रायपुर, एजेंसी। एक्टर शाहरूख खान को धमकी मिलने के मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने रायपुर के एक वकील को गिरफ्तार किया है। मंगलवार को ट्रांजिट रिमांड लेने के लिए रायपुर कोर्ट में उसे पेश किया गया था। कोर्ट ने 3 दिन की ट्रांजिट रिमांड दे दी है।
आरोपी वकील फैजान खान को बांद्रा पुलिस स्टेशन पहुंचने का नोटिस दिया गया था। नहीं पहुंचने पर उसे रायपुर से गिरफ्तार किया गया। अब उसे बांद्रा कोर्ट में पेश कर रिमांड में लिया जाएगा। इससे पहले वकील ने कहा था कि, उसका फोन गुम हो चुका है। उसे जबरन फंसाने की कोशिश की जा रही है।
वकील ने शाहरुख खान की एक फिल्म के डायलॉग पर आपत्ति जताई थी, जिसमें शाहरुख ने कहा था कि, हिरण को पकाकर खा लो। उन्हें हिरण का शिकार करने में मजा आता है। फैजान ने इसकी शिकायत मुंबई और जोधपुर में की थी, जिसमें बताया कि, हिरण को बिश्नोई समाज पूजता है। इस डायलॉग से उनकी आस्था को ठेस पहुंची है।
पूछताछ में नहीं किया बांद्रा पुलिस का सहयोग
फैजान खान को मुंबई पुलिस ने 7 नवंबर को पूछताछ के लिए नोटिस दिया था, जिसमें फैजान को कहा गया था कि 11 नवंबर को बांद्रा पुलिस स्टेशन पहुंचे, जहां उससे शाहरुख खान को फोन से मिली धमकी और 50 लाख रुपए मांगने के मामले में पूछताछ होनी थी। लेकिन 11 नवंबर को फैजान बांद्रा पुलिस स्टेशन नहीं पहुंचा।
जिस वजह से 12 नवंबर यानी आज उन्हें रायपुर से मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अब उसे ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई ले जाने की तैयारी हो रही है।
14 नवंबर को आने की बात कहने का दावा
इस मामले में फैजान खान के सहयोगी वकील विराट वर्मा ने दैनिक भास्कर को बताया कि मुंबई पुलिस ने 11 नवंबर को पूछताछ के लिए पेश होने को नोटिस दिया था। लेकिन, हमने 14 नवंबर को आने की बात की थी, जिसमें उन्होंने सहमति दी थी। इसके अलावा विराट वर्मा का दावा है कि उन्होंने मुंबई पुलिस को ऑडियो-वीडियो माध्यम से पूछताछ के लिए भी आवेदन भेजा था। इस पर कोई जवाब नहीं आया।
क्या है शाहरुख को मारने की धमकी का मामला?
मामले की शुरुआत मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन पर आए एक फोन कॉल से हुई। अनजान कॉलर ने फोन पर धमकी देकर फिरौती मांगी। कॉलर ने कहा कि उसे 50 लाख रुपए चाहिए। वरना वो शाहरुख खान को जान से मार देगा।
इसके बाद मुंबई पुलिस एक्शन मोड पर आई। मुंबई से तीन पुलिस अफसर रायपुर पहुंचे। बुधवार 6 नवंबर की रात वे रायपुर के होटल में रुके। तड़के उन्होंने पंडरी एरिया में मोबाइल सिम की लोकेशन देखने के बाद फैजान के घर गए। धमकी भरे कॉल के संबंध में करीब 2 घंटे पूछताछ की।
शाहरुख खान को धमकी मिलने के बाद उनके घर मन्नत के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई। (फाइल फोटो)
गुम हुए मोबाइल से दी गई धमकी
इस दौरान पूछताछ में फैजान ने बताया कि उसका मोबाइल 2 नवंबर को गुम हो गया था, जिसकी शिकायत उसने 4 नवंबर को खम्हारडीह थाने में कराई थी, जबकि बांद्रा पुलिस स्टेशन में फोन कॉल 5 नवंबर को गया था। थाने में शिकायत की कॉपी दिखाने के बाद फैजान को छोड़ा गया। दोबारा पूछताछ के लिए 14 नवंबर को मुंबई बुलाया है।
फैजान ने अंजाम फिल्म को बैन करने की मांग की है। इसी फिल्म के एक सीन में आपत्तिजनक डायलॉग है।
फैजान ने कहा- मैंने शाहरुख के खिलाफ शिकायत की थी
वकील फैजान खान ने खुलासा करते हुए कहा था कि उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक रील देखी। ये शाहरुख खान की 1994 में रिलीज हुई अंजाम फिल्म की क्लिप थी, जिसमें एक सीन में वह हाथों में बंदूक लिए एक हिरण का शिकार करके आ रहे हैं।
इस दौरान वह अपने नौकर हरि सिंह को कह रहे हैं कि गाड़ी में एक हिरण पड़ा हुआ है, उसे पकाकर खा लो, तभी फिल्म में एक अभिनेत्री शाहरुख खान से कहती हैं कि वह क्यों बेगुनाह जानवरों को मारता है। इस पर शाहरुख खान कह रहे हैं कि उन्हें अच्छा लगता है, बहुत मजा आता है।
फैजान ने सिम गुम होने की शिकायत 4 नवंबर को पुलिस थाने में दी थी।
शाहरुख ने दंगा भड़काने की कोशिश की
फैजान ने शिकायत में अंजाम फिल्म की सीन के बारे में बताते हुए कहा था कि शाहरुख खान एक विशेष धर्म से आते हैं। वे बिश्नोई समाज को ठेस पहुंचाकर दंगा भड़काना चाहते हैं। उन्होंने पुलिस से दो समुदाय के बीच दरार डालने को लेकर राजस्थान के जोधपुर के मथानिया थाना और मुंबई पुलिस कमिश्नर समेत बांद्रा पुलिस को अक्टूबर में शिकायत दी थी।
मुझे फंसाने की साजिश
मामले में फैजान ने बताया था कि धमकी भरे फोन में उनके सिम का इस्तेमाल हुआ है। उन्हें आशंका है कि फंसाने के लिए ये एक साजिश है। उन्होंने रायपुर SSP संतोष सिंह से मामले की शिकायत की है, जिसमें उन्होंने परिवार और खुद की जान को खतरा बताया है।
फैजान ने शिकायत की डिजिटल कॉपी दी थी।
2023 में भी मिली थी धमकियां, बढ़ाई गई थी सिक्योरिटी
साल 2023 में शाहरुख खान को पठान और जवान फिल्म की कामयाबी के बाद लगातार धमकियां मिल रही थीं। मामले की शिकायत दर्ज होने पर सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें Y प्लस सिक्योरिटी दी गई थी। तब से ही शाहरुख खान हर जगह टाइट सिक्योरिटी के साथ ही जाते हैं।
59वें बर्थडे पर इवेंट का हिस्सा बने थे शाहरुख
2 नवंबर को शाहरुख खान ने 59वां जन्मदिन मनाया है। हर साल वो जन्मदिन पर फैंस से मिलने मन्नत की बालकनी पर आते हैं। हालांकि इस साल सिक्योरिटी के मद्देनजर शाहरुख बालकनी में नहीं आए। हालांकि वो शाम करीब 6 बजे बांद्रा स्थित रंग मंदिर ऑडिटोरियम में आयोजित हुए एक इवेंट का हिस्सा बने थे।
कोरबा निवासी 02 लोगों के विरुद्ध म्यूल अकाउंट के मामले में पुलिस की कार्रवाई
कोरबा पुलिस की अपील—अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम एवं मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें
कोरबा। पुलिस अधीक्षक जिला कोरबा सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटेल एवं साइबर नोडल अधिकारी नितेश ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कटघोरा के मार्गदर्शन में साइबर थाना प्रभारी ललित कुमार चंद्रा के नेतृत्व में म्यूल अकाउंट के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय से म्यूल अकाउंट (Mule Account) के संबंध में प्राप्त निर्देशों के पालन में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा ऐसे बैंक खातों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिनका उपयोग साइबर अपराधों में किए जाने की आशंका है।
इसी क्रम में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा अलग अलग बैंक खातों के संबंध में अपराध पंजीबद्ध कर धारा 317(2), 318(4) बीएनएस के तहत विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान दो अलग अलग अपराधों में दो खाताधारकों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई।
पूछताछ में खाता धारक महेंद्र कुमार धीवर निवासी मानस नगर, कोरबा एवं के प्रभाकर राव निवासी कृष्ण नगर कोरबा द्वारा अपने बैंक खातों को लाभ कमाने के उद्देश्य से अन्य व्यक्तियों को कमीशन के बदले उपयोग हेतु दिए जाने की बात सामने आई। बाद में उन्हें जानकारी हुई कि संबंधित बैंक खाते होल्ड हो गए हैं।
प्रकरण में उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर दोनों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है। प्रकरण की विवेचना वर्तमान में जारी है।
म्यूल अकाउंट के विरुद्ध कोरबा पुलिस की कार्रवाई
साइबर अपराधियों द्वारा आम नागरिकों को कमीशन अथवा आसान कमाई का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाकर अथवा पहले से संचालित बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराध से प्राप्त राशि के लेन-देन के लिए किया जाता है। ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट (Mule Account) कहा जाता है।
साइबर अपराध में प्रयुक्त ऐसे खातों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध कराने वाले खाताधारक भी साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं।
कोरबा पुलिस की आम नागरिकों से अपील
साइबर अपराधी लोगों को कमीशन अथवा अन्य प्रकार के लाभ का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर अथवा सिम का उपयोग साइबर अपराधों में कर सकते हैं। अतः नागरिक निम्न सावधानियां बरतें—
अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें।
अपना एटीएम/डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी को न दें।
अपना मोबाइल नंबर अथवा सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने के लिए न दें।
किसी व्यक्ति द्वारा कमीशन या आसान कमाई का लालच देकर बैंक खाता उपलब्ध कराने की बात कही जाए तो सतर्क रहें।
अपने बैंक खाते में होने वाले लेन-देन की नियमित रूप से जानकारी रखें।
किसी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिलने पर तत्काल अपने बैंक एवं पुलिस को सूचित करें।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में राशि प्राप्त कर उसे दूसरे खाते में ट्रांसफर अथवा नकद निकालकर न दें।
कोरबा पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि थोड़े से आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम अथवा मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को देकर स्वयं को साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई का हिस्सा न बनाएं।
SECL मानिकपुर जनसुनवाई रद्द करने की मांग:ग्रामीणों ने प्रक्रिया को फर्जी बताया,भू-विस्थापित बोले- पहले पुराने वादे पूरे करो,नहीं तो 3 हजार ग्रामीण करेंगे विरोध
कोरबा। SECL मानिकपुर ओपन कास्ट खदान विस्तार परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। भू-विस्थापित संगठन मानिकपुर ने 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की है।
संगठन ने जनसुनवाई की प्रक्रिया को फर्जी बताते हुए चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो 8 प्रभावित गांवों के करीब 2 से 3 हजार महिला-पुरुष ग्रामीण मौके पर पहुंचकर इसका उग्र विरोध करेंगे।
200-250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप
250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों पहले खदान के लिए अपनी उपजाऊ जमीन देने के बावजूद करीब 200 से 250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, SECL द्वारा गोद लिए गए 7-8 गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी खराब है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और SECL प्रबंधन खदान विस्तार और कॉर्पोरेट मुनाफे को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि विस्थापित परिवारों की पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।
युवाओं के लिए 400-500 स्थायी नौकरी की मांग
भू-विस्थापितों ने प्रभावित गांवों के युवाओं के लिए मौके पर ही 400 से 500 पदों पर नियमित और स्थायी भर्ती शुरू करने की मांग रखी है। इसके अलावा भिलाई खुर्द-1, 2 और 3 में बचे मकानों और जमीनों का दोबारा पारदर्शी तरीके से भौतिक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।
रापाखरा और दादर खुर्द को लेकर भी मांग
ग्रामीणों ने रापाखरा के विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने और आने-जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, दादर खुर्द के तालाब को गांव की निस्तारी का प्रमुख स्रोत बताते हुए वहां ओबी डंपिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
ग्रामीणों को सूचना दिए बिना जनसुनवाई कराने का आरोप
ग्रामीण अमन पटेल ने आरोप लगाया कि SECL प्रबंधन 21 अगस्त को जनसुनवाई कराने जा रहा है, लेकिन प्रभावित गांवों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि करीब 15-20 दिन पहले अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा गया था कि जनसुनवाई की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों को बताया जाएगा। इसके बावजूद अब पंचायत सचिव, सरपंच और अन्य क्षेत्रों को नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुराने मुआवजे, रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े वादे पूरे नहीं होते, तब तक खदान विस्तार के लिए जनसुनवाई नहीं होने दी जाएगी।
पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध शिकायत निवारण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
बिलासपुर/कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने भूमि के बदले रोजगार से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा समिति का गठन किया है। समिति उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर अपनी अनुशंसाएं सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
भूमि के बदले रोजगार की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लागू की गई यह उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था प्रत्येक पात्र हितग्राही के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
समिति के अध्यक्ष महाप्रबंधक (भू-राजस्व), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर होंगे। समिति में महाप्रबंधक (योजना एवं परियोजना), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/श्रमशक्ति), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/औद्योगिक संबंध) तथा उप-महाप्रबंधक (विधि), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर सदस्य होंगे।
गठित समिति आवश्यकता के अनुसार संबंधित अभिलेखों एवं दस्तावेजों की जांच करेगी, अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करेगी तथा उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों का सत्यापन करते हुए प्रचलित नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप शिकायतों का परीक्षण करेगी। इससे प्रकरणों के त्वरित, निष्पक्ष एवं तार्किक निस्तारण में सहायता मिलेगी।
भूमि के बदले रोजगार से संबंधित अनियमितता, जाली अथवा कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग, तथ्य छिपाकर रोजगार प्राप्त करने अथवा अन्य संबंधित मामलों के संबंध में कोई भी व्यक्ति आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों सहित समिति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।
एसईसीएल ने स्पष्ट किया है कि विधिवत दर्ज की गई शिकायत को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। अतः शिकायतकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे केवल प्रामाणिक तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही शिकायत दर्ज कराएं। कंपनी ने सभी संबंधित पक्षों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि शिकायत केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्रस्तुत करें तथा किसी भी प्रकार के बिचौलियों, अपुष्ट सूचनाओं अथवा भ्रामक दावों से सावधान रहें।
एसईसीएल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान कोई शिकायत जानबूझकर असत्य, दुर्भावनापूर्ण अथवा भ्रामक तथ्यों पर आधारित पाई जाती है, अथवा किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने या अनावश्यक उत्पीड़न के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता के विरुद्ध प्रचलित नियमों एवं लागू विधिक प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
एसईसीएल सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संस्थागत निष्पक्षता के उच्च मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है। कंपनी का विश्वास है कि उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था के माध्यम से भूमि के बदले रोजगार संबंधी शिकायतों के परीक्षण की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय बनेगी। साथ ही, वास्तविक एवं पात्र हितग्राहियों के हितों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ शिकायत निवारण तंत्र में जनविश्वास एवं संस्थागत जवाबदेही भी और सुदृढ़ होगी।