छत्तीसगढ़
रायपुर : छत्तीसगढ़ को मिला देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार : उद्यानिकी एवं कृषि विभाग को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार से किया गया सम्मानित
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2 hours agoon
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Divya Akashबेंगलुरु में आयोजित 13वें नेशनल रिव्यू कांफ्रेंस में मिला पुरस्कार
रायपुर। छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य घोषित किया गया है। उद्यानिकी एवं कृषि विभाग को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
छत्तीसगढ़ सरकार की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री ने विभाग के अधिकारियों को बधाई दी है। यह पुरस्कार राज्य के किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और राज्य सरकार की कृषि नीतियों की सफलता को दर्शाता है।
यह पुरस्कार बेंगलुरु, कर्नाटक में 18-19 जनवरी 2026 को आयोजित 13वे नेशनल रिव्यू कांफ्रेंस में दिया गया। उद्यानिकी विभाग की ओर से प्रभारी संयुक्त संचालक नीरज शाहा ने यह पुरस्कार प्राप्त किया।

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छत्तीसगढ़
महासमुंद में ट्रक से मिला 4.75 करोड़ का गांजा:12 दिन में दूसरी बड़ी खेप पकड़ाई, ओडिशा से महाराष्ट्र ले जा रहे थे, 2 अरेस्ट
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1 hour agoon
January 19, 2026By
Divya Akashमहासमुंद,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सोमवार को ANTF (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) और पुलिस ने 4.75 करोड़ रुपए का गांजा जब्त किया है। जिसे ओडिशा से महाराष्ट्र ले जाया जा रहा था। पुलिस ने 2 तस्करों को गिरफ्तार किया है। मामला कोमाखान थाना क्षेत्र का है।
जानकारी के मुताबिक, तस्कर महाराष्ट्र पासिंग ट्रक में गांजा लोड कर जालना ले जा रहे थे। तस्करों के कब्जे से बोरियों में 950 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया है। जिसकी अनुमानित कीमत 4 करोड़ 75 लाख रुपए बताई जा रही है। पकड़े गए 2 आरोपी जालना के ही रहने वाले हैं।
वहीं, 12 दिन पहले ही महासमुंद पुलिस ने एम्बुलेंस से 5 क्विंटल 20 किलो गांजा जब्त किया था। जब्त गांजे की कीमत 2 करोड़ 60 लाख रुपए आंकी गई थी। गांजे को तस्कर ओडिशा के भवानीपटना जिले से छत्तीसगढ़ के रास्ते महाराष्ट्र के नागपुर ले जा रहे थे।

महासमुंद पुलिस ने 4.75 करोड़ के गांजे के साथ 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
ओडिशा से महाराष्ट्र जा रही थी गांजा की खेप
दरअसल, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और कोमाखान थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि एक ट्रक में बड़ी मात्रा में गांजा लोड है। ओडिशा से छत्तीसगढ़ के रास्ते महाराष्ट्र के जालना जा रही है। जिसमें 2 लोग सवार हैं। सूचना मिलते ही ANTF और कोमाखान पुलिस एक्टिव हो गई।
टीम ने ओडिशा-छत्तीसगढ़ बार्डर पर चेकिंग प्वाइंट बनाकर वहां से गुजरने वाली गाड़ियों की चेकिंग शुरू की। चेकिंग प्वाइंट पर गाड़ियों की जांच चल रही थी। इसी दौरान ट्रक (MH 20 EG 3969) चेकिंग प्वाइंट की ओर आते दिखी। पुलिसकर्मियों ने ट्रक को रोका।
पूछताछ में ट्रक सवार 2 युवकों ने अपना नाम अक्षय भोरजे (26) और शुभम आउटे (24) बताया। जो कि जालना के रहने वाले हैं। शक के आधार पर पुलिसकर्मियों ने ट्रक की तलाश ली। इस दौरान बोरियों में गांजा पाया गया। जिसके बाद पुलिस ने फौरन दोनों को गिरफ्तार करते हुए ट्रक और गांजा जब्त किया।
जब्त ट्रक की कीमत 15 लाख रुपए आंकी गई है। इसके अलावा पुलिस ने 2 मोबाइल और 4050 रुपए कैश बरामद किया है। फिलहाल, पुलिस ने दोनों तस्करों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। साथ ही उनसे पूछताछ की जा रही है।

छत्तीसगढ़
CGMSC घोटाला…कारोबारी शशांक के जीजा समेत 3 अरेस्ट:फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर भरे, मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स की खरीदी में गड़बड़ी की
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1 hour agoon
January 19, 2026By
Divya Akashरायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) घोटाला मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो/ आर्थिक अपराध शाखा (ACB/EOW) ने कार्रवाई करते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले दुर्ग स्थित मोक्षित कॉरपोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
सोमवार गिरफ्तार आरोपियों में रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि., पंचकुला के डायरेक्टर अभिषेक कौशल, श्री शारदा इंडस्ट्रीज रायपुर के प्रोप्राइटर राकेश जैन और रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स के लाईजनर प्रिंस जैन (शशांक चोपड़ा का जीजा) शामिल हैं। इन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर भरा था।
तीनों को 18 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया है कि राज्य में आम जनता को मुफ्त जांच सुविधा देने के लिए चलाई जा रही “हमर लैब” योजना के तहत मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स की खरीदी में भारी गड़बड़ी की गई।

ACB/EOW ने CGMSC घोटाले में 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
टेंडर में मिलीभगत का खुलासा
जांच के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में मोक्षित कॉर्पोरेशन को लाभ पहुंचाने के लिए रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर में भाग लिया। टेंडर प्रक्रिया के दौरान तीनों फर्मों ने आपसी मिलीभगत कर प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किया और कार्टेल बनाकर एक जैसे पैटर्न में टेंडर भरे।
एक जैसे दस्तावेज और दरें
जांच में यह भी पाया गया कि उत्पादों का विवरण, पैक साइज, रिएजेंट और कंज्यूमेबल्स की जानकारी तीनों फर्मों की ओर से लगभग एक जैसी दी गई। दरें भी समान पैटर्न में कोट की गईं, जिसमें सबसे कम दर मोक्षित कॉर्पोरेशन ने और उसके बाद आरएमएस और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने दरें भरीं।
550 करोड़ का शासन को नुकसान
इस मिलीभगत के चलते मोक्षित कॉर्पोरेशन ने CGMSC को MRP से 3 गुना तक ज्यादा कीमत पर सामग्री की आपूर्ति की, जिससे शासन को लगभग 550 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
आरोपी 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर
गिरफ्तार आरोपियों को 19 जनवरी को स्पेशल कोर्ट (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में पेश किया गया, जहां से उन्हें 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। ब्यूरो ने बताया कि जनहित से जुड़ी ‘हमर लैब योजना’ में शासकीय धन के दुरुपयोग से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है। साक्ष्यों के आधार पर आगे भी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, CGMSC घोटाले में अधिकारियों और कारोबारियों ने सरकार को 411 करोड़ रुपये का कर्जदार बना दिया। IAS, IFS समेत अफसरों ने मिलीभगत कर सिर्फ 27 दिनों में 750 करोड़ रुपए की खरीदी कर ली। इस केस में मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा EOW की रिमांड पर हैं।
CGMSC के अधिकारी, मोक्षित कार्पोरेशन, रिकॉर्ड्स और मेडिकेयर सिस्टम, श्री शारदा इंडस्ट्रीज और सीबी कार्पोरेशन ने 8 रुपये में मिलने वाला EDTA ट्यूब 2,352 रुपए और 5 लाख वाली CBS मशीन 17 लाख में खरीदी। मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन ने 300 करोड़ रुपये के रीएजेंट भी खरीदा।
CGMSC घोटाला कैसे हुआ, कौन–कौन शामिल थे, पढ़िए इस रिपोर्ट में ?
कैसे खुला CGMSC घोटाले का राज ?
दरअसल, दिसंबर 2024 में पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने दिल्ली में PMO, केंद्रीय गृहमंत्री कार्यालय, CBI और ED मुख्यालय जाकर CGMSC में घोटाले की शिकायत की थी। ननकीराम कंवर की शिकायत के बाद केंद्र से EOW को निर्देश मिला। इसके बाद EOW की टीम ने 5 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की।
जांच के दायरे में आने के बाद श्री शारदा इंडस्ट्रीज बंद
EOW की जांच होने के बाद श्री शारदा इंडस्ट्रीज प्रबंधन ने अपनी फर्म को बंद कर दिया है। कंपनी की साइट पर उसका स्टेट टेंपरेरी बंद बता रहा है। EOW के अनुसार आर.के नाम का कारोबारी इस कंपनी का संचालक है। यह कंपनी ग्राम तर्रा, तहसील धरसींवा रायपुर में स्थित है।
कंपनी संचालक को जांच के दायरे में लाया गया है। यह कंपनी 1 जुलाई 2017 को GST के दायरे में आई थी। कंपनी ने 5 जून 2024 को अपना अंतिम टैक्स जमा किया है।

EOW के अफसरों ने अपनी दस्तावेजों में स्पेशिफिकेशन का जिक्र किया है।
कैसे मिलता था फर्म को टेंडर ?
दैनिक भास्कर डिजिटल के पास EOW की जांच रिपोर्ट के कुछ दस्तावेज हैं। इसके मुताबिक CGMSC के अधिकारियों ने मोक्षित कार्पोरेशन को 27 दिन में 750 करोड़ का कारोबार दिया। मेडिकल किट समेत अन्य मशीनों की आवश्यकता नहीं थी। इसके बावजूद सिंडिकेट की तरह काम किया गया।
मोक्षित कार्पोरेशन और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने कार्टेल बनाकर CGMSC में दवा सप्लाई के लिए टेंडर कोड किया। CGMSC के तत्कालीन अधिकारियों ने भी कंपनी के मनमुताबिक टेंडर की शर्त रखी, ताकि दूसरी कंपनी कॉम्पिटिशन में ना आ सके। कंपनियां शर्तें पूरी न कर सके और टेंडर की रेस से बाहर हो जाए।
दूसरी कंपनी टेंडर रेस से बाहर होने और CGMSC के अधिकारियों से डायरेक्ट सपोर्ट मिलने के कारण मोक्षित कॉर्पोरेशन और श्री शारदा इंडस्ट्रीज को ही टेंडर मिला। इसका सीधा फायदा उनके टर्न ओवर में होता था।

कंपनी ने इस ट्यूब की सप्लाई में मुनाफाखोरी की है।
27 जनवरी को EOW की टीम ने की छापेमारी
दरअसल, 27 जनवरी को EOW की टीम ने रायपुर और दुर्ग में मोक्षित कॉर्पोरेशन के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके अलावा हरियाणा के पंचकुला में करीब 8 टीम ने दबिश थी। टीम ने शशांक के भाई, उनके रिश्तेदारों के घर और दफ्तरों में रेड कर दस्तावेज जब्त किए हैं।
इसके साथ ही EOW-ACB ने छापे के दौरान सप्लायर मोक्षित कॉर्पोरेशन के एमडी शशांक गुप्ता के बंगले, फैक्ट्री और पार्टनरों समेत 16 ठिकानों से बड़ी संख्या में दस्तावेज जब्त किए हैं। EOW की टीम MD के रिश्तेदारों और दोस्तों के घरों के साथ CGMSC के दफ्तर में भी जांच करने पहुंची थी।

EOW के अफसरों ने अपने दस्तावेजों में रख रखाव ना हाेने का जिक्र किया है।
कांग्रेस शासन काल में 300 करोड़ रुपए के रीएजेंट की खरीदी
वहीं, रीएजेंट सप्लाई से संबंधित दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। जरूरत न होते हुए भी कांग्रेस शासन काल में जनवरी 2022 से 31 अक्टूबर 2023 तक अरबों रुपए की खरीदी की है। इतना स्टॉक खरीद लिया गया था कि CGMSC और सभी बड़े अस्पतालों के गोदाम फुल हो गए।
इसके बाद CGMSC की ओर से मोक्षित कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड से 300 करोड़ रुपए के रीएजेंट क्रय कर राज्य के 200 से भी ज्यादा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में भेज दिया गया, जबकि उन स्वास्थ्य केन्द्रों में रीएजेंट को उपयोग करने वाली CBS मशीन ही नहीं थी।

CGMSC के अधिकारियों ने इस किट को जरूरत नहीं पड़ने पर भी मोक्षित कार्पोरेशन से खरीदा।
रीएजेंट की एक्सपायरी मात्र 2-3 माह की बची हुई थी और रीएजेंट खराब न हो, इसलिए छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन 600 फ्रिज खरीदने की भी तैयारी में लगी थी। रीएजेंट ऐसे हेल्थ सेंटरों में भेज दिया गया, जहां न लैब थी न तकनीशियन थे।

छत्तीसगढ़
23 जनवरी के टी-20 मैच के लिए प्रशासन अलर्ट:कलेक्टर ने बैठक लेकर दिए सख्त निर्देश, कहा– आग, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की पूरी तैयारी रहे
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1 hour agoon
January 19, 2026By
Divya Akashरायपुर,एजेंसी। शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में 23 जनवरी को होने वाले भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी-20 मुकाबले को लेकर प्रशासन और छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसी सिलसिले में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर सुरक्षा और व्यवस्था की समीक्षा की।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने बैठक में कहा कि यह मुकाबला न सिर्फ रायपुर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए महत्वपूर्ण आयोजन है। ऐसे में खिलाड़ियों के साथ-साथ स्टेडियम में आने वाले हजारों दर्शकों की सुविधाओं और सुरक्षा में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय आयोजन होने के कारण प्रशासन की ओर से तय सभी एसओपी का सख्ती से पालन किया जाना जरूरी है। आपदा की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पहले से स्पष्ट कार्ययोजना तैयार रखने और आम लोगों को बचाव उपायों के बारे में जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आपदा प्रबंधन और सुरक्षा पर विशेष जोर
कलेक्टर ने आग से बचाव को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की बात कही। उन्होंने निर्देश दिए कि स्टेडियम में आवश्यक फायर सेफ्टी उपकरण अनिवार्य रूप से उपलब्ध हों और जिला सेनानी के साथ समन्वय बनाकर इन उपकरणों का पहले ही परीक्षण कर लिया जाए। इसके साथ ही मेडिकल सुविधाओं, एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्टेडियम और उसके आसपास के पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
सभी गेट पर वालंटियर, दर्शकों की आसान आवाजाही के निर्देश
बैठक में यह भी तय किया गया कि मैच के दौरान सभी एंट्री गेट्स पर आयोजन समिति के वालंटियर तैनात रहेंगे, जिससे दर्शकों की आवाजाही सुचारू बनी रहे और भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि किसी भी स्थिति में अव्यवस्था न फैले और दर्शकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

रायपुर कलेक्ट्रेट में तैयारियों को लेकर हुई बैठक
पिछली गलतियों से सबक, इस बार सख्त इंतजाम
पिछले अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान एंट्री को लेकर हुए विवाद से सबक लेते हुए इस बार छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ ने सख्त फैसले लिए हैं। संघ ने साफ कर दिया है कि फर्स्ट इनिंग खत्म होने के बाद किसी भी दर्शक को स्टेडियम में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए 350 से ज्यादा प्राइवेट बाउंसरों की तैनाती की जा रही है, जबकि क्रिकेट संघ के 45 अधिकारी विशेष रूप से सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे। स्टेडियम के 13 गेटों पर लोहे की रेलिंग लगाई गई है, ताकि अवैध एंट्री को रोका जा सके।
खाने-पीने की चीजों पर भी सख्ती
खाने-पीने की चीजों को लेकर भी इस बार सख्ती बरती जा रही है। पिछले भारत-दक्षिण अफ्रीका मुकाबले के दौरान दर्शकों ने स्टेडियम में खाद्य पदार्थों की मनमानी कीमत वसूले जाने की शिकायत की थी। इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ इस बार ऐसे नियम लागू कर रहा है, जिससे दर्शकों से तय कीमत से ज्यादा वसूली न हो।
स्टेडियम के सभी एंट्री गेट्स पर इस बार तिहरी सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। पुलिस, प्राइवेट गार्ड्स और क्रिकेट संघ के कर्मचारियों की संयुक्त ड्यूटी लगाई जाएगी, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या विवाद की स्थिति न बने। पिछली बार कुछ दर्शक रेलिंग कूदकर मैदान तक पहुंच गए थे, जिसे देखते हुए इस बार बाउंड्री लाइन पर भी बाउंसर्स तैनात किए जाएंगे।
आईपीएल मुकाबलों को लेकर आरसीबी टीम मैनेजमेंट पहले ही रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निरीक्षण कर चुका है। रायपुर में आखिरी बार वर्ष 2013 में आईपीएल मुकाबला खेला गया था, जब दिल्ली कैपिटल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स आमने-सामने थे।
अब जब स्टेडियम पूरी तरह से बीसीसीआई के अधीन है और अंतरराष्ट्रीय मानकों की सभी सुविधाओं से लैस है, तो बड़े क्रिकेट आयोजनों की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं।


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