देश
राहुल बोले-RSS-BJP कुछ बिजनसमैन के हाथों देश बेचना चाह रही:ये चाहते हैं कि लोग सवाल न करें, कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी
तिरुवनंतपुरम,एजेंसी। राहुल गांधी ने सोमवार को कहा कि RSS और BJP चाहती है कि जनता सवाल न करें और चुप रहें, ताकि यह कुछ बिजनेसमैन के हाथों देश को बेच सकें।
राहुल केरल के कोच्चि में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम ऐसा बिल्कुल नहीं होने देंगे। कांग्रेस ही संविधान को बचा सकती है। उन्होंने कहा,
कांग्रेस ने संविधान में बदलाव करके पंचायत, जिला और राज्य स्तर पर शासन को मजबूत किया। संविधान बचाने का मतलब है सत्ता और फैसलों का अधिकार लोगों तक पहुंचाना।
राहुल ने कहा कि RSS और BJP सत्ता को अपने पास ही रखना चाहती हैं, लेकिन कांग्रेस सत्ता को नीचले स्तर तक पहुंचाने में भरोसा रखती है और गांव-कस्बों में लोकतंत्र को मजबूत करना चाहती है।
राहुल की स्पीच की बड़ी बातें
- दिल्ली में हुई बैठकों में अलग-अलग नेताओं की अलग राय थी, लेकिन मैंने साफ कहा था कि UDF पंचायत और विधानसभा चुनाव जीतेगा। असली सवाल जीत के बाद का है।
- केरल में बेरोजगारी बड़ी समस्या है। UDF और कांग्रेस को ऐसा रोडमैप देना होगा, जिससे युवाओं को नौकरी मिले। मंच पर मौजूद नेतृत्व केरल की जनता की जरूरतों को समझता है और उन्हें पूरा कर सकता है।
राहुल गांधी बोले- चुप रहने की संस्कृति में लालच की भावना
इससे पहले राहुल ने एक कार्यक्रम में कलामासेरी में डॉ. एम लीलावती को केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रियदर्शिनी साहित्य पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस दौरान राहुल ने कहा कि कोई भी देश अगर चुप रहता है तो वो महान नहीं हो सकता। चुप रहने की संस्कृति में लालच की भावना छुपी होती है।
उन्होंने कहा कि महान राष्ट्र और महान लोग तब बनते हैं, जब वे अपने विचार और राय खुलकर व्यक्त करते हैं और उनके लिए संघर्ष करते हैं।
स्टेज पर बच्चे ने राहुल के साथ तस्वीर खिंचवाई
केरल कांग्रेस की महापंचायत के बीच स्टेज पर आकर एक बच्चे ने राहुल के साथ सेल्फी ली। इसके बाद बच्चे ने राहुल ने बच्चे के चॉकलेट भी दी।

बच्चे ने स्टेज पर आकर राहुल के साथ सेल्फी लेने के लिए कहा।

बच्चे के कहने पर राहुल ने उसके साथ सेल्फी ली।

सेल्फी के बाद राहुल ने बच्चे के चॉकलेट भी दी।

देश
रूस से कच्चा तेल खरीद सकेगा भारत:ईरान जंग के कारण अमेरिका ने 3 अप्रैल तक रियायत दी, क्रूड ऑयल की कीमत 89 डॉलर के पार
नई दिल्ली,एजेंसी। भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का संकट फिलहाल खत्म हो गया है, क्योंकि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की शर्तों के साथ छूट मिल गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का स्पेशल लाइसेंस दिया है। ये लाइसेंस 3 अप्रैल तक वैलिड रहेगा।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत यह अस्थायी कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण पार्टनर हैं और ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को स्थिर रखने के लिए यह छूट दी गई है।
इस बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत आज 4% बढ़कर 89.18 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। यह अप्रैल 2024 के बाद इसका उच्चतम स्तर है।

अमेरिका से भी तेल खरीद बढ़ने की उम्मीद
बेसेंट ने कहा कि ईरान ग्लोबल एनर्जी मार्केट को बंधक बनाने की कोशिश कर रहा है। इस दबाव को कम करने के लिए हम भारत को यह 30 दिनों की छूट दे रहे हैं।
उन्होंने कहा- हमें ये उम्मीद है कि इसके बाद भारत अमेरिकी तेल की खरीद में तेजी लाएगा। अमेरिका का मानना है इस उपाय से ग्लोबल मार्केट में तेल की कमी नहीं होगी।
5 मार्च तक लोड हुए जहाजों का ही तेल खरीद सकेंगे
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ ने तेल खरीद के लिए ये लाइसेंस जारी किया है। इसके तहत 5 मार्च तक जहाजों पर लोड हो चुके रूसी कच्चे तेल की ही डिलीवरी भारत को की जा सकेगी। यानी, जो जहां पहले से समुद्र में है उनसे सप्लाई होगी।

कार्गो शिप्स लगभग 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल टैंकरों में भरकर एशियाई देशों के आसपास वेटिंग मोड में खड़ी हैं।
ईरान-इजराइल जंग से कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही
मिडिल-ईस्ट में जंग के कारण स्थिति काफी गंभीर हो गई है। ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को ब्लॉक कर दिया है, जहां से दुनिया की 20% तेल सप्लाई होती है।
कीमतों में उछाल: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के कारण ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़ रही हैं।
तेल क्षेत्रों पर हमले: पिछले कुछ दिनों में सऊदी अरामको की ‘रास तनुरा’ रिफाइनरी और इराक के ‘रुमैला’ तेल क्षेत्र जैसे बड़े केंद्रों पर हमले हुए हैं।
राजनाथ सिंह बोले- होर्मुज में रुकावट का तेल-गैस सप्लाई पर असर
ईरान संघर्ष के असर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज या पूरा फारस की खाड़ी वाला इलाका दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जब इस क्षेत्र में कोई बाधा या रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ता है.।
ये अनिश्चितताएं सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। मौजूदा स्थिति काफी जटिल हो गई है और ऐसा लगता है कि भविष्य में यह और भी ज्यादा अस्थिर हो जाएगी।
जिस तरह से अलग-अलग देश जमीन, हवा, समुद्र और अब अंतरिक्ष में भी एक-दूसरे के साथ मुकाबला कर रहे हैं, वह हम सभी के लिए वास्तव में चिंता का विषय है… मुझे और भी ज्यादा चिंता इस बात की है कि यह असामान्यता अब ‘न्यू नॉर्मल’ बनती जा रही है….”
कांग्रेस का आरोप- ट्रेड डील साइन नहीं हुई तो अनुमति कैसी
कांग्रेस नेता ने पवन खेड़ा ने इस मामले को व्यापार समझौते से जोड़ते हुए X पर पोस्ट कर कहा कि ट्रेड डील पर हस्ताक्षर नहीं हुए, फिर भी ऐसा लग रहा है जैसे प्रतिबंध लागू हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि, अनुमति वहां ली जाती है जहां कोई बंधन होते हैं। बंधन वहां होते हैं जहां कोई समझौता या करार होता है। समझौता वहां होता है जहां हस्ताक्षर हो चुके होते हैं। क्या भारत अमरीका के बीच व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं? जब हस्ताक्षर ही नहीं हुए, तो समझौता कैसा? जब समझौता ही नहीं, तो बंधन कैसा? जब बंधन ही नहीं, तो अनुमति क्यों? क्या यह एपस्टीन का बंधन है?

रूसी तेल टैंकरों को खरीदने की तैयारी
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने पर विचार कर रहा है, जो फिलहाल भारतीय समुद्र के करीब या एशियाई जल क्षेत्र में मौजूद हैं। इस समय लगभग 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल टैंकरों में भरकर एशियाई देशों के आसपास वेटिंग मोड में है।
भारत इन टैंकरों को तुरंत रिसीव कर सकता है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन का समय और लागत दोनों कम होगी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।
भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी तेल खरीदता रहा है
पिछले साल नवंबर में यूक्रेन के साथ जंग के चलते ट्रम्प प्रशासन ने रूसी तेल कंपनियों लुकोइल और रोजनेफ्ट पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात गिरकर 11 लाख बैरल प्रति दिन रह गया था, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम था।
हालांकि, फरवरी में यह हिस्सेदारी फिर से बढ़कर 30% तक पहुंच गई है। भारत लगातार अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदता रहा है।
भारत के लिए क्यों जरूरी है रूसी तेल?
सस्ता विकल्प: रूस भारत को बेंचमार्क कीमतों से डिस्काउंट पर तेल ऑफर करता है।
सप्लाई सिक्योरिटी: मिडिल ईस्ट में तनाव होने पर स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से सप्लाई रुक जाती है, रूस एक सुरक्षित विकल्प है।
इकोनॉमी पर असर: सस्ता तेल मिलने से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहती हैं और महंगाई काबू में रहती है।
भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की उम्मीद नहीं
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के बावजूद, भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और इस अमेरिकी छूट से सप्लाई चेन को मैनेज करने में मदद मिलेगी।
देश
कर्नाटक बच्चों के सोशल मीडिया यूज पर बैन लगाएगा:ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य, पैरेंट्स की परमिशन जरूरी, आंध्र में भी तैयारी
बेंगलुरु,एजेंसी। कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने की ऐलान किया। कर्नाटक ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य है।
सीएम सिद्धारमैया ने बजट भाषण के दौरान कहा कि बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे उन पर गलत असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा,
इस बैन को किस तरह लागू किया जाएगा, इसकी तैयारी चल रही है और जल्द ही नियम बनाए जाएंगे।
वहीं आंध्र प्रदेश सरकार भी 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री CM एन चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को विधानसभा में इसकी जानकारी दी।
कॉलेज-विश्वविद्यालय में नशे पर सख्ती होगी
सिद्धारमैया ने कहा कि स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बच्चों के स्वास्थ्य, उनके व्यक्तित्व और उनके भविष्य को बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार शैक्षणिक संस्थानों में नशे की समस्या को रोकने के लिए कदम उठाएगी।
इसके लिए स्कूल और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही सख्त नियम लागू किए जाएंगे ताकि छात्र नशे से दूर रहें। छात्रों की मदद के लिए सहायता और काउंसलिंग केंद्र भी बनाए जाएंगे, जहां वे अपनी समस्याएं खुलकर बता सकें।
उम्र का वैरिफिकेशन जरूरी होगी
16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का प्रस्ताव डेटा सुरक्षा कानून डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 (DPDP) और पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स 2025 से भी जुड़ा है।
इसके तहत बच्चों को अकाउंट बनाने से पहले माता-पिता की अनुमति और उम्र का वैरिफिकेशन जरूरी होगी। इसके लिए सरकारी पहचान प्रणाली या डिजिटल लॉकर का उपयोग किया जा सकता है।
देश
ईरान जंग से रसोई गैस की किल्लत हो सकती है:तेल कंपनियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने का आदेश, सरकार ने इमरजेंसी पावर इस्तेमाल किया
नई दिल्ली,एजेंसी। ईरान-इजराइल जंग अगर बढ़ी तो भारत में रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ सकती है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने इमरजेंसी पावर इस्तेमाल करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से सप्लाई चेन में रुकावट आ सकती है। इससे गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने 5 मार्च को देर रात ये आदेश जारी किया।
इस आदेश में कहा गया है कि अब रिफाइनयां अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी। इन गैसों का उपयोग किसी और काम में नहीं किया जाएगा।
होर्मुज रूट के भरोसे नहीं, हमारे पास पर्याप्त स्टॉक
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने कहा कि हमारे पास ऊर्जा के इतने सोर्स हैं कि हम सिर्फ होर्मुज रूट के भरोसे नहीं हैं। कच्चे तेल, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और LPG के मामले में हम काफी अच्छी स्थिति में हैं। हमारे पास अभी पर्याप्त स्टॉक है, चिंता की बात नहीं है। हम दुनिया के दूसरे हिस्सों से सप्लाई बढ़ा रहे हैं ताकि होर्मुज के रास्ते होने वाली सप्लाई की कमी को पूरा किया जा सके।
हम 2022 से रूस से कच्चा तेल खरीद रहे हैं। 2022 में हम अपनी जरूरत का सिर्फ 0.2% तेल रूस से मंगाते थे। वहीं इस साल फरवरी में हमारी कुल जरूरत का 20% हिस्सा रूस से आया है। फरवरी में भारत ने रूस से हर दिन 10.4 लाख बैरल कच्चा तेल इम्पोर्ट किया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG इम्पोर्टर देश है। MRPL रिफाइनरी बंद होने की खबरें गलत हैं। रिफाइनरी के पास तेल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
सरकारी कंपनियों को मिलेगी प्राथमिकता
आदेश के मुताबिक, सभी कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) को करनी होगी।
इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश के लगभग 33.2 करोड़ एक्टिव LPG कंज्यूमर्स यानी उपभोक्ताओं को बिना किसी रुकावट के गैस सिलेंडर मिलते रहें।
रिलायंस के एक्सपोर्ट और पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन पर असर
सरकार के इस फैसले का सीधा असर प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों, खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) पर पड़ सकता है। प्रोपेन और ब्यूटेन का डायवर्जन होने से अल्काइलेट्स के प्रोडक्शन में कमी आएगी, जिसका इस्तेमाल पेट्रोल की ग्रेडिंग सुधारने में किया जाता है।
पिछले साल रिलायंस ने हर महीने एवरेज चार अल्काइलेट्स कार्गो एक्सपोर्ट किए थे। इसके अलावा सरकार ने रिफाइनर्स को यह भी साफ कर दिया है कि वे फिलहाल पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन के लिए इन गैसों का इस्तेमाल न करें।
कंपनियों का मुनाफा कम हो सकता है
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और ट्रेड सोर्सेज का कहना है कि प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल के बजाय LPG बनाने में इस्तेमाल करने से कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ेगा।
दरअसल, पॉलीप्रोपाइलीन और अल्काइलेट्स जैसे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स बाजार में LPG के मुकाबले बेहतर कीमत पर बिकते हैं। ऐसे में सरकार के इस आदेश से पेट्रोकेमिकल कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
कतर में गैस उत्पादन बंद, भारत में 40% सप्लाई घटी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण भारत में CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) और PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। ईरान के ड्रोन हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश कतर अपने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) प्लांट का प्रोडक्शन रोक चुका है।
इससे भारत आने वाले जहाजों की आवाजाही रुक गई है और घरेलू बाजार में गैस की सप्लाई में 40% तक की बड़ी कटौती की गई है। भारत अपनी जरूरत की 40% LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) यानी करीब 2.7 करोड़ टन सालाना कतर से ही आयात करता है।
विदेश से आने वाली LNG को गैस में बदलकर ही CNG और PNG सप्लाई की जाती है। इसकी सप्लाई रुकने से सिटी गैस कंपनियों (CGD) ने चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो CNG और PNG के दाम बढ़ सकते हैं।

कतर की राजधानी दोहा के औद्योगिक इलाके में 1 मार्च 2026 को ईरानी अटैक के बाद धुआं उठता दिखा।
तेल और गैस सप्लाई करने का रास्ता लगभग बंद
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना है। यह एक संकरा समुद्री रास्ता है जिससे होकर कतर और यूएई जैसे देश अपना तेल और गैस निर्यात करते हैं। ईरान और इजरायल जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है।
- जहाजों की संख्या घटी: 28 फरवरी को इस रास्ते से 91 जहाज गुजरे थे, जो अब घटकर सिर्फ 26 रह गए हैं।
- भारत की निर्भरता: भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। पेट्रोनेट के तीन बड़े जहाज-दिशा, राही और असीम-फिलहाल कतर के रास लफान पोर्ट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
- प्लांट पर ड्रोन हमला, LNG का प्रोडक्शन रुका
कतर-एनर्जी के मुताबिक, ईरान ने कतर के ‘रास लफान’ और ‘मेसाईद’ इंडस्ट्रियल सिटी स्थित प्लांट पर ड्रोन से हमला किया था। सुरक्षा कारणों से कंपनी ने LNG का प्रोडक्शन फिलहाल रोक दिया है।
पिछले हफ्ते अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ठिकानों पर स्ट्राइक की थी, जिसके जवाब में ईरान ने UAE, कतर, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और पोर्ट्स को निशाना बनाया है।
ईरान ने कतर के ‘रास लफान’ स्थित प्लांट पर ड्रोन से हमला किया था। सुरक्षा कारणों से कंपनी ने LNG का प्रोडक्शन फिलहाल रोक दिया है।
CNG कंपनियों ने सरकार को लिखी चिट्ठी, संकट की चेतावनी
गैस की किल्लत को देखते हुए ‘एसोसिएशन ऑफ सीजीडी एंटिटीज’ (ACE) ने सरकारी कंपनी गेल (GAIL) को पत्र लिखकर स्पष्टता मांगी है। कंपनियों का कहना है कि अगर कतर से आने वाली सस्ती गैस नहीं मिली, तो उन्हें ‘स्पॉट मार्केट’ से महंगी गैस खरीदनी पड़ेगी।
कीमतों में अंतर: स्पॉट मार्केट में गैस की कीमत फिलहाल 25 डॉलर प्रति यूनिट पहुंच गई है, जो कॉन्ट्रैक्ट वाली गैस से दोगुनी से भी ज्यादा है।
EV की ओर शिफ्ट होंगे लोग: कंपनियों को डर है कि अगर CNG के दाम बहुत ज्यादा बढ़े, तो लोग परमानेंटली इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की ओर शिफ्ट हो जाएंगे, जिससे गैस सेक्टर को बड़ा नुकसान होगा।
पेट्रोनेट LNG ने जारी किया ‘फोर्स मेजर’ नोटिस
भारत की सबसे बड़ी गैस आयात करने वाली कंपनी पेट्रोनेट LNG ने कतर की कंपनी कतर-एनर्जी को ‘फोर्स मेजर’ नोटिस भेजा है। फोर्स मेजर का मतलब है कि किसी बड़ी वजहजैसे युद्ध या संकट के कारण कंपनी अभी तय समझौते के मुताबिक गैस सप्लाई नहीं कर पा रही है।
कंपनी ने गेल (GAIL), इंडियन ऑयल (IOC) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) जैसी कंपनियों को भी फोर्स मेजर नोटिस जारी कर सूचित किया है कि उन्हें मिलने वाली गैस की सप्लाई कम रहेगी। कंपनी ने यह भी साफ किया है कि युद्ध के कारण होने वाले बिजनेस नुकसान पर इंश्योरेंस कवर भी नहीं मिलता है।
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