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परियोजनाओं को पूरा करने की समयसीमा बढ़ाने से रियल एस्टेट क्षेत्र को राहत: निकाय

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नई दिल्ली, एजेंसी। रियल एस्टेट क्षेत्र के प्रमुख निकाय क्रेडाई और नारेडको ने रियल एस्टेट परियोजनाओं को पूरा करने की समयसीमा चार महीने बढ़ाने संबंधी सरकार के परामर्श को इस क्षेत्र के कारोबारियों के लिए राहत भरी पहल बताया है। निकायों ने कहा कि इससे निर्माण सामग्री की कमी से जूझ रहे डेवलपर्स को राहत मिलेगी। उन्होंने राज्यों के रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरणों (रेरा) से यह समय सीमा जल्द से जल्द बढ़ाने का अनुरोध किया, ताकी इस उद्योग को राहत मिल सके। 

केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने शुक्रवार को सभी राज्यों के रेरा के लिए परामर्श जारी कर कहा था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है, जिससे निर्माण सामग्री की कमी पैदा हो गई है और रियल एस्टेट परियोजनाओं का समय पर निर्माण प्रभावित हो रहा है। ऐसे में पात्र परियोजनाओं के पंजीकरण और निर्माण पूरा करने की समयसीमा चार महीने बढ़ाई जाए। इस परामर्श को लेकर क्रेडाई के अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा, ”मंत्रालय का यह परामर्श रियल एस्टेट क्षेत्र की मांग के अनुरूप एक सकारात्मक कदम है।” 

पटेल ने कहा, ”हालांकि युद्ध की वजह से आई रुकावटों के कारण इस उद्योग को निर्माण सामग्री की आपूर्ति और श्रमिकों की उपलब्धता में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन समय सीमा के विस्तार वाले परामर्श से डेवलपर्स को परियोजना पूरा करने की निर्धारित समय को मौजूदा बाज़ार की स्थिति के हिसाब से तय करने में मदद मिलेगी।” मंत्रालय को रियल एस्टेट क्षेत्र के हितधारकों से कई आवेदन मिले थे, जिनमें परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में आ रही रुकावटों को देखते हुए राहत की मांग की गई थी। सिग्नेचर ग्लोबल के संस्थापक एवं चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं से निर्माण सामग्री की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।

उन्होंने कहा, ”चार महीने का विस्तार देने का सरकार का फैसला व्यावहारिक और दूरदर्शी है।” नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) के अध्यक्ष परवीन जैन ने कहा, ”पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण निर्माण सामग्री की उपलब्धता और लागत दोनों प्रभावित हुई हैं, जिससे परियोजनाओं में देरी होना स्वाभाविक है।” यह राहत उन परियोजनाओं पर लागू होगी, जिनकी मूल, संशोधित या पहले से बढ़ाई गई पूर्णता तिथि 28 फरवरी, 2026 या उसके बाद की है। 

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देश

नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा की गिलगित-बाल्टिस्तान में मौत:8 हजार मीटर ऊंची ब्रॉड पीक पर चढ़ रहे थे, हिमस्खलन में गई जान

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काठमांडु, एजेंसी। मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा की पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में हिमस्खलन की चपेट में आने से मौत हो गई। उनकी ही पर्वतारोहण कंपनी एलीट एक्सपेडिशन ने इसकी पुष्टि की है।

निर्मल 30 जुलाई को काराकोरम इलाके में 8,051 मीटर ऊंची ब्रॉड पीक पर चढ़ाई कर रहे थे। इस दौरान करीब 7,000 मीटर की ऊंचाई पर यह हादसा हुआ। इसमें निर्मल समेत 10 पर्वतारोही लापता हो गए थे। इनमें छह नेपाली थे।

पुर्जा ने 2012 में ब्रिटिश नागरिकता ले ली थी, जिसके बाद उनकी नेपाली नागरिकता खत्म हो गई थी।

निर्मल पुर्जा का शव हेलिकॉप्टर से लाया गया।

निर्मल पुर्जा का शव हेलिकॉप्टर से लाया गया।

30 जुलाई को ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान हुए हिमस्खलन में 10 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। इससे पहले 2013 में ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान छह पर्वतारोहियों की जान गई थी।

30 जुलाई को ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान हुए हिमस्खलन में 10 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। इससे पहले 2013 में ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान छह पर्वतारोहियों की जान गई थी।

6 महीने में 14 सबसे ऊंची चोटियां फतह कीं

  • नेपाल और दुनियाभर के पर्वतारोहियों के बीच ‘निम्स दाइ’ के नाम से मशहूर निर्मल पुर्जा ने 2019 में ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ की शुरुआत की थी।
  • उनका मकसद था दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों को सिर्फ सात महीने में फतह करना। उस समय इसे लगभग असंभव माना जा रहा था।
  • निर्मल पुर्जा ने यह कारनामा महज छह महीने और छह दिन में पूरा कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने दक्षिण कोरिया के पर्वतारोही किम चांग-हो का करीब 8 साल पुराना विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया।

तीसरी बार ब्रॉड पीक की चढ़ाई में जान गई

  • निर्मल पुर्जा ने पहली बार ब्रॉड पीक को 2019 में प्रोजेक्ट पॉसिबल के दौरान फतह किया था। ब्रॉड पीक को दुनिया के सबसे मुश्किल पर्वतों में गिना जाता है।
  • दूसरी बार इस चोटी को उन्होंने 2023 में फतह किया। तब उन्होंने बिना सप्लीमेंट ऑक्सीजन के चढ़ाई की थी।
  • इस चढ़ाई की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने पाकिस्तान की पांचों 8,000 मीटर से ऊंची चोटियां (नंगा पर्वत, गाशरब्रुम-2, गाशरब्रुम-1, ब्रॉड पीक और के2) सिर्फ 26 दिनों में फतह कर नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।
  • तीसरी बार ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान शिखर के पास हिमस्खलन की चपेट में आने से उनका निधन हो गया।
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि इसी हिमस्खलन में निर्मल पुर्जा और उनके सहयोगियों की जान गई।

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि इसी हिमस्खलन में निर्मल पुर्जा और उनके सहयोगियों की जान गई।

ब्रिटिश स्पेशल फोर्स जॉइन करने वाले पहले नेपाली

निर्मल पुर्जा का जन्म 25 जुलाई 1983 को नेपाल के म्याग्दी जिले के दाना गांव में हुआ था। उनके परिवार का सेना से गहरा नाता रहा है। कई पीढ़ियों से परिवार के लोग गोरखा रेजिमेंट में सेवा करते रहे।

उनके पिता और तीन बड़े भाई भी गोरखा सैनिक थे। ऐसे माहौल में पले-बढ़े निर्मल ने भी बचपन से ही सैनिक बनने का सपना देखा। बाद में उन्होंने इसी परंपरा को आगे बढ़ाया और ब्रिटिश सेना की गोरखा रेजिमेंट में भर्ती हो गए।

करीब छह साल तक गोरखा सैनिक के रूप में सेवा देने के बाद उन्होंने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। वे ब्रिटिश रॉयल नेवी की स्पेशल बोट सर्विस (SBS) में शामिल होने वाले पहले नेपाली बने।

SBS ब्रिटेन की नौसेना की सबसे खतरनाक और प्रतिष्ठित स्पेशल फोर्स है। इसके सैनिक समुद्र, पहाड़, जंगल और दुश्मन के इलाके में सीक्रेट ऑपरेशन चलाने के लिए ट्रेंड होते हैं। इसमें चयन इतना मुश्किल है कि बहुत कम सैनिक इसे पूरा कर पाते हैं।

निर्मल पूर्जा ब्रिटेन की एलीट स्पेशल फोर्स SBS में टियर-1 ऑपरेटर रहे।

निर्मल पूर्जा ब्रिटेन की एलीट स्पेशल फोर्स SBS में टियर-1 ऑपरेटर रहे।

सपने को पूरा करने के लिए नौकरी छोड़ दी

सेना में रहते हुए निर्मल पुर्जा ने अत्यधिक ठंडे और मुश्किल इलाकों में कई स्पेशल ऑपरेशन में हिस्सा लिया। इसी दौरान उनके मन में दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने का ख्याल आया

साल 2012 में निर्मल पुर्जा पहली बार एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक पर गए थे। उस समय वे सेना में थे तभी उनके मन में एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने का ख्याल आया। इसके लिए उन्होंने ट्रेनिंग शुरू की।

करीब दो साल की मेहनत के बाद 2014 में उन्होंने पहली बार माउंट एवरेस्ट फतह किया। इसके बाद उन्होंने दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी चोटियों पर चढ़ने का लक्ष्य बना लिया।

अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने 2018 में नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह पर्वतारोहण पर फोकस किया।

इसमें सबसे बड़ी चुनौती पैसों की थी। खर्च जुटाने के लिए उन्होंने अपना घर तक बेच दिया, ताकि दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ने का सपना पूरा कर सकें।

निर्मल पुर्जा ने मई 2019 को माउंट एवरेस्ट की चोटी पर चढ़े थे।

निर्मल पुर्जा ने मई 2019 को माउंट एवरेस्ट की चोटी पर चढ़े थे।

नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री से दुनियाभर में मिली पहचान

2019 में छह महीने और छह दिन में दुनिया की 14 सबसे ऊंची चोटियां फतह करने के बाद निर्मल पुर्जा की कहानी पूरी दुनिया तक पहुंची। उनके इस रिकॉर्ड अभियान पर नेटफ्लिक्स ने ’14 पीक्स: नथिंग इज इम्पॉसिबल’ नाम से डॉक्यूमेंट्री बनाई।

इस डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया कि कैसे निर्मल पुर्जा और उनकी नेपाली टीम ने बेहद कम समय में दुनिया की सबसे कठिन चोटियों को फतह किया। इसमें उनके सामने आई खराब मौसम की चुनौतियां, मौत का खतरा, ऑक्सीजन की कमी और कई जानलेवा हालात भी दिखाए गए हैं।

डॉक्यूमेंट्री रिलीज होने के बाद इसे 191 देशों में देखा गया। इसके जरिए नेपाली पर्वतारोहियों के योगदान पर पूरी दुनिया का ध्यान गया। इससे पहले पर्वतारोहण की बड़ी उपलब्धियों में अक्सर विदेशी पर्वतारोहियों की चर्चा होती थी, जबकि नेपाली शेरपाओं और पर्वतारोहियों की भूमिका उतनी सामने नहीं आ पाती थी।

इसके बाद 2020 में निर्मल पुर्जा ने ‘बियॉन्ड पॉसिबल’ नाम से अपनी आत्मकथा भी प्रकाशित की। इस किताब में उन्होंने अपने बचपन, सैन्य जीवन, पर्वतारोहण की शुरुआत, ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ और विश्व रिकॉर्ड बनाने तक के पूरे सफर को विस्तार से बताया है।

रिकॉर्ड की परवाह किए बिना पर्वतारोही का रेस्क्यू किया

निर्मल पुर्जा ने प्रोजेक्ट पॉसिबल के तहत अन्नपूर्णा-1 पर सफल चढ़ाई की। लौटे तो पता चला कि मलेशिया के डॉ. वुई किन चिन अन्नपूर्णा पर करीब 7500 फीट की ऊंचाई पर फंसे हुए हैं।

पुर्जा रिकॉर्ड की परवाह किए बगैर हेलिकॉप्टर से ऊंचाई वाले कैंप तक पहुंचे। रेस्क्यू शुरू किया। उनकी टीम करीब 4 घंटे में डॉ. चिन तक पहुंच गई। सामान्य रूप से यह दूरी करीब 16 घंटे में पूरी होती है। डॉ. चिन को नीचे लाया गया, हालांकि बाद में सिंगापुर के अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

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छत्तीसगढ़

कश्मीर में छत्तीसगढ़ के हिंदू मजदूरों की नाम पूछकर हत्या:लश्कर आतंकी लतीफ पर शक, अनंतनाग में कॉन्स्टेबल की हत्या में भी इसका नाम आया था

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श्रीनगर/रायपुर। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में 2 हिंदू मजदूरों की हत्या आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट के आतंकियों ने की है। यह जानकारी खुफिया सूत्रों ने दी है। ये फ्रंट लश्कर ए तैयबा से जुड़ा है।

सूत्रों ने बताया कि इस वारदात को अंजाम आतंकी मोहम्मद लतीफ ने दिया है। इसी ने 22 जुलाई को अनंतनाग में हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की लाल चौक इलाके में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी।

शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे कुलगाम के केलाम में आतंकियों ने ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे 2 हिंदू मजदूरों को नाम पूछकर गोली मार दी। पुलिस को यह जानकारी मौके पर मौजूद दूसरे मजदूरों ने दी। दोनों मृतक छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे।

ये हत्याएं पहलगाम जैसे पैटर्न पर की गई। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। इसमें आतंकियों ने 26 पर्यटकों को उनका धर्म पूछकर मार दिया था।

लतीफ मोटरसाइकिल पर पहुंचा था

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लतीफ और उसका साथी मोटरसाइकिल पर प्रवासी मजदूरों के पास पहुंचा था। इन्होंने पहचान पत्र चेक किए और बहुत करीब से गोलीबारी की। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्होंने 10-12 राउंड फायर की आवाज सुनी।

एजेंसियों के अनुसार, लतीफ ने यह हमला इसलिए किया, ताकि वह यह संदेश दे सके कि उसका मॉड्यूल अब भी एक्टिव है और आतंकी हमले करने में सक्षम है।

खुफिया सूत्रों का मानना है कि इस गोलीबारी की साजिश सीमा पार बैठे लश्कर के हैंडलर्स ने रची। शक मुख्य रूप से सज्जाद जट्ट / सैफुल्ला पर है, जो पाकिस्तान में रहने वाला जैश का सीनियर हैंडलर है।

बीते दो-तीन साल में कश्मीर के ईंट-भट्ठों पर ऐसे ही आतंकी हमले हुए थे, जिसके बाद पुलिस ने यहां CCTV कैमरे लगाने का निर्देश दिया था। इस ईंट भट्ठे पर भी CCTV कैमरे लगे थे, जिसके फुटेज की पड़ताल की जा रही है। इस पूरे इलाके में 20 से ज्यादा ईंट भट्ठे हैं।

यह फोटो आतंकी मोहम्मद लतीफ की है।

यह फोटो आतंकी मोहम्मद लतीफ की है।

आतंकी हमले के बाद के हालात, 3 तस्वीरें…

घायल मजदूर को पहले अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां से उसे श्रीनगर रैफर किया गया, जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

घायल मजदूर को पहले अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां से उसे श्रीनगर रैफर किया गया, जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

शनिवार सुबह कुलगाम में सुरक्षा बढ़ा दी गई। लोगों से पूछताछ की जा रही है।

शनिवार सुबह कुलगाम में सुरक्षा बढ़ा दी गई। लोगों से पूछताछ की जा रही है।

पुलिस और सेना के जवानों की गाड़ियां पूरे इलाके की छानबीन कर रही हैं।

पुलिस और सेना के जवानों की गाड़ियां पूरे इलाके की छानबीन कर रही हैं।

यूपी-बिहार समेत 6 राज्यों से आते हैं सबसे ज्यादा मजदूर

करीब 3–5 लाख प्रवासी मजदूर हर साल मौसमी या अस्थायी काम के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचते हैं। इनमें सबसे ज्यादा मजदूर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ से आते हैं। ये कंस्ट्रक्शन, ईंट-भट्ठों, सड़क परियोजनाओं, बागवानी, कृषि, होटल-पर्यटन और छोटे उद्योगों में काम करते हैं।

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खेल

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को 10वां गोल्ड:प्रीति, जैस्मिन, साक्षी के बाद प्रिया बॉक्सिंग चैंपियन, सोमन ने पैरा शॉटपुट जीता, अब तक 33 मेडल

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ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने 10वां गोल्ड मेडल जीत लिया है। जैस्मिन लांबोरिया (57 KG), प्रीति पवार (54 KG) और साक्षी चौधरी (51 KG) के बाद प्रिया घंघास (60 kg) ने विमेंस बॉक्सिंग का फाइनल जीता। इसके अलावा, सोमन राणा ने पैरा शॉटपुट की F57 कैटेगरी में गोल्ड जीता।

जैस्मिन ने फाइनल में नॉर्दर्न आयरलैंड की मिकाएला वॉल्स और प्रीति ने कनाडा की सवाना डोलमागो को हराया। साक्षी ने विमेंस 51 किग्रा वेट कैटेगरी में इंग्लैंड की रूबी वाइट को 5-0 से हराया। वहीं, मेंस 55 KG कैटेगरी में जादुमणि सिंह को सिल्वर मिला। वे ऑस्ट्रेलिया के जाई डिकस्न से फाइनल हार गए।

भारत के 10 गोल्ड सहित कुल 33 मेडल हो गए हैं। भारत मेडल टैली में 5वें स्थान पर पहुंच गया है।

दैनिक भास्कर कार्टूनिस्ट मंसूर नकवी की नजर से मेडल सेरेमनी…

साक्षी चौधरी ने बॉक्सिंग में जीता गोल्ड मेडल महिलाओं के 51 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में भारत की साक्षी चौधरी ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने पूरे मुकाबले में दबदबा बनाए रखा और यूनानिमस डिसीजन 5-0 से जीत हासिल की। साक्षी ने मुकाबले के दौरान बेहतरीन रणनीति अपनाई। उन्होंने बाएं हाथ से प्रतिद्वंद्वी के पंचों को रोका और दाएं हाथ से लगातार सटीक जवाबी हमले किए। उनके कई पंच सीधे प्रतिद्वंद्वी के चेहरे पर लगे, जिससे मुकाबले में उनकी पकड़ मजबूत होती गई।

प्रिया घंघास का मैच जारी

भारत के 6 और मुक्केबाज गोल्ड मेडल के लिए फाइनल में उतरेंगे। रात 9:15 बजे प्रिया घंघास (60 KG), 9:30 बजे अरुंधति चौधरी (70 KG), 10:15 बजे लवलीना बोरगोहेन (75 KG), 10:45 बजे सचिन सिवाच (60 KG), 11:15 बजे अंकुश पंघाल (80 KG) और 11:45 बजे नरेंद्र बरवाल (90+ KG) अपने-अपने फाइनल मुकाबले खेलेंगे।

उन्नति शर्मा ने जूडो में जीता ब्रॉन्ज मेडल महिलाओं के 63 किलोग्राम वर्ग में भारत की उन्नति शर्मा ने दक्षिण अफ्रीका की स्काई नोस्टर को हराकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। उन्नति ने मुकाबला महज 1 मिनट 7 सेकेंड में इप्पोन के जरिए जीत लिया। मुकाबले की शुरुआत से ही उन्नति आक्रामक नजर आईं। उन्होंने सही मौके का फायदा उठाते हुए प्रतिद्वंद्वी का संतुलन बिगाड़ा और उन्हें पीठ के बल गिरा दिया। इस शानदार मूव पर उन्हें इप्पोन मिला, जो जूडो में एक ही दांव पर मिलने वाला सर्वोच्च स्कोर होता है। उन्नति ने पूरे मुकाबले में कोई शिडो या युको नहीं गंवाया और एक ही निर्णायक दांव के दम पर जीत हासिल कर ली। जीत के साथ ही उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए एक और पदक सुनिश्चित किया।

सोमन ने सीजन बेस्ट थ्रो के साथ गोल्ड जीता, शुभम को सिल्वर

पैरा शॉट पुट इवेंट की F-57 कैटेगरी में भारत के सोमन राणा ने सीजन बेस्ट थ्रो के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। एक अन्य भारतीयय शुभम जुयाल ने सिल्वर पाया।

सोमन राणा ने 13.40 मीटर गोला फेंका। शुभम जुयाल ने 13.28 मीटर थ्रो किया। F-57 कैटेगरी में वे खिलाड़ी आते हैं, जिनके कम के नीचे के अंग (पैरों) कमजोर होते हैं। लेकिन उनके ऊपरी शरीर (धड़ और हाथ) की ताकत पूरी तरह सामान्य होती है।

ट्रिपल जंप में भारत के दो और मेडल

भारत ने पुरुष ट्रिपल जंप में दो और मेडल जीत लिए हैं। प्रवीण चित्रावेल ने 16.58 मीटर के जंप अटैम्प्ट के साथ सिल्वर अपने नाम किया। वहीं, भारत के ही सेल्वा प्रभु ने 16.52 के बेस्ट अटैम्प्ट के साथ ब्रॉन्ज जीता। इस इवेंट का गोल्ड जाम्बिया के जॉर्डन स्कॉट ने जीता। उनका बेस्ट अटैम्प्ट 16.72 मीटर का रहा।

प्रीति पेरिस ओलिंपिक में हिस्सा ले चुकीं

हरियाणा की बॉक्सर प्रीति ने 2022 एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज और 2023 एशियन गेम्स में भी ब्रॉन्ज मेडल जीता। प्रीति 2024 पेरिस ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। 2026 एशियन चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता, जबकि 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में भी गोल्ड अपने नाम किया। प्रीति की ट्रेनिंग NS NIS पटियाला में होती है।

जैस्मिन ने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज जीता था

हरियाणा की बॉक्सर जैस्मिन लांबोरिया 57 KG कैटेगरी में फिलहाल इस वर्ग में दुनिया की नंबर-1 बॉक्सर हैं। उन्होंने 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप और वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में गोल्ड जीता है। जैस्मिन 2024 पेरिस ओलिंपिक में भारत के लिए खेल चुकी हैं और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं।

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