छत्तीसगढ़
रायपुर : सहकारिता से बढ़ेगी किसानों की आय, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव होगी मजबूत : मुख्यमंत्री साय
सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने पर राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन आयोजित
162 करोड़ से अधिक की तेंदूपत्ता प्रोत्साहन राशि वितरण का शुभारंभ, 1352 नई सहकारी समितियों के गठन से गांवों तक पहुंचा सहकार का विस्तार
पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मिल रहा है बढ़ावा
किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है सहकारिता
उत्कृष्ट सहकारी समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार से किया गया सम्मानित, महिला स्व सहायता समूह को वितरित किया गया लाभांश



रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय का गठन देश के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय है। यह निर्णय ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प को साकार करने वाला है। डबल इंजन की सरकार छत्तीसगढ़ में सहकारिता के माध्यम से किसानों, वनवासियों, महिला समूहों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकारी सप्ताह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।



मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर उत्कृष्ट समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार प्रदान किया तथा संग्रहण वर्ष 2023 के 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि के वितरण का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं और बचपन से ही सहकारिता से मेरा गहरा रिश्ता रहा है। तभी से मुझे विश्वास था कि सहकारिता के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सहकार से समृद्धि’ का वही सपना धरातल पर साकार होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में उन्हें राज्यमंत्री के रूप में साथ काम करने का अवसर मिला और उन्होंने किसानों के प्रति प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता तथा समर्पण को बहुत करीब से देखा है। किसानों के कल्याण के प्रति इसी प्रतिबद्धता के कारण प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय का दायरा बढ़ाते हुए उसका नाम ‘कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय’ किया, ताकि किसानों का समग्र विकास सरकार की प्राथमिकता बने। सहकारिता किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा मिली है और इसका लाभ सीधे किसानों एवं ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार केवल कृषि ही नहीं बल्कि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव दिखाई देने लगे हैं। राज्य सरकार पशुपालन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पहले किसानों को खेती-किसानी के लिए 16 से 18 प्रतिशत दर पर ऋण लेना पड़ता था और भारी-भरकम ब्याज का बोझ उन्हें आर्थिक रूप से परेशान कर देता था। आज सहकारिता व्यवस्था और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किसानों को बिना ब्याज ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश के 15 लाख से अधिक किसानों को 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे किसानों को खेती के लिए सुलभ वित्तीय सहायता मिल रही है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिस प्रकार दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व और सुरक्षा बलों के साहस से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है, उसी प्रकार सहकारिता के माध्यम से भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहकारी सप्ताह के दौरान विषय विशेषज्ञों के मंथन से प्रदेश में सहकारिता के नए आयाम स्थापित होंगे और इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।
सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूरे होना देश के लिए गौरव का विषय है। इस अवसर पर 29 जून से 06 जुलाई तक सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में सहकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सहकारिता का मूल उद्देश्य है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की कोई भी पंचायत सहकारिता से वंचित न रहे, इस दिशा में कार्य करते हुए राज्य में 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया गया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सहकारिता विभाग के ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से किसानों का पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने सहकारिता से जुड़े विभिन्न स्टालों का किया अवलोकन
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न सहकारी संस्थाओं द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और सहकारिता के माध्यम से किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों तथा वनधन समितियों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना की। उन्होंने हरित क्रांति आदिवासी सहकारी समिति जशपुर, महामाया बहुउद्देशीय सहकारी समिति कोरबा, बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम, छत्तीसगढ़ हर्बल्स, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड), छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ, इफको तथा गंगा मैया दुग्ध उत्पादक संघ बालोद सहित विभिन्न संस्थाओं के स्टॉलों का अवलोकन कर उनके कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 5 नवीन पैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम वितरित किए तथा छत्तीसगढ़ हर्बल्स के पांच नए उत्पादों का लोकार्पण किया। उन्होंने उत्कृष्ट तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए, वन-धन समितियों की हैंडबुक का विमोचन किया, महिला स्व-सहायता समूहों को लाभांश वितरित किया तथा विभिन्न हितग्राहियों को सामग्री, प्रोत्साहन राशि और केसीसी ऋण वितरित किए।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, छत्तीसगढ़ तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, प्राधिकृत अधिकारी विपणन संघ शशिकांत द्विवेदी, सहकार भारती के कनिराम, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ के प्राधिकृत अधिकारी सौरभ शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी अंत्यावसायी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार बेसरा, छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष भोजराम देवांगन, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्षगण, सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता रमेश शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़
जिसे नशेड़ी बोलकर ठुकराया,16 दिन बाद उसी से की शादी:दूल्हा बोला- कोल्ड-ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला था, दुल्हन बोली- गलतफहमी दूर हुई
जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में 23 जून को सुर्खियों में आई शादी ने अब नया मोड़ ले लिया है। जिस दुल्हन मुस्कान ने दूल्हे संत कुमार के कथित रूप से नशे में होने के कारण मंडप में शादी से इनकार कर दिया था, उसी मुस्कान ने 16 दिन बाद संत कुमार से मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी कर ली।
23 जून को चांपा थाना क्षेत्र के कोसमंदा गांव में मुस्कान ने कथित तौर पर नशे में धुत दूल्हे से शादी करने से मना कर दिया था। यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना था। इसके बाद एसपी विजय पांडेय ने मुस्कान की सराहना करते हुए उसे परिवार परामर्श केंद्र का सदस्य बनाया था।
अब मुस्कान ने उसी दूल्हे के साथ सात फेरे लेकर नई जिंदगी की शुरुआत की है। दूल्हे संत कुमार का कहना है कि वह शराब नहीं पीता। शादी वाले दिन किसी ने उसकी कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला दिया था। वहीं, मुस्कान का कहना है कि अब दोनों के बीच की सारी गलतफहमियां दूर हो चुकी हैं।
मंदिर पहुंचकर लिए सात फेरे
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को मुस्कान परिवार परामर्श केंद्र में अपनी ड्यूटी पर थी। दोपहर करीब 2 बजे वह केंद्र से निकली और घर जाने के बजाय सीधे संत कुमार के गांव खोखरा पहुंच गई। वहां मनका दाई मंदिर में संत कुमार और उनके रिश्तेदारों की मौजूदगी में दोनों ने शादी की।
बताया जा रहा है कि संत कुमार के परिवार को इस शादी की पहले से ही जानकारी थी, जबकि मुस्कान के रिश्तेदारों को बाद में इसकी सूचना मिली। दंपती ने बताया कि 23 जून को शादी टूटने के बाद भी वे लगातार फोन पर संपर्क में थे।
उनका कहना है कि शादी वाले दिन जो कुछ हुआ, वह एक साजिश का हिस्सा था। संपर्क में रहने के दौरान उनकी गलतफहमियां दूर हुईं, जिसके बाद उन्होंने एक साथ नई जिंदगी शुरू करने का फैसला किया।

मुस्कान ने कहा कि अब सारी गलतफहमियां दूर हो गई हैं।
दुल्हा बोला- कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला था
संत कुमार का कहना है कि वह शराब नहीं पीता है। शादी के दिन कोल्ड ड्रिंक में कोई नशीला पदार्थ मिला दिया था, जिससे लोगों को लगा कि वह नशे में हैं। बाद में दोनों के बीच बातचीत हुई। उसने मुस्कान से माफी मांगी और दोनों के बीच की गलतफहमियां दूर हो गईं। इसके बाद दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला किया।
परिवार परामर्श केंद्र से निकली मुस्कान ने शादी की
CSP योगिता बाली खापर्डे ने बताया कि मुस्कान परिवार परामर्श केंद्र गई थी। दोपहर बाद वह वहां से निकल गई, लेकिन घर नहीं पहुंची। शाम तक उसका मोबाइल बंद आने पर रिश्तेदारों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस और साइबर टीम ने उनकी तलाश शुरू की।
जांच के दौरान पता चला कि मुस्कान खोखरा गांव में संत कुमार के घर पर है। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी ली। मुस्कान ने अपनी इच्छा से संत कुमार के साथ रहने और शादी करने की बात कही।
सीएसपी ने बताया कि मुस्कान और संत कुमार ने बताया कि शादी टूटने के बाद भी दोनों एक-दूसरे के संपर्क में थे। संत कुमार ने मुस्कान से माफी मांगी और आगे शराब नहीं पीने का वादा किया। इसके बाद दोनों ने खोखरा स्थित मनका दाई मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी कर ली।

छत्तीसगढ़
अतिथि शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री को खून से लिखा पत्र:भिलाई में इच्छामृत्यु मांगी, रोते हुए बोले- संविलियन नहीं तो मौत ही सही
दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के भिलाई में राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) अपनी मांगों को लेकर पिछले 9 दिनों से अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठे हैं। गुरुवार को आंदोलन के नौवें दिन हुई कैबिनेट बैठक में संविलियन और समायोजन को लेकर कोई घोषणा नहीं होने से शिक्षकों में नाराजगी और बढ़ गई।
इसके विरोध में आंदोलनकारियों ने शिक्षा मंत्री के नाम अपने खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग की। इस दौरान कई शिक्षक भावुक होकर तहसीलदार के सामने अपनी पीड़ा बताते हुए रो पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार संविलियन नहीं दे सकती, तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति ही दे दे।
राज्य अतिथि शिक्षक कल्याण संघ, छत्तीसगढ़ के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हैं। गुरुवार को सभी आंदोलनकारी रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और तहसीलदार को अपनी मांगों के बारे में बताया।
शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले करीब 10 सालों से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें न तो नौकरी की सुरक्षा मिली है और न ही सम्मानजनक वेतन।

अतिथि शिक्षकों ने खून से पत्र लिखकर मांगी इच्छा मृत्यु।
खून से लिखा पत्र, कहा- वादा पूरा नहीं कर सकते तो मरने की अनुमति दें
आंदोलन के दौरान शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि सरकार सालों से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित नहीं कर सकती और उनकी मेहनत का सम्मान नहीं कर सकती, तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी जाए।
शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि यह किसी तरह की धमकी नहीं, बल्कि उनकी मजबूरी और लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा की पीड़ा है।

अतिथि शिक्षक इच्छामृत्यु मांगने कलेक्ट्रेट पहुंचे।
अतिथि शिक्षक बोले- शिक्षा मंत्री ने ऑफिस से बाहर निकलवा दिया
संघ के प्रदेश अध्यक्ष राज यादव ने कहा कि वे स्कूल शिक्षा मंत्री से मिलने गए थे और उनकी मुलाकात भी हुई। हमने कहा था कि 8 जुलाई की कैबिनेट बैठक में उनकी मांगों पर कोई निर्णय ले लिया जाए, तो वे हड़ताल समाप्त कर देंगे, लेकिन शिक्षा मंत्री ने उनसे ठीक से बात भी नहीं की।
उल्टा उन्हें अपने कार्यालय से बाहर निकलवा दिया। उन्होंने कहा कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही है, इसलिए वे दुर्ग में आंदोलन कर अपनी मांगें उठा रहे हैं।

कलेक्ट्रेट में तहसीलदार से मिलकर बताई अपनी समस्या।
चुनाव के दौरान संविलियन का किया था वादा
शिक्षकों का कहना है कि सरकार और जनप्रतिनिधियों ने कई बार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का भरोसा दिया था। चुनाव के दौरान भी संविलियन और समायोजन का वादा किया गया था। उन्हें उम्मीद थी कि हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में इस दिशा में कोई बड़ा फैसला होगा, लेकिन ऐसा नहीं होने से हजारों अतिथि शिक्षकों की उम्मीद टूट गई।

अतिथि शिक्षकों ने खून से लिखा शिक्षा मंत्री को पत्र।
नियमित शिक्षकों की तरह कर रहे हैं काम
धरना स्थल पर मौजूद शिक्षकों ने बताया कि वे नियमित शिक्षकों की तरह स्कूलों में पढ़ाने का कार्य करते हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित शिक्षकों की तुलना में काफी कम मानदेय मिलता है। इससे उनके परिवार आर्थिक तंगी, सामाजिक परेशानियों और मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि समान कार्य करने के बावजूद वेतन और सेवा शर्तों में इतना बड़ा अंतर उचित नहीं है।
संघ ने सरकार से मांग की है कि चुनाव के दौरान किए गए वादों और “मोदी की गारंटी” के अनुरूप राज्य अतिथि शिक्षकों का संविलियन या समायोजन किया जाए। साथ ही समान कार्य के लिए समान वेतन और सेवा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जल्द निर्णय लिया जाए।

छत्तीसगढ़
BSP लोहा चोरी केस, GM-AGM अरेस्ट:प्लांट के अंदर से आरोपियों की कर रहे थे मदद, फ्लू डस्ट की आड़ में स्क्रैप चोरी
दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। भिलाई स्टील प्लांट (BSP) में फ्लू डस्ट की आड़ में आयरन स्क्रैप चोरी के मामले में प्लांट के 2 अधिकारियों का नाम सामने आया है। पुलिस ने बीएसपी के GM हिमांशु भूषण मलिक (54) और AGM मनोज कुमार देवांगन (58) को गिरफ्तार किया है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों अधिकारी प्लांट के अंदर आरोपियों की मदद कर रहे थे। हालांकि वे किस तरह से मदद कर रहे थे, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों अधिकारी मास्टरमाइंड संजय सिंह के लगातार संपर्क में थे।
इस मामले में पुलिस अब तक 15 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। चोरी का यह मामला भिलाई-3 थाना क्षेत्र का है।
प्लांट के अंदर से कर रहे थे मदद
पुलिस जांच में पता चला कि जनरल मैनेजर (GM) हिमांशु भूषण मलिक और असिस्टेंट जनरल मैनेजर (AGM) मनोज कुमार देवांगन लोहा चोरी करने वाले गिरोह के संपर्क में थे और प्लांट के अंदर से उनकी मदद कर रहे थे।
जांच के अनुसार, बीएसपी से निकलने वाले फ्लू डस्ट में आयरन स्क्रैप मिलाकर उसे बाहर भेजा जाता था। बाद में यह स्क्रैप एके ट्रेडर्स में जमा किया जाता था। हालांकि, पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

पुलिस ने बीएसपी के GM हिमांशु भूषण मलिक (54) और AGM मनोज कुमार देवांगन (58) को गिरफ्तार किया है।
26 मई को हुआ था मामले का खुलासा
26 मई 2026 को पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने ग्राम अकलोरडीह खदानपारा स्थित एके ट्रेडर्स और हथखोज के प्लॉट नंबर-18 में छापा मारा था। जांच के दौरान कई हाईवा, ट्रक और अन्य वाहनों में फ्लू डस्ट के साथ लोहे की प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री मिली थी।
मौके से करीब 250 टन लौह स्क्रैप जब्त किया गया था। इसके अलावा स्क्रैप की ढुलाई और लोडिंग में इस्तेमाल होने वाले कई वाहन, जेसीबी, हाईड्रा और अन्य मशीनें भी जब्त की गई थीं। जब्त सामान और वाहनों की कुल कीमत करीब 3 करोड़ 22 लाख रुपए आंकी गई थी। इसमें लगभग 90 लाख रुपए का लौह स्क्रैप शामिल था।
राजनीति का मुद्दा बना मामला
लोहा चोरी का मामला अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन लगातार इस मामले को उठाकर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, स्थानीय विधायक और सांसद की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्य सरगना को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग भी उठ रही है।
क्या है फ्लू डस्ट और फ्लाई एश
फ्लू डस्ट (Flue Dust)
स्टील प्लांट, ब्लास्ट फर्नेस, स्पंज आयरन या धातु उद्योगों की चिमनी (Flue) से निकलने वाली महीन धूल। इसमें लौह कण (Iron), जिंक, सीसा और अन्य धातुएं हो सकती हैं। इसे डस्ट कलेक्टर या बैग फिल्टर से एकत्र किया जाता है। फ्लू डस्ट का जिक्र आमतौर पर स्टील उत्पादन से जुड़ा होता है।
2. फ्लाई ऐश (Fly Ash)
कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट में कोयला जलने के बाद बनने वाली राख। इसका उपयोग सीमेंट, ईंट, सड़क निर्माण और कंक्रीट में किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से सिलिका, एल्युमिना और कैल्शियम जैसे तत्व होते हैं।

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