नई दिल्ली,एजेंसी। हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन (24 जुलाई से लेकर 7 अगस्त) तक बारिश-बाढ़, लैंडस्लाइड से जुड़ी घटनाओं में 366 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य सरकार को ₹4 लाख करोड़ की संपत्ति का नुकसान भी हुआ है। शिमला में 116% और कुल्लू में 113% बारिश हुई, जो सामान्य से दोगुनी है।
पंजाब के सभी 23 जिले अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य में अगले 3 दिन बारिश का अलर्ट नहीं है, लेकिन लुधियाना का ससराली बांध टूटने का खतरा बना हुआ है। पीएम मोदी 9 सितंबर को बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा करेंगे।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के नौगांव में शनिवार शाम को बादल फटा। बाजार और कई घरों में पानी-मलबा घुस गया। सड़क पर खड़ी कई गाड़ियां भी बह गईं। उत्तर प्रदेश के मथुरा में यमुना नदी शहर से 1 किमी दूर तक पहुंच गई है। घाट किनारे के आश्रमों में 5 फीट तक पानी भरा है। वृंदावन परिक्रमा मार्ग पानी में डूबा है।
राजस्थान के राजसमंद में शनिवार को तेज बारिश से नेशनल हाईवे-162 (राजसमंद-जोधपुर) का आधा हिस्सा बह गया।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के नौगांव में शनिवार शाम को बादल फट गया। इससे सड़क पर खड़ी कई गाड़ियां भी बह गईं।
हिमाचल के सिरमौर के नौहराधार में शनिवार को पूरा पहाड़ नदी में आ गया। हालांकि, जहां लैंडस्लाइड हुई वहां कोई बस्ती नहीं थी।
गुजरात और राजस्थान में बारिश का रेड अलर्ट
मौसम विभाग ने रविवार को महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में बारिश का रेड अलर्ट, गोवा में ऑरेंज और MP-बिहार समेत 20 राज्यों में यलो अलर्ट जारी किया है।
हरियाणा: हिसार में छत गिरी, मलबे में लड़का दबा
हिसार में बारिश के कारण एक मकान की छत गिर गई, जिससे 17 साल का लड़का घायल हो गया। यह हादसा बरवाला शहर में देर रात को शहर के वार्ड नंबर 18 में हुआ। घायल हुए प्रिंस को तुरंत अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हड्डियों में फ्रैक्चर होने की पुष्टि की है।
पीड़ित परिवार के मुखिया बलवंत ने बताया कि पिछले कई दिनों से हो रही लगातार बारिश का पानी छत और दीवारों में भर गया था। इसी कारण मकान की दीवारों में दरारें आने लगी थीं। देर रात प्रिंस कमरे में बैठा हुआ था कि अचानक छत गिर गई। छत गिरने से प्रिंस मलबे के नीचे दब गया। आसपास के लोगों ने तुरंत उसे बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया।
PM मोदी 9 सितंबर को बाढ़ प्रभावित पंजाब का दौरा करेंगे
पीएम मोदी बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए 9 सितंबर को पंजाब का दौरा करेंगे। भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने रविवार को यह जानकारी दी। इससे पहले, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब का दौरा किया था। पंजाब में बाढ़ के कारण अब तक 46 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1.75 लाख हेक्टेयर की फसलें बर्बाद हो गई हैं।
उत्तर प्रदेश: इटावा में यमुना से 7 गांवों में बाढ़
इटावा के चकरनगर क्षेत्र में चंबल और यमुना नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ आ गई है। यमुना चेतावनी बिंदु 120.92 मीटर को पार कर 121.66 मीटर तक पहुंच गई है, जो खतरे के निशान से मात्र 26 सेंटीमीटर नीचे है। बाढ़ से 7 गांवों के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। सिद्धनाथ मंदिर और कई प्रमुख मार्ग जलमग्न होकर बंद हो गए हैं।
गुजरात के 7 जिलों में रेड, 18 जिलों में ओरेंज अलर्ट
बनासकांठा में मवेशी चरा रहे 8 लोग साबरमती नदी की बाढ़ में फंस गए थे, जिन्हें SDRF की टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला।
गुजरात में रविवार को कई जिलों के लिए बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में कच्छ, बनासकांठा, पाटण, मोरबी, वलसाड, दमन, दादर और नगर हवेली शामिल हैं।
वहीं, सुरेंद्रनगर, राजकोट, जामनगर, देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जूनागढ़, गिर सोमनाथ, दीव, अमरेली, भावनगर, बोटाद, अहमदाबाद, मेहसाणा, गांधीनगर, साबरकांठा, नवसारी, सूरत और तापी में तेज बारिश का ऑरेंज अलर्ट है।
NDRF की 12 और SDRF की 20 टीमें तैनात राज्य में आज बहुत तेज बारिश का अनुमान है। इसके चलते NDRF की 12 और SDRF की 20 टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। इधर, वडोदरा में NDRF की एक टीम रिजर्व में रखी गई है।
जम्मू: कटरा-संगलदान के बीच स्पेशल ट्रेन सर्विस की शुरुआत
लगातार बारिश और फ्लैश फ्लड के कारण जम्मू-कश्मीर रियासी और रामबन में फंसे टूरिस्ट्स को निकालने के लिए रेलवे विभाग ने कटरा (SVDK) और संगलदान (SGDN) के बीच फ्लड स्पेशल लोकल ट्रेन सर्विस शुरू करने का निर्णय लिया है। यह सर्विस 8 सितंबर (सोमवार) से 12 सितंबर (शुक्रवार) तक अस्थायी तौर पर चलेगी।
MP के इंदौर में 787.4mm बारिश हुई
एमपी के इंदौर में जिले की बारिश का औसत 38 इंच है। अब तक 787.4mm बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। इंदौर शहर में 870.712mm बारिश हो चुकी है। जिले में सबसे ज्यादा देपालपुर में 1016mm से ज्यादा बारिश हो चुकी है, जबकि सबसे कम गौतमपुरा में 569.976mm इंच हुई है।
इंदौर जिले को अब 177.8mm और शहर को 88.9mm बारिश की जरूरत है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार इंदौर में औसत से अधिक बारिश हो सकती है। अभी भी मप्र के ऊपर एक स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 7 दिन तक मध्य प्रदेश में और अच्छी बारिश होने का अनुमान है।
पंजाब में बाढ़ की मौजूदा स्थिति…
23 जिलों में बाढ़ का असर: 23 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें अमृतसर, बरनाला, बठिंडा, फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, फिरोजपुर, फाजिल्का, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, मलेरकोटला, मानसा, मोगा, पठानकोट, पटियाला, रूपनगर, संगरूर, एसएएस नगर, श्री मुक्तसर साहिब, एसबीएस नगर और तरनतारन शामिल हैं।
1996 गांव डूबे: राज्य के 1996 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। अमृतसर के 195, गुरदासपुर के 329, बरनाला के 121, बठिंडा के 21, फिरोजपुर के 108, होशियारपुर के 173, कपूरथला के 145, पठानकोट के 88, मोगा के 52, जालंधर के 93, फाजिल्का के 80, फरीदकोट के 15, लुधियाना के 77, मुक्तसर के 23, एसबीएस नगर के 28, एसएएस नगर के 15, संगरूर के 107 और मानसा के 95 गांव ज्यादा प्रभावित हैं। इसके अलावा मलेरकोटला के 12, पटियाला में 105, रूपनगर में 44 और तरनतारन में 70 गांव पानी में घिरे हुए हैं।
3.84 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित: कुल 3,87,013 से अधिक लोग अब तक प्रभावित हो चुके हैं। सबसे ज्यादा असर अमृतसर (1,36,105), गुरदासपुर (1,45,000) और फाजिल्का (24,930) में देखने को मिला है। इसके अलावा फिरोजपुर, कपूरथला, मोगा, संगरूर और मोहाली में भी हजारों लोग संकट में हैं।
46 लोगों की अब तक मौत हुई: अब तक 12 जिलों में 46 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें अमृतसर (7), बरनाला (5), बठिंडा (4), होशियारपुर (7), लुधियाना (4), मानसा (3), पठानकोट (6), गुरदासपुर (2), एसएएस नगर (2), फिरोजपुर (1), फाजिल्का (1), रूपनगर (1), पटियाला (1) और संगरूर (1) शामिल हैं। पठानकोट जिले से 3 लोग लापता हैं। वहीं, पशुधन हानि का सटीक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है, लेकिन बड़ी संख्या में पशु बाढ़ की चपेट में आए हैं।
22,854 लोगों को सुरक्षित निकाला: कुल 21,854 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकाला गया है। इनमें फिरोजपुर में 3888, अमृतसर से 3260, बरनाला से 627, होशियारपुर से 1616, कपूरथला से 1428, जालंधर से 511, मोगा से 155, रूपनगर से 248, पठानकोट से 1139 और तरनतारन से 21 लोग शामिल हैं।
219 राहत शिविर सक्रिय: राज्यभर में 219 राहत शिविर सक्रिय हैं, जिनमें अमृतसर, बरनाला, बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, मोगा, मोहाली, पठानकोट, पटियाला, रूपनगर, संगरूर और एसएएस नगर शामिल हैं। इन शिविरों में 7377 लोग रह रहे हैं।
बाढ़ से अब तक 1,74,454 हेक्टेयर फसल प्रभावित: पंजाब में बाढ़ से अब तक 1,74,454 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। सबसे ज्यादा नुकसान गुरदासपुर (40,169) में हुआ।
लुधियाना/महाराष्ट्र,एजेंसी। महाराष्ट्र के नांदेड़ में गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर हमला हुआ। पुलिस के मुताबिक, गुरुद्वारा माता साहिब कौर में एक निहंग ने उन पर कृपाण से हमला किया। बादल के हाथ में चोट लगी है। हमले के दौरान उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी भी घायल हो गया। घटना दोपहर करीब 1 बजे की बताई जा रही है। पुलिस ने हमले के आरोपी निहंग जसपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। सुखबीर बादल परिवार के साथ नांदेड़ के गुरुद्वारे में माथा टेकने पहुंचे थे। हमले के बाद उन्हें यशोसाई अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सुखबीर बादल पर 4 दिसंबर 2024 को भी हमला हुआ था। गोल्डन टेंपल में सेवादार की धार्मिक सजा भुगतने के दौरान उन पर फायरिंग की गई थी।
सुखबीर सिंह बादल ने अपने परिवार के साथ तख्त श्री हजूर साहिब में मत्था टेका।
हमले के बाद सुखबीर सिंह बादल को अस्पताल ले जाया गया।
यशोसाईं अस्पताल के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
हमले से पहले बादल अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल के साथ नांदेड़ में तख्त श्री हजूर साहिब गए थे।
महाराष्ट्र सीएम फडणवीस ने जांच के आदेश दिए
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक से बात की और सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की जांच के आदेश दिए।
इस हमले के दौरान बादल के सुरक्षाकर्मी संतोष हेगड़े ने भी हमलावर को रोकने का प्रयास किया, जिसमें वह भी घायल हुआ। हमलावर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। घटना से जुड़े CCTV फुटेज तथा चश्मदीद लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है।
हमलावर को सम्मानित करने का दावा
इस घटना के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि हमला करने वाले निहंग जसपाल सिंह को सम्मानित किया गया। हालांकि, वीडियो को लेकर किए जा रहे दावे की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दावा है कि जिस निहंग को दस्तार बांधा जा रहा है उसी ने हमला किया है। मौके पर एक पुलिसवाला भी मौजूद है, जो बाद में इसे पकड़कर ले गया।
अकाली दल के प्रवक्ता बोले- सिख धर्म विरोधी ताकतों की साजिश
इस मामले में अकाली दल के प्रवक्ता एडवोकेट अर्शदीप सिंह कलेर ने कहा कि सुखबीर बादल पूरी तरह स्वस्थ हैं। मामला महाराष्ट्र का है, इसलिए वहां की पुलिस जांच करेगी कि हमलावर कौन है?। उसने किसके कहने पर हमला किया?।उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे कुछ सिख धर्म विरोधी ताकतों की साजिश हो सकती है।
अकाल तख्त जत्थेदार ने कहा- हमलावर सच्चा सिख नहीं
इस बारे में सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब ऐसी जगह है, जहां श्रद्धालु सभी की भलाई के लिए अरदास करने आते हैं। सच्चा सिख किसी ऐसे व्यक्ति पर हमला नहीं कर सकता, जो गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने आया हो। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से गुरुद्वारों की मर्यादा को ठेस और पूरे सिख समुदाय की छवि को नुकसान पहुंची है।
2024 में भी हुआ था हमला
गोल्डन टेम्पल में सुखबीर सिंह बादल पर दिसंबर 2024 में हुए हमले की तस्वीर।
एक बुजुर्ग व्यक्ति भीड़ के बीच से धीरे-धीरे सुखबीर बादल की ओर बढ़ा। उसने अपनी जेब से 9mm की पिस्टल निकाली और सीधे बादल पर निशाना साधकर गोली चला दी।
सुखबीर सिंह बादल पर 4 दिसंबर 2024 को अमृतसर के गोल्डन टेंपल के प्रवेश द्वार पर जानलेवा फायरिंग की गई थी। इसमें वह बाल-बाल बच गए थे।
यह हमला उस समय हुआ था जब वह अकाल तख्त की ओर से सुनाई गई एक धार्मिक सजा (तनखैया) काट रहे थे।
सुखबीर बादल को सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त ने धार्मिक रूप से दोषी घोषित किया था। यह सजा अकाली दल सरकार के दौरान हुई गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं के प्रायश्चित के रूप में दी गई थी।
उस दिन उनकी सजा का दूसरा दिन था। पैर में फ्रैक्चर होने के कारण वह व्हीलचेयर पर बैठे थे। गले में पट्टी लटकी हुई थी, नीली पोशाक पहने थे और हाथ में भाला लेकर द्वार पर पहरेदार के रूप में सेवा दे रहे थे।
नई दिल्ली, एजेंसी। देश के मध्य और पूर्वी हिस्से में मानसून एक्टिव है। मध्यप्रदेश, राजस्थान के कई इलाकों में लगातार तीसरे दिन भारी बारिश से हालात खराब हैं। इसकी वजह तीन मानसूनी सिस्टम हैं। इनके कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी आ रही है।
भोपाल में बुधवार को लगातार तीसरे दिन स्कूलों में छुट्टी है। यहां दो दिनों में 8.57 इंच बारिश हुई। करीब 200 मकानों में ढाई फीट तक पानी भर गया। रतलाम, झाबुआ, धार, बड़वानी और इंदौर में अगले 24 घंटे में यहां 4 इंच से ज्यादा बारिश का अनुमान है।
उधर, राजस्थान में खोखी बांध की दीवार टूटने से 300 बीघा फसल खराब हो गई है। कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की टनल के एक हिस्से में दो-तीन फीट तक पानी भरा हुआ है।
वहीं, उत्तर प्रदेश में पिछले 2 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मंगलवार को पानी भर गया था। इसका वीडियो आज सामने आया है। वाराणसी में घाटों की सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है। 100 से ज्यादा छोटे मंदिर डूब गए हैं।
सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति
देशभर से मौसम की तस्वीरें
मध्य प्रदेश में पिछले तीन दिनों से बारिश हो रही है। वहीं, शिवपुरी में NH-46 पर करीब एक फीट तक पानी भर गया। इससे काफी देर तक जाम लगा रहा। प्रदेश में अब तक 19.6 इंच बारिश हो चुकी है।
राजस्थान में पिछले 3 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की टनल में पानी भर गया है। इस वजह से बुधवार सुबह से यहां लंबा जाम लगा हुआ है। पिछले दो दिनों से ट्रैफिक रेंग-रेंगकर चल रहा है।
उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बारिश के बाद पानी भर गया था। एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, इससे फ्लाइट ऑपरेशन और यात्रियों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा। घटना मंगलवार की है, जिसका वीडियो अब वायरल हो रहा है।
मुंबई में कुर्ला के अशोक नगर इलाके में बुधवार सुबह 3 बजे गौसिया चॉल के पास बारिश की वजह से मिट्टी का बड़ा हिस्सा गिर गया। इसकी चपेट में दो-तीन घर आ गए। महाराष्ट्र के कई इलाकों में 24 घंटे से बारिश हो रही है।
उत्तराखंड के चमोली की नीति घाटी में दो दिन पहले बादल फटने से तमक नाला उफान पर आ गया था। तेज बहाव में 17 टन स्टील से बना वैली ब्रिज बह गया। अब नाले पर अस्थायी ब्रिज बनाने का काम किया जा रहा है।
हिमाचल के शिमला-धर्मशाला NH-205 पर भराड़ीघाट के पास मंगलवार को चलती कार पर बड़ी चट्टान गिर गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 2 लोग घायल हो गए। राज्य में लैंडस्लाइड से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है।
मुंबई, एजेंसी। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने आज 12 अगस्त को इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एजीएम से ठीक पहले आया है। हालांकि, वे फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे।
चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के साथ सहमति नहीं बन पाई थी। नए कारोबारों में भारी निवेश, उनके प्रदर्शन और टाटा संस के भविष्य को लेकर मतभेद इस फैसले की बड़ी वजह बने।
एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर के बाद टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में गिरावट है। टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा कंज्यूमर के शेयर 3% तक नीचे हैं।
चंद्रशेखरन ने इस्तीफा देते हुए क्या कहा
चंद्रशेखरन ने कहा कि, “टाटा संस के चेयरमैन के रूप में मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके मेरे अगले 5 साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की थी।
इसे टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी और बोर्ड ने दर्ज किया था और आगे बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद, यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया था।
हालांकि, यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया। सर्वसम्मत समर्थन न मिलने की वजह से मैंने इस फैसले को टालने का विकल्प चुना। उस बोर्ड मीटिंग को हुए 6 महीने बीत चुके हैं और आज तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।
टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और कई बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट्स अभी अहम मोड़ पर हैं। फरवरी 2027 के बाद ग्रुप की अगुआई करने के लिए न सिर्फ एक लीडर का होना जरूरी है, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों, पार्टनर्स और बाकी स्टेकहोल्डर्स के लिए लीडरशिप को लेकर स्पष्टता होना भी बहुत जरूरी है।”
इस्तीफे की 4 बड़ी वजह
चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने पर मतभेद
फरवरी 2026 में टाटा संस बोर्ड ने चंद्रशेखरन के अगले 5 साल के कार्यकाल की सिफारिश की थी। बाद में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया और सिर्फ 2 साल का कार्यकाल देने की वकालत की।
24 फरवरी 2026 को 5 साल के विस्तार का प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा गया। एक सदस्य के समर्थन न देने से इस पर सहमति नहीं बन सकी है।
नए कारोबारों के प्रदर्शन पर सवाल
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने एविएशन, डिजिटल कारोबार, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और बैटरी जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। इनमें से कुछ कारोबार अभी घाटे में हैं।
एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस को FY26 में कुल रू.22,238 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि टाटा डिजिटल का घाटा रू.4,974 करोड़ रहा। इन्हीं मुद्दों पर नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के प्रदर्शन को लेकर आपत्ति जताई थी।
टाटा संस की लिस्टिंग हो या नहीं
टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए या निजी कंपनी ही रखा जाए, इस पर टाटा ट्रस्ट्स के अंदर अलग-अलग राय सामने आई। नोएल टाटा लिस्टिंग के पक्ष में नहीं बताए जाते हैं, जबकि कुछ ट्रस्टी लिस्टिंग की वकालत कर चुके हैं।
टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच तालमेल
टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है, इसलिए दोनों के बीच बड़े फैसलों पर सहमति बेहद अहम है। नए कारोबारों की रणनीति, निवेश और चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर मतभेदों से दोनों के बीच तालमेल का सवाल भी सामने आया।
चंद्रशेखरन का 9 साल का सफर: रेवेन्यू रू.16.24 लाख करोड़ पहुंचा
चंद्रशेखरन के 2017 में कमान संभालने के बाद टाटा ग्रुप का दायरा काफी बढ़ा है। चंद्रशेखरन ने ग्रुप को एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे नए क्षेत्रों में उतारा।
रेवेन्यू: वित्त वर्ष 2020 में ग्रुप का रेवेन्यू रू.7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर रू.16.24 लाख करोड़ हो गया।
मुनाफा: ग्रुप का मुनाफा रू.32,000 करोड़ से बढ़कर रू.1.71 लाख करोड़ हो गया।
मार्केट कैप: लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 2020 के रू.9.31 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में रू.24.39 लाख करोड़ पहुंच गया।
टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में फर्क
टाटा ग्रुपः टाटा नाम से चलने वाली अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों को मिलाकर टाटा ग्रुप बनता है। जैसे- टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एअर इंडिया।
टाटा संसः टाटा संस, टाटा ग्रुप की मुख्य कंपनी है। यह ग्रुप की बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।
टाटा ट्रस्ट्सः टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक और परोपकारी काम करने वाले ट्रस्टों का समूह है। इसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।
कैसे चुना जाएगा नया चैयरमैन
टाटा संस के चेयरमैन को चुनने की प्रक्रिया में पहले चयनसमिति उम्मीदवारों पर विचार करती है। इस समिति में टाटा ट्रस्ट्स की ओर से नामित सदस्य, टाटा संस बोर्ड का एक सदस्य और एक स्वतंत्र बाहरी सदस्य शामिल होते हैं।
समिति उम्मीदवार के नाम की सिफारिश टाटा संस के बोर्ड से करती है। बोर्ड उम्मीदवार की योग्यता और ग्रुप की जरूरतों को देखते हुए अंतिम नियुक्ति का फैसला करता है। अगर मौजूदा चेयरमैन को ही जारी रखना हो, तो उनके कार्यकाल के विस्तार पर भी इसी प्रक्रिया के तहत फैसला होता है।