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छत्तीसगढ़

रायपुर : शासन की हितग्राही मूलक योजनाओं का फायदा हितग्राहियों को समय पर मिले: मुख्य सचिव

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राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव ने कलेक्टर्स को दिए निर्देश

रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील ने अधिकारियों से कहा है कि शासन की हितग्राही मूलक योजनाओं का फायदा हितग्राहियों को समय पर मिले यह सुनिश्चित हो। इसके लिए पहले से ही हितग्राही से संबंधित जानकारी दुरस्त कर लिया जाये। मुख्य सचिव आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित जनगणना वर्ष 2027 के संबंध में आयोजित राज्य स्तरीय कान्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। मुख्य सचिव ने कहा कि आगामी गर्मी के मौसम में सभी जिलों में पेयजलापूर्ति, गर्मी के मौसम में होने वाली बीमारियों से पहले से ही लोगों को सावधान रहने एवं बचाव करने जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक कार्ययोजना बनाने और तैयारियां पहले से ही कर लें। कलेक्टर्स को इस वर्ष खरीफ मौसम की धान खरीदी की संपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करने, राशन दुकानों में खाद्यान्न सामग्री की उपलब्धता, इस साल तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य, हाई स्कूल हायर सेकेंडरी परीक्षा, जनसमस्याओं के समाधान एवं निवारण, पीएम आवास सहित अन्य हितग्राही मूलक योजनाओं के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों को जनगणना वर्ष 2027 संबंधी कार्यों को सतर्कता एवं संवेदनशीलता से करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गये। 

   मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी राशनकार्ड धारकों को पात्रता के अनुसार समय पर खाद्यान्न सामग्री मिले इसके लिए लगातार शासकीय उचित मूल्य की दुकानों की मानीटरिंग करें। मुख्य सचिव ने खाद्य विभाग के अधिकारियों को धान संग्रहण केन्द्रों के भौतिक सत्यापन कर धान परिवहन एवं मिलिंग कार्य करने जरूरी दिशा निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने मिलर्स के लंबित भुगतान करने जरूरी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने कृषि विभाग एवं मार्कफेड के अधिकारियों को आगामी खरीफ मौसम में खाद एवं बीज के पर्याप्त भंडारण करने कहा है। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने कलेक्टरों को लोगों की विभिन्न समस्याओं के समाधान एवं निवारण के लिए जिला एवं ब्लॉक स्तर पर शिविर आयोजित करने कहा है। उन्होंने विभिन्न शासकीय लंबित भुगतान करने शिविर शिविर लगाकर कार्यवाही करने कहा है।

गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने कलेक्टर्स को भारत की जनगणना 2027 से संबंधित कार्य के संबंध दिशा निर्देशों के संबंध विस्तार से बताया। राज्य स्तरीय संभागायुक्त कलेक्टर्स कान्फ्रेंस में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के भारसाधक सचिव, सभी संभागायुक्त, कलेक्टर्स, नगर निगम आयुक्त सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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छत्तीसगढ़ में 7 IFS अफसरों के तबादले:संजीता गुप्ता को लघु वनोपज संघ का प्रभार, अमरनाथ प्रसाद को राज्य वन विकास निगम का अतिरिक्त प्रभार

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ सरकार ने भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के 7 अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। प्रशासनिक आधार पर जारी आदेश के तहत कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी गई है, जबकि कुछ को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

आदेश के मुताबिक, संजीता गुप्ता को छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ का प्रभारी प्रबंध संचालक बनाया गया है। वहीं एस. वेंकटाचलम को कार्यकारी संचालक, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के पद पर प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है।

अमरनाथ प्रसाद को वन विकास निगम के MD का अतिरिक्त प्रभार

अमरनाथ प्रसाद सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के पद पर बने रहेंगे। उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। इसके अलावा अभिषेक कुमार सिंह को प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख कार्यालय में वन संरक्षक बनाया गया है।

टाइगर रिजर्व में गुरुनाथन और प्रणय मिश्रा को नई जिम्मेदारी

गुरुनाथन एन. को उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं क्षेत्र संचालक नियुक्त किया गया है। वहीं प्रणय मिश्रा को गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व का प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं क्षेत्र संचालक तथा प्रोजेक्ट एलीफैंट का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

रमेश जांगड़े बने क्षेत्रीय महाप्रबंधक

रमेश कुमार जांगड़े को छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम में क्षेत्रीय महाप्रबंधक का प्रभारी बनाया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सूची में पहले तीन अधिकारियों की नई पदस्थापना 31 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी।

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CGPSC भर्ती घोटाले में 500 करोड़ के भ्रष्टाचार की आशंका:47 लाख CSR के नाम पर खपाने का आरोप, मनी लॉन्ड्रिंग के मिले सबूत

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की साल 2021 की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब मनी लॉन्ड्रिंग तक पहुंच गई है। पूर्व PSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के खिलाफ चल रही जांच के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी वित्तीय लेनदेन की पड़ताल शुरू कर दी है।

जांच एजेंसियों को आशंका है कि भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का दायरा 500 करोड़ रुपए से अधिक हो सकता है। आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर, DSP समेत अन्य प्रशासनिक पदों पर चयन के लिए अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपए की वसूली की गई।

वहीं, CBI की अब तक की जांच में 47 लाख रुपए की कथित मनी लॉन्ड्रिंग और करीब 1.3 करोड़ रुपए की वसूली से जुड़े सबूत मिलने का दावा किया गया है। जांच के अनुसार रकम का कुछ हिस्सा कैश लिया गया, जबकि बाकी राशि परिवार के नियंत्रण वाली संस्था के जरिए CSR दान के नाम पर खपाई गई।

47 लाख संस्था के खाते में ट्रांसफर

जांच एजेंसी के अनुसार, एक पावर प्लांट के डायरेक्टर के बेटे और बहू के चयन के एवज में 47 लाख रुपए ग्रामीण विकास समिति नाम की संस्था के खाते में ट्रांसफर किए गए थे। आरोप है कि इस संस्था के अधिकांश सदस्य तत्कालीन PSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के परिजन या करीबी थे।

संस्था की चेयरपर्सन उनकी पत्नी पद्मनी सिंह सोनवानी थीं। जांच में यह भी दावा किया गया है कि इस रकम को एक ऐसे कॉलेज के लिए CSR दान के रूप में दर्शाया गया, जिसका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं है। जांच एजेंसियां इस पूरे वित्तीय लेनदेन की मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही हैं।

मेंस पेपर और चयन के नाम पर 1.3 करोड़ की वसूली

CBI चार्जशीट के मुताबिक, कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर ने अभ्यर्थियों से मुख्य परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने और चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर करीब 1.3 करोड़ रुपए वसूले। मामले में नाम सामने आने के बाद से उत्कर्ष फरार बताया जा रहा है। हाईकोर्ट उसकी अग्रिम जमानत भी रद्द कर चुका है। अब ED भी उसकी तलाश कर रही है।

12 से ज्यादा भर्ती परीक्षाएं जांच के घेरे में

जांच एजेंसियों के मुताबिक टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल में CGPSC, सहायक प्रोफेसर समेत 12 से ज्यादा भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच की जा रही है। CGPSC-2021 में 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा हुई थी।

13 फरवरी 2022 को हुई प्रारंभिक परीक्षा में 2,565 अभ्यर्थी पास हुए। 26 से 29 मई 2022 तक हुई मुख्य परीक्षा में 509 अभ्यर्थी सफल हुए।

170 अभ्यर्थियों का हुआ चयन

इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई। आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे पदों के लिए 75 लाख से 1 करोड़ रुपए प्रति पोस्ट तक लिए गए। यह भी आरोप है कि टामन सिंह सोनवानी ने अपने रिश्तेदारों, कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों के 18 रिश्तेदारों को बड़े पदों पर चयनित कराया।

29 लोगों को बनाया गया आरोपी

तत्कालीन PSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, सचिव जेके ध्रुव, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर, उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल, बहू भूमिका कटियार, टामन के बेटे नितेश सोनवानी, रिश्तेदार साहिल सोनवानी, निशा कोसले, दीपा आदिल, जेके ध्रुव के बेटे सुमित ध्रुव और उत्कर्ष चंद्राकर समेत कुल 29 लोगों को आरोपी बनाया गया है। मामले में CBI और ED की जांच जारी है।

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सौरभ चंद्राकर के खिलाफ दोबारा गिरफ्तारी वारंट जारी:महादेव ऐप के मास्टरमाइंड के प्रत्यर्पण की तैयारी तेज, इस बार ED ने जारी कराया वारंट

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रायपुर, एजेंसी। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के कथित प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की प्रक्रिया में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने ओमान से उसके प्रत्यर्पण (Extradition) के लिए स्पेशल पीएमएलए कोर्ट से फिर से ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी कराया है। वारंट जारी होने के बाद प्रत्यर्पण से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज तैयार कर भारत के हाई कमीशन को भेज दिए गए हैं।

ED के विशेष लोक अभियोजक सौरभ पांडे ने बताया कि एजेंसी को सूचना मिली थी कि सौरभ चंद्राकर दुबई में है। इसी आधार पर स्पेशल पीएमएलए कोर्ट से ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी कराया गया था और प्रत्यर्पण के लिए आवश्यक दस्तावेज दुबई भेजे गए थे।

बाद में जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि सौरभ दुबई छोड़कर ओमान पहुंच गया है। इसके बाद ED ने रायपुर की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में नया आवेदन पेश किया। कोर्ट ने 16-17 जुलाई में दोबारा ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी किया, ताकि ओमान के माध्यम से प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में एंट्री ली।

फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में एंट्री ली।

हाई कमीशन भेजे गए दस्तावेज

वकील सौरभ पांडे ने बताया कि कोर्ट से वारंट मिलने के बाद प्रत्यर्पण से संबंधित सभी दस्तावेजों पर आवश्यक न्यायिक एंडोर्समेंट कराए गए। इसके बाद सारे दस्तावेज भारत के हाई कमीशन को भेज दिए गए। अब मामला ओमान में संबंधित अधिकारियों और भारतीय एजेंसियों के समन्वय से आगे बढ़ रहा है।

ED के अधिकारियों का कहना है कि सौरभ चंद्राकर को भारत लाने के लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। अब प्रत्यर्पण की अगली कार्रवाई दोनों देशों के बीच तय प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

क्या होता है ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट?

ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट ऐसा वारंट होता है, जिसकी कोई निर्धारित समय-सीमा नहीं होती। यह तब तक प्रभावी रहता है, जब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो जाती या संबंधित अदालत इसे वापस नहीं लेती। विदेश में फरार आरोपियों के मामलों में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को प्रभावी बनाए रखने के लिए ऐसे वारंट का इस्तेमाल किया जाता है।

अब तक 4336 करोड़ की संपत्तियां अटैच

ED ने इस मामले में अब तक 175 से ज्यादा ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन किए गए। 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 74 लोगों को आरोपी बनाया गया। साथ ही रायपुर की विशेष PMLA अदालत में 5 प्रॉसिक्यूशन शिकायतें दाखिल की गई हैं।

एजेंसी के मुताबिक अब तक इस मामले में कुल 4336 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियां अटैच, सीज या फ्रीज की जा चुकी हैं।

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