बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रामेन डेका के खिलाफ प्रणव कलिता और लक्ष्यधर राजबोंगसी ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने दोनों को शर्तों के साथ राहत दी है।
कोर्ट ने दोनों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और अपने फेसबुक अकाउंट पर प्रमुखता से माफी का पोस्ट करने का निर्देश दिया है। साथ ही सोशल मीडिया से आपत्तिजनक सामग्री हमेशा के लिए हटाने और आगे ऐसी गलती दोबारा नहीं करने का शपथपत्र देने को कहा है।
राज्यपाल रामेन डेका के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अशोभनीय टिप्पणी की गई थी।
असमिया भाषा में पोस्ट और कार्टून किया था पोस्ट
दरअसल, प्रणव कलिता और लक्ष्यधर राजबोंगसी ने अपने-अपने फेसबुक अकाउंट से असमिया भाषा में राज्यपाल रामेन डेका के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अपमानजनक लेख पोस्ट किए थे। इसके साथ ही कार्टून बनाकर भी वायरल किया था।
जिसकी शिकायत के बाद राजभवन की ओर से रायपुर के सिविल लाइंस थाने में दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। बाद में मामला रायपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा।
FIR रद्द कराने हाईकोर्ट में लगाई याचिका
एफआईआर रद्द कराने के लिए दोनों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान 14 अगस्त 2026 को दोनों ने बिना शर्त माफी मांगने और आपत्तिजनक सामग्री हमेशा के लिए हटाने की बात कही।
इस पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मनोज गोयल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि दोनों ने जो किया है, उसे माफ नहीं किया जा सकता।
19 अगस्त को शपथ पत्र देकर मांगी माफी
इसके बाद 19 अगस्त 2026 को दोनों याचिकाकर्ताओं ने दोबारा माफी मांगते हुए हाईकोर्ट में शपथ पत्र पेश किया। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कुछ कड़ी शर्तों के साथ समझौते पर सहमति व्यक्त की। सुनवाई के दौरान यह तर्क भी रखा गया कि राज्यपाल छत्तीसगढ़ के प्रथम नागरिक और संवैधानिक पद पर हैं।
उनके पद की गरिमा और छवि को नुकसान पहुंचाने वाली ऐसी टिप्पणी से अलग-अलग वर्गों के बीच तनाव और विवाद बढ़ सकता है। इससे दोनों राज्यों में शांति व्यवस्था भी प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
माफी और पोस्ट हटाने की शर्त पर राहत
हाईकोर्ट के आदेश का आधार याचिकाकर्ताओं की ओर से माफी मांगने और आपत्तिजनक सामग्री हटाने की सहमति रही। कोर्ट ने दोनों को शर्तों के साथ राहत दी है। अब उन्हें सार्वजनिक रूप से और कोर्ट के सामने माफी मांगनी होगी, सोशल मीडिया से आपत्तिजनक सामग्री पूरी तरह हटानी होगी।
कोरबा। कोरबा जिले के मानिकपुर चौकी क्षेत्र के डंपर फाटक के पास यात्री ट्रेन की चपेट में आने से करीब 65 से 70 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि बुजुर्ग के शरीर के कई टुकड़े हो गए। मृतक की अब तक पहचान नहीं हो सकी है।
पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।
ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आए
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बुजुर्ग रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार यात्री ट्रेन की चपेट में आ गए। टक्कर के बाद उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
मृतक ने कपड़े और माला पहन रखी थी। उनके हाथ में घड़ी भी थी। पुलिस ने पहचान के लिए इन हुलियों और अन्य उपलब्ध जानकारी को सुरक्षित रखा है।
सोशल मीडिया और मुनादी से पहचान की कोशिश
घटना की सूचना मिलते ही मानिकपुर चौकी पुलिस और रेलवे RPF मौके पर पहुंची। शव के टुकड़ों को एकत्र कर आवश्यक कार्रवाई की गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
मृतक की पहचान के लिए पुलिस सोशल मीडिया पर फोटो और हुलिया प्रसारित कर रही है। इसके अलावा आसपास की बस्तियों में मुनादी कराकर भी जानकारी जुटाई जा रही है। अभी तक कोई व्यक्ति मृतक की पहचान के लिए सामने नहीं आया है।
पुलिस आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रही है कि बुजुर्ग को पहले किसी ने देखा था या वह इलाके में भटक रहे थे। फिलहाल पुलिस इसे प्रथम दृष्टया हादसा मानकर सभी पहलुओं से जांच कर रही है।
अंडरब्रिज की मांग फिर उठी
स्थानीय लोगों के अनुसार, डंपर फाटक क्षेत्र में पहले भी रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान हादसे हो चुके हैं। लोगों का कहना है कि फाटक के पास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और अंडरब्रिज बनाने की मांग कई बार की जा चुकी है, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके कारण लोग आज भी जान जोखिम में डालकर ट्रैक पार करते हैं।
पुलिस ने अपील की है कि किसी का बुजुर्ग परिजन लापता है और उसका हुलिया मृतक से मिलता-जुलता है, तो मानिकपुर चौकी से संपर्क कर पहचान में मदद करें।
धार्मिक और सामाजिक संगठनों सहित आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों ने दिए सुझाव
रायपुर, 27 अगस्त 2026। समान नागरिक संहिता के लिए गठित समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस द्वय शत्रुघ्न सिंह और एम.के.राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त श्रीमती ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्याम धावड़े के समक्ष आज राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में धार्मिक और सामाजिक संगठनों सहित आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों की बैठक आयोजित कर समान नागरिक संहिता के संबंध में सुझाव लिए गए। संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों को साकार करने के उद्देश्य से गठित यूसीसी समिति के समक्ष धार्मिक और सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न वर्गों सहित आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों की सहभागिता लगातार देखने को मिल रही है।
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या पंथ से परे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे पारिवारिक मामलों में एक समान नियम बनाना है। पुत्र और पुत्री दोनों को संपत्ति में समान उत्तराधिकार का अधिकार दिया गया है। इसके तहत मौखिक तलाक और कुछ अन्य धार्मिक कुप्रथाओं पर रोक लगाई जा सकेगी। इसके लिए धार्मिक और सामाजिक संगठनों, विभिन्न आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों, विभिन्न समाज के प्रमुखो, पदाधिकारियों, प्रबुद्धजनों और जनप्रतिनिधियों ने उपस्थित होकर अपने बहुमूल्य सुझाव देने के लिए उपस्थित रहे।
समान नागरिक संहिता के लिए विभिन्न आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों, विभिन्न समाज के प्रमुखो, पदाधिकारियों, प्रबुद्धजनों और जनप्रतिनिधियों ने उपस्थित होकर अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए। बैठक में सुझाव देने वालों में उपाध्यक्ष मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण प्रणव कुमार मरपच्ची, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष ललित माखीजा, क्रिश्चियन समाज के जान राजेश पॉल, अध्यक्ष मुस्लिम समाज सलाम रिजवी, अध्यक्ष गुरुद्वारा कमेटी इंद्रजीत छाबड़ा, उपाध्यक्ष अन्य पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण ललित चंद्राकर, राज्य नीति आयोग के अध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा शामिलथे स इसी प्रकार राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष संदीप शर्मा, महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू और सदस्य श्रीमती सरला कोसरिया तथा दीपिका सोरी, अध्यक्ष गौ सेवा आयोग विशेषर पटेल, अध्यक्ष राज्य अल्पसंख्यक आयोग अमरजीत छाबड़ा, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी, मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष लखन लाल धीवर, जैतू साव मठ के महंत राम सुंदर दास, अग्रवाल समाज, माहेश्वरी समाज सहित कई सामाजिक संगठनों ने इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।
एक समान विधिक ढाँचा तैयार करने की दिशा में बढ़ाया कदम
छत्तीसगढ़ में सभी नागरिकों को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान व न्यायसंगत अधिकार देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाये जाने का सुझाव दिया। प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के मुख्य आयाम में सर्व समावेशी समानता को शामिल किया गया है। धर्म या समुदाय से परे हटकर सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक समान विधिक ढाँचा तैयार करना के दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इसमें उत्तराधिकार और वैवाहिक अधिकारों में महिलाओं को बराबरी का अधिकार देना और असमानता पैदा करने वाले नियमों को समाप्त करना शामिल है। वर्तमान में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों की जटिलताओं और भ्रम को दूर कर एक स्पष्ट और सुव्यवस्थित संहिता का निर्माण करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाया जा रहा है।
जनजातीय परंपराओं का संरक्षण
राज्य की विशिष्ट जनजातीय और रूढ़िगत परंपराओं पर प्रस्तावित सुधारों के व्यावहारिक प्रभावों का संवेदनशीलता से आकलन किया जाएगा। प्रदेशव्यापी जन-संवाद से समावेशी प्रारूप की तैयारी के लिए गठित यह समिति राज्य के सभी जिलों में फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और जन-संवाद के माध्यम से आम नागरिकों, सामाजिक- धार्मिक संगठनों और कानूनविदों की राय जुटा रही है। न्यू सर्किट हाउस में आयोजित इस विस्तृत परिचर्चा से राज्य में एक पारदर्शी, सर्वसमावेशी और जन-हितैषी समान नागरिक संहिता तैयार करने की प्रक्रिया को और मजबूती मिली है।
केरसई में बहनों ने मुख्यमंत्री साय को बांधी राखी, मुख्यमंत्री ने कहा – आपका सम्मान, सुरक्षा और खुशहाली मेरी जिम्मेदारी
‘विष्णु भैया’ ने बहनों के बीच केरसई को दी विकास की नई सौगातें
घासीमुंडा में नया प्राथमिक शाला भवन, केरसई में मिनी स्टेडियम और तालाब सौंदर्यीकरण सहित अनेक विकास कार्यों की घोषणा
केरसई में लगभग 84.69 लाख रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन
महिला सशक्तिकरण से लेकर गांवों के विकास तक सरकार की योजनाओं की दी जानकारी
जशपुर 27 अगस्त 2026। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड के ग्राम केरसई में आज भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और आत्मीयता का भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला। यहां आयोजित ‘रक्षाबंधन एवं बहनों से संवाद’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पहुंचने पर क्षेत्र की बहनों ने बड़े उत्साह और आत्मीयता के साथ उनका स्वागत किया और उनकी कलाई पर राखी बांधी। बहनों के स्नेह से अभिभूत मुख्यमंत्री ने उनसे आत्मीय संवाद किया, उनकी बातें सुनीं और सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के स्नेह का पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और सुरक्षा के संकल्प का भी पर्व है। जब बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो वह धागा जीवन भर उसके सम्मान और सुख-दुःख में साथ खड़े रहने की जिम्मेदारी से जोड़ देता है। प्रदेश की माताओं और बहनों का स्नेह तथा आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
मुख्यमंत्री ने बहनों से कहा कि “आपने मुझे जो स्नेह और विश्वास दिया है, उसे बनाए रखना मेरा दायित्व है। मेरा फर्ज है कि आपका और क्षेत्र की जनता का सिर हमेशा ऊंचा रहे तथा विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।” उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों के सम्मान, सशक्तिकरण और खुशहाली से ही परिवार मजबूत होगा और मजबूत परिवारों से विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण होगा।
केरसई को मिली विकास की अनेक सौगातें
रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने क्षेत्रवासियों की मांगों को आत्मीयता से स्वीकार करते हुए अनेक विकास कार्यों की घोषणा की। उन्होंने घासीमुंडा में जर्जर प्राथमिक शाला के स्थान पर नया शाला भवन, केरसई तालाब का सौंदर्यीकरण, केरसई में मिनी स्टेडियम, केरसई एवं घासीमुंडा के बजरंग बली मंदिरों का जीर्णोद्धार, मुख्य मार्ग से अरुण के घर तक सीसी सड़क, ग्राम पंचायत कोहपानी के गढ़वामुड़ा यादव बस्ती में सामुदायिक भवन, घासीमुंडा में सामुदायिक भवन तथा ग्राम ऊपरकछार में महतारी सदन बनाने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने केरसई में लगभग 84.69 लाख रुपए के विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार गांवों में सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल, सामुदायिक भवन सहित सभी आवश्यक अधोसंरचनाओं का तेजी से विस्तार कर रही है। विकास कार्यों में ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है और आने वाले समय में भी क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्य निरंतर स्वीकृत किए जाएंगे।
महिला सशक्तिकरण से बदल रही छत्तीसगढ़ की तस्वीर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की नीतियों के केंद्र में माताओं और बहनों का सम्मान, आर्थिक स्वावलंबन और खुशहाली है। आज प्रदेश में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को भी नई शक्ति दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख बहनों को हर महीने आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। बहनें इस राशि का उपयोग अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई तथा सिलाई-कढ़ाई और अन्य आजीविका गतिविधियों के लिए कर रही हैं। यह आर्थिक संबल महिलाओं के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने ड्रोन दीदियों का उदाहरण देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं अब आधुनिक तकनीक से भी जुड़ रही हैं और इसके माध्यम से आय के नए अवसर प्राप्त कर रही हैं। जशपुर जिले की बहनों को 50 ई-रिक्शा प्रदान किए जाने से उनके लिए स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह खुलेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि गांव की प्रत्येक महिला को उसकी रुचि और क्षमता के अनुरूप आजीविका का अवसर मिले। महिलाओं के हाथों में आर्थिक शक्ति आने से परिवार और समाज दोनों मजबूत होते हैं।
किसान, गरीब और हर जरूरतमंद परिवार के साथ सरकार
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समृद्धि के लिए भी प्रतिबद्ध है। प्रदेश में किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है। किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब परिवारों के लिए बड़ी संख्या में पक्के मकानों का निर्माण किया जा रहा है। सरकार का संकल्प है कि कोई भी पात्र परिवार आवास जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित न रहे। गरीब परिवार का अपना पक्का घर केवल एक भवन नहीं, बल्कि उसके सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार है।
मुख्यमंत्री ने श्री रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार प्रदेशवासियों को धार्मिक एवं तीर्थ स्थलों के दर्शन का अवसर भी उपलब्ध करा रही है। समाज के ऐसे लोग, जो आर्थिक या अन्य कारणों से तीर्थयात्रा नहीं कर पाते थे, वे इन योजनाओं के माध्यम से अपनी आस्था से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों के दर्शन कर पा रहे हैं।
नक्सलवाद के समाप्त होने से विकास को मिली नई गति
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में नक्सलवाद के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई से प्रदेश के दूरस्थ और प्रभावित क्षेत्रों में विकास का नया वातावरण बना है। जिन इलाकों में पहले विकास कार्यों में बाधा आती थी, वहां अब तेजी से बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, पानी, सड़क, राशन और दूरसंचार जैसी आवश्यक सुविधाएं पहुंच रही हैं। सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर सरकार लगातार कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के लिए गांव, गरीब, किसान, महिला और युवा – सभी को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 से सीधे दर्ज कराएं समस्या
मुख्यमंत्री श्री साय ने उपस्थित ग्रामीणों को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी देते हुए कहा कि आम नागरिक अपनी समस्याएं और शिकायतें इसके माध्यम से सीधे दर्ज करा सकते हैं। शासन-प्रशासन को अधिक जवाबदेह और जनसमस्याओं के समाधान को अधिक सरल बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने लोगों से मुख्यमंत्री बिजली बिल राहत योजना का लाभ लेने तथा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत अपने घरों में सौर पैनल लगवाने का भी आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा से परिवारों के बिजली खर्च में कमी आने के साथ स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा।
जशपुर में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा का होगा विस्तार
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जशपुर जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिले में मेडिकल कॉलेज सहित एमसीएच यूनिट, फिजियोथेरेपी, नर्सिंग और स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर न जाना पड़े और स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों।
‘विष्णु भैया’ के रूप में मिला बहनों का स्नेह
पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय ने क्षेत्रवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज पूरे प्रदेश की बहनों के ‘विष्णु भैया’ हैं। मुख्यमंत्री अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच बहनों के बीच पहुंचकर राखी बंधवा रहे हैं और उनसे आत्मीय संवाद कर रहे हैं। यह प्रदेश की माताओं-बहनों के साथ उनके आत्मीय रिश्ते को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांगें पूरी हो रही हैं और जशपुर निरंतर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।
हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभान्वित किया। सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत बालिका आयुषी को पासबुक प्रदान की गई। वहीं स्वामित्व योजना के अंतर्गत कौशल्या पैंकरा, कमला बाई, लालो, ज्योति बाई और सुमेत्रा खैरवार को आवासीय पट्टे वितरित किए गए।
मुख्यमंत्री ने सरस्वती स्व-सहायता समूह को एक लाख रुपए का चेक भी प्रदान किया। उन्होंने समूह की महिलाओं से संवाद करते हुए उन्हें आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम में पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।