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कोरबा

सड़क नहीं, कंधों पर दो किलोमीटर शव ले गए ग्रामीण:कोरबा के गांव का वीडियो वायरल, सड़क-पुल नहीं, सालों से मांग के बावजूद सिर्फ आश्वासन

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कोरबा। विकास और सुशासन के दावों के बीच कोरबा जिले के पाली विकासखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पाली ब्लॉक की केंवरा पंचायत के ईरई गांव में सड़क और पुल के अभाव के कारण ग्रामीणों को एक महिला के शव को लकड़ी की डांडी (बांस की अर्थी) पर रखकर करीब 2 किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा।

इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

वाहन नहीं पहुंचा, कंधों पर निकली अंतिम यात्रा

जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले ईरई गांव निवासी मोतीलाल भुनुवार की पत्नी का निधन हो गया था। अंतिम संस्कार के लिए शव को गांव से बाहर ले जाना था, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण कोई वाहन वहां नहीं पहुंच सका।

मजबूरी में परिजनों और ग्रामीणों ने बांस और लकड़ी से डांडी तैयार की। शव को उसी पर रखकर करीब 2 किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक ले जाया गया, जहां से आगे की व्यवस्था की गई।

घटना के दौरान किसी ग्रामीण ने पूरा घटनाक्रम मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। वायरल वीडियो में कई ग्रामीण कंधों पर डांडी उठाकर शव ले जाते दिखाई दे रहे हैं। उनके पीछे महिलाएं और अन्य ग्रामीण भी अंतिम यात्रा में शामिल हैं।

यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर बहस छिड़ गई है।

नाला बना सबसे बड़ी बाधा, बरसात में कट जाता है गांव

ग्रामीणों के अनुसार, गांव से मुख्य सड़क के बीच एक नाला पड़ता है, जिस पर आज तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है। बरसात के दौरान नाला उफान पर होने से गांव का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल नहीं होने के कारण सामान्य दिनों में भी आवागमन मुश्किल रहता है, जबकि बारिश के मौसम में हालात और गंभीर हो जाते हैं।

वायरल VIDEO में ग्रामीण कंधों पर शव ले जाते दिखाई दिए।

वायरल VIDEO में ग्रामीण कंधों पर शव ले जाते दिखाई दिए।

‘सिर्फ शव ही नहीं, मरीज भी खाट पर ले जाने पड़ते हैं’

ग्रामीणों ने बताया कि यह समस्या केवल अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है। किसी के बीमार होने पर मरीजों को भी खाट या चारपाई के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।

गांव तक एम्बुलेंस और 108 सेवा नहीं पहुंच पाती। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भारी परेशानी होती है। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है, क्योंकि बरसात में स्कूल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

वर्षों से सड़क और पुल की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और वन विभाग से गांव तक सड़क और नाले पर पुल निर्माण की मांग करते आ रहे हैं।

उनका आरोप है कि जमीन वन क्षेत्र में होने का हवाला देकर हर बार उनकी मांग टाल दी जाती है, जबकि गांव के लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

VIDEO वायरल होने के बाद उठे सवाल

घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग सरकार और प्रशासन से सवाल पूछ रहे हैं। लोगों का कहना है कि आज भी यदि ग्रामीणों को अंतिम यात्रा के लिए शव कंधों पर उठाकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है, तो यह बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

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छत्तीसगढ़ अखबार वितरक संघ ने पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से की सौजन्य भेंट

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कोरबा। छत्तीसगढ़ अखबार वितरक संघ की कोरबा इकाई द्वारा छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व राजस्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयसिंह अग्रवाल से सौजन्य भेंट की गई। इस अवसर पर संघ की और से उन्हें पूर्व सामाजिक कार्य की स्मृति संग्रह भेंट किया गया।
इस दौरान छत्तीसगढ़ अखबार वितरक संघ के जिला अध्यक्ष विपेंद्र कुमार साहू, जिला सचिव जय सिंह नेताम एवं कोषाध्यक्ष लक्ष्मी राठौर अन्य पदाधिकारियों सहित मॉर्निंग वॉक टीम उपस्थित थी।

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सड़क सुरक्षा के संदेश से गूंजा इंडियन पब्लिक स्कूल पाली

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विद्यार्थियों को यातायात नियमों की दी जानकारी, ड्राइंग प्रतियोगिता में दिखी बच्चों की रचनात्मकता

कोरबा/पाली। इंडियन पब्लिक स्कूल, पाली में विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आज विशेष रोड सेफ्टी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के सभी विद्यार्थियों को सड़क पर सुरक्षित आवागमन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

विद्यार्थियों को यातायात नियमों का पालन करने, सड़क पार करते समय सावधानी बरतने, ट्रैफिक सिग्नल एवं सड़क संकेतों को समझने तथा दोपहिया वाहन पर हेलमेट और चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट के महत्व के बारे में बताया गया। बच्चों को यह भी समझाया गया कि सड़क पर जल्दबाजी एवं लापरवाही से बचना चाहिए और हमेशा सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

कार्यक्रम को और अधिक रोचक एवं रचनात्मक बनाने के लिए विद्यार्थियों के बीच रोड सेफ्टी ड्राइंग प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता और कला-कौशल के माध्यम से सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों तथा सुरक्षित यात्रा से संबंधित आकर्षक चित्र बनाए। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए चित्रों के माध्यम से समाज को सड़क सुरक्षा का महत्वपूर्ण संदेश दिया।

विद्यालय के डायरेक्टर राकेश मिश्रा ने कहा कि बच्चों को बचपन से ही यातायात नियमों एवं सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जागरूक विद्यार्थी ही आगे चलकर जिम्मेदार नागरिक बनते हैं।

विद्यालय की प्रिंसिपल संतोष देवनाथ ने विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा नियमों का स्वयं पालन करने तथा अपने माता-पिता एवं आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया। वहीं एडमिनिस्ट्रेटर कुणाल महापात्र ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन के लिए आवश्यक व्यवहारिक ज्ञान और सामाजिक जिम्मेदारियों से परिचित कराना भी है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। रोड सेफ्टी जागरूकता एवं ड्राइंग प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों ने सुरक्षित यातायात का संदेश देते हुए कार्यक्रम को सफल एवं सार्थक बनाया।

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बालको की उत्पादन क्षमता होगी 10 लाख टन-सीईओ राजेश कुमार सिंह

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हॉट मेटल की सीधी आपूर्ति से बढ़ेगा डाउनस्ट्रीम उद्योग, रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
कोरबा/बालकोनगर। बालको उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ कोरबा को एल्युमिनियम डाउनस्ट्रीम उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रहा है। विस्तारित परियोजना पूरी होने के बाद बालको की एल्युमिनियम उत्पादन क्षमता 10 लाख टन प्रति वर्ष हो जाएगी, जिससे वेदांता एल्युमिनियम की कुल क्षमता लगभग 28.5 लाख टन प्रति वर्ष पहुंच जाएगी और समूह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एल्युमिनियम उत्पादक बन जाएगा।
उक्त बातें मीडिया से चर्चा के दौरान बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी व पूर्णकालिक निदेशक (सीईओ) राजेश कुमार सिंह ने कही। श्री सिंह ने बताया कि निजीकरण के समय बालको की उत्पादन क्षमता केवल एक लाख टन थी। लगातार निवेश और आधुनिक तकनीक के उपयोग से इसे पांच लाख टन तक पहुंचाया गया। नए स्मेल्टर की स्थापना के बाद उत्पादन क्षमता बढ़कर 10 लाख टन प्रति वर्ष हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह विस्तार केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि कोरबा को देश के प्रमुख एल्युमिनियम केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा एल्युमिनियम पार्क के निर्माण से यहां स्थापित होने वाले लघु और मध्यम उद्योगों को सीधे हॉट मेटल उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे परिवहन लागत घटेगी और मूल्य संवर्धित एल्युमिनियम उत्पादों का निर्माण बढ़ेगा। इससे स्थानीय रोजगार और औद्योगिक निवेश को भी नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि वेदांता समूह के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि औद्योगिक विकास के साथ स्थानीय समाज का विकास भी समान रूप से होना चाहिए। इसी सोच के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में लगातार निवेश किया जा रहा है, ताकि औद्योगिक विकास का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंच सके।
बर्रा कोल ब्लाक को 2028 तक विकसित करने का लक्ष्य
सीईओ राजेश कुमार सिंह ने बताया कि उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ ऊर्जा और कोयले की आवश्यकता भी बढ़ेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए रायगढ़ जिले के बर्रा कोल ब्लाक को वर्ष 2028 तक विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके शुरू होने पर कंपनी की बाहरी स्रोतों से कोयला खरीद पर निर्भरता कम होगी। वर्तमान में बालको अपने कैप्टिव बिजली संयंत्र से आवश्यकता पूरी करने के बाद लगभग 300 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खुले बाजार में बेच रहा है।
बालको में भी कैंसर उपचार सुविधा विकसित करने की संभावना पर विचार
राजेश कुमार सिंह ने बताया कि वेदांता समूह के रायपुर स्थित कैंसर अस्पताल की तर्ज पर बालको क्षेत्र में भी विशेष कैंसर उपचार सुविधा विकसित करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव का तकनीकी परीक्षण किया जाएगा। योजना साकार होने पर कोरबा और आसपास के जिलों के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बाहर जाने की आवश्यकता कम होगी।
फोरलेन निर्माण के लिए बालको उपलब्ध करा चुका है 30 करोड़
श्री सिंह ने कहा कि परसाभाटा से रूमगरा तक फोरलेन सड़क निर्माण के लिए बालको, प्रशासन को 30 करोड़ रुपए उपलब्ध करा चुका है। बारिश के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। सड़क बनने से भारी वाहनों का दबाव कम होगा और बालको क्षेत्र में लंबे समय से बनी जाम की समस्या से राहत मिलेगी।

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