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छत्तीसगढ़

रायपुर : राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति ने पिछड़ा वर्ग समाजों के प्रतिनिधियों से की मुलाकात, जानी समस्याएं

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 राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति ने पिछड़ा वर्ग समाजों के प्रतिनिधियों से की मुलाकात, जानी समस्याएं
 राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति ने पिछड़ा वर्ग समाजों के प्रतिनिधियों से की मुलाकात, जानी समस्याएं

रायपुर। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान आज राज्य अतिथि गृह (पहुना) में विभिन्न पिछड़ा वर्ग समाजों के प्रमुखों एवं प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने समाजों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, मांगों और सुझावों को गंभीरता से सुना। 
इस अवसर पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष नेहरू राम निषाद, उपाध्यक्ष श्रीमती चंद्रकांती वर्मा, पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष आर.एस. विश्वकर्मा तथा लौह शिल्पकार विकास बोर्ड के अध्यक्ष प्रफुल्ल विश्वकर्मा सहित पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत आने वाले विभिन्न समाजों के प्रमुख एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि पिछड़ा वर्ग समाजों के सर्वांगीण विकास और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर आवश्यक कार्रवाई और समाधान का भरोसा दिलाया। इस दौरान शिक्षा, रोजगार, सामाजिक उत्थान तथा कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
समाज के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और अपेक्षाओं से आयोग की अध्यक्ष को अवगत कराया। साध्वी निरंजन ज्योति ने सभी सुझावों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विषयों पर आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया।

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छत्तीसगढ़

पति ने मांगा तलाक, पत्नी ने की 2-करोड़ की डिमांड:हाईकोर्ट बोला- मानसिक क्रूरता, ऐसी मांग से रिश्ता बचना मुश्किल, महिला की अपील खारिज

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बिलासपुर, एजेंसी। शादी के करीब 2 साल बाद पति-पत्नी के रिश्ते में दरार आ गई। तलाक के मामले में मध्यस्थता के दौरान पत्नी ने स्थायी भरण-पोषण के लिए पति से 2 करोड़ रुपए की डिमांड कर दी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस अत्यधिक मांग को पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना है।

साथ ही पत्नी की याचिका खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें महिला के लिए 10 लाख रुपए का स्थायी भरण-पोषण तय किया गया था।

अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि जब अत्यधिक और असामान्य आर्थिक मांग के कारण मध्यस्थता विफल हो जाती है, तो इसका स्पष्ट मतलब है कि रिश्ता उस मोड़ पर पहुंच चुका है जहां से वापसी संभव नहीं है। ऐसे हालात में शादी को जबरन बनाए रखने का दबाव बनाना पति पर मानसिक क्रूरता के समान है।

पत्नी ने पति से तलाक के लिए 2 करोड़ मांगे। (प्रतीकात्मक फोटो)

पत्नी ने पति से तलाक के लिए 2 करोड़ मांगे। (प्रतीकात्मक फोटो)

अब जानिए पूरा मामला

दरअसल, रायपुर निवासी दंपती की शादी 29 जून 2020 को हुई थी, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के रिश्ते बिगड़ गए। पति का आरोप था कि पत्नी 7 फरवरी 2022 को अपने भाई की शादी का बहाना बनाकर मायके गई और करीब 35 लाख रुपए मूल्य के पुश्तैनी जेवर व अन्य कीमती सामान साथ ले गई।

इसके बाद महिला थाना और सखी सेंटर में हुई काउंसलिंग के बावजूद उसने वापस लौटने से इनकार कर दिया। इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक की अर्जी लगाई।

फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील

फैमिली कोर्ट ने पति की आय और पत्नी की शैक्षणिक योग्यता को ध्यान में रखते हुए 10 लाख रुपए का स्थायी गुजारा भत्ता तय किया था। इस फैसले के खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में अपील की थी। इसमें उसने गुजारा भत्ता बढ़ाकर 2 करोड़ रुपए देने की मांग की।

2 करोड़ रुपए की मांग बनी सुलह में रोड़ा

हाईकोर्ट ने 18 जून 2026 को दोनों पक्षों को आपसी सहमति से स्थायी गुजारा भत्ते की राशि तय करने के लिए मध्यस्थता केंद्र भेजा था। सुनवाई के दौरान सामने आया कि मध्यस्थता के दौरान पत्नी ने एकमुश्त 2 करोड़ रुपए की मांग रखी।

पति ने अपनी वित्तीय स्थिति और व्यावसायिक खातों का ब्योरा देते हुए इस राशि को अत्यधिक बताया और इसे देने में असमर्थता जताई, इसके कारण दोनों पक्षों के बीच समझौता नहीं हो सका।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।

पुलिस केस दर्ज कराने को माना अपमानित करने का प्रयास

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि अलग रहने के दौरान पत्नी ने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा कानून के तहत केस दर्ज कराया और मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर फर्जी प्रोफाइल बनाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर भी दर्ज कराई।

हाईकोर्ट ने इसे पति और उसके परिवार को अपमानित व प्रताड़ित करने की मंशा से उठाया गया कदम माना। साथ ही कहा कि साक्ष्यों से स्पष्ट है कि पति और उसके परिजनों के बार-बार आग्रह के बावजूद पत्नी ने उनके साथ रहने से लगातार इनकार किया था। बता दें कि इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की।

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छत्तीसगढ़

UCC लागू होने पर छत्तीसगढ़ देश का पांचवां राज्य बनेगा:CM साय बोले- शीतकालीन सत्र में बिल पास कराएंगे, समिति की पहली बैठक

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य कैबिनेट पहले ही इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार आगामी शीतकालीन सत्र में UCC विधेयक को विधानसभा से पारित कराएगी।

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित समिति की पहली बैठक हुई। इसके साथ ही UCC का प्रारूप तैयार करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है।

उत्तराखंड, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ UCC लागू करने की तैयारी में है। विधेयक पारित होकर कानून लागू होने पर यह देश का पांचवां राज्य बन जाएगा।

समिति की अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई।

समिति की अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई।

समिति पूरे राज्य से लेगी सुझाव

समिति राज्य के सामाजिक और अन्य पहलुओं का अध्ययन करेगी। अलग-अलग वर्गों और हितधारकों से सुझाव भी लिए जाएंगे। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर UCC का ड्राफ्ट तैयार होगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

UCC को लेकर अब तक क्या-क्या हुआ?

  • 15 अप्रैल 2026: राज्य कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
  • 26 जून 2026: सरकार ने आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए समिति के गठन को मंजूरी दी।
  • 24 जुलाई 2026: समिति की पहली बैठक के साथ मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई।

समिति में कौन-कौन शामिल हैं?

UCC का प्रारूप तैयार करने के लिए सरकार ने 5 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई है। इसमें शामिल हैं-

  1. न्यायमूर्ति (रिटायर्ड) रंजना प्रकाश देसाई – अध्यक्ष
  2. शत्रुघ्न सिंह (रिटायर्ड IAS) – सदस्य
  3. एम.के. राउत – सदस्य
  4. मोहन पवार (सीनियर वकील) – सदस्य
  5. ज्योति रानी सिंह (रिटायर्ड प्रिंसिपल) – सदस्य

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)

यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता। इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है, चाहे उनका धर्म कोई भी हो।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-44 में राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने का निर्देश दिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे नागरिक कानूनों में एकरूपता आएगी, न्याय प्रक्रिया सरल होगी और लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।

पहले इन राज्यों में लागू हो चुकी है प्रक्रिया

उत्तराखंड – UCC पूरी तरह लागू हो चुका है। यह स्वतंत्र भारत का पहला राज्य है, जहां समान नागरिक संहिता लागू हुई। यह विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन संबंधों जैसे नागरिक मामलों पर लागू है। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

मध्यप्रदेश – राज्य सरकार ने UCC विधेयक को मंजूरी दे दी है और विधानसभा में इसे पेश कर पारित भी कर दिया है। सरकार अब इसके लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।

असम – राज्य सरकार ने UCC को मंजूरी देकर विधानसभा से भी पारित कराया है। यहां भी जनजातीय समुदायों और उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों को दायरे से बाहर रखा गया है।

गुजरात – सरकार ने UCC पर समिति/प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन UCC लागू नहीं हुआ है।

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छत्तीसगढ़

सरगुजा- बाथरूम के वेंटिलेटर की ग्रिल तोड़कर भागे 3 नाबालिग:चोरी के आरोप में प्लेस ऑफ सेफ्टी में थे बंद; एक महीने में 27 बच्चे भाग चुके

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सरगुजा, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सरगुजा के प्लेस ऑफ सेफ्टी से शुक्रवार सुबह चोरी के आरोप में रखे गए 3 नाबालिग फरार हो गए। तीनों की उम्र 16 से 18 साल के बीच है। वे सुबह करीब 5:45 बजे बाथरूम के वेंटिलेटर (रोशनदान) की ग्रिल तोड़कर भाग निकले। पुलिस उनकी तलाश शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, प्लेस ऑफ सेफ्टी में 16 से 18 साल के नाबालिग लड़कों को रखा जाता है। शुक्रवार (24 जुलाई) सुबह सभी बच्चों को योग के लिए उठाया गया था। तैयार होने के दौरान तीनों नाबालिग बाथरूम में गए और रोशनदान की ग्रिल तोड़कर भाग निकले। मामला गांधीनगर थाना क्षेत्र का है।

1 महीने में ये तीसरी घटना है। इससे पहले 24 जून को 11 बच्चे खिड़की तोड़कर बाल सुधार गृह से फरार हो गए थे। बाद में सभी 11 बच्चों को पकड़ लिया गया था। इसके बाद 14 जुलाई की रात पुराने और कमजोर दरवाजे को तोड़कर 13 बच्चे फिर से भाग निकले। इनमें से 9 बच्चों को पकड़ लिया गया है, जबकि 4 अब भी फरार हैं।

चोरी के आरोपी थे तीनों

जानकारी के मुताबिक, तीनों नाबालिगों को चोरी के आरोप में प्लेस ऑफ सेफ्टी में रखा गया था। तीनों आदतन अपराधी है। शुक्रवार सुबह योगा के समय तीनों दिखाई नहीं दिए। ऐसे में कर्मचारियों ने उनकी तलाश की। जांच के दौरान पता चला कि वे भाग चुके हैं।

मौके पर पहुंचे कलेक्टर

सीसीटीवी फुटेज देखने पर तीनों एक साथ परिसर से बाहर जाते हुए दिखाई दिए। इसके बाद तुरंत गांधीनगर थाना पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर कलेक्टर अजीत वसंत और पुलिस अधिकारी हाउस ऑफ सेफ्टी पहुंचे।

उन्होंने घटना की जानकारी ली और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए। पुलिस ने बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में भी तलाश की, लेकिन अभी तक तीनों का पता नहीं चल सका। फिलहाल, पुलिस टीम तलाश में जुटी हुई है।

पहले भी कई बार हो चुके हैं गिरफ्तार

हाउस ऑफ सेफ्टी के प्रभारी अधीक्षक नीपू राम कुशवाहा ने बताया कि फरार हुए तीनों नाबालिग आदतन अपराधी हैं। इनमें दो कोरिया जिले के और एक बलरामपुर का रहने वाला है। तीनों ने हाथ से ही ग्रिल को तोड़ा था। ग्रिल काफी पुरानी थी।

कलेक्टर अजीत वसंत ने दिए निर्देश

  • भवन की सुरक्षा मजबूत करने और आवश्यक मरम्मत कार्य तुरंत शुरू हो।
  • बार-बार भागने वाले बालकों के स्थानांतरण और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग हो।
  • सुरक्षा में लापरवाही पाए जाने पर संस्था के अधीक्षक को निलंबित करने के निर्देश।
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