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75वें जन्मदिन पर हीराबा के नरेंद्र की कहानी:लालचौक में तिरंगा फहराकर पहला फोन मां को क्यों किया, हमेशा CM/PM रहते चुनाव लड़े मोदी

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नई दिल्ली,एजेंसी। गुजरात के वडनगर का काला वासुदेव चौक। खपरैल की छत वाला छोटा सा घर। ये घर था चाय की रेहड़ी चलाने वाले दामोदरदास और हीराबा का। 17 सितंबर 1950 यानी आज ही के दिन 75 साल पहले यहां नरेंद्र मोदी का जन्म हुआ।

दामोदरदास, हीराबा, उनके पांच बेटे और एक बेटी। एक कमरे में कुल आठ लोगों का परिवार रहता था। तेज बारिश में छत जगह-जगह टपकने लगती। हीराबा रिस रहे पानी के नीचे बर्तन लगाती जातीं। नरेंद्र अपनी मां को परेशान देख उनकी मदद को दौड़ पड़ते।

दामोदरदास की चाय की दुकान रेलवे स्टेशन के बाहर थी। नरेंद्र अक्सर वहां भी पिता का हाथ बंटाते। इतनी सी आमदनी में परिवार का गुजारा संभव नहीं था, इसलिए हीराबा आस-पास के घरों में बर्तन धोतीं, मजदूरी करतीं। इसे याद कर नरेंद्र मोदी अक्सर भावुक हो जाते हैं।

नरेंद्र मोदी की शुरुआती पढ़ाई वडनगर की कुमारशाला-1 में हुई। 8 साल की उम्र में वे RSS की शाखाओं में जाने लगे।

साल 1958, दीवाली का दिन था। ‘वकील साहब’ के नाम से मशहूर RSS प्रचारक लक्ष्मणराव ईनामदार वडनगर पहुंचे। वहां बाल स्वयंसेवकों को संबोधित किया और शपथ दिलाई। इनमें 8 साल के नरेंद्र मोदी भी थे।

यहीं से नरेंद्र के मन में हिंदू राष्ट्रवाद की विचारधारा के बीज पड़े। उम्र बढ़ने के साथ नरेंद्र का मन घर के दायरे से बाहर जाने लगा। उन्होंने अपना उपनाम ‘अनिकेत’ रख लिया यानी जिसका कोई घर नहीं।

उनके समाज की परंपरा में शादी तीन चरण में होती थी। 3-4 साल की उम्र में सगाई, 13 की उम्र में शादी और 18-20 की उम्र में गौना। 13 साल के नरेंद्र की शादी भी ब्राह्मणवाड़ा गांव की जशोदाबेन के साथ कर दी गई। गौना होना बाकी था।

एक दिन नरेंद्र ने कहा, ‘मां! मेरा मन करता है कि बाहर जाकर देखूं, दुनिया क्या है। मुझे स्वामी विवेकानंद जी की राह पर चलना है।’

पास बैठे पिता बेटे के मन में उभर रहे वैराग्य से परेशान हो गए, लेकिन हीराबा बेटे का मन पहले से भांप गई थीं। उन्होंने पिता को जन्मपत्री देकर कहा- ज्योतिषी को इसकी जन्मपत्री दिखाओ!’

ज्योतिषी ने बताया- ‘इसकी तो राह ही अलग है, ईश्वर ने जहां तय किया है, ये वहीं जाएगा!’

इस तरह पिता भी माने।

घर छोड़कर नरेंद्र पहले रामकृष्ण मिशन के बेलूर मठ गए। इसके बाद दिल्ली, राजस्थान, पूर्वोत्तर और फिर हिमालय। सबसे ज्यादा समय उन्होंने गरुड़चट्टी में बिताया। करीब 2 साल बाद मोदी वापस वडनगर लौटे, लेकिन महज 17 दिनों में फिर घर छोड़ दिया।

संघ प्रचारक वकील साहब ने अहमदाबाद के ‘डॉ. हेडगेवार भवन’ में मोदी के रहने का इंतजाम कर दिया। यहां वे संघ के स्वयंसेवक, फिर शाखाओं के प्रभारी और फिर प्रचारक बन गए। 15 वर्षों तक मोदी ने देश भर में संगठन के विस्तार के लिए जी-तोड़ काम किया।

1985 में सक्रिय राजनीति में आए और जल्द ही BJP की राष्ट्रीय चुनाव समिति के सदस्य बन गए। उनके माइक्रो-मैनेजमेंट की बदौलत 1989 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने गुजरात की 14 में से 11 सीटें जीतीं।

साल 1990। लालकृष्ण आडवाणी ने राम रथयात्रा निकाली। नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ से मुंबई तक इसका बेहद सफल समन्वय किया और राष्ट्रीय नेताओं के करीब आए।

जब 2 साल बाद मुरली मनोहर जोशी ने लाल चौक पर तिरंगा फहराने के लिए एकता यात्रा निकाली तो उसमें नरेंद्र मोदी दूसरे नंबर के नेता थे। 24 जनवरी 1992 को एकता यात्रा के दौरान जम्मू में दिया उनका भाषण खूब चर्चित हुआ।

पंजाब के फगवाड़ा में एकता यात्रा पर अटैक हुआ। गोलियां चलीं। कई लोग मारे गए। नरेंद्र मोदी जानते थे, मां ये सुनकर परेशान होगी। लाल चौक पर तिरंगा फहराने के बाद जम्मू लौटे नरेंद्र मोदी ने पहला फोन अपनी मां को किया।

अहमदाबाद लौटने पर मोदी के सम्मान में एक कार्यक्रम रखा गया। यहां पहली बार मां हीराबा सार्वजनिक मंच पर मोदी की सराहना के लिए सामने आईं।

गुजरात बीजेपी तब दो खेमों में बंटी थी- शंकर सिंह वाघेला और केशुभाई पटेल। केशुभाई को मोदी अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। 1995 में दोनों खेमों में खींचतान मची। पार्टी आलाकमान ने मोदी को दिल्ली बुला लिया और राष्ट्रीय सचिव बनाया। अगले कुछ साल तक नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में रहकर काम किया।

1 अक्टूबर 2001, नरेंद्र मोदी एक टीवी पत्रकार के दाह संस्कार में गए थे। तभी तब के पीएम अटल बिहारी का बुलावा आ गया।

मोदी पीएम आवास पहुंचे, तो अटल ने कहा, ‘दिल्ली में पंजाबी खाना खाकर तुम काफी मोटे हो गए हो। फिर से गुजरात लौट जाओ।’

एक इंटरव्यू में मोदी बताते हैं कि मुझे तब तक ये अंदाजा नहीं था कि अटल जी मुझे गुजरात का मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं।

हालांकि मोदी आदेश टाल नहीं सके और अगली सुबह दिल्ली से अहमदाबाद की फ्लाइट पकड़ी। एयरपोर्ट से सीधे मां के पास गए। मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा… ‘खुशी से भरी हुई मां का पहला सवाल यही था कि क्या तुम अब यहीं रहा करोगे? मां मेरा उत्तर जानती थीं।’

7 अक्टूबर 2001। नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। हीराबा दूसरी बार सार्वजनिक मंच पर बेटे को आशीर्वाद देने पहुंचीं।

मोदी को मुख्यमंत्री बने सालभर भी नहीं हुआ था कि 2002 में गुजरात में दंगे हो गए। सरकार पर दंगे प्रायोजित करने के आरोप लगे। तब मोदी ने एक इंटरव्यू में कहा- ‘क्रिया और प्रतिक्रिया की चेन चल रही है। हम चाहते हैं कि न क्रिया हो न प्रतिक्रिया।’

गुजरात दंगों पर नरेंद्र मोदी को पहले मजिस्टीरियल कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई। इन आरोपों पर वो कभी डिफेंसिव भी नजर नहीं आए।

मोदी की ‘हिंदू हृदय सम्राट’ की छवि के साथ जुड़ा आर्थिक तरक्की का ‘गुजरात मॉडल’ और बीजेपी ने 2014 लोकसभा चुनाव से पहले मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बना दिया।

मोदी युग से पहले 1999 में बीजेपी अधिकतम 182 सीटें जीत सकी थी, लेकिन 2014 चुनाव में पहली बार 282 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत हासिल किया। नरेंद्र मोदी बने भारत के 16वें प्रधानमंत्री।

पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी संसद पहुंचे, तो सीढ़ियों को माथे से लगाया।

मोदी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद हीराबा प्रधानमंत्री आवास आईं। वो तस्वीरें मोदी और हीराबा के लिए बेशक महत्वपूर्ण थीं, लेकिन भारतीय लोकतंत्र के लिए उससे भी ज्यादा। दूसरे के घरों में बर्तन धोने वाली एक महिला का बेटा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रधानमंत्री बन गया था।

मोदी युग में 2018 तक बीजेपी 21 राज्यों की सत्ता में आ गई।

मोदी युग में 2018 तक बीजेपी 21 राज्यों की सत्ता में आ गई।

इलेक्टोरल पॉलिटिक्स में आने के बाद से नरेंद्र मोदी ने अब तक कुल 7 चुनाव लड़े हैं। सभी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री रहते हुए लड़े और सभी चुनावों में एकतरफा जीत हासिल की है। 2019 और 2024 चुनाव जीतकर मोदी लगातार सबसे ज्यादा समय तक पद पर रहने वाले देश के दूसरे प्रधानमंत्री बन गए हैं। उनसे आगे अब सिर्फ नेहरू हैं।

30 दिसंबर 2022 को हीराबा का 100 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 75 वर्ष के हो चले नरेंद्र मोदी का मां के बगैर आज तीसरा जन्मदिन है। उनके सक्रिय राजनीतिक जीवन का सिलसिला अनवरत जारी है।

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खेल

एशियाड में भारत को 10वां गोल्ड, ईरान को पीछे छोड़ा:तीरंदाजी में 3, शूटिंग में 1 गोल्ड, मेडल टैली में सातवें नंबर पर पहुंचा भारत

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारत ने एशियन गेम्स के 11वें दिन 4 गोल्ड जीते। इनमें 3 गोल्ड तीरंदाजी और 1 शूटिंग में आया। इसके साथ भारत के 10 गोल्ड समेत 60 मेडल हो गए हैं। वह ईरान को पीछे छोड़कर मेडल टैली में 7वें नंबर पर पहुंच गया है।

बुधवार को पहला गोल्ड विमेंस कंपाउंड आर्चरी टीम ने जीता। इसके बाद चिकिता तनिपार्थी और साहिल जाधव की जोड़ी ने मिक्स्ड कंपाउंड आर्चरी में गोल्ड जीता। नीरू ढांडा और किनान चेनाई की जोड़ी को शूटिंग में गोल्ड मिला। दिन का चौथा गोल्ड कंपाउंड आर्चरी के पुरुष टीम इवेंट में साहिल, गणेश और कुशल ने जीता।

आर्चरी में दिन के तीनों गोल्ड भारत के नाम

  • भारत ने कंपाउंड आर्चरी के तीनों इवेंट में गोल्ड जीते। विमेंस टीम ने चीन को 238-234 से हराकर अपने खिताब का बचाव किया।
  • मिक्स्ड टीम फाइनल में चिकिता और साहिल का मुकाबला साउथ कोरिया की पार्क जंगयून और चोई योंगही से था। भारत ने शूट-ऑफ में गोल्ड अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत ने लॉस एंजिलिस ओलिंपिक के कंपाउंड मिक्स्ड टीम इवेंट के लिए कोटा भी हासिल किया।
  • पुरुष टीम फाइनल में साहिल, गणेश और कुशल की टीम ने चीन को 238-237 से हराया। भारत शुरुआती एंड में 58-60 से पीछे था, लेकिन इसके बाद भारतीय तीरंदाजों ने लगातार शानदार निशाने लगाए। फाइनल के बाद के 180 में भारत ने 180 अंक हासिल किए। साहिल ने अपने सभी 8 शॉट में 10 अंक बनाए, जबकि गणेश और कुशल ने भी दबाव के बीच लगातार 10 लगाए।
आर्चरी में फाइनल जीतने के बाद भारतीय टीम सेलिब्रेट करती हुई।

आर्चरी में फाइनल जीतने के बाद भारतीय टीम सेलिब्रेट करती हुई।

नीरू-किनान ने शूटिंग में दिलाया गोल्ड

ट्रैप मिक्स्ड टीम फाइनल में नीरू ढांडा और किनान चेनाई ने भारत को गोल्ड दिलाया। भारत ने शुरुआत में 10 में से 6 हिट किए थे और एक समय चार टीमों में सबसे नीचे था। इसके बाद दोनों ने एक भी टारगेट मिस नहीं किया और शानदार वापसी करते हुए गोल्ड जीता। भारत ने कतर को सिर्फ एक अंक से पीछे छोड़ा। चीन ने ब्रॉन्ज जीता।

नीरू का यह इन गेम्स में दूसरा गोल्ड है। इससे एक दिन पहले उन्होंने विमेंस ट्रैप इंडिविजुअल इवेंट में गोल्ड जीता था।

हॉकी: साउथ कोरिया को 2-0 हराकर फाइनल में भारत

भारतीय महिला हॉकी टीम ने साउथ कोरिया को 2-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। भारत के लिए इशिका ने पेनल्टी कॉर्नर की वैरिएशन पर गोल किया, जबकि कप्तान सलिमा ने दूसरे हाफ में बढ़त दोगुनी की। अब भारत का गोल्ड मेडल मैच चीन से होगा। यह मुकाबला 2 अक्टूबर को खेला जाएगा।

बॉक्सिंग में 2 ब्रॉन्ज, लवलीना फाइनल में

  • बॉक्सिंग में प्रियंका घंघास को विमेंस 60 किग्रा सेमीफाइनल में चीन की यांग चेंग्यू से 4-1 से हार मिली। उन्हें ब्रॉन्ज मिला।
  • कपिल पोखरियाने पुरुषों के 90 किग्रा सेमीफाइनल में उज्बेकिस्तान के तुराबेक खाबिबुल्लाएव के खिलाफ 4-1 से हार के बाद ब्रॉन्ज जीता।
  • वहीं लवलीना बोरगोहेन ने विमेंस 75 किग्रा सेमीफाइनल में कजाकिस्तान की नताल्या बोगदानोवा को 3-2 से हराकर फाइनल में जगह बनाई।
लवलीना बोरगोहेन गोल्ड मेडल के लिए चीन की बाओ जिइ से भिड़ेंगी।

लवलीना बोरगोहेन गोल्ड मेडल के लिए चीन की बाओ जिइ से भिड़ेंगी।

रेसलिंग: सुनील कुमार को ब्रॉन्ज

सुनील कुमार ने पुरुषों के ग्रीको-रोमन 87 किग्रा में ब्रॉन्ज जीता। सेमीफाइनल में जापान के ताइजो योशिदा से 11-0 की हार के बाद उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल बाउट में फिलीपींस के कैलम रॉबर्ट्स को 9-0 से हराया। यह हांगझोउ के बाद सुनील का लगातार दूसरा एशियन गेम्स ब्रॉन्ज है। वह एशियन गेम्स में ग्रीको-रोमन रेसलिंग के दो मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बने।

स्क्वॉश में दोनों टीमों ने पक्के किए मेडल

भारतीय महिला स्क्वॉश टीम ने सिंगापुर को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई और मेडल पक्का किया। तन्वी खन्ना ने वाई लिन ऑ योंग को 3-1 और अनाहत सिंह ने वाई यान ऑ योंग को 3-0 से हराया।

पुरुष टीम ने कुवैत को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। वीर छत्रानी ने बादेर अलमोगरेबी को 3-1 और अभय सिंह ने अम्मार अल-तमिमी को 3-0 से हराया। अब डिफेंडिंग चैंपियन भारत का सामना मलेशिया से होगा।

टेनिस: सुमित क्वार्टरफाइनल में

सुमित नागल ने पुरुष सिंगल्स के तीसरे दौर में उज्बेकिस्तान के सर्गेई फोमिन को 6-3, 6-2 से हराकर क्वार्टरफाइनल में जगह बनाई। अब उनका मुकाबला चीन के वू यीबिंग से होगा।

हालांकि पुरुष डबल्स में युकी भांबरी और धक्षिणेश्वर सुरेश की जोड़ी क्वार्टरफाइनल में चीनी ताइपे की हो चेनजुई-ह्सू यू-ह्सिओउ जोड़ी से 6-7 (5-7), 3-6 से हार गई।

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देश

SIR में नाम कटे तो दोबारा जुड़वाना आसान:फॉर्म-6 से 2003 वाला सवाल हटाया, माता-पिता का रिकॉर्ड नहीं खोजना होगा, बदलाव के मायने

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नई दिल्ली, एजेंसी। चुनाव आयोग ने SIR पूरा हो चुके राज्यों में फॉर्म-6 में बड़ा बदलाव किया है। अब SIR में नाम कटने के बाद दोबारा नाम जुड़वाने के लिए 2003 की वोटर लिस्ट की जानकारी नहीं देनी होगी। आवेदक को यह बताने की जरूरत नहीं होगी कि उसका, माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस लिस्ट में था या नहीं। फॉर्म-6 से इससे जुड़ा अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि नाम बिना जांच के जुड़ जाएगा। वोटर बनने की पात्रता की जांच पहले की तरह होगी। फॉर्म-6 की सामान्य प्रक्रिया भी जारी रहेगी। यह बदलाव फिलहाल सिर्फ उन राज्यों में लागू है, जहां SIR पूरा हो चुका है।

चुनाव आयोग के फॉर्म 6 में माता-पिता का पिछले SIR में नाम होने की डिटेल भरनी होती थी। SIR हो चुके राज्यों के लिए इस हिस्से को हटाया गया है।

चुनाव आयोग के फॉर्म 6 में माता-पिता का पिछले SIR में नाम होने की डिटेल भरनी होती थी। SIR हो चुके राज्यों के लिए इस हिस्से को हटाया गया है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दो चुनाव आयुक्तों विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस पर आपत्ति जताई थी। फॉर्म 6 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए होता है।

5 सवाल-जवाब में जानिए नए बदलाव के मायने

1. सवाल: मेरा नाम SIR में कट गया है। अब दोबारा नाम जुड़वाने के लिए क्या 2003 की वोटर लिस्ट में माता-पिता का नाम बताना होगा?

जवाब: नहीं। जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां फॉर्म-6 से SIR वाला अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया गया है। इसलिए नाम दोबारा जुड़वाने के लिए यह बताना जरूरी नहीं होगा कि आपका या माता-पिता का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में था या नहीं।

2. सवाल: क्या जिन लोगों के नाम SIR में कटे हैं, उनके नाम बिना जांच के वापस जुड़ जाएंगे?

जवाब: नहीं। घोषणा-पत्र हटने का मतलब जांच खत्म होना नहीं है। Form 6 की सामान्य प्रक्रिया और मतदाता बनने की पात्रता की जांच पहले की तरह रहेगी।

3. सवाल: जो पहली बार वोटर बनने जा रहे हैं, उन्हें इसका क्या फायदा होगा?

जवाब: उन्हें भी फॉर्म-6 भरते समय अपने माता-पिता या दादा-दादी का 2003 की वोटर लिस्ट से जुड़ा विवरण देने की अतिरिक्त घोषणा नहीं करनी होगी। इससे पहली बार नाम जुड़वाने की प्रक्रिया आसान होगी।

4. सवाल: फिर 2003 की वोटर लिस्ट की जानकारी की जरूरत ही नहीं रहेगी?

जवाब: ऐसा नहीं है। पुरानी वोटर लिस्ट SIR की प्रक्रिया में रिकॉर्ड की जांच और मिलान के लिए इस्तेमाल हो सकती है। बस फॉर्म-6 में उससे जुड़ा अतिरिक्त घोषणा-पत्र देना जरूरी नहीं रहेगा।

5. सवाल: आखिर इस बदलाव का सीधा फायदा किसे होगा?

जवाब: दोनों तरह के वोटर्स को, जिनका नाम SIR में कट गया है और जो पहली बार वोटर बन रहे हैं। दोनों के लिए फॉर्म-6 की प्रक्रिया से एक अतिरिक्त घोषणा हट गई है। खासकर नए वोटर्स के लिए यह आसान होगा, क्योंकि उन्हें पुराने वोटर रिकॉर्ड में माता-पिता या दादा-दादी का नाम खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

रिपोर्ट- दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी

  • द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने फॉर्म 6 में SIR से जुड़ी जानकारी जोड़ने पर आपत्ति जताई थी।
  • उनका कहना था कि नियमों में बदलाव किए बिना वैधानिक फॉर्म 6 में नया हिस्सा जोड़ दिया गया।
  • विवेक जोशी ने कहा कि फॉर्म 6 नियमों के तहत तय फॉर्म है, इसलिए इसमें बदलाव के लिए पहले नियमों में संशोधन जरूरी है।
  • वहीं, सुखबीर सिंह संधू ने ऑनलाइन फॉर्म 6 में जोड़े गए हिस्से को “अनधिकृत और अवैध” बताते हुए उसे हटाने की बात कही थी।

10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हुआ SIR

SIR के पहले और दूसरे फेज में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। SIR के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम विधानसभा चुनाव में भाजपा जीती है। केरल में कांग्रेस गठबंधन और तमिलनाडु में TVK ने जीत हासिल की है। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) हुआ। यहां भी भाजपा सरकार की वापसी हुई।

तीसरा फेज: दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों में SIR

चुनाव आयोग ने 14 मई को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की थी। यह SIR का तीसरा फेज है।

पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन हो रहा है। जिन राज्यों में SIR होगा, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। अन्य 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होंगे।

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देश

शाह बोले- दिल्ली शराब घोटाले वाले नशामुक्ति नहीं कर सकते:AAP ने पंजाब को चिट्‌टे में धकेला, 31 दिसंबर 2029 से पहले हम नशामुक्त कर देंगे

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जालंधर, एजेंसी। गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को जालंधर में कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने पंजाब को चिट्‌टे (नशे) में धकेल दिया है। 2027 का चुनाव भाजपा नशामुक्त पंजाब के नाम पर लड़ेगी।

मैं पंजाब के युवाओं को वादा करके जाता हूं कि भाजपा को वोट करें। हम 31 दिसंबर 2029 से पहले पंजाब को नशा मुक्त कर देंगे। उन्होंने रैली में कहा-

भगवंत मान ने नशे के व्यापार को और बढ़ाया है। नशे में गुरु का अपमान करने वाला नशामुक्ति नहीं कर सकता। जो दिल्ली में शराब बेचने के घोटाले में पकड़े गए हों, वे पंजाब को नशामुक्त कैसे करेंगे?

शाह की रैली से पहले बम की धमकी भी मिली थी। कैंब्रिज स्कूल को भेजे ई-मेल में दावा किया गया कि रैली के स्टेज के नीचे IED रखा गया है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की जांच में वहां कुछ नहीं मिला।

रैली को संबोधित करते वक्त अमित शाह को 4 बार खांसी आई। इसके बाद उनके सुरक्षाकर्मी ने डायस पर पानी का गिलास रखा।

रैली को संबोधित करते वक्त अमित शाह को 4 बार खांसी आई। इसके बाद उनके सुरक्षाकर्मी ने डायस पर पानी का गिलास रखा।

शाह की रैली में भीड़ जुटाकर BJP ने नशे के मुद्दे पर 2027 का चुनाव लड़ने का ऐलान किया।

शाह की रैली में भीड़ जुटाकर BJP ने नशे के मुद्दे पर 2027 का चुनाव लड़ने का ऐलान किया।

रैली में शाह की बड़ी बातें

  • जवानों के लिए: आजादी से पहले का समय हो या बाद का, जब भी देश की सुरक्षा की बात आती है, पंजाब का जवान सबसे पहले अपनी जान देने के लिए तैयार रहता है। आज भी जब सेना में जो बोले सो निहाल… का नारा लगता है, तो पाकिस्तानी सेना उल्टे पांव भाग जाती है।
  • किसानों के लिए: देश में जब भी खाने-पीने की किल्लत या जरूरत पड़ी, पंजाब के किसानों ने कड़ी मेहनत कर हमेशा देश के अन्न भंडार को भरने का काम किया है। पंजाब सरकार ने किसानों को 26 फसलों पर MSP देने का वादा किया गया था, लेकिन सरकार उसे पूरा करने में विफल रही। इसके विपरीत, पड़ोसी राज्य हरियाणा ने अपने किसानों को फसलों पर MSP दे दी है। सरकार बनी तो किसानों के मुद्दे का परमानेंट हल करेंगे।
  • युवाओं के लिए: जब कुश्ती खेलने वाला देश का होनहार युवा नशे के कारण असमय मौत का शिकार होता है, तो बहुत दुख होता है। पंजाब के युवाओं से वादा है कि राज्य के सुनहरे भविष्य के लिए BJP को वोट दें, उन्हें नशे के इस दलदल से निकाल लेंगे। उन्हें रोजगार के उचित मौके देंगे।
  • नशामुक्ति के लिए: भाजपा नशामुक्त पंजाब वादे को पूरा करेंगी। मैं खुद उन पीड़ित माताओं से मिलकर आया हूं, जिन्होंने नशे के कारण अपने बेटों को खो दिया। एक मां अपनी गोद में अपने 2 मृत बच्चों की तस्वीर लेकर पंजाब को बचाने की गुहार लगा रही थी।
  • पंजाब सरकार के लिए: पिछले 3 सालों में पंजाब सरकार ने एंटी-ड्रग्स की एक भी बैठक नहीं की। जालंधर में NCB का दफ्तर खोलने के केंद्र के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया। आज पंजाब में महिलाओं की सुरक्षा एक बहुत गंभीर मुद्दा बन चुकी है, जिसे भाजपा सरकार आने पर प्राथमिकता से सुधारा जाएगा।
अमित शाह ने जालंधर के श्री देवी तलाब मंदिर में जोत जलाकर माथा टेका।

अमित शाह ने जालंधर के श्री देवी तलाब मंदिर में जोत जलाकर माथा टेका।

शाह ने पंजाब सरकार पर घोटालों के आरोप लगाए

  • मोगा विज्ञापन घोटाला: मोगा में विज्ञापन आवंटन में घपला हुआ है। पंजाब सरकार जनता के पैसे का दुरुपयोग कर रही है और सालाना 785 करोड़ रुपए सिर्फ अपने प्रचार और विज्ञापनों पर खर्च कर रही है।
  • बरनाला भूमि घोटाला: बरनाला भूमि घोटाले में सरकार की नीयत ठीक नहीं है। इसकी जांच होनी चाहिए।
  • पंजीरी घोटाला: बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण के लिए बांटी जाने वाली पंजीरी में हुए कथित घोटाले का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि राज्य में हर महीने अवैध उगाही का खेल चल रहा है।
  • खनन आय में गिरावट का आरोप: शाह ने CM भगवंत मान का नाम लेकर पूछा कि सरकार ने राज्य में अवैध खनन को रोककर इनकम बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन इसके विपरीत माइनिंग से होने वाली आय पहले से भी और कम हो गई है।
श्री देवी तालाब मंदिर में माथा टेकने के बाद गृह मंत्री अमित शाह और पंजाब भाजपा प्रधान केवल सिंह ढिल्लों ने पंजाब के मशहूर हॉटेलियर गौतम कपूर से मुलाकात की। वे होटल व्यापारी के घर करीब 40 मिनट तक रुके। इस दौरान उन्होंने वहां लंच भी किया। इसके बाद शाह रैली के लिए लिए रवाना हुए।

श्री देवी तालाब मंदिर में माथा टेकने के बाद गृह मंत्री अमित शाह और पंजाब भाजपा प्रधान केवल सिंह ढिल्लों ने पंजाब के मशहूर हॉटेलियर गौतम कपूर से मुलाकात की। वे होटल व्यापारी के घर करीब 40 मिनट तक रुके। इस दौरान उन्होंने वहां लंच भी किया। इसके बाद शाह रैली के लिए लिए रवाना हुए।

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