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45 घंटे ध्यान पर PM मोदी का लेटर:लिखा- शुरू में चुनावी कोलाहल दिल-दिमाग में गूंजा, साधना में जाते ही सब शून्य में समा गया

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नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कन्याकुमारी में 45 घंटे ध्यान साधना पर देशवासियों को एक लेटर लिखा है। इसमें उन्होंने अपने अनुभव बताए हैं। PM मोदी ने बताया कि शुरू में चुनावी कोलाहल मेरे दिल-दिमाग में गूंज रहा था, लेकिन धीरे-धीरे आंखें नम हो रही थीं। मैं शून्यता में जा रहा था।

PM मोदी ने ये लेटर 1 जून को कन्याकुमारी से दिल्ली वापस आने के दौरान शाम 4:15 से 7 बजे के बीच लिखा था। लेटर का शीर्षक है- कन्याकुमारी में साधना से नए संकल्प। इसमें उन्होंने कहा कि आज भारत का गवर्नेंस मॉडल दुनिया के कई देशों के लिए एक उदाहरण है।

PM मोदी का लेटर पूरा पढ़ें…

मेरे प्यारे देशवासियों,

लोकतंत्र की जननी में लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व का समापन हो चुका है। तीन दिन तक कन्याकुमारी में आध्यात्मिक यात्रा के बाद, कितने सारे अनुभव हैं, कितनी सारी अनुभूतियां हैं। मैं एक असीम ऊर्जा का प्रवाह स्वयं में महसूस कर रहा हूं। वाकई, 2024 के इस चुनाव में कितने ही सुखद संयोग बने हैं। अमृतकाल के इस पहले लोकसभा चुनाव में मैंने प्रचार अभियान, 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणास्थली मेरठ से शुरू किया था। मां भारती की परिक्रमा करते हुए इस चुनाव की मेरी आखिरी सभा पंजाब के होशियारपुर में हुई।

इसके बाद मुझे कन्याकुमारी में भारत माता के चरणों में बैठने का अवसर मिला। उन शुरुआती पलों में चुनाव का कोलाहल मन-मस्तिष्क में गूंज रहा था। रैलियों में, रोड शो में देखे अनगिनत चेहरे मेरी आंखों के सामने आ रहे थे। माताओं-बहनों-बेटियों का असीम प्रेम, उनका आशीर्वाद, उनकी आंखों में मेरे लिए वो विश्वास, वो दुलार। मैं सब कुछ आत्मसात कर रहा था। मेरी आंखें नम हो रही थीं। मैं शून्यता में जा रहा था, साधना में प्रवेश कर रहा था।

कुछ ही क्षणों में राजनीतिक वाद-विवाद, वार-पलटवार, आरोपों के स्वर-शब्द शून्य में समाते चले गए। मेरे मन में विरक्ति का भाव और तीव्र हो गया। मेरा मन बाहरी जगत से पूरी तरह निकल गया। इतने बड़े दायित्वों के बीच ऐसी साधना मुश्किल होती है, लेकिन कन्याकुमारी की धरती और स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा ने इसे आसान बना दिया। मैं ईश्वर का भी आभारी हूं कि उन्होंने मुझे जन्म से ये संस्कार दिए।

मैं ये भी सोच रहा था कि स्वामी विवेकानंद जी ने उस स्थान पर साधना के समय क्या अनुभव किया होगा! मेरी साधना का कुछ हिस्सा इसी तरह के विचार प्रवाह में बहा। इस विरक्ति के बीच भारत के लक्ष्यों के लिए निरंतर विचार उमड़ रहे थे। कन्याकुमारी के उगते हुए सूर्य ने मेरे विचारों को नई ऊंचाई दी, सागर की विशालता ने मेरे विचारों को विस्तार दिया, क्षितिज के विस्तार ने ब्रह्मांड की गहराई में समाई एकात्मकता, ‘वननेस’ का निरंतर एहसास कराया। ऐसा लग रहा था जैसे दशकों पहले हिमालय की गोद में किए गए चिंतन और अनुभव फिर से जीवित हो रहे हों।

साथियों, कन्याकुमारी का ये स्थान हमेशा मेरे मन के अत्यंत करीब रहा है। कन्याकुमारी में विवेकानंद शिला स्मारक का निर्माण श्री एकनाथ रानडे जी ने करवाया था। कश्मीर से कन्याकुमारी, ये हर देशवासियों के अन्तर्मन में रची-बसी हमारी पहचान हैं। ये वो शक्तिपीठ है, जहां मां शक्ति ने कन्याकुमारी के रूप में अवतार लिया था। इस दक्षिणी छोर पर मां शक्ति ने भगवान शिव के लिए तपस्या और प्रतीक्षा की, जो भारत के सबसे उत्तरी छोर के हिमालय पर विराज रहे थे।

कन्याकुुमारी संगमों के संगम की धरती है। हमारे देश की पवित्र नदियां अलग-अलग समुद्रों में जाकर मिलती हैं और यहां उन समुद्रों का संगम होता है। और यहां एक और महान संगम दिखता है- भारत का वैचारिक संगम! यहां विवेकानंद शिला स्मारक के साथ ही संत तिरुवल्लूवर की विशाल प्रतिमा, गांधी मंडपम और कामराजर मणि मंडपम हैं। महान नायकों के विचारों की ये धाराएं यहां राष्ट्र चिंतन का संगम बनाती हैं।

जो लोग भारत के राष्ट्र होने और देश की एकता पर संदेह करते हैं, उन्हें कन्याकुमारी की धरती एकता का अमिट संदेश देती है। कन्याकुमारी में संत तिरुवल्लूवर की विशाल प्रतिमा, समुंदर में मां भारती के विस्तार को देखती हुई प्रतीत होती है। उनकी रचना ‘तिरुक्कुरल’ तमिल साहित्य के रत्नों से जड़ित एक मुकुट के जैसी है। इसमें जीवन के हर पक्ष का वर्णन है, जो हमें स्वयं और राष्ट्र के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा देता है।

आज भारत का गवर्नेंस मॉडल दुनिया के कई देशों के लिए एक उदाहरण है। सिर्फ 10 सालों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। गरीब के सशक्तिकरण से लेकर लास्ट माइल डिलीवरी तक, समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को प्राथमिकता देने के हमारे प्रयासों ने विश्व को प्रेरित किया है। नए भारत का ये स्वरूप हमें गर्व और गौरव से भर देता है, लेकिन साथ ही ये 140 करोड़ देशवासियों को उनके कर्तव्यों का एहसास भी करवाता है।

अब एक भी पल गंवाए बिना हमें बड़े दायित्वों-बड़े लक्ष्यों की दिशा में कदम उठाने होंगे। हमें नए सपने देखने हैं। सपनों को अपना जीवन बनाना है और उन सपनों को जीना शुरू करना है। हमें भारत के विकास को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखना होगा, इसके लिए ये जरूरी है कि हम भारत के सामर्थ्य को समझें।

स्वामी विवेकानंद ने 1897 में कहा था कि हमें अगले 50 वर्ष केवल और केवल राष्ट्र के लिए समर्पित करने होंगे। उनके इस आह्वान के ठीक 50 साल बाद, 1947 में भारत आजाद हो गया। आज हमारे पास वैसा ही स्वर्णिम अवसर है। हम अगले 25 वर्ष केवल और केवल राष्ट्र के लिए समर्पित करें। हमारे ये प्रयास आने वाली पीढ़ियों और आने वाली शताब्दियों के लिए नए भारत की सुदृढ़ नींव बनकर अमर रहेंगे। मैं देश की ऊर्जा को देखकर ये कह सकता हूं कि लक्ष्य अब दूर नहीं है। आइए, तेज कदमों से चलें…मिलकर चलें, भारत को विकसित बनाएं।

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भाजपा-कांग्रेस विधायकों में हाथापाई:राहुल को पप्पू कहा, खामेनेई की तस्वीर लहराई, CM बोले- ईरान पर युद्ध थोपा

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श्रीनगर,एजेंसी। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को लेकर प्रदर्शन हुआ। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता खामेनेई की तस्वीर लेकर सदन के अंदर पहुंचे और समर्थन में नारेबाजी की। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओ ने खामेनेई के पोस्टर भी लहराए।

इस बीच, सदन में कांग्रेस और बीजेपी नेताओं के बीच धक्का-मुक्की का भी वीडियो सामने आया। हालांकि, ये विवाद भाजपा नेताओं के राहुल पर कमेंट को लेकर था। कांग्रेस विधायक इरफान हाफिज पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगा रहे थे।

जवाब में भाजपा विधायक युद्धवीर सेठी ने कहा, ‘राहुल गांधी पप्पू हैं।’ इसके बाद दोनों नेताओं में हाथापाई होने लगी। वहीं, ईरान युद्द पर सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा- ईरान पर यह युद्ध थोपा गया। मानवता की हत्या हुई है।

पीएम मोदी और राहुल गांधी पर कमेंट को लेकर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में हाथापाई हुई।

पीएम मोदी और राहुल गांधी पर कमेंट को लेकर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में हाथापाई हुई।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की तस्वीर लेकर विरोध प्रदर्शन करता नेशनल कॉन्फ्रेंस का विधायक।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की तस्वीर लेकर विरोध प्रदर्शन करता नेशनल कॉन्फ्रेंस का विधायक।

नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक बोले- हम ईरान के साथ खड़े हैं

नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक ने कहा, हम ईरान के साथ खड़े हैं। हमारी पार्टी और जम्मू-कश्मीर की सरकार उनके साथ खड़ी है। जैसे CM उमर अब्दुल्ला ने पिछली बार सिविल सोसाइटी में अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की निंदा की थी। वैसे ही, आज हम सब यहां खड़े हैं।

हम समझते हैं कि जिस तरह से खामेनेई को मारा गया, किसी भी देश को दूसरे देश पर हमला करने का कोई हक नहीं है। मुझे लगता है कि देश की टॉप लीडरशिप को इसकी निंदा करनी चाहिए। हम ईरान के लोगों का सपोर्ट कर रहे हैं।

कश्मीर में ईरान के लिए रू.18 करोड़ चंदा जुटाया गया

कश्मीर घाटी में ईरान के समर्थन में करोड़ों रुपए का चंदा जुटाया गया है। इससे देश की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। आशंका है कि इन पैसों का इस्तेमाल आतंकी फंडिंग में हो सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, अब तक करीब रू.18 करोड़ का चंदा जुटाया गया है। इनमें से 85% राशि शिया समुदाय ने दान की है। कश्मीर का बड़गाम शिया बहुल इलाका है। यहां से करीब रू.9.5 करोड़ जुटाए गए हैं।

यह फंडरेजिंग अभियान जकात और सदका के जरिए लिया जा रहा है। इसका उद्देश्य मौजूदा संघर्ष से प्रभावित ईरानी नागरिकों की मदद करना बताया गया है।

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रामलला का सूर्य तिलक, 9 मिनट ललाट पर पड़ीं किरणें:पंचामृत से अभिषेक, स्वर्ण जड़ित पीतांबर पहनाया, अयोध्या में 10 लाख श्रद्धालु पहुंचे

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अयोध्या,एजेंसी। अयोध्या में रामनवमी पर शुक्रवार दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला का सूर्य तिलक हुआ। 9 मिनट तक भगवान के ललाट पर नीली किरणें पड़ीं। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद रामलला का यह दूसरा सूर्य तिलक है। पीएम मोदी ने टीवी पर इसे लाइव देखा।

सूर्य तिलक के साथ ही रामलला का जन्म हो गया। इस दौरान 14 पुजारी गर्भगृह में मौजूद रहे। उन्होंने विशेष पूजा और आरती की। सूर्य तिलक के बाद कुछ देर के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए गए। रामलला को 56 तरह के व्यंजन का भोग लगाया गया।

सूर्य तिलक के लिए अष्टधातु के 20 पाइप से 65 फीट लंबा सिस्टम (स्ट्रक्चर) बनाया गया है। 4 लेंस और 4 मिरर के जरिए गर्भगृह तक रामलला के मस्तक पर किरणें पहुंचाई गईं।

गर्भगृह को फूलों से सजाया गया है। सुबह 5.30 बजे रामलला को पीतांबर पहनाया गया। फिर आरती की गई। आज आम दिनों के मुकाबले भक्त 3 घंटे ज्यादा रामलला के दर्शन कर पाएंगे। सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक यानी 18 घंटे दर्शन होंगे। पहले सुबह 6:30 से रात 9:30 तक दर्शन होते थे।

राम जन्मभूमि ट्रस्ट के मुताबिक, मंदिर परिसर में लंबी लाइनें लगी हैं। राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर भीड़ ज्यादा है। करीब 10 लाख लोग रामलला के दर्शन करने पहुंचे हैं।

रामलला के सूर्य तिलक के दौरान भगवान के ललाट पर 9 मिनट तक नीली किरणें पड़ीं।

रामलला के सूर्य तिलक के दौरान भगवान के ललाट पर 9 मिनट तक नीली किरणें पड़ीं।

रामलला को स्वर्ण जड़ित पीतांबर वस्त्र पहनाए गए। उन्हें सोने का मुकुट, हार पहनाया गया।

रामलला को स्वर्ण जड़ित पीतांबर वस्त्र पहनाए गए। उन्हें सोने का मुकुट, हार पहनाया गया।

दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला का सूर्य तिलक किया गया।

दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला का सूर्य तिलक किया गया।

पीएम मोदी ने टीवी पर रामलला का सूर्य तिलक देखा।

पीएम मोदी ने टीवी पर रामलला का सूर्य तिलक देखा।

सूर्य तिलक से पहले राम मंदिर में रामलला का पंचामृत अभिषेक किया गया।

सूर्य तिलक से पहले राम मंदिर में रामलला का पंचामृत अभिषेक किया गया।

सूर्य तिलक से पहले रामलला की विशेष पूजा-अर्चना की गई।

सूर्य तिलक से पहले रामलला की विशेष पूजा-अर्चना की गई।

राम नवमी पर राम मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी है।

राम नवमी पर राम मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी है।

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सरकार ने कहा- देश में लॉकडाउन नहीं लगेगा:LPG प्रोडक्शन 40% बढ़ा

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नई दिल्ली,एजेंसी। सरकार ने शुक्रवार को साफ किया है कि देश में लॉकडाउन नहीं लगेगा। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू समेत तीन मंत्रियों ने लॉकडाउन की खबरों को गलत बताया है।

वहीं, पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने भी शुक्रवार को बताया कि देश में लॉकडाउन की स्थिति नहीं है। सभी रिफाइनरी 100 फीसदी कैपेसिटी से काम कर रही हैं। देश में LPG प्रोडक्शन 40% बढ़ा है।

इधर, केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर नजर रखने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रियों की कमेटी का गठन किया है।

पेट्रोलियम मंत्रालय की 4 बड़ी बातें…

  1. कीमतें बढ़ीं, सप्लाई प्रभावित: पश्चिम एशिया के संघर्ष से क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हुए, सप्लाई चेन पर असर पड़ा।
  2. भारत के पास पर्याप्त स्टॉक: देश में अगले 2 महीनों के लिए कच्चा तेल उपलब्ध है। LPG, LNG और PNG की सप्लाई भी पहले की तरह जारी है।
  3. रेस्टोरेंट, ढाबों को प्राथमिकता दी गई: सरकार ने पहले कॉमर्शियल सप्लाई घटाई, फिर धीरे-धीरे बढ़ाकर अब 70% तक कर दी। 14 मार्च से अब तक 30,000 टन LPG सप्लाई की गई। रेस्टोरेंट, ढाबों को प्राथमिकता दी गई है।
  4. अफवाहों से पंपों पर भीड़: कुछ जगहों पर लंबी कतारें दिखीं, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल-डीजल या गैस की कोई कमी नहीं है।

सरकार के 3 मंत्रियों ने लॉकडाउन की खबरों को नकारा…

लॉकडाउन की अफवाहें प्रधानमंत्री मोदी के 4 दिन पहले संसद में दिए गए बयान के बाद शुरू हुईं। उन्होंने कहा था कि इस युद्ध के कारण दुनिया में जो कठिन हालात बने हैं, उनका प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की आशंका है। हम कोरोना के समय भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। शुक्रवार को सरकार के तीन मंत्रियों ने इसे नकारा…

  • संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू: लॉकडाउन की अफवाह कौन उड़ा रहा है। पीएम ने साफ तौर पर कहा था कि पैनिक नहीं होना है। आम लोगों को तकलीफ न हो इसके लिए टॉप लेवल से लेकर नीचे लेवल तक, यहां तक कि पीएम खुद मॉनीटर कर रहे हैं।
  • पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी: लॉकडाउन को लेकर फैल रही अफवाहें पूरी तरह गलत हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि सरकार के स्तर पर ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। ऐसे समय में जरूरी है कि हम सभी शांत, जिम्मेदार और एकजुट रहें।
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण: मैं लोगों को भरोसा दिलाना चाहती हूं कि कोविड के दौरान जैसा लॉकडाउन हमने देखा, वैसा कोई लॉकडाउन नहीं होगा। मुझे हैरानी है कि कुछ नेता कह रहे हैं कि लॉकडाउन होगा और फ्यूल की कमी होगी। ये बेबुनियाद बातें हैं।

लॉकडाउन की बात पर राहुल-खड़गे का बयान

राहुल गांधी: मोदी जी ने कह दिया कि कोविड जैसा समय आने वाला है। कोविड में जो किया था वो भूल गए कि कितने लोग मरे थे। कैसी दुखद स्थिति हुई थी।

मल्लिकार्जुन खड़गे: कोविड के दौरान हुई दुखद पीड़ा को नहीं भूला जा सकता। ऐसे में पीएम क्या 140 करोड़ भारतीयों को एक बार फिर खुद ही ऊर्जा संकट के साथ-साथ भोजन, उर्वरक और महंगाई के बढ़ते दबाव जैसे संकट का सामना करने के लिए कह रहे हैं।

रूसी राष्ट्रपति ने कहा था- जंग की तुलना कोविड से की जा रही

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि खाड़ी जंग के दोषियों सहित कोई भी व्यक्ति दुनिया पर इसके पड़ने वाले परिणामों का अनुमान नहीं लगा सकता। इसकी तुलना कोविड महामारी से ही की जा सकती है, जिसके गंभीर परिणाम निकले थे।

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