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छत्तीसगढ़

बिलासपुर में बिजली गिरने से 2 महिलाओं की मौत,4 घायल:कोंडागांव में कच्चे मकान की दीवार ढहने से महिला की मौत,आज सभी जिलों में यलो-अलर्ट

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर बारिश का दौर शुरू हो गया है। बिलासपुर में बिजली की चपेट में आने से 2 महिलाओं की मौत गई। जबकि चार महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुंआपाली की महिलाएं खेत से काम कर लौट रही थी, तभी ये हादसा हुआ।

वहीं कोंडागांव में लगातार बारिश से कच्चे मकान की दीवार ढह गई। हादसे में मकान में सो रही महिला जनादाई (29) की मौके पर ही मौत हो गई।

बता दें कि आज मौसम विभाग ने आज बस्तर, कोंडागांव, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा समेत सभी जिलों में बिजली गिरने, बादल गरजने और आंधी चलने का यलो अलर्ट जारी किया है।

कोंडागांव में बारिश से कच्चे मकान की दीवार ढही, मलबे में दबकर महिला की मौत।

कोंडागांव में बारिश से कच्चे मकान की दीवार ढही, मलबे में दबकर महिला की मौत।

बिलासपुर में गरज-चमक के साथ जमकर बारिश हुई।

बिलासपुर में गरज-चमक के साथ जमकर बारिश हुई।

आज के लिए जारी हुआ अलर्ट।

आज के लिए जारी हुआ अलर्ट।

बस्तर में भारी बारिश का अलर्ट

पिछले 24 घंटे में सरगुजा, बिलासपुर, और रायपुर संभाग में हल्की से मध्यम बारिश हुई है। रायपुर शहर में देर शाम के बाद अचानक मौसम बदला, इस बीच अच्छी बारिश हुई। ओडिशा में बने लो प्रेशर एरिया के कारण दक्षिण छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावना है।

वहीं तापमान की बात करें तो मंगलवार को सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 31.6° बिलासपुर में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 20.2°C दुर्ग में दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार तापमान में अगले तीन दिनों तक कोई विशेष बदलाव नहीं होगा।

सुकमा जिला मुख्यालय का ओडिशा से संपर्क टूटा

वहीं सुकमा जिला मुख्यालय का ओडिशा से संपर्क टूट गया है। लगातार बारिश से शबरी नदी उफान पर है। झापरा पुल के ऊपर से पानी बह रहा है। मार्ग बाधित होने से वाहनों के पहिए थम गए हैं।

सुकमा में शबरी नदी उफान पर है। झापरा पुल के ऊपर से पानी बह रहा है।

सुकमा में शबरी नदी उफान पर है। झापरा पुल के ऊपर से पानी बह रहा है।

पानी के दो रंग, शिवनाथ-तांदुला का संगम

दुर्ग जिले के भरदा गांव के पास शिवनाथ और तांदुला नदी के संगम की तस्वीर सामने आई है। इसमें पानी के दो रंग दिखाई दे रहे हैं। शिवनाथ का पानी मटमैला और तांदुला का पानी हरा है।

भूजल वैज्ञानिक एवं जल संरक्षण विशेषज्ञ विपिन दुबे बताते हैं कि बारिश में ज्यादातर नदियां मटमैली (भूरी या गंदी) दिखती हैं, क्योंकि तेज बहाव से मिट्टी, गाद, रेत और पत्थरों का बारीक चूरा पानी में मिल जाता है।

वहीं तांदुला नदी का पानी इसलिए हरा दिखाई दे रहा है, क्योंकि वह बारिश के बावजूद मिट्टी और गाद कम ला रही है या फिर उसमें शैवाल/खनिज का असर ज्यादा है।

दुर्ग जिले के भरदा गांव के पास शिवनाथ और तांदुला नदी के संगम की तस्वीर। पानी के दो रंग। ड्रोन तस्वीर भास्कर रिपोर्टर सुधीर सागर ने ली है।

दुर्ग जिले के भरदा गांव के पास शिवनाथ और तांदुला नदी के संगम की तस्वीर। पानी के दो रंग। ड्रोन तस्वीर भास्कर रिपोर्टर सुधीर सागर ने ली है।

1 जून से अब तक 772.2 मिमी बरसा पानी

1 जून से अब तक प्रदेश में 772.2 मिमी औसत बारिश हो चुकी है। बलरामपुर में सबसे ज्यादा 1142.9 मिमी पानी बरसा है। बेमेतरा में सबसे कम 368.1 मिमी बारिश हुई है।

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कोरबा

कोरबा में पावर प्लांट विस्तार का विरोध:ग्रामीणों ने कलेक्टर से शिकायत की, पूर्व मंत्री से भी हस्तक्षेप की मांग

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कोरबा। कोरबा जिले में निजी पावर प्लांट के 1600 मेगावाट विस्तार को लेकर विरोध शुरू हो गया है। प्रभावित ग्रामीणों ने कलेक्टर को शिकायत सौंपते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि संयंत्र प्रबंधन ने पहले किए गए रोजगार और पुनर्वास संबंधी वादों को अब तक पूरा नहीं किया है।

ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को पत्र लिखकर बताया कि लैंको संयंत्र (वर्तमान में निजी पावर प्लांट के नाम से संचालित है) की स्थापना वर्ष 2005-06 में हुई थी। उस समय भूमि अधिग्रहण और जनसुनवाई के दौरान कंपनी ने प्रत्येक भूमि प्रभावित परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने, चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, शिक्षा सुविधा देने का आश्वासन दिया था।

2012-13 के विस्तार में भी मिले थे आश्वासन

ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2012-13 में तीसरी और चौथी इकाई के विस्तार के समय भी यही आश्वासन दोहराए गए थे। उनका आरोप है कि उन वादों का भी पालन नहीं किया गया, जबकि तीसरी और चौथी इकाई का निर्माण कार्य लगातार आगे बढ़ता रहा। अब प्लांट में 1600 मेगावाट क्षमता की पांचवीं और छठवीं इकाई के विस्तार की तैयारी की जा रही है।

9 गांवों के 750 मकान प्रभावित होने की आशंका

ग्रामीण पूरन सिंह कश्यप ने बताया कि नए विस्तार से ग्राम सरगबुंदिया, अमलीभांठा, पहंदा, ढनढनी, संडेल, बरीडीह, खोड्डल, दर्राभाठा, पताढ़ी के लगभग 750 मकान प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि करीब चार हजार की आबादी सीधे तौर पर विस्थापन की स्थिति में आ जाएगी।

ग्रामीणों ने जताया फिर से ठगे जाने का डर

ग्रामीण अश्वनी कुमार तंवर ने कहा कि यदि फिर से भूमि अधिग्रहण किया जाता है और फिर से नए वादे किए जाते हैं, तो ग्रामीणों को एक बार फिर ठगे जाने का डर है।

ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि जब तक पूर्व में किए गए रोजगार और पुनर्वास संबंधी वादों की लिखित और वास्तविक पूर्ति नहीं होती, तब तक किसी नए अधिग्रहण का समर्थन नहीं किया जाएगा।

पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से हस्तक्षेप की मांग

सरगबुंदिया जनपद सदस्य रीना सिदार ने बताया कि ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से क्षेत्र के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि के रूप में जनहित के मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया है।

कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को दी शिकायत

गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर शिकायत दर्ज कराई और विस्तार योजना पर आपत्ति जताई। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुराने वादों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक किसी नए विस्तार को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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कोरबा

रामसागर पारा आंगनबाड़ी केंद्र पर ‘वजन उत्सव’ का आयोजन

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कोरबा। शासन के निर्देशानुसार कोरबा जिले के रामसागर पारा, वार्ड क्रमांक 1 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 03 में 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों का वजन उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम के तहत क्षेत्र के सभी बच्चों का एक-एक कर इलेक्ट्रॉनिक मशीन से वजन किया गया।

आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों के अभिभावकों को नियमित वजन कराने के महत्व एवं संतुलित और पौष्टिक आहार देने के संबंध में जानकारी दी गई। इस अवसर पर शिशुवती एवं गर्भवती माताओं को भी पोषण संबंधी आवश्यक सुझाव प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कल्पना हेड़ताल, राहिजा रविंद्रम, सुषमा राम, सहायिका विमल जगत, मितानिन कार्यकर्ता कृष्णा कुशवाहा, भगवती मरावी, संजना पटेल, मधु जगत, छाया मसीह सहित अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।

इसके अलावा उर्मिला पांडे, रश्मि मिश्रा, जय सिंह नेताम, संतोष गुप्ता एवं हर्ष शेखर पटेल सहित वार्ड के गणमान्य नागरिकों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

आंगनबाड़ी क्रमांक 3, रामसागर पारा (ठेला मोहल्ला), वार्ड क्रमांक 1 में आयोजित इस पहल का उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करना और कुपोषण की रोकथाम सुनिश्चित करना है। कार्यक्रम के सफल आयोजन से अभिभावकों में जागरूकता बढ़ी तथा बच्चों के समुचित विकास पर बल दिया गया।

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कोरबा

बालको की ‘कनेक्ट कोचिंग प्रोग्राम’ मेधावी युवाओं के सपने को कर रहा साकार

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बालकोनगर। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) के सामुदायिक विकास का उद्देश्य केवल शिक्षा सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है। इसी सोच के साथ बालको सामुदायिक विकास द्वारा समर्थित भोरमदेव विद्यापीठ के माध्यम से कबीरधाम जिले के दूरस्थ और संसाधन-विहीन क्षेत्रों के युवाओं को निःशुल्क कोचिंग, मार्गदर्शन एवं अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सकें।

इस पहल के अंतर्गत चयनित सभी 20 अभ्यर्थियों को अनुभवी शिक्षकों का निरंतर मार्गदर्शन मिल है। लाभान्वित अभ्यर्थी विभिन्न गांव और साधारण परिवार से आते हैं। किसी के माता-पिता खेती और मजदूरी पर निर्भर हैं, तो किसी के पास पढ़ाई के लिए सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं। कई विद्यार्थियों ने प्रतिदिन 10 से 15 किलोमीटर तक की दूरी तय कर बालको संचालित कोचिंग सेंटर में भाग लिया और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी तैयारे जारी रखी। संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए गए सहयोगपूर्ण और प्रेरणादायक वातावरण ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया और उन्हें अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की नई दिशा दी। आर्थिक सीमाएं, दूर-दराज से रोज़ाना यात्रा और संसाधनों की कमी उनके लिए बड़ी चुनौती थीं, लेकिन आगे बढ़ने का जज़्बा सभी में समान था।

किसान परिवार से आने वाली अनुपा के लिए सीमित संसाधनों के कारण प्रतियोगी परीक्षाएं कभी एक दूर का सपना हुआ करती थीं। यह सपना तब साकार होने लगा, जब उन्हें बालको कनेक्ट कोचिंग पहल द्वारा संचालित भोरमदेव विद्यापीठ कोचिंग कार्यक्रम से जुड़ने का अवसर मिला। कवर्धा जिले के छोटे से गांव मंझोली से निकलकर अनुपा ने अपने समाज की पहली बेटी बनकर सरकारी परीक्षा में सफलता हासिल की है। उन्होंने एसएससी-जीडी परीक्षा के माध्यम से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में चयन पाकर एक नई मिसाल कायम की है।

अनुपा कहती हैं कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से सरकारी परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब संसाधन और सही मार्गदर्शन उपलब्ध न हों। बालको के कनेक्ट कोचिंग पहल द्वारा समर्थित भोरमदेव विद्यापीठ कार्यक्रम ने मुझे एक व्यवस्थित वातावरण, निरंतर मेंटरशिप और अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने का आत्मविश्वास दिया। मैं बालको की बेहद आभारी हूं कि उन्होंने यह केंद्र शुरू किया और मुझ जैसी छात्राओं पर भरोसा किया। इस अवसर ने मेरी ज़िंदगी बदल दी है और मुझे उम्मीद है कि मेरे जैसे गांवों की और भी बेटियां बड़े सपने देखने का साहस करेंगी।

चयनित युवाओं ने अपनी सफलता का श्रेय बालको सामुदायिक विकास तथा भोरमदेव विद्यापीठ के शिक्षकों और प्रबंधन को देते हुए आभार व्यक्त किया है। साथ ही उन्होंने नौकरी के साथ-साथ भविष्य में उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखने का संकल्प भी लिया है।

इन सभी की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब बालको की सामुदायिक विकास पहल समुदाय की वास्तविक आकांक्षाओं को समझकर काम करती हैं, तो वे केवल सफलता का रास्ता नहीं खोलतीं, बल्कि ग्रामीण भारत की बेटियों के लिए नई संभावनाओं की परिभाषा ही बदल देती हैं। सही मार्गदर्शन, संसाधन और विश्वास मिल जाए, तो ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले युवा भी अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। बालको सामुदायिक विकास भविष्य में भी ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को अवसर प्रदान कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और एक सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य करता रहेगा।

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