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कोरबा

पीएम सूर्य घर : उजाले के साथ विश्वास की नई सुबह, सुशासन और संकल्प से जगमगाता हर घर

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सूरज की किरणों से हितग्राही इकबाल  व संजय अग्रवाल  ऊर्जा उत्पादन की दिशा में बने आत्मनिर्भर

सैकड़ो परिवार व व्यवसायी योजना का उठा रहे लाभ

कोरबा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आज ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित विकास का प्रतीक बन चुकी है। देश को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ाने तथा आम नागरिकों को सस्ती और सुलभ बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस योजना की परिकल्पना की गई। प्रधानमंत्री श्री मोदी का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि “हर नागरिक को ऊर्जा का अधिकार है और यह ऊर्जा पर्यावरण के अनुकूल तथा  विकास को बढ़ावा देने वाली होनी चाहिए।” इसी विजन को मूर्त रूप देने के लिए छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर घर-घर में रोशनी पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
यह योजना सिर्फ बिजली उत्पादन का साधन नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिक विकास और बदलते जीवन-स्तर के साथ बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता से न केवल पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि लागत पर भी अधिक बोझ पड़ता है। ऐसे में सौर ऊर्जा जैसे अक्षय स्रोतों का अधिकतम उपयोग करना समय की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना इसी दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है, जो आमजन को उनके घर की छत पर ही स्वच्छ और मुफ्त बिजली का विकल्प उपलब्ध कराती है।
छत्तीसगढ़ राज्य में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में इस योजना का सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है। राज्य सरकार ने सुनिश्चित किया है कि अधिक से अधिक नागरिक इस योजना से लाभान्वित हों। इसके लिए जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों द्वारा पोर्टल के माध्यम से आवेदन की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और लाभार्थियों को सब्सिडी सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जा रही है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा दी जाती है। योजना का सबसे बड़ी लाभ की बात यह है कि इसमें लाभार्थियों को 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराया जाता है। इससे न केवल घरों और व्यवसायों में बिजली की आवश्यकताएँ पूरी होती हैं, बल्कि अतिरिक्त ऊर्जा ग्रिड को दी जा सकती है, जिससे बिल में और भी राहत मिलती है।
यह योजना लोगों के जीवन में व्यापक परिवर्तन ला रही है। पहले जहाँ बिजली खर्च आम नागरिकों के लिए आर्थिक बोझ बना रहता था, वहीं अब लोग अपने घर की छत पर स्थापित सौर पैनलों से आत्मनिर्भर बन रहे हैं। इससे न केवल उनकी मासिक आय में बचत हो रही है, बल्कि वे पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ ऊर्जा देने की दिशा में भी अहम योगदान दे रहे हैं।
आज कोरबा सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में सैकड़ों परिवार और व्यवसायी इस योजना से लाभ उठा रहे हैं। यह बदलाव केवल आर्थिक राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की सोच और जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक भी है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की इस दूरदर्शी पहल ने ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है, जो न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए आदर्श बन रही है।  जिले के कसनिया गाँव के इकबाल सिंह और संजय अग्रवाल जैसे नागरिक बताते हैं कि योजना से उन्हें नई ऊर्जा मिली है।
इकबाल सिंह (होटल व्यवसायी) ने कहा मैं कई वर्षों से होटल व्यवसाय से जुड़ा हूँ। हमारे यहाँ रोज़ाना बहुत से ग्राहक आते हैं और उनके लिए आरामदायक माहौल बनाना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। पहले मुझे  चिंता रहती थी कि इतनी बड़ी व्यवस्था में ऊर्जा की लगातार आवश्यकता कैसे पूरी होगी। लेकिन जब मुझे प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी मिली, तो लगा जैसे मेरे जीवन की एक बड़ी समस्या का समाधान मिल गया हो। योजना की प्रक्रिया बेहद सरल और पारदर्शी रही। आज मेरे होटल का संचालन पूरी तरह सौर ऊर्जा पर आधारित है। अब न केवल मेरे व्यवसाय को मजबूती मिली है, बल्कि मैं यह भी महसूस करता हूँ कि सूरज की रोशनी ही मेरे कारोबार की असली ताकत बन चुकी है।


सबसे बड़ी खुशी यह है कि अब मैं अपने व्यवसाय को पर्यावरण के अनुकूल भी बना पाया हूँ। मुझे गर्व है कि मैं आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वातावरण की दिशा में योगदान दे रहा हूँ। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का धन्यवाद करता हूँ, जिन्होंने हम जैसे व्यवसायियों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया।
संजय अग्रवाल (व्यवसायी) ने कहा मेरा मानना है कि हर व्यक्ति चाहता है कि उसका घर रोशनी से भरा रहे और परिवार को कभी किसी तरह की असुविधा न हो। पहले मैं सोचता था कि घर की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना हमेशा एक बड़ी चुनौती रहेगी। लेकिन जब मैंने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना को अपनाया, तो मेरी सोच ही बदल गई।
आज मेरे घर की ऊर्जा जरूरतें मेरी अपनी छत से पूरी हो रही हैं। सूरज की किरणें अब सीधे मेरे जीवन में आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन गई हैं। जितनी तेज धूप होती है, उतनी ही अधिक रोशनी और शक्ति घर में संचित होती है। अब न सिर्फ घर में सुविधा बढ़ी है, बल्कि परिवार को यह भरोसा भी है कि हमारी ऊर्जा जरूरतें कभी बाधित नहीं होंगी।
इस योजना ने मुझे यह सिखाया है कि ऊर्जा सिर्फ खर्च करने की चीज नहीं, बल्कि भविष्य के लिए संचित करने की जिम्मेदारी भी है। यह पहल हमें पर्यावरण की रक्षा करने और हर नागरिक को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाती है। मैं अपने अनुभव से कह सकता हूँ कि यह योजना सिर्फ रोशनी ही नहीं लाती, बल्कि सोच में भी बड़ा बदलाव लाती है। इसके लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री श्री साय को धन्यवाद।
कोरबा जिले में आज बहुत से परिवार योजना से जुड़ चुके हैं, सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में हस्तांतरित हो रही है, हर घर और हर व्यवसाय में सौर ऊर्जा से नई ऊर्जा और नई उम्मीद जग रही है और लाभार्थी आगे बढ़कर अन्य नागरिकों को भी योजना से जोड़ने की प्रेरणा दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री श्री मोदी का “सभी के लिए ऊर्जा” का संकल्प और मुख्यमंत्री श्री साय के सुशासन में इस योजना को और अधिक सशक्त बना रहे हैं। यह केवल एक पहल भर नहीं है, बल्कि देश के हर नागरिक को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने का ऐतिहासिक अभियान है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आज गाँव से लेकर शहर तक, छोटे व्यापार से लेकर बड़े उद्योग तक, हर स्तर पर आशा की किरण बन चुकी है।

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कोरबा

छत्तीसगढ़ में 125 अफसरों का ट्रांसफर:अपर-डिप्टी और संयुक्त कलेक्टर भी बदले, पुलक भट्टाचार्य को सूडा के अतिरिक्त CEO का प्रभार

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के 125 अधिकारियों का तबादला किया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने मंगलवार को तबादला आदेश जारी किया। अधिकारियों को प्रशासनिक आधार पर नई पदस्थापना दी गई है।

तबादला सूची में अपर कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर और प्रवर श्रेणी के अधिकारी शामिल हैं। कई जिलों के संयुक्त कलेक्टर भी बदले गए हैं। जिलों से लेकर मंत्रालय स्तर तक अधिकारियों का फेरबदल किया गया है।

पुलक भट्टाचार्य को सूडा के अतिरिक्त CEO का प्रभार दिया गया है।

पुलक भट्टाचार्य को सूडा के अतिरिक्त CEO का प्रभार दिया गया है।

पुलक भट्टाचार्य को सूडा के अतिरिक्त CEO का प्रभार

पुलक भट्टाचार्य सामान्य प्रशासन विभाग में उप सचिव के पद पर पदस्थ हैं। वे पीएमओटी मिशन कर्मयोगी के समन्वयक और नगरीय प्रशासन-विकास संचालनालय में अपर संचालक के अतिरिक्त प्रभार में हैं।

आदेश के अनुसार, वर्तमान दायित्वों के साथ उन्हें राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा), रायपुर के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

विपुल गुप्ता को कर्मकार मंडल का अतिरिक्त प्रभार

विपुल कुमार गुप्ता श्रम विभाग में उप सचिव के पद पर पदस्थ हैं। उन्हें वर्तमान दायित्वों के साथ सचिव, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, रायपुर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

विनायक शर्मा को नवा रायपुर विकास प्राधिकरण में प्रबंधक बनाया

विनायक शर्मा छत्तीसगढ़ राज्य शिष्टाचार कार्यालय में राज्य शिष्टाचार अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं। उनके पास उप सचिव, खनिज साधन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी है।

आदेश के अनुसार, उन्हें नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण में प्रबंधक के पद पर पदस्थ किया गया है।

डॉ. ऋतु वर्मा को उच्च शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार

डॉ. ऋतु वर्मा सामान्य प्रशासन विभाग में उप सचिव (कक्ष-6 एवं 7) के पद पर पदस्थ हैं। उन्हें वर्तमान दायित्वों के साथ उच्च शिक्षा विभाग के उप सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

वैभव कुमार क्षेत्रज्ञ को छत्तीसगढ़ संवाद के प्रभार से हटाया

वैभव कुमार क्षेत्रज्ञ कृषि विकास-किसान कल्याण और जैव प्रौद्योगिकी विभाग में अवर सचिव के पद पर पदस्थ हैं। वे छत्तीसगढ़ संवाद में उप महाप्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।

आदेश के अनुसार, उन्हें छत्तीसगढ़ संवाद के उप महाप्रबंधक के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। उनके शेष दायित्व यथावत रहेंगे।

पुष्पेन्द्र शर्मा बने राज्य शिष्टाचार अधिकारी

पुष्पेन्द्र कुमार शर्मा छत्तीसगढ़ राज्य शिष्टाचार अधिकारी के कार्यालय में सत्कार अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं। आदेश के अनुसार, उन्हें राज्य शिष्टाचार अधिकारी, मंत्रालय, नवा रायपुर अटल नगर के पद पर पदस्थ किया गया है।

गौतम सिंह को मार्कफेड के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया

गौतम सिंह सुशासन-अभिसरण विभाग में अवर सचिव के पद पर पदस्थ हैं और मार्कफेड का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।

आदेश के अनुसार, उन्हें मार्कफेड के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। उनके शेष दायित्व यथावत रहेंगे।

मोनिका जयनशीने बनीं डिप्टी कलेक्टर

मोनिका जयनशीने माध्यमिक शिक्षा मंडल, रायपुर में उप सचिव के पद पर पदस्थ हैं। वे नवाचार आयोग का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही थीं।

आदेश के अनुसार, उन्हें डिप्टी कलेक्टर, दुर्ग के पद पर पदस्थ किया गया है।

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कोरबा

रायपुर : संजू की स्वर्णिम जीत पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने थपथपाई पीठ, कहा छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को मिलेगा उनके अनुभव का लाभ

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परिजनों के साथ उप मुख्यमंत्री साव से मिलीं संजू देवी, भारतीय महिला कबड्डी टीम के गोल्ड मेडल तक का सफर किया साझा

परिजनों के साथ उप मुख्यमंत्री श्री साव से मिलीं संजू देवी, भारतीय महिला कबड्डी टीम के गोल्ड मेडल तक का सफर किया साझा
परिजनों के साथ उप मुख्यमंत्री श्री साव से मिलीं संजू देवी, भारतीय महिला कबड्डी टीम के गोल्ड मेडल तक का सफर किया साझा

रायपुर/कोरबा 29 सितम्बर 2026। एशियन गेम्स-2026 में महिला कबड्डी में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी ने रायपुर लौटने के बाद उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव से मुलाकात की। श्री साव ने अपने नवा रायपुर स्थित शासकीय निवास कार्यालय में हुई मुलाकात के दौरान संजू देवी की उपलब्धि पर उनका अभिनंदन कर हौसला बढ़ाया। उन्होंने संजू की माता श्रीमती अमरीका बाई और पिता रामजी का भी अभिनंदन किया।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने संजू देवी को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने भारत के साथ छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ लोगों को भी गौरवान्वित किया है। उन्होंने संजू से एशियन गेम्स के अनुभव और उनकी टीम के स्वर्ण पदक तक के अजेय सफर की जानकारी ली। श्री साव ने उनसे प्रतियोगिता के दौरान मिले अनुभवों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की।
श्री साव ने संजू का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिला उनका अनुभव केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रहेगा। इस अनुभव का लाभ छत्तीसगढ़ के अन्य खिलाड़ियों को भी मिलेगा। श्री साव से संजू देवी की मुलाकात के दौरान खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार और संचालक श्रीमती आकांक्षा शिक्षा खलखो भी मौजूद थीं।

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कोरबा

जाति जनगणना और प्रत्येक जाति के लिए विशिष्ठ वैज्ञानिक कोड तथा वैज्ञानिक वर्गीकरण सुनिश्चित करने राष्ट्रपति के नाम ओबीसी कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापन

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कोरबा। जिला कांग्रेस कमेटी ओबीसी वर्ग के जिला अध्यक्ष गजानंद प्रसाद साहू (शहर) राजेश श्रीवास (ग्रामीण) तथा प्रदेश उपाध्यक्ष श्यामसुंदर सोनी, जिला कांग्रेस कमेटी शहर के जिलाध्यक्ष मुकेश राठौर, ग्रामीण जिलाध्यक्ष मनोज चौहान के नेतृत्व में एक रैली निकाली गई तथा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।

कांग्रेसजनों ने राष्ट्रपति से मांग की है कि जनगणना जाति के आधार पर की जाए और प्रत्येक जाति के लिए विशिष्ठ वैज्ञानिक कोड, वैज्ञानिक वर्गीकरण सुनिश्चित किया जाए। जिला कांग्रेस कमेटी शहर के जिलाध्यक्ष गजानंद प्रसाद साहू ने बताया कि ओबीसी कांग्रेस द्वारा रैली निकाली गई और राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें मांग की गई है कि जनगणना जाति के आधार पर सुनिश्चित की जाए और वैज्ञानिक, प्रमाणित एवं नीतिनिर्माण में उपयोगी जाति जनगणना हेतु ओबीसी श्रेणी मानकीकृत जाति सूची, प्रत्येक जाति के लिए विशिष्ठ वैज्ञानिक कोड तथा वैज्ञानिक वर्गीकरण सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

ज्ञापन में लिखा गया है कि अगामी जनगणना में जातियों की गणना की पद्धति से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषय की ओर आपका ध्यान आकर्षित करते हुए ज्ञापन प्रस्तुत किया जा रहा है। जाति जनगणना सामाजिक न्याय का ऐतिहासिक माध्यम तभी बन सकती है, जब देश की प्रत्येक जाति एवं समुदाय की सही, वैज्ञानिक और एकरुप गणना हो।
केवल किसी व्यक्ति से उसकी जाति पूछ लेना पर्याप्त नहीं है। यह भी सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि एक ही प्रमाणित जाति के अलग-अलग नाम, पर्यायवाची नाम, क्षेत्रीय नाम तथा उच्चारण एवं वर्तनी के अंतर के कारण उसे अनेक अलग-अलग जातियों के रूप में दर्ज न कर दिया जाए।

समस्या: एक जाति-अनेक नाम
भारत की सामाजिक संरचना अत्यंत विविध है। एक ही जाति अथवा समुदाय को अलग-अलग राज्यों, क्षेत्रों और भाषाओं में अलग-अलग नामों, उपनामों, परंपरागत व्यवसाय-सुचक नामों तथा वर्तनी से जाना जा सकता है। ज्ञापन में कहा गया है केन्द्र एवं राज्य सरकारों की आधिकारिक सूचियों तथा अन्य प्रमाणित अभिलेखों के आधार पर प्रत्येक राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेश के लिए वैज्ञानिक कास्ट मास्टर लिस्ट तैयार की जाए।
किसी भी दो नामों को केवल समानता के अधार पर स्वत: एक जाति न मानी जाए। उनका एकीकरण आधिकारिक दस्तावेजों, ऐतिहासिक एवं मानव शास्त्रीय प्रमाणों एवं विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद ही किया जाए।
जाति जनगणना की अंतिम पद्धति तय करने से पहले एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित की जाए। इसके अलावा ज्ञापन में कई विषयों पर राष्ट्रपति का ध्यान आकर्षित किया गया है।

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