Connect with us

विदेश

रूस ने यूक्रेन पर 700 हवाई हमले किए:गलती से अपने शहर पर गिराया 1000kg का बम, जंग रोकने US-यूक्रेन बातचीत बेनतीजा

Published

on

कीव/ मास्को,एजेंसी। यूक्रेन में आर्म्ड फोर्सेज डे से पहले रूस ने शनिवार को बड़े पैमाने पर हवाई हमला किया। यूक्रेन एयरफोर्स के मुताबिक रूस ने 29 ठिकानों पर 653 ड्रोन और 51 मिसाइल दागीं। इनमें से 585 ड्रोन और 30 मिसाइल मार गिराई गईं। इससे 8 लोग घायल हुए।

कई एनर्जी स्टेशन और रेलवे ढांचे को नुकसान पहुंचा। जापोरेजिया न्यूक्लियर पावर प्लांट कुछ समय के लिए ऑफ-साइट पावर से कट गया, हालांकि रिएक्टर बंद होने के कारण कोई बड़ा खतरा नहीं हुआ। रूस ने भी यूक्रेन पर हवाई हमले करने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने यूक्रेन पर हमले के दौरान गलती से अपने ही एक शहर बेल्गोरोड (यूक्रेन सीमा से करीब 40 किमी दूर) पर FAB-1000 (हाई-एक्सप्लोसिव बम) गिरा दिया। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

बम का कुल वजन लगभग 1000 किलो के करीब था। बम पूरी तरह फटा नहीं, लेकिन जमीन पर जोरदार धमाका हुआ और एक बहुत बड़ा गड्ढा बन गया।

रूस के बेल्गोरोड शहर में बम गिरने के बाद इलाके का जायजा लेते सुरक्षाकर्मी।

रूस के बेल्गोरोड शहर में बम गिरने के बाद इलाके का जायजा लेते सुरक्षाकर्मी।

हमले के बाद यूक्रेनी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच तीन दिनों की वार्ता बिना किसी सफलता के खत्म हो गई। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने ट्रम्प के शांति दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिकी राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुशनर के साथ फोन पर बातचीत की थी।

वहीं, यूरोपीय नेता सोमवार को लंदन में मिलने की तैयारी कर रहे हैं। इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अमेरिका की नीयत को लेकर आशंका जता चुके हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका, यूक्रेन को धोखा दे सकता है।

यूक्रेनी फायर पॉइंट की फ्लेमिंगो मिसाइलों का निरीक्षण करते सैन्यकर्मी।

यूक्रेनी फायर पॉइंट की फ्लेमिंगो मिसाइलों का निरीक्षण करते सैन्यकर्मी।

यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले बढ़ाए

रूस ने भी दावा किया कि उसने रातभर में 116 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। साथ ही यूक्रेन ने रूस के रयाजान तेल रिफाइनरी पर लंबी दूरी के ड्रोन से हमला किया।

यूक्रेनी सेना और रूसी क्षेत्रीय अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। पिछले कुछ महीनों से यूक्रेन रूस के तेल रिफाइनरियों पर लगातार हमले कर रहा है, ताकि रूस का तेल निर्यात आय कम हो।

रूस भारत जैसे देशों को बड़े पैमाने पर तेल बेचता है। यूक्रेन-अमेरिका का आरोप है कि रूस यहीं तेल बेचकर जंग के लिए हथियार और मिसाइल बनाता है।

जेलेंस्की बोले- रूस ने बिजली स्टेशन को निशाना बनाया

राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि हमले का टारगेट बिजली स्टेशन और ग्रिड से जुड़े ढांचे थे। हमलों के कारण कई क्षेत्रों में ब्लैकआउट हुए। फास्टिव (कीव के पास) में एक ड्रोन हमले ने रेलवे स्टेशन को पूरी तरह नष्ट कर दिया।

IAEA के अनुसार, जापोरेजिया प्लांट रात में कुछ समय के लिए बाहरी बिजली से कट गया। रिएक्टर बंद हैं, लेकिन ईंधन को ठंडा रखने के लिए पावर जरूरी है। प्लांट पर अभी भी रूसी सेना का कब्ज़ा है।

रूस ने अगस्त में यूक्रेन के कई रिहाइशी इलाकों पर हमले किए थे।

रूस ने अगस्त में यूक्रेन के कई रिहाइशी इलाकों पर हमले किए थे।

यूक्रेन-अमेरिका वार्ता बिना ठोस नतीजा खत्म

हमले के बाद यूक्रेनी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच तीन दिनों की वार्ता बिना किसी सफलता के समाप्त हो गई। ये वार्ताएं फ्लोरिडा में हो रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूत और सलाहकार स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर भी इसमें शामिल हैं।

जेलेंस्की ने कहा कि विटकॉफ और कुशनर से उन्होंने फोन पर बातचीत की। जेलेंस्की ने बातचीत को सकारात्मक बताया।

दोनों पक्षों ने सुरक्षा गारंटी के ढांचे पर सहमति जताई, लेकिन कोई ठोस समझौता अभी नहीं हुआ। जेलेंस्की ने कहा, “असली शांति तभी होगी, जब रूस गंभीरता दिखाएगा।”

रूस को हत्याएं बंद करनी होगी

अमेरिकी और यूक्रेनी पक्ष ने कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए रूस को हत्याएं बंद करनी होगी और डी-एस्केलेशन के कदम उठाने होंगे। अभी तक रूस ने कोई बड़ी रियायत नहीं दी है और लगातार बड़े हमले कर रहा है।

जेलेंस्की ने बताया कि जंग कैसे खत्म किया जाए इस पर बात हुई, संभावित समझौतों पर भी चर्चा हुई। साथ ही जेलेंस्की ने बताया कि वह अमेरिका के साथ काम करना जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

यूरोपीय नेता सोमवार को लंदन में मिलेंगे

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सोमवार को लंदन में मिलने की तैयारी कर रहे हैं।

ये चारों नेता यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी और अमेरिका के नेतृत्व वाली शांति प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे।

राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जैरेड कुशनर से बात की।

राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जैरेड कुशनर से बात की।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति बोले- रूस शांति नहीं चाहता

मैक्रों ने रूसी हमलों की कड़ी निंदा की और कहा, ‘रूस शांति नहीं चाहता, वह लगातार उकसावे वाली कार्रवाई कर रहा है। हमें रूस पर और दबाव डालना होगा, ताकि वह शांति के लिए मजबूर हो।’ मैक्रों ने जेलेंस्की से फोन पर बात कर एकजुटता जताई।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा कि यूक्रेन अपना भविष्य खुद तय करेगा और शांति सेना यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी देने में अहम भूमिका निभाएगी। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पहले ही कह दिया है कि यूक्रेन में तैनात कोई भी विदेशी सैनिक हमले का शिकार हो सकते हैं।

मैक्रों बोले थे- अमेरिका यूक्रेन को मजबूर कर सकता है

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका, यूक्रेन को धोखा दे सकता है। जर्मन अखबार डेर श्पीगल के मुताबिक 1 दिसंबर को यूरोपीय नेताओं की एक सीक्रेट वीडियो कॉल लीक हो गई थी।

इसमें जर्मनी के चांसलर फेडरिक मर्ज, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब, नाटो के महासचिव मार्क रूटे, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की शामिल थे।

इस दौरान मैक्रों ने शक जताया था कि अमेरिका बिना मजबूत सुरक्षा गारंटी दिए यूक्रेन को क्षेत्र छोड़ने के लिए मजबूर कर सकता है। इस कॉल की रिकॉर्डिंग अखबार के पास पहुंची थी।

नेताओं ने साफ कहा कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दो खास लोगों अमेरिकी राजदूत स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर पर जरा भी भरोसा नहीं है।

जर्मनी के चांसलर मर्ज ने जेलेंस्की से कहा, ‘आने वाले दिनों में बहुत सावधान रहिए, आपके साथ और हमारे साथ खेल खेला जा रहा है।’ फिनलैंड के राष्ट्रपति स्टब और नाटो चीफ रूटे ने भी यही बात दोहराई कि जेलेंस्की को इन दोनों अमेरिकियों के साथ अकेला नहीं छोड़ा जा सकता।

यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय ने इस पूरी खबर को झूठी और गलत जानकारी बताया।

ट्रम्प, जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं ने 18 अगस्त को अमेरिका में बैठक की थी।

ट्रम्प, जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं ने 18 अगस्त को अमेरिका में बैठक की थी।

पुतिन बोले थे- हम यूरोप से जंग के लिए तैयार

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने मंगलवार को यूरोपीय देशों को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि अगर यूरोप ने रूस के खिलाफ युद्ध शुरू किया, तो रूस पूरी तरह से जवाब देने के लिए तैयार है।

पुतिन ने कहा कि रूस यूरोप से युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर यूरोप युद्ध शुरू करता है तो मामला इतना जल्दी खत्म होगा कि बातचीत करने वाला कोई नहीं बचेगा।

पुतिन ने दावा किया कि यूक्रेन में रूस पूरी तरह युद्ध नहीं लड़ रहा है, बल्कि सर्जिकल ऑपरेशन जैसी सीमित कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर यूरोप के साथ सीधा युद्ध हुआ तो हालात अलग होंगे और रूस पूरी ताकत से जवाब देगा।

​​​​​​2022 से जारी रूस-यूक्रेन जंग

रूस-यूक्रेन जंग फरवरी, 2022 में शुरू हुआ था। दोनों देशों के बीच जंग की बड़ी वजह रूस का यूक्रेनी जमीन पर कब्जा है।

रूस ने यूक्रेन के लगभग 20% क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है। युद्ध के कारण हजारों नागरिक और सैनिक मारे गए हैं और लाखों यूक्रेनियन विस्थापित हुए हैं। जून 2023 तक, करीब 80 लाख यूक्रेनी लोग देश छोड़कर भाग चुके हैं।

ट्रम्प ने युद्ध को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के नेताओं के साथ बैठक की थी। हाल ही में, उन्होंने पुतिन के साथ अलास्का में बैठक की, जो 80 वर्षों में किसी रूसी नेता की पहली अलास्का यात्रा थी।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

देश

अपराधी एपस्टीन और मंत्री हरदीप पुरी की फोटो वायरल:मंत्री ने कहा था- कभी अकेले नहीं मिला; कांग्रेस का सवाल- फिर तस्वारें कहां से आईं

Published

on

नई दिल्ली, एजेंसी। अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की कई तस्वीरें वायरल हैं। ये तस्वीरे इसलिए अहम मानी जा रही हैं, क्योंकि पुरी लगातार कहते रहे हैं वे एपस्टीन से केवल प्रतिनिधिमंडल के साथ मिले, अलग से कभी मुलाकात नहीं हुई।

तस्वीरें सामने आने के बाद कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा- जब पुरी ने कहा था कि वे एपस्टीन से कभी अकेले नहीं मिले, तो इन तस्वीरों के क्या मायने हैं?

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा- पुरी कहते थे कि वे एपस्टीन से तीन-चार बार डेलिगेशन के साथ मिले थे, दोनों तस्वीरों में बाकी सदस्य कहां थे।

दैनिक भास्कर ने ऑनलाइन तस्वीर को रिवर्स सर्च किया, तो अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की साइट पर यह फोटो मिला।

इन तस्वीरों को जस्टिस डिपार्टमेंट की तरफ जारी जारी दस्तावेजों के नौवें सेट में रखा गया था। इस सेट में कम से कम 11 तस्वीरें हैं। मंगलवार को यह तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा में आई।

इन तस्वीरों में दोनों लगभग एक ही स्थिति में बैठे दिखाई देते हैं। तस्वीरों के कोण में मामूली अंतर है।

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की वेबसाइट का लिंक- https://www.justice.gov/epstein/files/DataSet%209/EFTA01191294.pdf

राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया था

इस साल फरवरी में हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में राहुल गांधी की ओर से एपस्टीन फाइलों को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया था।

पुरी ने बताया था कि वह संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत का पद छोड़ने के बाद और 2017 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने से पहले एपस्टीन से मिले थे। उन्होंने इन मुलाकातों को पूरी तरह पेशेवर बताया था और कहा था कि उनका एपस्टीन के खिलाफ लगे आपराधिक आरोपों से कोई संबंध नहीं था।

पुरी ने फरवरी में एक इंटरव्यू में कहा था कि वह इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूशन (IPI) से जुड़े एक डेलिगेशन के रूप में गए थे। उसी दौरान एपस्टीन से मिले। वे सार्वजनिक जीवन में कई तरह के लोगों से मिलते हैं, जिनमें से कुछ का आपराधिक रिकॉर्ड भी हो सकता है। पुरी के मुताबिक IPI में उनके बॉस टेर्जे रोड-लार्सन एपस्टीन को जानते थे।

पुरी ने कहा-

QuoteImage

पहली बार मुलाकात के दौरान मुझे नहीं पता था कि एपस्टीन कौन हैं। हमने उनके बारे में गूगल पर सर्च किया। फिर हमने आपस में भी चर्चा की कि हमें उनसे मिलना चाहिए या नहीं?QuoteImage

नवंबर 2025 में पहली बार सामने आया नाम

  • निगरानी समिति की ईमेल में जिक्र: हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन के संपर्क का मामला पहली बार नवंबर 2025 में सार्वजनिक चर्चा में आया था। उस समय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की निगरानी समिति की ओर से जारी एक ईमेल में एपस्टीन और पुरी के बीच की बातचीत का जिक्र हुआ था।
  • ईमेल कब के हैं: इसके बाद अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने 30 जनवरी को एपस्टीन से जुड़े लाखों पन्नों के दस्तावेज जारी किए थे। इनमें जून 2014 से जून 2017 के बीच के ईमेल शामिल हैं।
  • तीन मुलाकातों का जिक्र: ईमेल के मुताबिक पुरी 4 फरवरी 2015, 6 जनवरी 2016 और 19 मई 2017 को न्यूयॉर्क में एपस्टीन के घर गए थे।
  • एपस्टीन यौन अपराधी साबित हो चुका था: 2008 में एपस्टीन यौन अपराध के मामले में दोषी ठहराया जा चुका था। यानी पुरी की बताई गई मुलाकातें उस समय हुईं, जब एपस्टीन का आपराधिक रिकॉर्ड पहले से मौजूद था।
  • ‘एक्जॉटिक आइलैंड’ का जिक्र: एक ईमेल में पुरी ने एपस्टीन के ‘एक्जॉटिक आइलैंड’ यानी अनोखे द्वीप का जिक्र किया और उसे ‘हैव फन’ कहा, जिसका मतलब है ‘मौज करो’। पुरी ने बाद में कहा कि ‘हैव फन’ उनके बोलने का आम तरीका है।

हरदीप सिंह पुरी और एपस्टीन से जुड़ा ईमेल

यह ईमेल हरदीप सिंह पुरी ने 24 दिसंबर 2014 को जेफ्री एपस्टीन को भेजा था।

यह ईमेल हरदीप सिंह पुरी ने 24 दिसंबर 2014 को जेफ्री एपस्टीन को भेजा था।

इसमें लिखा है- प्रिय जेफ, त्योहारों की शुभकामनाएं। जब आप अपने द्वीप से वापस आएं, तो मुझे जरूर बताइएगा।मैं आपसे बातचीत करने के लिए मिलना चाहूंगा। साथ ही, भारत में रुचि जगाने के लिए आपको कुछ किताबें भी देना चाहूंगा।

करोड़पति फाइनेंसर था यौन अपराधी एपस्टीन

जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी।

उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया।

उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली।

उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है।

Continue Reading

विदेश

निजी स्कूल की अचानक छत ढहने से हाहाकार; 28 मासूमों व एक टीचर की मौत, मलबे में फंसे बच्चों की तलाश जारी

Published

on

पेशावर, एजेंसी। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर की दिर कॉलोनी में एक निजी स्कूल की छत गिरने से कई बच्चों की मौत हो गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। बचाव दल मलबा हटाकर उसमें दबे बच्चों और स्कूल कर्मचारियों को निकालने में जुटे हैं।  इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 28 बच्चों और एक शिक्षिका की मौत हो गई। तीन दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं।

 

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, कुछ घायलों की हालत गंभीर है।आपातकालीन सेवाओं के प्रवक्ता बिलाल फैजी ने बताया कि हादसे के बाद कई बच्चे मलबे के नीचे फंसे हुए थे। बचावकर्मी मलबा हटाकर उन तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। अस्पताल के प्रवक्ता मोहम्मद आसिम ने मृतकों और घायलों की जानकारी की पुष्टि की। 

अस्पताल के प्रवक्ता के मुताबिक, हादसे में मारे गए और घायल हुए सभी बच्चे 13 वर्ष या उससे कम उम्र के थे। घायलों को उपचार के लिए सरकारी लेडी रीडिंग अस्पताल पहुंचाया गया, जहां घायलों की संख्या और उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए आपातकाल घोषित कर दिया गया। चिकित्साकर्मी घायलों के इलाज में जुटे रहे। हादसे में मृतकों की अंतिम संख्या अभी स्पष्ट नहीं है और बचाव अभियान के दौरान इसमें बदलाव हो सकता है।

Continue Reading

देश

चीन ने लद्दाख की 28 जगहों को अपना बताया:भारत ने नाम बदले थे, इनमें गोगरा-हॉट स्प्रिंग, जहां 2020 में दोनों देशों की सेनाएं टकराईं

Published

on

बीजिंग/नई दिल्ली, एजेंसी। चीन ने लद्दाख की 28 जगहों पर अपना बताया है। चीन ने मंगलवार को इन जगहों के नाम तय करने के भारत के फैसले पर आपत्ति भी जताई। चीन ने कहा- ये इलाके हमारे हैं और भारत के नाम बदलने या नया नाम रखने से जमीन पर मालिकाना हक नहीं बदलेगा।

भारत ने 2 अक्टूबर को इन जगहों के नाम आधिकारिक तौर पर तय किए थे। इनमें गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे इलाके भी शामिल हैं, जहां 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव हुआ था।

चीन बोला- लद्दाख को भारत का UT नहीं मानते

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को कहा कि चीन लद्दाख को भारत की ओर से बनाया गया केंद्र शासित प्रदेश नहीं मानता। चीन ने भारत के इस कदम को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि सीमा के पश्चिमी हिस्से के ये इलाके उसके हैं।

माओ के मुताबिक, भारत के इस फैसले से सीमा के पश्चिमी हिस्से में उन इलाकों पर चीन का दावा नहीं बदल सकता, जिन्हें वह अपना क्षेत्र मानता है।

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को भारत के लद्दाख के इलाकों का नाम तय करने या बदलने का विरोध किया।

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को भारत के लद्दाख के इलाकों का नाम तय करने या बदलने का विरोध किया।

भारत बोला- लद्दाख हमारा हिस्सा, इनकार करने से हकीकत नहीं बदलेगी

चीन की आपत्ति पर भारत ने भी जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि लद्दाख भारत का हिस्सा है। चीन के इनकार करने से यह हकीकत नहीं बदलेगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इन जगहों के नाम सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे में दर्ज किए गए हैं। यह काम लद्दाख प्रशासन और स्थानीय लोगों से सलाह लेकर किया गया है।

जायसवाल ने कहा कि इन जगहों के नाम नक्शे में दर्ज करने का मकसद उनकी सही पहचान करना और लोगों को उनके बारे में जानकारी देना है।

भारत ने 28 जगहों के नाम क्यों तय किए?

  • भारत के गृह मंत्रालय ने 2 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर लद्दाख की 28 जगहों और क्षेत्रों के नाम तय किए थे।
  • भारत का फैसला 2023 में चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के इलाकों के नाम बदलने के जवाब में उठाया गया था। चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत कहता रहा है।

गोगरा और हॉट स्प्रिंग पूर्वी लद्दाख के संवेदनशील इलाके

भारत ने जिन जगहों के नाम तय किए, इनमें गोगरा और हॉट स्प्रिंग भी शामिल हैं। ये पूर्वी लद्दाख के संवेदनशील इलाके हैं, जहां भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा पर तनाव रहा है। इन जगहों पर भारतीय सैनिक गश्त भी करते हैं।

मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बढ़ गया था। 5 मई को पैंगोंग झील के पास दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी।

2020 के जून में गलवान घाटी में भी दोनों सेनाओं के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था। इसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने और सैनिकों को पीछे हटाने के लिए बातचीत शुरू की। सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया 2022 में शुरू हुई।

लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर पैंगोंग झील के इलाके में दोनों देशों के सैन्य अधिकारी मिले थे। तस्वीर 10 फरवरी 2022 की है।

लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर पैंगोंग झील के इलाके में दोनों देशों के सैन्य अधिकारी मिले थे। तस्वीर 10 फरवरी 2022 की है।

28 जगहों में कौन-कौन से नाम शामिल हैं?

भारत की ओर से तय किए गए 28 नामों में पहाड़, दर्रे, ग्लेशियर, जमीन के हिस्से, घाटियां और जल स्रोत शामिल हैं।

पहाड़-चोटियां: अतीशा गिरि, कनीष्क पीक, करुण पीर पर्वत, मार्तंड गिरि, द्रक कार्पो, जोलमोरी, रिनचेन जांगपो, साक्यश्री गिरि, मारपा लोत्सावारी, मिलारेपा कांगरी, शिव री, जोरावर पीक और महेश्वररी।

दर्रे-ग्लेशियर: चापचिंगल दर्रा, शाचमिरिक दर्रा, पारपिक ग्लेशियर और स्कामरी ग्लेशियर।

जमीन के इलाके: ब्रांगसा, कुकसेल, देहरा कम्पास, गोगरा, कुमारायण पॉइंट, पंगलुंग और शमाल लुंगपा।

घाटी-जल स्रोत: श्कोर्गा घाटी, गुरु रिनपोछे झील, यांगपा नदी और हॉट स्प्रिंग।

इन जगहों के नाम तय करके सरकारी नक्शे में शामिल करने का मकसद उनकी सही पहचान बताना है।

गलवान में भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प हुई थी

जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा विवाद को लेकर हिंसक झड़प हुई थी। भारत के मुताबिक, 6 जून को दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सैनिकों को पीछे हटाने पर सहमति बनी थी, लेकिन 15 जून की रात फिर टकराव हो गया।

इस दौरान सैनिकों के बीच पत्थरों और डंडों से लड़ाई हुई। झड़प में भारत के 20 सैनिकों की मौत हुई थी। चीन ने फरवरी 2021 में अपने 4 सैनिकों की मौत की बात स्वीकार की थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया और सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गई।

जून 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा पर झड़प के दौरान आमने-सामने खड़े दोनों देशों के सैनिक।

जून 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा पर झड़प के दौरान आमने-सामने खड़े दोनों देशों के सैनिक।

अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी दोनों देशों के बीच विवाद

भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है और इसे ‘जांगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत कहता है।

इसी दावे के तहत चीन 2017 से कई बार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नाम जारी कर चुका है। 2023 में चीन ने 11 और 2024 में करीब 30 जगहों के नाम जारी किए थे। भारत हर बार इसका विरोध करता रहा है।

भारत का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न हिस्सा है और चीन के नाम बदलने से जमीन पर स्थिति नहीं बदल सकती। भारत की नजर में यह सिर्फ नामों का मामला नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र पर चीन के दावे से जुड़ा विवाद है।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677