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भारतीय कारोबारी पर अमेरिकी शिकंजा, नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई शुरू

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वॉशिंगटन, एजेंसी। अमेरिका ने गंभीर अपराधों और कथित आव्रजन धोखाधड़ी के मामलों में 17 लोगों की नागरिकता रद्द (डिनैचुरलाइजेशन) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें भारतीय मूल के  नीरज शर्मा भी शामिल हैं, जिन पर फर्जी एच-1बी वीजा दस्तावेजों का उपयोग करने और नागरिकता प्रक्रिया के दौरान गलत जानकारी देने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, न्यूजर्सी स्थित प्लेसमेंट फर्म मैग्नाविजन एलएलसी के मालिक नीरज शर्मा ने कथित तौर पर 11 एच-1बी वीजा आवेदनों पर हस्ताक्षर किए थे। इन आवेदनों में दावा किया गया था कि संबंधित कर्मचारी एक वैश्विक वित्तीय संस्थान में काम करेंगे।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि एच-1बी वीजा आवेदनों के समर्थन में जमा किए गए कुछ दस्तावेजों में संबंधित वित्तीय संस्थान के अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर थे। अधिकारियों का कहना है कि इन दस्तावेजों के आधार पर वीजा प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई। न्याय विभाग के मुताबिक, नीरज शर्मा ( Neeraj Sharma) ने वर्ष 2017 में अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि नागरिकता साक्षात्कार के दौरान उन्होंने अपने कथित आपराधिक आचरण और गतिविधियों के बारे में सही जानकारी नहीं दी। शर्मा को दिसंबर 2017 में अमेरिकी नागरिकता प्रदान कर दी गई थी। बाद में उन्हें अप्रैल 2015 से अप्रैल 2017 के बीच वीजा धोखाधड़ी और आव्रजन नियमों के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि नागरिकता केवल उन्हीं लोगों को मिलनी चाहिए जो कानून का पालन करते हैं और आवेदन प्रक्रिया के दौरान पूरी ईमानदारी बरतते हैं।

Markwayne Mullin ने कहा कि अमेरिकी नागरिकता एक विशेषाधिकार है और यदि कोई व्यक्ति आव्रजन प्रक्रिया में झूठ बोलता है या महत्वपूर्ण जानकारी छिपाता है, तो उससे यह विशेषाधिकार वापस लिया जा सकता है। न्याय विभाग ने जिन अन्य 16 लोगों के खिलाफ नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की है, उनमें विभिन्न गंभीर अपराधों के आरोपी या दोषी ठहराए गए व्यक्ति शामिल हैं। इनमें यौन अपराध, बाल शोषण और अश्लील सामग्री से जुड़े मामलों में दोषी पाए गए लोग भी शामिल हैं। गौरतलब है कि अमेरिकी आव्रजन और नागरिकता अधिनियम (Immigration and Nationality Act) के तहत यदि कोई व्यक्ति गैरकानूनी तरीके से, महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर या जानबूझकर गलत जानकारी देकर नागरिकता प्राप्त करता है, तो अदालत के आदेश के माध्यम से उसकी नागरिकता रद्द की जा सकती है। यह प्रक्रिया नागरिकता मिलने के कई वर्षों बाद भी शुरू की जा सकती है, यदि अधिकारियों को धोखाधड़ी या तथ्य छिपाने के प्रमाण मिलते हैं।

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सस्ता होगा सोना, 20 हजार रुपए तक गिर सकते हैं दाम, एक्सपर्ट्स का अनुमान

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मुंबई, एजेंसी। साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अब सोने की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। जनवरी में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,595 डॉलर प्रति औंस का ऑल-टाइम हाई का लेवल छूने के बाद सोना अब 27 फीसदी तक टूट चुका है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने में 16 फीसदी तक और गिरावट आ सकती है, यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3,400 से 3,500 डॉलर प्रति औंस के दायरे तक पहुंच सकता है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा, जहां सोने की कीमतों में करीब 20,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक की गिरावट संभव बताई जा रही है।

कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में सोने की कीमतों में असाधारण तेजी आई थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट को तकनीकी करेक्शन के तौर पर देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लंबी अवधि में सोने का रुख अब भी सकारात्मक बना हुआ है लेकिन निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

क्यों सस्ता होगा सोना?

विशेषज्ञों के अनुसार, सोने पर दबाव बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी सोने की मांग को प्रभावित किया है। डॉलर मजबूत होने पर अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी खरीदारी घटती है।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर सोने के लिए एक अहम सपोर्ट जोन है। हालांकि, यदि वैश्विक बाजारों में बिकवाली का दबाव और बढ़ता है तो कीमतें अस्थायी रूप से 3,500 डॉलर तक भी जा सकती हैं। इसके बावजूद लंबी अवधि के लिए सोने को लेकर विशेषज्ञ आशावादी बने हुए हैं। उनका अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में सोना एक बार फिर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है।

केंद्रीय बैंक लगातार गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे 

सोने को समर्थन देने वाले प्रमुख कारकों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी शामिल है। कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं, जिससे बाजार में सोने की मांग बनी हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हालिया सर्वे के अनुसार, अधिकांश केंद्रीय बैंक अगले 12 महीनों में भी अपने स्वर्ण भंडार में वृद्धि करने की योजना बना रहे हैं। पिछले चार वर्षों में केंद्रीय बैंकों ने औसतन 1,000 टन सोना खरीदा है, जो पिछले दशक के औसत से कहीं अधिक है।

निवेशकों के लिए सलाह

का कहना है कि आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक जोखिम और महंगाई की आशंकाओं के बीच सोना अब भी सुरक्षित निवेश विकल्प बना हुआ है। ऐसे में अल्पकालिक गिरावट के बावजूद लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमतों में आने वाली कमजोरी को चरणबद्ध खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, निवेश से पहले बाजार की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना जरूरी रहेगा।

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RBI के लक्ष्य से पार पहुंची महंगाई, जून में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.38%

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मुंबई, एजेंसी। जून 2026 में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर मानसून की आशंकाओं के चलते महंगाई पर दबाव बना रहा। 6 महीनों में यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के टारगेट 4% के पार निकली है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में खुदरा महंगाई दर 3.93 फीसदी थी, जो जून में बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई।

RBI का क्या है महंगाई लक्ष्य?

भारतीय रिजर्व बैंक का लक्ष्य खुदरा महंगाई को 4 फीसदी पर बनाए रखना है। हालांकि, केंद्रीय बैंक को इसे 2 फीसदी से 6 फीसदी के दायरे में रखने की अनुमति है। यह लक्ष्य अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निर्धारित की गई है।

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देश का निर्यात जून में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर पर, व्यापार घाटा 30.43 अरब डॉलर

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश का निर्यात जून महीने में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर रहा। इस दौरान व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयात जून माह में करीब 31 प्रतिशत बढ़कर 70.84 अरब डॉलर रहा। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में निर्यात 15.92 प्रतिशत बढ़कर 129.32 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 19.89 प्रतिशत बढ़कर 216.18 अरब डॉलर हो गया। 

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सोने का आयात बढ़कर 11.01 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल अप्रैल-जून में 7.49 अरब डॉलर था। 

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि जून में पश्चिम एशियाई देशों को भारत का निर्यात 7.29 प्रतिशत बढ़कर पांच अरब डॉलर हो गया। अग्रवाल ने कहा कि कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कीमती धातुओं के आयात बढ़ने के कारण कुल आयात बढ़ा है।

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