काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ के बाद अब तक 359 शव बरामद किए जा चुके हैं। सबसे ज्यादा चितवन जिले में 132 शव मिले हैं। बड़ी संख्या में डेड-बॉडी मिलने से उन्हें सुरक्षित रखने के लिए जगह कम पड़ रही है। चितवन की मॉर्चुरी (शवगृह) में सिर्फ 50 डेड-बॉडी रखने की सुविधा है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत-बचाव और लापता लोगों की तलाश जारी है। करीब 1,500 लोगों की तलाश की जा रही है। भारत के 288 नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 73 भारतीय भी शामिल हैं।
बाढ़ में फंसे 21 भारतीयों को बचाया गया है, जिनमें से 11 की पहचान हो चुकी है। नेपाल में सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं।
त्रिशूली नदी में आई अचानक बाढ़ के बाद एक महिला को बचावकर्मी अर्थमूवर मशीन की मदद से सुरक्षित स्थान पर ले जाते हुए
पहाड़ से उतर रही नदी ने तबाही मचाई
नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटे कोशी नदी में पानी का तेज बहाव नीचे आता दिख रहा है।
जैसे-जैसे नदी का पानी नीचे आया उसकी रफ्तार और ऊंचाई और ज्यादा हो गई।
भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने रास्ते में आने वाले घरों को तबाह कर दिया।
जान बचाने की जद्दोजहद
मलबे का बहाव तेजी से नीचे आया। लोग जान बचाने के लिए भागते नजर आए।
30 फीट ऊंची लहरें उठ रही थीं। लोग जान बचाने के लिए घर की तीसरी-चौथी मंजिल पर चढ़ गए।
लैंडस्लाइड से 5.2 तीव्रता के भूकंप जितना झटका
बुधवार सुबह 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस किए गए। शुरुआत में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया था।
लेकिन बाद में पता चला कि पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में गिरा था। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है।
बाद में USGS ने भी स्पष्ट किया कि 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा यह झटका लैंडस्लाइड के कारण पैदा हुआ था।
नेपाल के नुवाकोट जिले में बाढ़ से मची तबाही का मंजर
1 – भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद नुवाकोट में मलबे रिहायशी इलाकों में घुसा
2- बाढ़ के बाद घुटनों तक कीचड़ जमा
3. नुवाकोट में बाढ़ के बाद घर क्षतिग्रस्त हुए
4. बाढ़ के बाद मलबे से भरे पानी में डूबे घर
त्रिशूली में बाढ़ के बाद राहत-बचाव अभियान जारी
नेपाल के त्रिशूली इलाके में बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है।
प्रभावित इलाकों, खासकर रसुवा तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए गुरुवार को काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से निजी हेलिकॉप्टरों की 40 से ज्यादा चार्टर्ड उड़ानें रवाना हुईं।
शव मिल रहे, रखने की जगह कम
नेपाल में रसुवा की बाढ़ के बाद 289 शव बरामद हो चुके हैं, लेकिन अब उन्हें सुरक्षित रखने की चुनौती है। चितवन की स्वास्थ्य सुविधाओं में करीब 50 शव रखने की क्षमता ही बताई गई है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बड़े रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों में अस्थायी शवगृह बनाए जा सकते हैं। हर शव का नंबर, फोटो और पहचान से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड करना जरूरी है।
खराब हालत वाले शवों की पहचान के लिए फिंगरप्रिंट, दांतों की जांच और DNA टेस्ट किए जा सकते हैं। एक्सपर्ट्स ने कहा है कि पहचान पक्की होने से पहले शव परिवार को न सौंपे जाएं।
नेपाल की मदद के लिए भारत बैली ब्रिज भेजेगा
नेपाल में बाढ़ से टूटे रास्तों और पुलों को फिर से जोड़ने के लिए भारत बैली ब्रिज भेजेगा। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह एक पोर्टेबल और पहले से तैयार किया जा सकने वाला पुल है, जिसे जरूरत वाली जगह पर जल्दी लगाया जा सकता है।
बाढ़ या भूस्खलन में जब कोई पुल टूट जाता है, तो बैली ब्रिज कम समय में रोड कनेक्टिवटी को बहाल करने में मदद करता है। इसे जरूरत के मुताबिक दूसरी जगह भी ले जाकर लगाया जा सकता है।
हेलिकॉप्टर से त्रिशूली में राहत-बचाव अभियान जारी
नेपाल के त्रिशूली इलाके में बाढ़ के बाद राहत और बचाव का काम तेज कर दिया गया है। सड़क और दूसरे रास्तों को नुकसान पहुंचने के कारण फंसे लोगों को हेलिकॉप्टर से सुरक्षित जगह ले जाया जा रहा है।
बचाए गए लोगों को हेलिकॉप्टर से त्रिशूली बाजार पहुंचाया जा रहा है। सेना और निजी हेलिकॉप्टरों की मदद से अब तक 100 से ज्यादा लोगों को प्रभावित इलाकों से बाहर निकाला जा चुका है।
नेपाल की बाढ़ में गुजरात के 12 लोग लापता
नेपाल में आई बाढ़ में भारत के गुजरात से भी 12 लोग लापता बताए जा रहे हैं। फिलहाल इनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिली है।
नेपाल ने 20 अरब रुपये जुटाए, विश्व बैंक से मांगेगी 25 अरब
नेपाल सरकार ने भीषण बाढ़ से हुए नुकसान से निपटने के लिए तुरंत 20 अरब नेपाली रुपये (रू.1,250 करोड़) जुटाने का फैसला किया है। यह रकम प्रधानमंत्री राहत कोष, गृह मंत्रालय और दूसरे स्रोतों से जरूरत के मुताबिक उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा सरकार विश्व बैंक से करीब 25 अरब नेपाली रुपये (रू.1,562.5 करोड़) की मदद लेने की तैयारी कर रही है। इसके लिए जरूरी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
विदेश मंत्रालय बोला- 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत नेपाल में फ्लैश फ्लड से पैदा हुई स्थिति से निपटने के लिए हरसंभव मदद जारी रखेगा। उन्होंने बताया कि बाढ़ में फंसे 21 भारतीयों को अब तक सुरक्षित निकाला गया है। ये सभी तमिलनाडु के हैं।
भारत नेपाल की मांग के आधार पर राहत सामग्री और बेली ब्रिज भेज रहा है। विदेश मंत्रालय ने 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम बनाया है। काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों में भी 24 घंटे की हेल्पलाइन शुरू की गई है।
जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से फोन पर बात कर संवेदना जताई और हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।
नेपाल बाढ़ पर जयशंकर ने की समीक्षा बैठक
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेपाल में आई बाढ़ को लेकर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों और काठमांडू व बीजिंग में तैनात भारतीय राजदूतों के साथ समीक्षा बैठक की।
उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे सभी भारतीयों की सुरक्षा और उनके बारे में जानकारी जुटाने के लिए तुरंत प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए विदेश मंत्रालय राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटरों और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है।
जयशंकर ने कहा कि भारत नेपाल सरकार के साथ मिलकर राहत और बचाव के काम में मदद कर रहा है। फिलहाल मंत्रालय का मुख्य फोकस प्रभावित इलाकों में मौजूद भारतीय नागरिकों का पता लगाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।
तमिलनाडु के 21 लोगों को रेस्क्यू किया गया
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को नेपाल में सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसकी जानकारी दी है।
चीनी टूर गाइड के फैसले से पूरे ग्रुप की जान बची
बुधवार को एक चीनी टूर गाइड ने आखिरी वक्त पर अपना प्लान बदल दिया और उसका यह फैसला उसके पूरे ग्रुप की जान बचाने वाला साबित हुआ। गाइड ने बताया कि पहले वह पर्यटकों को ग्यिरोंग पोर्ट घुमाने ले जाने वाला था, लेकिन रातभर हुई बारिश को देखते हुए उसने अपना प्लान बदल दिया।
गाइड ने झेजियांग डेली को बताया कि पिछली रात लगातार बारिश हुई थी। उसे चिंता थी कि बारिश की वजह से बर्फ से ढके पहाड़ दिखाई नहीं देंगे। इसलिए उसने पोर्ट जाने के बजाय पर्यटकों को हिमालय की बर्फीली चोटियों का नजारा दिखाने वाले मौसम केंद्र के प्लेटफॉर्म पर ले जाने का फैसला किया।
कुछ ही समय बाद ग्यिरोंग इलाके में भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही मचा दी। अगर गाइड अपना प्लान नहीं बदलता, तो उसका ग्रुप भी इस आपदा की चपेट में आ सकता था।
तस्वीरों में दिखा बाढ़ का दर्द, हर चेहरे पर चिंता और मायूसी
नवलपुर में नारायणी नदी से 62 शव बरामद
भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद बहकर आए 62 शव नवलपुर जिले में नारायणी नदी के किनारे से बरामद किए गए हैं। जिला पुलिस कार्यालय नवलपरासी (पूर्व) के अनुसार, इनमें 26 पुरुष, 16 महिलाएं, 3 बालक, 7 बालिकाएं और 9 ऐसे शव शामिल हैं जिनकी पहचान अभी नहीं हो सकी है।
पुलिस ने बताया कि सभी शवों को फिलहाल स्थानीय अस्पतालों में रखा गया है। आगे की प्रक्रिया के लिए उन्हें पोखरा भेजने की तैयारी की जा रही है। अब तक बरामद किसी भी शव की पहचान नहीं हो पाई है।
नेपाल ने भारत में रह रहे नेपाली समुदाय से मदद मांगी
नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही के बाद भारत स्थित नेपाली दूतावास ने नेपाली समुदाय से आर्थिक मदद की अपील की है।
दूतावास ने लोगों से प्रधानमंत्री आपदा बचाव कोष और प्रधानमंत्री राहत कोष में सहयोग देने को कहा है। इच्छुक लोग दूतावास की ओर से दिए गए बैंक खातों के जरिए मदद कर सकते हैं।
सरकार के मुताबिक, बाढ़ से हुए नुकसान का पूरा आंकड़ा जुटाया जा रहा है। प्रभावित इलाकों में बचाव, तलाश और राहत का काम भी तेज कर दिया गया है।
दूतावास ने कहा है कि दोनों राहत कोषों में जमा पैसे का इस्तेमाल बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद, राहत, पुनर्वास और दोबारा निर्माण के लिए किया जाएगा।
भूस्खलन के मलबे से बनी झील में बढ़ रहा पानी
चीनी सरकारी टीवी चैनल CCTV की नई ड्रोन फुटेज में पिछले भूस्खलन से बनी जगह पर एक झील बनती दिखाई दे रही है। यह झील ग्यिरोंग पोर्ट के पास, नेपाल की तरफ बनी है। CCTV के मुताबिक, झील का आकार लगातार बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका है और पानी अब किनारों से बाहर निकलने लगा है। अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख घन मीटर और पानी आने का अनुमान है। इससे झील को रोकने वाला मलबे का बांध टूटने और अचानक बड़े पैमाने पर पानी नीचे की ओर बहने का खतरा बढ़ गया है।
नेपाल में बाढ़ पर दलाई लामा ने दुख जताया
दलाई लामा ने आज सुबह जारी एक बयान में नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर दुख जताया है। उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई, उनके लिए मैं प्रार्थना करता हूं। इस त्रासदी से प्रभावित सभी लोगों और मृतकों के परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है।”
दलाई लामा ने कहा कि यह जलवायु परिवर्तन या किसी दूसरी वजह से पैदा हुई बड़ी समस्या के संकेत हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी आपदाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।
नेपाल में फंसे महाराष्ट्र के 80 लोगों के लिए हेल्पलाइन शुरू
नेपाल में आई बाढ़ के बाद महाराष्ट्र के करीब 80 लोग अब भी फंसे हुए हैं। उन्हें तलाशने और सुरक्षित वापस लाने के लिए राज्य सरकार ने 24 घंटे चलने वाला हेल्पलाइन सेंटर शुरू किया है।
मंत्री गिरीश महाजन के मुताबिक, जलगांव के 4 लोगों से संपर्क हो चुका है और उनके साथ मौजूद 37 से ज्यादा लोग भी सुरक्षित हैं। बाकी लोगों से संपर्क की कोशिश जारी है।
बाढ़ में पुणे के 4 लोग भी लापता बताए जा रहे हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। सरकार ने परिवारों से अपने लापता परिजनों की जानकारी हेल्पलाइन या ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कराने की अपील की है।
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद तबाही का मंजर
त्रिशूली में भीषण बाढ़ के बाद कीचड़ से ढकी इमारतों का ड्रोन इमेज
नुवाकोट के देवीघाट में बाढ़ के बाद जगह-जगह मलबा और तबाही दिखाई दी।
नुवाकोट के त्रिशूली में गुरुवार को बाढ़ के बाद रेस्क्यू टीम एक शव ले जाते हुए।
देवीघाट में गुरुवार को अचानक आई बाढ़ के बाद हुआ नुकसान
बाढ़ का पानी खत्म होने के बाद मलबे में एक मोटरसाइकिल धंसी नजर आई।
देवीघाट में गुरुवार को अचानक आई बाढ़ के बाद कीचड़ में फंसी एक गाड़ी।
नुवाकोट जिले के देवीघाट में सुरक्षित जगह की ओर जाते स्थानीय लोग अपना सामान लेकर निकलते हुए।
कानपुर, एजेंसी। यूपी के कानपुर में ट्रेनिंग विमान क्रैश हो गया। हादसे में पायलट और ट्रेनी की मौत हो गई। विमान ने गुरुवार सुबह 11:30 बजे उड़ान भरी थी। 11:50 बजे यानी उड़ान के महज 20 मिनट बाद गंगा बैराज के पास 5 फीट ऊंची बाउंड्री वॉल से टकराकर खेत में जा गिरा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विमान करीब 200-250 फीट ऊपर था। तभी अचानक हवा में डगमगाया और क्षतिग्रस्त हो गया। नीचे गिरते ही पूरा विमान टूटकर बिखर गया। पुर्जे दूर तक बिखर गए। हालांकि, विमान में आग नहीं लगी।
हादसे से जुड़े वीडियो सामने आए हैं। इनमें दिख रहा है कि जमीन में गिरने के बाद विमान मलबे में तब्दील हो गया। एक पायलट कॉकपिट के पास फंसा था। दूसरा गंभीर हालत में विमान से थोड़ी दूर खून से लथपथ पड़ा था। विमान की एक सीट भी टूटकर बाहर आ गई। करीब 12:15 बजे पुलिस-प्रशासन की टीम पहुंची।
खून से लथपथ गुजरात के पायलट सचिन भाटिया (29) और महाराष्ट्र के पनवेल के रहने वाले ट्रेनी अभिषेक पुजारी (28) को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, दोनों पायलट की मौत ऊंचाई से गिरने की वजह से हुई। शरीर में मल्टीपल इंजरी हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में स्पष्ट वजह सामने आएगी।
मौके पर पहुंचे कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कहा-
चकेरी स्थित गर्ग एविएशन ट्रेनिंग सेंटर से विमान ने उड़ान भरी थी। 20 मिनट बाद 39 किमी दूर नाथपुरवा गांव में क्रैश हो गया। पायलट के पास 3000 घंटे उड़ान का अनुभव था। डीजीसीए (DGCA) को जानकारी दे दी गई है। अब उनकी टीम जांच-पड़ताल करेगी।
हादसे की तस्वीरें –
कानपुर में ट्रेनी एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया। हादसे के बाद एक पायलट एयरक्राफ्ट में ही फंसकर मौत हो गई।
हादसे के बाद एयरक्राफ्ट के परखच्चे उड़ गए। उसके पुर्जे करीब 20 से 30 फीट तक बिखर गए।
हादसे के बाद खून से लथपथ दूसरे पायलट को किसी तरह एयरक्राफ्ट से बाहर आया। हालांकि, थोड़ी देर बाद उसकी भी मौत हो गई।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। आसपास के इलाके को सील कर दिया।
पायलट सचिन भाटिया को 3 हजार घंटे उड़ान का अनुभव था। एक्सपर्ट बताते हैं कि विमानन क्षेत्र में इतने घंटे की उड़ान को बेहद अहम जाना जाता है।
हादसा कैसे हुआ? विमान में कोई तकनीकी कमी आई या कोई मानवीय गलती हुई, इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं।
प्रत्यक्षदर्शी बोले- धमाके के साथ गिरा विमान
सर्वेश ने बताया- मेरे खेत में ही विमान गिरा। मैं सुबह 10 बजे तक यहीं था। फिर घर चला गया। बाद में फोन आया कि तुम्हारे खेत में विमान गिरा है। इसके बाद मैं भागकर आया। यहां देखा तो दोनों पायलट जमीन पर गिरे पड़े थे।
नाथपुरवा गांव के रोहित निषाद ने बताया- मैं खेत पर काम कर रहा था। ऊपर देखा तो एक एयरक्राफ्ट उड़ रहा था। अचानक वह नीचे की ओर गिरने लगा। धमाके की आवाज के साथ जमीन पर गिरा। हालांकि, आग नहीं लगी।
1 किमी. की दूरी पर है रिहायशी बस्ती
जहां हादसा हुआ, वहां से रिहायशी बस्ती करीब एक किमी दूर है। ग्रामीणों ने बताया कि विमान करीब 4-5 मिनट तक हवा में उड़ता रहा। फिर अचानक गिरा। अगर बस्ती के ऊपर विमान गिरता, तो घरों और पब्लिक को नुकसान पहुंच सकता था।
विमान कानपुर की कंपनी गर्ग एविएशन फ्लाइंग ट्रेनिंग एकेडमी का था। 1995 में इसकी स्थापना हुई थी। 100 से ज्यादा लोग पायलट की ट्रेनिंग ले रहे हैं। विमान ने फ्लाइंग एकेडमी से ही उड़ान भरी थी। 39 किमी दूर क्रैश हो गया। हादसे के बाद डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) की तीन सदस्यीय टीम को जांच के लिए रवाना किया गया है। वहीं, एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने भी जांच शुरू कर दी है।
बगहा, बेतिया, मोतिहारी, पटना, एजेंसी। नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को आई बाढ़ के बाद बिहार के गंडक बैराज से सुबह से 4 बार पानी छोड़ा जा चुका है। रात 12 बजे तक नेपाल की ओर से करीब डेढ़ लाख क्यूसेक, यानी क्यूबिक फीट प्रति सेकेंड पानी छोड़ा गया। बगहा स्थित गंडक बैराज के 36 गेट खोल दिए गए हैं।
रात 12 बजे बैराज से 1 लाख 52 हजार क्यूसेक, सुबह 6 बजे 88 हजार, 7 बजे 92,900 हजार, 10 बजे 104,400, 12 बजे 106,600 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। मतलब बैरेज से हर सेकेंड 79.3 लाख लीटर पानी निकल रहा है। गंडक बैराज पर नेपाल में हुई तबाही का मलबा भी दिखाई दे रहा है। पानी के साथ भैंस, फ्रिज और घरों का सामान भी बहकर आ रहा है।
क्यूसेक (cusec) पानी की प्रवाह दर (Flow Rate) की यूनिट है, पानी की मात्रा की नहीं। 1 क्यूसेक यानी एक सेकेंड में 1 घन फुट बह रहा है। 1 घन फुट पानी करीब 28.32 लीटर होता है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, इस बाढ़ के बाद गंडक में 3 मीटर ऊंची लहरें उठ सकती हैं, फ्लैश फ्लड आने की भी आशंका है। बिहार के 8 जिलों में हाई अलर्ट जारी है। ये जिले पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर हैं।
सुबह 6 बजे गंडक बैराज से 88 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया।
नेपाल से लोगों का सामान बहकर बिहार आ रहा है। गंडक डैम पर फ्रिज, भैंस और मलबा बहकर आया।
ये वैशाली की तस्वीर है जहां गंडक नदी गंगा में मिलती है। यहां देसरी, गनियारी घाट से सटे गांवों में पानी घुसने लगा है।
गंगा और गंडक नदी में जलस्तर बढ़ने से वैशाली के राघोपुर की सभी पंयाचतों में बाढ़ की स्थिति बन आई है।
गोपालगंज के खेतों में गंडक का पानी बह रहा है।
प्रशासन अलर्ट, लोगों को शिफ्ट किया
नेपाल से आने वाले पानी के लिए गंडक बैराज में जगह बनाई जा रही है। बैराज के पानी से जुड़ीं कई नहरों को भी खाली कराया है।
गंडक नदी के किनारे बसे लोगों को ऊंचे स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।
NDRF-SDRF की टीम संभावित बाढ़ प्रभावित इलाकों में तैनात की गई है।
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए कम्युनिटी किचन की व्यवस्था की गई है।
सम्राट बोले- खतरा अभी हटा नहीं
CM सम्राट चौधरी ने गुरुवार को गंडक बैराज का हवाई सर्वे किया। इसके बाद वे गंडक बैराज पहुंचे। CM यहां सिर्फ 8 मिनट रुके। इस दौरना उन्होंने अधिकारियों से स्थिति को समझा। आगे की प्लानिंग की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। खतरा अभी टला नहीं है। सभी लोग अपने काम में लगे हैं। भगवान की कृपा रही तो जल्द सब ठीक हो जाएगा।
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत को दिशा-निर्देश दिया।
CM सम्राट चौधरी ने गंडक के हालातों को देखा और मुख्य सचिव को जरूरी निर्देश दिए।
नेपाल के पानी ने बनाए बाढ़ जैसे हालात
वैशाली में 400 घर डूबे, राघोपुर में हालत सबसे ज्यादा खराब: राघोपुर प्रखंड के चकसिंगार, वीरपुर, जुरावनपुर बरारी, जुरावनपुर करारी, फतेहपुर, रामपुर, जफराबाद, जहांगीरपुर, शिवनगर सहित कई इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। इन प्रखंडों के 400 घरों पूरी तरह पानी से घिर आए हैं। मुंगेर में गंडक के पानी से हालत बिगड़ी, निचले इलाके में घुसा पानी, 100 से ज्यादा घर सड़कों पर रह रहे हैं।
मुंगेर में 100 से ज्यादा घरों में घुसा पानी: गंगा का जलस्तर अचानक बढ़ने से निचले इलाके के 100 से ज्यादा घरों में पानी घुस आया है। बुधवार रात से गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 50 मीटर नीचे आकर स्थिर हो गया था। आपदा विभाग के अनुसार, गुरुवार सुबह 10 बजे मुंगेर में गंगा का जलस्तर 38.83 मीटर दर्ज किया गया। यह चेतावनी स्तर से लगभग 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
खगड़िया में 50 हजार से ज्यादा घर डूबे: खगड़िया में गंगा और बूढ़ी गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 80 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया है। कोसी और बागमती नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। 20 पंचायतों में 50 हजार से ज्यादा घर पानी में डूबे हैं।
बिहार में कितना असर डाल सकता है नेपाल से आ रहा पानी, समझें
नेपाल से आने वाले पानी की चौड़ाई 22 मीटर, गंडक नदी की 200 मीटर
नेपाल की जिस नदी से पानी आने की बात कही जा रही है, उसकी चौड़ाई करीब 22 मीटर है, जबकि गंडक नदी करीब 200 मीटर चौड़ी है। आगे चलकर पानी का दबाव गंडक और कोसी नदी की ओर बंट सकता है।
गंडक में 3-4 लाख क्यूसेक पानी आने का अनुमान
गंडक नदी में करीब 3 से 4 लाख क्यूसेक पानी आने का अनुमान है। पानी के तेज बहाव को देखते हुए नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
बैराज पर खतरा नहीं, तेज बहाव चिंता
वाल्मीकिनगर गंडक बैराज को करीब 8.5 लाख क्यूसेक पानी का दबाव झेलने के हिसाब से डिजाइन किया गया है। इसलिए 3 से 4 लाख क्यूसेक पानी आने पर फिलहाल बैराज पर खतरे की आशंका नहीं है। सबसे बड़ी चिंता नदी के तेज करंट को लेकर है। ऐसे में नदी में नाव चलाना और जाने से बचने की सलाह दी गई है।
नेपाल बॉर्डर पर आवाजाही रोकी
बगहा में नेपाल बॉर्डर पर ऐहतियात के तौर पर नाकेबंदी जारी है। बिहार के जो लोग नेपाल में फंसे हैं, उन्हें भारत आने दिया जा रहा है। नेपाल के जो लोग बिहार में फंसे हैं, उन्हें नेपाल जाने की अनुमति दी जा रही है। अन्य लोगों की आवाजाही पर रोक जारी है।
बेंगलुरु, एजेंसी। CJI सूर्यकांत को चीफ गेस्ट बनाए जाने के विरोध के बीच गुरुवार को बेंगलुरु नेशनल लॉ स्कूल (NLSIU) ने 12 सितंबर को होने वाला अपना दीक्षांत समारोह रद्द कर दिया। यहां के छात्र और पूर्व छात्रों के CJI को चीफ गेस्ट बनाने का विरोध कर रहे थे।
यूनिवर्सिटी ने 27 अगस्त को यह जानकारी दी, हालांकि नोटिस में छात्रों के विरोध का जिक्र नहीं है। पिछले एक महीने में यह चौथा संस्थान है, जहां CJI के विरोध के बाद दीक्षांत समारोह को या तो कैंसिल कर दिया गया या उसका मुख्य अतिथि बदल दिया गया।
बेंगलुरु में 700 से ज्यादा छात्रों ने किया विरोध
NLSIU, बेंगलुरु के 700 से ज्यादा मौजूदा और पूर्व छात्रों ने CJI सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई थी।
विरोध करने वालों में 574 मौजूदा छात्र और 128 पूर्व छात्र शामिल थे। उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से NALSAR, हैदराबाद के छात्रों और शिक्षकों से बिना शर्त माफी मांगने की मांग भी की थी।
विरोध की शुरुआत NALSAR, हैदराबाद से हुई, पूरी टाइमलाइन
1. NALSAR हैदराबाद, छात्रों ने विरोध में लेटर लिखा
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत का विरोध लॉ यूनिवर्सिटीज में शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत NALSAR हैदराबाद से हुई। यहां करीब 1,400 छात्र पढ़ते हैं।
करीब 450 छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर CJI को चीफ गेस्ट बनाने का न्योता वापस लेने की मांग की थी। समारोह की तारीख तय नहीं हुई थी।
NALSAR, हैदराबाद के छात्रों ने CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया। छात्रों ने CJI की कथित टिप्पणियों और दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी कार्यवाही पर सवाल उठाए।
विवाद बढ़कर BCI तक पहुंचा। BCI ने कुछ समय के लिए 2026 के NALSAR स्नातकों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने का निर्देश दिया। हालांकि इसे वापस ले लिया गया। CJI सूर्यकांत ने बाद में कहा कि उन्होंने निमंत्रण स्वीकार ही नहीं किया था। सामारोह की अब तक डेट नहीं आई है।
2. TISS, मुंबई: 2 अगस्त का दीक्षांत समारोह स्थगित हुआ था
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) ने 2 अगस्त को होने वाला 86वां दीक्षांत समारोह स्थगित किया। संस्थान ने अप्रत्याशित परिस्थितियों का हवाला दिया। रिपोर्ट्स में CJI सूर्यकांत की मौजूदगी को लेकर छात्रों के संभावित विरोध की चिंता बताई गई थी। बाद में समारोह 22 अगस्त को हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. सीएस प्रमेश को बनाया गया।
3. ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, सोनीपत: CJI शामिल नहीं हुए
25 जुलाई को यूनिवर्सिटी के 15वें दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था। CJI शामिल नहीं हुए। उनकी जगह सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने समारोह की अध्यक्षता की।
CJI के बयान से बनी कॉकरोच जनता पार्टी
कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जून से 25 जुलाई जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन खत्म हुआ था।
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत मई 2026 में CJI सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद हुई थी। इसे सोशल मीडिया पर बनाया गया। देखते ही देखते लाखों फॉलोअर्स बढ़ गए।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच 15 जनवरी को वकील संजय दुबे की दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता सीनियर वकील का दर्जा पाना चाहता था।
जस्टिस बागची ने सवाल किया कि क्या सीनियर एडवोकेट का टैग सिर्फ एक स्टेटस सिंबल है या न्याय व्यवस्था में भागीदारी का एक जरिया।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा था, कॉकरोच की तरह बहुत से युवा ऐसे हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। वे सोशल मीडिया और RTI एक्टिविज्म बन रहे हैं। हजारों ऐसे हैं जो काले चोगे पहनकर घूम रहे हैं, लेकिन उनकी डिग्रियों पर संदेह है।