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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: कृष्ण मोहन बने ट्रस्ट के नए महासचिव, बोले- हमारी छवि धूमिल हुई है, उसे ठीक करेंगे

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अयोध्या, एजेंसी। अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक खासी गहमागहमी के बीच हुई बैठक में हुए फैसले के बाद राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रेस कॉन्फेंस की। चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव बनाए गए कृष्ण मोहन ने कहा कि हमारी छवि धूमिल हुई है उसे ठीक करेंगे। उन्होंने प्रेस कॉन्फेंस के दौरान कहा कि चढ़ावा जो चोरी हुआ है हम सभी उससे आहत हैं। कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने कहा कि चढ़ावा चोरी में शामिल किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।

आप को बता दें कि राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने राम मंदिर कथित चढावा चोरी मामले के तूल पकड़ने के बाद पिछले महीने इस्तीफा दे दिया था। इस मामले की जांच के लिये गठित विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) की शुरुआती जांच के आधार पर मुकदमा दर्ज होने के बाद आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास समेत सात स्थायी सदस्य शामिल हैं।

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सुप्रीम कोर्ट बोला-बांके बिहारी में चढ़ावा चोरी नहीं होने देंगे:एक-एक पैसा दानपेटी में डालें, श्रद्धालुओं का दिया दान भगवान के लिए

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मथुरा, एजेंसी। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में आने वाले दान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मंदिर में दान किया गया एक-एक पैसा पहले दानपेटी में डाला जाए। कोर्ट ने कहा-

दान की रकम मंदिर के खाते में जानी चाहिए। चढ़ावे की चोरी नहीं होने देंगे। मंदिर से जुड़े सेवायत, पुजारी या कोई और व्यक्ति दान की रकम अपने पास नहीं रख सकता।

कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि श्रद्धालु की ओर दिया गया दान भगवान के लिए है। उस पर सबसे पहला अधिकार भगवान का है। मंदिर के खजाने में जमा होने के बाद ही सेवायतों या संबंधित लोगों को उनका हिस्सा मिल सकता है।

दरअसल, CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने एक वीडियो पेश किया गया था। इसमें 3 लोग मंदिर की दानपेटी के सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं। श्रद्धालुओं से पैसे लेकर उन्हें पॉलीथिन की थैलियों में जमा कर रहे हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंदिर से जुड़े सेवायत, पुजारी या कोई और व्यक्ति दान की रकम अपने पास नहीं रख सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंदिर से जुड़े सेवायत, पुजारी या कोई और व्यक्ति दान की रकम अपने पास नहीं रख सकता।

कोर्ट ने कहा- तुरंत ध्यान देने की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट श्री बांके बिहारी महाराज मंदिर की मैनेजमेंट कमेटी की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। मंदिर में कथित चंदा चोरी को लेकर सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने हाई पावर कमेटी की एक स्टेटस रिपोर्ट पेश की। उन्होंने तस्वीरें भी पेश कीं और कहा कि मामले बहुत गंभीर हैं। इसमें तुरंत कार्रवाई की जरूरत है।

कोर्ट ने मंदिर की मैनेजमेंट कमेटी को दान की पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा। कोर्ट ने कमेटी को इसके लिए उचित व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया। कहा कि मंदिर में आने वाले दान की रकम का पूरा हिसाब रखा जाए। इसमें किसी तरह की गड़बड़ी या हेराफेरी की गुंजाइश न रहे।

यह बांके बिहारी मंदिर के अंदर का दृश्य है। सामने ठाकुरजी का गर्भगृह दिख रहा है।

यह बांके बिहारी मंदिर के अंदर का दृश्य है। सामने ठाकुरजी का गर्भगृह दिख रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी- बिना हमारी इजाजत कोई लेन-देन न करें

सुप्रीम कोर्ट ने सेवायतों और दूसरे संबंधित लोगों को कड़ी चेतावनी भी दी। कहा- अगर कोई व्यक्ति दान को मंदिर के खजाने तक पहुंचने से रोकने या इस व्यवस्था में किसी तरह की रुकावट डालने की कोशिश करता है, तो इसे बहुत गंभीरता से लिया जाएगा। अगर मंदिर के फंड से कोई संपत्ति खरीदने का प्रस्ताव आता है, तो उसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी जाए। कोर्ट की इजाजत के बाद ही कोई लेन-देन किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कमेटी के अध्यक्ष रिटायर्ड न्यायाधीश अशोक कुमार ने कहा- मंदिर में बेहतर और पारदर्शी व्यवस्था बनाना चाहते हैं, लेकिन कुछ लोग इसमें बाधा डाल रहे हैं। कुछ लोग गोलकों के आगे खड़े हो जाते हैं और श्रद्धालुओं से चढ़ावा लेने का प्रयास करते हैं। इतना ही नहीं, मंदिर में लगाए गए QR कोड भी खुरच दिए गए हैं।

मथुरा के शहीद लक्ष्मण सिंह स्मारक भवन में तीन महीने पहले हाई पावर कमेटी की बैठक हुई थी।

मथुरा के शहीद लक्ष्मण सिंह स्मारक भवन में तीन महीने पहले हाई पावर कमेटी की बैठक हुई थी।

फरवरी से अप्रैल तक 4.90 करोड़ रुपए दान आया

शहीद लक्ष्मण सिंह स्मारक भवन में 3 महीने पहले हाई पावर कमेटी की बैठक हुई थी। इसमें मंदिर की आय, सुरक्षा, व्यवस्था समेत 29 पॉइंट पर चर्चा हुई थी। बैठक की अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश और कमेटी अध्यक्ष अशोक कुमार ने की थी।

कमेटी ने बताया था- फरवरी से अप्रैल तक 3 महीने में मंदिर के 18 गुल्लक में श्रद्धालुओं ने 4.90 करोड़ रुपए का दान दिया था। इनमें इंग्लैंड के 10 डॉलर, अमेरिका के 333 डॉलर, कनाडा की 115 मुद्रा, यूएई की 600 से अधिक मुद्रा और नेपाली करेंसी शामिल थी। सभी विदेशी मुद्राएं बैंक में जमा करा दी गई थीं।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट बोला- स्कूल में हिजाब पहनने की इजाजत नहीं:सेक्युलरिज्म के लिए यूनिफॉर्म जरूरी, नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज

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प्रयागराज, एजेंसी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूलों में हिजाब पहनने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने सोमवार को कहा स्कूल में यूनिफॉर्म के नियम का पालन करना जरूरी है। इससे बच्चों में बराबरी की भावना रहती है। स्कूल की अपनी पहचान भी बनती है।

हाईकोर्ट ने कहा, यूनिफॉर्म की बदौलत बिना किसी धार्मिक भेदभाव वाला माहौल बना रहता है। इसलिए कोई भी छात्र या छात्रा स्कूल के तय किए गए ड्रेस कोड को बदलने की जिद नहीं कर सकती।

कोर्ट ने कहा-

स्कूल में व्यक्तिगत आधार पर हिजाब पहनने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यह यूनिफॉर्म के विचार के खिलाफ होगा। इससे स्कूल के अनुशासन को तय करने का अधिकार संस्थान के बजाय अलग-अलग छात्रों के हाथ में चला जाएगा।

जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिविजन बेंच ने इसके साथ ही नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज कर दी। इसमें स्कूल के तय ड्रेस कोड के साथ हिजाब पहनकर कक्षा में बैठने की अनुमति मांगी गई थी।

स्कूलों में हिजाब विवाद कर्नाटक से शुरू हुआ

कर्नाटक में हिजाब विवाद जनवरी 2022 में उडुपी के एक सरकारी कॉलेज से शुरू हुआ। कुछ मुस्लिम छात्राओं ने हिजाब पहनकर कक्षा में बैठने की मांग की, जबकि कॉलेज प्रशासन ने इसे यूनिफॉर्म नियम के खिलाफ बताया। इसके बाद विरोध दूसरे कॉलेजों तक पहुंचा और कुछ जगह भगवा शॉल पहनकर जवाबी प्रदर्शन हुए।

15 मार्च 2022 को कर्नाटक हाईकोर्ट ने छात्राओं की याचिका खारिज करते हुए कहा कि हिजाब इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है और स्कूल के तय ड्रेस कोड का पालन कराया जा सकता है।

हिजाब पर सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी पेंडिंग

हिजाब विवाद पर 13 अक्टूबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच का फैसला एकमत नहीं था। दोनों जजों की राय अलग रही।

जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। उनके मुताबिक स्कूल का ड्रेस कोड सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होता है और हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा साबित नहीं किया गया।

वहीं जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कहा कि इस मामले में यह तय करना जरूरी ही नहीं है कि हिजाब अनिवार्य धार्मिक प्रथा है या नहीं। उनके मुताबिक छात्रा की आस्था और पसंद को अनुच्छेद 19 और 25 के तहत देखा जाना चाहिए।

अनुच्छेद 19: अभिव्यक्ति की आजादी देता है। पहनावे को भी अभिव्यक्ति से जोड़कर अधिकार का दावा किया जा सकता है, लेकिन इस पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

अनुच्छेद 25: धर्म मानने और उसका पालन करने की आजादी देता है, लेकिन यह अधिकार पूरी तरह असीमित नहीं है।

इसके बाद मामले को CJI की बैंच में भेजा गया था। हालांकि, 4 साल से सुनवाई नहीं हुई है।

इस्लाम में हिजाब की बात कहां से आई?

कुरान में महिलाओं के पहनावे और पर्दे से जुड़ी सबसे अहम बातें सूरह अन-नूर की आयत 31 और सूरह अल-अहजाब की आयत 59 में मिलती हैं।

सूरह अन-नूर 24:31: महिलाओं से निगाहें नीची रखने, पाकदामनी की हिफाजत करने और अपनी सजावट न दिखाने को कहा गया है। इसी आयत में ‘खुमुर’ यानी सिर ढंकने वाले कपड़े को सीने पर डालने की बात कही गई है।

कुरान में इसके पीछे की वजह क्या थी?

1. पहचान और सुरक्षा

सूरह अल-अहजाब 33:59 में बाहरी कपड़ा डालने की वजह यह बताई गई है कि महिलाओं को पहचाना जाए और उन्हें परेशान न किया जाए। कुरान 33:59

2. निजी जीवन की मर्यादा

सूरह अल-अहजाब 33:53 में पैगंबर की पत्नियों से बात या कुछ मांगने के लिए पर्दे की आड़ रखने की बात कही गई है। इसी आयत में इसे दिलों की पवित्रता के लिए बेहतर बताया गया है। कुरान 33:53

3. सिर्फ महिलाओं के लिए नियम नहीं

कुरान की सूरह अन-नूर 24:30 में पहले पुरुषों को निगाहें नीची रखने और अपनी पाकदामनी की हिफाजत करने का निर्देश दिया गया है।

अब सिलसिलेवार पूरा मामला

  • याचिका लगाने वाली छात्रा ने प्रयागराज के एक निजी स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ती है। उसने अपनी मां के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। छात्रा का तर्क था कि वह कक्षा 6 से 10 तक हिजाब पहनकर ही स्कूल में पढ़ाई करती रही है। कभी कोई आपत्ति नहीं जताई गई। छात्रा ने याचिका के साथ पुराने पहचान पत्र और स्कूल की ग्रुप फोटो भी लगाई थी।
  • छात्रा ने कहा- वह 11वीं कक्षा में भी हिजाब पहनकर ही स्कूल जाना चाहती है, लेकिन परमिशन नहीं मिल रही। हमने डीएम से भी शिकायत की, जिस पर जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने रिपोर्ट मांगी। स्कूल प्रिंसिपल ने साफ किया कि यह शिक्षा संस्थान है, जहां सभी छात्रों के लिए एक समान ड्रेस कोड है। किसी एक छात्रा को अलग छूट देने से स्कूल की व्यवस्था प्रभावित होगी।
  • याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि हिजाब पहनना उसकी धार्मिक मान्यता से जुड़ा है। इसे पहनने से उसे निजता, व्यक्तिगत आजादी और बोलने की आजादी जैसे मौलिक अधिकार प्राप्त होते हैं। ऐसे में स्कूल को निर्देश दिया जाए कि उसे हिजाब पहनने से न रोके।
  • कोर्ट बोला- ड्रेस तय करने का हक सिर्फ स्कूल प्रशासन के पास
  • कोर्ट ने कहा- जब तक स्कूल का ड्रेस कोड सभी बच्चों के लिए एक जैसा है, सही मंशा से बनाया गया है और किसी के साथ भेदभाव नहीं करता, तब तक ड्रेस क्या होगी यह तय करने का पूरा हक सिर्फ स्कूल प्रशासन के पास है। अगर स्कूल ने पहले कभी हेडस्कार्फ (हिजाब) पहनने की छूट दी भी थी, तो इसका मतलब यह नहीं है कि यह छात्राओं का हमेशा के लिए पक्का अधिकार बन गया। स्कूल प्रशासन अपने नियमों में बदलाव करने के लिए स्वतंत्र है। वह पुरानी छूट को जारी रखने के लिए मजबूर नहीं है।
  • कोर्ट ने कहा- हिजाब पहनना इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं
  • कोर्ट ने कहा- जहां भी यह मुद्दा उठा है, हाईकोर्ट की राय एक रही है कि महिलाओं के लिए हिजाब पहनना इस्लाम का कोई जरूरी हिस्सा नहीं है। ऐसा नहीं है कि इसके बिना धर्म खतरे में पड़ जाएगा या इसे न पहनने पर महिला धर्म से बाहर हो जाएगी। इसे साबित करने के लिए कोई तथ्य या सबूत भी पेश नहीं किए गए हैं।
  • कोर्ट ने कहा- आस्था पर रोक नहीं, नियमों के पालन की उम्मीद कर रहे
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केरल, बॉम्बे और कर्नाटक हाईकोर्ट के पुराने फैसले का जिक्र किया। ‘फातिमा तस्नीम बनाम केरल राज्य’ के मामले में कोर्ट ने कहा था कि एक तरफ छात्र या छात्रा का अपनी पसंद के कपड़े पहनने का अधिकार है, तो दूसरी तरफ स्कूल या संस्था का अपना नियम-कानून चलाने का अधिकार है। जब इन दोनों अधिकारों के बीच टकराव या विवाद होता है, तो व्यक्तिगत पसंद के बजाय संस्था के बड़े हित और अनुशासन को ज्यादा महत्व दिया जाएगा।
  • सुप्रीम कोर्ट में ‘आयशा शिफा बनाम कर्नाटक राज्य’ मामले में दो जजों की राय बंटी हुई थी, इसलिए इस मुद्दे पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। कोर्ट ने कहा कि स्कूल छात्रा की आस्था पर कोई रोक नहीं लगा रहा, बल्कि केवल संस्थागत अनुशासन और यूनिफॉर्म के पालन की अपेक्षा कर रहा है। इसके बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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दिल्ली-NCR में लगातार दूसरे दिन तेज बारिश, गुरुग्राम में वर्क-फ्रॉम-होम:यूपी में 4 की मौत, एमपी समेत 15 राज्यों में ऑरेंज अलर्ट

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भोपाल/पटना/जयपुर/लखनऊ, एजेंसी। दिल्ली-NCR में मंगलवार सुबह लगातार दूसरे दिन तेज बारिश हुई है। एम्स फ्लाईओवर, कनॉट प्लेस, ITO और आरके पुरम समेत कई इलाकों में 3-4 फीट तक पानी भर गया। मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है।

दिल्ली-गुरुग्राम को जोड़ने वाले NH-48 पर महिपालपुर के पास ट्रैफिक जाम लगा। दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की। सोमवार को करीब 390 फ्लाइट्स लेट हुईं, 15 डायवर्ट और 26 कैंसिल की गईं।

गुरुग्राम में कई जगह 3 फीट तक पानी भरने के बाद मंगलवार को सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में वर्क फ्रॉम होम लागू किया गया। सोमवार को कई स्कूल बसें 3-6 घंटों तक पानी में फंसी रहीं।

यूपी के अयोध्या समेत 15 शहरों में बारिश हो रही है। वाराणसी में सोमवार रात 8 बजे से बारिश जारी है और स्कूल बंद कर दिए गए हैं। बारिश से जुड़ी घटनाओं में 4 लोगों की मौत हुई। मथुरा में सड़कें और रिहायशी इलाके जलमग्न हैं।

मध्य प्रदेश के भोपाल समेत कई जिलों में भी तेज बारिश हुई। विदिशा के बाजार में पानी भर गया और भोपाल में ट्रैफिक प्रभावित हुआ। प्रदेश में अब तक 28.75 इंच बारिश हुई है।

मौसम विभाग ने 27 अगस्त तक एमपी, यूपी, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, उत्तराखंड और केरल समेत 15 राज्यों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति

देशभर से मौसम की तस्वीरें

दिल्ली के संगम विहार इलाके में सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया। स्कूली बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

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हरियाणा के गुरुग्राम में मूसलाधार बारिश में सुभाष चौक पर फंसी स्कूल बस में मौजूद बच्चे।

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उत्तरकाशी में खरादी झूला पुल के पास यमुना नदी के तेज बहाव में फंसे व्यक्ति का रेस्क्यू किया गया।

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राजस्थान के करौली में पानी भरने से व्यापारियों ने दुकानें बंद कर दी थीं।

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बिहार में भागलपुर में राघोपुर-नरकटिया तटबंध टूट गया है। इससे करीब 10 हजार की आबादी प्रभावित हुई है।

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