छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र बॉर्डर पर मुठभेड़:3-4 नक्सलियों के मारे जाने की खबर, एक जवान भी जख्मी; रुक-रुककर हो रही फायरिंग
बीजापुर , एजेंसी। छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा के गढ़चिरौली में पुलिस की C60 कमांडो और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई है। 3 से 4 माओवादियों के मारे जाने और एक जवान के घायल होने की खबर है। अभी भी भामरागढ़ तहसील के कोपरी जंगल में रुक-रुककर गोलीबारी चल रही है।
बताया जा रहा है कि, खुफिया एजेंसियों ने पुलिस को सूचना दी थी कि, कोपरी इलाके में कई नक्सली मौजूद हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने जंगल में ऑपरेशन चलाया। जवानों को आता देख नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में जवानों ने भी गोलीबारी की। फिलहाल मुठभेड़ जारी है।
2 दिन पहले ITBP के 2 जवान शहीद हुए
2 दिन पहले नारायणपुर में IED ब्लास्ट की चपेट में आने से ITBP के 2 जवान शहीद हुए थे। वहीं नारायणपुर पुलिस के 2 जवान घायल हुए। घायलों को मौके से निकालकर एयरलिफ्ट किया गया। दोनों शहीद जवान आंध्र-प्रदेश और महाराष्ट्र के रहने वाले थे।
कोरबा
बालको की स्वास्थ्य पहल से 1.2 लाख लोगों तक पहुंची बेहतर चिकित्सा सेवाएं
बालकोनगर। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में लगातार हो रहे विकास के बीच सबसे बड़ी चुनौती यह है कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं समाज के उन लोगों तक भी पहुंचें, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। ऐसे कई ग्रामीण क्षेत्रों में जहां कभी इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। वहां भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) की मोबाइल हेल्थ वैन (एमएचवी) और प्रोजेक्ट आरोग्य महत्वपूर्ण बदलाव ला रहे हैं। इनके माध्यम से वित्तवर्ष 2026 में लगभग 1.2 लाख लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल चुका है।

पाढ़ीमार गांव की 60 वर्षीय फूलमणि एक्का कई वर्षों से गठिया के कारण जोड़ों के दर्द से परेशान थीं। दर्द इतना बढ़ गया था कि उनके लिए स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना भी कठिन हो गया था। दूरी, शारीरिक परेशानी और आर्थिक चुनौतियां उनके इलाज में बड़ी बाधा थीं।
फूलमणि बताती हैं, “मेरे लिए इलाज के लिए बाहर जाना संभव नहीं था। जब बालको की मोबाइल हेल्थ वैन हमारे गांव आने लगी, तब मुझे घर के पास ही डॉक्टरों की सलाह और उपचार मिलने लगा। अब मेरा इलाज नियमित रूप से हो रहा है और हर दौरे पर मुझे फिजियोथेरेपी एवं व्यायाम संबंधी सही मार्गदर्शन भी मिलता है।”

फूलमणि की कहानी ग्रामीण भारत की उस वास्तविकता को दर्शाती है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच अक्सर दूरी, संसाधनों की कमी और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं के अभाव से प्रभावित होती है। ऐसे क्षेत्रों में समय पर जांच, नियमित परामर्श और निवारक स्वास्थ्य सेवाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
कोरबा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस. एन. केशरी कहते हैं, “छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना हमारी प्राथमिकता है। इस दिशा में बालको जैसे उद्योग महत्वपूर्ण सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं। प्रोजेक्ट आरोग्य और मोबाइल हेल्थ वैन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं, जिससे क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता और पहुंच दोनों में सुधार हुआ है।”
स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के करीब पहुंचाने के उद्देश्य से बालको की मोबाइल हेल्थ वैन आसपास के 70 गांवों एवं समुदाय में प्रत्येक पखवाड़े नियमित रूप से पहुंचती है। बदलती स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसमें फिजियोथेरेपी सेवाएं और प्रयोगशाला जांच सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। वैन में 40 से अधिक प्रकार की जांच मौके पर ही की जा सकती हैं, जिससे समय रहते रोगों की पहचान, नियमित स्वास्थ्य निगरानी और आवश्यक उपचार सुनिश्चित हो पाता है। वित्तीय वर्ष 2026 में इस पहल से 27,000 से अधिक लोगों को लाभ मिला।
प्रोजेक्ट आरोग्य समुदाय आधारित और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देता है। इसके तहत स्वास्थ्य शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम तथा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं संचालित की जाती हैं। कार्यक्रम के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण, एनीमिया नियंत्रण, एचआईवी, टीबी तथा नशा मुक्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता और चिकित्सा सहायता प्रदान की जाती है।
बालकोनगर के समीप स्थित एक गांव की निवासी नेहा कंवर के लिए प्रोजेक्ट आरोग्य उनकी बेटी के स्वास्थ्य सुधार का आधार बना। वह बताती हैं, “जब मैं इस परियोजना से जुड़ी, तब मेरी ढाई वर्ष की बेटी काव्या का वजन केवल 11 किलो था। परियोजना के तहत मिले पोषण संबंधी मार्गदर्शन के बाद मैंने घर के भोजन में कुछ बदलाव किए। केवल दो महीनों में उसका वजन 1.5 किलो बढ़ गया और वह सामान्य वजन की श्रेणी में आ गई। आज मैं अपने गांव की अन्य माताओं को भी ऐसे उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करती हूं। इसके लिए मैं बालको की आभारी हूं।”
स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को प्रोत्साहित करने और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को समुदायों तक पहुंचाने के माध्यम से प्रोजेक्ट आरोग्य ने वित्तीय वर्ष 2026 में 93,000 से अधिक लोगों को लाभान्वित किया।
मोबाइल हेल्थ वैन और प्रोजेक्ट आरोग्य दोनों मिलकर बालको की उस प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिसके तहत स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के द्वार तक पहुंचाने, जागरूकता बढ़ाने और बेहतर उपचार की उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। शीघ्र स्वास्थ्य आवश्यकताओं के साथ-साथ दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुधार पर ध्यान केंद्रित करते हुए बालको स्वस्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर समुदाय के निर्माण में निरंतर योगदान दे रहा है।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के जंगलों से मिलेगी राजस्थान को बिजली:90 लाख टन कोयले की कमी दूर होगी, ये जयपुर को डेढ़ साल रोशन करने जितना
जयपुर/सरगुजा, एजेंसी। राजस्थान में बिजली की बढ़ती मांग और कोयले की कमी के बीच राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) को छत्तीसगढ़ (सरगुजा) के हसदेव-अरण्य क्षेत्र में स्थित केंते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल ब्लॉक के लिए केंद्र सरकार से वन भूमि उपयोग की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है।

इससे राजस्थान के छबड़ा (बारां) और सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट्स के लिए कोयले की आपूर्ति बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति की सिफारिश के बाद यह मंजूरी दी गई है।
परियोजना के तहत करीब 1743 हेक्टेयर वन भूमि को खनन (माइनिंग) के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। आसान भाषा में समझें तो यह क्षेत्र 80 से 200 बड़े क्रिकेट स्टेडियमों के बराबर माना जा सकता है।
इस कोयला खदान से अगले 33 से 36 साल तक करीब 90 लाख टन कोयला निकाला जा सकेगा। इसे छह चरणों में विकसित किया जाएगा।
जयपुर की 14-17 महीने की बिजली जरूरत के बराबर है यह कोयला
केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक से निकलने वाला कोयला राजस्थान के अपने बिजली संयंत्रों (पावर प्लांट) में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे छबड़ा और सूरतगढ़ जैसे बड़े थर्मल पावर प्लांटों को कोयले की बेहतर और नियमित आपूर्ति मिल सकेगी।
आसान भाषा में समझें तो यह मात्रा जयपुर शहर की करीब 14 से 17 महीने की औसत बिजली जरूरत के बराबर मानी जा सकती है। हालांकि, इस कोयले से बनने वाली बिजली सीधे सिर्फ जयपुर को नहीं मिलेगी। यह बिजली राजस्थान के पूरे पावर ग्रिड का हिस्सा होगी।
यदि कोयले की सप्लाई लगातार बनी रहती है, तो बिजलीघर पूरी क्षमता से काम कर सकेंगे और बिजली उत्पादन में स्थिरता आएगी। इसका फायदा आम उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है।

छत्तीसगढ़ का हसदेव-अरण्य क्षेत्र, जहां कोल ब्लॉक के लिए मंजूरी मिली है।
हर साल 24.05 मिलियन टन कोयले की आवश्यकता
राजस्थान में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट पर निर्भर है। खासतौर पर छबड़ा और सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट राज्य की बिजली व्यवस्था के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
इन बिजली संयंत्रों को पूरी क्षमता से चलाने के लिए हर साल करीब 24.05 मिलियन टन कोयले की आवश्यकता होती है। मौजूदा कोयला स्रोतों से इतनी आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। इसके कारण हर साल करीब 90 लाख टन कोयले की कमी बनी हुई थी।
इसी कमी को पूरा करने और भविष्य में बिजली उत्पादन को सुरक्षित रखने के लिए राजस्थान को नए कोयला ब्लॉक की जरूरत पड़ी। केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक शुरू होने के बाद राज्य के बिजलीघरों को लंबे समय तक कोयले की नियमित आपूर्ति मिल सकेगी। इससे दूसरे राज्यों या खुले बाजार से महंगा कोयला खरीदने पर निर्भरता भी कम होगी और बिजली उत्पादन अधिक स्थिर हो सकेगा।
जंगल पर बड़ा असर पड़ेगा
केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य क्षेत्र में स्थित है। यह क्षेत्र घने साल जंगलों और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। परियोजना के लिए कुल 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग खनन के लिए किया जाएगा। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इस परियोजना से जंगल पर बड़ा असर पड़ेगा। हजारों पेड़ काटे जाएंगे।
हाथियों और वन्यजीवों के क्षेत्र में होगा खनन
हसदेव-अरण्य क्षेत्र केवल जंगल नहीं बल्कि वन्यजीवों का महत्वपूर्ण इलाका है। केंते एक्सटेंशन क्षेत्र के आसपास हाथी, तेंदुआ, स्लॉथ भालू, चीतल, लकड़बग्घा, सियार और पैंगोलिन जैसी प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह क्षेत्र लेमरू हाथी रिजर्व के करीब 3.625 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यही वजह है कि परियोजना में वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विशेष योजना लागू करने की शर्त रखी गई है।
राजस्थान की बिजली कंपनी पर आएगा आर्थिक भार
केंते एक्सटेंशन परियोजना से केवल कोयला नहीं मिलेगा, बल्कि इसके साथ कई आर्थिक जिम्मेदारियां भी RVUNL पर आएंगी। वन भूमि डायवर्जन के बदले कंपनी को नियमों के अनुसार नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) का भुगतान करना होगा। यह राशि वन क्षेत्र की श्रेणी और सरकार द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार तय होगी। इसके अलावा वन भूमि के बदले 636.557 हेक्टेयर क्षेत्र में जितने जंगल का उपयोग बदलेगा, उसकी भरपाई के लिए नए वन विकसित करने की जिम्मेदारी भी राजस्थान की कंपनी की होगी।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए परियोजना में करीब 16.73 करोड़ रुपए का Wildlife Mitigation Plan लागू करना होगा। खनन से मिट्टी के कटाव और जल स्रोतों पर असर कम करने के लिए करीब 15.01 करोड़ रुपए के Soil and Moisture Conservation Plan का भी प्रावधान किया गया है।
मंजूरी मिली है, लेकिन कई शर्तों के साथ
केंते एक्सटेंशन को मिली मंजूरी अभी अंतिम खनन अनुमति नहीं है। यह स्टेज-1 सैद्धांतिक वन मंजूरी है, जिसमें कई शर्तें तय की गई हैं। खनन को दो चरणों में करने की योजना है। पहले चरण में करीब 1001.95 हेक्टेयर वन भूमि पर खनन किया जाएगा।
यह अवधि अधिकतम 15 साल तक होगी। इसके बाद दूसरे चरण में शेष 740.65 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन तभी आगे बढ़ेगा, जब पहले चरण में पर्यावरणीय शर्तों, जैव विविधता प्रबंधन की स्थिति संतोषजनक होगी। RVUNL को प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, वन विभाग की औपचारिकताएं और अन्य पर्यावरणीय शर्तें तय समय में पूरी करनी होंगी।
कोयला निकालना ही नहीं, राजस्थान तक पहुंचाना भी चुनौती
खदान शुरू होने के बाद सिर्फ कोयला निकालना ही पर्याप्त नहीं होगा। उसे राजस्थान के बिजली संयंत्रों तक पहुंचाने के लिए परिवहन व्यवस्था, वॉशरी, रेलवे कनेक्टिविटी और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया में पर्यावरणीय मंजूरियां और अतिरिक्त खर्च भी जुड़े होंगे।
कोरबा
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिमगा में संकुल स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव मनाया गया
कोरबा। जिले के पोड़ीउपरोड़ा ब्लॉक के दूरस्थ वनाँचल स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिमगा में दिनांक 20 जून 2026 को संकुल स्तरीय नवीन शिक्षा सत्र 2026-27 का शुभारंभ कर शाला प्रवेश उत्सव हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया।

शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत कोरबा के अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य विद्वान् सिंह मरकाम, जनपद पंचायत सदस्य भारत सिंह सिदार, ग्राम पंचायत सिमगा की सरपंच श्रीमती गायत्री आयाम, शाला विकास समिति के अध्यक्ष जय कुमार सिदार सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के प्राचार्य सतीश प्रकाश सिंह के द्वारा की गई।

शाला प्रवेश उत्सव में अतिथियों के द्वारा कक्षा पहली, छठवीं एवं नवमी के नवप्रवेशी बच्चों का स्वागत तिलक लगाकर और निःशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण करके किया गया। साथ ही शासन से प्रायमरी एवं मिडिल स्कूल के बच्चों के लिए प्रदायित गणवेश वितरण किया गया। कार्यक्रम में अतिथियों के द्वारा सभी बच्चों को मिष्ठान खिलाकर शाला प्रवेश की शुभकामनाएं दी गई।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने बच्चों को नये शिक्षा सत्र के प्रारम्भ होने की शुभकामनायें देते हुए साल भर नियमित रूप से स्कूल आकर पठन-पाठन करने के लिए प्रेरित किये। विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत सदस्य विद्वान सिंह मरकाम ने बच्चों को शिक्षा का महत्व बताते हुए आगे बढ़ने के लिए कहा। जनपद सदस्य भारत सिंह मरकाम ने भी सभा को सम्बोधित कर बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किये।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संकुल प्राचार्य सतीश प्रकाश सिंह ने संकुल सिमगा एवं गडरा के सभी विद्यालयों के परीक्षा परिणाम तथा शैक्षणिक प्रगति प्रतिवेदन को प्रस्तुत किये। इस अवसर पर प्राचार्य सतीश प्रकाश सिंह ने नवप्रवेशी बच्चों को क्षेत्र के मेधावी बच्चों की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए उनका अनुसरण कर अपने सुनहरे भविष्य का निर्माण करने के लिए कहा।
शाला प्रवेश उत्सव के पश्चात जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, पालकों एवं छात्र-छात्राओं के द्वारा नारा लगाते हुए ग्राम भ्रमण करके नशामुक्ति रैली निकाली गई।

कार्यक्रम में हीरा लाल पुलस्ते, बुधराम सिंह मसराम, चैन सिंह नेटी,व्याख्याता एवं शिक्षकगण- दिव्या कुजूर, मेलन कँवर, रुखमणि पूरेना, रमाकांत कुसरो, उमाकांत टोंडे, दीपक कुमारी, पुष्पा कुमारी, सोनम बालन, संकुल समन्वयक सिमगा तेजराम चंद्रा, संकुल समन्वयक गडरा विजय ताम्रकार, प्रधान पाठक देवपाल सिंह कँवर, भीष्म प्रसाद साहू, रामशरण मरकाम, छोटे लाल आयाम, धर्मेंद्र यादव, गंगा राम देशलहरे, सुनीता मरावी, रूपसाय बिंझवार सहित पालकगण, ग्रामवासी, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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