नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की गड़बड़ी पर चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किया जाना यह दर्शाता है कि उन्हें केवल अपनी सरकार के अस्तित्व की चिंता है, लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह पहले दिन से ही सीबीएसई की 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (ओएसएम) और 'सीओईएमपीटी' को अनुबंध दिए जाने के मामले में स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं, क्योंकि देश के युवाओं को सच जानने का अधिकार है। गांधी ने मीडिया की खबरों को साझा किया और लोगों से उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ने का आह्वान किया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया, ”सीबीएसई ने ओएसएम निविदाएं तीन बार आमंत्रित कीं। पहली बार एक भी बोली नहीं लगी। दूसरी बार कोई भी बोलीदाता पात्र नहीं पाया गया। और अंततः, तकनीकी मानकों को तब तक कमतर किया गया जब तक कि ‘सीओईएमपीटी’ उन्हें पार नहीं कर गई। स्कैनिंग रेजोल्यूशन कम कर दिया गया। रोबोटिक स्कैनर की अनिवार्यता हटा दी गई। सीएमएमआई प्रमाणन स्तर-5 से घटाकर स्तर-3 कर दिया गया। उत्तर पुस्तिकाओं में त्रुटियों के लिए जुर्माने के प्रावधान भी हटा दिये गए।” राहुल गांधी ने कहा, ”भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टीसीएस ने भी तीसरे दौर के लिए अर्हता प्राप्त की थी। लेकिन टीसीएस दौड़ में हार गई और सीओईएमपीटी-एक ऐसी कंपनी जिसका रिकॉर्ड विफलताओं से भरा रहा है-वह जीत गई। और आज सीबीएसई के छात्र किस बात की शिकायत कर रहे हैं? खराब तरीके से स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं, गायब पन्ने और एक खराब मूल्यांकन पोर्टल।”
गांधी ने कहा कि शिक्षकों ने सीबीएसई को चेतावनी दी थी कि ओएसएम प्रणाली को राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन से पहले कम से कम एक या दो साल की अतिरिक्त तैयारी की आवश्यकता है, फिर भी इसे जल्दबाजी में आगे बढ़ा दिया गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने कहा, ”तो मैं फिर से पूछता हूं – कौन चाहता था कि सीओईएमपीटी जीते? किसने धीरे-धीरे मानकों को इतना कम किया कि यह कंपनी इसे पार कर सके?” उन्होंने कहा, “प्रधान जी और सीबीएसई का कहना है कि ‘कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया’। यह कोई जवाब नहीं है, यह जवाबदेही नहीं है। सवाल यह है कि क्या अनुबंध ईमानदारी से उस सर्वश्रेष्ठ कंपनी को दिया गया था जो काम को सही ढंग से कर सकती थी?”
गांधी ने कहा कि 18.5 लाख बच्चों का भविष्य एक ऐसी कंपनी के हाथों में सौंप दिया गया, जो केवल तब अर्हता प्राप्त कर सकी जब उसके लिए नियमों में ”ढील दी गई।” उन्होंने कहा, ”सवाल पूछने के कारण मुझ पर हमला करने वाले भाजपा मंत्रियों के लिए – मैंने पहले दिन से ही स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की। इसे (जांच को) सीबीएसई से लेकर सीओईएमपीटी को दिए गए हर अनुबंध तक विस्तारित करें। हमारे युवाओं को सच्चाई जानने का हक है।” गांधी ने कहा, “मोदी जी, सीबीएसई की गड़बड़ी पर आपकी चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ आपकी निष्क्रियता देश को बताती है कि आपको वास्तव में किसकी परवाह है – लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं, बल्कि सिर्फ अपनी सरकार के अस्तित्व की।”
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए कहा कि उनसे यह खुलासा हुआ है कि सीबीएसई ने इस साल की कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली प्रदान करने वाले ठेकेदारों के लिए प्रस्तावों के वास्ते अपने अनुरोध में तकनीकी शर्तों को लगातार नरम किया। रमेश ने अन्य चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यूनतम ‘स्कैनिंग रेजोल्यूशन’ को 300 डीपीआई से घटाकर 200 डीपीआई कर दिया गया और अनिवार्य ‘कैपेबिलिटी मैच्योरिटी मॉडल इंटीग्रेशन’ (सीएमएमआई) प्रमाणन को स्तर-5 से घटाकर स्तर-3 कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जुर्माना के प्रावधानों को इस तरह बदला गया कि उनका ध्यान त्रुटियों के बजाय गति पर केंद्रित हो गया। उन्होंने कहा कि साथ ही, उत्तर पुस्तिकाओं की ‘स्पाइन’ (बाइंडिंग) काटे बिना स्कैन करने की शर्त हटा दी गई और रोबोटिक स्कैनर के प्रावधान को भी खत्म कर दिया गया।
जयराम रमेश ने शेयर किया पोस्ट
रमेश ने अपने पोस्ट में कहा, “अंतिम ‘आरएफपी’ अगस्त 2025 में जारी किया गया था, जो सीबीएसई कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं से केवल छह महीने पहले था। हम पहले से ही जानते हैं कि ओएसएम को लागू करने की जल्दबाजी में क्षेत्रीय केंद्रों पर प्रायोगिक परियोजना आयोजित करने के सीबीएसई बोर्ड के समझदारी भरे सुझाव को नजरअंदाज कर दिया गया था।” उन्होंने आरोप लगाया कि स्पष्ट रूप से, सीबीएसई की कार्रवाई में अनावश्यक जल्दबाजी तथा गुणवत्ता एवं छात्र-केंद्रित प्रावधानों को कमजोर करने की झलक मिलती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस वर्ष से ही ओएसएम को अपना लिया जाए। कांग्रेस नेता ने अपनी पोस्ट में प्रश्न किया, ”कई सवाल उठते हैं- ‘आरएफपी’ में तकनीकी शर्तों को क्यों कमजोर किया गया? क्या यह निविदा के लिए बोली लगाने वाले ठेकेदारों के कहने पर किया गया था? सीबीएसई ने उन प्रावधानों (उच्च स्कैनिंग रिज़ॉल्यूशन, गलत तरीके से स्कैन की गई प्रतियों के लिए जुर्माना आदि) को क्यों कमजोर किया जो त्रुटियों को कम कर सकते थे और छात्रों व मूल्यांकनकर्ताओं की सहायता कर सकते थे? किस तरह का दबाव था?”
रमेश ने यह सवाल भी उठाया कि क्षेत्रीय स्तर पर प्रायोगिक परियोजना के जरिए गहन जांच किए बिना और तकनीकी बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता से समझौता करके ‘ओएसएम’ को अपनाने में इतनी जल्दबाजी दिखाने के पीछे क्या कारण था। उन्होंने सवाल किया, “क्या सीओईएमपीटी की पृष्ठभूमि की जांच की गई थी, जिसे अंततः सीबीएसई ने अनुबंध दिया? क्या सीबीएसई ने इस तथ्य पर विचार किया कि सीओईएमपीटी का नाम पहले ‘ग्लोबारेना’ था और वह विवादों में घिरी रही थी? क्या मोदी सरकार के राजनीतिक आकाओं की ओर से यह सुनिश्चित करने का दबाव था कि ठेका सीओईएमपीटी को ही मिले?”
कांग्रेस नेता रमेश ने कहा, ”सीबीएसई को पाक साफ होना चाहिए और वेंडर के चयन, आरएफपी में किए गए संशोधनों, ओएसएम को अपनाने में दिखाई गई जल्दबाजी के कारणों और परीक्षाओं से पहले आयोजित बोर्ड बैठकों के विवरण से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए। शायद मंत्री प्रधान कीचड़ उछालने और राजनीति करने के बजाय इन सवालों के जवाब दे सकते हैं।”
पाली छिदपारा में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया हलषष्ठी पर्व
पाली छिदपारा। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर बुधवार, 2 सितंबर 2026 को पाली छिदपारा में हलषष्ठी पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। शिव मंदिर हनुमान के पास प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी माताओं ने अपने पुत्रों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर निर्जला व्रत रखा।इस अवसर पर माताओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर हलषष्ठी माता की कथा का श्रवण किया।
व्रत कथा का वाचन सुशील पांडेय जी (केराझरिया वाले महाराज) ने किया। कथा के दौरान हलषष्ठी व्रत के धार्मिक महत्व और इसकी परंपराओं के बारे में जानकारी दी गई।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम जी का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। इसी कारण इस दिन माताओं द्वारा पुत्रों की दीर्घायु और उनके मंगलमय जीवन के लिए व्रत रखने की परंपरा है।हलषष्ठी व्रत में हल से जुते हुए खेत में उगे अनाज या सब्जियों का सेवन नहीं किया जाता।
प्राकृतिक आहार के रूप में तालाब में स्वयं उगने वाले तिन्नी या पसई के चावल, महुआ तथा भैंस के दूध-दही का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं इस दिन गाय के दूध और घी का सेवन वर्जित माना जाता है।पर्व के दौरान महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर परिवार और विशेषकर अपने पुत्रों की दीर्घायु, स्वास्थ्य एवं सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
कोरबा पाली/सड़क सुरक्षा अभियान के अंतर्गत आयोजित जिला स्तरीय प्रतियोगिता में स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय (SAGES), पाली की कक्षा 11वीं की छात्रा कुमारी विभूति कुम्भकार ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया।कुमारी विभूति कुम्भकार की इस उल्लेखनीय उपलब्धि से विद्यालय परिवार एवं जिला कोरबा में हर्ष का माहौल है। छात्रा की सफलता पर विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं समस्त विद्यालय परिवार ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।कुमारी विभूति कुम्भकार की इस उल्लेखनीय उपलब्धि से विद्यालय परिवार एवं जिला कोरबा में हर्ष का माहौल है। छात्रा की सफलता पर विद्यालय के प्राचार्य श्री रामेश्वर प्रसाद लहरे, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं समस्त विद्यालय परिवार ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।यह उपलब्धि छात्र-छात्राओं में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा उन्हें यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
विस्थापित परिवार के बेटे को PNC कंपनी में रोजगार दिलाने का दावा, रकम लेने के बाद बात बिगड़ने का आरोप
कोरबा/दीपका। एसईसीएल गेवरा परियोजना से प्रभावित नरईबोध के एक विस्थापित परिवार ने वैकल्पिक रोजगार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीण छोटेलाल ने कलेक्टर को शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि उसके पुत्र अशोक कुमार राठौर को PNC कंपनी में रोजगार दिलाने के नाम पर पार्षद पति राकेश पटेल को ₹1 लाख दिए गए, लेकिन रकम देने के बाद भी उसके पुत्र को रोजगार नहीं मिल सका।
शिकायतकर्ता का कहना है कि नरईबोध में उसकी पत्नी के नाम दर्ज भूमि एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के लिए अधिग्रहित की गई थी। मुआवजा मिलने के बाद परिवार डोड़गीपारा, ग्राम पंचायत कटकीडबरी में निवास कर रहा है। विस्थापन के बाद परिवार को उम्मीद थी कि प्रभावित परिवार के बेरोजगार सदस्य को वैकल्पिक रोजगार का लाभ मिलेगा।
बायोडाटा देने के बाद रोजगार का भरोसा
शिकायत के मुताबिक, अशोक कुमार राठौर का बायोडाटा नरईबोध के पार्षद पति राकेश पटेल को दिया गया था। आरोप है कि उन्होंने एसईसीएल गेवरा क्षेत्र में कार्यरत ठेका कंपनी PNC में अशोक को वैकल्पिक रोजगार दिलाने का भरोसा दिया। इसी भरोसे के बाद करीब दो माह पहले ₹1 लाख दिए जाने का दावा शिकायत में किया गया है।
ग्रामीण का आरोप है कि रकम लेने के बाद अब रोजगार दिलाने से इनकार किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने मामले की जांच की मांग करते हुए यह भी आरोप लगाया है कि अन्य लोगों से राशि लेकर कंपनी में रोजगार दिलाया गया है।
रिश्तेदारों को रोजगार मिलने के आरोप की भी जांच की मांग
शिकायत में पार्षद पति के करीब 12 रिश्तेदारों को कथित रूप से कंपनी में रोजगार मिलने का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि कंपनी में लगाए गए कर्मचारियों के आधार कार्ड, परिचय पत्र और अन्य दस्तावेजों की जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रोजगार किस प्रक्रिया और पात्रता के आधार पर दिया गया।
कई अधिकारियों को भेजी शिकायत
छोटेलाल ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई करने और उसके पुत्र को वैकल्पिक रोजगार दिलाने की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक कोरबा, एसडीएम कटघोरा, महाप्रबंधक एसईसीएल गेवरा क्षेत्र, आयुक्त नगर निगम कोरबा और थाना प्रभारी कुसमुंडा को भी दी गई है।
शिकायत पत्र पर 15 जून 2026 की तारीख अंकित है।
न्याय नहीं मिला तो उच्च स्तर पर जाने की बात
शिकायतकर्ता और उसके समर्थन में सामने आए लोगों का कहना है कि यदि मामले की स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच नहीं होती और उन्हें न्याय नहीं मिलता, तो वे उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायत करेंगे। उनका कहना है कि मामले की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए।
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं: शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि समाचार तैयार किए जाने तक नहीं हो सकी है। वहीं, पार्षद पति राकेश पटेल का पक्ष भी सामने नहीं आया है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाएगा।