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दिल्ली में शाम 5 तक 57.78% मतदान हुआ, करोल बाग में सबसे कम वोटिंग हुई

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नई दिल्ली, एजेंसी। दिल्ली विधानसभा चुनाव का मतदान आज सुबह सात बजे से शुरू हो गया। इस चुनाव में दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है, साथ ही दो अन्य राज्यों – तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी हो रहे हैं। दिल्ली में कुल 1.56 करोड़ वोटर हैं, और 699 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। चुनाव का परिणाम 8 फरवरी को घोषित किया जाएगा।

राजधानी दिल्ली में इस बार कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान हो रहा है। सुरक्षा को लेकर कुल 97,955 कर्मचारी और 8,715 स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 220 कंपनियां, दिल्ली पुलिस के 35,626 जवान और 19,000 होमगार्ड को तैनात किया गया है। मतदान शांतिपूर्वक चल रहा है, और सुरक्षा इंतजामों के तहत ड्रोन निगरानी भी की जा रही है।

LIVE अपडेट:-

  • करोल बाग में सबसे कम वोटिंग हुई
  • दिल्ली में शाम 5 बजे 57.78 फीसदी वोटिंग हुई
  • 70 विधानसभा सीटों पर दोपहर 3 बजे तक 46.55% प्रतिशत मतदान हुआ है। 
  • यहां की मुस्लिम बहुल मुस्‍तफाबाद विधानसभा सीट पर अब तक सबसे ज्‍यादा 56.12% वोटिंग हो चुकी है। सीलमपुर 54.29 प्रतिशत मतदान हुआ। 
  • दिल्ली में दोपहर 1 बजे तक 33.31% वोटिंग हुई है।
  • दिल्ली चुनाव में सुबह 11 बजे तक 19.59% मतदान, मुस्तफाबाद सीट पर सर्वाधिक 12.17% मतदान।
  • दिल्ली चुनाव में सुबह 9 बजे तक 8.03% वोटिंग, मुस्तफाबाद सीट पर सर्वाधिक 12.17% मतदान।
  • AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल के पिता गोबिंद राम केजरीवाल ने किया मतदान।
  • कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने निजामुद्दीन ईस्ट के पोलिंग बूथ पर डाला वोट।
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय विद्यालय में अपना वोट डाला।

  • सुबह 11 बजे तक 19.59% मतदान हुआ है।
  • सबसे ज्यादा मतदान मुस्तफाबाद विधानसभा सीटी पर बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक मुस्तफाबाद में 42.55 फीसदी मतदान हुआ है।
  • नई दिल्ली: 17.4%, जंगपुरा: 18.13%, कालकाजी: 16.28%
  • मुस्तफाबाद में सुबह 11 बजे तक 26.33 फीसदी वोटिंग हुई है, जिसे सबसे ज्यादा बताया जा रहा है।
  • संगम विहार, सीलमपुर और गोकुलपुरी में 24 फीसदी से ज्यादा मतदान हो चुका है।
  • मुस्तफाबाद में अब तक सबसे ज्यादा 12.17% मतदान हुआ है।
  • करोल बाग में सबसे कम 4.49% मतदान हुआ है।
  • चांदनी चौक में 4.53% मतदान हुआ है।
  • सुबह 9 बजे तक कुल मिलाकर 8.03% मतदान हुआ है।
  • नई दिल्ली: 7 फीसदी, जंगपुरा: 7.5%, कालकाजी: 6.2% 


मतदान केंद्रों पर गहमागहमी, बड़े नेता भी पहुंचे वोट डालने

✔️ त्रिलोकपुरी के राजकीय सर्वोदय बाल विद्यालय में मतदाताओं की लंबी लाइन, पहचान पत्र चेक करने के बाद ही प्रवेश।
✔️ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मतदान किया, इसके बाद मतदान केंद्र से रवाना हुए।
✔️ भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने जनपथ स्थित मतदान केंद्र पर अपना वोट डाला।
✔️ राजधानी के विभिन्न मतदान केंद्रों पर लोगों में मतदान को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है।
✔️ सुरक्षा के कड़े इंतजाम, मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से जारी।

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सीलमपुर और जंगपुरा में बवाल 
दिल्ली चुनाव में मतदान के बीच सीलमपुर और जंगपुरा में विवाद उठ खड़ा हुआ है। जंगपुरा से आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रत्याशी मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि एक बिल्डिंग में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता पैसे बांट रहे थे। इस पर सिसोदिया पुलिस से बहस करते हुए भी नजर आए।

वहीं, बीजेपी ने सीलमपुर में फर्जी वोटिंग का दावा किया है। बीजेपी के आरोप के अनुसार, कुछ महिलाएं बुर्का पहनकर फर्जी तरीके से वोटिंग कर रही थीं। इस मामले में दोनों ही पार्टियां एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रही हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया को लेकर असमंजस पैदा हो गया है। इन घटनाओं ने दिल्ली चुनाव में हो रही मतदान प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, और अब पुलिस एवं चुनाव आयोग से इस पर कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।

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प्रत्याशियों की किस्मत फैसला 8 फरवरी को
दिल्ली की मुख्य निर्वाचन अधिकारी आर. एलिस वाज ने राष्ट्रीय राजधानी के सभी मतदाताओं से अपने घरों से बाहर निकलकर बढ़ चढ़कर मतदान करने की अपील की है। चुनाव आयोग ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चत करने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं जिसके तहत कुल 97,955 कर्मचारी और 8,715 स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल की 220 कंपनियां, होमगाडर् के 19,000 जवान और दिल्ली पुलिस के 35,626 पुलिसकर्मी तैनात किये गये हैं। इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में 699 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनके भाग्य को फैसला आज मतदाता इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में बंद कर देंगे और सभी प्रत्याशियों की किस्मत फैसला 8 फरवरी को आयेगा।

चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यत: तीन प्रमुख दलों- सत्तारूढ़ AAP, BJP और कांग्रेस पार्टी ने एक दूसरे के खिलाफ तीखे हमले किए। तीनों पाटिर्यों के बीच दिल्ली के मतदाताओं को लुभाने के लिए लोक-लुभावन चुनावी वायदे करने की होड़ देखी गयी। राष्ट्रीय राजधानी के कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला भी देखने को मिलेगा। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कुल 1.56 करोड़ से अधिक मतदाता आज अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 83.76 लाख पुरुष, 72.36 महिला और 1,267 उभयलिंगी मतदाता शामिल हैं। इस बार लिंग अनुपात 864 और ईपी रेशिया (इलेक्टर टू पॉपुलेशन रेशियो) 71.86 दर्ज किया गया है, जिससे स्पष्ट है कि महिलाओं की भागीदारी भी मजबूत होगी।

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इस बार युवा और वरिष्ठ नागरिकों की अच्छी-खासी भागीदारी देखी जा रही है। मतदान में 18-19 वर्ष के 2.39 से अधिक युवा मतदाता पहली बार मतदान करेंगे, जो कि युवाओं की लोकतंत्र में बढ़ती रुचि को दर्शाता है। वहीं 85 वर्ष से अधिक उम्र के 1.09 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिक और 100 वर्ष से अधिक उम्र के 783 मतदाता भी लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी भागीदारी निभाएंगे। इसके अतिरिक्त 79,885 दिव्यांग मतदाता और 12,736 सेवा मतदाता भी सूची में शामिल हैं। दिल्ली में इस बार कुल 2,696 मतदान स्थल तय किए गए हैं, जिनमें 13,766 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। ताकि मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो सके। चुनाव परिणाम आठ फरवरी को आयेंगे और चुनाव प्रक्रिया 10 फरवरी तक संपन्न होगी। 

लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही‘आप’
अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में ‘आप’ अपनी कल्याणकारी योजनाओं के दम पर लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, भाजपा 25 वर्षों से अधिक समय के बाद राजधानी में फिर से सरकार बनाने का प्रयास कर रही है। दिल्ली में 2013 तक 15 साल तक शासन करने वाली कांग्रेस पिछले दो विधानसभा चुनाव में एक भी सीट जीतने में विफल रहने के बाद वापसी की कोशिश कर रही है। 

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संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल किए जाएंगे तैनात
मतदान बुधवार को सुबह सात बजे शुरू होगा और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शाम छह बजे तक वोट डाले जाएंगे। निर्वाचन आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए अर्धसैनिक बलों की 220 कंपनियां, दिल्ली पुलिस के 35,626 जवान और 19,000 होमगार्ड तैनात किए हैं। लगभग तीन हजार मतदान केंद्रों को संवेदनशील के रूप में चिह्नित किया गया है और इनमें से कुछ स्थानों पर ड्रोन निगरानी समेत विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए जाएंगे। उसने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) भी तैनात रहेंगे। 

भाजपा, ‘आप’ और कांग्रेस में त्रिकोणीय मुकाबला
वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं तथा 733 मतदान केंद्र खास उनकी जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के प्रयास में निर्वाचन आयोग ने एक कतार प्रबंधन प्रणाली (क्यूएमएस) ऐप पेश किया है, जिससे मतदाता भीड़ के स्तर की जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसके अलावा, ‘घर से मतदान’ सुविधा के तहत 7,553 पात्र मतदाताओं में से 6,980 मतदाता पहले ही अपने वोट डाल चुके हैं। सोमवार शाम छह बजे आधिकारिक रूप से समाप्त हुए चुनाव प्रचार में तीन मुख्य दावेदारों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। ‘आप’ ने अपने शासन मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया और अरविंद केजरीवाल तथा मुख्यमंत्री आतिशी ने पूरे शहर में रैलियां कीं। 

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा जैसे दिग्गजों के नेतृत्व में भाजपा ने भ्रष्टाचार के आरोपों और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को लेकर ‘आप’ पर निशाना साधा। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने भी जोरदार प्रचार किया और विभिन्न मुद्दों पर ‘आप’ और भाजपा दोनों पर हमला बोला। 

चुनाव प्रचार के दौरान ‘‘शीश महल” विवाद, यमुना के पानी की गुणवत्ता, शासन, कानून-व्यवस्था, महिला कल्याण और मतदाता सूची से छेड़छाड़ के आरोप जैसे मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया गया। चुनाव पूर्व वादों में मुफ्त में सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने का मुद्दा भी हावी रहा। ‘आप’ ने छात्रों के लिए मुफ्त बस यात्रा, ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए बीमा और मंदिर के पुजारियों तथा गुरुद्वारों के ग्रंथियों को 18,000 रुपये की वित्तीय सहायता देने का वादा किया है। 

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दूसरी ओर, भाजपा ने गर्भवती महिलाओं के लिए 21,000 रुपये की वित्तीय सहायता और 500 रुपये में सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर देने का वादा किया है, जबकि कांग्रेस ने 8,500 रुपये का मासिक बेरोजगारी भत्ता देने की प्रतिबद्धता जताई है। आठ फरवरी को आने वाले चुनाव परिणामों से साफ होगा कि क्या ‘आप’ अपनी सरकार बरकरार रख पाती है, भाजपा अपनी हार का सिलसिला तोड़ पाती है या कांग्रेस कोई चौंकाने वाला नतीजा दे पाती है। 

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एविडेंस एक्ट की धारा 68- रजिस्टर्ड सेल डीड के लिए गवाहों के सर्टिफिकेशन (अटेस्टेशन) के सबूत की ज़रूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली/कोरबा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 जुलाई) को फैसला सुनाया कि इंडियन एविडेंस एक्ट, 1872 की धारा 68 का प्रोविज़ो (शर्त) रजिस्टर्ड सेल डीड पर लागू नहीं होता है, क्योंकि कानून के तहत सेल डीड के लिए गवाहों से सर्टिफिकेशन ज़रूरी नहीं है।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द करते हुए यह बात कही, जिसमें सेल डीड ट्रांज़ैक्शन पर धारा 68 के प्रोविज़ो को गलत तरीके से लागू किया गया।

बेंच ने कहा,

“धारा 68 का प्रोविज़ो कहता है कि किसी भी डॉक्यूमेंट (वसीयत को छोड़कर) के निष्पादन (execution) के सबूत के तौर पर अटेस्टिंग गवाह को बुलाना ज़रूरी नहीं है, अगर उसे इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 (1908 का 16) के प्रावधानों के अनुसार रजिस्टर किया गया हो; सिवाय तब जब उस व्यक्ति द्वारा इसके निष्पादन से खास तौर पर इनकार किया गया हो, जिसके द्वारा इसे निष्पादित किया गया माना जाता है। चूंकि कानून के तहत सेल डीड के लिए अटेस्टेशन ज़रूरी नहीं है, इसलिए इंडियन एविडेंस एक्ट की धारा 68 के प्रावधान इस पर लागू नहीं होते हैं।”

बेंच ने धारा 68 के प्रोविज़ो के सीमित दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह प्रावधान केवल उन डॉक्यूमेंट्स पर लागू होता है जिनके लिए अनिवार्य अटेस्टेशन की ज़रूरत होती है।

“‘किसी भी डॉक्यूमेंट का निष्पादन, वसीयत को छोड़कर’ का मतलब है, वे डॉक्यूमेंट्स जिनके लिए अनिवार्य अटेस्टेशन की ज़रूरत होती है, जैसे कि गिफ्ट डीड, मॉर्गेज डीड, सेटलमेंट डीड आदि; लेकिन ऐसे डॉक्यूमेंट्स के सबूत के तौर पर किसी अटेस्टिंग गवाह से पूछताछ करना ज़रूरी नहीं है, जब तक कि इसके निष्पादन से खास तौर पर इनकार न किया गया हो।”

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद केरल में प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े एक सिविल प्रॉपर्टी विवाद से संबंधित है, जिसका दावा एक रजिस्टर्ड सेल डीड के ज़रिए किया गया।

वादी ने विवादित प्रॉपर्टी पर पूर्ण मालिकाना हक और कब्ज़ा साबित करने के लिए मुकदमा दायर किया और मालिकाना हक के मुख्य सबूत के तौर पर रजिस्टर्ड सेल डीड पेश की।

इसके जवाब में, प्रतिवादी ने लिखित बयान दायर करके साफ तौर पर इनकार किया कि सेल डीड निष्पादित की गई और दावा किया कि यह धोखाधड़ी थी। हालांकि, उन्होंने डॉक्यूमेंट को कानूनी रूप से अमान्य करने के लिए कोई स्वतंत्र मुकदमा या औपचारिक काउंटर-क्लेम दायर नहीं किया। केरल हाईकोर्ट ने सेल डीड (बिक्री विलेख) पेश करने वाले के खिलाफ फैसला सुनाया, क्योंकि उन्होंने गवाही देने वाले किसी भी गवाह को कोर्ट में नहीं बुलाया। कोर्ट का तर्क था कि चूंकि लिखित बयान में डीड के निष्पादन (execution) से “साफ तौर पर इनकार” किया गया, इसलिए एविडेंस एक्ट की धारा 68 का प्रावधान लागू होता है, जिसके तहत डीड को साबित करने के लिए गवाह की गवाही अनिवार्य हो जाती है।

इसके बाद वादी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और तर्क दिया कि सेल डीड के लिए कानूनी रूप से गवाही (Attestation) की आवश्यकता ही नहीं होती है, इसलिए हाई कोर्ट द्वारा धारा 68 को लागू करना बुनियादी रूप से गलत था।

फैसला

अपील स्वीकार करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 68 केवल उन दस्तावेजों पर लागू होती है, जिनके लिए कानूनन गवाही अनिवार्य है, जैसे कि वसीयत (इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 की धारा 63 के तहत), गिफ्ट डीड (ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 123 के तहत) और मॉर्गेज डीड (बंधक विलेख)। हालांकि, सेल डीड इस श्रेणी में नहीं आती है। ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 54 के तहत सेल डीड का रजिस्ट्रेशन तो जरूरी है, लेकिन इसकी गवाही अनिवार्य नहीं है।

कोर्ट ने कहा,

“पहली नज़र में ऐसा लगता है कि हाईकोर्ट ने एविडेंस एक्ट की धारा 68 के प्रोविज़ो (शर्त) में दिए गए वाक्यांश ‘वसीयत के अलावा किसी भी दस्तावेज़ का निष्पादन (Execution)’ का गलत अर्थ निकाला। हाईकोर्ट ने ‘किसी भी दस्तावेज़ के निष्पादन’ का अर्थ निकालते हुए इसमें रजिस्टर्ड सेल डीड (बिक्री विलेख) को भी शामिल कर लिया। हमारी राय है कि हाईकोर्ट ने एविडेंस एक्ट की धारा 68 के प्रोविज़ो के असली मकसद को समझने में गलती की। ‘वसीयत के अलावा किसी भी दस्तावेज़ का निष्पादन’ का मतलब है वे दस्तावेज़ जिनके लिए गवाहों द्वारा तस्दीक (Attestation) अनिवार्य है, जैसे कि गिफ्ट डीड, मॉर्गेज डीड, सेटलमेंट डीड आदि; लेकिन ऐसे दस्तावेज़ों को साबित करने के लिए गवाहों से पूछताछ करना तब तक ज़रूरी नहीं है जब तक कि उनके निष्पादन से साफ़ तौर पर इनकार न किया गया हो। वसीयत के मामले में गवाहों में से किसी एक से पूछताछ करना ज़रूरी है, चाहे उसके निष्पादन से साफ़ तौर पर इनकार किया गया हो या नहीं। एविडेंस एक्ट की धारा 68 का प्रोविज़ो बस यही बात बताना या स्पष्ट करना चाहता है।”

कोर्ट ने कानूनी व्याख्या के उस अहम नियम को दोहराया कि प्रोविज़ो को उसी मुख्य प्रावधान के संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए, जिसे वह सीमित या स्पष्ट करता है।

कोर्ट ने कहा,

“धारा 68 का प्रोविज़ो केवल उन दस्तावेज़ों के संबंध में अपवाद बनाता है, जिनकी कानूनन तस्दीक (attestation) अनिवार्य है। सेल डीड ऐसे दस्तावेज़ों की श्रेणी में नहीं आती है।”

चूंकि हाई कोर्ट ने CPC की धारा 100 के तहत कानून का अहम सवाल (Substantial Question of Law) तय न करके गंभीर गलती की, इसलिए कोर्ट ने मामले को वापस हाईकोर्ट भेज दिया ताकि कानून का अहम सवाल तय करने के बाद मामले की फिर से सुनवाई हो सके।

Cause Title: R. VERONICA & ANR. VERSUS RUDRAYANI DEVAKI(D) THROUGH LRS. S. SATHA KUMAR & ORS.

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पीएम आवास के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस ने राहुल-प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया

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नई दिल्ली, एजेंसी। संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन (21 जुलाई) भी विपक्षी पार्टियों ने जोरदार हंगामा किया. जिसे देखते हुए लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया. संसद की कार्यवाही स्थगित होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने पीएम आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.

दिल्ली पुलिस ने राहुल-प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया

लोक कल्याण मार्ग पर विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.

विपक्ष से कुछ भी कहना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा है : चिराग पासवान

चिराग पासवान ने कहा, “विपक्ष हम पर बार-बार यह आरोप लगाता है कि हम बातचीत नहीं करते, है ना? लेकिन जब असल में बातचीत शुरू होती है, तो वे कहां होते हैं? सच कहूं तो, मुझे लगता है कि विपक्ष से कुछ भी कहना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा है. वे बस सुनना ही नहीं चाहते. उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि यहां कितने अहम मुद्दे उठाए जा रहे हैं, जैसे कि सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाना. आज NDA सांसदों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि भारत के भविष्य या युवाओं और छात्रों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. लेकिन अगर आप हर सत्र से पहले एक-दो मुद्दे चुनते हैं, तो सारे मुद्दों पर एक साथ बात क्यों नहीं करते? आप मुद्दों को बीच में ही क्यों छोड़ देते हैं? आपको उन मुद्दों को उनके अंजाम तक पहुंचाना चाहिए. आप आज एक मुद्दा उठाते हैं, लेकिन अगले सत्र में कोई नया मुद्दा ले आते हैं. इसका मतलब है कि आपका एकमात्र मकसद हंगामा करना है, न कि बातचीत से मामलों को सुलझाना. जब हम किसानों, छात्रों और युवाओं के साथ खड़े होते हैं, तो कृपया सुझाव दें कि हम उनके साथ और मजबूती से कैसे खड़े हो सकते हैं. हम आपके हर सुझाव को अपनाएंगे और तथ्यों पर आधारित आपकी हर सही बात को मानेंगे. चर्चा तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, फिर भी आप हंगामा करना चुनते हैं, सड़कों पर अफरा-तफ़री मचाते हैं और लोगों को गुमराह करते हैं, जबकि बातचीत और सही चर्चा के लिए बने मंच को ही नज़रअंदाज़ कर देते हैं.”

सरकार पेपर लीक और युवाओं के मामले को राजनीतिक रंग देना चाहती है: संदीप दीक्षित

PM आवास के बाहर विरोध-प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा, “कोई माने या न माने, राहुल गांधी ने हमेशा ऐसे मुद्दे उठाए हैं. उन्होंने पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया. जिस दिन पेपर लीक हुआ, वे सड़कों पर उतर आए. सरकार इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है. हमें देश के हर उस युवा के साथ खड़ा होना है, जिसकी उम्मीदों और आकांक्षाओं को कल सरकार ने बेरहमी से कुचल दिया.”

छात्रों के साथ अत्याचार हो रहा, लोकतंत्र को दबाया जा रहा: जयराम रमेश

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि छात्रों पर अत्याचार हो रहा है और लोकतंत्र को दबाया जा रहा है. विपक्ष पिछले 45 दिनों से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है. हम इन सभी अहम मुद्दों पर संसद में विस्तार से चर्चा और जवाब चाहते हैं.

लोक कल्याण मार्ग पहुंचे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, विरोध प्रदर्शन में बैठे राहुल गांधी से की बात

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह लोक कल्याण मार्ग पहुंचे और यहां कांग्रेस के चल रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बात की.

दिल्ली पुलिस ने कन्हैया कुमार समेत कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया

दिल्ली पुलिस ने लोक कल्याण मार्ग पर विरोध प्रदर्शन कर रहे कन्हैया कुमार समेत कांग्रेस नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया.

पीएम आवास के बाहर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पार्टी महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगें उठाईं.

छात्र प्रदर्शन के बहाने डिंपल यादव का सियासी दांव: बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए युवाओं से मांगा साथ

सपा सांसद डिंपल यादव ने सीजेपी आंदोलन पर कहा- मुझे लगता है कि इससे एक मजबूत संदेश गया है कि कितने युवा बदलाव चाहते हैं. मैं छात्रों से कहना चाहती हूं कि बदलाव सिर्फ वोटिंग से ही आ सकता है. आने वाले समय में, आपको उन पार्टियों का समर्थन करना चाहिए जो BJP को सत्ता से हटाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

डिंपल यादव का दावा, विपक्षी पार्टियों ने स्पीकर से चर्चा की मांग की, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा, “विपक्षी पार्टियों ने स्पीकर से मुलाक़ात की और चर्चा की मांग की, लेकिन उन्होंने इसे साफ़ तौर पर ठुकरा दिया. यहां सरकार की मंशा को समझना ज़रूरी है; उनका पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है और कई मामलों में बीमार नजर आता है. जो युवा विरोध करने आए थे, वे सिस्टम की नाकामी को उजागर करना चाहते थे, क्योंकि सरकार खुद इस मुद्दे पर ध्यान देने को तैयार नहीं थी. वे सरकार से शिक्षा में सुधार लाने और NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले 20 छात्रों की मौत के मामले पर कार्रवाई करने की अपील करने आए थे. उन्हें यह भी लगा कि जिम्मेदार होने के नाते शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए; लेकिन मंत्री के इस्तीफे की मांग करने के बजाय, जैसा कि छात्रों ने किया था, अधिकारियों ने उन पर लाठियां बरसाईं और उनके कपड़े फाड़ दिए. मेरा मानना ​​है कि सरकार के इन कामों ने इन युवाओं की उम्मीदों और सपनों को बुरी तरह तोड़ दिया है.

CCTV फुटेज खंगाले जा रहे, जांच के आधार पर होगी प्राथमिकी दर्ज

एडिशनल DCP आनंद कुमार मिश्रा ने न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा, “कुछ FIR पहले ही दर्ज की जा चुकी हैं और यह संख्या निश्चित रूप से और बढ़ सकती है. अभी CCTV फुटेज की जांच की जा रही है और जैसे-जैसे दूसरे पहलुओं की जांच होगी, और FIR दर्ज की जा सकती हैं. विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर 100 से ज्यादा CCTV कैमरे लगाए गए हैं. उन सभी की निगरानी की जा रही है; इसके लिए एक खास टीम लगाई गई है और कई टीमें मिलकर काम कर रही हैं. हम हर चीज़ की बारीकी से जांच कर रहे हैं- CCTV फुटेज, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो और हमारे अपने लगाए गए कैमरों की फुटेज। हमने पहले ही एक टीम बना ली थी ताकि जरूरत पड़ने पर तेजी से जांच की जा सके; वह टीम अभी काम कर रही है.”

संसद की कार्यवाही आज दिन भर के लिए स्थगित

विपक्ष के हंगामे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा को आज दिन भर के लिए स्थगित करने का फैसला किया. जबकि राज्यसभा में भी भारी हंगामे को देखते हुए कार्यवाही को आज के लिए स्थगित कर दिया गया है. सदन की कार्यवाही अब 22 जुलाई को सुबह 11 बजे से होगी.

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PM आवास के बाहर धरने पर बैठे कांग्रेसी नेताओं ने केंद्र सरकार के सामने रखीं ये 5 बड़ी मांगें

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नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कई अन्य नेता छात्रों के खिलाफ पुलिस के बल प्रयोग के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने पर बैठ गए। प्रधानमंत्री के आवास ‘7 लोक कल्याण मार्ग’ के निकट धरने पर बैठे कांग्रेस नेताओं ने यहां ‘प्रधानमंत्री इस्तीफा दो’ के नारे लगाए।

केंद्र के सामने रखी ये 5 बड़ी मांगें

  • प्रदर्शन के दौरान हिंसा की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की
  • गृहमंत्री का दोनों सदनों में बयान
  • सदन में इस मामले की डिटेल पर चर्चा होनी चाहिए
  • शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग रखी
  • छात्रों के मुद्दे को सुने जाने की बात कही

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने की खरगे से मुलाकात

धरना स्थल पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पहुंचे हैं। यहां पर वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से बातचीत कर उन्हें प्रदर्शन रोकने के लिए बातचीत कर रहे हैं। 

इससे पहले, राहुल गांधी ने कहा कि पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को माफी मांगनी चाहिए और पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से यह भी कहा कि छात्रों की पिटाई के लिए गृह मंत्री अमित शाह को भी त्यागपत्र देना चाहिए। प्रियंका गांधी ने कहा, ”हम सदन में चर्चा करना चाहते हैं, लेकिन विपक्ष को बात करने नहीं दिया जाता। ये सदन उन्हीं युवाओं का है जिन पर सरकार लाठी चला रही है, आंसू गैस के गोले छोड़ रही है। बच्चों की बात सुनी जाए और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया जाए। ” कांग्रेस के दोनों प्रमुख नेताओं ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात भी की।

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