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कोरबा

ग्राम सभा का आयोजन 02 अक्टूबर को

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कोरबा । कलेक्टर अजीत वसंत ने जिले के समस्त ग्रामों में विशेष ग्राम सभा आयोजित करने हेतु आदेश जारी किए हैं। उक्त आदेश के तहत 02 अक्टूबर 2024 को ग्राम सभा का आयोजन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 129 (ख) (3) के तहत ग्रामसभा में गणपूर्ति कराने का दायित्व पंच, सरपंच एवं सचिव का होगा।
ग्राम सभा के एजेण्डाओं में विशेष पिछड़ी जनजाति के पात्र व्यक्ति जिनके पास आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं उनके जाति प्रमाण पत्र तथा पात्र हितग्राहियों के वनाधिकार पत्र का ग्राम सभा में अनुमोदन कराने का कार्य किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2024-25 के ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्लान (जी.पी.डी.पी.) को तैयार किया जाएगा। साथ ही शासकीय विद्यालय में अध्ययरनत् छात्र व अन्य पात्र ग्रामीण जिनके पास आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है उनके जाति प्रमाण पत्र का ग्राम सभा में अनुमोदन कराया जाएगा। जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए पंचातयों द्वारा खाद्यान्न एवं उसके लाभान्वितों के नामों का वाचन किया जाएगा। ग्रामसभा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनांतर्गत ग्राम पंचायतों में ग्रामीण परिवारों द्वारा रोजगार की मांग तथा उपलब्ध कराए गए रोजगार की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। मौसमी बीमारियों के निदान एवं निवारण पर चर्चा की जाएगी तथा उनसे निपटने के लिए चिकित्सकीय सुविधाओं का अवलोकन तथा इस संबंध में जागरूकता फैलाई जाएगी। ग्राम सभा में 17 सितंबर 2024 से 02 अक्टूबर 2024 महात्मा गांधी की जयंती स्वच्छ भारत दिवस स्वच्छता ही सेवा अभियान चलाया जा रहा है। स्वच्छता ही सेवा अभियान के दौरान साफ-सफाई, जनभागीदारी, सफाई मित्र स्वच्छता शिविर आदि एजेण्डाओं पर चर्चा की जाएगी।

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कोरबा

पीवीटीजी समुदाय के सर्वेक्षण हेतु “मोबाइल सर्वे सेतु एप” के माध्यम से अभियान जारी

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30 अप्रैल 2026 तक सर्वे कार्य पूर्ण करने के निर्देश

कोरबा। भारत सरकार, जनजातीय कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिले में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) अंतर्गत पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर समुदाय के परिवारों का सर्वेक्षण “मोबाइल सर्वे सेतु एप” के माध्यम से किया जा रहा है। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य पात्र परिवारों की पहचान कर उन्हें विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़ना तथा उनकी मूलभूत आवश्यकताओं का आकलन करना है।

सर्वे कार्य को सुचारू रूप से संपन्न कराने हेतु विकासखंड कोरबा, करतला, पाली एवं पोंड़ी उपरोड़ा में कुल 76 अधिकारी एवं कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। यह दल पीवीटीजी बसाहटों में जाकर प्रत्येक परिवार का ऑनलाइन सर्वेक्षण सुनिश्चित कर रहा है। शासन द्वारा उक्त सर्वेक्षण कार्य को 30 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि कोरबा जिले में पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर समुदाय के लगभग 1301 परिवार निवासरत हैं, जिनकी कुल जनसंख्या लगभग 4754 है। इन परिवारों के समग्र विकास एवं जीवन स्तर में सुधार के लिए भारत सरकार द्वारा “प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान” संचालित किया जा रहा है।
अभियान के अंतर्गत पीवीटीजी बसाहटों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत स्वच्छ पेयजल, विद्युत आपूर्ति, सड़क, आवास, स्वास्थ्य सेवाएं (मोबाइल मेडिकल यूनिट), आंगनबाड़ी, मोबाइल टावर, बहुउद्देशीय केंद्र एवं छात्रावास जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
शासन की मंशा है कि प्रत्येक पीवीटीजी परिवार को शासकीय योजनाओं का लाभ सीधे प्राप्त हो तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। इस सर्वेक्षण के दौरान चिन्हित कमियों एवं आवश्यकताओं के आधार पर शासन द्वारा विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर आवश्यक सुविधाओं की पूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
जिला प्रशासन द्वारा सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि सर्वेक्षण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करते हुए गुणवत्ता एवं पारदर्शिता बनाए रखें, ताकि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ शीघ्र उपलब्ध कराया जा सके।

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कोरबा

विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना के संपूण प्रक्रिया को ऑनलाइन किये जाने के संबंध में प्रशिक्षण 15 अप्रैल को

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कोरबा। शासन द्वारा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना की संपूर्ण प्रक्रिया को 01 अप्रैल 2026 से राज्य के सभी जिलों में ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के माध्यम से संचालित करने की अनुमति प्रदान की गई है। उक्त दिनांक से निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना की संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्यम से किए जाने हेतु विभागीय वेबसाइट ीजजचेरूकमेबहण्हवअण्पदध्उंसंसकेवदसपदम पर आरंभ की गई है।

उक्त सॉफ्टवेयर ऑनलाइन संचालन के संबंध में 15 अप्रैल को प्रातः11 बजे से सायं 4 बजे तक लखीराम अग्रवाल स्मृति सभागार सिम्स चौक के पास बिलासपुर में एक दिवसीय संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित की गई है।
जिला सांख्यकी अधिकारी द्वारा सर्व संबंधित विभाग को प्रशिक्षण कार्यक्रम में विधायक निधि शाखा में संबद्ध लिपिक के साथ डाटा एंट्री आपरेटर को अनिवार्य रूप उपस्थित होने निर्देशित करने का अनुरोध किया गया है।

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कोरबा

डीएमएफ से होगा कोरबा जिला का अतिरिक्त विकास : मंत्री लखनलाल देवांगन

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डीएमएफ शासी परिषद की बैठक में विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा

खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए प्राथमिकता से होंगे कार्य

कोरबा। छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य, उद्योग, आबकारी, सार्वजनिक उपक्रम एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास कोरबा की शासी परिषद की बैठक आयोजित हुई।

बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के स्वीकृत कार्यों की प्रगति, पूर्ण कार्यों की कार्योत्तर स्वीकृति तथा आगामी वर्ष की कार्ययोजना को अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर कोरबा की सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत, कटघोरा के विधायक प्रेमचंद पटेल, पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम, रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह, महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत सहित शासी परिषद के सदस्यगण अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर एवं पदेन अध्यक्ष कुणाल दुदावत ने की। पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी, वनमंडलाधिकारी श्रीमती प्रेमलता यादव, कुमार निशांत, पदेन सचिव जिला पंचायत सीईओ दिनेश नाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी बैठक में शामिल हुए।

बैठक के दौरान डीएमएफ मद से संचालित कार्यों पर विस्तृत चर्चा की गई। अपने उद्बोधन में मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के सहयोग और जनता की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जिले में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अन्य योजनाओं के साथ-साथ डीएमएफ मद से भी कोरबा जिले में अतिरिक्त विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज अनुमोदित कार्यों में स्कूल, आंगनबाड़ी भवन, स्वास्थ्य सेवाएँ, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण तथा पुल-पुलियों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि स्वीकृत कार्यों का समय-सीमा में पूर्ण होना आवश्यक है, ताकि आमजन को शीघ्र लाभ मिल सके। उन्होंने डीएमएफ के माध्यम से पीवीटीजी समुदाय के लिए प्राथमिकता से विकास कार्य संचालित किए जाने पर संतोष व्यक्त किया।

मंत्री श्री देवांगन ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वीकृत कार्यों की नियमित समीक्षा करें, निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करें तथा नए प्रस्तावों को बजट प्रावधान के अनुरूप स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करें।  मंत्री ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से समन्वयपूर्वक कार्य कर जिले के सर्वांगीण विकास में योगदान देने की अपील की।

सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ने कहा कि डीएमएफ मद से कोरबा जिले को विकास की नई पहचान मिलेगी। उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्र होने के कारण प्रदूषण नियंत्रण, राखड़ बांधों से उत्पन्न समस्याओं के समाधान तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रीष्म ऋतु के दौरान पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने, बारिश से पहले स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता तथा जर्जर स्कूल भवनों को सुधारने की आवश्यकता बताई।

विधायक कटघोरा प्रेमचंद पटेल ने कहा कि डीएमएफ राशि से जिले में महत्वपूर्ण विकास कार्य हो रहे हैं। उन्होंने आकांक्षी जिला होने के कारण कौशल विकास, आजीविका संवर्धन, रोजगार सृजन तथा कृषि क्षेत्र में दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने पर बल दिया। पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर मरकाम ने डीएमएफ के तहत बनाए गए निर्माण पोर्टल को जनहित में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह कंवर ने जिले में निर्माण कार्यों के मूल्यांकन के लिए इंजीनियरों की भर्ती को उपयोगी कदम बताया। महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत ने शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना और जनसुविधाओं के विस्तार से आमजन को हो रहे लाभों का उल्लेख किया।

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बैठक के विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि यह वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम बैठक है। शासन द्वारा डीएमएफ नियमों में संशोधन कर उन्हें इस वित्तीय वर्ष से लागू किया गया है। उन्होंने बैठक के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य खनन के दुष्प्रभावों को कम करना और प्रभावित लोगों की आजीविका एवं जीवन स्तर में सुधार लाना है। उन्होंने डीएमएफ के कार्यों को पारदर्शिता के साथ करने, निर्माण पोर्टल के माध्यम से डीएमएफ सहित अन्य विकास कार्यों की जानकारी मिलने के संबंध में बताया। डीएमएफ नियमों के तहत 70 प्रतिशत राशि उच्च प्राथमिकता वाले कार्यों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और पर्यावरण संरक्षण पर व्यय किया जाएगा तथा 30 प्रतिशत राशि अन्य आधारभूत संरचनाओं पर व्यय की जाएगी। जिले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभावित गांवों का चिन्हांकन किया जा चुका है, जिसके अनुसार 5 विकासखंडों के 564 गांव प्रत्यक्ष प्रभावित श्रेणी में आते हैं। उन्होंने बताया कि खनन क्षेत्र से 15 किलोमीटर तक के क्षेत्र को प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र और 25 किलोमीटर तक के क्षेत्र को अप्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र माना जाएगा। इससे डीएमएफ की बड़ी राशि कोरबा जिले के प्रभावित क्षेत्रों में व्यय होगी।

उन्होंने बताया कि गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर के सहयोग से खनन प्रभावित परिवारों का विस्तृत बेसलाइन सर्वे किया जा रहा है, जिसके आधार पर एक वर्ष की पर्सपेक्टिव योजना तैयार होगी। आंकड़ों के अनुसार एसईसीएल की विभिन्न खदानों से प्रभावित 20,069 परिवारों और 4,102 विस्थापित परिवारों के कल्याण हेतु योजनाएँ बनाई जा रही हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 519.11 करोड़ रुपये की प्राप्ति के विरुद्ध 1498 कार्यों के लिए 529.24 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई।

कलेक्टर ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र, जनसंख्या और क्षेत्रफल के आधार पर शासन को विस्तृत जानकारी भेज दी गई है तथा स्वीकृत होने के बाद कार्य प्रारंभ किए जाएंगे। उन्होंने गौण खनिज राजस्व के उपयोग, प्रभावित व्यक्तियों एवं परिवारों के चिन्हांकन तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण एवं नगरीय विकास और अधोसंरचना को दी गई प्राथमिकता के संबंध में भी जानकारी दी।
डीएमएफ शासी परिषद की बैठक में विभिन्न प्रस्तावों को मिली मंजूरी

बैठक में डीएमएफ अंतर्गत विशेष निधियों के अनुमोदन के साथ-साथ खनन प्रभावित प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष क्षेत्रों के निर्धारण, प्रभावित परिवारों एवं विस्थापित परिवारों की सूची के अनुमोदन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लिए गए। इसके अलावा एंडोमेंट फंड के गठन तथा पंचवर्षीय कार्ययोजना तैयार करने के प्रस्ताव, शासी परिषद ने डीएमएफ अंतर्गत परियोजना प्रबंधन इकाई  के चयन, प्रशासनिक व्यय के अनुमोदन तथा वर्ष 2025-26 में किए गए कार्यों की स्वीकृति, खनन प्रभावित क्षेत्रों में व्यक्तियों के चिन्हांकन एवं संबंधित विभागीय कार्यों के अनुमोदन, वार्षिक प्रतिवेदन (वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2023-24 तथा 2025-26) के अनुमोदन का प्रस्ताव भी पारित किया गया।

बैठक में डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए वेबसाइट, वेब पोर्टल, डाटा प्रबंधन प्रणाली, डॉक्यूमेंट्री एवं वेबपेज निर्माण से संबंधित प्रस्तावों को स्वीकृति, जीजीवी के साथ एमओयू, वीसी रूम एवं स्टोरेज संरचना निर्माण, थर्ड पार्टी ऑडिट तथा टोल-फ्री नंबर स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

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