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चांदी आज ₹4 हजार बढ़कर ₹2.37 लाख पर पहुंची:सोना ₹291 सस्ता होकर ₹1.52 लाख हुआ

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नई दिल्ली,एजेंसी। चांदी की कीमत में आज यानी 18 फरवरी को बढ़त और सोने की कीमत में गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी 3,834 रुपए बढ़कर 2.37 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले कल ये 2.33 लाख रुपए पर थी।

वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 291 रुपए सस्ता होकर 1.52 लाख रुपए पर पहुंच गया है। सर्राफा बाजार में 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑल टाइम हाई बनाया था।

2025 में 57 हजार रुपए महंगा हुआ था सोना

  • 2025 में सोना रू.57 हजार (75%) बढ़ा है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना रू.76 हजार का था, जो 31 दिसंबर 2025 को रू.1.33 लाख रुपए हो गया।
  • चांदी इस दौरान रू.1.44 लाख (167%) बढ़ी। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी रू.86 हजार की थी, जो साल के आखिरी दिन रू.2.30 लाख प्रति किलो हो गई।
  • सर्राफा: सोना-चांदी 6 माह में कम से कम 10% और सस्ते हो सकते हैं
  • इक्विनॉमिक्स रिसर्च के फाउंडर और एमडी जी. चोक्कालिंगम ने कहा कि सोने-चांदी के साथ ही कॉपर जैसे इंडस्ट्रियल मेटल्स अत्यधिक अस्थिर रहेंगे। अगले 6 महीनों में इनके दाम कम से कम 10% और घट सकते हैं। वैश्विक आर्थिक विकास में मंदी, क्रिप्टोकरेंसी और टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी गिरावट जैसे जोखिम कमोडिटी की कीमतों पर असर डाल सकते हैं।
  • सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान
  • 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।
  • 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है।

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गलगोटिया यूनिवर्सिटी AI समिट से बाहर:पहले चीनी रोबोट, फिर ड्रोन को अपना बताया, कांग्रेस बोली- सरकार ने देश की इमेज खराब की

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नई दिल्ली,एजेंसी। चीनी रोबोट और कोरियन ड्रोन को अपना प्रोजेक्ट बताने वाली गलगोटिया यूनिवर्सिटी को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट एक्सपो से बाहर निकाल दिया गया है। आयोजकों ने पहले यूनिवर्सिटी के पवेलियन की बिजली काटी, फिर ताला लगाकर बेरीकेडिंग कर दी गई।

यह कार्रवाई उस वीडियो के वायरल होने के बाद हुई है, जिसमें यूनिवर्सिटी ने एक चाइनीज कंपनी के रोबोटिक डॉग को अपनी खुद की खोज बताया था। चीनी रोबो डॉग के साथ ही यूनिवर्सिटी ने कोरियन कंपनी के एक ड्रोन को भी अपना बताया था।

इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने देश की इमेज खराब की है। चीनी मीडिया ने हमारा मजाक उड़ाया है। यह भारत के लिए वाकई शर्मिंदगी की बात है।

चीन की कंपनी यूनिट्री ने इस रोबोटिकक डॉग को बनाया है, लेकिन यूनिवर्सिटी ने इसे अपना इंवेंशन बताया था।

चीन की कंपनी यूनिट्री ने इस रोबोटिकक डॉग को बनाया है, लेकिन यूनिवर्सिटी ने इसे अपना इंवेंशन बताया था।

वीडियो वायरल होने के बाद शुरू हुआ विवाद

वीडियो में यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह कह रही हैं कि इस रोबोटिक डॉग का नाम ‘ओरियन’ है। इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ ने तैयार किया है। उन्होंने ये भी कहा कि यूनिवर्सिटी AI के क्षेत्र में 350 करोड़ रुपए का निवेश कर रही है।

इस वीडियो के सामने आने के बाद कई टेक एक्सपर्ट्स और यूजर्स ने दावा किया कि यह असल में चीनी कंपनी ‘यूनिट्री’ का ‘Go2’ मॉडल है, जो बाजार में 2-3 लाख रुपए में उपलब्ध है।

वहीं एक अन्य वीडियो में यूनिवर्सिटी जिस ड्रोन को कैंपस में ‘शुरुआत से’ तैयार करने का दावा कर रही हैं, उसे यूजर्स ने ₹40 हजार वाला रेडीमेड ‘स्ट्राइककर V3 ARF’ मॉडल बताया है।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने माफी मांगी

AI समिट में हुई इस घटना के लिए गलगोटिया यूनिवर्सिटी माफी मांगी है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि उनके स्टॉल पर मौजूद एक प्रतिनिधि को प्रोडक्ट के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। कैमरे के सामने आने के उत्साह में उस लड़की ने कुछ गलत टेक्निकल जानकारियां दे दीं, जबकि उसे मीडिया से बात करने की इजाजत भी नहीं थी।

यूनिवर्सिटी ने माना था, हमने नहीं बनाया ये डॉग

वीडियो वायरल होने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने कहा- हमने लगातार कैंपस में बेहतरीन टेक्नोलॉजी लाने की कोशिश की है। क्यों? क्योंकि जब छात्र नई चीजें देखते हैं, तभी उनकी सोच विकसित होती है। और यही सोच नए रचनाकारों को जन्म देती है।

हाल ही में यूनिट्री से लिया गया रोबोटिक डॉग इसी सफर का एक हिस्सा है। यह सिर्फ दिखाने के लिए रखी गई कोई मशीन नहीं है, यह एक चलता-फिरता क्लासरूम है। हमारे छात्र इस पर प्रयोग कर रहे हैं, इसकी क्षमताओं को परख रहे हैं और इस प्रक्रिया में अपना ज्ञान बढ़ा रहे हैं।

हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि गलगोटिया ने यह रोबोटिक डॉग नहीं बनाया है और न ही हमने कभी ऐसा दावा किया है। लेकिन हम ऐसे दिमाग तैयार कर रहे हैं जो जल्द ही भारत में ऐसी ही टेक्नोलॉजी को डिजाइन करेंगे, उनकी इंजीनियरिंग करेंगे और उन्हें यहीं बनाएंगे।

इनोवेशन की कोई सीमा नहीं होती। सीखने की भी नहीं होनी चाहिए। हम दुनियाभर से बेहतरीन टेक्नोलॉजी लाना जारी रखेंगे ताकि हमारे छात्र उनका अध्ययन कर सकें, उन्हें चुनौती दे सकें और उनमें सुधार कर सकें और अंत में वर्ल्ड-क्लास समाधान तैयार कर सकें।

नेहा सिंह बोलीं- जोश में बात साफ नहीं कह पाई

प्रोफेसर नेहा ने कहा कि यह विवाद इसलिए हुआ क्योंकि बातें साफ तौर पर नहीं रखी गईं। मैं इसकी जिम्मेदारी लेती हूं। यह सब बहुत जोश और उत्साह में बहुत जल्दी-जल्दी हुआ।

एक्स ने यूनिवर्सिटी के दावे को गलत बताया

यूनिवर्सिटी के स्पष्टीकरण के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने इस पोस्ट पर एक ‘कम्युनिटी नोट’ जोड़ दिया। इसमें कहा गया कि यूनिवर्सिटी का यह दावा कि उन्होंने इसे अपना नहीं बताया, भ्रामक है। एक्स का कम्युनिटी नोट एक ऐसा फीचर है, जिसमें आम यूजर्स ही किसी भ्रामक पोस्ट पर सही जानकारी और संदर्भ जोड़कर उसे फैक्ट-चेक करते हैं।

कांग्रेस बोली- मोदी सरकार ने दुनिया में देश का मजाक बनवाया

कांग्रेस ने इस मामले पर कहा कि मोदी सरकार ने AI के मामले में दुनिया भर में भारत का मजाक बनवाया है। AI समिट में चीन के रोबोट्स को हमारा बताकर दिखाया जा रहा है। चीनी मीडिया ने हमारा मजाक उड़ाया है। यह भारत के लिए वाकई शर्मिंदगी की बात है।

इससे भी ज्यादा शर्मनाक बात यह है कि मोदी के मंत्री अश्विनी वैष्णव भी इसी झूठ में शामिल हैं और भारतीय समिट में चीन के रोबोट्स को प्रमोट कर रहे हैं। मोदी सरकार ने देश की छवि को ऐसा नुकसान पहुंचाया है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।

वहीं नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि भारत के टैलेंट और डेटा का सही इस्तेमाल करने के बजाय, यह AI समिट एक ‘डिसऑर्गनाइज्ड पीआर स्पेक्टेकल’ बनकर रह गया है।

यानी एक ऐसा इवेंट जिसे बड़ी इमेज बनाने (PR) के लिए बहुत बढ़ा-चढ़ाकर आयोजित किया गया हो, लेकिन खराब मैनेजमेंट की वजह से वह तमाशा बन जाए।

नॉलेज बॉक्स: क्या है यूनिट्री Go2 रोबोटिक डॉग

  • यूनिट्री Go2 चीन की यूनिट्री रोबोटिक्स कंपनी द्वारा बनाया गया एक एआई-पावर्ड रोबोटिक डॉग है, जो अपनी फुर्ती और एडवांस सेंसर्स के लिए दुनियाभर में मशहूर है।
  • इसमें 4D LiDAR तकनीक का इस्तेमाल हुआ है, जिसकी मदद से यह सीढ़ियां चढ़ने, ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने और अपने रास्ते में आने वाली बाधाओं को पहचानता है।
  • लगभग 2 से 3 लाख रुपए की कीमत वाला यह रोबोट वॉयस कमांड पर भी काम करता है और मुख्य रूप से तकनीकी रिसर्च और शिक्षा के क्षेत्र में इस्तेमाल किया जाता है।

रोबोटिक डॉग और ह्युमनॉइड रोबोट बनाती है यूनिट्री

यूनिट्री चीन की एक मशहूर टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो हाई-परफॉर्मेंस वाले रोबोटिक डॉग और ह्युमनॉइड रोबोट बनाने के लिए दुनियाभर में जानी जाती है। यह कंपनी मुख्य रूप से किफायती और एडवांस सेंसर वाली रोबोटिक्स तकनीक विकसित करती है, जिसका इस्तेमाल रिसर्च, एजुकेशन और इंडस्ट्रियल कामों के लिए किया जाता है।

2011 में शुरू हुई थी गलगोटिया यूनिवर्सिटी

ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी 2011 में शुरू हुई थी। ये यूनिवर्सिटी 20 अलग-अलग स्कूलों के जरिए डिप्लोमा से लेकर पीएचडी तक के 200 से ज्यादा कोर्स कराती हैं। सुनील गलगोटिया यूनिवर्सिटी के चांसलर और ध्रुव गलगोटिया CEO हैं।

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सलमान के पिता सलीम खान को ब्रेन हेमरेज:डॉक्टर बोले- छोटी सर्जिकल प्रोसीजर की गई, यह ब्रेन सर्जरी नहीं, कुछ दिन अस्पताल में ही रहेंगे

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मुंबई, एजेंसी। सलमान खान के पिता और दिग्गज स्क्रिप्ट राइटर सलीम खान को ब्रेन हेमरेज हुआ है, जिसके बाद उनकी एक छोटी सी सर्जिकल प्रोसीजर की गई है।

लीलावती अस्पताल के डॉक्टर जलील पार्कर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि सलीम खान की डिजिटल सब्स्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (DSA) की गई है। यह कोई ब्रेन सर्जरी नहीं है।

DSA एक हाईक्वालिटी का एक्स-रे होता है। इसमें शरीर की नसों में हुए ब्लॉकेज को ज्यादा साफ देखा जा सकता है। इसे सेरेब्रल एंजियोग्राफी भी कहा जाता है।

कुछ समय तक डॉक्टर्स की निगरानी में रहेंगे सलीम खान

डॉक्टर पार्कर के अनुसार, फिलहाल सलीम खान को डिस्चार्ज नहीं किया जाएगा। उन्हें कुछ दिनों तक डॉक्टर्स की निगरानी में रखा जाएगा। हालांकि, उनकी हालत स्थिर है और वे रिकवरी कर रहे हैं। अगर सब कुछ ठीक रहा तो उन्हें आज या कल तक वेंटिलेटर सपोर्ट से हटाया जा सकता है, लेकिन डिस्चार्ज को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।

डॉ. जलील पार्कर मुंबई में एक जाने-माने पल्मोनोलॉजिस्ट (सांस की बीमारी के स्पेशलिस्ट) हैं, जो लीलावती हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर से जुड़े हैं।

डॉ. जलील पार्कर मुंबई में एक जाने-माने पल्मोनोलॉजिस्ट (सांस की बीमारी के स्पेशलिस्ट) हैं, जो लीलावती हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर से जुड़े हैं।

अस्पताल पहुंचे परिवार के सदस्य, देखें तस्वीरें

मंगलवार देर रात तक सलमान खान अस्पताल में ही रहे थे।

मंगलवार देर रात तक सलमान खान अस्पताल में ही रहे थे।

अर्पिता खुद ड्राइव कर अस्पताल से गईं।

अर्पिता खुद ड्राइव कर अस्पताल से गईं।

बेटी अलवीरा खान भागते हुए अस्पताल पहुंचीं।

बेटी अलवीरा खान भागते हुए अस्पताल पहुंचीं।

सलमान खान की मां और सलीम खान की पत्नी सलमा खान अस्पताल पहुंचीं।

सलमान खान की मां और सलीम खान की पत्नी सलमा खान अस्पताल पहुंचीं।

सलीम खान की बेटी अर्पिता के पति एक्टर आयुष शर्मा भी अस्पताल पहुंचे।

सलीम खान की बेटी अर्पिता के पति एक्टर आयुष शर्मा भी अस्पताल पहुंचे।

अलवीरा और अतुल के बेटे अयान भी हॉस्पिटल पहुंचे।

अलवीरा और अतुल के बेटे अयान भी हॉस्पिटल पहुंचे।

अलवीरा और अतुल की बेटी अलीजेह भी अस्पताल पहुंचीं।

अलवीरा और अतुल की बेटी अलीजेह भी अस्पताल पहुंचीं।

सलीम खान के पोते अरहान और निर्वाण अस्पताल जाते हुए नजर आए।

सलीम खान के पोते अरहान और निर्वाण अस्पताल जाते हुए नजर आए।

बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान सिद्दीकी बुधवार सुबह अस्पताल पहुंचे।

बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान सिद्दीकी बुधवार सुबह अस्पताल पहुंचे।

सलीम खान के साथ कई फिल्में लिखने वाले जावेद अख्तर उनका हाल लेने बुधवार को भी अस्पताल पहुंचे।

सलीम खान के साथ कई फिल्में लिखने वाले जावेद अख्तर उनका हाल लेने बुधवार को भी अस्पताल पहुंचे।

संजय दत्त अस्पताल से निकलते समय गंभीर नजर आए।

संजय दत्त अस्पताल से निकलते समय गंभीर नजर आए।

सलीम खान के दामाद अतुल अग्निहोत्री भी हॉस्पिटल पहुंचे।

सलीम खान के दामाद अतुल अग्निहोत्री भी हॉस्पिटल पहुंचे।

सलीम खान की तबीयत बिगड़ने के बाद मंगलवार को सलमान खान शूटिंग छोड़कर अस्पताल पहुंचे। वहीं, संजय दत्त और जावेद अख्तर भी अस्पताल पहुंचे।

एयरपोर्ट पर स्पॉट हुए अरबाज

मंगलवार को अरबाज खान अपनी पत्नी शूरा के साथ पिता से मिलने अस्पताल पहुंचे थे। वहीं, बुधवार सुबह उन्हें मुंबई एयरपोर्ट पर एंट्री करते हुए स्पॉट किया गया।

मंगलवार सुबह इमरजेंसी में लाया गया था

अस्पताल प्रशासन ने बताया था कि सलीम खान को मंगलवार सुबह 8:30 बजे इमरजेंसी में लाया गया था। उनके इलाज के लिए डॉक्टरों की एक टीम बनाई गई है। इसमें न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनय चव्हाण, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अजीत मेनन, न्यूरोसर्जन डॉ. नितिन डांगे और डॉ. बिनीत अहलूवालिया शामिल हैं।

1960 के दशक में करियर शुरू हुआ था

सलीम खान 90 साल के हैं। उनका जन्म 24 नवंबर 1935 को हुआ था। वे हिंदी सिनेमा के दिग्गज स्क्रिप्ट राइटरों में शुमार हैं।

सलीम खान ने अपने करियर की शुरुआत एक्टिंग से की थी। 1960 के दशक में फिल्म बारात से करियर शुरू हुआ, लेकिन फिल्मों में उन्हें सीमित और छोटे किरदार ही मिले।

लगभग दो दर्जन फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने महसूस किया कि एक्टिंग नहीं, बल्कि राइटिंग असली ताकत है। इसके बाद उन्होंने लेखन की ओर रुख किया और स्क्रिप्ट राइटर बन गए।

अभिनय के शुरुआती दिनों में सलीम खान 'प्रिंस सलीम' नाम का उपयोग करते थे।

अभिनय के शुरुआती दिनों में सलीम खान ‘प्रिंस सलीम’ नाम का उपयोग करते थे।

‘सलीम-जावेद’ की जोड़ी फेमस हुई

सलीम खान और जावेद अख्तर की जोड़ी ‘सलीम–जावेद’ के नाम से मशहूर रही है। दोनों ने मिलकर हिंदी सिनेमा को कई सुपरहिट और यादगार फिल्में दीं, जैसे जंजीर, दीवार, शोले, डॉन और सीता और गीता। इन फिल्मों की दमदार कहानियां और डायलॉग लोगों के दिलों में बस गए।

उनकी लिखी स्क्रिप्ट ने फिल्मों का अंदाज बदल दिया। उन्होंने मजबूत किरदार, संवाद और सामाजिक मुद्दों को कहानी का हिस्सा बनाया। सलीम-जावेद की सफलता से फिल्म इंडस्ट्री में लेखकों को नई पहचान और सम्मान मिला और उन्हें भी स्टार्स की तरह महत्व मिलने लगा।

सलीम-जावेद भारतीय सिनेमा के पहले लेखक माने जाते हैं, जिन्हें ‘स्टार स्टेटस’ मिला। उन्होंने अमिताभ बच्चन की ‘एंग्री यंग मैन’ इमेज को स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।

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सलमान खान के पिता राइटर सलीम खान की हालत स्थिर:तबीयत बिगड़ने के बाद आईसीयू में भर्ती हुए थे, परिवार के कई सदस्य अस्पताल पहुंचे

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मुंबई,एजेंसी। सलमान खान के पिता और दिग्गज स्क्रिप्ट राइटर सलीम खान को मंगलवार सुबह मुंबई के लीलावती अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार फिलहाल उनकी हालत स्थिर है, लेकिन उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।

हालांकि, अभी तक उनके अस्पताल में भर्ती होने की वजह सामने नहीं आई है। बुधवार सुबह 11 बजे परिवार की अनुमति के बाद मेडिकल बुलेटिन जारी किया जाएगा।

सलीम खान की तबीयत बिगड़ने के बाद बेटे सलमान खान समेत परिवार के कई सदस्य अस्पताल पहुंचे। बेटी अलवीरा भागते हुए लीलावती अस्पताल जाती दिखीं। इसके अलावा उनकी दोनों पत्नी सलमा और हेलेन, बेटे अरबाज, दामाद अतुल अग्निहोत्री और आयुष शर्मा को भी अस्पताल के बाहर देखा गया।

अस्पताल पहुंचे परिवार के सदस्य

सलमान खान पिता को देखने लीलावती अस्पताल पहुंचे।

सलमान खान पिता को देखने लीलावती अस्पताल पहुंचे।

बेटी अलवीरा खान भागते हुए अस्पताल पहुंचीं।

बेटी अलवीरा खान भागते हुए अस्पताल पहुंचीं।

सलमान खान की मां और सलीम खान की पत्नी सलमा खान अस्पताल पहुंचीं।

सलमान खान की मां और सलीम खान की पत्नी सलमा खान अस्पताल पहुंचीं।

सलीम खान के दामाद अतुल अग्निहोत्री भी हॉस्पिटल पहुंचे।

सलीम खान के दामाद अतुल अग्निहोत्री भी हॉस्पिटल पहुंचे।

सलीम खान की बेटी अर्पिता के पति और एक्टर आयुष शर्मा भी अस्पताल पहुंचे।

सलीम खान की बेटी अर्पिता के पति और एक्टर आयुष शर्मा भी अस्पताल पहुंचे।

अलवीरा और अतुल के बेटे अयान भी हॉस्पिटल पहुंचे।

अलवीरा और अतुल के बेटे अयान भी हॉस्पिटल पहुंचे।

अलवीरा और अतुल की बेटी अलीजेह भी अस्पताल पहुंचीं।

अलवीरा और अतुल की बेटी अलीजेह भी अस्पताल पहुंचीं।

सलीम खान के पोते अरहान और निर्वाण अस्पताल जाते हुए नजर आए।

सलीम खान के पोते अरहान और निर्वाण अस्पताल जाते हुए नजर आए।

हेलेन भी पति सलीम खान को देखने अस्पताल पहुंचीं।

हेलेन भी पति सलीम खान को देखने अस्पताल पहुंचीं।

1960 के दशक में करियर शुरू हुआ था

बता दें कि सलीम खान का जन्म 24 नवंबर 1935 को हुआ था और वह हाल ही में 90 साल के हुए हैं। वह हिंदी सिनेमा के दिग्गज स्क्रिप्ट राइटर में गिने जाते हैं।

सलीम खान ने अपने करियर की शुरुआत एक्टिंग से की थी। 1960 के दशक में फिल्म बारात से करियर शुरू हुआ, लेकिन फिल्मों में उन्हें सीमित और छोटे किरदार ही मिले।

लगभग दो दर्जन फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने महसूस किया कि एक्टिंग उनकी वास्तविक ताकत नहीं है। इसके बाद उन्होंने लेखन की ओर रुख किया और पटकथा लेखन में कदम रखा।

अभिनय के शुरुआती दिनों में सलीम खान 'प्रिंस सलीम' नाम का उपयोग करते थे।

अभिनय के शुरुआती दिनों में सलीम खान ‘प्रिंस सलीम’ नाम का उपयोग करते थे।

‘सलीम-जावेद’ की जोड़ी फेमस हुई

सलीम खान और जावेद अख्तर की जोड़ी ‘सलीम–जावेद’ के नाम से मशहूर रही है। दोनों ने मिलकर हिंदी सिनेमा को कई सुपरहिट और यादगार फिल्में दीं, जैसे जंजीर, दीवार, शोले, डॉन और सीता और गीता। इन फिल्मों की दमदार कहानियां और संवाद लोगों के दिलों में बस गए।

उनकी लिखी स्क्रिप्ट ने फिल्मों का अंदाज़ बदल दिया। उन्होंने मजबूत किरदार, संवाद और सामाजिक मुद्दों को कहानी का हिस्सा बनाया। सलीम–जावेद की सफलता से फिल्म इंडस्ट्री में लेखकों को नई पहचान और सम्मान मिला, और उन्हें भी स्टार्स की तरह महत्व मिलने लगा।

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