दिल्ली/पटना,एजेंसी। सीवान जिले के कोड़ारी गांव के रहने वाले नितेश कुमार पेशे से किसान हैं। दूध का भी कारोबार है। उनके एक जानने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक यानी RSS से जुड़े हैं। एक दिन उन्होंने नितेश को घर बुलाया। वहां पहले से कुछ लोग मौजूद थे। नितेश उन्हें नहीं जानते थे। वे उनके बीच बैठे, तो बातचीत शुरू हुई। हालचाल के बाद पॉलिटिक्स, राष्ट्रवाद और सरकार की योजनाओं पर बातें होने लगीं।
नितेश कहते हैं, ‘उनकी बातों का मुझ पर बहुत असर हुआ। मैं बाद में भी उन लोगों से मिलता रहा। एक दिन वे लोग मेरे घर आए। मैंने अपने गांव के कुछ लोगों से उन्हें मिलवाया। फिर वे बार-बार मेरे गांव आने लगे। हम चाय पर बैठते थे। वे कहते थे कि ऐसी पार्टी को वोट दो, जिसके हाथ में हमारा राज्य और देश सुरक्षित रहे।’
नितेश तक पहुंचे लोग, दरअसल बिहार में RSS की स्ट्रैटजी का हिस्सा हैं। RSS से जुड़े सोर्स बताते हैं कि संगठन के स्वयंसेवक पटना, मुजफ्फरपुर, सीवान, भागलपुर सहित सीमांचल और मगध के गांव-शहरों में एक्टिव हो गए हैं। चाय की दुकानों, मंदिरों और घरों में जाते हैं और लोगों से मिलते हैं। हर गांव में 10 से 15 स्वयंसेवक काम कर रहे हैं, ये अलग-अलग गांवों में जा रहे हैं।
RSS की इसी स्ट्रैटजी से BJP ने पहले हरियाणा और फिर दिल्ली में सरकार बनाई थी। RSS ने बिहार को दो प्रांत उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार में बांटा है। उत्तर बिहार का काम मुजफ्फरपुर और दक्षिण बिहार का पटना से होता है।
बिहार में कुल 16 हजार स्वयंसेवक, 2 महीने से एक्टिव
बिहार में काम कर रहे प्रांत प्रचारक स्तर के पदाधिकारी से हमने RSS की स्ट्रैटजी पर बात की। वे कहते हैं, ‘बिहार में अभी 16 हजार स्वयंसेवक इस वक्त एक्टिव हैं। RSS का काम दिखता है, उसके कार्यकर्ता नहीं। नतीजा दिखता है, तैयारी नहीं।’
हमने पूछा कि क्या बिहार में भी महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली जिताने वाले मॉडल पर काम हो रहा है। वे जवाब देते हैं, ‘हर राज्य की जनता अलग है, मुद्दे अलग हैं। कॉमन सिर्फ इतना है कि RSS सोशल मीडिया पर नहीं, जमीन पर उतरता है। हमारे स्वयंसेवक घर-घर पहुंचते हैं। लोगों का मन टटोलते हैं, उनसे जुड़ते हैं। हर राज्य के वोटर अलग हैं, तो रणनीति में कुछ फर्क तो होता ही है।’
रूठे वोटर को मना रहे, कन्फ्यूज वोटर्स को बता रहे अच्छी पार्टी कौन
प्रांत प्रचारक आगे कहते हैं, ‘RSS के स्वयंसेवक की एक टीम घर-घर जाकर वोटर्स की लिस्ट तैयार कर चुकी हैं। अब दूसरी टीम ने अपना काम शुरू किया है। ये टीमें उन वोटर्स को मना रही हैं, जिसके मन में BJP या NDA के लिए थोड़ी भी दुविधा है। मतलब, हम कन्फ्यूज वोटर को बिहार के लिए सही पार्टी चुनने में मदद कर रहे हैं।’
सही पार्टी मतलब? प्रांत प्रचारक कहते हैं, ‘ऐसी पार्टी, जो राज्य और लोगों का विकास कर सके। पार्टी का नाम हम कभी नहीं लेते।’
इसी बात को प्रांत स्तर के एक और प्रचारक आगे बढ़ाते हैं। वे कहते हैं, ‘घर-घर जाकर लोगों की कैटेगरी के हिसाब से लिस्ट बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। ये लिस्ट तीन हिस्सों में है। 1. BJP के पक्के वोटर 2. कन्फ्यूज वोटर 3. रूठे वोटर
यानी आपका काम खत्म हुआ? प्रचारक जवाब देते हैं, ‘नहीं, काम तो अब शुरू हुआ है। RSS की दूसरी टीमों ने लिस्ट के मुताबिक लोगों से फिर संपर्क करना शुरू किया है। ये टीमें वोटर्स को मुद्दे, उनके फायदे-नुकसान के बारे में बताएंगी।’
‘किस पार्टी ने क्या वादा किया था, कितना पूरा किया, किस पार्टी ने बिहार को जंगलराज बनाया और किसने अच्छा काम किया। इन टीमों का काम कन्फ्यूज वोटर्स के दिमाग में क्लेरिटी लाना है। एक-सवा महीने बाद फिर लिस्ट को रिव्यू किया जाएगा।’
‘रूठे वोटर्स को गुस्सा निकालने का मौका दे रहे’
हम जमीन पर काम कर रहे स्वयंसेवकों से भी मिले। इनमें से एक कहते हैं, ‘RSS ने एक प्रयोग हरियाणा में किया था। NDA या BJP के नाराज वोटर्स को मनाने के लिए कुछ वरिष्ठ स्वयंसेवकों की टीमें बनाई थीं। इनका काम लोगों की शिकायतें सुनना था। वे उनसे मिलते, उनकी बातें सुनते थे। उन्हें गुस्सा उतारने देते थे। यही काम बिहार में भी कर रहे हैं।’
इस टीम का काम ही वोटर्स का गुस्सा झेलना है, जैसे परिवार के नाराज सदस्य की शिकायत सुनी जाती है। शिकायतों की लिस्ट भी तैयार की जा रही है। ये लिस्ट टीम अपनी लीडरशिप को दे रही हैं।
‘इस लिस्ट पर गंभीरता से विचार हो रहा है। इसे दो हिस्से में बांटा है। जो काम दो महीनों के अंदर हो सकते हैं, उन्हें करवाने की कोशिश हो रही है। जिन शिकायतों को दूर करने में ज्यादा वक्त लगना है, उसके लिए भरोसा दे रहे हैं, उनकी शिकायत चुनाव के फौरन बाद दूर की जाएगी।’
किस तरह की शिकायतें हैं, जिन पर तुरंत काम करवा रहे हैं? जवाब मिला, ‘जैसे किसी गांव में सड़क खराब है, उसे ठीक करवा देना या फिर पक्की सड़क बनवा देना। किसी को PM आवास योजना के तहत घर नहीं मिला, तो उसकी प्रोसेस शुरू करवा देना, राशन कार्ड बनवा देना। ये सारे काम लिस्ट में हैं। कोशिश होगी ये सभी चुनाव से पहले करवा दें।’
महिला वोटर्स पर फोकस, उनके लिए अलग से स्ट्रैटजी बनी
RSS के एक सोर्स बताते हैं, ‘बिहार में महिला वोटर निर्णायक हैं। उनके लिए अलग से रणनीति बनी है। RSS से जुड़े महिला संगठन ये काम कर रहे हैं। उनकी टीमें अलग-अलग उम्र की महिलाओं से मिल रही हैं। घरेलू और पेशेवर महिलाओं के लिए अलग टीमें हैं।’
वे आगे कहते हैं, ‘RSS एक सर्वे भी कर चुका है। कैटेगरी के साथ महिलाओं की लिस्ट तैयार है। अब उनके साथ टीमें बैठक कर रही हैं। महिलाओं से पूछा जा रहा है कि उनकी सीट पर कौन सा नेता बेहतर है। उन्हें कैसे नेता और सरकार चाहिए।’
‘महिलाएं घर से लेकर बाहर तक हर चीज से प्रभावित होती हैं। घर का राशन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सड़कों का माहौल, इनसे जुड़े ऐसे कुछ सवाल महिलाओं से पूछे जा रहे हैं। फिर उनके जवाब पर डिस्कशन किया जा रहा है। इससे कोई एक चेहरा या फिर उनकी पसंद की सरकार की इमेज निकल कर सामने आए। ये एक्सरसाइज टिकट के लिए कैंडिडेट चुनने में काम आएगी।’
RSS 100 सीटों पर कैंडिडेट की लिस्ट देगा
सोर्स बताते हैं, ‘बिहार में NDA में किसे कितनी सीटें मिलेंगी, ये तय होना है। 100 सीटों पर कैंडिडेट की लिस्ट हमें तैयार करनी है। इस पर पार्टी और RSS मंथन करने के बाद फैसला लेगा।’
क्या लिस्ट में हर सीट से एक कैंडिडेट होगा? जवाब मिला, ‘नहीं, हर सीट पर तीन कैंडिडेट के नाम देंगे। हर कैंडिडेट की छवि, मजबूत और कमजोर पक्ष डिटेल में देंगे। जिस सीट पर मौजूदा विधायक कमजोर हैं, वहां नए चेहरे की तलाश करेंगे। विधायक का रिपोर्ट कार्ड भी देंगे।’
सोर्स बताते हैं,
प्रधानमंत्री की रैली से लेकर स्टार प्रचारकों की रैलियों में RSS की भूमिका होगी। कौन सा प्रचारक कहां वोटर्स को अपील करेगा, इसे ध्यान में रखते हुए RSS रैलियों और बैठकों का प्लान बना रहा है।
RSS के एक प्रांत प्रचारक बताते हैं, ‘बिहार में RSS की जड़ें बहुत गहरी हैं। यहां RSS की शुरुआत यानी 1925 से ही शाखाएं चल रही हैं। मार्च 2025 में RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत बिहार आए थे। यहां उन्होंने स्वयंसेवकों से बात की। इसके बाद बिहार के लिए रणनीति तैयार की गई। यह रणनीति तीन पॉइंट पर आधारित है- राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और विकास।’
स्थापना के 100 साल पूरे होने पर RSS 2025 को शताब्दी वर्ष की तरह मना रहा है। फोटो दिल्ली में हुई बैठक की है। ये बैठक 26 से 28 अगस्त को दिल्ली में हुई थी।
दिल्ली के विधानसभा चुनाव में RSS ने अलग-अलग सीटों पर 50 हजार से ज्यादा बैठकें की थीं। इनके जरिए वोटर्स को BJP के पक्ष में एकजुट किया गया। बिहार में भी इसी तरह काम हो रहा है। मुजफ्फरपुर के RSS के शाखा प्रमुख बताते हैं, हमारे 5 हजार स्थानीय स्वयंसेवक हैं। बाहर से करीब 500 स्वयंसेवक सिर्फ मुजफ्फरपुर आए हैं। वे गांव-गांव घूम रहे हैं।’
गांवों में 10 से 15 लोगों की टीम, ब्लॉक में हर हफ्ते 100 मीटिंग
ग्राउंड पर काम के तरीके पर एक स्वयंसेवक बताते हैं, ‘हम रोज 5-10 घरों में जाते हैं। लोगों से राम मंदिर, विकास की योजनाएं, जातिवाद के खिलाफ और RSS की रणनीति पर बात करते हैं। हर गांव में 10 से 15 स्वयंसेवकों की टीम डोर-टु-डोर कैंपेन करती है।’
‘हम राष्ट्रवाद, सीमा सुरक्षा, पाकिस्तान, हिंदुत्व, राम मंदिर, गौ-रक्षा और विकास के साथ-साथ PM किसान सम्मान निधि योजना, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के फायदे बताते हैं। हम ऐसे परिवार चुनते है जो हिंदू हैं, लेकिन BJP के वोटर नहीं हैं। या BJP के वोटर रहे हैं, लेकिन किसी वजह से नाराज हैं। अभी एक ब्लॉक में हर हफ्ते 100 बैठकें कर रहे हैं।’
मुस्लिम आबादी वाले एरिया में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर फोकस
RSS की टीमें मुद्दों के आधार पर इलाके चुन रही है। पूर्वी बिहार और सीमांचल के कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर फोकस है। इन जिलों में मुस्लिम आबादी ज्यादा है।
यहां स्वयंसेवक राम मंदिर का जिक्र करते हैं और कहते हैं, मोदी जी ने 500 साल का सपना पूरा किया है। पश्चिमी बिहार और मगध में किसानों के मुद्दे और उनसे जुड़ी योजनाओं पर बात होती है। ग्रामीण इलाकों में जातिवाद के खिलाफ अपील की जाती है।
एक स्वयंसेवक बताते हैं, ‘हम चाय की दुकानों, मंदिरों और घरों में जाते हैं। लोगों से बहस नहीं करते, बल्कि उन्हें समझाते हैं। बुजुर्गों से मिलते है। पहले रामायण, फिर विकास की बात करते हैं। हर जिले में प्रभारी हैं, जो इसकी रिपोर्ट नागपुर भेजते हैं।’
RSS के विचारक दिलीप देवधर बताते हैं, ‘संघ परिवार और BJP मिलकर काम कर रहे हैं। BJP जो काम अकेले कर सकती है, उसे वह करती है, बाकी मोर्चों पर संघ परिवार एक्टिव रहता है। संघ परिवार का काम इवेंट के हिसाब से नहीं होता।’
जाति जनगणना के ऐलान में भी RSS का इनपुट
केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल, 2025 को जातीय जनगणना कराने का ऐलान किया था। देश में आजादी के बाद यह पहली जातीय जनगणना होगी। इस ऐलान से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS चीफ मोहन भागवत के बीच मुलाकात हुई थी।
RSS के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता कहते हैं, ‘BJP, RSS से जातिगत जनगणना के लिए सहमति चाहती थी। RSS इस पर दुविधा में था। बिहार से संगठन के कार्यकर्ताओं से उसी वक्त इनपुट मिला कि BJP की OBC और आरक्षण विरोधी छवि को चुनाव से पहले तोड़ना होगा, नहीं तो इसका असर नतीजों पर दिखेगा।’
‘वक्त कम था, इसलिए उसी वक्त जाति जनगणना की घोषणा कर इस छवि को तोड़ने की कोशिश की गई। RSS से इस मुद्दे पर पहले से बात हो रही थी। इनपुट के बाद RSS ने सहमति दे दी क्योंकि 2015 में आरक्षण पर दिए मोहन भागवत के बयान का असर 2020 तक चुनाव में साफ दिखा था।’
गृह मंत्रालय ने 16 जून को जनगणना के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। केंद्र सरकार दो फेज में जनगणना कराएगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक, पहले फेज की शुरुआत 1 अक्टूबर 2026 से होगी। इसमें 4 पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं। 1 मार्च 2027 से दूसरा फेज शुरू होगा। इसमें देश के बाकी राज्यों में जनगणना शुरू होगी।
नई दिल्ली, एजेंसी। फेस्टिव सीजन चल रहा है। इस दौरान लोग अपने घर जाने की तैयारियां करते हैं। अपने घर जाने के लिए लोग ट्रेन से जाते हैं। यदि आप अक्टूबर के महीने में ट्रेन का सफर करने वाले हैं, तो थोड़ा सावधान हो जाए। असल में सेंट्रल रेलवे 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक, खास ‘टिकट चेकिंग अभियान’ चलाने जा रहा है।
आइए आपको बताते हैं रेलवे के ये नए नियम क्या हैं और आपको ट्रैवल करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरुरी है।
कम से कम एक ओरिजिनल ID होना है जरूरी
इस अभियान के चलते सबसे बड़ा नियम है ‘वन टिकट, वन ओरिजिनल आईडी’। रेलवे के अधिकारियों ने साफ कहा है कि अब सफर के समय सिर्फ टिकट होना ही काफी नहीं है, बल्कि आपके पास अपना ओरिजिनल पहचान पत्र होना जरुरी है।
उदाहरण के तौर पर, यदि आप अपने परिवार के चार लोगों के लिए एक ही टिकट बुक किया है, तो उन चारों में से कम से कम किसी एक व्यक्ति के पास उसका ओरिजिनल आईडी कार्ड होना बहुत जरुरी है। यदि चेकिंग के दौरान असली आईडी नहीं दिखा पाए, तो टीटीई उस पर यात्रा करने वाले सभी लोगों को बिना टिकट मान सकता है और आप पर जुर्माना लग सकता है।
कोटा और ई-पास वालों के लिए नियम सख्त
रेलवे के मुताबिक, अगर आप किसी खास कोटे या कंसेशन पर सफर कर रहे हैं? यदि हां, तो आपको अपनी पात्रता को साबित करने के लिए सभी दास्तावेज ओरिजिनल ही साथ रखें। इतना ही नहीं, जो लोग रेलवे के ई-पास या पीटीओ का इस्तेमाल करके यात्रा करने पर, आपको असली पहचान पत्र दिखाना होगा। उनकों इस बात का ध्यान देना होगा कि ट्रेन में बैठने से पहले उनका ई-पास संबंधित अथॉरिटी से सही तरीके से एक्सचेंज करा लिया गया हो।
जनरल टिकट वालों की भी होगी हाई-टेक चेकिंग
दरअसल, यह चेकिंग अभियान सिर्फ स्लीपर या एसी कोच तक ही नहीं, बल्कि आप जनरल डिब्बे में सफर कर रहे हैं, तो आप वहां भी चेकिंग स्टाफ टिकटों की असलियत जांचेगा। वहीं, जरुरत पड़ने पर रेलवे अधिकारी टीटीई ऐप की मदद से किसी भी टिकट को तुरंत वेरिफाई कर सकते हैं।
भारतीय रेलवे क्यों कर रहा है इतनी सख्ती
सेंट्रल रेलवे ने बताया है कि, इसके पीछे मकसद है सिस्टम में होने वाली धोखाधड़ी को खत्म करना है, जाने इसके मुख्य कारण है-
– भारतीय रेलवे में होने वाले आर्थिक नुकसान को रोकना।
– वहीं, रिजर्वेशन की सुविधाओं का जो लोग गलत फायदा उठाते हैं, उन लोगों को पकड़ना।
– इसके अलावा, पास और कंसेशन के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम लगाना।
– सही यात्रियों की पहचान करना और टिकटों की वैधता जांचना।
चेकिंग में कौन-कौन से पहचान पत्र चलेंगे?
इस बीच, रेलवे ने उन दास्तावेजों की एक लिस्ट भी दी है, जिन्हे आप सफर के दौरान अपनी पहचान साबित करने के लिए दिखा सकते हैं ये ओरिजनल आईडी-
-आधार कार्ड -वोटर आईडी कार्ड -पासपोर्ट या पैन कार्ड -ड्राइविंग लाइसेंस – केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले फोटो और सीरियल नंबर वाला कार्ड – मान्यता प्राप्त स्कूल/कॉलेज का फोटो वाला स्टूडेंट आईडी कार्ड – किसी राष्ट्रीयकृत बैंक की पासबुक, जिस पर आपकी फोटो लगी हो। – बैंक का क्रेडिट कार्ड जिस पर आपकी लैमिनेटेड फोटो हो।
नई दिल्ली, एजेंसी। आमतौर पर शेयर बाजार सोमवार से शुक्रवार तक खुले रहते हैं। मार्केट में शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है। कई बार किसी खास मौके, पर्व और त्योहार पर भी बाजार बंद होता है। कल से लगातार तीन दिन शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा। शुक्रवार (02 अक्टूबर) को गांधी जयंती है, ऐसे में BSE और NSE बंद रहेंगे। इसके बाद शनिवार और रविवार की नियमित छुट्टी के कारण बाजार अब सीधे सोमवार, 5 अक्टूबर को खुलेगा।
2 अक्टूबर को क्यों बंद रहेगा बाजार?
महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर को देशभर में राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाई जाती है। इसी के चलते भारतीय शेयर बाजार में भी इस दिन ट्रेडिंग नहीं होगी। निवेशकों को शुक्रवार को इक्विटी, डेरिवेटिव्स समेत बाजार से जुड़े कारोबार के लिए बाजार बंद मिलेगा।
2026 में शेयर बाजार की प्रमुख छुट्टियां
अवसर
तारीख
दिन
दशहरा
20 अक्टूबर
मंगलवार
दिवाली बलिप्रतिपदा
10 नवंबर
मंगलवार
गुरु नानक देव जी का प्रकाश गुरुपर्व
24 नवंबर
मंगलवार
क्रिसमस
25 दिसंबर
शुक्रवार
आज बाजार में रही गिरावट
आज (1 अक्टूबर) शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 0.79 फीसदी यानी कि 570.59 अंक गिरकर लाल निशान में 71,909.70 पर बंद हुआ। इस दौरान इसके 30 शेयरों में से केवल 6 में बढ़त दिखी, जबकि 24 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। इनमें इन्फोसिस में सबसे अधिक 4.02 फीसदी की तेजी और मारुति में सबसे ज्यादा गिरावट 4.59 फीसदी नजर आई।
वहीं, 50 शेयरों वाला निफ्टी 0.88 फीसदी यानी 198.50 अंक लुढ़ककर 22,421.95 पर बंद हुआ। इसके 50 शेयरों में से 13 में तेजी और 37 में गिरावट दर्ज की गई।
नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने त्योहारों के मौसम में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति और उचित कीमत सुनिश्चित करने के लिए डीलर के पास चीनी रखने की सीमा घटाकर 1,000 क्विंटल कर दी। यह सीमा 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगी और डीलर अधिकतम 15 दिन तक का स्टॉक रख सकेंगे। इसके साथ ही, खाद्य मंत्रालय ने कहा कि कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र तथा असम में क्षेत्र विशेष की जरूरतों को देखते हुए स्टॉक सीमा 2,000 क्विंटल होगी।
मंत्रालय ने बयान में कहा कि एक अक्टूबर से नए चीनी सत्र की शुरुआत के साथ त्योहारी अवधि में ग्राहकों को उचित कीमत पर चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार कदम उठा रही है। मंत्रालय ने कहा, ”चीनी की मात्रा और उसे रखने की अवधि सीमित करके सरकार का उद्देश्य आपूर्ति शृंखला में चीनी की व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं के लिए इसकी लगातार उपलब्धता बनाए रखना है।”
कोलकाता और असम के लिए अलग सीमा
कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र तथा असम के लिए अलग स्टॉक सीमा उस क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की गई है। मंत्रालय ने कहा कि कोलकाता… उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से चीनी खरीदता है और पूर्वी भारत के साथ पूर्वोत्तर राज्यों को भी इसकी आपूर्ति करता है।
मंत्रालय ने कहा कि असम के लिए सीमा तय करते समय भौगोलिक परिस्थितियों, परिवहन सुविधाओं और पूर्वोत्तर के उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखा गया है। उसने कहा कि संशोधित नियमों का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला में चीनी के अनावश्यक भंडारण को रोकना और मिलों से डीलर के जरिये अंतिम उपभोक्ता तक इसकी सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
भंडारण और जमाखोरी पर रोक का उद्देश्य
यह कदम जमाखोरी, सट्टेबाजी और डीलर द्वारा स्टॉक जमा करने पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है। इससे पहले अगस्त में सरकार ने डीलर के लिए देशभर में 4,000 क्विंटल की स्टॉक सीमा तय की थी। यह सीमा एक अगस्त से 30 नवंबर तक लागू की गई थी। इसके तहत चीनी मिलने की तारीख से अधिकतम 30 दिन तक स्टॉक रखने की अनुमति थी। बाद में 15 सितंबर से यह सीमा घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी गई।
चीनी के खुदरा दाम में 15% गिरावट
मंत्रालय के मुताबिक, चीनी का औसत खुदरा मूल्य अगस्त के उच्चतम स्तर से अब 15 प्रतिशत घट चुका है और आपूर्ति शृंखला में कम कीमतों का लाभ मिलने के साथ इसमें आगे भी गिरावट आने की उम्मीद है। मिलों की कीमतों में करीब 28 प्रतिशत की गिरावट आई है और वे पिछले तीन सप्ताह से स्थिर हैं।
सरकार ने कहा कि चीनी मिलों, डीलर, थोक विक्रेताओं और अन्य बाजार प्रतिभागियों को चीनी की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करनी चाहिए और जमाखोरी एवं सट्टेबाजी रोकनी चाहिए। थोक और खुदरा विक्रेताओं से मिलों की कीमतों में आई तेज गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक ‘तत्काल’ पहुंचाने को कहा गया है।