नई दिल्ली,एजेंसी। गुजरात के वडनगर का काला वासुदेव चौक। खपरैल की छत वाला छोटा सा घर। ये घर था चाय की रेहड़ी चलाने वाले दामोदरदास और हीराबा का। 17 सितंबर 1950 यानी आज ही के दिन 75 साल पहले यहां नरेंद्र मोदी का जन्म हुआ।
दामोदरदास, हीराबा, उनके पांच बेटे और एक बेटी। एक कमरे में कुल आठ लोगों का परिवार रहता था। तेज बारिश में छत जगह-जगह टपकने लगती। हीराबा रिस रहे पानी के नीचे बर्तन लगाती जातीं। नरेंद्र अपनी मां को परेशान देख उनकी मदद को दौड़ पड़ते।
दामोदरदास की चाय की दुकान रेलवे स्टेशन के बाहर थी। नरेंद्र अक्सर वहां भी पिता का हाथ बंटाते। इतनी सी आमदनी में परिवार का गुजारा संभव नहीं था, इसलिए हीराबा आस-पास के घरों में बर्तन धोतीं, मजदूरी करतीं। इसे याद कर नरेंद्र मोदी अक्सर भावुक हो जाते हैं।
नरेंद्र मोदी की शुरुआती पढ़ाई वडनगर की कुमारशाला-1 में हुई। 8 साल की उम्र में वे RSS की शाखाओं में जाने लगे।
साल 1958, दीवाली का दिन था। ‘वकील साहब’ के नाम से मशहूर RSS प्रचारक लक्ष्मणराव ईनामदार वडनगर पहुंचे। वहां बाल स्वयंसेवकों को संबोधित किया और शपथ दिलाई। इनमें 8 साल के नरेंद्र मोदी भी थे।
यहीं से नरेंद्र के मन में हिंदू राष्ट्रवाद की विचारधारा के बीज पड़े। उम्र बढ़ने के साथ नरेंद्र का मन घर के दायरे से बाहर जाने लगा। उन्होंने अपना उपनाम ‘अनिकेत’ रख लिया यानी जिसका कोई घर नहीं।
उनके समाज की परंपरा में शादी तीन चरण में होती थी। 3-4 साल की उम्र में सगाई, 13 की उम्र में शादी और 18-20 की उम्र में गौना। 13 साल के नरेंद्र की शादी भी ब्राह्मणवाड़ा गांव की जशोदाबेन के साथ कर दी गई। गौना होना बाकी था।
एक दिन नरेंद्र ने कहा, ‘मां! मेरा मन करता है कि बाहर जाकर देखूं, दुनिया क्या है। मुझे स्वामी विवेकानंद जी की राह पर चलना है।’
पास बैठे पिता बेटे के मन में उभर रहे वैराग्य से परेशान हो गए, लेकिन हीराबा बेटे का मन पहले से भांप गई थीं। उन्होंने पिता को जन्मपत्री देकर कहा- ज्योतिषी को इसकी जन्मपत्री दिखाओ!’
ज्योतिषी ने बताया- ‘इसकी तो राह ही अलग है, ईश्वर ने जहां तय किया है, ये वहीं जाएगा!’
इस तरह पिता भी माने।
घर छोड़कर नरेंद्र पहले रामकृष्ण मिशन के बेलूर मठ गए। इसके बाद दिल्ली, राजस्थान, पूर्वोत्तर और फिर हिमालय। सबसे ज्यादा समय उन्होंने गरुड़चट्टी में बिताया। करीब 2 साल बाद मोदी वापस वडनगर लौटे, लेकिन महज 17 दिनों में फिर घर छोड़ दिया।
संघ प्रचारक वकील साहब ने अहमदाबाद के ‘डॉ. हेडगेवार भवन’ में मोदी के रहने का इंतजाम कर दिया। यहां वे संघ के स्वयंसेवक, फिर शाखाओं के प्रभारी और फिर प्रचारक बन गए। 15 वर्षों तक मोदी ने देश भर में संगठन के विस्तार के लिए जी-तोड़ काम किया।
1985 में सक्रिय राजनीति में आए और जल्द ही BJP की राष्ट्रीय चुनाव समिति के सदस्य बन गए। उनके माइक्रो-मैनेजमेंट की बदौलत 1989 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने गुजरात की 14 में से 11 सीटें जीतीं।
साल 1990। लालकृष्ण आडवाणी ने राम रथयात्रा निकाली। नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ से मुंबई तक इसका बेहद सफल समन्वय किया और राष्ट्रीय नेताओं के करीब आए।
जब 2 साल बाद मुरली मनोहर जोशी ने लाल चौक पर तिरंगा फहराने के लिए एकता यात्रा निकाली तो उसमें नरेंद्र मोदी दूसरे नंबर के नेता थे। 24 जनवरी 1992 को एकता यात्रा के दौरान जम्मू में दिया उनका भाषण खूब चर्चित हुआ।
पंजाब के फगवाड़ा में एकता यात्रा पर अटैक हुआ। गोलियां चलीं। कई लोग मारे गए। नरेंद्र मोदी जानते थे, मां ये सुनकर परेशान होगी। लाल चौक पर तिरंगा फहराने के बाद जम्मू लौटे नरेंद्र मोदी ने पहला फोन अपनी मां को किया।
अहमदाबाद लौटने पर मोदी के सम्मान में एक कार्यक्रम रखा गया। यहां पहली बार मां हीराबा सार्वजनिक मंच पर मोदी की सराहना के लिए सामने आईं।
गुजरात बीजेपी तब दो खेमों में बंटी थी- शंकर सिंह वाघेला और केशुभाई पटेल। केशुभाई को मोदी अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। 1995 में दोनों खेमों में खींचतान मची। पार्टी आलाकमान ने मोदी को दिल्ली बुला लिया और राष्ट्रीय सचिव बनाया। अगले कुछ साल तक नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में रहकर काम किया।
1 अक्टूबर 2001, नरेंद्र मोदी एक टीवी पत्रकार के दाह संस्कार में गए थे। तभी तब के पीएम अटल बिहारी का बुलावा आ गया।
मोदी पीएम आवास पहुंचे, तो अटल ने कहा, ‘दिल्ली में पंजाबी खाना खाकर तुम काफी मोटे हो गए हो। फिर से गुजरात लौट जाओ।’
एक इंटरव्यू में मोदी बताते हैं कि मुझे तब तक ये अंदाजा नहीं था कि अटल जी मुझे गुजरात का मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं।
हालांकि मोदी आदेश टाल नहीं सके और अगली सुबह दिल्ली से अहमदाबाद की फ्लाइट पकड़ी। एयरपोर्ट से सीधे मां के पास गए। मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा… ‘खुशी से भरी हुई मां का पहला सवाल यही था कि क्या तुम अब यहीं रहा करोगे? मां मेरा उत्तर जानती थीं।’
7 अक्टूबर 2001। नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। हीराबा दूसरी बार सार्वजनिक मंच पर बेटे को आशीर्वाद देने पहुंचीं।
मोदी को मुख्यमंत्री बने सालभर भी नहीं हुआ था कि 2002 में गुजरात में दंगे हो गए। सरकार पर दंगे प्रायोजित करने के आरोप लगे। तब मोदी ने एक इंटरव्यू में कहा- ‘क्रिया और प्रतिक्रिया की चेन चल रही है। हम चाहते हैं कि न क्रिया हो न प्रतिक्रिया।’
गुजरात दंगों पर नरेंद्र मोदी को पहले मजिस्टीरियल कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई। इन आरोपों पर वो कभी डिफेंसिव भी नजर नहीं आए।
मोदी की ‘हिंदू हृदय सम्राट’ की छवि के साथ जुड़ा आर्थिक तरक्की का ‘गुजरात मॉडल’ और बीजेपी ने 2014 लोकसभा चुनाव से पहले मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बना दिया।
मोदी युग से पहले 1999 में बीजेपी अधिकतम 182 सीटें जीत सकी थी, लेकिन 2014 चुनाव में पहली बार 282 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत हासिल किया। नरेंद्र मोदी बने भारत के 16वें प्रधानमंत्री।
पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी संसद पहुंचे, तो सीढ़ियों को माथे से लगाया।
मोदी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद हीराबा प्रधानमंत्री आवास आईं। वो तस्वीरें मोदी और हीराबा के लिए बेशक महत्वपूर्ण थीं, लेकिन भारतीय लोकतंत्र के लिए उससे भी ज्यादा। दूसरे के घरों में बर्तन धोने वाली एक महिला का बेटा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रधानमंत्री बन गया था।
मोदी युग में 2018 तक बीजेपी 21 राज्यों की सत्ता में आ गई।
इलेक्टोरल पॉलिटिक्स में आने के बाद से नरेंद्र मोदी ने अब तक कुल 7 चुनाव लड़े हैं। सभी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री रहते हुए लड़े और सभी चुनावों में एकतरफा जीत हासिल की है। 2019 और 2024 चुनाव जीतकर मोदी लगातार सबसे ज्यादा समय तक पद पर रहने वाले देश के दूसरे प्रधानमंत्री बन गए हैं। उनसे आगे अब सिर्फ नेहरू हैं।
30 दिसंबर 2022 को हीराबा का 100 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 75 वर्ष के हो चले नरेंद्र मोदी का मां के बगैर आज तीसरा जन्मदिन है। उनके सक्रिय राजनीतिक जीवन का सिलसिला अनवरत जारी है।
नई दिल्ली, एजेंसी। 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने लाल किले पर 75 मिनट की स्पीच दी। पीएम ने कहा- ‘हथियारी नक्सल तो चले गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। समाज को गलत राह पर ले जाने के लिए तरह-तरह के काम कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘ऐसे लोग हिंसा अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं। इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा और इन्हें आइसोलेट करना होगा और विकसित राष्ट्र बनाने की ओर देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा।’
पीएम ने 75 मिनट के भाषण में 52 बार युवाओं का जिक्र किया। इसमें ‘युवा’ शब्द 20 बार, ‘नौजवान’ 22 बार और ‘साथियों’ 10 बार कहा। पीएम ने कहा कि सरकार अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI स्किल्स की ट्रेनिंग देगी। गरीब और मिडिल क्लास परिवारों के युवाओं के लिए कई परीक्षाओं की फ्री ऑनलाइन कोचिंग दी जाएगी।
इससे पहले लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम गाया गया। पीएम ने तिरंगा फहराया। उसके बाद राष्ट्रगान हुआ, 21 तोपों की सलामी दी गई।
पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर 13वीं बार तिरंगा फहराया।
पीएम का संबोधन, 7 बड़ी बातें, कहा- हथियारबंद नक्सल गए, दिमागी नक्सल मौजूद
1. दिमागी नक्सलियों पर
‘हमने नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प लिया था। आज नक्सल क्षेत्र में नक्सल मुक्त होने के कारण विकास का तिरंगा लहरा रहा है। हमें सावधान रहने की जरूरत है। हथियारबंद नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। इन दिमागी नक्सलों को पहचानना होगा। इन्हें युवाओं को भटकाने से बचाना होगा।’
2. महिला आरक्षण पर
हमारी माताओं बहनों को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिले। वे भारत की नीति में अपना योगदान दें। समय की मांग है। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं। आइए महिला आरक्षण लागू करके महिलाओं के सम्मान में आप भी जुड़िए और क्रेडिट लीजिए लेकिन मेरी माताओं बहनों को हक दीजिए।
3. 2047 के लक्ष्य पर
2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है। हमारी दिशा तय हो चुकी है। हमें उसे प्राप्त करके रहना है। इसके लिए हमें हमारे वर्क कल्चर और हमारी सोच को भी बदलना होगा। जो काम पिछले 5-7 दशक में नहीं हुए हैं, वो काम हमें आगामी 5-7 साल में करने हैं।
4. ग्लोबलाइजेशन पर
एक समय था जब मैं आत्मनिर्भरता की बात कर रहा था तो कुछ एयर कंडीशन चेंबर में बैठकर सोचने वाले लोग हमें बता रहे थे कि ग्लोबलाइजेशन का क्या होगा, लेकिन पूरी दुनिया देख रही है कि पिछले 1 दशक में ऐसा लग रहा है कि लोगों ने ग्लोबलाइजेशन बोलना ही बंद कर दिया।
5. युवाओं पर
‘एक साल में 1 करोड़ युवाओं को एआई (AI) स्किल्स की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके साथ ही छात्रों के लिए ऑनलाइन फ्री कोचिंग व्यवस्था की शुरुआत भी की जाएगी।’
6. आत्मनिर्भर पर
बीते सालों में हमारा दृढ़ विश्वास रहा है कि भारत को अब दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं जीना है। हमें आत्मनिर्भर बनना चाहिए। दुनिया में बहुत कुछ मिलता है, सस्ता मिलता है, जल्दी मिलता है लेकिन उससे हमारा सामर्थ्य तैयार नहीं होता। इसलिए हमें भी अपनी क्षमताओं को बढ़ाना है। अपने हितों की सुरक्षा हमें खुद करनी है इसलिए आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं।
7. आपदाओं पर
‘अब छोटे सपनों से काम चलने वाला नहीं है। हमें बड़े सपने देखने होंगे क्योंकि बड़े सपने हमारी सोच को भी विस्तार देते हैं। हमारे संकल्प दृढ़ होने चाहिए। जब संकल्प दृढ़ होता है तो कठिनाइयों से, आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप उभर कर आता है।
नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी, NALSAR से जुड़े विवाद पर काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को फटकार लगाई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि भले ही छात्रों का फैसला गलत हो या उन्हें किसी ने गलत सलाह दी हो, फिर भी उन्हें अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है।
जस्टिस सूर्यकांत ने BCI के उस सर्कुलर पर भी नाराजगी जताई जिसमें NALSAR के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स का वकील के तौर पर एनरोलमेंट रोकने को कहा गया था। CJI ने कहा- यह मेरे और छात्रों के बीच का मामला है। इसे मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं थी। बार काउंसिल इसमें दखल देने वाला कौन होता है?
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस भी जारी किया और यूनिवर्सिटी के किसी छात्र या फैकल्टी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया। NALSAR के करीब 450 छात्र जस्टिस सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह 2026का चीफ गेस्ट बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं।
CJI की टिप्पणी से नाराज हैं छात्र
NALSAR यानी नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च, हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी है। यहां करीब 1,400 छात्र पढ़ते हैं। इनमें से करीब 450 छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर CJI को चीफ गेस्ट बनाने का न्योता वापस लेने की मांग की थी। समारोह की तारीख अभी तय नहीं है।
छात्रों की नाराजगी CJI की पिछले महीने की एक टिप्पणी को लेकर थी। यह टिप्पणी दिल्ली में NEET प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान की गई थी।
बार काउंसिल ने सभी 2026 ग्रेजुएट्स का एनरोलमेंट रोक दिया था
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 13 अगस्त को सभी स्टेट बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि NALSAR के 2026 बैच के किसी भी ग्रेजुएट को अगले आदेश तक वकील के तौर पर एनरोल न किया जाए।
साथ ही यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी। यूनिवर्सिटी से उन लोगों की पहचान करने को कहा गया, जो कैंपेन शुरू करने, उसका ड्राफ्ट तैयार करने, उसे फैलाने, छात्रों को जुटाने, मीडिया से संपर्क करने, ऑनलाइन ग्रुप चलाने या बहिष्कार की अपील करने में मुख्य भूमिका में थे।
काउंसिल ने अपने शुरुआती लेटर में कहा था कि कानून के छात्र से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद के प्रति सम्मान की उम्मीद की जाती है। सम्मान न करने वाले छात्र भविष्य में जिम्मेदार वकील, शिक्षक या जज बनने की भूमिका के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते। BCI ने यह भी आरोप लगाया था कि कुछ शिक्षकों के बीच ग्रुपिज्म और गंदी राजनीति ने छात्रों को कैंपेन के लिए उकसाने में भूमिका निभाई।
कुछ घंटे बाद ही BCI ने आदेश बदला
आदेश जारी होने के कुछ घंटे बाद BCI ने अपना रुख बदल दिया। काउंसिल ने कहा कि NALSAR के 2026 बैच के ज्यादातर छात्र निर्दोष हैं और वे CJI के अनादर वाले किसी अभियान में शामिल होने के इच्छुक नहीं थे। BCI ने कहा कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने निर्दोष छात्रों को इस अभियान में शामिल करने की कोशिश की।
इसके बाद सभी छात्रों को अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोल होने की अनुमति दे दी गई। हालांकि उस समय BCI ने कहा था कि वह NALSAR के वाइस चांसलर की रिपोर्ट का इंतजार करेगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी BCI के एक्शन पर सवाल उठाए
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के शुरुआती आदेश पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और सीनियर वकील विकास सिंह ने भी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे मनमाना, गैरकानूनी और जरूरत से ज्यादा कार्रवाई बताते हुए कहा था कि छात्रों को अपनी बात रखने के कारण वकालत में प्रवेश से वंचित करने की धमकी नहीं दी जानी चाहिए।
CJI सूर्यकांत के हाल की 3 बयान, जिसपर विवाद हुए
15 मई: CJI ने कहा था- कुछ युवा कॉकरोच की तरह भटक रहे
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान युवाओं पर टिप्पणी की थी। CJI सूर्यकांत ने कहा था- कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ RTI और दूसरे तरह के एक्टिविस्ट बन रहे हैं। ये हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।’
इस बयान के बाद ही 16 जुलाई को अभिजीत दीपके नाम के शख्स ने कॉकरोच जनता पार्टी नाम से सोशल मीडिया पेज बनाया। इसने ही दिल्ली जंतर-मंतर पर 35 दिन तक प्रदर्शन किया था।
22 जुलाई: CJI ने कहा था- हमें वीडियो देखने में दिलचस्पी नहीं है
दरअसल, 22 जुलाई को एक वकील ने CJI की अगुआई वाली 3 जजों की बेंच के सामने जनहित याचिका लगाई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने कहा- छात्र महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हैं। लेकिन उन पर पुलिस की बर्बरता के वीडियो भी हैं। यदि संभव हो तो मामले की सुनवाई जल्द की जाए।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा था, ‘हमें वीडियो में दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास देखने का समय नहीं है।’ जब वकील ने छात्रों के साथ मारपीट के वीडियो देखने का दूसरी बार अनुरोध किया तो CJI ने कहा, ‘हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए।
24 जुलाई: CJI ने कहा था- किसी भी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की हिंसा से जुड़ी 2 याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें कई राज्य पक्षकार के तौर पर शामिल हैं। इनका जिक्र पहले इसलिए नहीं किया गया क्योंकि वे डायरी नंबर का इंतजार कर रहे थे। इन दलीलों के बाद CJI ने कहा, “इसे लिस्टिंग में आने दें, हम इस पर सुनवाई करेंगे।”
नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार ने जनगणना-2027 के लिए 40 सवालों की लिस्ट जारी कर दी है। इसमें लोगों से SC, ST या अन्य जाति के बारे में पूछा जाएगा। आजादी के बाद यह पहली बार होगा जब सभी समुदायों की जाति की जानकारी जनगणना में दर्ज की जाएगी।
इससे पहले 2011 की जनगणना के फॉर्म में 29 सवाल थे। इसमें जाति से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ SC/ST का विकल्प था। जनगणना-2027 के सवालों की लिस्ट में जाति से जुड़ा सवाल नंबर 10 पर है, जिसमें SC/ST के साथ जाति शब्द भी जोड़ा गया है।
खास बात यह है कि लोगों से कोविड वैक्सीन कहां लगवाई थी, यह सवाल भी पूछा जाएगा। इसके साथ मोबाइल नंबर, आधार, वोटर ID और बैंक अकाउंट से जुड़े सवाल भी होंगे।
1. पहचान और परिवार: 12 सवालों में नाम से जाति तक जानकारी
जनगणना में व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि और उम्र पूछी जाएगी। साथ ही वैवाहिक स्थिति, शादी के समय उम्र, पति या पत्नी का नाम, राष्ट्रीयता, धर्म और SC/ST/जाति की जानकारी ली जाएगी। माता-पिता की जानकारी भी दर्ज होगी।
2. शिक्षा और भाषा: 5 सवालों में पढ़ाई और डिजिटल साक्षरता
इस हिस्से में दिव्यांगता, मातृभाषा और दूसरी भाषाएं, साक्षरता और डिजिटल साक्षरता की जानकारी ली जाएगी। साथ ही शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई की स्थिति और उच्चतम शैक्षणिक योग्यता, स्ट्रीम या विषय पूछा जाएगा।
3. रोजगार: 8 सवालों में काम और नौकरी की जानकारी
व्यक्ति ने पिछले एक साल में काम किया या नहीं, उसकी आर्थिक गतिविधि, व्यवसाय और काम का क्षेत्र पूछा जाएगा। इसके अलावा कामगार की श्रेणी, गैर-आर्थिक गतिविधि, काम की तलाश या उपलब्धता और काम की जगह तक आने-जाने की जानकारी भी ली जाएगी।
4. जन्म और माइग्रेशन: 8 सवालों में जन्मस्थान से बच्चों तक की जानकारी
इस सेक्शन में जन्म स्थान, पिछला निवास स्थान, माइग्रेशन का कारण और वहां रहने की अवधि पूछी जाएगी। स्थायी निवास का पता भी दर्ज होगा। महिलाओं से जीवित बच्चों, अब तक जन्मे बच्चों और पिछले एक साल में जन्मे बच्चों की संख्या भी पूछी जाएगी।
5. बैंक डिटेल्स और आधार नंबर: 7 सवालों में डॉक्यूमेंट्स की जानकारी
इसमें कोविड-19 वैक्सीन कहां लगवाई, कुल बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर पूछा जाएगा। साथ ही आधार नंबर, वोटर ID, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध है या नहीं इसकी जानकारी भी ली जाएगी।
देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी
जनगणना 2027 देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। डेटा डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा और लोगों को खुद अपनी जानकारी देने यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी मिलेगा। जनगणना की कानूनी प्रक्रिया सेंसस एक्ट, 1948 और सेंसस रूल्स, 1990 के तहत होगी।
केंद्र के मुताबिक, लोगों की दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सेंसस एक्ट की धारा 15 के तहत इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, RTI के तहत नहीं दिया जा सकता और किसी कोर्ट में सबूत के तौर पर भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जनगणना पहले 2021 में होने वाली थी। इसे कोरोना महामारी के कारण टाल दिया गया था।
जनगणना के लिए 11,718 करोड़ का बजट मंजूर
केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी है। जनगणना पूरे देश में केंद्र के समन्वय से होगी। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें इसके क्रियान्वयन में मदद करेंगी।