रायपुर, एजेंसी। दक्षिण छत्तीसगढ़ में अगले 24 घंटे तक कुछ जगहों पर भारी बारिश का अलर्ट है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज (31 जुलाई) से पूरे प्रदेश में बारिश की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगेगी। पिछले 24 घंटे में विदर्भ और मध्यप्रदेश में बने डीप डिप्रेशन के असर से मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ में झमाझम बारिश हुई।
लगातार बारिश से रायगढ़ और सारंगढ़ जिलों के बीच बहने वाली महानदी का जलस्तर डेंजर जोन में पहुंच गया है। इससे पुसौर विकासखंड के सुरजगढ़, सिंघपुरी, चंघोरी, बाराडोली, परसापाली और खफरापाली गांव प्रभावित हुए हैं। गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।
गुरुवार को गरियाबंद में उदंती नदी पर बन रहा करीब 9 करोड़ रुपए का निर्माणाधीन पुल ढह गया। रायपुर में खारून नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बस्तर में NH-130 पर पुलिया डैमेज होने से कई गांवों का संपर्क टूट गया।
वहीं दंतेवाड़ा के अरनपुर-जगरगुंडा मार्ग पर लैंडस्लाइड के खतरे से आवाजाही बंद है, जबकि कांकेर में 15.5 करोड़ रुपए की नहर पहली ही बारिश में ढह गई।
रायगढ़ और सारंगढ़ के बीच बहने वाली महानदी का जलस्तर डेंजर जोन में पहुंचा।
गरियाबंद की उदंती नदी पर ओडिशा सरकार 9 करोड़ रुपए की लागत से इस पुल का निर्माण करा रही थी।
दंतेवाड़ा के अरनपुर-जगरगुंडा मार्ग पर लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ गया है।
रायपुर में खारून नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा।
कांकेर में 15 करोड़ में बनी नहर पहली बारिश नहीं झेल पाई।
दो दिन बाद मिला ढेकी नदी में बहे बच्चे का शव
सूरजपुर जिले में चपदा गांव में ढेकी नदी में बहे 10 वर्षीय बालक का शव दो दिन बाद गुरुवार शाम को बरामद कर लिया गया। DDRF और पुलिस की संयुक्त टीम ने घटना स्थल से करीब 20-25 किमी दूर कड़ी मशक्कत के बाद शव निकाला।
आरंग के गांव में घुसा बाढ़ का पानी
आरंग क्षेत्र के तटीय गांव निसदा के निचले हिस्सों में जलभराव के बीच एक ही परिवार के 6 सदस्य अपने घर में चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिर गए। SDRF की टीम ने मोटरबोट के जरिए जान जोखिम में डालकर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।
गरियाबंद में बाढ़ से टापू बना गौठान
बुधवार रात गरियाबंद का सुहागपुर गौठान बाढ़ के पानी से घिर गया। यहां 5, 3 और 2 साल के तीन मासूम बच्चों समेत एक परिवार करीब 4 घंटे तक फंसा रहा। नगर सेना ने देर रात रेस्क्यू कर सभी को सुरक्षित निकाला गया।
4 दिन बाद मिला उप सरपंच और पत्नी का शव
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के लाट नाले में बहे दंपती का शव चार दिन बाद मिला। 26 जुलाई को कार से उफनते नाले को पार करने के दौरान दोनों तेज बहाव में बह गए थे। बुधवार को घटनास्थल से करीब 3 किमी दूर चिखली गांव के पास उनकी कार मिली, जिसके अंदर दोनों के शव बरामद हुए।
बिलासपुर रहा सबसे गर्म
प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस बिलासपुर में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.4 डिग्री सेल्सियस पेंड्रा रोड में रिकॉर्ड हुआ।
अब तक 12% कम बरसा पानी
छत्तीसगढ़ में मानसून का प्रदर्शन इस बार जिलों के हिसाब से काफी असमान रहा है। 1 जून से 29 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य में औसत 477.8 मिमी (18.8 इंच) बारिश हुई है। जबकि सामान्य बारिश 544.6 मिमी (21.4 इंच) होनी चाहिए थी।
यानी पूरे प्रदेश में 12% की कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मानकों के अनुसार यह ‘सामान्य’ श्रेणी में आता है। भले ही राज्य का औसत सामान्य दिख रहा है, लेकिन जिले स्तर पर तस्वीर पूरी तरह अलग है। कहीं सामान्य से 76% अधिक बारिश हुई है तो कहीं 50% तक की कमी दर्ज की गई है।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ सबसे अधिक बारिश वाला जिला
इस सीजन में अब तक सारंगढ़-बिलाईगढ़ सबसे अधिक बारिश वाला जिला रहा। यहां 769.1 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 76% अधिक है। यह प्रदेश का इकलौता जिला है, जहां बहुत अधिक बारिश रिकॉर्ड हुई।
एक-तिहाई जिले अभी भी सामान्य बारिश से काफी पीछे
33 जिलों के आंकड़ों पर नजर डाले तो 1 जिले में सामान्य से 60 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त वर्षा दर्ज की गई। 5 जिलों में सामान्य से 20 से 59 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। 16 जिलों में वर्षा सामान्य श्रेणी में रही।
11 जिलों में सामान्य से 20 से 59 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। किसी भी जिले में सामान्य से 60 प्रतिशत या उससे अधिक वर्षा की कमी नहीं रही।
रायपुर संभाग ने संभाला राज्य का औसत
हाल के दिनों में रायपुर, महासमुंद, गरियाबंद, जांजगीर, बालौदा बाजार और आसपास के जिलों में हुई लगातार भारी बारिश ने राज्य की औसत बारिश को बेहतर बनाया है। अगर मध्य छत्तीसगढ़ में तेज बारिश नहीं होती, तो पूरे प्रदेश की मौसमी वर्षा सामान्य से कहीं अधिक कम रहती।
आगे क्या?
मौसम विभाग के अनुसार, हाल में सक्रिय रहे डीप डिप्रेशन के कारण मध्य छत्तीसगढ़ में भारी बारिश हुई, लेकिन इसके पश्चिम की ओर बढ़ने के साथ बारिश की तीव्रता कम होने की संभावना है।
ऐसे में जिन जिलों में अब भी 30 से 50 प्रतिशत तक वर्षा की कमी है, वहां आने वाले अगस्त के मानसून पर नजर रहेगी। अगले कुछ सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो इन जिलों में वर्षा घाटा और बढ़ सकता है।
बिलासपुर/कोरबा। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) बिलासपुर जोन ने यात्रियों की सुविधा को देखते हुए हसदेव एक्सप्रेस की सेवाओं का विलय कर इसे प्रतिदिन संचालित करने का निर्णय लिया है। अब ट्रेन संख्या 18249/18250 कोरबा-रायपुर-कोरबा हसदेव एक्सप्रेस 1 अगस्त से रोजाना चलेगी
अब तक 18249/18250 रायपुर-कोरबा-रायपुर हसदेव एक्सप्रेस सप्ताह में चार दिन और 18251/18252 रायपुर-कोरबा-रायपुर हसदेव एक्सप्रेस सप्ताह में तीन दिन संचालित होती थी। रेलवे ने दोनों सेवाओं का विलय कर एक ही ट्रेन नंबर के साथ इसे दैनिक कर दिया है।
यात्रियों को मिलेगी बड़ी सुविधा
रेलवे के इस निर्णय से यात्रियों को अब अलग-अलग ट्रेन नंबर और उनके संचालन के दिन याद रखने की आवश्यकता नहीं होगी। 18249/18250 हसदेव एक्सप्रेस के प्रतिदिन चलने से यात्रा की योजना बनाना पहले की तुलना में अधिक आसान और सुविधाजनक होगा।
15 आधुनिक एलएचबी कोच के साथ चलेगी ट्रेन
रेलवे के अनुसार, दैनिक संचालन के दौरान हसदेव एक्सप्रेस में कुल 15 आधुनिक एलएचबी (LHB) कोच लगाए जाएंगे, जिससे यात्रियों को अधिक सुरक्षित और आरामदायक सफर की सुविधा मिलेगी।
दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। दुर्ग के बहुचर्चित अफीम खेती मामले में जेवरा सिरसा पुलिस ने 143 दिन की जांच पूरी करने के बाद गुरुवार को कोर्ट में 939 पन्नों की चार्जशीट पेश की। इस मामले में गिरफ्तार 8 आरोपियों को आरोपी बनाया गया है।
वहीं दो आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। पुलिस ने इस केस में 79 लोगों को गवाह बनाया है। इनमें पुलिस, नारकोटिक्स, एफएसएल, राजस्व विभाग और अन्य सरकारी विभागों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं।
पुलिस ने जिन 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, उनमें विकास विश्नोई, विनायक ताम्रकार, मनीष ठाकुर, छोटूराम, रणछोड़ राम, सुनील देवासी, मदरूपा राम और सुखाराम के नाम शामिल हैं। वहीं, अचला राम और श्रवण विश्नोई अब भी फरार हैं।
दोनों पर 3-3 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस ने निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच पूरी कर कोर्ट में चालान पेश कर दिया है। अब मामले की सुनवाई कोर्ट में आगे बढ़ेगी। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेज और सबूत मामले में अहम भूमिका निभाएंगे।
दुर्ग के समोदा में मिली थी अफीम की खेती।
चार्जशीट में 79 गवाह शामिल
पुलिस ने चार्जशीट में कुल 79 गवाहों को शामिल किया है। इनमें नारकोटिक्स विभाग के एक टीआई और एक एसआई, एफएसएल की वैज्ञानिक, तहसीलदार, तीन एएसआई, दो एसआई, तीन प्रधान आरक्षक, दो महिला आरक्षक और 14 आरक्षक शामिल हैं।
इसके अलावा जिस जमीन पर अफीम की खेती की जा रही थी, उससे जुड़े आवेदन और शपथ पत्र भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनाए गए हैं। रायपुर निवासी प्रीतिबाला और मधुमति ताम्रकार से संबंधित दस्तावेज भी चार्जशीट में शामिल किए गए हैं।
6 मार्च को हुआ था मामले का खुलासा
मामले का खुलासा 6 मार्च 2026 को हुआ, जब पुलिस को ग्राम समोदा में अवैध अफीम की खेती होने की सूचना मिली। इसके बाद सीएसपी कार्यालय के नेतृत्व में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), एफएसएल, राजस्व और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई।
अगले दिन टीम खेत पर पहुंची, जहां एफएसएल की जांच में पुष्टि हुई कि वहां अफीम की खेती की गई थी।
मक्के की फसल के बीच उगाई गई थी अफीम
जांच में पता चला कि करीब 5.609 एकड़ जमीन पर मक्के की फसल के बीच अफीम के पौधे लगाए गए थे, ताकि किसी को संदेह न हो। मौके से विकास विश्नोई को हिरासत में लिया गया। उसकी पूछताछ के आधार पर पुलिस ने पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।
एनसीबी की गाइडलाइन के अनुसार खेत का आकलन किया गया, जिसमें 14 लाख 30 हजार 100 अफीम के पौधे मिले। इनका अनुमानित वजन करीब 62 हजार किलोग्राम आंका गया। वहीं खेत के पास से 66.33 किलोग्राम अफीम डोडा भी बरामद किया गया।
पूछताछ में सामने आया पूरा नेटवर्क
पूछताछ के दौरान विकास विश्नोई ने विनायक ताम्रकार, मनीष ठाकुर, श्रवण विश्नोई और अचला राम के साथ मिलकर अफीम की खेती करने की बात स्वीकार की।
इसके बाद पुलिस ने विनायक ताम्रकार और मनीष ठाकुर को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान अफीम, अफीम के बीज, खेती में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, हिसाब-किताब के रजिस्टर, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, ट्रैक्टर, जेसीबी, हार्वेस्टर, मोटरसाइकिल, सिंचाई पंप, स्प्रिंकलर और सीसीटीवी कैमरे समेत कई सामान जब्त किए गए।
साथ ही राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर अफीम डोडा के कारोबार से जुड़े पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अब मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस कोर्ट में अपने गवाह और सबूत पेश करेगी।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष (PCC) के पद को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। दिल्ली दौरे से वरिष्ठ नेताओं के लौटने के बाद सोशल मीडिया पर प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब संगठन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ के पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेस नेता अरुण मालाकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ नेता उमेश पटेल के समर्थन में एक पोस्ट साझा की थी।
पोस्ट में उन्होंने वरिष्ठ नेता उमेश पटेल के नेतृत्व का समर्थन करते हुए उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की मांग की थी। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की।
कांग्रेस नेता अरुण मालाकार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
पार्टी ने पोस्ट को माना अनुशासनहीनता
प्रदेश कांग्रेस संगठन ने सोशल मीडिया पर की गई इस सार्वजनिक पोस्ट को पार्टी अनुशासन के विपरीत माना है। संगठन का कहना है कि इस तरह की पोस्ट पार्टी की आंतरिक प्रक्रिया का उल्लंघन करती है और इससे संगठन की छवि प्रभावित हो सकती है।
इसी के चलते प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के निर्देश पर प्रभारी महामंत्री ने पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेस नेता अरुण मालाकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
कांग्रेस नेता अरुण मालाकार ने अपने फेसबुक अकाउंट पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ नेता उमेश पटेल के समर्थन में एक पोस्ट साझा की थी।
तीन दिन में मांगा जवाब
नोटिस में अरुण मालाकार से तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर जवाब नहीं मिलने या जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर पार्टी संविधान के प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
नोटिस जारी करके तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है।
नए PCC अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर चर्चा तेज
प्रदेश कांग्रेस में नए PCC अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर पिछले कुछ समय से चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच कई नेता और कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर अलग-अलग नेताओं के समर्थन में पोस्ट कर रहे हैं।
अरुण मालाकार को नोटिस जारी होने के बाद इसे संगठन की ओर से पार्टी अनुशासन बनाए रखने की कार्रवाई माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस तरह के मामलों पर कांग्रेस संगठन और सख्त रुख अपना सकता है।