मा सामान्य प्रशासन विभाग में उप सचिव (कक्ष-6 एवं 7) के पद पर पदस्थ हैं। उन्हें वर्तमान दायित्वों के साथ उच्च शिक्षा विभाग के उप सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

वैभव कुमार क्षेत्रज्ञ को छत्तीसगढ़ संवाद के प्रभार से हटाया

वैभव कुमार क्षेत्रज्ञ कृषि विकास-किसान कल्याण और जैव प्रौद्योगिकी विभाग में अवर सचिव के पद पर पदस्थ हैं। वे छत्तीसगढ़ संवाद में उप महाप्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।

आदेश के अनुसार, उन्हें छत्तीसगढ़ संवाद के उप महाप्रबंधक के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। उनके शेष दायित्व यथावत रहेंगे।

पुष्पेन्द्र शर्मा बने राज्य शिष्टाचार अधिकारी

पुष्पेन्द्र कुमार शर्मा छत्तीसगढ़ राज्य शिष्टाचार अधिकारी के कार्यालय में सत्कार अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं। आदेश के अनुसार, उन्हें राज्य शिष्टाचार अधिकारी, मंत्रालय, नवा रायपुर अटल नगर के पद पर पदस्थ किया गया है।

गौतम सिंह को मार्कफेड के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया

गौतम सिंह सुशासन-अभिसरण विभाग में अवर सचिव के पद पर पदस्थ हैं और मार्कफेड का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।

आदेश के अनुसार, उन्हें मार्कफेड के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। उनके शेष दायित्व यथावत रहेंगे।

मोनिका जयनशीने बनीं डिप्टी कलेक्टर

मोनिका जयनशीने माध्यमिक शिक्षा मंडल, रायपुर में उप सचिव के पद पर पदस्थ हैं। वे नवाचार आयोग का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही थीं।

आदेश के अनुसार, उन्हें डिप्टी कलेक्टर, दुर्ग के पद पर पदस्थ किया गया है।

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कोरबा

रायपुर : संजू की स्वर्णिम जीत पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने थपथपाई पीठ, कहा छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को मिलेगा उनके अनुभव का लाभ

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परिजनों के साथ उप मुख्यमंत्री साव से मिलीं संजू देवी, भारतीय महिला कबड्डी टीम के गोल्ड मेडल तक का सफर किया साझा

परिजनों के साथ उप मुख्यमंत्री श्री साव से मिलीं संजू देवी, भारतीय महिला कबड्डी टीम के गोल्ड मेडल तक का सफर किया साझा
परिजनों के साथ उप मुख्यमंत्री श्री साव से मिलीं संजू देवी, भारतीय महिला कबड्डी टीम के गोल्ड मेडल तक का सफर किया साझा

रायपुर/कोरबा 29 सितम्बर 2026। एशियन गेम्स-2026 में महिला कबड्डी में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी ने रायपुर लौटने के बाद उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव से मुलाकात की। श्री साव ने अपने नवा रायपुर स्थित शासकीय निवास कार्यालय में हुई मुलाकात के दौरान संजू देवी की उपलब्धि पर उनका अभिनंदन कर हौसला बढ़ाया। उन्होंने संजू की माता श्रीमती अमरीका बाई और पिता रामजी का भी अभिनंदन किया।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने संजू देवी को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने भारत के साथ छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ लोगों को भी गौरवान्वित किया है। उन्होंने संजू से एशियन गेम्स के अनुभव और उनकी टीम के स्वर्ण पदक तक के अजेय सफर की जानकारी ली। श्री साव ने उनसे प्रतियोगिता के दौरान मिले अनुभवों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की।
श्री साव ने संजू का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिला उनका अनुभव केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रहेगा। इस अनुभव का लाभ छत्तीसगढ़ के अन्य खिलाड़ियों को भी मिलेगा। श्री साव से संजू देवी की मुलाकात के दौरान खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार और संचालक श्रीमती आकांक्षा शिक्षा खलखो भी मौजूद थीं।

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कोरबा

जाति जनगणना और प्रत्येक जाति के लिए विशिष्ठ वैज्ञानिक कोड तथा वैज्ञानिक वर्गीकरण सुनिश्चित करने राष्ट्रपति के नाम ओबीसी कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापन

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कोरबा। जिला कांग्रेस कमेटी ओबीसी वर्ग के जिला अध्यक्ष गजानंद प्रसाद साहू (शहर) राजेश श्रीवास (ग्रामीण) तथा प्रदेश उपाध्यक्ष श्यामसुंदर सोनी, जिला कांग्रेस कमेटी शहर के जिलाध्यक्ष मुकेश राठौर, ग्रामीण जिलाध्यक्ष मनोज चौहान के नेतृत्व में एक रैली निकाली गई तथा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।

कांग्रेसजनों ने राष्ट्रपति से मांग की है कि जनगणना जाति के आधार पर की जाए और प्रत्येक जाति के लिए विशिष्ठ वैज्ञानिक कोड, वैज्ञानिक वर्गीकरण सुनिश्चित किया जाए। जिला कांग्रेस कमेटी शहर के जिलाध्यक्ष गजानंद प्रसाद साहू ने बताया कि ओबीसी कांग्रेस द्वारा रैली निकाली गई और राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें मांग की गई है कि जनगणना जाति के आधार पर सुनिश्चित की जाए और वैज्ञानिक, प्रमाणित एवं नीतिनिर्माण में उपयोगी जाति जनगणना हेतु ओबीसी श्रेणी मानकीकृत जाति सूची, प्रत्येक जाति के लिए विशिष्ठ वैज्ञानिक कोड तथा वैज्ञानिक वर्गीकरण सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

ज्ञापन में लिखा गया है कि अगामी जनगणना में जातियों की गणना की पद्धति से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषय की ओर आपका ध्यान आकर्षित करते हुए ज्ञापन प्रस्तुत किया जा रहा है। जाति जनगणना सामाजिक न्याय का ऐतिहासिक माध्यम तभी बन सकती है, जब देश की प्रत्येक जाति एवं समुदाय की सही, वैज्ञानिक और एकरुप गणना हो।
केवल किसी व्यक्ति से उसकी जाति पूछ लेना पर्याप्त नहीं है। यह भी सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि एक ही प्रमाणित जाति के अलग-अलग नाम, पर्यायवाची नाम, क्षेत्रीय नाम तथा उच्चारण एवं वर्तनी के अंतर के कारण उसे अनेक अलग-अलग जातियों के रूप में दर्ज न कर दिया जाए।

समस्या: एक जाति-अनेक नाम
भारत की सामाजिक संरचना अत्यंत विविध है। एक ही जाति अथवा समुदाय को अलग-अलग राज्यों, क्षेत्रों और भाषाओं में अलग-अलग नामों, उपनामों, परंपरागत व्यवसाय-सुचक नामों तथा वर्तनी से जाना जा सकता है। ज्ञापन में कहा गया है केन्द्र एवं राज्य सरकारों की आधिकारिक सूचियों तथा अन्य प्रमाणित अभिलेखों के आधार पर प्रत्येक राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेश के लिए वैज्ञानिक कास्ट मास्टर लिस्ट तैयार की जाए।
किसी भी दो नामों को केवल समानता के अधार पर स्वत: एक जाति न मानी जाए। उनका एकीकरण आधिकारिक दस्तावेजों, ऐतिहासिक एवं मानव शास्त्रीय प्रमाणों एवं विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद ही किया जाए।
जाति जनगणना की अंतिम पद्धति तय करने से पहले एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित की जाए। इसके अलावा ज्ञापन में कई विषयों पर राष्ट्रपति का ध्यान आकर्षित किया गया है।

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