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इजराइल का तेहरान पर बड़ा हमला: इजराइल ने उड़ाए ईरान के सैन्य ठिकाने, मिसाइल स्टोर और रिसर्च सेंटर बने निशाना !

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तेहरान/तेल अवीव/वाशिंगठन, एजेंसी। इज़राइल रक्षा बल (Israel Defense Forces (IDF) ने दावा किया है कि उसने तेहरान (Tehran) में कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं। इन हमलों में खासतौर पर  Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल स्टोरेज साइट्स को निशाना बनाया गया। इजराइली सेना के मुताबिक, इन हमलों का मकसद ईरान की सैन्य ताकत और उसके हथियार बनाने की क्षमता को कमजोर करना है। हमले उन ठिकानों पर भी किए गए जहां हथियारों की रिसर्च और डेवलपमेंट का काम चल रहा था।

इस बीच, Iran के दक्षिण-पश्चिमी Khuzestan प्रांत में स्थित कई पेट्रोकेमिकल कंपनियों पर भी हमले की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 5 लोग घायल हुए हैं और नुकसान काफी ज्यादा हो सकता है। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि Mahshahr Special Petrochemical Zone को खाली करा लिया गया है, क्योंकि आगे और हमलों का खतरा बना हुआ है।

तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका के दो फाइटर जेट भी ईरानी हमले में गिराए जाने की खबर आई। इनमें से एक पायलट को बचा लिया गया है, जबकि दूसरा अभी भी लापता है। यह पूरा संघर्ष 28 फरवरी से जारी है, जब Israel और United States ने मिलकर ईरान पर हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में ईरान लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है।कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में हालात बेहद गंभीर होते जा रहे हैं और बड़े युद्ध का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

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रूस का सबसे खतरनाक हमलाः ‘ओरेश्निक’ हाइपरसोनिक से दहलाया यूक्रेन, कीव में सैंकड़ों ड्रोन व मिसाइलों से रातभर धमाके

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मॉस्को/कीव, एजेंसी। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में रविवार को बड़ा और बेहद खतरनाक हमला देखने को मिला। यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने दावा किया कि रूस ने कीव पर हमले के दौरान अपनी शक्तिशाली हाइपरसोनिक “ओरेश्निक” बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया। रूस ने भी बाद में इस हमले की पुष्टि कर दी। यूक्रेन के मुताबिक, इस हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हो गए। राजधानी कीव में सरकारी कार्यालयों, रिहायशी इमारतों, स्कूलों और गोदामों को भारी नुकसान पहुंचा। कई इलाकों में आग लग गई और रातभर धमाकों की आवाजें सुनाई देती रहीं।

यूक्रेन की वायुसेना ने बताया कि रूस ने इस संयुक्त हमले में लगभग 600 ड्रोन और 90 मिसाइलें दागीं। हालांकि यूक्रेन ने दावा किया कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने 549 ड्रोन और 55 मिसाइलों को नष्ट कर दिया या रास्ते में रोक दिया। इसके बावजूद कुछ मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंच गईं। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि ओरेश्निक मिसाइल से कीव क्षेत्र के बिला त्सेरक्वा शहर को निशाना बनाया गया। यह मिसाइल परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाती है। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin पहले दावा कर चुके हैं कि ओरेश्निक मिसाइल ध्वनि की गति से 10 गुना तेज यानी मैक-10 की रफ्तार से हमला कर सकती है और कई मंजिल नीचे बने बंकरों को भी तबाह करने की क्षमता रखती है।

रूस ने पहली बार नवंबर 2024 में यूक्रेन के निप्रो शहर पर इस मिसाइल का इस्तेमाल किया था। इसके बाद जनवरी 2026 में पश्चिमी लवीव क्षेत्र में इसे दोबारा इस्तेमाल किया गया। अब कीव पर यह तीसरा बड़ा इस्तेमाल माना जा रहा है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह हमला यूक्रेन द्वारा रूसी इलाकों में किए गए हमलों के जवाब में किया गया। रूस का दावा है कि उसने यूक्रेन के सैन्य कमांड सेंटर, एयरबेस और सैन्य उद्योगों को निशाना बनाया। वहीं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस और यूक्रेन ने एक-दूसरे पर युद्ध अपराधों के आरोप लगाए। यूक्रेन ने रूस पर नागरिक इलाकों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया, जबकि रूस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।

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पाकिस्तान में आतंकियों का कहरः शांति समिति के 4 सदस्यों की निर्मम हत्या, एक को अगवा किया

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खैबर पख्तूनख्वा, एजेंसी। पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में रविवार को आतंकवादियों ने बड़ा हमला कर दिया।यह हमला Dera Ismail Khan जिले की कुलाची तहसील में हुआ, जहां स्थानीय शांति समिति के सदस्यों को निशाना बनाया गया। पुलिस के मुताबिक, भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने घात लगाकर समिति के सदस्यों पर अंधाधुंध गोलीबारी की। इस हमले में चार सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। हमलावरों ने सिर्फ हमला ही नहीं किया, बल्कि समिति के एक सदस्य का अपहरण भी कर लिया। इसके अलावा आतंकवादी वहां मौजूद अन्य सदस्यों के हथियार भी लूटकर फरार हो गए।

घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। सुरक्षा बलों ने तुरंत इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। अब तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत लंबे समय से आतंकवादी गतिविधियों और उग्रवादी हमलों से प्रभावित रहा है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस का कहना है कि आतंकियों की तलाश जारी है और जल्द ही हमलावरों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है।

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अमेरिका-ईरान वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल; दोहरी नीति पर नई बहस शुरू, विश्वास के लायक नहीं इस्लामाबाद

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तेहरान/तेल अवीव/वाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान खुद इस क्षेत्रीय संघर्ष के कई पक्षों से जुड़ा हुआ है, इसलिए वह निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाने में मुश्किलों का सामना कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने पाकिस्तान को ईरान तक पहुंच बनाने के लिए महत्वपूर्ण चैनल माना है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान की अपनी सैन्य और राजनीतिक भागीदारी उसे पूरी तरह तटस्थ नहीं रहने देती।

सबसे बड़ा विवाद उस समय सामने आया जब अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि पाकिस्तान ने अप्रैल युद्धविराम के बाद ईरानी सैन्य विमानों को रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर रुकने की अनुमति दी थी। पाकिस्तान ने इन खबरों को “भ्रामक” बताया, लेकिन यह स्वीकार किया कि ईरानी विमान वहां मौजूद थे।आलोचकों का कहना है कि अगर कोई देश एक पक्ष के सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर जगह देता है, तो दूसरे पक्ष के लिए उसे निष्पक्ष मध्यस्थ मानना मुश्किल हो जाता है। अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने भी कहा था कि अगर यह रिपोर्ट सही है, तो अमेरिका को किसी दूसरे मध्यस्थ की तलाश करनी चाहिए।

हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने पाकिस्तान की तारीफ करते हुए उसे “महान” साझेदार बताया। रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रंप और पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर (Asim Munir) के व्यक्तिगत रिश्ते इस वार्ता में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि पाकिस्तान ने हाल ही में सऊदी अरब में हजारों सैनिक, लड़ाकू विमान, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं। चूंकि सऊदी अरब और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव रहा है, इसलिए इससे पाकिस्तान की निष्पक्षता पर और सवाल उठे हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (Khawaja Asif) के कुछ पुराने बयान भी विवाद का कारण बने हैं।

उन्होंने इजराइल के खिलाफ बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था और भारत व इजराइल को मुस्लिम दुनिया का “स्थायी दुश्मन” बताया था। रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे बयानों से पाकिस्तान की मध्यस्थ छवि कमजोर होती है।  दिलचस्प बात यह है कि ईरान के कुछ नेताओं ने भी पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह जताया है। ईरानी सांसद इब्राहिम रेजाई ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा अमेरिकी हितों के हिसाब से चलता है और इसलिए वह भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं माना जा सकता। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि पाकिस्तान संदेश पहुंचाने का माध्यम तो बन सकता है, लेकिन किसी बड़े शांति समझौते की गारंटी देने वाला निष्पक्ष पक्ष नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान को स्थायी समाधान चाहिए, तो उन्हें ऐसे देशों की मदद लेनी होगी जिनके हित पूरी तरह पारदर्शी हों।

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