छत्तीसगढ़
GGU में घटिया भोजन पर छात्रों ने घेरा कुलपति निवास:बोले- हॉस्टल में परोस रहे खराब खाना, ठंड में आधी रात धरने पर बैठे
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2 days agoon
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Divya Akashबिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बार छात्रों ने हॉस्टल में घटिया और ठंडा भोजन परोसने का आरोप लगाकर विरोध-प्रदर्शन किया।
नाराज छात्रों ने कड़कड़ाती ठंड में मंगलवार (13 जनवरी) रात कुलपति निवास का घेराव कर दिया और सामने धरने पर बैठ गए। बाद में प्रबंधन की समझाइश और भोजन की जांच के बाद ठेकेदार पर कार्रवाई का आश्वासन पर शांत हुए।

छात्रों ने किया कुलपति निवास का घेराव।
लगातार खराब खाना देने का आरोप
गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी लगातार विवादों में बनी हुई है। अंबेडकर हॉस्टल के छात्रों ने मंगलवार की रात कुलपति निवास का घेराव कर दिया। उनका आरोप है कि मेस ठेकेदार द्वारा लगातार खराब खाना दिया जा रहा है।
जबकि प्रत्येक छात्र से प्रतिमाह 3370 रुपए मेस शुल्क वसूला जा रहा है, इसके बावजूद भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है। कभी खाने में कीड़े निकलते हैं तो कभी ठंडा और बेस्वाद भोजन परोसा जाता है। मंगलवार को भी मेस में खाना खराब बना था, जिससे छात्रों का आक्रोश भड़क उठा।
वार्डन बोले- कीड़े मिले तो क्या हुआ, इसलिए भड़का आक्रोश
छात्रों का आरोप है कि खराब भोजन और कीड़े मिलने की जानकारी वार्डन वीवी चतुर्वेदी को दी गई। जिस पर उन्होंने छात्रों से कहा कि कीड़ा मिल गया तो क्या हुआ, माइक्रोस्कोप से देखें तो दही में भी कीड़े होते हैं। उनकी यह बात सुनकर छात्रों की नाराजगी बढ़ गई, जिससे आक्रोशित छात्र कुलपति निवास का घेराव करने पहुंच गए।
छात्र बोले- स्वास्थ्य बिगड़ने की आशंका
छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल मेस में लंबे समय से भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। छात्रों ने बताया कि कई बार वार्डन स्तर पर शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।
भोजन में गुणवत्ता की कमी, साफ-सफाई का अभाव और बार-बार खराब खाना परोसे जाने से छात्र परेशान हैं। मजबूरन छात्रों को अपनी मांगों को लेकर कुलपति बंगले का घेराव करना पड़ा।
प्रदर्शन के दौरान चीफ वार्डन सहित विश्वविद्यालय के कई शिक्षक छात्रों से मिलने पहुंचे और बातचीत की, लेकिन छात्रों का कहना है कि अब तक उन्हें मेस टेंडर बदलने को लेकर कोई स्पष्ट और ठोस आश्वासन नहीं मिला है। इसी कारण छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
छात्रों ने की मेस बदलने की मांग
छात्रों ने मेस का ठेका बदलने की मांग रखी। छात्रों ने बताया की इस पर वार्डन ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि फाइल कुलसचिव के पास है और वे ठेका बदलना नहीं चाहते। सूचना पर चीफ वार्डन प्रतिभा जे. मिश्रा मौके पर पहुंचीं, लेकिन छात्रों की बात सुने बिना लौट गईं।
कड़ाके की ठंड के बावजूद छात्र करीब दो घंटे तक धरने पर बैठे रहे, लेकिन विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उनसे मिलने नहीं पहुंचा। छात्रों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद मेस की व्यवस्था में सुधार नहीं किया जा रहा है और उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
ABVP ने छात्रों का किया समर्थन
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि ऐसे मेस टेंडर धारकों को तत्काल हटाया जाना चाहिए जो छात्रों को पौष्टिक और स्वच्छ भोजन देने में विफल हैं। एबीवीपी का कहना है कि लगातार खराब भोजन मिलने से छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ता है, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई, स्वास्थ्य और दिनचर्या पर पड़ता है।
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सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य आयोजन
Published
9 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akash220 मातृशक्तियों की सहभागिता, नन्हे भैया-बहनों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया पारिवारिक संस्कारों का संदेश
कोरबा। सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी, कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्राचार्य राजकुमार देवांगन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में दीपक सोनी (कोरबा विभाग समन्वयक) एवं संजय कुमार देवांगन (प्रधानाचार्य, पूर्व माध्यमिक) उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पारंपरिक रीति से किया गया।

अपने संबोधन में अतिथियों ने मातृशक्ति की भूमिका को बाल संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में माता का योगदान सबसे निर्णायक होता है। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बच्चों ने आकर्षक नृत्य, गीत एवं लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से पारिवारिक वातावरण, नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं संस्कारों का संदेश दिया। बच्चों की सहज एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित माताओं एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में कुल 220 मातृशक्तियों की गरिमामयी सहभागिता रही, जिससे मातृसंगोष्ठी अत्यंत सफल रही। माताओं ने विद्यालय की शिक्षण पद्धति, संस्कार आधारित शिक्षा एवं गतिविधियों की सराहना की। शिशु नगरी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय की 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं एवं सहयोगी संस्थाओं की जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास, कौशल निर्माण, संस्कार शिक्षा एवं व्यवहारिक ज्ञान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। अभिभावक बंधुओं के सहयोग से आनंद मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्राथमिक विभाग के भैया-बहनों ने विभिन्न खेलों, गतिविधियों एवं मनोरंजन कार्यक्रमों में भाग लेकर भरपूर आनंद उठाया। आनंद मेला बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रधानाचार्य पंकज तिवारी ने सभी अतिथियों, मातृशक्तियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यालय एवं परिवार के बीच सहयोग और विश्वास और अधिक मजबूत होता है। उप-प्रधानाचार्य श्रीमती सीमा त्रिपाठी सहित समस्त आचार्य परिवार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कोरबा
बॉयोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर संजय सुमन ने कमाए साल में 3.20 लाख
Published
9 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akashकोरबा। विकासखंड करतला के ग्राम बड़मार निवासी संजय सुमन ने मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत नवीन बॉयोफ्लॉक तकनीक अपनाकर उन्होंने कम भूमि में अधिक उत्पादन कर उल्लेखनीय आय अर्जित की है।
संजय सुमन ने अपनी 25 डिसमिल भूमि पर बॉयोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया। इस तकनीक में तालाब में लाइनर बिछाकर पानी भरा जाता है और तेजी से बढ़ने वाली उन्नत प्रजाति की मछलियों का पालन किया जाता है। इसकी विशेषता है कि वर्ष में दो बार उत्पादन लेकर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।
सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत उन्हें 8.40 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। पिछले वर्ष संजय सुमन ने बॉयोफ्लॉक तालाब से 6 मैट्रिक टन मछली उत्पादन किया, जिसे बेचकर 07 लाख 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। उत्पादन लागत निकालने के बाद उन्हें 03 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
सफलता से उत्साहित संजय सुमन इस वर्ष अपने कार्य का विस्तार कर उत्पादन एवं आय को दुगुना करने की योजना बना रहे हैं। बॉयोफ्लॉक तकनीक की खासियत यह है कि कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव होता है, जिससे किसानों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
संजय सुमन की यह कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।
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सुशासन सरकार की नीतियों से किसान हुआ आत्मनिर्भर और निश्चिंत
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9 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akashसुगम व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य, किसानों की आर्थिक ढाल
कोरबा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की सुशासन आधारित नीतियों का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेश के खेतों तक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। शासन की पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य से छोटे एवं बड़े सभी किसानों को समान रूप से उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे किसानों का जीवन स्तर सुदृढ़ हो रहा है।
कोरबा जिले के ग्राम कल्दामार निवासी कृषक अरुण कुमार इसकी मिसाल हैं, उन्होंने उपार्जन केंद्र भैंसमा में इस वर्ष 190 क्विंटल धान का विक्रय बिना किसी असुविधा के किया। गत वर्ष भी उन्होंने लगभग 350 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया था। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती टिकैतिन बाई के नाम से टोकन कटवा कर धान विक्रय की प्रक्रिया पूर्ण की।
कृषक कुमार का कहना है कि शासन की पहल से उपार्जन केंद्रों में सभी आवश्यक सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध हैं। उच्च समर्थन मूल्य मिलने से अब किसानों को अगली फसल के लिए आर्थिक चिंता नहीं रहती और उन्हें उधार लेने की मजबूरी से भी मुक्ति मिली है। खेत से लेकर धान विक्रय तक की पूरी प्रक्रिया आज किसानों के लिए सहज, सुरक्षित और तनावमुक्त हो गई है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाया है और वे अब समृद्धि की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। किसानों के हित में संचालित योजनाओं और प्रभावी नीतियों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार एवं मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

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