छत्तीसगढ़
रायपुर : जन-जन की सहभागिता से साकार होगा विकसित छत्तीसगढ़ का सपना: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
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1 year agoon
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Divya Akash
प्रदेशवासियों से आत्मनिर्भर भारत – आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण का आव्हान
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान से हमें मिला स्वतंत्रता का उजाला
जनजातीय नायकों का बलिदान देशभक्ति की अद्भुुत मिसाल
अटल जी के जन्म शताब्दी वर्ष को हम अटल निर्माण वर्ष के रूप में मना रहे हैं
ऑपरेशन सिंदूर भारत के पराक्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक
राष्ट्रहित में प्रदेशवासियों को स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की अपील
रायपुर में शीघ्र ही पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की घोषणा
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव का किया शुभारंभ
शहरों को संवारने मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना आरंभ
बस्तर और सरगुजा संभाग में शुरू होगी मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना








रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज देश के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउण्ड में ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली। उन्होंने प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन हम सभी के लिए अत्यंत गौरव का दिन है। अंग्रेजी साम्राज्यवाद से लड़ते हुए हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपना सर्वस्व बलिदान कर हमें स्वतंत्रता का उजाला सौंपा।
मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और सेना के वीर जवानों को नमन करते हुए कहा कि हम छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 गौरवशाली वर्षाें की विकास यात्रा को ’’छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव’’ के रूप में मना रहे हैं। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस पर छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के शुभारंभ की घोषणा की। उन्होंने यह भी घोषणा कि रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली जल्द ही लागू की जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि इस अवसर पर हम विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प लें। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता श्रद्धेय अटल के सुशासन का दृढ़ संकल्प हमें शक्ति देता है। हम निश्चित ही जन-जन की सहभागिता से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लक्ष्य को साकार करेंगे। गोस्वामी तुलसीदास जी का कथन ‘‘रामकाजु कीन्हें बिनु मोहि कहां बिश्राम‘‘ हमारा आदर्श वाक्य है और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के अंत्योदय के सिद्धांत हमारे पथप्रदर्शक हैं।
राष्ट्रहित में स्वदेशी अपनाएं
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वदेशी को जन-आंदोलन का रूप दिया है। आत्मनिर्भर भारत 140 करोड़ भारतीयों का संकल्प है। स्वतंत्रता दिवस का यह प्रेरक अवसर हमें राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए प्रदेशवासियों से राष्ट्रहित में यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि – हर नागरिक स्वदेशी वस्तु खरीदना देशभक्ति का कार्य माने, हर व्यवसाय गुणवत्ता और स्थिरता को अनिवार्य मानें, हर नवाचारी सबसे पहले भारत के बारे में सोचे, हर किसान पर्यावरण अनुकूल समावेशी कृषि को अपनाए और हर क्षेत्र निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े।
वोकल फॉर लोकल अभियान में अग्रणी छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के वोकल फॉर लोकल अभियान को आगे बढ़ाने में छत्तीसगढ़ की अग्रणी भूमिका हो। स्वदेशी रोजगार सृजन का ही नहीं देशभक्ति का भी एक उपक्रम है। हम नई औद्योगिक नीति के जरिए प्रदेश में बनने वाले उत्पादों को वैश्विक मंच प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री जी के लोकल फॉर ग्लोबल विजन पर काम कर रहे हैं। अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को अपनाने से स्थानीय कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों को रोजगार मिलता है। इसका सीधा परिणाम देश और प्रदेश की आर्थिक समृद्धि के रूप में सामने आता है। हमारी आयात निर्भरता कम होती है। हम खादी को बढ़ावा देकर स्थानीय बुनकरों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं, इससे हमें टैक्सटाइल क्षेत्र में अपनी वैश्विक पहचान बनाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएसएमई को प्रोत्साहित कर हम मेक इन इंडिया अभियान में अपनी भागीदारी बढ़ा रहे हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष जोर देना होगा।
जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान के साथ जय अनुसंधान हो हमारा ध्येय वाक्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएसएमई के लिए प्रधानमंत्री जी द्वारा दिया गया जीरो डिफेक्ट – जीरो इफेक्ट का मंत्र अत्यंत कारगर है। हमारे गांव, नगर और जिले स्तर पर तैयार होने वाली वस्तुएं गुणवत्ता के मामले में किसी से कम नहीं है। इसके लिए उन्हें डिजिटल संसाधनों, नवाचार, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और एआई जैसी तकनीक को अपनाना होगा। अब जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान के साथ जय अनुसंधान… के ध्येय वाक्य के साथ हम आगे बढ़ेंगे।
प्राकृतिक खेती हमारे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेक इन इंडिया अभियान के जरिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करते हुए भारत सैन्य उपकरणों का निर्यातक के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि आज जलवायु संकट का सीधा असर हमारे जीवन पर पड़ रहा है। कृषि क्षेत्र इससे अछूता नहीं है। ऐसे समय में रसायन मुक्त, प्राकृतिक खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ हमारे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी साबित होगी। श्रीअन्न, दलहन-तिलहन और मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देकर छत्तीसगढ़ के हमारे किसान भाई कृषि लागत को कम कर सकते हैं। इससे रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर हमारी निर्भरता भी कम होगी।
स्वतंत्रता संग्राम के नायकों का पुण्य स्मरण
मुख्यमंत्री ने देश की आजादी की लड़ाई में स्वर्णिम अक्षरों में लिखे गये परलकोट विद्रोह के नायकों का पुण्य स्मरण करते हुए कहा कि इस वर्ष परलकोट विद्रोह के 200 वर्ष पूरे हो गए हैं। आज भी शहीद गेंदसिंह की वीरता के किस्से प्रदेश की जनता उतने ही गौरव भाव से सुन रही है। भूखे और उत्पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने के लिए शहीद वीरनारायण सिंह द्वारा की गई लड़ाई को कौन भूल सकता है। उन्होंने रायपुर सिपाही विद्रोह के नायक हनुमान सिंह जी का भी इस अवसर पर स्मरण किया। उन्होंने कहा कि भूमकाल विद्रोह के माध्यम से वीर गुंडाधुर ने अपनी मातृभूमि के लिए जिस अद्भुत शौर्य का प्रदर्शन किया, वो इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। शहीद यादव राव, वेंकट राव, धुरवा राव, डेबरी धुर, आयतु माहरा सहित हमारे अनेक जनजातीय नायकों का बलिदान देशभक्ति की अद्भुुत मिसाल है।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने अपना अटल संकल्प पूरा किया और देश के नक्शे में छत्तीसगढ़ का एक नये राज्य के रूप में उदय हुआ। अटल के जन्म शताब्दी वर्ष को हम अटल निर्माण वर्ष के रूप में मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पुण्य धरा प्राकृतिक संसाधनों से सम्पन्न है। हमारे पास समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर हैं और अपार उत्साह समेटे हुए विपुल जन संसाधन है। एक नवंबर 2000 को जब यह राज्य बना, तब हमने एक सपना देखा था, एक विकसित, आत्मनिर्भर और समावेशी छत्तीसगढ़ का। आज मैं गर्व से कह सकता हूँ कि हम उस दिशा में तेजी से आगे बढ़़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने आपातकाल के पचास बरस पूरे होने पर लोकतंत्र सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि आपातकाल के बेहद कठिन दौर में यातनाओं की परवाह न करते हुए उन्होंने लोकतंत्र की मशाल थामें रखी। उन्होंने कहा कि मातृभूमि के लिए अपने हिस्से की जिम्मेदारी हमें निभानी है। हमें यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़ की संकल्पना को मूर्त रूप देना है।
हमारे जवानों ने तिरंगे का मान बढ़ाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपने वीर जवानों पर गर्व है, जिन्होंने अपने असीम शौर्य और साहस से मातृभूमि का शीश हमेशा ऊंचा रखा। वर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद पाकिस्तान की ओर से हुए आक्रमण से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक हर बार हमारे जवानों ने तिरंगे का मान बढ़ाया है। पहलगाम में हुए जघन्य आतंकी कृत्य का बदला लेने हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ऑपरेशन सिन्दूर चलाया गया। यह ऑपरेशन दुनियाभर में भारत के पराक्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक बना।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो गई है। हमारा चंद्रयान चंद्रमा के दक्षिण धु्रव पर पहुंच चुका है और शुभांशु शुक्ला ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में तिरंगा लहरा दिया है। इस सफलता के पीछे देशवासियों की कड़ी मेहनत और हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व, दृढ़ संकल्प और अथाह इच्छा शक्ति की विशेष भूमिका है।
मार्च 2026 तक देश को आतंकवाद से मुक्त करने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस गौरवशाली दिन हम अपने सुरक्षाबलों के जवानों का अभिनंदन करते हैं, जिन्होंने नक्सलियों को उनके ठिकानों में घुसकर मात दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में हम मार्च 2026 तक देश को माओवादी आतंक से मुक्त करने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले 20 महीनों में हमारे जवानों ने 450 माओवादियों को न्यूट्रलाइज और 1578 को गिरफ्तार किया है। हमारे जवानों ने माओवादियों के शीर्ष नेताओं बसवराजू और सुधाकर को न्यूट्रलाइज करने में सफलता पायी। राज्य सरकार की आकर्षक आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर 1589 माओवादी हथियार छोड़ चुके हैं। इनके पुनर्वास, कौशल विकास और रोजगार की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का असली मतलब तब है, जब आखिरी व्यक्ति तक लाभ पहुँचे। ताड़मेटला में जहां हमारे 76 जवानों ने माओवादी हमले में शहादत दी थी, उसके समीप ही चिंतागुफा के स्वास्थ्य केंद्र को राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाण-पत्र मिला है। यहां हर महीने औसतन 20 प्रसव होते हैं और हजारों ग्रामीण निःशुल्क इलाज की सुविधा ले रहे हैं। नक्सलवाद के कम होते ही बस्तर में विकास की रफ्तार तेजी से बढ़ी है। 50 बंद स्कूल फिर से खोले गए और कई गांवों में पहली बार बिजली पहुंची। नियद नेल्ला नार अर्थात आपका अच्छा गाँव योजना से 327 गांवों में बुनियादी सुविधाएं पहुंची हैं। पामेड़, जो कभी नक्सलियों का गढ़ था, वहां अब बैंक की शाखा खुल गई हैं।
पूरा हो रहा है हर नागरिक के पक्का घर का सपना
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 20 महीनों में हमने प्रदेश के नागरिकों को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दी गई गारंटियों को पूरा करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किये हैं। कैबिनेट की पहली बैठक में हमने 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए। पीएम जनमन योजना में विशेष पिछड़ी जनजाति के लिए 34 हजार और नक्सल पीड़ित व आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15 हजार आवास मंजूर किए गए। पात्रता नियम आसान किए गए हैं और नए लाभार्थियों के लिए आवास प्लस 2.0 के तहत सर्वे कराया गया है। इस तरह हर नागरिक का पक्का घर पाने का सपना पूरा हो रहा है।
महतारी वंदन योजना: माताओं-बहनों को 11 हजार 728 करोड़ रूपए की सहायता
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तीकरण हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। सरकार बनने के तीन महीने के भीतर हमने महतारी वंदन योजना शुरू की। प्रदेश में 70 लाख महिलाओं को हर महीने एक-एक हजार रूपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इस योजना से महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर कदम बढ़ा रही हैं। महतारी वंदन योजना के तहत माताओं-बहनों को अब तक 11 हजार 728 करोड़ रूपए की राशि दी जा चुकी है। रायगढ़ जिले से हमने महिला समूहों को रेडी टू ईट फूड निर्माण का काम सौंपा है और इसका विस्तार जल्द ही हम अन्य जिलों में करेंगे।
किसानों का कल्याण हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के किसान भाइयों का कल्याण हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। कृषक उन्नति योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ के किसानों को धान का सबसे ज्यादा मूल्य मिल रहा है। हमने पिछले खरीफ सीजन में 149 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी की है। राज्य में फसल विविधता को बढ़ावा देने के लिए कृषक उन्नति योजना के दायरे का विस्तार किया गया है। धान के बदले अब अन्य खरीफ फसल लेने वाले किसानों को प्रति एकड़ 11 हजार रूपए तथा दलहन-तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास की फसल लेने वाले कृषकों को प्रति एकड़ 10 हजार रूपए की आदान सहायता राशि दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषक मजदूर कल्याण योजना के तहत राज्य के 5 लाख 62 हजार भूमिहीन कृषि श्रमिकों को प्रतिवर्ष 10-10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ के 26 लाख किसान भाइयों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है। इस योजना से विशेष पिछड़ी जनजाति के 32 हजार 500 किसान भी लाभान्वित हो रहे हैं। खरीफ सीजन में हमने खाद-बीज की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की है। वैश्विक तनाव के कारण जहां डीएपी की आपूर्ति में कुछ कमी आयी, वहां हमने भरपूर मात्रा में नैनो डीएपी उपलब्ध कराकर किसान भाइयों की दिक्कत दूर की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम राज्य में सहकारिता की सम्भावनाओं को साकार कर रहे हैं। खेती-किसानी के साथ-साथ हम पशुधन और मत्स्यपालन को भी बढ़ावा दे रहे हैं। राज्य में दुग्ध उत्पादन और पशुपालकों की आय को बढ़ावा देने के लिए एनडीडीबी से हमने एमओयू किया है। वर्ष-2025 को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया गया है। केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में हम सहकार से समृद्धि के मंत्र पर चलते हुए राज्य में सहकारी गतिविधियों को नई ऊंचाई दे रहे हैं।

शिक्षक-छात्र अनुपात राष्ट्रीय औसत से बेहतर
मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी कहते थे कि शिक्षा के जरिए समाज में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। हमने नई शिक्षा नीति को लागू करने के साथ ही इसके प्रावधानों के अनुरूप स्कूलों और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया है। अब सुकमा के दुर्गम गांव में भी शिक्षक हैं। राजधानी रायपुर से लेकर पहाड़ी कोरवा बसाहट वाले स्कूलों तक पूरे प्रदेश में शिक्षक-छात्र अनुपात एक समान है। हमारे स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। हम शासकीय विद्यालयों में मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान भी संचालित कर रहे हैं। पेरेण्ट्स टीचर मीटिंग तथा न्यौता भोज के माध्यम से हमने बच्चों के शैक्षणिक विकास में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की है, जिसका बेहतर परिणाम मिल रहा है। हमने स्कूलों के रखरखाव एवं अधोसंरचना विकास के लिए 133 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।
नवा रायपुर में आकार ले रही एजुकेशन सिटी
नवा रायपुर में हम सौ एकड़ में एजुकेशन सिटी बना रहे हैं। विज्ञान और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए यहां साइंस सिटी का भी निर्माण कर रहे हैं। नवा रायपुर में हमने नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी के कैंपस का भूमिपूजन किया है। देश में लागू नये कानूनों में फारेंसिक का महत्व काफी बढ़ गया है, जिससे राज्य के युवाओं को इस क्षेत्र में करियर निर्माण के अवसर सुलभ होंगे। छत्तीसगढ़ में आईटी और एआई क्रांति दस्तक दे चुकी है। हम नवा रायपुर को सेंट्रल इंडिया की सिलिकॉन वैली के रूप में तैयार कर रहे हैं। नवा रायपुर में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफार्मेशन टेक्नॉलाजी की स्थापना करने जा रहे हैं, जिससे आईटी का बड़ा टैलेंट पूल यहां तैयार होगा।
बस्तर संभाग के सभी विकासखण्डों में कौशल विकास केन्द्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम जॉब मार्केट की जरूरत के मुताबिक वर्क फोर्स तैयार कर रहे हैं। स्किल इंडिया मिशन के तहत नवा रायपुर में लाइवलीहुड सेंटर आफ एक्सीलेंस आरंभ कर रहे हैं। जनजातीय बहुल बस्तर संभाग के सभी 32 विकासखंडों में, कौशल विकास केन्द्र के माध्यम से युवाओं को विभिन्न व्यवसायों का प्रशिक्षण दे रहे हैं। आईआईटी के पूर्व विद्यार्थियों की संस्था पैन आईआईटी के साथ वंचित समुदायों के कौशल विकास के लिए हमने एमओयू किया है। युवाओं को कौशल विकास के साथ ही विदेशी भाषाओं का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि उन्हें विदेशों में भी रोजगार के अवसर मिलें।
राज्य में 150 स्टार्टअप स्थापित करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए हमने नई स्टार्टअप नीति बनाई है। इसके माध्यम से हम राज्य के 100 तकनीकी संस्थाओं के 50 हजार छात्र-छात्राओं तक पहुंच बनाएंगे। राज्य में हमने 150 स्टार्टअप स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। ईज ऑफ लिविंग के साथ ही स्पीड ऑफ बिजनेस की ओर बढ़ते हुए हमने 350 से अधिक रिफॉर्म किये हैं। सिंगल विंडो सिस्टम से प्रदेश में निवेश सरल, सहज और पारदर्शी हो गया है।
निवेशकों के लिए छत्तीसगढ़ पसंदीदा राज्य
उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति की बुनियाद पर विकसित छत्तीसगढ़ की भव्य इमारत तैयार होगी। नई औद्योगिक नीति में हमने सबसे ज्यादा जोर पॉवर सेक्टर पर दिया है। इस सेक्टर में हमें 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इससे छत्तीसगढ़ विकसित भारत का पावर हाउस बनेगा। निवेशकों के लिए छत्तीसगढ़ पसंदीदा राज्य बन चुका है। हमने दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू के साथ ही रायपुर में भी इन्वेस्टर्स समिट किये। इन समिट के माध्यम से अब तक 6 लाख 65 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव हमें मिल चुके हैं।
नई औद्योगिक नीति में हम नये जमाने के उभरते हुए उद्योगों को भी विशेष अनुदान दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ में पहली सेमीकंडक्टर यूनिट का भूमिपूजन हमने किया है। लगभग 11 सौ करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इस यूनिट से हमने चिप निर्माण के क्षेत्र में कदम रख दिया है। हम टैक्सटाइल क्षेत्र में संभावनाओं को अवसर में बदलना चाहते हैं। इसके लिए हम नवा रायपुर में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फैशन टेक्नॉलाजी का कैंपस स्थापित करने जा रहे हैं। इसकी अनुमानित लागत 271 करोड़ रुपए होगी। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
राज्य राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण गठन का निर्णय
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की तर्ज पर राज्य राजधानी क्षेत्र के विकास के लिए प्राधिकरण गठन का निर्णय लिया है। यह प्राधिकरण राजधानी क्षेत्र के सुव्यवस्थित और योजनाबद्ध विकास के लिए कार्य करेगा। यह प्राधिकरण योजना बनाने, निवेश को बढ़ावा देने, विभिन्न सरकारी और निजी संगठनों के बीच समन्वय तथा शहर के विस्तार को सही ढंग से नियंत्रित करने का भी काम करेगा। अब जमाना ई-कॉमर्स का है। इसे प्रोत्साहित करने हमारी लॉजिस्टिक नीति विशेष रूप से उपयोगी होगी और प्रदेश में तेजी से इनलैंड कंटेनर डिपो तथा ड्राईपोर्ट में निवेश होगा।
नई रेल लाइनें बनेंगी ‘‘विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़‘‘ की धमनियां
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश की जो संभावनाएं पैदा हुई हैं, उसके पीछे एक दशक में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर हुए कामों की बड़ी भूमिका है। वर्ष 2030 तक हम उतनी ही रेल लाइन बिछा देंगे, जितनी 1853 में रेलवे शुरू होने से लेकर वर्ष 2014 तक बिछाई गई थी। रावघाट से जगदलपुर, केके लाइन का दोहरीकरण, तेलंगाना के कोठागुडेम से किरंदुल तक नई रेल परियोजनाएं बस्तर की भाग्य रेखा साबित होंगी। खरसिया से परमालकसा जाने वाली रेल लाइन प्रदेश के महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्रों को जोड़ेगी। नई रेल लाइनें ‘‘विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़‘‘ की धमनियां साबित होंगी। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट रायपुर से हमने कार्गाे सुविधा भी आरंभ की है। धनबाद और विशाखापट्नम जैसे औद्योगिक केंद्रों को जोड़ने वाले एक्सप्रेस-वे का निर्माण तेजी से हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी प्रदेश की आर्थिक सेहत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां बिजली की खपत कितनी है। हमारा प्रदेश जीरो पॉवर कट स्टेट है। हमारे राज्य में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत 2 हजार 211 यूनिट है, जबकि देश का औसत ऊर्जा खपत प्रति व्यक्ति 1 हजार 255 यूनिट है।
हाफ बिजली बिल से मुफ्त बिजली की पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में हमने बड़ा कदम उठाया है। हम हाफ बिजली बिल से मुफ्त बिजली की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना के माध्यम से आमजन अब बिजली उपभोक्ता से बिजली उत्पादनकर्ता बन रहेे हैं। इस योजना के तहत सौर संयंत्रों की स्थापना पर केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा आकर्षक सब्सिडी दी जा रही है। एक किलोवॉट के सौर संयंत्र पर केन्द्र सरकार द्वारा 30 हजार रूपए और राज्य सरकार द्वारा 15 हजार रूपए, इस प्रकार कुल 45 हजार रूपए की सब्सिडी दी जा रही है। दो किलोवॉट पर केन्द्र द्वारा 60 हजार रूपए और राज्य द्वारा 30 हजार रूपए, इस प्रकार कुल 90 हजार रूपए तथा तीन किलोवॉट का सौर संयंत्र लगाने पर केन्द्र सरकार द्वारा 78 हजार रूपए और राज्य सरकार द्वारा 30 हजार रूपए, इस प्रकार कुल एक लाख 8 हजार रूपए की सब्सिडी दी जा रही है। मैं प्रदेश की जनता से आग्रह करता हूँ कि इस योजना का त्वरित लाभ उठाएं।
सुशासन हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता
सुशासन हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। हमने ई-ऑफिस प्रणाली को सभी विभागों में कार्यान्वित किया है। हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित हो रही है। हमने सरकारी खरीदी में पारदर्शिता लाने जेम पोर्टल को अपनाया है। भ्रष्टाचार के मामलों की ईओडब्ल्यू द्वारा पूरी तत्परता से जांच की जा रही है। पब्लिक पॉलिसी में युवाओं को आगे लाने हमने मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप योजना आरंभ की है। इसके जरिए युवा आईआईएम रायपुर में दो वर्षीय फेलोशिप कर रहे हैं। सुशासन तिहार के माध्यम से हम आपके गांव, आपके मोहल्ले तक पहुंचे। सुशासन तिहार में 41 लाख से अधिक आवेदन में से अधिकतर आवेदनों का हमने गुणवत्तापूर्ण निराकरण किया है।
हमने रजिस्ट्री से संबंधित 10 क्रांतिकारी पहल की है। अब ऑनलाईन रजिस्ट्री की सुविधा, रजिस्ट्री के साथ ही अब नामांतरण, आधार प्रमाणीकरण, रजिस्ट्री से संबंधित दस्तावेज बनाने की सुविधा के साथ पारिवारिक दान, हक त्याग और बंटवारा अब केवल पांच सौ रुपए शुल्क में हो जाता है। हमने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक के माध्यम से नियमों को सरल किया है। 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री नहीं होगी। इसका उद्देश्य अवैध प्लाटिंग और जमीन को छोटे टुकड़ों में बांटकर बिक्री पर रोक लगाना है। हमने जनविश्वास विधेयक के माध्यम से राज्य के 8 अधिनियमों के 163 प्रावधानों में संशोधन किया है। आम नागरिकों और कारोबारियों द्वारा किये गये छोटे-छोटे तकनीकी उल्लंघन अब अपराध की श्रेणी में नहीं आएंगे।
विकसित छत्तीसगढ़ का नेतृत्व युवा शक्ति के हाथों में होगा। युवाओं के लिए शासकीय पदों में भर्ती पर सरकार तेजी से काम कर रही है। राज्य निर्माण के बाद पहली बार व्यापम की परीक्षा का साल भर का कैलेंडर जारी किया गया है।
खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए भी हमारी सरकार लगातार कार्य कर रही है। नई औद्योगिक नीति में हमने खेल अकादमी और निजी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए विशेष अनुदान प्रावधान किये हैं। युवा प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए हमने युवा रत्न सम्मान योजना आरंभ करने का निर्णय लिया है।
नवा रायपुर में बन रही मेडिसिटी
स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए 441 करोड़ रुपए की लागत से हम स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था बेहतर कर रहे हैं। राज्य के 543 सरकारी अस्पतालों को क्वालिटी सर्टिफिकेशन प्राप्त हुआ है। अस्पतालों में मेडिकल स्टाफ की लगातार भर्ती की जा रही है। पिछले महीने हमने एनएचएम के तहत 109 संविदा चिकित्सकों तथा 563 बांड अनुबंधित चिकित्सकों की नियुक्ति की है। हम नवा रायपुर में मेडिसिटी बना रहे हैं, जहां राष्ट्रीय स्तर के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल संचालित होंगे।
मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना आरंभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि नगरीय निकायों की सूरत संवारने मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना आरंभ की गई है। इसके तहत सात नगर निगमों में 157 करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत किये गये हैं। इनमें आक्सीजोन, बस टर्मिनल, बायपास, आडिटोरियम निर्माण जैसे काम शामिल हैं। प्रदेश के नगरीय निकायों ने स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छी रैंक हासिल की है। प्रधानमंत्री जी ने मन की बात कार्यक्रम में बिल्हा की हमारी स्वच्छता दीदियों की विशेष रूप से प्रशंसा की है।
बस्तर और सरगुजा संभाग में शुरू होगी मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना
हमारी सरकार शहरों के साथ-साथ गाँवों में भी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना को प्रथम चरण में हम बस्तर और सरगुजा संभाग में शुरू करने जा रहे हैं। इन बसों का संचालन स्थानीय लोग ही करेंगे। इससे ग्रामीणों की आवाजाही आसान होगी और उनकी रोज़मर्रा की परेशानियाँ दूर होंगी।
बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना को गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना पर आगे बढ़ रहे हैं। 50 हजार करोड़ रुपए की इस परियोजना के माध्यम से 200 मेगावाट बिजली के उत्पादन के साथ ही लगभग 7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा। प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए 9 सिंचाई परियोजनाओं में 522 करोड़ रुपए की राशि से सुधार कार्य कराया जाएगा।
चरण पादुका योजना की फिर से शुरूआत
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम जनजातीय समाज के उत्थान के लिए अनेक कदम उठा रहे हैं। तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक की राशि 4 हजार रुपए से बढ़ाकर साढ़े 5 हजार रुपए कर दी गई है। इससे साढ़े 12 लाख तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों के 50 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं। तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान संग्राहकों के पैरों में छालें न पड़े, कांटे न चुभे, इसके लिए हमने चरण पादुका योजना फिर से शुरू की है। हर्बल औषधियों को बढ़ावा देने हमने फॉरेस्ट टू फार्मेसी मॉडल के तहत दुर्ग जिले के जामगांव (एम) में हाल ही में हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट का लोकार्पण किया है। इससे दो हजार लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार के अवसर सुलभ हुए हैं।
आकार ले रहा आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को समर्पित स्मारक
मुख्यमंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को प्रोत्साहित करने हमारी सरकार ने बैगा, गुनिया, सिरहा लोगों को 5-5 हजार रुपए की सालाना सम्मान निधि प्रदान करने का निर्णय लिया है। नवा रायपुर में हमने ट्राइबल म्यूजियम का लोकार्पण किया जा चुका है। प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम के जनजातीय नायकों को समर्पित शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक-सह-संग्रहालय का निर्माण कराया जा रहा है। बस्तर की जनजातीय संस्कृति की झलक देश-दुनिया को दिखाने हमने बस्तर पंडुम का आयोजन किया। बस्तर अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र में है। बस्तर के धुड़मारास को यूएन पर्यटन संगठन ने सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के रूप में चुना है। होम-स्टे को प्रोत्साहित करने हमने छत्तीसगढ़ होम-स्टे नीति बनाई है।
छत्तीसगढ़ में 683 वर्ग किलोमीटर में वृक्ष आवरण की वृद्धि
मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी प्राकृतिक संपदा को न केवल हम सहेजे हुए हैं अपितु उसका निरंतर संवर्धन भी कर रहे हैं। वन पारिस्थितिकी सेवा को हमने ग्रीन जीडीपी के साथ जोड़ने की पहल की है। हाल ही में भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट आई है, इसमें बताया गया है कि छत्तीसगढ़ में 683 वर्ग किलोमीटर संयुक्त वन एवं वृक्ष आवरण की वृद्धि हुई है, जो देश में सबसे ज्यादा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर प्रदेश में ‘‘एक पेड़ मां के नाम‘‘ अभियान के तहत विगत वर्ष में साढ़े तीन करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं।
कलाकारों और साहित्यकारों को प्रतिमाह 5 हजार रूपए पेंशन
राज्य की कला-संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नवा रायपुर में कलाग्राम की स्थापना के लिए 10 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। कलाकारों और साहित्यकारों को दी जाने वाली पेंशन राशि 2 हजार रुपए से बढ़ाकर 5 हजार रुपए प्रति माह कर दी गई है। प्रदेश के 22 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के माध्यम से भांचा राम के दर्शन लाभ मिला। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से भी हम तीर्थयात्रियों को देश भर के पुण्यस्थलों की यात्रा करा रहे हैं।
‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन’ डॉक्यूमेंट तैयार
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में हमने ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन’ डॉक्यूमेंट के रूप में एक ऐसा रोडमैप तैयार किया है, जिसके माध्यम से हम विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को साकार करेंगे। छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य है जिसने विजन डाक्यूमेंट तैयार किया है। इसमें हमने निकटवर्ती, मध्यवर्ती और दीर्घकालीन लक्ष्य रखे हैं। इन्हें प्राप्त करने हमने सामाजिक आर्थिक विकास के 13 थीम चुने हैं और इनके क्रियान्वयन के लिए 10 मिशन तैयार किये हैं। छत्तीसगढ़ राज्य को संवारने के लिए आप सभी के सहयोग से हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर हम सभी विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लें।
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कोरबा
तेज रफ्तार बाइक कार से टकराई, युवक डिवाइडर पार गिरा:कोरबा में हादसा CCTV में कैद, युवक स्कूटी से भी टकराया, इलाज जारी
Published
18 hours agoon
October 29, 2026By
Divya Akash
कोरबा। कोरबा शहर के ट्रांसपोर्ट नगर मुख्य मार्ग पर सड़क हादसे का सीसीटीवी वीडियो सामने आया है। वीडियो में कार से टक्कर के बाद बाइक सवार युवक हवा में उछलकर डिवाइडर पार करते हुए सड़क की दूसरी लेन में गिरता दिखाई दे रहा है।
इसके बाद वह वहां से गुजर रहे एक अन्य दोपहिया वाहन से भी टकरा गया। हादसे में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।

कार से टक्कर के बाद डिवाइडर पार कर दूसरी लेन में गिरा
घटना सीएसईबी चौकी क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, देर शाम रिमझिम बारिश के दौरान बाइक सवार युवक मुख्य मार्ग से गुजर रहा था। इसी दौरान सामने से आ रही कार से उसकी बाइक की जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर के कारण युवक उछलकर डिवाइडर पार कर सड़क की दूसरी लेन में जा गिरा।
इसी दौरान दूसरी लेन से गुजर रहे एक अन्य दोपहिया वाहन से भी उसकी टक्कर हो गई। उस वाहन पर एक दंपती सवार थे। अचानक हुए हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों ने घायल युवक को संभाला और पुलिस को सूचना दी।
हेलमेट नहीं पहनने से सिर में गंभीर चोट
जानकारी के मुताबिक, बाइक सवार युवक ने हेलमेट नहीं पहना था। हादसे में उसके सिर में गंभीर चोट आई है। उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।

पुलिस ने वाहन जब्त कर शुरू की जांच
सीएसईबी चौकी पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। दोनों वाहनों को जब्त कर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
घटना के बाद ट्रांसपोर्ट नगर मुख्य मार्ग पर तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मार्ग पर स्पीड ब्रेकर और सुरक्षा संकेतक लगाने की मांग की है। बारिश के दौरान सड़क पर फिसलन की आशंका को देखते हुए वाहन चालकों से गति नियंत्रित रखने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की गई है।

छत्तीसगढ़
रायपुर : राष्ट्रीय एकता दिवस विशेष लेख : अखंडता का संकल्प: सरदार पटेल और मजबूत भारत का सपना
Published
18 hours agoon
October 29, 2026By
Divya Akash
कता केवल देश की सीमाओं से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, समान अवसर और सामाजिक सद्भाव से होती है
- धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
- अशोक कुमार चन्द्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी
भारत की पहचान उसकी विविधता और एकता में है। यहाँ अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं, अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं का पालन किया जाता है, फिर भी देशवासियों को एक सूत्र में बाँधने वाली भावना है-राष्ट्रीय एकता। यह एकता केवल देश की सीमाओं की रक्षा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात से भी जुड़ी है कि हर नागरिक स्वयं को देश के साझा भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा महसूस करे।
हर वर्ष 31 अक्टूबर को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस हमें उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करने के साथ-साथ आज के भारत में एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की जिम्मेदारी का एहसास कराता है।
सरदार पटेल ने रखी एकीकृत भारत की मजबूत नींव
वर्ष 1947 में देश की स्वतंत्रता के समय भारत के सामने अनेक चुनौतियाँ थीं। अंग्रेजी शासन समाप्त होने के बाद देशी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करना एक बड़ी चुनौती थी। ऐसे समय में देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने वी. पी. मेनन और अन्य अधिकारियों के सहयोग से संवाद, समझदारी और दृढ़ नेतृत्व के माध्यम से रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, जिन्होंने 560 से अधिक रियासतों का भारत संघ में विलय कर देश को एक सूत्र में पिरोया। देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को मजबूत करने तथा आंतरिक एवं बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत किया।
सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों ने एक मजबूत और एकीकृत भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्ष 2014 से उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में विशेष रूप से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर ‘रन फॉर यूनिटी’, राष्ट्रीय एकता की शपथ और विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से देश की एकता और अखंडता का संदेश दिया जाता है। सरदार पटेल की विरासत हमें सिखाती है कि विभिन्न विचारों, हितों और पहचानों के बीच तालमेल बनाकर ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है।
आज विकास के साथ एकता को मजबूत करना भी जरूरी
आज भारत के सामने चुनौती रियासतों को एकजुट करने की नहीं, बल्कि विकास के लाभों को देश के प्रत्येक क्षेत्र और नागरिक तक पहुँचाने की है। सड़क, रेल, बिजली, संचार और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार दूरस्थ क्षेत्रों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। इससे लोगों को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। हालाँकि, केवल बुनियादी ढाँचे का विकास ही राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए यह भी जरूरी है कि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को विकास के समान अवसर मिलें, सार्वजनिक सेवाएँ सुलभ हों और उनकी आवश्यकताओं को उचित महत्व दिया जाए।
लोकतंत्र की स्थिरता, स्वतंत्रता की रक्षा और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए राष्ट्रीय एकता और एकीकरण अत्यंत आवश्यक है। जब तक पूरा राष्ट्र एकता की भावना से बंध नहीं जाता, तब तक देश में कोई विकास या आर्थिक प्रगति संभव नहीं है। इसलिए, राष्ट्रीय एकीकरण को सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। राष्ट्रीय एकीकरण की रक्षा के लिए हमें एक मजबूत राष्ट्र की आवश्यकता है। अतः जाति, क्षेत्रवाद, धर्म आदि पर केंद्रित संकीर्ण सोच से दूर रहकर हमें विघटनकारी तत्वों का दमन करना चाहिए।
प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और अन्य जनकल्याणकारी योजनाएँ लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान देती हैं। जब शासन की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुँचता है और लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं, तब व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ता है। यही विश्वास राष्ट्रीय एकता की नींव को मजबूत करता है।
सहकारी संघवाद से मजबूत होगा देश
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार, उद्योग और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर मिलकर काम करने से विकास को गति मिलती है। लोकतंत्र में राजनीतिक विचारों और क्षेत्रीय आकांक्षाओं में अंतर होना स्वाभाविक है। महत्वपूर्ण यह है कि इन मतभेदों का समाधान संवाद, संवैधानिक मूल्यों और आपसी सम्मान के माध्यम से किया जाए। जब विभिन्न सरकारें और संस्थाएँ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए जनहित को प्राथमिकता देती हैं, तब राष्ट्रीय एकता और मजबूत होती है। विकास की योजनाओं में स्थानीय जरूरतों का ध्यान रखना भी आवश्यक है, ताकि दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों के नागरिक स्वयं को देश की विकास यात्रा से जुड़ा हुआ महसूस करें।
विविधता का सम्मान ही भारत की असली ताकत
भारत की एकता का अर्थ यह नहीं है कि सभी लोग एक जैसी भाषा बोलें, एक जैसी परंपराएँ अपनाएँ या एक जैसे विचार रखें। भारत की वास्तविक ताकत इस बात में है कि अलग-अलग पहचान और जीवनशैली वाले लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हुए साथ रह सकें। डिजिटल संचार के इस दौर में सूचनाएँ तेजी से फैलती हैं। ऐसे में अफवाहों से बचना, किसी भी सूचना की सत्यता जाँचना और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखना पहले से अधिक जरूरी हो गया है। समाज में अविश्वास और तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों के बजाय संवाद, सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।
राष्ट्रीय एकता केवल सरकारी कार्यक्रमों या संदेशों से कायम नहीं रह सकती। इसे मजबूत बनाने के लिए नागरिकों के दैनिक व्यवहार में समानता, संवेदनशीलता और परस्पर सम्मान का होना आवश्यक है।
‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’से बढ़ेगी आपसी समझ
देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने और राज्यों के बीच आपसी संबंध मजबूत करने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पहल शुरू की गई। इसके माध्यम से विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा पारस्परिक समझ को बढ़ावा दिया जाता है। शैक्षणिक गतिविधियाँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, अंतरराज्यीय यात्राएँ और विभिन्न क्षेत्रों की कला एवं परंपराओं से परिचित कराने वाले आयोजन विशेष रूप से युवाओं में राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित कर सकते हैं। 1 से 15 नवंबर 2026 तक एक भारत श्रेष्ठ भारत की थीम पर भारत पर्व का आयोजन भी किया जाएगा।
युवा देश का भविष्य हैं। शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा, स्वच्छता और जनजागरूकता जैसे कार्यों में उनकी भागीदारी समाज को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जब युवा क्षेत्रीय और भाषाई भेदभाव से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता देते हैं, तब एक मजबूत और समावेशी भारत का मार्ग प्रशस्त होता है।
राष्ट्रीय एकता एक निरंतर जिम्मेदारी
राष्ट्रीय एकता दिवस हमें याद दिलाता है कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा कर्तव्य है। देश की सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव, विकास के समान अवसर, सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास भी स्थायी शांति के लिए आवश्यक हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत के राजनीतिक एकीकरण में ऐतिहासिक योगदान दिया। वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह समावेशी विकास, सामाजिक न्याय, आपसी सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के माध्यम से इस एकता को और मजबूत बनाए।
राष्ट्रीय एकता का वास्तविक अर्थ यह नहीं है कि देश का प्रत्येक नागरिक एक जैसा सोचे, बल्कि यह है कि अलग-अलग विचारों, भाषाओं और संस्कृतियों के बावजूद सभी एक साझा भविष्य के निर्माण के लिए साथ खड़े हों। सरदार पटेल की विरासत से प्रेरणा लेकर एकता, सद्भाव और सहयोग को जीवन का हिस्सा बनाना ही राष्ट्रीय एकता दिवस का सच्चा संदेश है।
राष्ट्रीय एकता राष्ट्र को मजबूत और संगठित बनाती है। यह विभिन्न धर्मों, संप्रदायों, जातियों, पहनावे, सभ्यता और संस्कृति के लोगों को एक साथ बांधे रखती है। अनेक भिन्नताओं के बावजूद, सभी लोग एक-दूसरे के साथ पारस्परिक सद्भाव में रहते हैं। हमारे देश जैसी विविधता अन्य देशों में नहीं पाई जाती। यहाँ विभिन्न जातियों और समुदायों, धर्मो के लोग, जिनकी जीवनशैली, संस्कृति, भाषाएँ और रीति-रिवाज बिल्कुल भिन्न हैं, फिर भी एक साथ रहते हैं। भारत में ये सभी राष्ट्रीय एकता के धागे से बंधे हुए हैं।

कोरबा
कोरबा में 31 अक्टूबर को गूंजेगा लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का जयघोष
Published
18 hours agoon
October 29, 2026By
Divya Akash
कुर्मी समाज मनाएगा भारत रत्न सरदार पटेल की 151वीं जयंती, सुबह 10:30 बजे होगा गरिमामय आयोजन
कोरबा। देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय एकीकरण के महान शिल्पकार, भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर 31 अक्टूबर 2026, शनिवार को कोरबा में कुर्मी समाज द्वारा सादगीपूर्ण एवं गरिमामय जयंती समारोह का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम सुबह 10:30 बजे तुलसी नगर चौक के पास, पंप हाउस रोड, कोरबा में आयोजित होगा। इस अवसर पर सरदार पटेल के राष्ट्रनिर्माण में दिए गए अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय इतिहास के ऐसे महान व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, अदम्य साहस और दूरदर्शी नेतृत्व से देश की एकता को नई मजबूती प्रदान की। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देशी रियासतों के भारतीय संघ में एकीकरण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका ने उन्हें ‘लौह पुरुष’ के रूप में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जीवन राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण है।
कुर्मी समाज द्वारा आयोजित इस जयंती समारोह का उद्देश्य महान राष्ट्रनायक के विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना तथा समाज में एकता, आपसी सद्भाव, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करना है। सरदार पटेल का जीवन संदेश देता है कि सामूहिक एकजुटता, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण से बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
समाज की ओर से जयंती समारोह को सादगी और गरिमा के साथ संपन्न कराने की तैयारी की जा रही है। कुर्मी समाज के समस्त सम्माननीय पदाधिकारियों, सदस्यों एवं समाजबंधुओं से अपील की गई है कि वे निर्धारित समय पर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धासुमन अर्पित करें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें।
कार्यक्रम की जानकारी
आयोजन: लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती
दिनांक: 31 अक्टूबर 2026, शनिवार
समय: सुबह 10:30 बजे
स्थान: तुलसी नगर चौक के पास, पंप हाउस रोड, कोरबा, छत्तीसगढ़
आर. के. वर्मा
अध्यक्ष, कुर्मी क्षत्रिय कल्याण समिति
पवन सिन्हा
मीडिया प्रभारी, कुर्मी क्षत्रिय कल्याण समिति

तेज रफ्तार बाइक कार से टकराई, युवक डिवाइडर पार गिरा:कोरबा में हादसा CCTV में कैद, युवक स्कूटी से भी टकराया, इलाज जारी
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