गुरदासपुर,एजेंसी।पंजाब के गुरदासपुर में सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पुलिस अधिकारियों से बहस हो गई। राहुल गांधी गुरदासपुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने गए थे। जैसे ही वे पाकिस्तान बॉर्डर से सटे गांवों की ओर बढ़ने लगे तो SP जुगराज सिंह ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। SP ने राहुल गांधी को बताया कि आगे पाकिस्तान का बॉर्डर है और फेंसिंग टूटी हुई है।
इस पर राहुल गांधी ने SP से कहा कि आप इंडियन टेरिटरी में मुझे प्रोटेक्ट नहीं कर सकते, इसलिए मुझे आगे जाने से रोका जा रहा है। SP ने जवाब दिया कि वहां सिक्योरिटी कंसर्न है। इस दौरान राहुल गांधी, कांग्रेस नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच काफी देर तक बहस हुई। आखिर में राहुल गांधी उन गांवों का दौरा किए बिना ही लौट गए।
राहुल गांधी ने बहस का वीडियो शेयर करते हुए फेसबुक पर लिखा-
सुरक्षा का डर किसी और को दिखाएं। हिंदुस्तान की धरती पर तकलीफ में फंसे हर भारतीय की बात सुनना मेरा हक और जिम्मेदारी है।
पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से बात करते राहुल गांधी।
अधिकारियों से बात करते पंजाब में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा।
गुरदासपुर में अधिकारियों से बात करते सांसद सुखजिंदर रंधावा। उनके पास में राहुल गांधी, प्रताप सिंह बाजवा और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग खड़े हैं।
राहुल गांधी और SP के बीच क्या बात हुई…
राहुल गांधी: आप कह रहे हो फेंसिंग टूटी है, ये 8 किलोमीटर दूर है, वहां (किसी दूसरी जगह) 1 किमी दूर था, वहां आपने हमें क्यों जाने दिया? SP: वहां इस तरह की कोई बात नहीं थी।
राहुल गांधी: आपने ये सब नहीं लिखा था। प्रताप बाजवा: MLA कह रहीं हैं कि लोगों को यहां लाया गया है, हमें सिर्फ ये आगे क्रॉस करना है। SP: सिक्योरिटी कंसर्न प्रोटेक्टी (राहुल गांधी) के लिए है।
अमरिंदर राजा वड़िंग: अगर आप प्रोटेक्टी (राहुल गांधी) को देश में ही सुरक्षा नहीं दे सकते, आप कह रहे हो, फेंस टूटी है, उधर भी लोग रह रहे हैं। अगर हम अपनी ही धरती पर सुरक्षित नहीं तो फिर क्या होगा। SP: हम सुरक्षित रखना चाहते हैं, इसीलिए तो आपके साथ में हैं। राहुल गांधी: ये इंडिया है ना, इंडिया में आप सुरक्षित नहीं कर पा रहे मुझे।
SP: सर, रिक्वेस्ट ये है कि वहां पर जो इश्यूज हैं, हम आपके सामने….. राहुल गांधी: आप मुझे ये कह रहे हो कि हिंदुस्तान की टेरिटरी में आप मुझे सुरक्षित नहीं रख सकते।
SP: रख सकते हैं, इसीलिए तो आपके सामने खड़े हैं। राहुल गांधी: यही कह रहे हो ना, सुरक्षित नहीं रख सकते।
SP: हम हमेशा सुरक्षित रखने के लिए रेडी हैं। राहुल गांधी: मगर, आप कह रहे हो कि वह इंडिया है और मुझे वहां प्रोटेक्ट नहीं कर रहे हो।
SP: सर, वह एरिया डिफरेंट है, यह हमारी ड्यूटी है कि… राहुल गांधी: क्या यह इंडिया नहीं है
SP: इंडिया है सर राहुल गांधी: फिर डिफरेंट कैसे है?
SP: हमें सुरक्षा के हर आसपेक्ट को देखना है राहुल गांधी: आपका कहना है कि इंडियन टेरिटरी में लीडर ऑफ अपोजिशन नहीं जा सकता क्योंकि पंजाब पुलिस उन्हें प्रोटेक्ट नहीं कर सकती।
SP: नो सर, ऐसा नहीं है। हम प्रोटेक्ट करने के लिए ऑलवेज रेडी हैं। राहुल गांधी: आप कह रहे हो कि लीडर ऑफ अपोजिशन इंडिया की टेरिटरी में नहीं जा सकता, क्योंकि आप लोग उसे प्रोटेक्ट नहीं कर सकते। वही कह रहे हो।
SP: नो सर, हम आपकी सुरक्षा करने के लिए हैं। राहुल गांधी: जाने दो फिर (इसके बाद भी राहुल गांधी को पाकिस्तान बॉर्डर से सटे गांवों में नहीं जाने दिया गया।)
गुरदासपुर के मकौड़ा पत्तन गांव में प्रभावितों से बात करते राहुल गांधी।
अमृतसर के बाद गुरदासपुर पहुंचे थे राहुल गांधी
राहुल गांधी अमृतसर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद गुरदासपुर आए थे। यहां दीनानगर में उन्होंने बाढ़ग्रस्त इलाके का जायजा लिया। उनके साथ पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पंजाब कांग्रेस इंचार्ज भूपेश बघेल, कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह बाजवा और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा भी थे।
फिर राहुल गांधी मकौड़ा पत्तन गांव में प्रभावित लोगों से मिले। इसके बाद वह उन 7 गांवों की तरफ जाने लगे, जो पाकिस्तान बॉर्डर से सटे हैं। तभी पुलिस अधिकारियों ने राहुल गांधी और दूसरे कांग्रेस नेताओं को आगे जाने से रोक लिया।
अमृतसर के घोनेवाल गांव में बाढ़ प्रभावित लोगों से बात करते कांग्रेस नेता राहुल गांधी।
वड़िंग बोले- हिंदुस्तान में सुरक्षित नहीं तो कहां सुरक्षित हैं?
कांग्रेस प्रधान और लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि हम वहां जाना चाहते थे, बाढ़ पीड़ितों से मिलना चाहते थे और उनका दुख जानना चाहते थे, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि वहां जाना सुरक्षित नहीं है, खतरा है। अगर हिंदुस्तान में राहुल गांधी को पाकिस्तान से खतरा है, तो अगर हिंदुस्तान में हम सुरक्षित नहीं हैं तो कहां सुरक्षित हैं।
नई दिल्ली, एजेंसी। फेस्टिव सीजन चल रहा है। इस दौरान लोग अपने घर जाने की तैयारियां करते हैं। अपने घर जाने के लिए लोग ट्रेन से जाते हैं। यदि आप अक्टूबर के महीने में ट्रेन का सफर करने वाले हैं, तो थोड़ा सावधान हो जाए। असल में सेंट्रल रेलवे 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक, खास ‘टिकट चेकिंग अभियान’ चलाने जा रहा है।
आइए आपको बताते हैं रेलवे के ये नए नियम क्या हैं और आपको ट्रैवल करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरुरी है।
कम से कम एक ओरिजिनल ID होना है जरूरी
इस अभियान के चलते सबसे बड़ा नियम है ‘वन टिकट, वन ओरिजिनल आईडी’। रेलवे के अधिकारियों ने साफ कहा है कि अब सफर के समय सिर्फ टिकट होना ही काफी नहीं है, बल्कि आपके पास अपना ओरिजिनल पहचान पत्र होना जरुरी है।
उदाहरण के तौर पर, यदि आप अपने परिवार के चार लोगों के लिए एक ही टिकट बुक किया है, तो उन चारों में से कम से कम किसी एक व्यक्ति के पास उसका ओरिजिनल आईडी कार्ड होना बहुत जरुरी है। यदि चेकिंग के दौरान असली आईडी नहीं दिखा पाए, तो टीटीई उस पर यात्रा करने वाले सभी लोगों को बिना टिकट मान सकता है और आप पर जुर्माना लग सकता है।
कोटा और ई-पास वालों के लिए नियम सख्त
रेलवे के मुताबिक, अगर आप किसी खास कोटे या कंसेशन पर सफर कर रहे हैं? यदि हां, तो आपको अपनी पात्रता को साबित करने के लिए सभी दास्तावेज ओरिजिनल ही साथ रखें। इतना ही नहीं, जो लोग रेलवे के ई-पास या पीटीओ का इस्तेमाल करके यात्रा करने पर, आपको असली पहचान पत्र दिखाना होगा। उनकों इस बात का ध्यान देना होगा कि ट्रेन में बैठने से पहले उनका ई-पास संबंधित अथॉरिटी से सही तरीके से एक्सचेंज करा लिया गया हो।
जनरल टिकट वालों की भी होगी हाई-टेक चेकिंग
दरअसल, यह चेकिंग अभियान सिर्फ स्लीपर या एसी कोच तक ही नहीं, बल्कि आप जनरल डिब्बे में सफर कर रहे हैं, तो आप वहां भी चेकिंग स्टाफ टिकटों की असलियत जांचेगा। वहीं, जरुरत पड़ने पर रेलवे अधिकारी टीटीई ऐप की मदद से किसी भी टिकट को तुरंत वेरिफाई कर सकते हैं।
भारतीय रेलवे क्यों कर रहा है इतनी सख्ती
सेंट्रल रेलवे ने बताया है कि, इसके पीछे मकसद है सिस्टम में होने वाली धोखाधड़ी को खत्म करना है, जाने इसके मुख्य कारण है-
– भारतीय रेलवे में होने वाले आर्थिक नुकसान को रोकना।
– वहीं, रिजर्वेशन की सुविधाओं का जो लोग गलत फायदा उठाते हैं, उन लोगों को पकड़ना।
– इसके अलावा, पास और कंसेशन के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम लगाना।
– सही यात्रियों की पहचान करना और टिकटों की वैधता जांचना।
चेकिंग में कौन-कौन से पहचान पत्र चलेंगे?
इस बीच, रेलवे ने उन दास्तावेजों की एक लिस्ट भी दी है, जिन्हे आप सफर के दौरान अपनी पहचान साबित करने के लिए दिखा सकते हैं ये ओरिजनल आईडी-
-आधार कार्ड -वोटर आईडी कार्ड -पासपोर्ट या पैन कार्ड -ड्राइविंग लाइसेंस – केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले फोटो और सीरियल नंबर वाला कार्ड – मान्यता प्राप्त स्कूल/कॉलेज का फोटो वाला स्टूडेंट आईडी कार्ड – किसी राष्ट्रीयकृत बैंक की पासबुक, जिस पर आपकी फोटो लगी हो। – बैंक का क्रेडिट कार्ड जिस पर आपकी लैमिनेटेड फोटो हो।
नई दिल्ली, एजेंसी। आमतौर पर शेयर बाजार सोमवार से शुक्रवार तक खुले रहते हैं। मार्केट में शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है। कई बार किसी खास मौके, पर्व और त्योहार पर भी बाजार बंद होता है। कल से लगातार तीन दिन शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा। शुक्रवार (02 अक्टूबर) को गांधी जयंती है, ऐसे में BSE और NSE बंद रहेंगे। इसके बाद शनिवार और रविवार की नियमित छुट्टी के कारण बाजार अब सीधे सोमवार, 5 अक्टूबर को खुलेगा।
2 अक्टूबर को क्यों बंद रहेगा बाजार?
महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर को देशभर में राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाई जाती है। इसी के चलते भारतीय शेयर बाजार में भी इस दिन ट्रेडिंग नहीं होगी। निवेशकों को शुक्रवार को इक्विटी, डेरिवेटिव्स समेत बाजार से जुड़े कारोबार के लिए बाजार बंद मिलेगा।
2026 में शेयर बाजार की प्रमुख छुट्टियां
अवसर
तारीख
दिन
दशहरा
20 अक्टूबर
मंगलवार
दिवाली बलिप्रतिपदा
10 नवंबर
मंगलवार
गुरु नानक देव जी का प्रकाश गुरुपर्व
24 नवंबर
मंगलवार
क्रिसमस
25 दिसंबर
शुक्रवार
आज बाजार में रही गिरावट
आज (1 अक्टूबर) शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 0.79 फीसदी यानी कि 570.59 अंक गिरकर लाल निशान में 71,909.70 पर बंद हुआ। इस दौरान इसके 30 शेयरों में से केवल 6 में बढ़त दिखी, जबकि 24 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। इनमें इन्फोसिस में सबसे अधिक 4.02 फीसदी की तेजी और मारुति में सबसे ज्यादा गिरावट 4.59 फीसदी नजर आई।
वहीं, 50 शेयरों वाला निफ्टी 0.88 फीसदी यानी 198.50 अंक लुढ़ककर 22,421.95 पर बंद हुआ। इसके 50 शेयरों में से 13 में तेजी और 37 में गिरावट दर्ज की गई।
नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने त्योहारों के मौसम में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति और उचित कीमत सुनिश्चित करने के लिए डीलर के पास चीनी रखने की सीमा घटाकर 1,000 क्विंटल कर दी। यह सीमा 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगी और डीलर अधिकतम 15 दिन तक का स्टॉक रख सकेंगे। इसके साथ ही, खाद्य मंत्रालय ने कहा कि कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र तथा असम में क्षेत्र विशेष की जरूरतों को देखते हुए स्टॉक सीमा 2,000 क्विंटल होगी।
मंत्रालय ने बयान में कहा कि एक अक्टूबर से नए चीनी सत्र की शुरुआत के साथ त्योहारी अवधि में ग्राहकों को उचित कीमत पर चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार कदम उठा रही है। मंत्रालय ने कहा, ”चीनी की मात्रा और उसे रखने की अवधि सीमित करके सरकार का उद्देश्य आपूर्ति शृंखला में चीनी की व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं के लिए इसकी लगातार उपलब्धता बनाए रखना है।”
कोलकाता और असम के लिए अलग सीमा
कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र तथा असम के लिए अलग स्टॉक सीमा उस क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की गई है। मंत्रालय ने कहा कि कोलकाता… उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से चीनी खरीदता है और पूर्वी भारत के साथ पूर्वोत्तर राज्यों को भी इसकी आपूर्ति करता है।
मंत्रालय ने कहा कि असम के लिए सीमा तय करते समय भौगोलिक परिस्थितियों, परिवहन सुविधाओं और पूर्वोत्तर के उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखा गया है। उसने कहा कि संशोधित नियमों का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला में चीनी के अनावश्यक भंडारण को रोकना और मिलों से डीलर के जरिये अंतिम उपभोक्ता तक इसकी सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
भंडारण और जमाखोरी पर रोक का उद्देश्य
यह कदम जमाखोरी, सट्टेबाजी और डीलर द्वारा स्टॉक जमा करने पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है। इससे पहले अगस्त में सरकार ने डीलर के लिए देशभर में 4,000 क्विंटल की स्टॉक सीमा तय की थी। यह सीमा एक अगस्त से 30 नवंबर तक लागू की गई थी। इसके तहत चीनी मिलने की तारीख से अधिकतम 30 दिन तक स्टॉक रखने की अनुमति थी। बाद में 15 सितंबर से यह सीमा घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी गई।
चीनी के खुदरा दाम में 15% गिरावट
मंत्रालय के मुताबिक, चीनी का औसत खुदरा मूल्य अगस्त के उच्चतम स्तर से अब 15 प्रतिशत घट चुका है और आपूर्ति शृंखला में कम कीमतों का लाभ मिलने के साथ इसमें आगे भी गिरावट आने की उम्मीद है। मिलों की कीमतों में करीब 28 प्रतिशत की गिरावट आई है और वे पिछले तीन सप्ताह से स्थिर हैं।
सरकार ने कहा कि चीनी मिलों, डीलर, थोक विक्रेताओं और अन्य बाजार प्रतिभागियों को चीनी की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करनी चाहिए और जमाखोरी एवं सट्टेबाजी रोकनी चाहिए। थोक और खुदरा विक्रेताओं से मिलों की कीमतों में आई तेज गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक ‘तत्काल’ पहुंचाने को कहा गया है।