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छत्तीसगढ़

बलरामपुर-रामानुजगंज : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बाबा कर्मेश्वर का किया रुद्राभिषेक, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

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मुख्यमंत्री ने ग्राम कर्रा में मंगल भवन निर्माण की घोषणा की

प्रदेश के शक्तिपीठों को धार्मिक कॉरिडोर के रूप में जोड़ रही राज्य सरकार: मुख्यमंत्री साय

रामलला दर्शन योजना से 50 हजार श्रद्धालुओं ने किए अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन

तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत देश के 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन की सुविधा, अब तक 10 हजार श्रद्धालु हुए लाभान्वित

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत मुख्यमंत्री ने माता श्रीमती जसमनी देवी साय के नाम लगाया रुद्राक्ष का पौधा
बलरामपुर – रामानुजगंज जिले के ग्राम कर्रा की पावन धरा पर महारुद्र यज्ञ एवं शिव पुराण कथा में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बाबा कर्मेश्वर का किया रुद्राभिषेक, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

बलरामपुर-रामानुजगंज ,26 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विकासखंड राजपुर अंतर्गत ग्राम कर्रा में आयोजित श्री महारुद्र यज्ञ एवं शिव पुराण कथा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्राचीन बाबा कर्मेश्वर धाम में भगवान शिव का विधि-विधान से रुद्राभिषेक एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उत्तरोत्तर प्रगति की कामना की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर ग्राम कर्रा में मंगल भवन निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बाबा कर्मेश्वर की कृपा से यह क्षेत्र निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़े, इसके लिए राज्य सरकार आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाएगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बाबा कर्मेश्वर का किया रुद्राभिषेक, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि ग्राम कर्रा की पावन भूमि पर श्री महारुद्र यज्ञ एवं शिव पुराण कथा का आयोजन होना अत्यंत सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कथावाचक आचार्य दिव्यानंद जी महाराज को नमन करते हुए आयोजन समिति और समस्त श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पवित्र श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है। भगवान भोलेनाथ से यही प्रार्थना है कि उनकी कृपा पूरे छत्तीसगढ़ पर बनी रहे और प्रत्येक परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास हो।

’छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक विरासत को सहेजने और संवारने का हो रहा कार्य’

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ धर्म, संस्कृति और आस्था की समृद्ध परंपराओं की भूमि है। यह माता कौशल्या की जन्मभूमि और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। प्रदेश के गांव-गांव में प्राचीन शिवालयों, देवी मंदिरों और लोक आस्था के केंद्रों की गौरवशाली परंपरा रही है। राज्य सरकार इस समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों को धार्मिक कॉरिडोर के रूप में जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ ही धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।

लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं ने किए रामलला के दर्शन
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भगवान श्रीराम से गहरा और आत्मीय संबंध है। राज्य सरकार की श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन का अवसर मिल रहा है। अब तक लगभग 50 हजार श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों की धार्मिक आस्था और तीर्थ दर्शन की अभिलाषा को ध्यान में रखते हुए तीर्थ दर्शन योजना भी प्रारंभ की गई है। इसके अंतर्गत देशभर के 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों को चिन्हांकित किया गया है। अब तक लगभग 10 हजार श्रद्धालु इस योजना का लाभ लेकर विभिन्न तीर्थ स्थलों के दर्शन कर चुके हैं।
’शांति और विकास के नए दौर में आगे बढ़ रहा बस्तर’

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाबा कर्मेश्वर के आशीर्वाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बस्तर को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। दशकों तक हिंसा से प्रभावित रहे क्षेत्रों में आज शांति और विकास का नया वातावरण बन रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, संचार और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। सरकार का संकल्प है कि विकास का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे प्रत्येक परिवार तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्रा सहित बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में भी विकास कार्यों को निरंतर गति दी जाएगी। क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए यहां आवश्यक सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

’सदियों पुरानी लोक आस्था का केंद्र है बाबा कर्मेश्वर धाम’

ग्राम कर्रा स्थित बाबा कर्मेश्वर धाम क्षेत्र की लोक आस्था का प्राचीन और महत्वपूर्ण केंद्र है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां विराजमान शिवलिंग प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ है। जनश्रुतियों के अनुसार लगभग नौवीं-दसवीं शताब्दी में साल के वृक्ष के खोल में शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी और तभी से यहां भगवान शिव की पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। वर्तमान में श्री कर्मेश्वर महादेव मंदिर जीर्णाेद्धार समिति द्वारा मंदिर के जीर्णाेद्धार का कार्य कराया जा रहा है।

बाबा कर्मेश्वर से क्षेत्र की लोक मान्यताओं का भी गहरा संबंध है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार पुराने समय में जब क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा नहीं होती थी, तब ग्रामीण भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करते थे। शिवलिंग पर गाय के गोबर का लेप लगाने की भी एक पारंपरिक मान्यता रही है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि इस अनुष्ठान के बाद क्षेत्र में वर्षा होती थी। पीढि़यों से चली आ रही ऐसी लोक आस्थाओं ने बाबा कर्मेश्वर धाम को क्षेत्र की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया है।

’मां के नाम लगाया रुद्राक्ष का पौधा’

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बाबा कर्मेश्वर धाम मंदिर परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम 3.0’ अभियान के अंतर्गत अपनी माता श्रीमती जसमनी देवी साय के नाम पर रुद्राक्ष का पौधा रोपा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने और अधिक से अधिक पौधरोपण करने का आह्वान किया।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने भी मंदिर परिसर में बेल का पौधा लगाया। अन्य जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने भी ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधरोपण किया। इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, आईजी दीपक झा, सरगुजा संभागायुक्त नरेंद्र दुग्गा, कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर,  सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण,  गणमान्य नागरिक और श्रद्धालुगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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जांजगीर-चांपा की 3 बच्चियों की उल्टी-दस्त से मौत:2 ने इंदौर, तीसरी ने इटारसी में दम तोड़ा

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इटारसी/जांजगीर-चांपा, एजेंसी। मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़ की 3 बच्चियों की उल्टी-दस्त से मौत हो गई। इंदौर के बेटमा थाना क्षेत्र में फूड पॉइजनिंग के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन 2 बच्चियों ने इंदौर और तीसरी ने इटारसी में दम तोड़ दिया। तीनों एक ही परिवार की थीं।

बेटमा पुलिस के मुताबिक, तीनों बच्चियों की उम्र 10, 8 और 5 साल बताई गई है। इनमें से दो ने इंदौर में दम तोड़ा, जबकि तीसरी की तबीयत छत्तीसगढ़ ले जाते समय बिगड़ गई। उसे इटारसी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। तीनों बच्चियां मूल रूप से जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़ की रहने वाली थीं।

छत्तीसगढ़ की 3 बच्चियों की उल्टी-दस्त से मौत हो गई।

छत्तीसगढ़ की 3 बच्चियों की उल्टी-दस्त से मौत हो गई।

रात में खाना खाने के बाद तीनों की तबीयत बिगड़ी

परिजन के मुताबिक, पीथमपुर की एलएनटी कंपनी में कार्यरत नरेंद्र सिंह और उनकी पत्नी अमरोतिन के परिवार ने रात करीब 2 बजे दाल, चावल, रोटी और सब्जी खाई थी। खाना खाने के तुरंत बाद उनकी तीनों बेटियों को उल्टी-दस्त शुरू हो गए।

तबीयत बिगड़ने पर बच्चियों को अस्पताल ले जाया गया। इंदौर के अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद दो बच्चियों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन दोनों के शव एंबुलेंस से पैतृक गांव जांजगीर-चांपा ले जाने के लिए रवाना हुए।

बिना पोस्टमॉर्टम कराए सौंप दिया गया शव

परिजन का आरोप है कि इंदौर के अस्पताल में दोनों बच्चियों के शवों को बिना पोस्टमॉर्टम कराए उन्हें सौंप दिया गया। इसी दौरान एंबुलेंस में साथ मौजूद तीसरी बेटी की तबीयत भी बिगड़ गई। उसे रास्ते में इटारसी के सरकारी अस्पताल ले जाया गया।

डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

मौत की वजह पोस्टमॉर्टम और बिसरा रिपोर्ट से होगी स्पष्ट

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तीनों बच्चियों के शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मौत की सटीक वजह स्पष्ट नहीं है। संदिग्ध फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि तीनों की तबीयत खाना खाने के तुरंत बाद बिगड़ी थी।

TI सौरभ पांडे ने बताया कि तीनों लड़कियों का पोस्टमॉर्टम इटारसी में किया जाएगा। इसके बाद, शव उनके परिवारों को सौंप दिए जाएंगे। मौत के वास्तविक कारण का पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और बिसरा जांच के बाद ही चल सकेगा। पुलिस मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रही है।

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पुलिस कस्टडी में मौत,CBI ने दर्ज की हत्या की FIR:सुप्रीम-कोर्ट ने 13 अक्टूबर से पहले मांगी जांच रिपोर्ट, रिश्तेदारों का दावा-36 घंटे तक पीटा

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जनवरी 2024 में श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे की हिरासत में हुई मौत के मामले में अब CBI ने FIR दर्ज की है। सुप्रीम कोर्ट के 12 अगस्त 2026 के आदेश के बाद CBI ने यह कार्रवाई की है।

CBI ने 30 जुलाई 2026 को सिविल लाइंस थाने में दर्ज FIR नंबर 1036 को अपनी जांच की मुख्य FIR माना है। इस मामले में CBI ने हत्या की धारा 302 के तहत केस दर्ज किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने CBI को 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। फिलहाल CBI के दस्तावेजों में आरोपी के नाम की जगह अज्ञात व्यक्ति लिखा गया है।

जिम्मेदार अधिकारियों की भी हो रही जांच

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में है कि कहा कि श्रवण की हिरासत में मौत किन परिस्थितियों में हुई, CBI इसकी जांच करेगी। अगर जांच में कोई अधिकारी हिरासत में हिंसा के लिए जिम्मेदार पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कोर्ट ने निर्देश पर CBI के अधिकारी जांच कर रहे है। साथ ही उन अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। जिन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद उचित कार्रवाई नहीं की।

कोर्ट के निर्देश पर CBI की टीम मामले की जांच कर रही है। साथ ही उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद उचित कार्रवाई नहीं की।

क्या है पूरा मामला ?

जानकारी के मुताबिक, ग्राम मोहरा निवासी श्रवण सूर्यवंशी (35) खेती-किसानी करता था। पुलिस ने उसे 17 जनवरी 2024 को पकड़ा था। इसके बाद 18 जनवरी को पुलिस ने 6 लीटर महुआ शराब के साथ उसकी गिरफ्तारी का दावा किया।

पुलिस ने उसके खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत केस दर्ज कर 19 जनवरी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अगले दिन 20 जनवरी को जब परिजन उससे मिलने जेल पहुंचे, तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया।

जेल पहुंचने के बाद बिगड़ी तबीयत, तीसरे दिन मौत

इस दौरान 21 जनवरी को जेल में अचानक श्रवण की तबीयत बिगड़ गई। पहले जेल अस्पताल में उसका इलाज किया गया। इसके बाद हालत गंभीर होने पर उसे सिम्स अस्पताल रेफर किया गया, जहां 22 जनवरी को उसकी मौत हो गई।

जेल प्रबंधन के अनुसार, श्रवण को सांस लेने में दिक्कत होने पर पहले जेल अस्पताल और फिर सिम्स भेजा गया था। सिम्स पहुंचने के बाद देर रात उसकी मौत हो गई।

न्यायिक जांच में क्या सामने आया था ?

22 जुलाई 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी निकसन डेविड लकड़ा ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें पोस्टमॉर्टम, हिस्टोपैथोलॉजी और FSL रिपोर्ट समेत दूसरे दस्तावेजों की जांच की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, श्रवण के शरीर में किसी तरह का रासायनिक जहर नहीं मिला था। मेडिकल जांच में मौत की वजह सिर में लगी चोट के कारण कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट बताई गई। जांच अधिकारी ने भी उपलब्ध दस्तावेजों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर माना कि श्रवण की मौत सिर में लगी चोट की वजह से हुई थी।

पत्नी ने कहा- पुलिस श्रवण को लेकर गई थी

न्यायिक जांच में श्रवण की पत्नी लहराबाई सूर्यवंशी का बयान भी दर्ज किया गया। उसने बताया कि घटना के दिन थाना सीपत से पुलिसकर्मी श्रवण को अपने साथ लेकर गए थे। बाद में फोन से जानकारी मिली कि उसे सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अगले दिन उसकी मौत की सूचना मिली। हालांकि, पत्नी ने यह भी कहा कि श्रवण की मौत कैसे हुई, इसकी उसे जानकारी नहीं थी।

श्रवण के पिता अमृतलाल ताम्र ने जांच में बताया कि 18 जनवरी की शाम करीब 6:30 बजे थाना सीपत की पुलिस उसे शराब के मामले में लेकर गई थी। 21 जनवरी की रात उन्हें सूचना मिली कि श्रवण को जेल से सिम्स अस्पताल भेजा गया है। अगले दिन सुबह करीब 6 बजे बेटे की मौत की जानकारी मिली।

13 अक्टूबर को रिपोर्ट पेश करेगी CBI

सुप्रीम कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया है कि वह 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे। कोर्ट ने राज्य सरकार को मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। हालांकि, अंतिम मुआवजे की राशि बाद में तय की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच के लिए पहुंची थी टीम

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 15 अगस्त को CBI की टीम बिलासपुर पहुंची थी। SP रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने सिविल लाइन थाने से केस डायरी समेत अन्य जरूरी रिकॉर्ड हासिल किए।

इसके बाद टीम सेंट्रल जेल पहुंची, जहां जेल अधीक्षक और अन्य स्टाफ से पूछताछ कर घटना से जुड़ी जानकारी ली थी। CBI टीम केस डायरी और मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच जारी है।

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त्रिकुंडा बांध में ग्रामीण को लीकेज ठीक करने उतारा, मौत:परिजन बोले- सिंचाई विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही से गई जान, लाइफ जैकेट नहीं दी

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बलरामपुर, एजेंसी। बलरामपुर जिले के त्रिकुंडा थाना क्षेत्र के नावाडीह गांव में सिंचाई विभाग के जलाशय में लीकेज ठीक करने के दौरान 55 वर्षीय राजकुमार मरावी की डूबने से मौत हो गई। परिजनों ने सिंचाई विभाग के टाइमकीपर और चौकीदार पर राजकुमार को बिना लाइफ जैकेट या अन्य सुरक्षा उपकरण के करीब 22 फीट गहरे पानी में उतारने का आरोप लगाया है। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है।

मामले में पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह और कांग्रेस नेता संतोष यादव ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं बड़ी संख्या में ग्रामीण भी निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

22 फीट गहरे पानी में उतरे मजदूर की डूबने से मौत

22 फीट गहरे पानी में उतरे मजदूर की डूबने से मौत

एक महीने से जलाशय में हो रहा था पानी का रिसाव

जानकारी के अनुसार, त्रिकुंडा जलाशय से पिछले करीब एक महीने से पानी का रिसाव हो रहा था। लीकेज को ठीक कराने के लिए सिंचाई विभाग के टाइमकीपर अनिल गुप्ता और चौकीदार अहमद अली मौके पर पहुंचे थे।

बताया जा रहा है कि जलाशय का निरीक्षण करने के बाद गांव के ही राजकुमार मरावी को काम के लिए बुलाया गया। परिजनों के मुताबिक, राजकुमार की तबीयत ठीक नहीं थी और उन्होंने पहले जलाशय पर जाने से मना कर दिया था।

परिजनों का आरोप- बार-बार बुलाया, 5 हजार रुपए देने की बात कही

मृतक की बहू देवंती मरावी ने आरोप लगाया कि राजकुमार के मना करने के बावजूद उन्हें बार-बार लोगों को भेजकर बुलाया गया। परिजनों के अनुसार, पहले 500 रुपए, फिर 1000 रुपए और बाद में 5000 रुपए देने की बात कहकर उन्हें काम के लिए तैयार किया गया।

परिजनों का आरोप है कि इसके बाद राजकुमार को जलाशय के गहरे पानी में लीकेज ठीक करने के लिए उतारा गया।

बिना लाइफ जैकेट 22 फीट गहरे पानी में उतारने का आरोप

परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक, राजकुमार को करीब 22 फीट गहरे पानी में बिना लाइफ जैकेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के उतारा गया था। कुछ देर बाद जब वह बाहर नहीं आए तो उनकी तलाश शुरू की गई।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इस दौरान एक 15 वर्षीय बच्चे की कमर में रस्सी बांधकर उसे पानी में उतारा गया था। हालांकि बच्चा सुरक्षित बाहर निकल आया। घटना की सूचना पुलिस और एसडीआरएफ को दी गई। इसके बाद दोनों टीमों ने मौके पर पहुंचकर जलाशय में तलाश शुरू की।

अगले दिन नहर में मिला शव

राजकुमार की तलाश रात तक जारी रही। घटना के दूसरे दिन बुधवार सुबह करीब 11:30 बजे उनका शव बांध की नहर में मिला। इसके बाद पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया। ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे के बाद सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मौके से चले गए। इसको लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है।

परिजन बोले- सुरक्षा इंतजाम होते तो बच सकती थी जान

परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि जलाशय में जोखिम भरे काम के लिए राजकुमार को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए। उनका कहना है कि अगर उन्हें लाइफ जैकेट और अन्य सुरक्षा इंतजाम उपलब्ध कराए जाते तो हादसा टाला जा सकता था।

घटना के बाद ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के टाइमकीपर अनिल गुप्ता, चौकीदार अहमद अली और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

पूर्व विधायक ने की एफआईआर की मांग

पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह और कांग्रेस नेता संतोष यादव ने मामले को गंभीर बताते हुए दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

फिलहाल परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों और हादसे में जिम्मेदारी तय करने को लेकर जांच की मांग की जा रही है। घटना में सिंचाई विभाग के संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

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