अहमदाबाद,एजेंसी। गुजरात की इंटीग्रेटेड कॉटन यार्न निर्माता आस्था स्पिनटेक्स (Aastha Spintex) के शेयर में शुक्रवार को 5 फीसदी का अपर सर्किट लगा और भाव 122 रुपए पर पहुंच गया। कंपनी ने Falcon Yarns के अधिग्रहण की घोषणा की है, जिसे उसके कारोबार विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस डील के पूरा होने के बाद कंपनी की वार्षिक स्पिनिंग क्षमता 7,700 मीट्रिक टन से बढ़कर 17,457 मीट्रिक टन हो जाएगी। वहीं स्पिंडल क्षमता 25,920 से बढ़कर 61,824 तक पहुंच जाएगी यानी कंपनी की उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। इससे कंपनी घरेलू और निर्यात बाजारों की बढ़ती मांग को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेगी।
तेजी से बढ़ रही है कॉटन यार्न की मांग
Falcon Yarns के पास गुजरात में आधुनिक स्पिनिंग यूनिट है, जिसमें 35,904 स्पिंडल और 9,757 मीट्रिक टन की वार्षिक उत्पादन क्षमता है। कंपनी का मानना है कि इस अधिग्रहण से उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ लागत में कमी आएगी और परिचालन दक्षता में भी सुधार होगा।
आस्था स्पिनटेक्स के प्रबंध निदेशक दिव्यांग जशवंत पटेल ने कहा कि यह अधिग्रहण कंपनी की दीर्घकालिक विकास रणनीति का हिस्सा है। इससे ग्राहकों को बेहतर गुणवत्ता, अधिक उत्पादन और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
अयोध्या, एजेंसी। अयोध्या में कारसेवकपुरम के पास मंगलवार को ओम आश्रम में राम मंदिर चढ़ावा चोरी और चंपत राय के खिलाफ चल रही संतों की बैठक को पुलिस ने रोक दिया। संतों का आरोप है कि बैठक के बीच पुलिस पहुंची और संतों को बाहर निकालकर आश्रम में ताला लगा दिया।
इससे गुस्साए संतों ने ‘चंदा चोरों, अयोध्या छोड़ो’ के नारे लगाए। हालांकि, पुलिस का कहना है कि रोकने से पहले ही संत खुद आश्रम से बाहर निकल गए और नारेबाजी करने लगे।
संतों का कहना है-
चंदा चोरी के छोटे आरोपियों पर कार्रवाई की गई, जबकि बड़े आरोपियों को बचाया जा रहा है। जिला प्रशासन आरोपियों का साथ दे रहा है। वह नहीं चाहता कि आरोपी पकड़े जाएं। इसलिए संतों की बैठक नहीं होने दी जा रही है।
ये तस्वीर प्रकाशानंद गिरि उर्फ कंप्यूटर बाबा और महामंडलेश्वर परमानंद गिरि की है। कंप्यूटर बाबा ने ही बैठक बुलाई थी।
संत बोले- पुलिस ने बैठक रोकने की वजह नहीं बताई
बैठक प्रकाशानंद गिरि उर्फ कंप्यूटर बाबा ने बुलाई थी। इसमें जानकीघाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण, महामंडलेश्वर परमानंद गिरि, महंत दिलीप दास समेत 8-10 संत पहुंचे थे। संतों का कहना है कि जब उन्होंने पुलिस से बैठक रोकने का कारण पूछा, तो उन्होंने कोई वजह नहीं बताई। कुछ संतों को बैठक में आने भी नहीं दिया गया। उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया गया।
प्रकाशानंद गिरि उर्फ कंप्यूटर बाबा ने सुबह 11 बजे कारसेवकपुरम के पास ओम आश्रम में बैठक बुलाई थी।
कंप्यूटर बाबा बोले- चढ़ावा चोरी की जांच के लिए बड़ा आंदोलन करेंगे
कंप्यूटर बाबा ने कहा कि संत समाज चढ़ावा चोरी की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन करेगा। जरूरत पड़ी तो एक लाख संतों के साथ अयोध्या पहुंचकर आंदोलन किया जाएगा। संत रामलला के दर्शन कर भगवान श्रीराम से क्षमा मांगेंगे।
संत बोले- हम चोरी रोक नहीं पाए, रामलला से माफी मांगते हैं
महामंडलेश्वर परमानंद गिरि ने कहा- संत इस चोरी को रोक नहीं पाए, इसके लिए रामलला से हाथ जोड़कर माफी मांगते हैं। आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, उन पर NSA लगे। जांच के जरिए उन लोगों तक भी पहुंचना चाहिए, जिनकी चढ़ावा चोरी में बड़ी भूमिका रही है।
राम मंदिर में देशभर के लोगों ने दान दिया है। इस मुद्दे पर सभी संत एकजुट हैं। हम लोग जल्द बैठक करेंगे। अयोध्या के सभी संतों को बैठक के लिए बुलाया गया है। बैठक के बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर मामले की सीबीआई जांच की मांग की जाएगी।
महामंडलेश्वर परमानंद गिरि ने कहा कि अगर सीबीआई जांच नहीं कराई गई, तो आंदोलन किया जाएगा।
SIT की फाइनल जांच रिपोर्ट में चंपत राय का नाम नहीं
वहीं, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच के लिए यूपी सरकार की बनाई SIT ने फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक, इसमें ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का नाम नहीं है। बाकी 8 आरोपी पहले ही जेल में हैं।
यूपी के गृह विभाग ने रिपोर्ट राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंपी है। इसे राम मंदिर ट्रस्ट की 2 सितंबर को होने वाली बैठक में रखा जाएगा। ट्रस्ट ने ही यूपी सरकार से चढ़ावा चोरी की SIT जांच का अनुरोध किया था।
यूपी सरकार ने 13 जून को लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में 3 सदस्यों की SIT बनाई थी। आईजी रेंज किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार इसके सदस्य थे। SIT ने 23 जून को प्राइमरी रिपोर्ट सौंपी थी।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने SIT जांच की कमान IPS को सौंपने और फाइनेंस एक्सपर्ट को शामिल करने के निर्देश दिए थे। 20 जुलाई को नई SIT बनी, जिसमें लखनऊ रेंज के IG किरण एस, डीआईजी अयोध्या सोमेन वर्मा और अयोध्या एसएसपी गौरव ग्रोवर को शामिल किया गया था। यह SIT अब भी चढ़ावा चोरी की जांच कर रही है।
SIT ने 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी, 2 दिन बाद 8 की गिरफ्तारी
चोरी का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। यूपी सरकार की SIT ने 23 जून को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) संजय प्रसाद को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी। 25 जून को ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर FIR दर्ज हुई। इसमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत 8 को नामजद किया गया। हालांकि, इसमें चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा समेत बड़े पदाधिकारियों के नाम नहीं थे।
FIR दर्ज होने के कुछ घंटे बाद ही पुलिस ने टिन्नू समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। वर्तमान में सभी फैजाबाद जेल में हैं। सभी पर चढ़ावा गिनती करते वक्त नोटों और गहनों की चोरी का आरोप है।
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था। ट्रस्ट ने दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए थे और गोपाल नागरकट्टे को स्पेशल इनवाइटी की सूची से हटा दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी SIT बनाने को कहा था
चढ़ावा चोरी मामले से जुड़ी चार अलग-अलग याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं। इनमें जांच CBI को सौंपने के अलावा मंदिर में दान के प्रबंधन से जुड़े अलग-अलग विषयों की समीक्षा के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाने की मांग की गई है।
पुरानी एसआईटी राज्य सरकार के स्तर पर रिपोर्ट कर रही थी, जबकि नई एसआईटी को सीधे सुप्रीम कोर्ट में समय-समय पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेगी। पूरे मामले की जांच की निगरानी खुद सुप्रीम कोर्ट कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन और चोरी के मामलों की तकनीकी जांच में पुलिस अधिकारियों की भूमिका सीधी और ज्यादा असरदार होती है। इसलिए DIG और SSP को सदस्य बनाकर जांच का दायरा सीधे पुलिस महकमे के अधिकारियों को सौंप दिया गया है।
नागपुर, एजेंसी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के ‘जिम्मेदारी नई पीढ़ी के हाथों में सौंपने’ वाले बयान पर मंगलवार को सफाई आई। गडकरी के ऑफिस ने कहा, ‘उन्होंने अपने ट्रस्ट से जुड़े सामाजिक कार्यों की जिम्मेदारी नई पीढ़ी को सौंपने की बात कही थी।’
ऑफिस ने कहा कि उनके बयान का राजनीति से कोई संबंध नहीं है। दरअसल, गडकरी के इस बयान को उनके राजनीति से रिटायरमेंट लेने से जोड़ दिया था।
गडकरी का यह बयान 23 अगस्त का है। उन्होंने पुणे में कहा था, ‘अब ज्यादा काम नहीं कर सकता। जब कर सकता था, तब किया। नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए।’
नितिन 37 साल से ज्यादा राजनीति में हैं। पिछले 12 साल से मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। इनके पास सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय है।
गडकरी बोले थे- नए लोग आए हैं, स्पीच की 4 बातें
अब मेरा काम में दखल कम हो गया
नागपुर के ‘एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग’ के कार्यक्रम में 23 अगस्त को गडकरी ने कहा, ‘ मैं ज्यादा काम नहीं कर पाता। जब कर सकता था, तब किया। अब मेरा काम में दखल कम हो गया है।’
युवाओं से कहा- सुबह उठकर एक्सरसाइज करें
मैं रोज सुबह उठकर ढाई घंटे एक्सरसाइज और प्राणायाम करता हूं। मेरा ट्रेनर मुझसे वर्कआउट करवाता है। युवाओं को भी रोज कम से कम आधा घंटा व्यायाम और प्राणायाम करना चाहिए।
पार्टी का काम साइकिल से करता था
मेरा जीवन पहले बहुत अनियमित था। हम भावुक होकर साइकिल और स्कूटर से पार्टी के काम के लिए निकल पड़ते थे। उस समय हमारी पहचान के एक व्यक्ति के पास एम्बेसडर कार थी। जब भी पार्टी के बड़े नेता एयरपोर्ट आते थे, तो उनके आने-जाने की व्यवस्था हो सके, इसलिए हमने उस कार मालिक को ही पार्टी अध्यक्ष बना दिया था।
2 मौके जब गडकरी पब्लिक इवेंट में बेहोश हुए
7 दिसंबर 2018 अहमदनगर, महाराष्ट्र
महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रगान के दौरान गडकरी अचानक लड़खड़ाकर बेहोश हो गए। महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने उन्हें संभाला। डॉक्टरों ने जांच की और कुछ देर बाद वे सामान्य हो गए। शुरुआत में गडकरी ने खुद ट्वीट किया कि उन्हें लो ब्लड शुगर की वजह से हल्की परेशानी हुई थी।
राष्ट्रगान के दौरान गडकरी अचानक लड़खड़ाकर बेहोश हो गए थे।
24 अप्रैल 2024 पुसद, यवतमाल
लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक रैली में भाषण देते हुए गडकरी अचानक बेहोश होकर मंच पर गिर पड़े। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें संभाला। कुछ देर बाद वे ठीक हुए और अपना भाषण पूरा भी किया। इस बार गडकरी ने खुद बताया कि उन्हें तेज गर्मी के कारण असहज महसूस हुआ था और बाद में वे अगले कार्यक्रम के लिए रवाना हो गए।
मेडिकल रिकॉर्ड से यह पता चलता है कि उन्हें टाइप-2 डायबिटीज थी और 2011 में इसके इलाज के लिए उन्होंने गैस्ट्रिक/बेरियाट्रिक सर्जरी कराई थी। उस समय BJP के बयान के अनुसार उनका शुगर नियंत्रण मुश्किल था और शुरुआती डाइबिटिक नेफ्रोपैथी भी बताई गई थी।
चुनाव प्रचार के दौरान एक रैली में भाषण देते वक्त उन्हें चक्कर आ गया था।
भाजपा के अध्यक्ष भी रहे गडकरी
नितिन गडकरी का राजनीतिक सफर करीब पांच दशक लंबा है। उन्होंने 1970 के दशक में छात्र राजनीति से शुरुआत की और 1989 में पहली बार महाराष्ट्र विधान परिषद पहुंचे। वे महाराष्ट्र में PWD मंत्री और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे।
2009 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। 2014 में नागपुर से लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद मोदी सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री बने और तब से इस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
नई दिल्ली, एजेंसी। कॉकरोच जनता पार्टी 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च निकालेगी। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को युवाओं से किए गए वादों को पूरा नहीं किया है। इन्हीं वादों के भरोसे पर जंतर-मंतर का प्रदर्शन वापस लिया गया था।
मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। इसमें उन स्टूडेंट्स के परिजन भी शामिल होंगे, जिन्होंने NEET पेपर लीक के बाद सुसाइड किया था। इससे पहले CJP ने 20 जुलाई को भी जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला था।
सोमवार को CJP ने अपनी वर्किंग कमेटी की वर्चुअल मीटिंग के बाद यह फैसला लिया। पार्टी ने कहा कि सरकार ने कहा था कि छात्रों पर दर्ज केस खत्म होंगे, पर ऐसा नहीं हुआ। उन्हें हमारे धैर्य को कमजोरी नहीं समझना चाहिए।
CJP ने नीट पेपर लीक, परीक्षा में गड़बड़ी की मांगों को लेकर 20 जून से जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया था। 25 जुलाई को सरकार से आश्वासन मिलने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अपना आंदोलन खत्म किया था।
20 जुलाई को CJP ने संसद मार्च निकाला था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इसकी परमिशन नहीं दी थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया था।
CJP बोली- वादे पूरे होने तक पीछे नहीं हटेंगे
CJP नेता सौरव दास और रत्ना सिंह ने कहा कि सरकार को आंदोलन खत्म होने के बाद किए गए वादे पूरे करने चाहिए। सभी FIR वापस लेनी चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई रोकनी चाहिए।
वहीं, CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को लेटर लिखा है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इसकी जानकारी दें।
सौरव दास बोले- लोकतंत्र के लिए संवाद जरूरी
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, “लोकतंत्र तभी काम करता है जब सरकार में बैठे लोगों और उन्हें चुनने वालों के बीच निरंतर संवाद हो। जब दोनों के बीच संचार टूट जाता है, तो समस्याएं और संघर्ष पैदा होते हैं।”
वहीं, पार्टी ने सभी युवाओं, छात्रों, युवा संगठनों और छात्र संगठनों से 5 सितंबर को इंडिया गेट पर बड़ी संख्या में इकट्ठा होने और मार्च में शांतिपूर्वक भाग लेने की अपील की है।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी थी FIR की लिस्ट
CJP ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को केंद्र से छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR की लिस्ट मांगी थी। पार्टी का दावा है कि कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत इन मामलों को रद्द करने पर विचार कर सकता था।
CJP का आरोप है कि केंद्र ने FIR की सूची देने की स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई। पार्टी ने इसे आंदोलन खत्म कराने से पहले किए गए वादों से पीछे हटने का संकेत बताया।