प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र सरकार के सहयोग के प्रति प्रकट किया आभार
नक्सल उन्मूलन, अधोसंरचना, किसानों, आदिवासियों, महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण में केंद्र की भूमिका को सराहा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए गए अभूतपूर्व सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी, निर्णायक और जनकल्याणकारी नेतृत्व में संचालित योजनाओं ने छत्तीसगढ़ के विकास को नई गति प्रदान की है तथा प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने पत्र में उल्लेख किया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता देने की केंद्र सरकार की नीति के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को विशेष केंद्रीय सहायता (SCA) योजना के तहत रू.2,080.29 करोड़ की सहायता प्राप्त हुई है। इसके साथ ही विशेष अधोसंरचना योजना (SIS), सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE), आधुनिक हथियारों की उपलब्धता, जंगल वारफेयर प्रशिक्षण और एयर सपोर्ट जैसी पहलों ने सुरक्षा बलों को मजबूत बनाया है तथा राज्य को नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक बढ़त दिलाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रू.2,377 करोड़ की लागत से 3,222 किलोमीटर लंबी 391 सड़कों तथा 88 वृहद पुलों की स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं ने बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए विकास और सुरक्षा दोनों को मजबूती प्रदान की है।
पत्र में मुख्यमंत्री ने वित्तीय सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किए जाने से छत्तीसगढ़ को अभूतपूर्व वित्तीय स्वायत्तता प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में राज्य को केंद्रीय करों में रू.3,46,806 करोड़ तथा विभिन्न योजनाओं में रू.1,43,328 करोड़ की सहायता प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के तहत रू.22,021 करोड़ तथा जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में रू.22,600 करोड़ की अतिरिक्त सहायता भी मिली है।
मुख्यमंत्री ने सड़क अधोसंरचना विकास को केंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना कोष (CRIF) के तहत रू.4,468 करोड़ तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए रू.35,766 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे रायपुर-विशाखापट्टनम, बिलासपुर-धनबाद, रायपुर-दुर्ग बायपास तथा अन्य महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को गति मिली है और राज्य की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक सुधार हुआ है।
ग्रामीण विकास के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत राज्य के 24.50 लाख पात्र हितग्राहियों को आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से लगभग 19.70 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं। मनरेगा के तहत पिछले 12 वर्षों में रू.39,123 करोड़ व्यय कर 152 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत रू.2,398 करोड़ की सहायता से 36.44 लाख परिवारों को शौचालय सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के विभिन्न चरणों के अंतर्गत 13,040 किलोमीटर सड़कों एवं 347 पुलों के निर्माण के लिए रू.7,951 करोड़ की स्वीकृति प्राप्त हुई है। वहीं पीएम जनमन के अंतर्गत 2,902 किलोमीटर सड़कों हेतु रू.2,007 करोड़ तथा पीएमजीएसवाई-4 के तहत 2,427 किलोमीटर सड़कों के लिए रू.2,246 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।
कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत राज्य के 25.51 लाख किसानों को अब तक रू.10,784 करोड़ की राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत रू.5,064 करोड़ की प्रीमियम सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना तथा अन्य केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से कृषि क्षेत्र को व्यापक सहयोग प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के 56 लाख राशन कार्डधारी परिवारों के 1.99 करोड़ सदस्यों को प्रति माह खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए प्रतिवर्ष लगभग रू.5,600 करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है। उज्ज्वला योजना के तहत 39.54 लाख महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है।
खनिज क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 62 से अधिक खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी हुई है, जिनसे भविष्य में रू.4.34 लाख करोड़ से अधिक का संभावित राजस्व प्राप्त होगा। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) एवं पीएमकेकेकेवाई के माध्यम से रू.17,887 करोड़ से अधिक की राशि संकलित कर 81,553 विकास कार्य पूर्ण किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने आदिवासी विकास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जनमन योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान तथा वन अधिकारों की मान्यता को ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में 56,569 पीवीटीजी परिवारों को लाभान्वित किया जा रहा है तथा 4.83 लाख व्यक्तिगत और 48 हजार से अधिक सामुदायिक वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं।
महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से 11,490 आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनबाड़ी के रूप में उन्नत किया गया है तथा 2,264 नए केंद्र स्वीकृत हुए हैं। राज्य के सभी जिलों में संचालित 42 सखी वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को सहायता और संरक्षण प्रदान कर रहे हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। राज्य में 5,499 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं। इसके अतिरिक्त 91 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट, 28 जिला सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं तथा 23 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों की स्वीकृति प्राप्त हुई है।
कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 18,330 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत 82,952 हितग्राहियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जबकि स्ट्राइव परियोजना के माध्यम से 17 आईटीआई संस्थानों का उन्नयन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से 31.37 लाख ग्रामीण परिवारों को 2.88 लाख स्व-सहायता समूहों से जोड़ा गया है। समूहों को रू.1,661 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। ‘लखपति दीदी’ पहल के अंतर्गत 10.42 लाख महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर नई पहचान बना रही हैं।
डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि डिजिटल भारत निधि (DBN) के माध्यम से राज्य के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 1,247 मोबाइल टावर स्थापित किए जा चुके हैं तथा 577 नए टावरों को स्वीकृति दी गई है, जिससे हजारों गांव डिजिटल सेवाओं से जुड़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में केंद्र सरकार के सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण विद्युतीकरण और विद्युत अधोसंरचना विकास के लिए लगभग रू.2,808 करोड़ की सहायता प्रदान की गई है। पीएम सूर्यघर योजना के अंतर्गत राज्य में 64 हजार से अधिक घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं तथा 46,649 परिवारों को रू.362 करोड़ की सब्सिडी प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री ने पर्यटन, खेल, उद्योग, ग्रामोद्योग, भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण तथा डिजिटल प्रशासन के क्षेत्रों में भी केंद्र सरकार द्वारा दिए गए सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों ने छत्तीसगढ़ को विकास, सुशासन और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने पत्र में पर्यटन, संस्कृति और खेल अधोसंरचना के क्षेत्र में केंद्र सरकार के सहयोग का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत रू.94.23 करोड़ की लागत से जशपुर, सरगुजा, बिलासपुर और जगदलपुर सहित जनजातीय अंचलों में पर्यटन सुविधाओं का विकास किया गया है। प्रसाद योजना के तहत रू.48.43 करोड़ की लागत से डोंगरगढ़ स्थित माँ बम्लेश्वरी मंदिर क्षेत्र का विकास किया गया है। वहीं नवा रायपुर में रू.147.66 करोड़ की लागत से चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर का निर्माण प्रदेश को सांस्कृतिक और पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगा। खेलो इंडिया योजना के तहत राज्य के आठ जिलों में खेल अधोसंरचना विकास के लिए रू.48 करोड़ तथा बहतराई स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए रू.5 करोड़ की सहायता दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी और इसके लिए मिली रू.17 करोड़ की सहायता छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री ने ग्रामोद्योग, हस्तशिल्प, रेशम और पारंपरिक कला के संरक्षण में केंद्र सरकार के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रायपुर में रू.200 करोड़ की लागत से प्रस्तावित पीएम एकता मॉल राज्य के हस्तशिल्प, हथकरघा और ओडीओपी उत्पादों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार उपलब्ध कराएगा। राष्ट्रीय हाथकरघा विकास कार्यक्रम के तहत 4,694 बुनकरों को लाभान्वित किया गया है, जबकि हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना के अंतर्गत 2,400 शिल्पियों के सशक्तिकरण हेतु विशेष परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। रेशम विकास कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों कृषकों और महिला हितग्राहियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है। पत्र में भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण, डिजिटल प्रशासन और सुशासन के क्षेत्र में हुए नवाचारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम, स्वामित्व योजना, एग्रीस्टैक और फार्मर रजिस्ट्री जैसी पहलों ने प्रशासन को अधिक पारदर्शी और नागरिकोन्मुख बनाया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में राज्य को रू.598 करोड़ का विशेष सहायता अनुदान प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है जिसने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू किया है। पिछले एक वर्ष में दो लाख से अधिक प्रकरणों का स्वतः नामांतरण किया गया है तथा 32 लाख से अधिक दस्तावेजों का डिजिटलीकरण कर नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सामाजिक न्याय, उद्यानिकी, जैव प्रौद्योगिकी, परिवहन सुरक्षा तथा अन्य क्षेत्रों में प्राप्त केंद्रीय सहयोग का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति पुनः आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नशा मुक्त भारत अभियान, अटल वयो अभ्युदय योजना, सुगम्य भारत अभियान, बायोटेक इंक्यूबेशन सेंटर, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च तथा महिला सुरक्षा हेतु स्थापित निर्भया कमांड सेंटर जैसी पहलों ने प्रदेश के विकास को नई दिशा दी है।
मुख्यमंत्री ने पत्र के अंत मे उल्लेखित किया कि छत्तीसगढ़ की साढ़े तीन करोड़ जनता की ओर से वे प्रधानमंत्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और विश्वास जताते हैं कि विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में केंद्र सरकार का मार्गदर्शन और सहयोग भविष्य में भी इसी प्रकार प्राप्त होता रहेगा।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ सरकार ने भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के 7 अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। प्रशासनिक आधार पर जारी आदेश के तहत कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी गई है, जबकि कुछ को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
आदेश के मुताबिक, संजीता गुप्ता को छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ का प्रभारी प्रबंध संचालक बनाया गया है। वहीं एस. वेंकटाचलम को कार्यकारी संचालक, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के पद पर प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है।
अमरनाथ प्रसाद को वन विकास निगम के MD का अतिरिक्त प्रभार
अमरनाथ प्रसाद सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के पद पर बने रहेंगे। उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। इसके अलावा अभिषेक कुमार सिंह को प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख कार्यालय में वन संरक्षक बनाया गया है।
टाइगर रिजर्व में गुरुनाथन और प्रणय मिश्रा को नई जिम्मेदारी
गुरुनाथन एन. को उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं क्षेत्र संचालक नियुक्त किया गया है। वहीं प्रणय मिश्रा को गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व का प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं क्षेत्र संचालक तथा प्रोजेक्ट एलीफैंट का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
रमेश जांगड़े बने क्षेत्रीय महाप्रबंधक
रमेश कुमार जांगड़े को छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम में क्षेत्रीय महाप्रबंधक का प्रभारी बनाया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सूची में पहले तीन अधिकारियों की नई पदस्थापना 31 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की साल 2021 की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब मनी लॉन्ड्रिंग तक पहुंच गई है। पूर्व PSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के खिलाफ चल रही जांच के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी वित्तीय लेनदेन की पड़ताल शुरू कर दी है।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का दायरा 500 करोड़ रुपए से अधिक हो सकता है। आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर, DSP समेत अन्य प्रशासनिक पदों पर चयन के लिए अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपए की वसूली की गई।
वहीं, CBI की अब तक की जांच में 47 लाख रुपए की कथित मनी लॉन्ड्रिंग और करीब 1.3 करोड़ रुपए की वसूली से जुड़े सबूत मिलने का दावा किया गया है। जांच के अनुसार रकम का कुछ हिस्सा कैश लिया गया, जबकि बाकी राशि परिवार के नियंत्रण वाली संस्था के जरिए CSR दान के नाम पर खपाई गई।
47 लाख संस्था के खाते में ट्रांसफर
जांच एजेंसी के अनुसार, एक पावर प्लांट के डायरेक्टर के बेटे और बहू के चयन के एवज में 47 लाख रुपए ग्रामीण विकास समिति नाम की संस्था के खाते में ट्रांसफर किए गए थे। आरोप है कि इस संस्था के अधिकांश सदस्य तत्कालीन PSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के परिजन या करीबी थे।
संस्था की चेयरपर्सन उनकी पत्नी पद्मनी सिंह सोनवानी थीं। जांच में यह भी दावा किया गया है कि इस रकम को एक ऐसे कॉलेज के लिए CSR दान के रूप में दर्शाया गया, जिसका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं है। जांच एजेंसियां इस पूरे वित्तीय लेनदेन की मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही हैं।
मेंस पेपर और चयन के नाम पर 1.3 करोड़ की वसूली
CBI चार्जशीट के मुताबिक, कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर ने अभ्यर्थियों से मुख्य परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने और चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर करीब 1.3 करोड़ रुपए वसूले। मामले में नाम सामने आने के बाद से उत्कर्ष फरार बताया जा रहा है। हाईकोर्ट उसकी अग्रिम जमानत भी रद्द कर चुका है। अब ED भी उसकी तलाश कर रही है।
12 से ज्यादा भर्ती परीक्षाएं जांच के घेरे में
जांच एजेंसियों के मुताबिक टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल में CGPSC, सहायक प्रोफेसर समेत 12 से ज्यादा भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच की जा रही है। CGPSC-2021 में 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा हुई थी।
13 फरवरी 2022 को हुई प्रारंभिक परीक्षा में 2,565 अभ्यर्थी पास हुए। 26 से 29 मई 2022 तक हुई मुख्य परीक्षा में 509 अभ्यर्थी सफल हुए।
170 अभ्यर्थियों का हुआ चयन
इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई। आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे पदों के लिए 75 लाख से 1 करोड़ रुपए प्रति पोस्ट तक लिए गए। यह भी आरोप है कि टामन सिंह सोनवानी ने अपने रिश्तेदारों, कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों के 18 रिश्तेदारों को बड़े पदों पर चयनित कराया।
29 लोगों को बनाया गया आरोपी
तत्कालीन PSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, सचिव जेके ध्रुव, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर, उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल, बहू भूमिका कटियार, टामन के बेटे नितेश सोनवानी, रिश्तेदार साहिल सोनवानी, निशा कोसले, दीपा आदिल, जेके ध्रुव के बेटे सुमित ध्रुव और उत्कर्ष चंद्राकर समेत कुल 29 लोगों को आरोपी बनाया गया है। मामले में CBI और ED की जांच जारी है।
रायपुर, एजेंसी। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के कथित प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की प्रक्रिया में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने ओमान से उसके प्रत्यर्पण (Extradition) के लिए स्पेशल पीएमएलए कोर्ट से फिर से ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी कराया है। वारंट जारी होने के बाद प्रत्यर्पण से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज तैयार कर भारत के हाई कमीशन को भेज दिए गए हैं।
ED के विशेष लोक अभियोजक सौरभ पांडे ने बताया कि एजेंसी को सूचना मिली थी कि सौरभ चंद्राकर दुबई में है। इसी आधार पर स्पेशल पीएमएलए कोर्ट से ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी कराया गया था और प्रत्यर्पण के लिए आवश्यक दस्तावेज दुबई भेजे गए थे।
बाद में जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि सौरभ दुबई छोड़कर ओमान पहुंच गया है। इसके बाद ED ने रायपुर की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में नया आवेदन पेश किया। कोर्ट ने 16-17 जुलाई में दोबारा ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी किया, ताकि ओमान के माध्यम से प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।
फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में एंट्री ली।
हाई कमीशन भेजे गए दस्तावेज
वकील सौरभ पांडे ने बताया कि कोर्ट से वारंट मिलने के बाद प्रत्यर्पण से संबंधित सभी दस्तावेजों पर आवश्यक न्यायिक एंडोर्समेंट कराए गए। इसके बाद सारे दस्तावेज भारत के हाई कमीशन को भेज दिए गए। अब मामला ओमान में संबंधित अधिकारियों और भारतीय एजेंसियों के समन्वय से आगे बढ़ रहा है।
ED के अधिकारियों का कहना है कि सौरभ चंद्राकर को भारत लाने के लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। अब प्रत्यर्पण की अगली कार्रवाई दोनों देशों के बीच तय प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
क्या होता है ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट?
ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट ऐसा वारंट होता है, जिसकी कोई निर्धारित समय-सीमा नहीं होती। यह तब तक प्रभावी रहता है, जब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो जाती या संबंधित अदालत इसे वापस नहीं लेती। विदेश में फरार आरोपियों के मामलों में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को प्रभावी बनाए रखने के लिए ऐसे वारंट का इस्तेमाल किया जाता है।
अब तक 4336 करोड़ की संपत्तियां अटैच
ED ने इस मामले में अब तक 175 से ज्यादा ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन किए गए। 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 74 लोगों को आरोपी बनाया गया। साथ ही रायपुर की विशेष PMLA अदालत में 5 प्रॉसिक्यूशन शिकायतें दाखिल की गई हैं।
एजेंसी के मुताबिक अब तक इस मामले में कुल 4336 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियां अटैच, सीज या फ्रीज की जा चुकी हैं।