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कोरबा

भुवनेश्वर एवं उत्तराखंड से आए मीडिया प्रतिनिधियों ने किया एसईसीएल का दौरा

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खनन कार्यों, ऊर्जा सुरक्षा एवं सतत विकास पहलों की ली प्रत्यक्ष जानकारी

बिलासपुर/कोरबा। भुवनेश्वर एवं उत्तराखंड से आए पत्रकारों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के एक दल ने साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) का दौरा कर कंपनी के खनन कार्यों, देश की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान तथा सतत एवं जिम्मेदार खनन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की प्रत्यक्ष जानकारी ली।

यह मीडिया दौरा भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), रायपुर, भुवनेश्वर एवं उत्तराखंड के सहयोग से आयोजित किया गया।

एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों को एसईसीएल के परिचालन एवं देश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में कंपनी की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान पर्यावरण
संरक्षण, खान सुरक्षा, तकनीकी नवाचार, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर), समुदाय एवं कर्मचारी कल्याण, विविधीकरण तथा महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

संवाद कार्यक्रम में बिरंची दास, निदेशक (मानव संसाधन); रमेश चंद्र महापात्र, निदेशक (तकनीकी–संचालन); तथा नृपेंद्र नाथ, निदेशक (तकनीकी– योजना एवं परियोजना), अति. प्र., एसईसीएल सहित कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

एसईसीएल प्रबंधन ने दोहराया कि कंपनी देश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रतिबद्ध है तथा इसके साथ ही समुदायों के कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी का भी पूरी गंभीरता से निर्वहन कर रही है। मीडिया प्रतिनिधियों को सुरक्षित, तकनीक-सक्षम एवं सतत खनन की दिशा में एसईसीएल द्वारा किए जा रहे प्रयासों से भी अवगत कराया गया।

इससे पूर्व मीडिया दल ने गेवरा क्षेत्र का मैदानी दौरा किया। एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदान के रूप में गेवरा में दल ने खनन कार्यों को प्रत्यक्ष देखा और कोयला उत्खनन एवं उससे जुड़ी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। दल ने खनन क्षेत्र में पर्यावरण एवं सतत विकास से जुड़ी पहलों, जिसमें मियावाकी पौधरोपण पहल भी शामिल है, का अवलोकन किया।

दौरे के समापन पर प्रश्नोत्तर एवं अनुभव साझा करने का सत्र आयोजित किया गया, जिसमें मीडिया प्रतिनिधियों ने एसईसीएल अधिकारियों के साथ खनन, ऊर्जा सुरक्षा, सुरक्षा, तकनीक, पर्यावरण एवं सामुदायिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद किया।

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कोरबा

पाली के राधा-कृष्ण धाम में 19 को धूमधाम से मनाई जाएगी राधा अष्टमी

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कोरबा/पाली। 19 सितम्बर को राधा अष्टमी है। इस पावन अवसर को देशभर में धूमधाम से मनाया जाएगा। इसी कड़ी में भव्य रूप से नवनिर्मित पाली के राधा-कृष्ण धाम मंगल भवन के पास पाली में भी धूमधाम से राधा अष्टमी को मनाई जाएगी। आयोजकों ने बताया कि सुबह 11.00 बजे अभिषेक पूजन प्रारंभ होगा और दोपहर 2.00 बजे से भजन-कीर्तन प्रारंभ होगा, जो अनवरत प्रभु इच्छा तक चलेगा। इसके बाद भोग-प्रसाद का वितरण प्रारंभ होगा और मंदिर के कपाट बंद तक भोग वितरण चलता रहेगा।
क्षेत्र के श्रद्धालुजन सादर आमंत्रित हैं
आयोजकों ने बताया कि राधा अष्टमी के पावन अवसर को राधा-कृष्ण धाम में पहली बार धूमधाम से मनाया जाएगा और राधा रानी के जन्मोत्सव को खास रूप से मनाया जाएगा। प्रात: 11.00 बजे से मंदिर का कपाट बंद होने तक कई आध्यात्मिक कार्यक्रम संपन्न होंगे और माता राधा रानी के जन्मोत्सव के भव्य आयोजन में सहभागिता और पुण्यलाभ लेने क्षेत्र के श्रद्धालु सादर आमंत्रित हैं।

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सेवा संकल्प अभियान: पुश्तैनी आशियाने को मिली कानूनी पहचान, स्वामित्व योजना से देवनाथ का बढ़ा आत्मविश्वास

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कोरबा, 17 सितंबर 2026। किसी व्यक्ति के लिए उसका घर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि उसकी मेहनत, यादों और परिवार की पहचान से जुड़ा होता है। लेकिन जब वर्षों से जिस जमीन पर परिवार रह रहा हो, उसके स्वामित्व का कोई आधिकारिक दस्तावेज न हो, तो मन में असुरक्षा बनी रहती है। कोरबा जिले के कटघोरा तहसील अंतर्गत ग्राम राल् निवासी देवनाथ भी लंबे समय तक ऐसी ही स्थिति से गुजर रहे थे।

देवनाथ का मकान आबादी भूमि पर स्थित था। परिवार लंबे समय से वहां निवास कर रहा था, लेकिन उनके पास संपत्ति के स्वामित्व को प्रमाणित करने वाला आधिकारिक अभिलेख नहीं था। जमीन की सीमाओं और स्वामित्व को लेकर स्पष्ट दस्तावेज नहीं होने के कारण उन्हें भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की चिंता बनी रहती थी।
ड्रोन सर्वे से हुआ सटीक सीमांकन
ग्रामीण आबादी भूमि से जुड़े ऐसे मामलों के समाधान के लिए स्वामित्व योजना के तहत आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया। ग्राम राल् में ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से आबादी भूमि का सर्वे और मैपिंग की गई। इससे मकानों और भूमि की वास्तविक स्थिति का सटीक निर्धारण करने में मदद मिली।
सर्वेक्षण और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद देवनाथ को उनकी संपत्ति से संबंधित भूमि अधिकार अभिलेख (प्रॉपर्टी कार्ड) प्राप्त हुआ। यह दस्तावेज उनके लिए केवल एक कागज नहीं, बल्कि वर्षों से जिस आशियाने में उनका परिवार रह रहा था, उसकी आधिकारिक पहचान और अधिकार का प्रमाण बन गया।
अब अपने घर को लेकर मन में नहीं है असुरक्षा
अधिकार अभिलेख मिलने के बाद देवनाथ के जीवन में सबसे बड़ा बदलाव उनके मन में आया आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना है। अब उनके पास अपनी संपत्ति से संबंधित आधिकारिक अभिलेख है, जिससे भूमि की पहचान और सीमाओं को लेकर स्पष्टता मिली है।

देवनाथ कहते हैं…

‘‘मेरा नाम देवनाथ है। मैं ग्राम राल, तहसील कटघोरा का निवासी हूं। मेरा मकान आबादी भूमि पर बना है। मुझे स्वामित्व योजना के माध्यम से इस भूमि का स्वामित्व मिला है और अधिकार अभिलेख प्राप्त हुआ है। इसके लिए मैं छत्तीसगढ़ सरकार का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।‘‘

स्वामित्व से सम्मान और सुरक्षा का एहसास

स्वामित्व योजना के माध्यम से मिला भूमि अधिकार अभिलेख देवनाथ के लिए वर्षों की अनिश्चितता को दूर करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हुआ है। संपत्ति की पहचान और अधिकार अभिलेख मिलने से उन्हें अपने घर और भूमि को लेकर अधिक सुरक्षा और आत्मविश्वास का अनुभव हो रहा है।
आज देवनाथ अपने परिवार के साथ उसी आशियाने में अधिक विश्वास और सुकून के साथ जीवन बिता रहे हैं। स्वामित्व योजना ने उनके पुश्तैनी आशियाने को केवल रहने की जगह से आगे बढ़ाकर अधिकार और पहचान से जोड़ दिया है।

योजना का प्रभाव

स्वामित्व योजना के माध्यम से आबादी भूमि का सर्वेक्षण, सीमांकन और अधिकार अभिलेख प्रदान किए जाने से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति की स्पष्ट पहचान प्राप्त हो रही है। इससे संपत्ति संबंधी अभिलेखों की उपलब्धता बढ़ने के साथ ग्रामीण परिवारों में सुरक्षा और आत्मविश्वास की भावना भी मजबूत हो रही है।

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कोरबा

सेवा संकल्प अभियान:बड़े निवेश की चिंता हुई दूर, सरकारी योजना के सहारे सूरज कुमार ने खड़ा किया सफल नमकीन व्यवसाय

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मेहनत को मिला अवसर, सफल उद्यमी बने सूरज कुमार, परिवार के साथ दूसरों को भी दे रहे रोजगार
कोरबा 17 सितम्बर 2026। स्वरोजगार के जरिए अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करने की चाहत बहुत पहले से थी, लेकिन व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक बड़ी पूंजी एक साथ जुटा पाना सूरज कुमार गुप्ता के लिए आसान नहीं था। हुनर और मेहनत का भरोसा था, जरूरत थी तो सिर्फ ऐसे अवसर की, जो उनके सपने को आकार दे सके। कोरबा शहर के चिमनी भट्ठा निवासी सूरज कुमार को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की जानकारी प्रशासन द्वारा आयोजित जागरूकता शिविर के माध्यम से मिली। योजना की जानकारी ने उन्हें अपने स्तर पर कुछ करने के लिए प्रेरित किया और उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र से आवेदन की प्रक्रिया पूरी की।

योजना के माध्यम से उन्हें मिक्चर एवं नमकीन निर्माण का व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ। ग्रामीण बैंक से 30 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसमें 35 प्रतिशत सब्सिडी के रूप में 10 लाख रुपये से अधिक का अनुदान मिला। आर्थिक सहयोग मिलने के बाद सूरज कुमार ने आधुनिक मशीनें खरीदीं और मिक्चर सहित विभिन्न प्रकार के नमकीन बनाने का काम शुरू किया। इससे उनके व्यवसाय को बेहतर ढंग से संचालित करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिली। शेष ऋण राशि का भुगतान वे बैंक को आसान किश्तों और किफायती ब्याज दर के माध्यम से कर रहे हैं।
सूरज कुमार अपने अनुभव साझा करते हुए बताते हैं, “मेरी इच्छा थी कि अपना कोई व्यवसाय शुरू करूं और खुद रोजगार करने के साथ परिवार के लिए भी अच्छी आमदनी का जरिया बनाऊं। लेकिन शुरुआत के लिए बड़ी राशि की जरूरत थी। मेरे लिए इतनी रकम जुटा पाना कठिन था। जब मुझे पीएमएफएमई योजना के बारे में जानकारी मिली तो उम्मीद जगी। आवेदन के बाद ऋण और अनुदान की सुविधा मिली, जिससे मैं अपना काम शुरू कर सका।”
उन्होंने बताया कि शुरुआत में व्यवसाय को लेकर कई तरह की चुनौतियां थीं, लेकिन धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा और कारोबार आगे बढ़ता गया। आज उनके द्वारा तैयार मिक्चर एवं विभिन्न प्रकार के नमकीन आसपास के होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों में नियमित रूप से सप्लाई किए जा रहे हैं। शादी-विवाह तथा अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए भी उन्हें ऑर्डर प्राप्त होते हैं। मांग बढ़ने के साथ उत्पादन में भी वृद्धि हुई है, जिससे व्यवसाय से होने वाली आमदनी में लगातार सुधार आया है।
सूरज कुमार कहते हैं, “पहले परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी। आय का कोई निश्चित साधन भी नहीं था। कई बार परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना पड़ता था। अब व्यवसाय चलने से नियमित आमदनी हो रही है। इससे घर-परिवार की जरूरतें बेहतर तरीके से पूरी हो रही हैं और भविष्य को लेकर भी भरोसा बढ़ा है।” व्यवसाय के विस्तार का लाभ केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा। उत्पादन बढ़ने के साथ उन्होंने अन्य लोगों को भी काम का अवसर उपलब्ध कराया है। इस तरह उनका छोटा प्रयास अब रोजगार सृजन का माध्यम बन रहा है। नियमित कारोबार और बढ़ती आमदनी ने उनके सामाजिक एवं आर्थिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाया है। परिवार की जीवनशैली में सुधार के साथ वे अपने बच्चों और परिवार की आवश्यकताओं को पहले की अपेक्षा बेहतर तरीके से पूरा कर पा रहे हैं।
सूरज कुमार के लिए पीएमएफएमई योजना केवल आर्थिक सहायता पाने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर बनी। वे बताते हैं, “आज मुझे इस बात की खुशी है कि मैं अपना व्यवसाय सफलतापूर्वक चला रहा हूं और अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रहा हूं। साथ ही, मेरे व्यवसाय से दूसरे लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। सरकार की इस योजना ने मेरे सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वरोजगार और छोटे उद्यमों को प्रोत्साहन देने वाली ऐसी योजनाओं से आम लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने और आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने पीएमएफएमई योजना के प्रभावी संचालन के लिए शासन-प्रशासन के प्रति भी धन्यवाद व्यक्त किया।

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