कोरबा 24 अगस्त 2026। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा के मार्गदर्शन में 12 सितम्बर 2026 को आयोजित होने वाले नेशनल लोक अदालत के सफल क्रियान्वयन के संबंध में गठित पैनल की अध्यक्षता में फाईनेंस कंपनियों के पदाधिरियों के साथ राजीनामा योग्य प्री-लिटिगेशन प्रकरणों को आपसी सहमति से निराकरण कराये जाने के संबंध में बैठक आयोजित की गयी है, बैठक में फाइनेंस कंपनियों से संबंधित ऋण वसूली, वाहन ऋण, व्यक्तिगण ऋण, एवं अन्य वित्तीय मामलों के संबंध में विस्तारपूर्वक चर्चा की गयी। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि लोक अदालत के माध्यम से राजीनामा योग्य प्रकरणों का त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण समाधान किया जा सकता है, जिससे पक्षकरों को समय एवं धन की बचत के साथ सरल एवं सुलभ न्याय प्राप्त हो सके। न्यायाधीशगण की गठित पैनल द्वारा पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे संबंधित पक्षकारों को लोक अदालत के लाभों की जानकारी देते हुए अधिक से अधिक प्रकरणों को समझौते के आधार पर निराकृत कराने का प्रयास करें।
कोरबा 24 अगस्त 2026। आज 24 अगस्त को सुबह 8ः00 बजे से शाम 4ः30 के बीच बांगो बांध में पानी का आवक कम होने से जलस्तर में 5 सेमी. गिरावट पायी गयी। कार्यपालन अभियंता एस के भारती ने बताया कि बांध के जल भराव को नियंत्रित करने के लिए जल द्वारों की कुल ओपनिंग 2.00 मीटर को कम किया जाकर 1.50 मीटर किया गया। वर्तमान में अतिरिक्त पानी की मात्रा को 3 रेडियल गेट नं 5 से 0.40 मीटर गेट नं 6 से 0.70 मीटर एवं गेट नं 7 से 0.40 मीटर एवं पावर हाउस के माध्यम से निकाला जा रहा है। अभी बांध का जलस्तर 358.33 मीटर (92.06ः) है। पानी का इनफ्लो 7930 क्यूसेक एवं आउट फ्लो रेडियल गेट से 8755 क्यूसेक एवं पावर हाउस से 9000 क्यूसेक कुल 17755 क्यूसेक है।
लंबे समय से अवरुद्ध जलकर की वसूली के लिए मंडल ने लागू की योजना, 30 नवंबर तक मिलेगा लाभ
कोरबा, 24 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की विकसित कॉलोनियों में आबंटित संपत्तियों के बकायादारों के लिए राहत की योजना लागू की गई है। इसके तहत् बकाया जलप्रदाय शुल्क की संपूर्ण राशि एकमुश्त जमा करने पर विलंबित अवधि के सरचार्ज में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। मंडल का उद्देश्य लंबे समय से बकाया जलप्रदाय शुल्क की राशि की वसूली करना है। यह छूट आदेश जारी होने की तिथि से 30 नवंबर तक प्रभावशील रहेगी। योजना का लाभ लेने के लिए हितग्राही को बकाया जलप्रदाय शुल्क की पूरी मूल राशि एकमुश्त जमा करनी होगी। इसके बाद विलंबित अवधि के लिए लगाए गए सरचार्ज की राशि में 50 प्रतिशत की छूट का लाभ मिलेगा। मंडल ने बकायादार हितग्राहियों से योजना का लाभ उठाकर बकाया राशि जमा करने की अपील की है। इससे बकायादारों को आर्थिक राहत मिलने के साथ मंडल को लंबे समय से अवरुद्ध जलकर की राशि प्राप्त हो सकेगी। पहले भुगतान करने वालों को लाभ नहीं जिन हितग्राहियों ने सरचार्ज सहित बकाया जलप्रदाय शुल्क की राशि पहले ही जमा कर दी है, वे इस योजना के अंतर्गत छूट का लाभ लेने के पात्र नहीं होंगे। योजना केवल उन बकायादारों के लिए लागू है, जो निर्धारित अवधि में बकाया जलप्रदाय शुल्क की संपूर्ण राशि एकमुश्त जमा करेंगे। योजना का लाभ उठाएं छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल के प्रक्षेत्र-बिलासपुर के अपर आयुक्त ए.के. पटेल, द्वारा बकायादार हितग्राहियों से अपील की गई है कि वे अपने आवास से संबंधित लंबित बकाया जलकर राशि का यथाशीघ्र भुगतान कर मण्डल द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ प्राप्त करें। इस संबंध में अपर आयुक्त द्वारा मण्डल के समस्त कार्यपालन अभियंताओं एवं सहायक अभियंताओं को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र अंतर्गत बकायादार हितग्राहियों से सतत् संपर्क कर उन्हें बकाया जलकर राशि के भुगतान हेतु प्रेरित करें तथा मण्डल द्वारा प्रदत्त योजनाओं एवं उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रदान करते हुए जागरूक करें। साथ ही, बकाया राशि की वसूली की कार्यवाही में तेजी लाते हुए पात्र हितग्राहियों को निर्धारित प्रावधानों एवं योजनाओं का अधिकाधिक लाभ दिलाना सुनिश्चित किया जाए।
बालकोनगर, 24 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास की कहानी में कुछ संस्थानों का योगदान केवल उनके उत्पादन आंकड़ों से नहीं आंका जा सकता। उनका वास्तविक प्रभाव रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था, युवाओं के लिए अवसर और समाज में आए सकारात्मक बदलावों से समझा जाता है। भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ऐसी ही औद्योगिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्ष 1965 में स्थापित बालको आज छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान का प्रमुख स्तंभ है। वर्ष 2001 में वेदांता समूह के प्रबंधन में आने के बाद कंपनी ने उत्पादन क्षमता, ऊर्जा, तकनीक और अधोसंरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार किया। वर्तमान में बालको की एल्यूमिनियम स्मेल्टर क्षमता 5.95 लाख टन प्रतिवर्ष है और विस्तार परियोजना के बाद यह बढ़कर 1 मिलियन टन प्रतिवर्ष हो जाएगी। यह विस्तार केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने की परियोजना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश, रोजगार, व्यापार और स्थानीय विकास के अगले चरण की नींव है। उद्योग से बढ़ती स्थानीय अर्थव्यवस्था की ताकत
बालको का प्रभाव उसके संयंत्र परिसर तक सीमित नहीं है। कंपनी के विकास के साथ कोरबा और बालकोनगर की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है। प्रत्यक्ष रोजगार के साथ व्यवसायिक साझेदारों, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सेवाओं तथा छोटे-बड़े स्थानीय व्यवसायों के लिए अवसर बढ़े हैं। पिछले एक दशक में बालको ने छत्तीसगढ़ राज्य और केंद्र सरकार के राजस्व में लगभग 29,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। देश की औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में भी बालको की महत्वपूर्ण भूमिका है। कंपनी अपने उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत एल्यूमिनियम घरेलू बाजार में उपलब्ध कराती है। एल्यूमिनियम आधुनिक अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण धातुओं में शामिल है और परिवहन, निर्माण, ऊर्जा, रक्षा तथा अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है। बालको ने देश की वैज्ञानिक और रणनीतिक परियोजनाओं के लिए एल्यूमिनियम की आपूर्ति में भी योगदान दिया है। 1 मिलियन टन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बालको अपनी विकास यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव पर है और 1 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। 525 किलो एम्पीयर पॉटलाइन से फर्स्ट मेटल उत्पादन शुरू होना क्षमता विस्तार यात्रा का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह उपलब्धि नई तकनीक, बेहतर दक्षता और भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप संचालन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह विस्तार केवल बालको की उत्पादन क्षमता में वृद्धि नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के और विस्तार की संभावनाएं भी जुड़ी हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होने, स्थानीय व्यवसायों को गति मिलने तथा व्यवसायिक साझेदारों, लॉजिस्टिक्स, सेवा क्षेत्र और स्थानीय उद्यमों के लिए नए अवसर बनने की संभावना है। इस तरह बालको का आर्थिक प्रभाव संयंत्र से निकलकर कोरबा और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचता है। तकनीक और नवाचार से स्मार्ट उद्योग की ओर औद्योगिक प्रतिस्पर्धा के बदलते दौर में तकनीक और नवाचार की भूमिका लगातार बढ़ रही है। बालको अपने संचालन को अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और कुशल बनाने के लिए डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा आधारित समाधानों को अपना रहा है। उत्पादन प्रक्रियाओं में डिजिटल निगरानी और स्मार्ट समाधान परिचालन दक्षता, गुणवत्ता तथा सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद कर रहे हैं। तकनीक आधारित यह परिवर्तन कंपनी को भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए तैयार करने के साथ उत्पादन प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार की संस्कृति को मजबूत कर रहा है। सतत विकास के साथ औद्योगिक प्रगति एल्यूमिनियम उत्पादन के साथ पर्यावरणीय स्थिरता को संतुलित करना बालको की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंपनी ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, पौधारोपण, इलेक्ट्रिक वाहनों और कम कार्बन उत्सर्जन वाले उत्पादों के माध्यम से अधिक टिकाऊ औद्योगिक विकास की दिशा में काम कर रही है। रिस्टोरा लो-कार्बन एल्यूमिनियम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो कम कार्बन उत्सर्जन वाले एल्यूमिनियम की बढ़ती मांग को पूरा करने की दिशा में योगदान देता है। औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित करने का यह प्रयास भविष्य के अधिक टिकाऊ उद्योग की दिशा को दर्शाता है। सुरक्षा के साथ विकास की संस्कृति औद्योगिक विकास के साथ सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बालको कर्मचारियों और व्यवसायिक साझेदारों के लिए नियमित प्रशिक्षण, सुरक्षा प्रथम, ‘असुरक्षित कार्य को ना कहना’ मॉक ड्रिल, आपातकालीन प्रतिक्रिया और सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है। कंपनी की ‘सुरक्षा संकल्प’ पहल सुरक्षित कार्य संस्कृति को और मजबूत करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। सुरक्षा को संचालन का अभिन्न हिस्सा बनाकर बालको सुरक्षित कार्यस्थल, जागरूक कार्यबल और जिम्मेदार औद्योगिक संचालन की दिशा में निरंतर प्रयास कर रहा है। विकसित भारत की औद्योगिक यात्रा में योगदान भारत को विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में मजबूत घरेलू धातु क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। बुनियादी ढांचे से लेकर रक्षा, ऊर्जा, परिवहन और अंतरिक्ष तक, देश की विकास यात्रा गुणवत्तापूर्ण धातुओं की उपलब्धता से जुड़ी है। ऐसे में बालको का बढ़ता उत्पादन, तकनीकी क्षमता और नवाचार देश की औद्योगिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ से विकसित भारत की दिशा में बालको की यात्रा अब एक औद्योगिक संयंत्र की विकास कहानी से आगे बढ़कर रोजगार, तकनीक, नवाचार, आर्थिक विकास और राष्ट्र निर्माण की कहानी बन चुकी है। 1 मिलियन टन की ओर बढ़ता बालको उत्पादन क्षमता के विस्तार के साथ देश की बढ़ती एल्यूमिनियम जरूरतों को पूरा करने की दिशा में भी अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। आने वाले वर्षों में क्षमता विस्तार, तकनीकी नवाचार और सतत विकास के माध्यम से बालको भारतीय एल्यूमिनियम उद्योग को नई गति देने की दिशा में आगे बढ़ेगा। छत्तीसगढ़ की धरती पर शुरू हुई यह औद्योगिक यात्रा अब राष्ट्र निर्माण के बड़े लक्ष्य से जुड़ चुकी है। बालको का अगला अध्याय केवल अधिक एल्यूमिनियम उत्पादन का नहीं, बल्कि अधिक अवसर, अधिक नवाचार और अधिक विकास गढ़ने का है।