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छत्तीसगढ़

रायपुर : धन-धान्य से पुष्पित-पल्लवित धरा को सुंदर, समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बनाने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही हमारी सरकार : मुख्यमंत्री साय

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सिक्किम के पत्रकारों को भाया छत्तीसगढ़, कहा – छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला

“छत्तीसगढ़ ने भारतीय होने का गर्व कराया” – पत्रकार सुश्री अर्चना प्रधान

सिक्किम से अध्ययन भ्रमण पर आए पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसान हितैषी योजनाओं, उद्योग नीति तथा नक्सल पुनर्वास नीति को मिली सराहना

सिक्किम से अध्ययन भ्रमण पर आए पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रदेश है और धन-धान्य से पुष्पित-पल्लवित इस धरा को हमारी सरकार सुंदर, समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बनाने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में सिक्किम राज्य से अध्ययन भ्रमण पर पहुंचे पत्रकारों के दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया और उनसे छत्तीसगढ़ को लेकर ढेर सारी बातें साझा की। उन्होंने सभी अतिथियों को राजकीय गमछा भेंट कर छत्तीसगढ़ में स्वागत और अभिवादन किया। मुख्यमंत्री की सहृदयता और आतिथ्य पाकर  सभी पत्रकार अभिभूत हुए और उन्हें सिक्किम आने का निमंत्रण भी दिया। 

             मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ 44 प्रतिशत वन क्षेत्र से आच्छादित है तथा यहां 31 प्रतिशत आदिवासी समुदाय निवासरत है। वनोपज संग्रहण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से जनजातीय समुदाय आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। जशपुर जिले में स्व-सहायता समूह की महिलाएं ‘जशप्योर’ ब्रांड के अंतर्गत उत्पाद तैयार कर आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए सरकार द्वारा 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से भुगतान किया जा रहा है तथा चरण पादुका योजना के तहत निःशुल्क चप्पल प्रदान की जा रही है।

                मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह की चिंता को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2005 में इस योजना की शुरुआत की गई थी। हाल ही छह हजार से अधिक जोड़े इस योजना के अंतर्गत विवाह बंधन में बंधे, जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत नवदंपतियों को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता एवं 15 हजार रुपये का सामग्री सहयोग प्रदान किया जाता है।

                   नक्सलवाद के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सफल नेतृत्व और दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते प्रदेश में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है। राज्य सरकार की आकर्षक पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 50 हजार रुपये की सहायता तथा तीन वर्षों तक प्रति माह 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। अब तक 2,500 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें रोजगार से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। श्री साय ने बताया कि जगदलपुर में आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा ‘बस्तर पंडुम’ कैफे का सफल संचालन इसका सशक्त उदाहरण है।

          मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के अंतर्गत 17 शासकीय योजनाओं को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया गया है, जिससे सड़क, बिजली, पानी, राशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की पहुंच सुदृढ़ हुई है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब विकास की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रहे हैं। पर्यटन की संभावनाओं पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। चित्रकोट जलप्रपात, कुटुम्बसर गुफाएं, अबूझमाड़ के वन और धुड़मारास जैसे स्थल प्रदेश की पहचान हैं। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु होम स्टे को उद्योग का दर्जा दिया गया है, जिसके तहत ग्रामीणों को पांच कमरों तक निर्माण के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं औद्योगिक विकास के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि नवा रायपुर में 100 एकड़ क्षेत्र में मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है, जहां निम्न आय वर्ग के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने प्रदेश की आकर्षक नवीन औद्योगिक नीति का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसके तहत राज्य को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। साथ ही चित्रोत्पला फिल्म सिटी की स्थापना से प्रदेश में फिल्म उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। 

“छत्तीसगढ़ ने भारतीय होने का गर्व कराया” – सुश्री अर्चना प्रधान

सिक्किम की पत्रकार सुश्री अर्चना प्रधान ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ‘मेक इन इंडिया’ का प्रभावी स्वरूप देखने को मिला। भिलाई स्टील प्लांट में रेल पटरियों सहित विभिन्न इस्पात उत्पादों का निर्माण प्रदेश के औद्योगिक सामर्थ्य को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इकाइयों को हमें करीब से देखने का मौका मिला और हम जान पाए है कि इस प्रदेश का देश के विकास में कितना महत्वपूर्ण योगदान है। 

सिक्किम के पत्रकारों को भाया छत्तीसगढ़

              मुख्यमंत्री से भ्रमण उपरांत मिलने पहुंचे पत्रकारों ने  कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला है। उन्होंने भ्रमण के दौरान प्राप्त अनुभवों को साझा करते हुए स्थानीय खान-पान और सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। सिक्किम से आए पत्रकारों ने अपने पांच दिवसीय भ्रमण के दौरान भिलाई स्टील प्लांट, गेवरा ओपन माइंस, नवा रायपुर तथा जनजातीय संग्रहालय का अवलोकन किया। पत्रकारों ने बताया कि छत्तीसगढ़ भ्रमण की सुंदर स्मृतियों को अपने साथ लेकर जा रहे हैं, जो उन्हें आजीवन याद रहेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसानों के हित में की गई घोषणाओं, स्वच्छ वातावरण तथा पुनर्वास नीति की सराहना की।

मुख्यमंत्री को भेंट किया सिक्किम का स्मृति चिन्ह ‘थांका’

पत्रकारों के दल ने मुख्यमंत्री को सिक्किम की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक ‘थांका’ पेंटिंग भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस उपहार के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसे स्नेह और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक बताया।

        पत्रकारों ने बताया कि सिक्किम का थांका पेंटिंग एक पवित्र स्मृति चिन्ह है, जो सूती या रेशमी कपड़े पर बौद्ध देवताओं, मंडलों और बुद्ध के जीवन दृश्यों को दर्शाता है। यह हस्तनिर्मित कला सिक्किम की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जिसे अक्सर घर की सजावट और सकारात्मक ऊर्जा के लिए लाया जाता है। इन्हें रोल करके आसानी से ले जाया जा सकता है, जो यात्रियों के लिए एक बेहतरीन सोवेनियर है। यह पारंपरिक कलाकृति सिक्किम के निवासियों के लिए धार्मिक विश्वास और आस्था का प्रतीक है। 

           इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह, पीआईबी गंगटोक के सहायक निदेशक मानस प्रतिम शर्मा, पीआईबी रायपुर के सहायक निदेशक सुदीप्तो कर, पुरुषोत्तम झा और सरद बसनेत,पत्रकार बेनु प्रकाश तिवारी, विकास क्षेत्री, होमनाथ दाबरी, ईश्वर, सुश्री अर्चना प्रधान, सुश्री अनुशीला शर्मा, प्रकाश अधिकारी, ललित दहल, विनोद तमंग, मोहन कुमार कार्की, नार बहादुर क्षेत्री उपस्थित थे।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : मुख्य सचिव ने SASCI 2026-27 के तहत सुधार कार्यों की प्रगति की समीक्षा की

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समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने और विभागवार मासिक कार्ययोजना तैयार करने के दिए निर्देश

मुख्य सचिव ने SASCI 2026-27 के तहत सुधार कार्यों की प्रगति की समीक्षा की

रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में राज्यों को पूंजीगत निवेश हेतु विशेष सहायता योजना (SASCI) 2026-27 के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे सुधार कार्यों एवं उनके क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि लंबित कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से विभागवार मासिक कार्ययोजना तैयार कर उसके अनुसार कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा, ताकि योजना के तहत तय लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जा सके।
बैठक में राज्यों को पूंजीगत निवेश हेतु विशेष सहायता योजना (SASCI) 2026-27 के तहत जारी दिशा-निर्देशों एवं विभिन्न परिचालन गाइडलाइंस के अनुरूप विभागवार सुधार कार्यों की प्रगति, अब तक की उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, समयबद्ध लक्ष्य-पूर्ति तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
बैठक में वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर विभाग के सचिव मुकेश कुमार, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव रजत कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस.भारतीदासन, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव सुश्री आर.शंगीता, राजस्व विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. सारांश मित्तर, वित्त विभाग के विशेष सचिव चंदन कुमार, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल विवेक आचार्य सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : ‘भारत भाग्य विधाता‘ फिल्म के लेखक-निर्देशक मनोज तापड़िया तथा फिल्म निर्माता आदि शर्मा ने की छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के एमडी विवेक आचार्य से सौजन्य मुलाकात

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चित्रोत्पला फिल्म सिटी के विकास,  फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने और छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माण के आकर्षक गंतव्य के रूप में विकसित करने पर हुई विस्तृत चर्चा

रायपुर। छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड में चित्रोत्पला फिल्म सिटी के विकास को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। रायपुर में आयोजित इस बैठक में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य से भारत भाग्य विधाता फिल्म के डायरेक्टर मनोज तापड़िया तथा फिल्म निर्माता आदि शर्मा ने सौजन्य भेंट कर राज्य में विकसित की जा रही चित्रोत्पला फिल्म सिटी की अवधारणा, उसकी संभावनाओं तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि छत्तीसगढ़ की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरें, जलप्रपात, वन क्षेत्र, जनजातीय संस्कृति तथा विविध प्राकृतिक लोकेशन राज्य को फिल्म निर्माण के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाते हैं। इन विशेषताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माताओं के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर राज्य को फिल्मांकन का आकर्षक गंतव्य बनाने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।
चर्चा के दौरान चित्रोत्पला फिल्म सिटी को आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक ऐसे समग्र फिल्म परिसर के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया, जहाँ फिल्म निर्माण से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ उपलब्ध हों। साथ ही फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने, राज्य में फिल्म निर्माण गतिविधियों का विस्तार करने तथा इस क्षेत्र में निजी और संस्थागत सहयोग की संभावनाओं पर भी विस्तार से मंथन हुआ।

प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने कहा कि चित्रोत्पला फिल्म सिटी का विकास छत्तीसगढ़ के फिल्म और पर्यटन क्षेत्र के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा। इससे राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी, फिल्म निर्माण गतिविधियों को गति मिलेगी तथा स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों, रचनात्मक युवाओं और फिल्म से जुड़े अन्य पेशेवरों के लिए रोजगार एवं कौशल विकास के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग के विकास से पर्यटन, आतिथ्य, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों को भी व्यापक लाभ मिलेगा, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होगी।
बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि छत्तीसगढ़ को एक उभरते हुए फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों, निर्माताओं और निर्देशकों के साथ निरंतर संवाद एवं सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। राज्य की प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विविधता और विकसित की जा रही आधुनिक फिल्म अवसंरचना के समन्वय से छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माण के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएंगे। बैठक में चित्रोत्पला फिल्म सिटी के विकास, फिल्म पर्यटन के विस्तार तथा भविष्य में फिल्म निर्माण और पर्यटन संवर्धन के क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग की व्यापक संभावनाओं पर सहमति व्यक्त की गई।

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रायपुर : विशेष लेख : प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण का अनूठा संगम है नंदनवन जंगल सफारी

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320.15 हेक्टेयर में फैला नंदनवन जंगल सफारी बना प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों का पसंदीदा केंद्र

  •  धनंजय राठौर ,संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
  •  अशोक कुमार चंद्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी
 नंदनवन जंगल सफारी नवा रायपुर

नंदनवन जंगल सफारी नवाँ रायपुर में पर्यटकों के लिए कई प्रकार की रोमांचक सफारी राइड्स उपलब्ध हैं, जिनमें शाकाहारी सफारी, टाइगर सफारी, भालू सफारी और लायन सफारी प्रमुख हैं। इसके अलावा यहाँ एक छोटा चिड़ियाघर (नंदनवन जू) भी है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित नंदनवन जंगल सफारी राज्य के प्रमुख पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण केंद्रों में शामिल है। 320.15 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह विशाल परिसर प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखने और उनके बारे में जानने का अवसर मिलता है।

 नंदनवन जंगल सफारी नवा रायपुर
मिनी जू से जंगल सफारी तक का सफर
    नंदनवन की शुरुआत वर्ष 1979 में रायपुर में ‘नंदनवन मिनी जू’ के रूप में हुई थी। यह वन्यजीवों के रेस्क्यू और राहत केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। वर्ष 2008 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) ने इसे आधिकारिक रूप से ‘मिनी जू’ की मान्यता दी।
    इसके बाद नवा रायपुर में आधुनिक और विशाल जंगल सफारी विकसित करने के लिए वर्ष 2012 से 2015 के बीच 320.15 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई। 1 नवंबर 2016 को छत्तीसगढ़ राज्य के 16वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नंदनवन जंगल सफारी का उद्घाटन किया।

320.15 हेक्टेयर में फैला नंदनवन जंगल सफारी बना प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों का पसंदीदा केंद्र
वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा पर विशेष जोर
    नंदनवन जंगल सफारी का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों का संरक्षण, दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण एवं प्रजनन और लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यहां वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप सुरक्षित और तनावमुक्त आवास उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
    विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीवों तथा जैव विविधता के महत्व की जानकारी देने के लिए यहां विभिन्न पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
पांच प्रमुख सफारी जोन हैं आकर्षण का केंद्र
    नंदनवन जंगल सफारी को वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग जोन में विकसित किया गया है।

320.15 हेक्टेयर में फैला नंदनवन जंगल सफारी बना प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों का पसंदीदा केंद्र
शाकाहारी सफारी
    30.89 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस जोन में चीतल, सांभर, नीलगाय और काला हिरण जैसे वन्यजीव प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते हैं।
भालू सफारी
    20.03 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित भालू सफारी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां भालुओं को प्राकृतिक वातावरण में देखने का अवसर मिलता है।
बाघ सफारी
    20.04 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली बाघ सफारी में पर्यटक देश के राष्ट्रीय पशु बाघ को करीब से देखने का रोमांचक अनुभव प्राप्त करते हैं।
सिंह सफारी
    20.01 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित सिंह सफारी में एशियाई शेरों का संरक्षण किया जा रहा है।
जू जोन
    50 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जू जोन में विभिन्न प्रजातियों के पक्षी, सरीसृप और अन्य वन्यजीव आकर्षण का केंद्र हैं।

दुर्लभ और विशेष वन्यजीवों का भी संरक्षण
    नंदनवन जंगल सफारी में विभिन्न चिड़ियाघरों के साथ पशु विनिमय कार्यक्रम के माध्यम से कई दुर्लभ और विशेष वन्यजीवों को लाया गया है। यहां सफेद बाघ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल और क्लोन जंगली भैंसा ‘दीपाशा’ जैसे वन्यजीव पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण हैं।
देश-विदेश से पहुंचते हैं पर्यटक
    वनमंडलाधिकारी थेजस शेखर ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की मंशानुरूप नंदनवन जंगल सफारी पर्यटकों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2018-19 में ही देश-विदेश से 1 लाख 74 हजार 611, वर्ष 2019-20 में 1 लाख 60 हजार 767 ,वर्ष 2020-21 में 1 लाख 60 हजार 32, वर्ष 2021-22 में 1 लाख 73 हजार 72, वर्ष 2022-23 में 2 लाख 77 हजार 881, वर्ष 2023-24 में 2 लाख 62 हजार 486, वर्ष 2024-25 में 2 लाख 70 हजार 942, वर्ष 2025-26 में 3 लाख 24 हजार 785, से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का भ्रमण किया। यह आंकड़ा इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता का केंद्र
    नंदनवन जंगल सफारी में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस, विश्व बाघ दिवस और वन्यजीव सप्ताह जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से लोगों, विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है।
रायपुर से आसान पहुंच
    नंदनवन जंगल सफारी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित है। यह स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, रायपुर से लगभग 15 किलोमीटर और रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जंगल सफारी प्रत्येक सोमवार को बंद रहती है।
वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का ऐसा अनूठा केंद्र
नंदनवन जंगल सफारी आज छत्तीसगढ़ में पर्यटन, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का ऐसा अनूठा केंद्र बन चुका है, जहां प्रकृति के करीब पहुंचकर वन्यजीवों को देखने के साथ-साथ उनके संरक्षण का संदेश भी मिलता है ।

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