काठमांडु, एजेंसी। मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा की पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में हिमस्खलन की चपेट में आने से मौत हो गई। उनकी ही पर्वतारोहण कंपनी एलीट एक्सपेडिशन ने इसकी पुष्टि की है।
निर्मल 30 जुलाई को काराकोरम इलाके में 8,051 मीटर ऊंची ब्रॉड पीक पर चढ़ाई कर रहे थे। इस दौरान करीब 7,000 मीटर की ऊंचाई पर यह हादसा हुआ। इसमें निर्मल समेत 10 पर्वतारोही लापता हो गए थे। इनमें छह नेपाली थे।
पुर्जा ने 2012 में ब्रिटिश नागरिकता ले ली थी, जिसके बाद उनकी नेपाली नागरिकता खत्म हो गई थी।
निर्मल पुर्जा का शव हेलिकॉप्टर से लाया गया।
30 जुलाई को ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान हुए हिमस्खलन में 10 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। इससे पहले 2013 में ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान छह पर्वतारोहियों की जान गई थी।
6 महीने में 14 सबसे ऊंची चोटियां फतह कीं
नेपाल और दुनियाभर के पर्वतारोहियों के बीच ‘निम्स दाइ’ के नाम से मशहूर निर्मल पुर्जा ने 2019 में ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ की शुरुआत की थी।
उनका मकसद था दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों को सिर्फ सात महीने में फतह करना। उस समय इसे लगभग असंभव माना जा रहा था।
निर्मल पुर्जा ने यह कारनामा महज छह महीने और छह दिन में पूरा कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने दक्षिण कोरिया के पर्वतारोही किम चांग-हो का करीब 8 साल पुराना विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया।
तीसरी बार ब्रॉड पीक की चढ़ाई में जान गई
निर्मल पुर्जा ने पहली बार ब्रॉड पीक को 2019 में प्रोजेक्ट पॉसिबल के दौरान फतह किया था। ब्रॉड पीक को दुनिया के सबसे मुश्किल पर्वतों में गिना जाता है।
दूसरी बार इस चोटी को उन्होंने 2023 में फतह किया। तब उन्होंने बिना सप्लीमेंट ऑक्सीजन के चढ़ाई की थी।
इस चढ़ाई की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने पाकिस्तान की पांचों 8,000 मीटर से ऊंची चोटियां (नंगा पर्वत, गाशरब्रुम-2, गाशरब्रुम-1, ब्रॉड पीक और के2) सिर्फ 26 दिनों में फतह कर नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।
तीसरी बार ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान शिखर के पास हिमस्खलन की चपेट में आने से उनका निधन हो गया।
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि इसी हिमस्खलन में निर्मल पुर्जा और उनके सहयोगियों की जान गई।
ब्रिटिश स्पेशल फोर्स जॉइन करने वाले पहले नेपाली
निर्मल पुर्जा का जन्म 25 जुलाई 1983 को नेपाल के म्याग्दी जिले के दाना गांव में हुआ था। उनके परिवार का सेना से गहरा नाता रहा है। कई पीढ़ियों से परिवार के लोग गोरखा रेजिमेंट में सेवा करते रहे।
उनके पिता और तीन बड़े भाई भी गोरखा सैनिक थे। ऐसे माहौल में पले-बढ़े निर्मल ने भी बचपन से ही सैनिक बनने का सपना देखा। बाद में उन्होंने इसी परंपरा को आगे बढ़ाया और ब्रिटिश सेना की गोरखा रेजिमेंट में भर्ती हो गए।
करीब छह साल तक गोरखा सैनिक के रूप में सेवा देने के बाद उन्होंने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। वे ब्रिटिश रॉयल नेवी की स्पेशल बोट सर्विस (SBS) में शामिल होने वाले पहले नेपाली बने।
SBS ब्रिटेन की नौसेना की सबसे खतरनाक और प्रतिष्ठित स्पेशल फोर्स है। इसके सैनिक समुद्र, पहाड़, जंगल और दुश्मन के इलाके में सीक्रेट ऑपरेशन चलाने के लिए ट्रेंड होते हैं। इसमें चयन इतना मुश्किल है कि बहुत कम सैनिक इसे पूरा कर पाते हैं।
निर्मल पूर्जा ब्रिटेन की एलीट स्पेशल फोर्स SBS में टियर-1 ऑपरेटर रहे।
सपने को पूरा करने के लिए नौकरी छोड़ दी
सेना में रहते हुए निर्मल पुर्जा ने अत्यधिक ठंडे और मुश्किल इलाकों में कई स्पेशल ऑपरेशन में हिस्सा लिया। इसी दौरान उनके मन में दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने का ख्याल आया
साल 2012 में निर्मल पुर्जा पहली बार एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक पर गए थे। उस समय वे सेना में थे तभी उनके मन में एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने का ख्याल आया। इसके लिए उन्होंने ट्रेनिंग शुरू की।
करीब दो साल की मेहनत के बाद 2014 में उन्होंने पहली बार माउंट एवरेस्ट फतह किया। इसके बाद उन्होंने दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी चोटियों पर चढ़ने का लक्ष्य बना लिया।
अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने 2018 में नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह पर्वतारोहण पर फोकस किया।
इसमें सबसे बड़ी चुनौती पैसों की थी। खर्च जुटाने के लिए उन्होंने अपना घर तक बेच दिया, ताकि दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ने का सपना पूरा कर सकें।
निर्मल पुर्जा ने मई 2019 को माउंट एवरेस्ट की चोटी पर चढ़े थे।
नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री से दुनियाभर में मिली पहचान
2019 में छह महीने और छह दिन में दुनिया की 14 सबसे ऊंची चोटियां फतह करने के बाद निर्मल पुर्जा की कहानी पूरी दुनिया तक पहुंची। उनके इस रिकॉर्ड अभियान पर नेटफ्लिक्स ने ’14 पीक्स: नथिंग इज इम्पॉसिबल’ नाम से डॉक्यूमेंट्री बनाई।
इस डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया कि कैसे निर्मल पुर्जा और उनकी नेपाली टीम ने बेहद कम समय में दुनिया की सबसे कठिन चोटियों को फतह किया। इसमें उनके सामने आई खराब मौसम की चुनौतियां, मौत का खतरा, ऑक्सीजन की कमी और कई जानलेवा हालात भी दिखाए गए हैं।
डॉक्यूमेंट्री रिलीज होने के बाद इसे 191 देशों में देखा गया। इसके जरिए नेपाली पर्वतारोहियों के योगदान पर पूरी दुनिया का ध्यान गया। इससे पहले पर्वतारोहण की बड़ी उपलब्धियों में अक्सर विदेशी पर्वतारोहियों की चर्चा होती थी, जबकि नेपाली शेरपाओं और पर्वतारोहियों की भूमिका उतनी सामने नहीं आ पाती थी।
इसके बाद 2020 में निर्मल पुर्जा ने ‘बियॉन्ड पॉसिबल’ नाम से अपनी आत्मकथा भी प्रकाशित की। इस किताब में उन्होंने अपने बचपन, सैन्य जीवन, पर्वतारोहण की शुरुआत, ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ और विश्व रिकॉर्ड बनाने तक के पूरे सफर को विस्तार से बताया है।
रिकॉर्ड की परवाह किए बिना पर्वतारोही का रेस्क्यू किया
निर्मल पुर्जा ने प्रोजेक्ट पॉसिबल के तहत अन्नपूर्णा-1 पर सफल चढ़ाई की। लौटे तो पता चला कि मलेशिया के डॉ. वुई किन चिन अन्नपूर्णा पर करीब 7500 फीट की ऊंचाई पर फंसे हुए हैं।
पुर्जा रिकॉर्ड की परवाह किए बगैर हेलिकॉप्टर से ऊंचाई वाले कैंप तक पहुंचे। रेस्क्यू शुरू किया। उनकी टीम करीब 4 घंटे में डॉ. चिन तक पहुंच गई। सामान्य रूप से यह दूरी करीब 16 घंटे में पूरी होती है। डॉ. चिन को नीचे लाया गया, हालांकि बाद में सिंगापुर के अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
हैदराबाद, एजेंसी। तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के सरकारी RIMS अस्पताल की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में सोमवार रात करीब 11:50 बजे आग लग गई। हादसे में अब तक 3 नवजात की मौत हो गई, जबकि कई अन्य की हालत गंभीर है।
अधिकारियों के मुताबिक, यूनिट में 27 नवजात का इलाज चल रहा था। हादसे के बाद 24 बच्चों का अलग-अलग प्राइवेट अस्पतालों में इलाज जारी है। शुरुआती जानकारी में AC में खराबी के बाद धमाके की आशंका जताई गई है। हालांकि सही वजह जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में इस साल अस्पतालों में आग लगने से 25 लोगों की मौत हुई है। इनमें ओडिशा के कटक में 12 मरीज, बिहार के मुजफ्फरपुर में 5 मरीज, महाराष्ट्र के अमरावती में 3 नवजात, तेलंगाना के आदिलाबाद में 3 नवजात, उत्तर प्रदेश के कानपुर में 1 नवजात और उत्तराखंड के देहरादून में एक मरीज शामिल है।
हादसे की तस्वीरें…
आग लगने के बाद न्यूबॉर्न केयर यूनिट में धुआं और अंधेरा छा गया।
अस्पताल में अफरातफरी मच गई। लोग बच्चों को लेकर बाहर की तरफ भागे।
आग बुझने के बाद न्यूबॉर्न केयर यूनिट में हर तरफ कालिख दिखाई दी।
25 बच्चों को दूसरे अस्पतालों में भेजा गया
अधिकारियों के मुताबिक, आग में सबसे पहले एक 5 दिन के बच्चे की मौत हुई थी। दूसरे नवजात की मंगलवार सुबह निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। तीसरे बच्चे ने दोपहर में दम तोड़ा।
अब 24 बच्चों का इलाज जारी है। इनमें एक की हालत गंभीर है। बाकी बच्चों की सेहत पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।
CM ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने को कहा
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने नवजात की मौत पर दुख जताया। उन्होंने इलाज करा रहे बच्चों को बेहतर और एडवांस मेडिकल केयर देने और उनकी हालत पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए। साथ ही घटना की जांच के बाद रिपोर्ट सौंपने और अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने को कहा।
नई दिल्ली, एजेंसी। वंदे मातरम गीत से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा, ‘धार्मिक कारणों से राष्ट्रगीत न गाने वाले व्यक्ति को आपराधिक कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए।’ कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
कोर्ट ने यह देखने पर सहमति दी कि वंदे मातरम न गाने को दंडनीय अपराध बनाया जा सकता है या नहीं। कोर्ट ने यह तय करने से इनकार किया कि राष्ट्रगीत केवल दो अंतरों तक सीमित रहेगा या छह अंतरों तक होगा। कानून में वंदे मातरम के गायन को रोकने या गायन में जानबूझकर बाधा डालने को दंडनीय बनाया गया है।
यह सुनवाई गायक टीएम कृष्णा की याचिका पर हुई। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि अंतिम चार पैरा हिंदू देवताओं के प्रति भक्ति का आह्वान करते हैं। इन पैराग्राफ को गाना अनिवार्य बनाना देश के धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन है।
वंदे मातरम को कानून के दायरे में लाने वाला संशोधन बिल 29 जुलाई को राज्यसभा और 30 जुलाई को लोकसभा से पास हुआ था। इसके बाद 6 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर यह कानून बन गया।
बिजो इमैनुअल केस: 3 छात्रों ने राष्ट्रगान गाने से मना कर दिया
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि वंदे मातरम से जुड़े कानून की व्याख्या करते समय 1986 के ‘बिजो इमैनुअल’ फैसले में तय सिद्धांतों को लागू किया जाएगा।
दरअसल, 1986 के बिजो इमैनुअल बनाम केरल सरकार मामले में तीन छात्रों ने धार्मिक विश्वास के कारण राष्ट्रगान नहीं गाया था। हालांकि वे राष्ट्रगान के दौरान सम्मानपूर्वक खड़े रहते थे।
सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा था कि केवल राष्ट्रगान न गाने के आधार पर उन्हें दंडित नहीं किया जा सकता।
‘नक्सली’ शब्द पर सॉलिसिटर जनरल और मुरलीधर में बहस
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और कृष्णा के वकील सीनियर एडवोकेट डॉ एस मुरलीधर के बीच तीखी बहस भी हुई। संविधान के तहत निर्णय लेने की प्रक्रिया पर मुरलीधर की दलील के जवाब में मेहता ने ‘नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल किया।
मुरलीधर: अभी आपने जिस शब्द का इस्तेमाल किया है, उसे वापस लें। यह कार्यवाही लाइव चल रही है। मैं इसका कड़ा विरोध करता हूं।
मेहता: मैंने कहा कि यही संवैधानिक तरीका है, न कि वह तरीका जो नक्सली चाहता है। और मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है।
मुरलीधर: “किसी बात पर विचार करना नक्सली होना नहीं है।
इसके बाद जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति पर आतंकवादी होने का आरोप हो, तब भी संविधान के तहत उसके अधिकार बने रहते हैं।
2026 वंदे मातरम के अपमान पर कानून बना
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत घोषित किया था। लंबे समय तक इसके अपमान पर कोई अलग कानून नहीं था, लेकिन 2026 के मानसून सत्र में केंद्र सरकार ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ बनाया।
इस कानून के तहत ‘वंदे मातरम’ के गायन को जानबूझकर रोकने, इसमें बाधा डालने या इसका सार्वजनिक अपमान करने को दंडनीय अपराध माना गया है। ऐसा करने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है।
इस बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ के पूरे 6 छंद गाए गए।
केंद्र का आदेश- पहले वंदे मातरम, फिर जन गण मन होगा
गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के गायन और बजाने को लेकर नए निर्देश जारी किए थे। इसमें दोनों के सही बोल, उच्चारण और तय प्रोटोकॉल का पालन करने को कहा गया था।
निर्देशों के मुताबिक, अगर किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम और जन गण मन दोनों गाए या बजाए जाते हैं, तो पहले वंदे मातरम और उसके बाद राष्ट्रगान होगा। अगर किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का अपना राज्य गीत भी है, तो पहले राज्य गीत फिर वंदे मातरम और अंत में जन गण मन रहेगा।
निशिन (जापान)/नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय विमेंस क्रिकेट टीम ने लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत लिया है। टीम ने मंगलवार को फाइनल में श्रीलंका को 147 रन से हराया। भारत ने 2022 हांगझोउ एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था।
भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 3 विकेट पर 216 रन बनाए। यह एशियन गेम्स में भारतीय विमेंस टीम का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर है। 217 रन के टारगेट का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम 15.4 ओवर में 69 रन पर ऑलआउट हो गई।
थर्ड प्लेस के मैच में पाकिस्तान ने बांग्लादेश को हराकर ब्रॉन्ज मेडल जीता है।
मंधाना ने 79 रन की पारी खेली
भारत के लिए स्मृति मंधाना ने 79, ऋचा घोष ने नाबाद 49 और शेफाली वर्मा ने 48 रन की पारी खेली। मंधाना और शेफाली के बीच पहले विकेट के लिए 99 रन की साझेदारी हुई। मंधाना ने इस पारी के दौरान विमेंस इंटरनेशनल क्रिकेट में 11 हजार रन भी पूरे किए।
श्रीलंका की ओर से सुगंधिका कुमारी, कविशा दिलहारी और चामुडी प्रभोदा ने एक-एक विकेट लिया।
दीप्ति शर्मा ने 3 विकेट झटके
श्रीलंका की टीम 15.4 ओवर ही खेल सकी। चामरी अटापट्टू ने सबसे ज्यादा 29 रन बनाए, जबकि कौशिनी नुथ्यांगना ने 14 और कविशा दिलहारी ने 11 रन बनाए।
भारत की ओर से दीप्ति शर्मा ने सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए। शेफाली वर्मा, श्रेयंका पाटिल और श्री चरणी को भी 2-2 विकेट मिले। श्रीलंका के 8 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके।
इस गोल्ड के साथ भारत टॉप-10 में पहुंचा
इस गोल्ड मेडल के साथ भारत एशियन गेम्स-2026 की मेडल टैली में टॉप-10 में पहुंच गया है। भारत के खाते में अब तक 1 गोल्ड, 4 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल हैं।
भारतीय विमेंस क्रिकेट टीम ने लगातार दूसरी बार गोल्ड जीता
भारत ने एशियन गेम्स 2026 में विमेंस क्रिकेट का गोल्ड मेडल जीत लिया। श्रीलंका 15.4 ओवर में 69 रन पर ऑलआउट हो गई। श्रेयंका पाटिल ने कौशानी नुथ्यांगना को बोल्ड कर भारत को जीत दिलाई।
श्रेयंका की फुल और स्टंप्स पर आती गेंद पर कौशानी आगे निकलकर शॉट खेलने गईं, लेकिन गेंद बल्ले को चकमा देकर सीधे मिडिल स्टंप पर जा लगी। इसके साथ ही भारतीय खिलाड़ियों ने मैदान पर तिरंगा लहराकर गोल्ड मेडल का जश्न मनाया।
श्रीलंका के 9 विकेट गिरे
श्रीलंका को 14.2 ओवर में नौवां झटका लगा। मिताली अयोध्या 5 गेंदों पर बिना खाता खोले रन आउट हुईं। कौशानी नुथ्यांगना के मिडविकेट की ओर शॉट खेलने के बाद दोनों ने एक रन पूरा किया, लेकिन दूसरे रन के लिए मिताली क्रीज से बाहर निकल गईं। वापसी के दौरान वह फिसल गईं और ऋचा घोष ने गिल्लियां बिखेर दीं।