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कोरबा

परियोजना अधिकारी ने नौकरी के नाम पर ठगे 10 लाख:युवती ने मांगे पैसे तो दी धमकी, कहा-पुलिस से पहचान 2 मिनट में उठवा दूंगी

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दुर्ग-भिलाई,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में महिला-बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी ने सरकारी नौकरी के नाम पर 10 लाख रुपए की ठगी की है। उसने पहले महिला को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनाने के नाम पर 2 लाख मांगें की। लेकिन उसने देने से मना किया तो अधिकारी ने बेटी को जिला परियोजना अधिकारी बनाने का झांसा दिया और दो किश्त में 10 लाख रुपए ऐंठ लिए।

यह मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है। दरअसल, रचिता नायडू महिला-बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी के रूप में पदस्थ है। दुर्ग में पदस्थ रहते हुए उसने वार्ड नंबर- 3 में रहने वाले श्वेता जांगिड से ठगी की है। उसने सोने गिरवी रखकर अधिकारी को पैसे दिए थे। लेकिन, उसका इंटरव्यू लिस्ट में नाम नहीं आया, जिसके बाद वह पैसे वापस करने का दबाव बनाने लगी।

युवती की आरोपी है कि इसके बाद भी उससे 6 लाख रुपए और मांगे जा रहे थे। पैसे नहीं देने पर जान से मारने की धमकी और थाने से उठवा लेने की बात कही गई। यह भी आरोप है कि पैसे नहीं मिलने पर रायपुर के एक टीआई ने उसे महिला अधिकारी के घर के पास नहीं भटकने की बात कहकर जेल भेजने की धमकी दी। फिलहाल, इस मामले में आरोपी अधिकारी फरार चल रही है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, वार्ड नंबर- 3 के मठपारा निवासी श्वेता जांगिड (24) की मां शीतल जांगिड ने अप्रैल 2023 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के लिए आवेदन भरा था। एक अन्य आंगनबाड़ी के कार्यकर्ता के जरिए से पता चला कि परियोजना अधिकारी रचिता नायडू इस पद की नियुक्ति करा सकती है। इसके बाद शीतल अपने बेटी के साथ अधिकारी से ऋषभ नगर स्थित उनके घर मिलने पहुंची।

जान-पहचान बढ़ाया

परियोजना अधिकारी ने शीतल की नौकरी लगाने के लिए 2 लाख रुपए की मांग की। लेकिन पैसे नहीं होने के कारण उन्होंने मना कर दिया। बाद में परियोजना अधिकारी ने श्वेता से दोस्ती की और उसके के घर आना-जाना शुरू कर दिया। जान पहचान बढ़ाकर अधिकारी ने युवती से पूछा कि तुम्हारे घर में कितना सोना है। उसने बताया कि मेरी शादी के लिए मां ने गहने रखे हैं।

सीजीपीएसी की करवाई तैयारी

यह सुनने के बाद परियोजना अधिकारी ने उसे सीजीपीएसी की तैयारी करवाने का आश्वासन दिया और पढ़ाना भी शुरू कर दिया। इस दौरान बिलासपुर जिले में (DCPO) जिला बाल संरक्षण अधिकारी की पोस्ट निकली। उसने श्वेता को फॉर्म भरने को कहा। ये भी कहा कि यह पोस्ट मेरे हाथ में है। तुम्हारी नौकरी में आसानी से लगवा दुंगी।

सोना गिरवी रखकर दिए पैसे

आवेदन करने के 10 दिन के बाद से ही उसने नौकरी लगाने के नाम से 5 लाख रुपए की मांग करने लगी। भरोसा जीतने एक व्यक्ति को मंत्री के घर का आदमी बताया। 17 दिसंबर 2024 को श्वेता की मां ने सोना गिरवी रखकर अधिकारी को 5 लाख रुपए दिए। इसके बाद उसने भरोसा दिलाया कि वो उसकी नौकरी लगवा देगी। 2025 अप्रैल में उसने फिर 5 लाख की डिमांड की।

बड़ी पोस्ट की बात कहकर पैसे की डिमांड

परियोजना अधिकारी ने बड़ी पोस्ट की बात कहकर पैसों की डिमांड कर रही थी। नहीं देने पर पहले के भी 5 लाख डूबने की बात कही। इस बीच उसने दितेश नाम के शख्स से बातचीत करवाया और उसे करीबी बताया। 21 मई 2025 उन्होंने बचे हुए गहने को गिरवी रखकर 5 लाख रुपए रायपुर वाले घर में जाकर दिया। उसने उन्हें आश्वासन दिया कि अब नौकरी लग जाएगी। एक सप्ताह बाद उसने दोबारा कॉल कर 6 लाख की डिमांड की। मना करने और पैसे वापस मांगने पर गाली-गलौज भी की।

इंटरव्यू के लिए नहीं आया नाम तो मांगे पैसे

23 जुलाई 2025 को जिला संरक्षण अधिकारी का इंटरव्यू निकला। लेकिन उसमें श्वेता का नाम नहीं था। इसके बाद उसने कॉल किया तो परियोजना अधिकारी ने कहा कि पता करती हूं। लेकिन उसने कॉल रिसीव करना बंद कर दिया और श्वेता के नंबर को ब्लॉक कर दिया। जब मां-बेटी अधिकारी के घर गए तो उसने बड़े पुलिस अफसरों से पहचान होने की बात कहकर दो मिनट में किसी भी थाने से उठवाने की धमकी दी।

पुलिस ने दी जेल भेजने की धमकी

अगले दिन उन्हें एक कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपने आप को रायपुर थाना प्रभारी दीपेश जायसवाल बताया और कहा कि ​​​​​​​रचिता नायडू के घर के आसपास नही दिखना, फोन नहीं करना, नहीं तो तुम्हे जेल भेज दुंगा। हालांकि, जब इस संबंध में टीआई दीपेश जायसवाल से बात की गई तो उन्होंने कॉल करने की बात तो स्वीकार की। लेकिन धमकी देने की बात को सिरे से नकार दिया।

उन्होंने कहा कि हां मैंने ही कॉल किया था। लेकिन मैंने कोई धमकी नहीं दी है। अगर मैंने कोई धमकी दी है तो वो इसका ऑडियो मुझे सुना दें। मैंने समझाने के लिए कॉल किया था, एक मैडम है, शासकीय परियोजना अधिकारी है। उसने अपनी समस्या बताई थी कि वो महिला धमकी दे रही है, तो मैंने कहा कि मैं बात करके देखता हूं। जिसके बाद मैंने कॉल किया कि पैसे के लिए क्यों धमकी दे रही हो।

मैंने ही कहा था एफआईआर करवाने- TI

पैसे का लेन-देन है ठीक है, लेकिन किसी के घर जाना, घर में घुसना, उसके मां बाप को टॉर्चर करना, धमकी देना कि नौकरी खा जाऊंगी ये गलत है। इससे अच्छा है कि आप एफआईआर करवा दो। मैंने ही कहा था कि आप लीगल वे पर चलिए। सारी चीजें पॉजिटिव रहेगी और चीजें क्लियर हो जाएगी कि आखिर कौन सही है।

मैंने ही एफआईआर करने कहा था। मैंने धमकी नहीं दी थी। मैंने नॉर्मल कॉल किया था कि रिकॉर्डिंग करना चाहे तो कर ले कोई दिक्कत नहीं है। मैंने ही किया था और अपने नंबर से किया था।

वॉट्सऐप चैट और कॉल के स्क्रीनशॉट पुलिस को दिए

27 सितंबर 2025 को श्वेता ने इस मामले में कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है और ​​​​​​​रचिता के साथ हुई वॉट्सऐप चैट और कॉल के स्क्रीनशॉट, दितेश के मैसेज-कॉल के स्क्रीनशॉट, वॉइस रिकॉर्डिंग, पेन ड्राइव पर और अन्य दस्तावेज पेश किए। जिस पर पुलिस ने धारा 318(4), 3(5) बीएनएस तहत केस दर्ज कर लिया है। फिलहाल, पुलिस आरोपी अधिकारी और उसके करीबी की तलाश में जुटी हुई है।

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कोरबा

अपना बैंक खाता एवं मोबाइल नंबर दूसरों को देना पड़ा भारी

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कोरबा निवासी 02 लोगों के विरुद्ध म्यूल अकाउंट के मामले में पुलिस की कार्रवाई

कोरबा पुलिस की अपील—अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम एवं मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें

कोरबा। पुलिस अधीक्षक जिला कोरबा सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटेल एवं साइबर नोडल अधिकारी नितेश ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कटघोरा के मार्गदर्शन में साइबर थाना प्रभारी ललित कुमार चंद्रा के नेतृत्व में म्यूल अकाउंट के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है।

भारत सरकार के गृह मंत्रालय से म्यूल अकाउंट (Mule Account) के संबंध में प्राप्त निर्देशों के पालन में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा ऐसे बैंक खातों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिनका उपयोग साइबर अपराधों में किए जाने की आशंका है।

इसी क्रम में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा अलग अलग बैंक खातों के संबंध में अपराध पंजीबद्ध कर धारा 317(2), 318(4) बीएनएस के तहत विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान दो अलग अलग अपराधों में दो खाताधारकों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई।

पूछताछ में खाता धारक महेंद्र कुमार धीवर निवासी मानस नगर, कोरबा एवं के प्रभाकर राव निवासी कृष्ण नगर कोरबा द्वारा अपने बैंक खातों को लाभ कमाने के उद्देश्य से अन्य व्यक्तियों को कमीशन के बदले उपयोग हेतु दिए जाने की बात सामने आई। बाद में उन्हें जानकारी हुई कि संबंधित बैंक खाते होल्ड हो गए हैं।

प्रकरण में उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर दोनों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है। प्रकरण की विवेचना वर्तमान में जारी है।

म्यूल अकाउंट के विरुद्ध कोरबा पुलिस की कार्रवाई

साइबर अपराधियों द्वारा आम नागरिकों को कमीशन अथवा आसान कमाई का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाकर अथवा पहले से संचालित बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराध से प्राप्त राशि के लेन-देन के लिए किया जाता है। ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट (Mule Account) कहा जाता है।

साइबर अपराध में प्रयुक्त ऐसे खातों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध कराने वाले खाताधारक भी साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं।

कोरबा पुलिस की आम नागरिकों से अपील

साइबर अपराधी लोगों को कमीशन अथवा अन्य प्रकार के लाभ का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर अथवा सिम का उपयोग साइबर अपराधों में कर सकते हैं। अतः नागरिक निम्न सावधानियां बरतें—

  • अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें।
  • अपना एटीएम/डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी को न दें।
  • अपना मोबाइल नंबर अथवा सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने के लिए न दें।
  • किसी व्यक्ति द्वारा कमीशन या आसान कमाई का लालच देकर बैंक खाता उपलब्ध कराने की बात कही जाए तो सतर्क रहें।
  • अपने बैंक खाते में होने वाले लेन-देन की नियमित रूप से जानकारी रखें।
  • किसी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिलने पर तत्काल अपने बैंक एवं पुलिस को सूचित करें।
  • किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में राशि प्राप्त कर उसे दूसरे खाते में ट्रांसफर अथवा नकद निकालकर न दें।

कोरबा पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि थोड़े से आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम अथवा मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को देकर स्वयं को साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई का हिस्सा न बनाएं।

सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।

सजग कोरबा – सतर्क कोरबा।

— जिला कोरबा पुलिस, छत्तीसगढ़

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कोरबा

SECL मानिकपुर जनसुनवाई रद्द करने की मांग:ग्रामीणों ने प्रक्रिया को फर्जी बताया,भू-विस्थापित बोले- पहले पुराने वादे पूरे करो,नहीं तो 3 हजार ग्रामीण करेंगे विरोध

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कोरबा। SECL मानिकपुर ओपन कास्ट खदान विस्तार परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। भू-विस्थापित संगठन मानिकपुर ने 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की है।

संगठन ने जनसुनवाई की प्रक्रिया को फर्जी बताते हुए चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो 8 प्रभावित गांवों के करीब 2 से 3 हजार महिला-पुरुष ग्रामीण मौके पर पहुंचकर इसका उग्र विरोध करेंगे।

200-250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप

200-250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप

250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों पहले खदान के लिए अपनी उपजाऊ जमीन देने के बावजूद करीब 200 से 250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, SECL द्वारा गोद लिए गए 7-8 गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी खराब है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और SECL प्रबंधन खदान विस्तार और कॉर्पोरेट मुनाफे को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि विस्थापित परिवारों की पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।

युवाओं के लिए 400-500 स्थायी नौकरी की मांग

भू-विस्थापितों ने प्रभावित गांवों के युवाओं के लिए मौके पर ही 400 से 500 पदों पर नियमित और स्थायी भर्ती शुरू करने की मांग रखी है। इसके अलावा भिलाई खुर्द-1, 2 और 3 में बचे मकानों और जमीनों का दोबारा पारदर्शी तरीके से भौतिक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।

रापाखरा और दादर खुर्द को लेकर भी मांग

ग्रामीणों ने रापाखरा के विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने और आने-जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, दादर खुर्द के तालाब को गांव की निस्तारी का प्रमुख स्रोत बताते हुए वहां ओबी डंपिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

ग्रामीणों को सूचना दिए बिना जनसुनवाई कराने का आरोप

ग्रामीण अमन पटेल ने आरोप लगाया कि SECL प्रबंधन 21 अगस्त को जनसुनवाई कराने जा रहा है, लेकिन प्रभावित गांवों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि करीब 15-20 दिन पहले अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा गया था कि जनसुनवाई की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों को बताया जाएगा। इसके बावजूद अब पंचायत सचिव, सरपंच और अन्य क्षेत्रों को नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुराने मुआवजे, रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े वादे पूरे नहीं होते, तब तक खदान विस्तार के लिए जनसुनवाई नहीं होने दी जाएगी।

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कोरबा

भूमि के बदले रोजगार संबंधी शिकायतों की जांच के लिए एसईसीएल ने गठित की उच्चस्तरीय समिति

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पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध शिकायत निवारण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

बिलासपुर/कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने भूमि के बदले रोजगार से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा समिति का गठन किया है। समिति उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर अपनी अनुशंसाएं सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

भूमि के बदले रोजगार की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लागू की गई यह उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था प्रत्येक पात्र हितग्राही के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

समिति के अध्यक्ष महाप्रबंधक (भू-राजस्व), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर होंगे। समिति में महाप्रबंधक (योजना एवं परियोजना), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/श्रमशक्ति), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/औद्योगिक संबंध) तथा उप-महाप्रबंधक (विधि), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर सदस्य होंगे।

गठित समिति आवश्यकता के अनुसार संबंधित अभिलेखों एवं दस्तावेजों की जांच करेगी, अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करेगी तथा उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों का सत्यापन करते हुए प्रचलित नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप शिकायतों का परीक्षण करेगी। इससे प्रकरणों के त्वरित, निष्पक्ष एवं तार्किक निस्तारण में सहायता मिलेगी।

भूमि के बदले रोजगार से संबंधित अनियमितता, जाली अथवा कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग, तथ्य छिपाकर रोजगार प्राप्त करने अथवा अन्य संबंधित मामलों के संबंध में कोई भी व्यक्ति आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों सहित समिति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।

एसईसीएल ने स्पष्ट किया है कि विधिवत दर्ज की गई शिकायत को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। अतः शिकायतकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे केवल प्रामाणिक तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही शिकायत दर्ज कराएं।
कंपनी ने सभी संबंधित पक्षों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि शिकायत केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्रस्तुत करें तथा किसी भी प्रकार के बिचौलियों, अपुष्ट सूचनाओं अथवा भ्रामक दावों से सावधान रहें।

एसईसीएल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान कोई शिकायत जानबूझकर असत्य, दुर्भावनापूर्ण अथवा भ्रामक तथ्यों पर आधारित पाई जाती है, अथवा किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने या अनावश्यक उत्पीड़न के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता के विरुद्ध प्रचलित नियमों एवं लागू विधिक प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

एसईसीएल सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संस्थागत निष्पक्षता के उच्च मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है। कंपनी का विश्वास है कि उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था के माध्यम से भूमि के बदले रोजगार संबंधी शिकायतों के परीक्षण की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय बनेगी। साथ ही, वास्तविक एवं पात्र हितग्राहियों के हितों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ शिकायत निवारण तंत्र में जनविश्वास एवं संस्थागत जवाबदेही भी और सुदृढ़ होगी।

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