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कोरबा

हार-जीत मायने नहीं रखती:खेल भावना से बढ़ती है एकता और सद्भावना- आरती विकास अग्रवाल

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मिनीमाता कॉलेज परिसर में राज्य स्तरीय खो-खो खेल प्रतियोगिता का समापन:दुर्ग विश्वविद्यालय को विजेता का अवार्ड, रायपुर रनरअप

कोरबा। शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय खेल परिसर में राज्य स्तरीय महिला खो-खो खेल प्रतियोगिता का आज समापन हुआ, जिसमें दुर्ग विश्वविद्यालय को विजेता का अवार्ड दिया गया, वहीं रायपुर विश्वविद्यालय को उपविजेता का पुरस्कार मिला। छत्तीसगढ़ शासन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित महिला खो-खो प्रतियोगिता में प्रदेश भर की विश्वविद्यालय की टीमों ने भाग लिया, जिसमें प्रदेश भर के महाविद्यालयों के खिलाडिय़ों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कोरबा मिनीमाता कन्या महाविद्यालय परिसर में स्थित खेल मैदान में आयोजित इस प्रतियोगिता में सभी कॉलेज की छात्राओं ने अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्शन किया। दर्शकगण छात्राओं की प्रतिभा देखकर काफी रोमांचित हुए, लेकिन दुर्ग विश्वविद्यालय की छात्राओं ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और विजेता का खिताब अपने नाम किया और अतिथियों ने उन्हें विजेता का शील्ड प्रदान किया। उपविजेता के रूप में रायपुर विश्वविद्यालय को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि जनभागीदारी समिति की अध्यक्ष श्रीमती आरती अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि पूर्व पार्षद एवं समाज सेवी विकास अग्रवाल, प्राचार्य डॉ. राजेंद्र सिंह, क्रीड़ा अधिकारी अनिमा तिर्की सहित सदस्यों ने खिलाडिय़ों का सम्मान किया।

हार-जीत मायने नहीं रखती, खेल भावना सबसे बड़ी चीज-आरती अग्रवाल

राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयीन महिला खो-खो खेल प्रतियोगिता के समापन समारोह को संबोधित करती हुईं जनभागीदारी समिति की अध्यक्ष श्रीमती आरती विकास अग्रवाल ने कहा कि खेल प्रतियोगिता में किसी की हार और किसी की जीत होती है। हार-जीत मायने नहीं रखती, खेल भावना से खिलाडिय़ों के बीच एकता और सद्भावना बढ़ती है। हारने वाली टीम एक दिन अवश्य जीतेगी, थोड़ी मेहनत और करनी पड़ेगी। जो बार-बार गिरकर भी संभलता है, वह एक दिन अवश्य उठता है और जीतता है। उन्होंने सभी खिलाडिय़ों को बधाई देते हुए सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
विशिष्ट अतिथि समाज सेवी विकास अग्रवाल ने भी सभी खिलाडिय़ों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बेहतर कैरियर बनाने के लिए पढ़ाई के साथ खेल भी बहुत जरूरी है। खेल से शरीर स्वस्थ रहता है और दीर्घायु मिलती है। खेल से शरीर स्वस्थ रहेगा तो मस्तिष्क पुष्ट होगा और ऐसे खिलाड़ी पढ़ाई में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश एवं केंद्र की भाजपा सरकार खिलाडिय़ों को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय खिलाडिय़ों को सरकार शासकीय सेवा में भी अच्छे पदों पर चयन करती हैै। खिलाड़ी राज्य, राष्ट्र का नाम रोशन भी करते हैं, यह बड़ी बात है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ. राजेंद्र सिंह ने कॉलेज की गतिविधियों की जानकारी देते हुए स्वागत उद्बोधन दिया और अतिथियों सहित उपस्थित खिलाडिय़ों का स्वागत किया। इस अवसर पर जनभागीदारी समिति के सदस्य संजय मानिकपुरी, धनकुमारी गर्ग, रेखा सांडिया, ज्योति वर्मा, हेमा साहू, संध्या पाण्डेय, डॉ. एपी सिंह, स्मिता सिंह, कोमल आशीष, युवराज चंद्रा, राजेंद्र साहू, लता नायर, राजेश साहू, रेखा श्रीवास, स्वाति कश्यप सहित अन्य अतिथि भी उपस्थित थे।

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कोरबा

सेवा संकल्प अभियान के तहत दीपका एवं छुरी कला में विशेष शिविर कल

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कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। राज्य शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक संचालित “सेवा संकल्प अभियान” के अंतर्गत आम नागरिकों तक विभिन्न शासकीय सेवाओं एवं योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नगरीय निकाय एवं जनपद पंचायत क्षेत्रों में 01 अक्टूबर से विशेष शिविर आयोजित किए जा रहें।
इसी क्रम में 02 अक्टूबर को नगर पालिका परिषद दीपका कार्यालय एवं नगर पंचायत छुरीकला अंतर्गत बस स्टैंड छुरी के समीप शिविर आयोजित किए जाएंगे। आम नागरिकों से अपील की गई है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर शिविर का लाभ उठायें।

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कोरबा

कीचड़ भरे रास्ते से मिली राहत, डोंगानाला के बिरहोर परिवारों तक पहुँची पक्की सड़क

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पीएम जनमन के अंतर्गत लगभग 167.20 लाख रुपये की लागत से अटल चौक से जंगल पारा तक बना 2.38 किलोमीटर मार्ग
कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। विकासखंड पाली के दूरस्थ ग्राम डोंगानाला के जंगल पारा में रहने वाले बिरहोर परिवारों के लिए बारिश का मौसम बड़ी परेशानी लेकर आता था। अटल चौक से बस्ती तक जाने वाला कच्चा रास्ता कीचड़ से भर जाता था। पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता था और बच्चे स्कूल जाने से कतराते थे। अब प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के अंतर्गत बनी पक्की सड़क ने उनकी रोजमर्रा की यात्रा आसान कर दी है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अटल चौक से जंगल पारा तक लगभग 2.38 किलोमीटर सड़क का निर्माण लगभग 167.20 लाख रुपये की लागत से किया गया है। मार्ग में सीसी सड़क के साथ डामर सड़क भी बनाई गई है। इससे बस्ती में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय के लगभग 40 परिवारों को आवागमन में सुविधा मिल रही है।
बस्ती के सुनहर सिंह बिरहोर बताते हैं कि पक्की सड़क बनने से अब आने-जाने में आसानी होती है। गीता बाई के अनुसार उन्हें रास्ते में पहले जैसी परेशानी नहीं होती और बच्चे भी आसानी से स्कूल आ-जा सकते हैं। गाँव के किसान पुनो राम पटेल पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि बारिश में रास्ते पर घुटनों तक कीचड़ हो जाता था। अब पक्की सड़क बनने से उस परेशानी से राहत मिली है।
जंगल पारा के परिवारों के लिए यह सड़क स्कूल और आवश्यक सेवाओं तक पहुँचने का सुगम रास्ता बन गई है। बारिश के दिनों में जिस मार्ग से गुजरना कठिन था, उसी पर अब ग्रामीण अधिक आसानी से आ-जा रहे हैं।

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कोरबा

धान की एक फसल से आगे बढ़कर वर्ष में दो से तीन फसलें ले रहे गुरुचरण मरार

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उद्यानिकी विभाग की सहायता से अपनाई ड्रिप सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग और उन्नत खेती
कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम नगौई बछेरा निवासी किसान गुरुचरण मरार पहले परंपरागत तरीके से धान की खेती करते थे। वर्ष में एक ही फसल लेने के कारण खेती से होने वाली आय सीमित थी। सिंचाई का साधन नहीं था और कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर व अन्य मशीनें किराये पर लानी पड़ती थीं। ऐसे में छह सदस्यीय परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन होता था।
गांव के भ्रमण के दौरान उद्यानिकी विभाग के कर्मचारियों ने श्री मरार को विभागीय योजनाओं और आधुनिक खेती की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने शासकीय उद्यान रोपणी, नगौई में आवेदन किया। राष्ट्रीय बागवानी मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उन्हें ड्रिप सिंचाई प्रणाली, प्लास्टिक मल्चिंग तथा ग्राफ्टेड बैंगन रोपण के लिए कुल 46 हजार रुपये का विभागीय अनुदान मिला।
इन संसाधनों और विभागीय मार्गदर्शन की मदद से श्री मरार ने खेती के तरीके में बदलाव किया। अब वे वर्ष में दो से तीन फसलें लेते हैं और वर्तमान में भिंडी की खेती से भी आय अर्जित कर रहे हैं। विभाग को दी गई जानकारी के अनुसार, उनकी अनुमानित वार्षिक आय पहले लगभग 45 हजार रुपये थी, जो अब लगभग ढाई से तीन लाख रुपये तक पहुंच गई है। बढ़ी हुई आय से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी है। वे गांव के अन्य किसानों को भी खेती से जुड़ी जानकारी देते हैं।
श्री मरार कहते हैं कि उद्यानिकी विभाग से योजनाओं की जानकारी मिलने पर उनका आधुनिक खेती के प्रति उत्साह बढ़ा। वे आगे भी विभागीय मार्गदर्शन लेकर खेती करना चाहते हैं और मिली सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हैं।

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