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छत्तीसगढ़

पं. प्रदीप मिश्रा की कथा में पेमेंट को लेकर बवाल:टेंट संचालक उखाड़ने लगा डोम, बोला- 1.15 करोड़ में डील हुई, 25-30 लाख ही मिले

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दुर्ग-भिलाई,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के नगपुरा गांव में कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा चल रही है। 1.15 करोड़ रुपए में टेंट-डोम लगाने की डील हुई थी, लेकिन समिति ने 25-30 लाख रुपए ही दिए। आयोजन समिति और टेंट हाउस संचालक के बीच पैसों को लेकर विवाद हो गया।

टेंट संचालक ने पंडाल उखाड़ने की कोशिश की। एएसपी पद्मश्री, हेम प्रकाश नायक ने कहा कि, कथा शुरू होने के बाद किसी भी हालत में टेंट नहीं हटाया जाएगा। टेंट हटाने से भगदड़ जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है। दोनों पक्षों को समझाइश भी दी। कथा अभी जारी है।

घटना स्थल की तस्वीरें…

1.15 करोड़ रुपए में टेंट-डोम लगाने की बात हुई थी, लेकिन समिति की तरफ से अभी तक 25-30 लाख रुपए ही दिया गया है।

1.15 करोड़ रुपए में टेंट-डोम लगाने की बात हुई थी, लेकिन समिति की तरफ से अभी तक 25-30 लाख रुपए ही दिया गया है।

शनिवार को आयोजन समिति और टेंट हाउस संचालक के बीच पैसों को लेकर विवाद हो गया।

शनिवार को आयोजन समिति और टेंट हाउस संचालक के बीच पैसों को लेकर विवाद हो गया।

नगपुरा के पूर्व सरपंच भूपेंद्र रिगरी ने कहा कि, टेंट संचालक नरेंद्र को समय-समय पर भुगतान किया जा रहा है।

नगपुरा के पूर्व सरपंच भूपेंद्र रिगरी ने कहा कि, टेंट संचालक नरेंद्र को समय-समय पर भुगतान किया जा रहा है।

क्या है पूरा विवाद ?

दरअसल, शिव महापुराण कथा 17 से 21 दिसंबर तक नागपुर में हो रही है, जिसमें रोजाना हजारों भक्त आ रहे हैं। आयोजन समिति और टेंट हाउस संचालक के बीच रोजाना रात में पैसों को लेकर विवाद की स्थिति बन रही है।

शुक्रवार की रात भी इसी तरह डोम उखाड़ने को लेकर बात हुई। बाद में इसे किसी तरह रोक लिया गया। वहीं, शनिवार को सुबह से ही समिति और टेंट हाउस संचालक के बीच पैसों को लेकर फिर विवाद हुआ। इसके बाद टेंट हाउस वाले डोम उखाड़ने पहुंच गए।

टेंट हाउस वाले डोम उखाड़ने पहुंच गए थे। विवाद सुलझ गया है।

टेंट हाउस वाले डोम उखाड़ने पहुंच गए थे। विवाद सुलझ गया है।

विवाद के कारण उखाड़ रहे थे टेंट- संचालक

नगपुरा के कर्मा टेंट हाउस के संचालक नरेंद्र कुमार साहू ने बताया कि सवा करोड़ रुपए में काम की बातचीत हुई थी, लेकिन आयोजन समिति की ओर से रोजाना 2 से 3 लाख रुपए का भुगतान किया जा रहा है।अब तक उन्हें 25 से 30 लाख रुपए ही मिले हैं।

टेंट संचालक ने बताया कि भुगतान की दिक्कत के चलते ट्रांसपोर्ट का खर्च भी नहीं निकल पा रहा था, इसलिए टेंट को करीब 15 प्रतिशत छोटा कर दिया गया है। अब समिति से बातचीत हो गई है और विवाद सुलझ गया है। बाकी भुगतान शाम 4 से 5 बजे तक देने की बात कही गई है।

यह शिव महापुराण कथा 17 से 21 दिसंबर तक नागपुर में हो रही है, जिसमें रोज़ाना हजारों भक्त आ रहे हैं।

यह शिव महापुराण कथा 17 से 21 दिसंबर तक नागपुर में हो रही है, जिसमें रोज़ाना हजारों भक्त आ रहे हैं।

छोटी-मोटी बात होती रहती है- आयोजन समिति

वहीं आयोजन समिति की सदस्य प्रिया साहू ने विवाद को मामूली बताते हुए कहा कि, बड़े आयोजनों में व्यवस्थाओं को लेकर छोटी-मोटी बातें हो जाती हैं। पंडाल उखाड़ने जैसी कोई बात नहीं है और कथा का आयोजन सुचारू रूप से चल रहा है।

पूर्व सरपंच बोले- समय-समय पर कर रहे भुगतान

आयोजन समिति के पदाधिकारी और नगपुरा के पूर्व सरपंच भूपेंद्र रिगरी ने कहा कि टेंट लगाने वाले नरेंद्र को रेगुलर पेमेंट किया जा रहा है। हालांकि कोई लिखित डॉक्यूमेंटेशन नहीं है, लेकिन टेंट हटाने का कोई सवाल ही नहीं उठता। विवाद को सुलझाया जा रहा है।

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छत्तीसगढ़

IPS रतनलाल डांगी केस…जांच अधिकारी बदलने का प्रस्ताव:दीपांशु काबरा और प्रशांत अग्रवाल को जिम्मेदारी देने की तैयारी, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दी जानकारी

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सस्पेंडेड IPS रतन लाल डांगी से जुड़े यौन शोषण मामले में हाईकोर्ट में याचिका के बाद पुलिस विभाग ने जांच अधिकारी बदलने का प्रस्ताव भेजा है। DGP की ओर से गृह सचिव को भेजे गए प्रस्ताव में IPS दीपांशु काबरा को नया जांच अधिकारी और IPS प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाने की जानकारी हाईकोर्ट में दी गई है।

इस मामले में आरोप लगाने वाली SI की पत्नी पीड़िता ने प्राथमिक जांच में पक्षपात का आरोप लगाते हुए रतन लाल डांगी को बचाने की कोशिश किए जाने का आरोप लगाया था। अब मामले में हाईकोर्ट की निगरानी में आगे की कार्रवाई होगी। पीड़िता के वकील अभिषेक पांडेय ने बताया कि, मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

सस्पेंडेड IPS रतन लाल डांगी।

सस्पेंडेड IPS रतन लाल डांगी।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, रतन लाल डांगी से जुड़े इस मामले में पीड़िता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में प्राथमिक जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया था कि, जांच के दौरान उसका पक्ष ठीक से नहीं सुना गया और आरोपी अधिकारी को बचाने की कोशिश की गई। पीड़िता ने निष्पक्ष जांच के लिए जांच अधिकारी बदलने की मांग की थी।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग से जांच की स्थिति और कार्रवाई को लेकर जानकारी मांगी गई। अब विभाग ने जांच अधिकारी बदलने का प्रस्ताव गृह सचिव को भेजने की जानकारी अदालत में दी है।

इसलिए जांच अधिकारियों को हटाने की मांग की थी

याचिका में कहा गया था कि, शिकायत की जांच के लिए तत्कालीन IG आनंद छाबड़ा और तत्कालीन DIG मिलना कुर्रे को जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्हें इन दोनों अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है।

उनका कहना था कि एक अधिकारी आरोपी के बराबर रैंक के थे, जबकि दूसरी अधिकारी उनसे जूनियर थीं। इसी वजह से उन्होंने दोनों को जांच से हटाकर किसी सीनियर IAS अधिकारी (खासकर महिला IAS अधिकारी) से जांच कराने की मांग की थी।

DGP ने भेजा प्रस्ताव

पुलिस विभाग की ओर से हाईकोर्ट में बताया गया कि, DGP ने गृह सचिव को जांच अधिकारी बदलने का प्रस्ताव भेजा है। इसमें IPS दीपांशु काबरा को नया जांच अधिकारी बनाए जाने का प्रस्ताव है। वहीं IPS प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाए जाने की बात कही गई है। प्रस्ताव पर सक्षम स्तर से अंतिम निर्णय के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

हाईकोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ेगी जांच

जांच अधिकारी बदलने के प्रस्ताव के बाद अब पूरे मामले की आगे की कार्रवाई हाईकोर्ट की निगरानी में होने की स्थिति बन गई है। अगली सुनवाई में विभाग की ओर से जांच अधिकारी बदलने की प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई की स्थिति कोर्ट के सामने रखी जा सकती है।

पुलिस विभाग के इस कदम को पीड़िता की ओर से जांच में पक्षपात के लगाए गए आरोपों के बाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, पीड़िता की ओर से लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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छत्तीसगढ़

ढाई घंटे तक रॉड-डंडे से पीट-पीटकर सरपंच की हत्या:महिला से अफेयर था, परिवार वालों ने ही मारा, आग जलाकर बैठे रहे, 7 अरेस्ट

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कोंडागांव, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में एक सरपंच की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मोहपाल गांव के सरपंच मंगल सिंह मरकाम (56) का एक महिला से अफेयर था। जब यह बात महिला के पति को पता चली तो परिवार के 7 सदस्यों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया।

29 सितंबर को सरपंच घर लौट रहे थे, तभी जंगल में छिपकर बैठे आरोपियों ने उसे पकड़कर लोहे की रॉड और डंडे से पीटा। हाथ बांधकर थप्पड़ मारे और चप्पल भी बरसाए। आरोपियों ने करीब ढाई घंटे तक सरपंच को पीटा।

अधमरी हालत में उसे 60 मीटर दूर ले जाकर कंबल से ढंक दिया। रातभर आग जलाकर आरोपी वहीं बैठे रहे और सुबह भाग निकले। पुलिस मामला बड़ेडोंगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, सभी एक ही परिवार के हैं।

सरपंच का शव गांव के तालाब के पास मिला, जिस पर चोट के निशान थे।

सरपंच का शव गांव के तालाब के पास मिला, जिस पर चोट के निशान थे।

खेत के किनारे रॉड और डंडे भी पड़े मिले।

खेत के किनारे रॉड और डंडे भी पड़े मिले।

पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, सभी एक ही परिवार के हैं।

पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, सभी एक ही परिवार के हैं।

जानकारी के अनुसार, ग्राम मोहपाल के सरपंच मंगल सिंह मरकाम (56) का शव 30 सितंबर की सुबह गांव के तालाब के पास मिला था। सरपंच के शरीर पर चोट के निशान थे।

परिवार वालों ने बताया कि मंगल सिंह 29 सितंबर की शाम करीब 6 बजे घर से यह कहकर निकले थे कि वे पंचायत कार्यालय जा रहे हैं। देर रात तक उनके वापस नहीं लौटने पर परिवार को लगा कि वे गांव में मौजूद दूसरे घर में रुक गए होंगे।

अगले दिन सुबह तालाब के पास मंगल सिंह के संदिग्ध हालत में पड़े होने की सूचना मिली। परिजन मौके पर पहुंचे और उन्हें फरसगांव अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

50 मीटर दूर मिली बाइक, खेत किनारे रॉड और डंडे

वहीं, घटनास्थल से करीब 50 मीटर की दूरी पर मंगल सिंह की बाइक मिली। वहीं खेत के किनारे रॉड और डंडे पड़े मिले। घटनास्थल पर खून के निशान और संघर्ष के संकेत मिलने के बाद परिजनों ने उनकी हत्या की आशंका जताई थी।

घटनास्थल से करीब 50 मीटर दूर सरपंच की बाइक मिली थी।

घटनास्थल से करीब 50 मीटर दूर सरपंच की बाइक मिली थी।

सूचना मिलते ही पुलिस ने शुरू की जांच

30 सितंबर की सुबह करीब 8:30 बजे सीएचसी फरसगांव से बड़ेडोंगर पुलिस को घटना की सूचना मिली। इसके बाद जांच शुरू की गई। एफएसएल टीम, साइबर टीम, बड़ेडोंगर थाना और रक्षित केंद्र की टीम को घटनास्थल मौके पर पहुंची।

सरपंच का महिला से था अफेयर

पुलिस की पूछताछ में पता चला कि सरपंच का एक महिला से अफेयर था। इसी बात को लेकर महिला के परिवार वाले सरपंच से नाराज थे, जिसके बाद उसे मारने की प्लानिंग की। पुलिस ने संदेही मिट्ठू राम नेताम से पूछताछ की जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

ढाई घंटे तक बेदम पीटा

29 सितंबर को सरपंच के गांव आने की जानकारी मिलने पर सभी आरोपी पगडंडी के रास्ते और नदी किनारे जंगल में छिपकर बैठ गए। जैसे ही सरपंच वहां पहुंचा, आरोपियों ने उसे पकड़ लिया और हाथ, थप्पड़, चप्पल, डंडे और लोहे के रॉड से मारपीट की। आरोपियों ने सरपंच को ढाई घंटे तक बेदम पीटा।

पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।

पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।

अधमरा कर कंबल से ढका, रातभर बैठे रहे

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सरपंच के हाथ बांध दिए और उसके साथ फिर मारपीट की। अधमरा कर उसे घटनास्थल से करीब 60 मीटर दूर ले जाकर कंबल से ढंक दिया। आरोपी सड़क किनारे आग जलाकर रातभर वहीं मौजूद रहे। सुबह करीब 5 से 5:30 बजे के बीच सभी आरोपी वहां से फरार हो गए।

इधर, 30 सितंबर की सुबह जब परिजनों को तालाब के पास सरपंच मंगल सिंह के संदिग्ध हालत में पड़े होने की सूचना मिली। परिजन मौके पर पहुंचे और सरपंच को घायल हालत में फरसगांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। जांच के बाद डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।

आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज

इस मामले में बड़ेडोंगर थाने में अपराध क्रमांक 22/2026 के तहत बीएनएस की धारा 103(1) में केस दर्ज किया गया है। जांच के दौरान धारा 61(2)(क) और 191(2) बीएनएस भी जोड़ी गई है।

पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। आरोपियों के घर से डंडा और लोहे का रॉड बरामद किया गया।

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छत्तीसगढ़

माओवादियों से लड़ने वाले DRG जवान सीख रहे कंप्यूटर:सुकमा में साइबर पुलिसिंग,CCTNS और डिजिटल ट्रेनिंग के लिए 50 जवानों को किया जा रहा प्रशिक्षित

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सुकमा, एजेंसी। सुकमा जिन हाथों ने कभी घने जंगलों में माओवादियों के खिलाफ मोर्चा संभाला, अब वही हाथ कंप्यूटर के की-बोर्ड पर पुलिसिंग की नई तकनीक सीख रहे हैं। सुकमा पुलिस ने माओवादी विरोधी अभियानों में तैनात रहने वाले डीआरजी (District Reserve Guard) के 50 जवानों को आधुनिक और डिजिटल पुलिसिंग के लिए तैयार करना शुरू किया है।

पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रोहित शाह और मनोज तिर्की के मार्गदर्शन में जवानों को साइबर शाखा, CCTNS और पुलिस कार्यालयों में भेजकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

जंगल से दफ्तर तक बदली जिम्मेदारी

सुकमा में डीआरजी जवान लंबे समय से माओवादी विरोधी अभियानों में अग्रिम भूमिका निभाते रहे हैं। कठिन जंगलों और दुर्गम इलाकों में ऑपरेशन करने वाले इन जवानों का काम अब केवल अभियान तक सीमित नहीं रखा जा रहा है।

पुलिसिंग में तकनीक की बढ़ती भूमिका को देखते हुए जवानों को सामान्य कानून-व्यवस्था, कार्यालयीन कामकाज और डिजिटल सिस्टम से भी जोड़ा जा रहा है। पुलिस विभाग का मकसद मैदानी अनुभव रखने वाले जवानों को तकनीकी रूप से भी सक्षम बनाना है।

CCTNS और साइबर शाखा में ले रहे प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान जवानों को कंप्यूटर का बेसिक संचालन, डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना और सुरक्षित रखना, कार्यालयीन कार्य तथा पुलिस विभाग में इस्तेमाल होने वाली तकनीकी प्रक्रियाएं सिखाई जा रही हैं।

इसके साथ ही जवान CCTNS और साइबर शाखा के कामकाज को भी करीब से समझ रहे हैं। प्रशिक्षण के जरिए उन्हें डिजिटल सिस्टम के इस्तेमाल और पुलिस के रोजमर्रा के तकनीकी कार्यों से परिचित कराया जा रहा है।

हर जवान को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने की तैयारी

सुकमा पुलिस की योजना चरणबद्ध तरीके से जिले के सभी जवानों को कंप्यूटर प्रशिक्षण देने की है। पुलिस का मानना है कि आधुनिक पुलिसिंग में मैदानी दक्षता के साथ तकनीकी ज्ञान भी जरूरी है। इससे जवान डिजिटल सिस्टम का बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगे और पुलिस के रोजमर्रा के कामकाज में तेजी और पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी।

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