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छत्तीसगढ़

शराब घोटाला…भूपेश के बेटे चैतन्य को हाईकोर्ट से मिली जमानत:ED-EOW की गिरफ्तारी को दी थी चुनौती, 5 महीनों से जेल में हैं बंद

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बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। इस मामले में उनकी जमानत याचिका पर बहस पूरी हो चुकी थी। हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। कोर्ट ने आज शुक्रवार को चैतन्य बघेल की जमानत को लेकर आदेश जारी कर दिया है।

शराब घोटाला केस में गिरफ्तार चैतन्य बघेल 18 जुलाई से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। यह राहत उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) और छत्तीसगढ़ एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB/EOW) की ओर से दर्ज केसों में मिली है। ED ने चैतन्य को पिछले साल जुलाई में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया था, जबकि भ्रष्टाचार के मामले में सितंबर में ACB ने उन्हें तब गिरफ्तार किया जब वे पहले से ही जेल में थे।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। ED का आरोप है कि चैतन्य बघेल इस पूरे शराब सिंडिकेट के संरक्षक थे और उन्होंने करीब 1,000 करोड़ रुपए का लेन-देन व्यक्तिगत रूप से संभाला।

वहीं, ACB का दावा है कि चैतन्य बघेल को हिस्से के तौर पर 200 से 250 करोड़ रुपए मिले और इस पूरे घोटाले की कुल रकम 3,200 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है।

चैतन्य बघेल तक कैसे पहुंची ED ?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के वकील सौरभ पाण्डेय ने बताया था कि शराब घोटाले का जो इन्वेस्टिगेशन चल रहा था उसमें एविडेंस मिले हैं, जिसमें चैतन्य बघेल ने बहुत सारे पैसे को लेयरिंग की है। 1000 करोड़ का लेनदेन किया है। पप्पू बंसल ने अपने बयान में खुलासा किया है।

शराब के घोटालों के पैसों को चैनलाइज्ड करके चैतन्य बघेल तक पहुंचाया जाता था। लिकर स्कैम का पैसा अनवर ढेबर के जरिए दीपेंद्र चावड़ा फिर वह पैसा केके श्रीवास्तव और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल औ उसके बाद चैतन्य बघेल के पास यह पैसा पहुंचता था।

सौरभ पाण्डेय ने बताया था कि शराब घोटाले में जिन लोगों का इन्वॉल्वमेंट है उन लोगों के आपस में कनेक्शन है। अनवर ढेबर से मोबाइल चैट और रिकॉर्डिंग मिली है। चैतन्य बघेल तक पैसा पहुंचाया गया है।

पूर्व सीएम के बेटे इसलिए हुई गिरफ्तारी- चैतन्य के वकील

बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी ने बताया था कि पप्पू बंसल के बयान को आधार मानते हुए चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी की गई है जो सही नहीं है। पप्पू बंसल के खिलाफ नॉन बेलेबल वारंट है और वह बाहर घूम रहे हैं। किसके दबाव में उन्होंने इस तरह का बयान दिया है यह आप समझ सकते हैं।

रिजवी ने कहा था कि 2022 से शराब घोटाले मामले में जांच चल रही है, और आज चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी तक एक भी समन चैतन्य बघेल को नहीं दिया गया है। मार्च में जब उनके घर में रेड की गई थी तब उनके सभी डिजिटल डिवाइस जब्त कर लिए थे। जो डॉक्यूमेंट एजेंसी ने मांगी थी, उन्हें सभी डॉक्यूमेंट को चैतन्य के जरिए दिया गया है।

वकील ने कहा था कि ED की जांच में चैतन्य बघेल ने लगातार सपोर्ट किया है, जांच में भी शामिल हुए हैं लेकिन एक बार भी उनका बयान नहीं लिया गया। सीधे उनकी अरेस्टिंग की गई है। कानून को ताक पर रखकर चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया गया है, उनका अपराध सिर्फ यही है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे हैं।

क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला ?

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज है।

ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।

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छत्तीसगढ़

बिलासपुर के अरविंद शुक्ला असम लोकसभा-उपचुनाव के पर्यवेक्षक बने:भूपेश के असम प्रभारी बनने के बाद AICC ने दी यह जिम्मेदारी, करीबी को दिया मौका

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बिलासपुर, एजेंसी। कांग्रेस संगठन में बिलासपुर के पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अरविंद शुक्ला को AICC की ओर से बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। संगठन ने उन्हें असम लोकसभा उपचुनाव के लिए पर्यवेक्षक बनाया है। 18 सितंबर को जारी नियुक्ति में शुक्ला समेत नेताओं को असम प्रदेश कांग्रेस के साथ समन्वय और चुनावी संगठन से जुड़े काम की जिम्मेदारी दी गई है।

पूर्व CM के करीबी माने जाने वाले अरविंद शुक्ला की नियुक्ति इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल को हाल ही में असम का प्रभारी बनाया गया है। ऐसे में बघेल के प्रभाव वाले संगठनात्मक नेटवर्क से जुड़े बिलासपुर के नेता को उसी राज्य के उपचुनाव की जिम्मेदारी मिलना कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में चर्चा का विषय है।

बिलासपुर से पंजाब और अब असम तक बढ़ी भूमिका

अरविंद शुक्ला की संगठनात्मक सक्रियता पहले भी बिलासपुर से बाहर दिखाई दे चुकी है। जब भूपेश बघेल को पंजाब का प्रभारी बनाया गया था, तब भी उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई थी। अब असम की जिम्मेदारी मिलने से उनका राजनीतिक दायरा एक बार फिर प्रदेश से बाहर बढ़ा है।

कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान के बीच नियुक्ति के राजनीतिक मायने

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में पिछले कुछ वर्षों से अलग-अलग नेताओं के प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ को लेकर खींचतान सार्वजनिक चर्चा का विषय रही है। ऐसे माहौल में किसी नेता को प्रदेश से बाहर लगातार संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलना उसके संगठन के भीतर सक्रिय नेटवर्क और नेतृत्व के भरोसे के संकेत के तौर पर देखा जाता है।

शुक्ला को पहले पंजाब और अब असम में जिम्मेदारी मिलना भी इसी संदर्भ में चर्चा में है। खास तौर पर बघेल के असम प्रभारी बनने के बाद शुक्ला की नियुक्ति ने बिलासपुर कांग्रेस की स्थानीय गुटीय राजनीति को भी चर्चा में ला दिया है।

बघेल-अटल के करीबी माने जाते हैं शुक्ला

शुक्ला को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव के करीबी नेताओं में माना जाता है। ऐसे में असम की जिम्मेदारी को बिलासपुर की कांग्रेस राजनीति के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एक तरफ कांग्रेस में संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारियों पर जोर है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में अलग-अलग नेताओं के प्रभाव क्षेत्रों को लेकर राजनीतिक समीकरण भी बनते-बिगड़ते रहे हैं। ऐसे में शुक्ला की नई जिम्मेदारी आने वाले समय में बिलासपुर कांग्रेस के संगठनात्मक समीकरणों पर भी असर डाल सकती है।

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छत्तीसगढ़

16-साल पहले मर चुके शख्स के नाम पर GST फ्रॉड:रू.142 करोड़ का कारोबार दिखाया, रू.24 करोड़ ITC ली, अमन अग्रवाल के खिलाफ FIR

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रायपुर, एजेंसी। रायपुर में GST का ऐसा फर्जीवाड़ा हुआ कि, 16 साल पहले जिस व्यक्ति की मौत हो चुकी थी, उसके नाम पर किरायानामा बनाकर कंपनी का कारोबार दिखाया गया। इसी कंपनी ने कागजों में अलग-अलग फर्मों से 141.74 करोड़ रुपए का कारोबार दिखाया। इसके आधार पर 23.43 करोड़ रुपए की इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) ली।

GST विभाग की जांच में कंपनी से जुड़े दस्तावेजों और बिलों की जांच की गई। कई फर्मों का सत्यापन कराया गया तो वे फर्जी या अस्तित्वहीन मिलीं। कुछ लोगों ने कंपनी से किसी तरह का कारोबार करने और बैंक खाते में लेन-देन से भी इनकार कर दिया। विभाग की शिकायत पर पुलिस ने अगस्त्य इंटरप्राइजेस के संचालक अमन अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

रायपुर में मृत व्यक्ति को जिंदा बताकर उसके नाम पर फर्जीवाड़ा हुआ है।

रायपुर में मृत व्यक्ति को जिंदा बताकर उसके नाम पर फर्जीवाड़ा हुआ है।

मरे व्यक्ति के नाम पर बनाया किरायानामा

पुलिस के मुताबिक, अमन अग्रवाल लाभांडी के सिग्नेचर होम में रहते हैं और अगस्त्य इंटरप्राइजेस के संचालक हैं। GST विभाग की जांच में कंपनी ने अलग-अलग फर्मों से सामान खरीदने के बिल दिखाए थे। इन्हीं बिलों के आधार पर ITC का दावा किया गया।

जांच के दौरान दस्तावेजों में कई गड़बड़ियां मिलीं। इनमें सबसे खास मामला किरायानामे का है। विभाग की जांच में सामने आया कि जिस व्यक्ति के नाम पर किरायानामा बनाया गया था, उसकी करीब 16 साल पहले मौत हो चुकी थी। यानी जिस व्यक्ति को कागजों में जगह किराए पर देने वाला बताया गया, वह उस समय जीवित ही नहीं था।

जांच में कई फर्मों का पता ही नहीं चला

GST विभाग ने जिन कंपनियों के बिलों की जांच की उनका भौतिक सत्यापन भी कराया। अधिकारियों ने संबंधित पते पर जाकर यह पता लगाने की कोशिश की कि वहां वास्तव में कंपनी चल रही है या नहीं।

जांच के दौरान कई फर्में फर्जी या अस्तित्वहीन मिलीं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि उन्होंने अगस्त्य इंटरप्राइजेस के साथ कोई कारोबार नहीं किया है। बैंक खातों में हुए लेन-देन को लेकर भी कुछ लोगों ने इनकार किया।

पुलिस ने दर्ज किया केस

GST अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने अगस्त्य इंटरप्राइजेस के संचालक अमन अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस अब मामले से जुड़े दस्तावेज, बिल, बैंक खातों और संबंधित फर्मों की जानकारी की जांच कर रही है।

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छत्तीसगढ़

जांजगीर-चांपा में किसानों को मिली आधुनिक खेती की जानकारी:बैरिस्टर छेदीलाल स्मृति समारोह में कृषि वैज्ञानिकों ने दिए फसल विविधीकरण के टिप्स

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जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा में बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल स्मृति समारोह के दूसरे दिन कृषि विज्ञान केंद्र जर्वे में कृषक संगोष्ठी हुई। इसमें जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप शामिल हुए। जिलेभर से आए किसानों ने संगोष्ठी में उत्साह से भाग लिया।

संगोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों, दलहन-तिलहन फसलों, फसल चक्र और खेती की नई तकनीकों की जानकारी दी। साथ ही, सरकारी योजनाओं और नीतियों के बारे में भी बताया।

किसानों को फसलों को बीमारियों से बचाने, उत्पादन बढ़ाने और मिट्टी की सेहत बनाए रखने के उपाय भी बताए गए। उन्हें जैविक खेती से लेकर मछली पालन तक की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में सब्जी उत्पादन और कुक्कुट पालन जैसी खेती से जुड़ी गतिविधियों की भी जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों ने फसल विविधीकरण, जल संरक्षण, अच्छे बीज और उन्नत कृषि तकनीकों पर किसानों का मार्गदर्शन किया।

इस दौरान किसानों की समस्याएं और सुझाव भी सुने गए। किसानों को खेतों का दौरा भी कराया गया, जहां उन्होंने आधुनिक खेती के तरीकों को सीधे देखा।

कार्यक्रम के दौरान विधायक ब्यास कश्यप और अन्य जनप्रतिनिधियों ने अलग-अलग स्टॉलों और कृषि यंत्र प्रदर्शनी देखी। विधायक ने कहा कि जांजगीर-चांपा खेती के लिए एक समृद्ध जिला है।

उन्होंने बताया कि समतल भूमि, नहरों और पर्याप्त पानी के कारण यहां खेती की बहुत संभावनाएं हैं। उन्होंने किसानों से धान के साथ दूसरी फसलें भी उगाने और फसल चक्र अपनाने की अपील की।

विधायक ने गेहूं, चना सहित अन्य फसलों की खेती को बढ़ावा देने और खेतों की मेड़ व खाली पड़ी जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में जनपद सदस्य टंकेश्वर यादव, प्रगतिशील किसान दुष्यंत सिंह, जर्वे सरपंच कोमल कश्यप, शाकम्भरी बोर्ड के सदस्य बसंत पटेल, सनत कुमार पटेल, शिवकुमार तिवारी, संदीप तिवारी मौजूद रहे। इनके अलावा, कृषि और संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में किसान भी उपस्थित थे।

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