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चीनी रू.70 प्रति किलो, खड़गे बोले- ये कैसा आत्मनिर्भर भारत:3 महीने में 40% महंगी हुई, सरकार का बयान- एथेनॉल बनाने से नहीं बढ़े दाम

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नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को चीनी की बढ़ती कीमतों और स्टॉक पर सरकार से 3 सवाल किए। उन्होंने पूछा कि ये कैसा आत्मनिर्भर भारत है, जहां विदेश से चीनी आयात की जा रही है और दूसरी तरफ गन्ने को पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल में झोंका जा रहा है।

हालांकि, केंद्र सरकार ने शुक्रवार को चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया था।

देश के कई शहरों में चीनी की कीमत 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है। पिछले 3 महीने में इसके दाम करीब 40% यानी रू.19 प्रति किलो तक बढ़े हैं। कीमत कम करने के लिए केंद्र ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर बिना ड्यूटी के आयात करने की मंजूरी दी है।

चीनी का स्टॉक कम होने की 4 बड़ी वजह…

1. मौसम खराब होने से गन्ने से चीनी कम बनी

नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) के मुताबिक, पिछले साल ज्यादा बारिश से गन्ने ‘की फसल को नुकसान हुआ। इससे गन्ने से चीनी बनने की दर यानी रिकवरी रेट 12% से नीचे आ गया। मतलब 100 किलो गन्ने से 12 किलो से भी कम चीनी बनी। इससे देश का चीनी उत्पादन करीब 3 करोड़ टन रहा, जबकि अनुमान 3.2 करोड़ टन का था

2. गन्ने का बड़ा हिस्सा एथेनॉल बनाने में खपा

सरकार की नई एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी के तहत गन्ने का एक बड़ा हिस्सा चीनी की बजाय एथेनॉल बनाने में खप रहा है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, देश में पिछले साल 720 करोड़ लीटर एथेनॉल बना। इसके लिए 1.33 करोड़ टन अनाज व 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा लगा। इसमें 34 लाख टन गन्ना था।

3. कम स्टॉक के बावजूद चीनी का एक्सपोर्ट

केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 15 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी थी। फरवरी 2026 में 5 लाख टन की मंजूरी और बढ़ा दी। सरकार ने कीमतें बढ़ने पर मई 2026 में चीनी के एक्सपोर्ट पर रोक लगाई, लेकिन तब तक 8 लाख टन चीनी देश से बाहर भेजी जा चुकी थी। इससे चीनी का स्टॉक 47 लाख टन से घटकर 39 लाख टन हो गया और घरेलू बाजार में चीनी की कमी हो गई।

4. त्योहारी सीजन के दौरान जमाखोरी

गणेश चतुर्थी और दीवाली जैसे त्योहारों के सीजन, यानी अगस्त से नवंबर तक मिठाइयों और कन्फेक्शनरी की खपत बढ़ जाती है। मिठाई और बेवरेज वगैरह बनाने वाली कंपनियां चीनी स्टॉक करने लगती हैं। ज्यादा डिमांड और स्टॉक कम होने के चलते दाम और बढ़ जाते हैं।

तीन महीने में गुड़ के दाम भी 24% तक बढ़े

चीनी के अलावा तीन महीने में गुड़ 24%, चावल 16% और मक्के का आटा 11% तक महंगा हुआ है। चीनी के दाम बढ़ने की एक वजह मिलों के पास बचे स्टॉक में कमी भी बताई जा रही है।

मिलों के पास शुरुआती स्टॉक भी पिछले साल के मुकाबले कम हुआ है। पिछले सीजन में पेराई शुरू होने से पहले मिलों के पास 47 लाख टन चीनी थी, जो इस बार घटकर 32 लाख टन रह गई है।

सरकार बोली- एथेनॉल की वजह से चीनी की कीमत नहीं बढ़ी

केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने शुक्रवार को कहा कि कीमत बढ़ने की अन्य वजहों में घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव बताया है।

चोपड़ा के मुताबिक, 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत रू.48/kg थी, जो बढ़कर रू.56/kg हो गई। वहीं, एक्स-मिल कीमत सिर्फ 7-10 दिनों में रू.47-48 से बढ़कर रू.62/kg पहुंच गई। उन्होंने मिलों की ओर से अचानक दाम बढ़ाने को अनुचित बताया।

खाद्य सचिव बोले- एथेनॉल के लिए कम चीनी इस्तेमाल हो रही

खाद्य सचिव के मुताबिक, अब देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब एक-चौथाई हिस्सा ही शुगर से आता है, जबकि बाकी मुख्य रूप से मक्का जैसे अनाज से बनता है। एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली शुगर की हिस्सेदारी 2022-23 में 12% थी, जो 2025-26 में घटकर करीब 9% रह गई है। मौजूदा सीजन में एथेनॉल के लिए 28 लाख टन शुगर डायवर्ट की गई है।

हालांकि, ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले साल 720 करोड़ लीटर एथेनॉल बना। इसमें 1.33 करोड़ टन अनाज और करीब 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा इस्तेमाल हुआ। इसमें करीब 34 लाख टन गन्ना शामिल था। संगठन के मुताबिक, खराब अनाज की उपलब्धता घटने से पशु आहार और पोल्ट्री फीड भी 8-10% तक महंगे हुए।

भारत ने 9 साल पहले विदेश से चीनी आयात की थी

भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। 2021-22 में भारत ने रिकॉर्ड 1.1 करोड़ टन चीनी एक्सपोर्ट की थी, लेकिन इसके बाद निर्यात लगातार घट रहा है।

घरेलू सप्लाई पर संकट हो, तो सरकार ब्राजील जैसे देशों से कच्ची चीनी मंगवाती है और उसे घरेलू मिलों में रिफाइन करके बाजार में उतारती है। 9 साल पहले आखिरी बार 2017 में 24 लाख टन चीनी आयात की गई थी। अब करीब एक दशक बाद फिर विदेश से चीनी मंगाने की जरूरत पड़ी है।

भारत का शुगर उत्पादन भी घटा

2025-26 में देश में चीनी उत्पादन 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 लाख टन था। रेड रॉट, टॉप बोरर और ज्यादा बारिश से गन्ने की फसल को नुकसान हुआ, जिससे उत्पादन घटा।

हालांकि, सरकार का कहना है कि सितंबर 2026 के अंत तक 33-35 लाख टन शुगर का स्टॉक बचने का अनुमान है। यानी घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त शुगर उपलब्ध है।

अक्टूबर से बढ़ सकती है चीनी की सप्लाई

सरकार के मुताबिक, इस बार चीनी मिलों में पेराई का नया सीजन 15 अक्टूबर के आसपास शुरू हो सकता है। इससे अक्टूबर में करीब 10-12 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इससे घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए सप्लाई पर्याप्त रहेगी और त्योहारों के दौरान शुगर की कमी नहीं होगी।

इसके अलावा, सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट भी लागू की है। डीलर्स के लिए 400 टन की सीमा है, जबकि 1 सितंबर से बड़े थोक खरीदार 15 दिन की खपत से ज्यादा शुगर स्टॉक नहीं कर सकेंगे।

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वाराणसी के सभी घाट डूबे, छतों पर आरती-अंतिम संस्कार:MP-UP समेत 4 राज्यों में आज भारी बारिश, राजस्थान में अगस्त में पारा 40° पहुंचा

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नई दिल्ली, एजेंसी। उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश से गंगा और घाघरा समेत 6 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। 13 जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं। वाराणसी में सभी 84 घाट डूब गए हैं। मणिकर्णिका घाट की छत पर अंतिम संस्कार हो रहा है। दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती भी छत पर कराई जा रही है।

उधर, राजस्थान में मानसून कमजोर पड़ गया है। इससे गर्मी और उमस बढ़ गई है। शुक्रवार को श्रीगंगानगर में 39.9° और चूरू में 39° तापमान रिकॉर्ड हुआ।

मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार को मध्य प्रदेश के 22 और यूपी के 28 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा में भी तेज बारिश होगी।

दरअसल, मध्य प्रदेश में 3 मानसूनी सिस्टम एक्टिव हैं। रीवा-सीधी के पास लो प्रेशर एरिया, उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश से मानसून ट्रफ और दक्षिणी-पश्चिमी मध्य प्रदेश में चक्रवाती घेरा बना हुआ है।

सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति

देशभर से मौसम की तस्वीरें

भारी बारिश से मध्यप्रदेश के सतना का शबरी वाटरफॉल रौद्र रूप में दिखाई दे रहा है।

भारी बारिश से मध्यप्रदेश के सतना का शबरी वाटरफॉल रौद्र रूप में दिखाई दे रहा है।

वाराणसी में घाट पर बने 100 छोटे-बड़े मंदिर डूब गए हैं। छतों पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

वाराणसी में घाट पर बने 100 छोटे-बड़े मंदिर डूब गए हैं। छतों पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

रुद्रप्रयाग में भारी बारिश की परवाह किए बिना स्कूल जाते हुए बच्चे। यह वीडियो उत्तराखंड पुलिस ने शेयर किया है।

रुद्रप्रयाग में भारी बारिश की परवाह किए बिना स्कूल जाते हुए बच्चे। यह वीडियो उत्तराखंड पुलिस ने शेयर किया है।

लखनऊ के हुसैनगंज में शुक्रवार शाम आधे घंटे तक तेज बारिश हुई। इससे दुकानों और घरों में पानी भर गया।

लखनऊ के हुसैनगंज में शुक्रवार शाम आधे घंटे तक तेज बारिश हुई। इससे दुकानों और घरों में पानी भर गया।

शिमला के ताराहाल में चलती कार के अगले हिस्से पर पेड़ गिर गया। साथ ही एक बाइक सवार भी बाल-बाल बचा।

शिमला के ताराहाल में चलती कार के अगले हिस्से पर पेड़ गिर गया। साथ ही एक बाइक सवार भी बाल-बाल बचा।

देहरादून-मसूरी रोड पर भूस्खलन से मलबा सड़क पर आ गया, जिससे ट्रैफिक थम गया।

देहरादून-मसूरी रोड पर भूस्खलन से मलबा सड़क पर आ गया, जिससे ट्रैफिक थम गया।

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लैंडिंग करते इंडिगो विमान का पिछला हिस्सा रनवे से टकराया:178 लोग सवार थे, पायलट ने दूसरी कोशिश में उतारा, गोरखपुर की घटना

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गोरखपुर, एजेंसी। गोरखपुर एयरपोर्ट पर एक विमान हादसा टल गया। इंडिगो विमान की लैंडिंग के दौरान पिछला हिस्सा (टेल) जमीन से टकरा गया था। इसके बाद पायलट ने विमान को फिर से हवा में ले लिया। कुछ देर बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के क्लियरेंस मिलने पर विमान की दोबारा लैंडिंग कराई।

मामला 19 अगस्त का है। दिल्ली से आ रही इंडिगो की फ्लाइट 6E 2381 में क्रू मेंबर्स समेत 178 लोग सवार थे। विमान के उतरने के बाद नियमित जांच में पिछले हिस्से में ऑक्सिलरी पावर यूनिट (APU) के पास खरोंच के निशान मिले।

विमान को अस्थायी तौर पर सेवा से हटा दिया गया है। फिलहाल, इसकी तकनीकी जांच और मरम्मत की जा रही है। एयरपोर्ट अथॉरिटी के अनुसार, तकनीकी मंजूरी मिलने के बाद ही विमान को दोबारा उड़ान में शामिल किया जाएगा।

इंडिगो प्रवक्ता ने कहा-

विमान को गो-अराउंड यानी दोबारा हवा में ले जाने का फैसला पूरी तरह सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। यात्रियों, क्रू और फ्लाइट की सुरक्षा कंपनी की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

तस्वीर गोरखपुर एयरपोर्ट की है।

तस्वीर गोरखपुर एयरपोर्ट की है।

15 से 20 मिनट बाद हुई दोबारा लैंडिंग

एयरपोर्ट सूत्रों के मुताबिक, गो-अराउंड के बाद विमान करीब 15-20 मिनट तक हवा में उड़ता रहा। एयर ट्रैफिक कंट्रोल से दोबारा क्लीयरेंस मिलने के बाद विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई। गो-अराउंड की वजह से कुछ देर तक यात्री घबरा गए। हालांकि, क्रू ने यात्रियों से शांत रहने की अपील की।

गोरखपुर एयरपोर्ट पर रोजाना 20- 22 फ्लाइट्स आती-जाती हैं। यहां का रन-वे 2.7 किमी लंबा है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) इसका संचालन करता है।

एयरपोर्ट के डायरेक्टर संजय कुमार ने कहा-

विमान के टेल यानी पीछे के हिस्से में खरोंच के निशान (Tail Impact) की सूचना मिली थी। इसके बाद विमान को ग्राउंडेड किया गया। यही विमान दिल्ली यात्रियों को वापस दिल्ली ले जाता था। दूसरे विमान से यात्रियों को दिल्ली भेजा गया। इसमें 5 घंटे की देरी हुई। इससे कई यात्रियों की कनेक्टिंग फ्लाइट और जरूरी काम प्रभावित हुए।

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बीजेपी ने जेन-जी से जुड़ने के लिए टीम बनाई:नितिन नवीन, स्मृति-तावड़े शामिल, कांग्रेस के पूरा वंदे मातरम न गाने के खिलाफ प्रस्ताव पास

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छत्तीसगढ़ के मंत्री ओपी चौधरी शामिल

नई दिल्ली, एजेंसी। बीजेपी ने जेन-जी यानी युवा वोटर्स से जुड़ने के लिए खास टीम बनाई है। इसमें भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी और विनोद तावड़े के साथ गुजरात के मंत्री हर्ष सांघवी और छत्तीसगढ़ के मंत्री ओपी चौधरी शामिल हैं।

वहीं, दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में शनिवार को नितिन नवीन की अध्यक्षता में 65 सदस्यीय नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक हुई।

वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस के फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पास किया गया। भाजपा ने कांग्रेस के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल दो पैरा गाने के फैसले की निंदा की।

नितिन नवीन की नई टीम शनिवार शाम 7 बजे PM मोदी से बीजेपी मुख्यालय में मुलाकात करेगी। टीम की घोषणा 17 अगस्त को हुई थी।

बैठक की तस्वीरें…

बैठक में नई टीम में शामिल सभी 12 महिला सदस्य भी शामिल हुईं।

बैठक में नई टीम में शामिल सभी 12 महिला सदस्य भी शामिल हुईं।

बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी, बूथ और जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत करने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा हुई।

बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी, बूथ और जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत करने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा हुई।

वंदे मातरम के लिए जागरूकता अभियान चलाएगी बीजेपी

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में हुई नई टीम की बैठक में आगामी चुनावों, संगठन को मजबूत करने और पार्टी के कार्यक्रमों पर चर्चा हुई।

नवीन ने कहा कि बीजेपी वंदे मातरम का इतिहास और महत्व देशभर में पहुंचाने के लिए अभियान चलाएगी। खासतौर पर युवाओं के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी पूरे वंदे मातरम और उससे जुड़े इतिहास को समझ सके।

इससे पहले 19 अगस्त को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने 1937 के अपने फैसले पर कायम रहने का फैसला किया था। इसके तहत कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पहले दो पैरा ही गाए जाएंगे। बीजेपी कांग्रेस के इस फैसले का विरोध कर रही है।

बैठक से पहले बीजेपी मुख्यालय में वंदे मातरम के सभी छह पैरा गाए गए।

बैठक से पहले बीजेपी मुख्यालय में वंदे मातरम के सभी छह पैरा गाए गए।

14 से 25 साल के युवाओं को जोड़ेगी BJP

BJP की नई टीम ‘युवा संवाद’ अभियान के जरिए 14 से 25 साल के युवाओं से जुड़ेगी। इसमें बातचीत और चर्चा के जरिए जेन-जी की सोच, समस्याओं और उम्मीदों को समझने की कोशिश होगी। युवाओं को BJP नेताओं से सीधे सवाल करने और अपनी बात रखने का मौका भी मिलेगा। कार्यक्रमों का शेड्यूल और जगहों की जानकारी जल्द जारी होगी।

Gen-Z क्यों जरूरी है: 2 चुनावी गणित समझिए

1. साल 2027 में 7 राज्यों में चुनाव, 22% वोटर जेन-जी

2027 में यूपी, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनाव होंगे। इन 7 राज्यों में करीब 22% वोटर 18 से 29 साल की उम्र के हैं।

पिछले विधानसभा चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इन राज्यों की कुल 940 सीटों में 257 सीटें यानी करीब 27% सीटों पर जीत का अंतर 5% या उससे कम रहा था।

ऐसे में अगर 18-29 साल के वोटर्स में से सिर्फ 5% वोटर भी एकजुट होकर किसी एक पार्टी के पक्ष में वोट करते हैं, तो कई सीटों पर मुकाबले का नतीजा बदल सकता है। यही वजह है कि 2027 के चुनावों से पहले राजनीतिक दल Gen-Z और युवा वोटर्स तक अपनी पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

2. उम्र 14 से 17 साल के युवाओं को पार्टी क्यों जोड़ रही?

जो किशोर आज 14 या 15 साल का है, वह 2029 के लोकसभा चुनाव में पहली बार वोट डालेगा। पार्टियां जानती हैं कि अगर इस उम्र में किसी विचारधारा के प्रति लगाव पैदा कर दिया जाए, तो वह भविष्य का एक स्थायी और लॉयल वोटर बन सकता है।

सरकार भी जेन-जी से जुड़ने के लिए नेताओं को यूनिवर्सिटी भेजेगी

केंद्र सरकार ने यूनिवर्सिटी आउटरीच प्रोग्राम के जरिए कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्रों से सीधे जुड़ने की तैयारी की है। न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया था कि 19 अगस्त की कैबिनेट बैठक में यह फैसला हुआ कि केंद्रीय मंत्री अलग-अलग यूनिवर्सिटी में जाकर छात्रों से बातचीत करेंगे और उनके सवाल, विचार और समस्याएं सुनेंगे।

बैठक में मंत्रियों की सोशल मीडिया पोस्ट की पहुंच पर भी चर्चा हुई। इसमें खासतौर पर युवा लोगों तक संदेश पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करने की बात कही गई।

सरकार जेन-जी से जुड़ने की कोशिश क्यों कर रही?

  • दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से 25 जुलाई तक कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में छात्र आंदोलन हुआ। शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में युवा सड़क पर उतरे। आंदोलन सोशल मीडिया से शुरू होकर संसद तक पहुंचा।
  • आंदोलन का राजनीतिक असर भी दिखा। प्रदर्शन के बीच तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दिया। सरकार को छात्रों की दूसरी मांगें भी मांगनी पड़ी।
  • देश में युवा आबादी बड़ी है। भारत में 15-24 साल की उम्र के करीब 25.7 करोड़ युवा हैं। इतनी बड़ी आबादी चुनावी राजनीति में अहम भूमिका निभाती है।

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