रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षिक एवं प्रशासनिक संवर्ग) भर्ती नियम 13 फरवरी 2026 पर कड़ी आपत्ति जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि, नए नियमों में विभाग में वर्षों से काम कर रहे अनुभवी शिक्षकों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।
सीधी भर्ती को जरूरत से ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री, स्कूल शिक्षा सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय को नियमों में संशोधन के लिए सुझाव भेजे गए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि लगभग 2 लाख कर्मचारियों से जुड़े नियम लागू करने से पहले न सुझाव लिए गए, न दावा-आपत्ति मंगाई गई।
अधिकतर विभागों में अनुभवी कर्मचारियों को पदोन्नति दी जाती है, लेकिन शिक्षा विभाग में सीधी भर्ती को तरजीह दी गई। इससे लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षक पदोन्नति से वंचित हो जाएंगे।
LB संवर्ग को खत्म करने पर सबसे ज्यादा नाराजगी
13 फरवरी 2026 को प्रकाशित राजपत्र में एल बी (LB) संवर्ग का पदोन्नति कोटा खत्म कर दिया गया है। अब केवल ई और टी संवर्ग से ही पदोन्नति का प्रावधान रखा गया है। इससे LB संवर्ग के शिक्षकों की तत्काल पदोन्नति रुक जाएगी।
एसोसिएशन का कहना है कि पहले LB अलग कैडर था, इसलिए नियमित पदोन्नति मिलती थी, लेकिन अब उसे व्यवहारिक रूप से समाप्त कर दिया गया है। दरअसल, प्रधान पाठक, शिक्षक और अन्य पदों पर LB संवर्ग का नाम ही हटा दिया गया।
ई और टी संवर्ग की एकीकृत वरिष्ठता सूची बनेगी। इससे LB संवर्ग पीछे चला जाएगा, कई पदों पर सीधी भर्ती का प्रतिशत बढ़ा दिया गया।
टीचर्स एसोसिएशन के प्रमुख सुझाव
संगठन का कहना है कि, पूर्व की तरह फीडिंग कैडर सिस्टम लागू किया जाए और प्रधान पाठक पूर्व माध्यमिक, शिक्षक और प्रधान पाठक प्राथमिक शाला के पदों पर E/T संवर्ग और E/T–LB संवर्ग के लिए 50–50 प्रतिशत पदोन्नति का प्रावधान रखा जाए, ताकि किसी संवर्ग के साथ अन्याय न हो।
DEO और उपसंचालक पदों पर आपत्ति
वर्तमान नियमों में उपसंचालक और जिला शिक्षा अधिकारी के 25 प्रतिशत पदों को सीधी भर्ती से भरने का प्रावधान किया गया है। एसोसिएशन इसे गलत बताते हुए कहता है कि केवल 10 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से और शेष 90 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाने चाहिए, ताकि अनुभवी अधिकारियों को आगे बढ़ने का मौका मिल सके।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी पदों पर सवाल
नए नियमों में विकासखंड शिक्षा अधिकारी और सहायक संचालक प्रशासन के पदों को भरने की व्यवस्था पर भी संगठन ने आपत्ति जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी से 75 प्रतिशत पदोन्नति का प्रावधान व्यवहारिक नहीं है और इसमें बड़े स्तर पर संशोधन किया जाना चाहिए।
प्राचार्य पदोन्नति में स्पष्टता की मांग
टीचर्स एसोसिएशन का कहना है कि प्राचार्य पदों पर पदोन्नति के लिए व्याख्याता और प्रधान पाठक पूर्व माध्यमिक शाला के बीच एकीकृत वरिष्ठता सूची बनेगी या रेशियो तय होगा, इसका स्पष्ट उल्लेख नियमों में होना चाहिए। साथ ही विभागीय परीक्षा में बीएड के स्थान पर प्रशिक्षित स्नातकोत्तर योग्यता तय करने और 55 वर्ष की आयु सीमा हटाने की मांग की गई है।
PTI, उर्दू शिक्षक, ग्रंथपाल भी उपेक्षित
नए भर्ती नियमों में पीटीआई (व्यायाम शिक्षक) के साथ भी उपेक्षा की गई है। वर्तमान व्यवस्था में पीटीआई को केवल छात्रावास अधीक्षक (क्रीड़ा परिसर) के पद तक ही पदोन्नति का अवसर दिया गया है, जबकि विद्यालयों में खेल और शारीरिक शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में उनकी अहम भूमिका है।
एसोसिएशन का कहना है कि पीटीआई के लिए सहायक विकासखंड क्रीड़ा अधिकारी के पद पर पदोन्नति का प्रावधान किया जाना चाहिए, साथ ही सभी हायर सेकेंडरी विद्यालयों में व्याख्याता शारीरिक शिक्षा के पद सृजित कर पीटीआई को इस पद पर पदोन्नति का अवसर मिलना चाहिए।
इसी तरह उर्दू शिक्षकों के लिए भी पदोन्नति का कोई स्पष्ट चैनल नए नियमों में नहीं रखा गया है। वर्तमान व्यवस्था में उर्दू सहायक शिक्षक और उर्दू शिक्षक वर्षों तक एक ही पद पर कार्यरत रहते हैं। एसोसिएशन की मांग है कि उर्दू शिक्षकों के लिए स्पष्ट पदोन्नति क्रम तय किया जाए।
ताकि उर्दू सहायक शिक्षक से उर्दू शिक्षक और उर्दू शिक्षक से उर्दू व्याख्याता के पद तक पदोन्नति का रास्ता खुल सके। इसके अलावा ग्रंथपालों की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है। नए नियमों में हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में ग्रंथपाल के पद का स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है।
जिससे इस संवर्ग के कर्मचारियों के लिए पदोन्नति की कोई संभावना नहीं बचती। एसोसिएशन का कहना है कि सभी हाई और हायर सेकेंडरी विद्यालयों में ग्रंथपाल के पद स्वीकृत किए जाएं और उनके लिए भी स्पष्ट पदोन्नति व्यवस्था तय की जाए।
संघ की चेतावनी
टीचर्स एसोसिएशन ने कहा है कि, यदि भर्ती और पदोन्नति नियमों में जल्द संशोधन नहीं किया गया, तो इससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ेगा और शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
जांजगीर। सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक को लेकर नगरीय निकायों में अभियान चलाया जाएगा। अभियान के दौरान सिंगल यूज प्लास्टिक के साथ 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक कैरी बैग के उपयोग पर भी विशेष नजर रखी जाएगी।
अब अभियान में फील्ड अधिकारियों को एसयूपी (फील्ड इंस्पेक्शन मोबाइल एप) के माध्यम से निरीक्षण करना होगा। इसे जिले के 11 नगरीय निकायों में लागू किया जाएगा। टीम द्वारा शहर में हुए निरीक्षण की रिपोर्ट तत्काल पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। पोर्टल पर विक्रेताओं, उपयोगकर्ताओं, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही आम नागरिकों से एसयूपी एप के माध्यम से फीडबैक भी लिया जाएगा। इसके जरिए सिंगल यूज प्लास्टिक से जुड़ी शिकायतें भी दर्ज की जा सकेंगी। संबंधित स्थानीय निकाय को उनका निराकरण करना होगा।
बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में तीज पर्व पर मायके जाने की तैयारी कर रही महिलाओं और दूसरे यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में उरकुरा स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग के लिए प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन-इंटरलॉकिंग का काम किया जाएगा।
इसके चलते 13 और 14 सितंबर को रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, गेवरा रोड और इतवारी के बीच चलने वाली 10 ट्रेनें रद्द रहेंगी। वहीं 2 मेमू ट्रेनों का परिचालन बिलासपुर तक सीमित रहेगा। रेलवे के मुताबिक यह काम उरकुरा-रायपुर स्टोर डिपो के बीच दोहरीकरण परियोजना के तहत उरकुरा स्टेशन के यार्ड रीमॉडलिंग के लिए किया जा रहा है।
यात्रियों के लिए जरूरी बात
तीजा पर्व के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और परिवार मायके आने-जाने के लिए ट्रेनों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में 13 और 14 सितंबर को यात्रा से पहले ट्रेन नंबर जरूर चेक कर लें। रद्द ट्रेन से यात्रा की योजना है तो वैकल्पिक ट्रेन या बस की व्यवस्था पहले कर लेना बेहतर होगा।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया। भाजपा सरकार में मंत्री खुशवंत साहेब के बड़े भाई और सतनामी समाज के धर्मगुरु गुरु बालदास के बड़े बेटे ढाल दास ने कांग्रेस ज्वॉइन कर ली। रायपुर में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीजा-पोरा कार्यक्रम के दौरान उन्हें कांग्रेस में प्रवेश कराया।
ढाल दास ने कहा कि जनता भी जानती है कि भाजपा क्या कर रही है। अगर कांग्रेस मुझे मौका देती है तो मैं मुंगेली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहूंगा। पार्टी जहां से मुझे चुनाव लड़ने के लिए चयनित करेगी, मैं वहां से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं।
उन्होंने कहा कि पार्टी में शामिल होने से पहले मैंने अपने भाई और पिताजी से बातचीत की थी और उन्हें इस बारे में बताया था। दोनों ने अपनी सहमति दे दी। वहीं उनके भाई मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि कांग्रेस हमेशा तोड़ने की नीति से काम करती है।
रायपुर में पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने ढाल दास को कांग्रेस में प्रवेश कराया।
सामाजिक-राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है परिवार
ढाल दास के कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनका परिवार सामाजिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माना जाता है। ऐसे में एक ही परिवार के एक सदस्य के भाजपा सरकार में मंत्री होने और दूसरे के कांग्रेस में शामिल होने को सियासी तौर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
गुरु बालदास के 4 बेटे, ढाल दास सबसे बड़े
सतनामी समाज के प्रमुख धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब का परिवार बाबा गुरु घासीदास की वंश परंपरा से जुड़ा हुआ है। गुरु बालदास के चार बेटे हैं- ढाल दास, सोमेश दास, खुशवंत दास और सौरभ दास। उनकी एक बेटी भी है। इनमें ढाल दास सबसे बड़े बेटे हैं।
गुरु परिवार का सतनामी समाज में धार्मिक और सामाजिक प्रभाव माना जाता है। गिरौधपुरी धाम और भंडारपुरी धाम से जुड़े प्रमुख आयोजनों में परिवार की सक्रिय भूमिका रहती है।
मंत्री के भाई का कांग्रेस में जाना क्यों अहम?
ढाल दास के कांग्रेस में शामिल होने को सिर्फ एक राजनीतिक ज्वाइनिंग के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। वे मंत्री खुशवंत साहब के बड़े भाई हैं और गुरु बालदास के परिवार से आते हैं। ऐसे में उनके कांग्रेस में जाने से एक ही परिवार के राजनीतिक रूप से अलग-अलग दलों में होने का समीकरण सामने आया है।
ढाल दास ने मुंगेली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। मुंगेली विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है और इसे भाजपा के मजबूत प्रभाव वाली सीट माना जाता है। यहां भाजपा के पुन्नूलाल मोहले लंबे समय से प्रमुख राजनीतिक चेहरा हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने लगातार चौथी बार जीत दर्ज की थी।
2023 के चुनाव में पुन्नूलाल मोहले को 85,429 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी संजीत बनर्जी को 73,648 वोट मिले थे। दोनों के बीच जीत का अंतर 11,781 वोट रहा था। ऐसे में अगर भविष्य में कांग्रेस ढाल दास को मुंगेली से अपना प्रत्याशी बनाती है, तो चुनावी समीकरण कुछ बदले हुए नजर आ सकते हैं।
कांग्रेस तोड़ने के नीयत से काम करती है- मंत्री खुशवंत
मंत्री खुशवंत साहेब ने भाई के कांग्रेस प्रवेश को लेकर कहा कि वह मेरे भाई हैं। सुख-दुख हो या किसी तरह का तीज-त्योहार, हम हमेशा एक-दूसरे के साथ मिलते हैं और आगे भी मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीयत ही समाज और परिवार को तोड़ने की रही है।
उन्होंने कहा कि एक धर्म को दूसरे धर्म से, एक समाज को दूसरे समाज से और एक परिवार को दूसरे परिवार से लड़ाने की कांग्रेस कितनी भी कोशिश कर ले, वह कभी सफल नहीं होगी।