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कोरबा कार्बन फैक्ट्री में लापरवाही का दूसरा मामला:ब्लास्ट के बाद बिना सुरक्षा सफाई,जहरीले धुएं की चपेट में आने से एक मजदूर की हालत बिगड़ी

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कोरबा। कोरबा जिले के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित अंकुश अग्रवाल की कार्बन फैक्ट्री में हुए बायलर ब्लास्ट के बाद सुरक्षा मानकों की अनदेखी का मामला सामने आया है। हादसे के अगले ही दिन फैक्ट्री संचालक ने नियमित कर्मचारियों की जगह दिहाड़ी मजदूरों से बिना किसी सुरक्षा उपकरण के राख और जले हुए मलबे की सफाई कराई।

इस दौरान जहरीले धुएं की चपेट में आने से एक मजदूर की तबीयत बिगड़ गई, जबकि अन्य मजदूरों के भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

बायलर ब्लास्ट से मची थी अफरा-तफरी

शनिवार को फैक्ट्री में बायलर में पिच अनलोडिंग के दौरान अचानक जोरदार ब्लास्ट हो गया। विस्फोट के बाद हाई टेम्परेचर का कच्चा मटेरियल बाहर निकल आया और फैक्ट्री में आग लग गई। आग की लपटों और धुएं का गुबार करीब दो किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहा था। हादसे के समय मौजूद मजदूर जान बचाकर बाहर भागे।

तीन घंटे बाद आग पर पाया गया काबू

घटना की सूचना मिलते ही नगर सेना, बालको, सीएसईबी और अन्य औद्योगिक इकाइयों की दमकल टीमें मौके पर पहुंचीं। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। आग में फैक्ट्री के भीतर रखा रॉ मटेरियल, बोरियां और अन्य सामान जलकर राख हो गया। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

अगले दिन दिहाड़ी मजदूरों से कराई सफाई

हादसे के बाद डरे हुए नियमित मजदूर रविवार को काम पर नहीं पहुंचे। इसके बाद फैक्ट्री प्रबंधन ने उषा कॉम्प्लेक्स रेलवे फाटक क्षेत्र से 10 से 11 दिहाड़ी मजदूर बुलाकर सफाई का काम शुरू करा दिया। आरोप है कि उस समय तक राख पूरी तरह ठंडी भी नहीं हुई थी।

बिना मास्क और दस्तानों के कराया काम

सफाई में लगाए गए मजदूरों को न मास्क दिए गए, न दस्ताने और न ही कोई अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराया गया। सुरक्षा मानकों की अनदेखी के बीच मजदूरों से जहरीले मलबे और राख की सफाई कराई गई।

मजदूर की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल पहुंचा

सफाई के दौरान कथरीमाल निवासी मजदूर शिवशंकर साहू को गले में खराश और सांस लेने में परेशानी महसूस होने लगी। घर पहुंचने के बाद उसकी हालत और बिगड़ गई। परिजन उसे रात करीब 8:30 बजे मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसने गले में तेज दर्द और नस खिंचने की शिकायत बताई।

इलाज के बाद रात में घर भेजा गया

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में देर रात तक इलाज के नाम पर केवल औपचारिक कार्रवाई की गई। रात करीब 1:30 बजे कुछ लोगों के अस्पताल पहुंचने के बाद कर्मचारियों ने मरीज को ठीक बताते हुए छुट्टी दे दी। परिजनों ने घर दूर होने और मरीज की खराब हालत का हवाला दिया, लेकिन इसके बावजूद उसे आधी रात में घर भेज दिया गया।

अन्य मजदूरों के प्रभावित होने की भी आशंका

जानकारी के अनुसार, सफाई में लगे कुछ अन्य मजदूर भी जहरीले धुएं के संपर्क में आने से प्रभावित हुए हैं। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विशेषज्ञों की चिंता

जानकारों के मुताबिक, कार्बन और उसके यौगिकों से निकलने वाली गैसें स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती हैं। इनके लगातार संपर्क में आने से सांस लेने में तकलीफ, गले में संक्रमण और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

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कोरबा

कलेक्टर के सख्त निर्देश:नल से पानी आने पर ही होगा जल जीवन मिशन के कार्यों का भुगतान

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कोरबा। जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक में कलेक्टर ने लोक स्वास्थय यांत्रिकी विभाग को निर्देशित किया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत पूर्ण हो चुके कार्यों को संबंधित ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किया जाए तथा जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) उनका क्रॉस वेरिफिकेशन करें।
उन्होंने निर्देश दिए कि मार्च 2028 तक सभी लंबित कार्य पूर्ण कर लिए जाएं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जिन योजनाओं में नल से नियमित रूप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, उन्हीं कार्यों का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने ग्राम स्तर पर जल एवं स्वच्छता समितियों की नियमित बैठक आयोजित करने के भी निर्देश दिए।
पाली के वनांचल क्षेत्र में योजना की दुर्गति
कोरबा जिले के पाली ब्लाक के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के कार्यों की दुर्गति है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खण्ड कोरबा के कार्यपालन अभियंता रमन उरांव को जानकारी देने के बाद भी साल भर से निरीक्षण करने का समय तक नहीं मिला। क्षेत्र में काम करने वाले ठेकेदारों ने केन्द्र की इस महत्वाकांक्षी योजना का बंटाधार कर दिया है और यदि सही जांच कराई जाए तो करोड़ों का भ्रष्टाचार निकलेगा। जल जीवन मिशन में कार्य करने वाले ठेकेदार करोड़पति बन गए और इनके तथा अधिकारियों की मिलीभगत से जहां योजना का लाभ अधिकांश एवं गांवों को नहीं मिल पा रहा है, वहीं गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों से योजना प्रारंभ होने से पहले ही दम तोड़ रही है और ठेकेदार भी कार्यवाही के अभाव में मदमस्त हैं।

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डीईओ को नोटिस जारी: छात्र सुरक्षा बीमा प्रभारी क्लर्क के खिलाफ होगी कड़ी कार्यवाही

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मानदेय शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत पर प्रधानपाठकों की वेतनवृद्धि रोकने के निर्देश
कोरबा। समय सीमा की बैठक में मंगलवार को कलेक्टर कुणाल दुदावत के तेवर सख्त दिखे। उन्होंने शिक्षा विभाग की समीक्षा में विभाग की लापरवाही देखी। शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों के वितरण एवं स्कूलवार स्कैनिंग कार्य की समीक्षा की। मानदेय शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी संबंधी प्राप्त शिकायतों के निराकरण में प्रगति नहीं होने पर कलेक्टर ने संबंधित प्रधानपाठकों की वेतनवृद्धि रोकने तथा जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने विकासखंड कोरबा एवं पोड़ी-उपरोड़ा में स्कैनिंग की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए 31 जुलाई तक सभी विकासखंडों में शत-प्रतिशत स्कैनिंग पूर्ण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने वेंडर से समन्वय कर सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत बालिकाओं को शीघ्र साइकिल वितरण सुनिश्चित करने तथा स्कूली विद्यार्थियों को गणवेश का दूसरा सेट उपलब्ध कराने के लिए उच्च अधिकारियों से समन्वय करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने पीएम पोषण गार्डन के लिए विद्यालयों की जानकारी 31 जुलाई तक उपलब्ध कराने, अहाताविहीन विद्यालयों की सूची तैयार करने तथा संबंधित जनपद पंचायतों के सीईओ को सरपंच एवं सचिव के माध्यम से उसका सत्यापन कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने अपार आईडी से वंचित विद्यार्थियों के लिए 1 अगस्त से 31 अगस्त तक विशेष शिविर आयोजित कर अपार आईडी बनाने तथा आधार एवं यू-डाइस से संबंधित त्रुटियों का निराकरण करने के निर्देश दिए।
छात्र सुरक्षा बीमा की राशि समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने की शिकायत के मामले में कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के संबंधित शाखा प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।

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एकलव्य आवासीय स्कूल में अव्यवस्था का मामला : जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित

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कोरबा। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कुणाल दुदावत ने विकासखंड कटघोरा अंतर्गत संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, छुरीकला में विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय की व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं से संबंधित प्राप्त गंभीर शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को प्रकरण की निष्पक्ष एवं तथयपरक जांच कर एक सप्ताह के भीतर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्राचार्य को हटाने बच्चों ने विधायक पटेल और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन के काफिले का कर दिया था घेराव

गठित जांच समिति में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कोरबा, तहसीलदार कटघोरा, सहायक लेखा अधिकारी तथा कनिष्ठ लेखा अधिकारी (कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, कोरबा) को सदस्य बनाया गया है। समिति विद्यालय में उपलब्ध व्यवस्थाओं, विद्यार्थियों को प्रदत्त सुविधाओं तथा शिकायतों से जुड़े सभी बिंदुओं की विस्तृत जांच करेगी।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों के हितों एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। शिकायतों की निष्पक्ष जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

सहायक आयुक्त की कार्यशैली पर भी सवाल!

एकलव्य आवासीय विद्यालय में बच्चों ने कुछ दिन पूर्व पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन सहायक आयुक्त को निरीक्षण करने का समय ही नहीं मिला। महीनों से बच्चों को दूषित भोजन दिया जा रहा, लेकिन सहायक आयुक्त को कुछ पता ही नहीं।

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