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विदेश

वडोदरा में भारत-स्पेन के पीएम:रोड शो, एयरबस असेंबली का उद्घाटन किया; मोदी बोले- पॉसिबिलिटी को प्रॉस्पैरिटी में बदलने के लिए सही पार्टनरशिप जरूरी

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वडोदरा, एजेंसी। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज आज वडोदरा में हैं। सबसे पहले मोदी और सांचेज ने वडोदरा एयरपोर्ट से टाटा के प्लांट तक करीब पौने तीन किमी का रोड शो किया। इसके बाद दोनों नेताओं ने C-295 सैन्य विमान के निर्माण के लिए टाटा एयरबस की असेंबली यूनिट का उद्घाटन किया।

इस मौके पर मोदी ने कहा कि हमने नए रास्ते पर चलना तय किया, नए लक्ष्य तय किए। इसका नतीजा सबके सामने है। पॉसिबिलिटी (संभावना) को प्रॉस्पैरिटी (समृद्धि) में बदलने के लिए सही प्लान और सही पार्टनरशिप का होना जरूरी है। इस कार्यक्रम में देश के 1500 कारोबारियों को भी आमंत्रित किया गया था।

हम सहयोग जारी रखने के लिए तत्पर हैं: पेड्रो इसके बाद दोनों पीएम वडोदरा के लक्ष्मी विलास पैलेस पहुंचे, जहां पीएम मोदी ने स्पेन से आए डेलिगेशन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पीएम ने व्यापार संबंधी एमओयू पर साइन किए। पैलेस में हुई द्विपक्षीय बैठक में स्पेन के प्रधान मंत्री पेड्रो सांचेज ने कहा कि जलवायु संकट, गरीबी और असमानता के खिलाफ लड़ाई के लिए सभी अंतरराष्ट्रीय लीडर्स के प्रयासों और राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। इन मुद्दों से निपटने के लिए भारत का प्रभाव और नेतृत्व आवश्यक है। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी, हम अपने महान सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने वडोदरा में एयरबस असेंबली का उद्घाटन किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने वडोदरा में एयरबस असेंबली का उद्घाटन किया।

सांचेज ने आगे कहा- भारत न केवल इंडो-पैसिफिक बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ में भी अग्रणी भूमिका निभाता है। स्पेन लैटिन अमेरिका के साथ विशेषाधिकार प्राप्त संबंध बनाए रखता है, ऐतिहासिक संबंधों ने मध्य पूर्व, अफ्रीका में उपस्थिति बढ़ाई है और यह भू-राजनीतिक संरचना हमारे देशों को विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचने के कई अवसर प्रदान करती है। खास तौर पर भारत और स्पेन के भी कई लक्ष्य हैं, जिसमें बहुपक्षीय प्रणाली को मजबूत करना और दुनिया भर में शांति और लोकतंत्र को संरक्षित करना भी शामिल है।

मैं आपको हाल ही में प्रधानमंत्री के रूप में पुनः निर्वाचित होने पर बधाई देता हूं। भारत आना मेरे लिए और स्पेनिश प्रतिनिधिमंडल के लिए भी सम्मान की बात है। मुझे यकीन है, यह यात्रा हमारे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी और दुनिया भारत और स्पेन के विजन और प्रभाव का सम्मान करेगी। इसमें कोई संदेह नहीं है कि संस्कृति, पर्यटन समेत कई अन्य क्षेत्रों में हमारा सहयोग बढ़ता रहेगा। हमारे देश एक दूसरे के पूरक हैं।

लक्ष्मी विलास पैलेस में पीएम नरेंद्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़।

लक्ष्मी विलास पैलेस में पीएम नरेंद्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़।

हमारी साझेदारी सदियों पुरानी है: मोदी

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ की यह पहली भारत यात्रा है। नई दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन में आपकी अनुपस्थिति हम सभी को महसूस हुई। भारत में दिवाली के अवसर पर आपका स्वागत करने का अवसर पाकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैं वडोदरा में आपका स्वागत करता हूं, जिसने मुझे पहली बार संसद सदस्य बनाया। बाद में मैं प्रधानमंत्री बना।

मुझे इस बात की भी खुशी है कि आप मेरे गृह नगर गुजरात आए हैं। इसलिए नहीं कि यह मेरा गृहनगर है, बल्कि इसलिए कि गुजरात को त्योहारों और समारोहों की भूमि माना जाता है। दिवाली प्रकाश, उत्साह, खुशी, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है। इस प्रकार आपकी यात्रा ने हमारे रिश्ते को एक नई ऊर्जा दी है। आज सी-295 संयंत्र के उद्घाटन के साथ हमारी साझेदारी में एक अध्याय की शुरुआत हुई है।

हमारी साझेदारी सदियों पुरानी है। लोकतंत्र और कानून के शासन जैसे मूल्यों में साझा विश्वास हमें एक साथ बांधता है। हमारे बीच अर्थव्यवस्था, रक्षा, फार्मा, आईटी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे कई क्षेत्रों में मजबूत सहयोग है और हम दोनों वैश्विक शांति, समृद्धि और सहयोग पर जोर देते हैं। लोगों से लोगों का संपर्क हमारे रिश्तों को एक मजबूत आधार प्रदान करता है।

स्पेन के किसी PM का यह 18 साल बाद भारत दौरा है। इससे पहले जुलाई 2006 में स्पेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री जोस लुइस ने भारत की यात्रा की थी।

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बिज़नस

AliExpress पर EU का सख्त एक्शन, लगा रू.5,500 करोड़ का जुर्माना, जानें क्यों?

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ब्रसेल्स, एजेंसी। चीन की दिग्गज टेक कंपनी अलीबाबा के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अलीएक्सप्रेस पर यूरोपीय यूनियन (EU) ने 550 मिलियन यूरो (करीब 5,500 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया है। आरोप है कि कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर नकली, गैरकानूनी और असुरक्षित उत्पादों की बिक्री रोकने में विफल रही।

यूरोपीय यूनियन के अधिकारियों के अनुसार, अलीएक्सप्रेस पर ऐसे कई उत्पाद बेचे जा रहे थे जो यूरोप के सुरक्षा और पर्यावरण मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। इनमें खिलौने, कॉस्मेटिक और अन्य उपभोक्ता उत्पाद शामिल हैं। जांच में यह भी पाया गया कि जिन उत्पादों को नियमों का उल्लंघन करने पर हटाया गया था, उनमें से कई बाद में दोबारा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो गए। कुछ मामलों में ऐसे उत्पादों की ग्राहकों को सिफारिश भी की गई।

मार्च 2024 में शुरू हुई थी जांच 

यह कार्रवाई यूरोपीय यूनियन के डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) के तहत की गई है। वर्ष 2022 में लागू इस कानून का उद्देश्य बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करना है। अलीएक्सप्रेस के खिलाफ जांच मार्च 2024 में शुरू हुई थी। ईयू का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है कि वे अपने सिस्टम में मौजूद जोखिमों की पहचान करें और समय रहते उन्हें दूर करें, ताकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना

बताया जा रहा है कि किसी ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर लगाया गया यह अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना है। इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 120 मिलियन यूरो और चीनी ई-कॉमर्स कंपनी Temu पर 200 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया गया था।

हालांकि, अलीएक्सप्रेस ने यूरोपीय आयोग के फैसले का विरोध किया है। कंपनी का कहना है कि जुर्माने की राशि अत्यधिक है और हाल के वर्षों में किए गए सुधारों को नजरअंदाज किया गया है। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि वह इस फैसले के खिलाफ उपलब्ध कानूनी विकल्पों का उपयोग करेगी।

यूरोप अलीएक्सप्रेस का सबसे बड़ा बाजार

यूरोप फिलहाल अलीएक्सप्रेस का सबसे बड़ा बाजार है, जहां उसके लगभग 19.3 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। तुलना में Shein के करीब 15.6 करोड़ और Temu के लगभग 13 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। यूरोपीय यूनियन ने कंपनी को 20 अक्टूबर तक जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया है। निर्धारित समय तक भुगतान नहीं होने पर अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

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विदेश

ब्रिटिश PM स्टार्मर ने सौंपा इस्तीफा; बोले-‘मेरा काम पूरा हो गया’, नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने संभाली सत्ता

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लंदन, एजेंसी। ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। केअर स्टार्मर ने सोमवार को प्रधानमंत्री पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। 10 डाउनिंग स्ट्रीट से अपने अंतिम संबोधन में उन्होंने कहा, “मेरा काम पूरा हो गया है।” इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। अब लेबर पार्टी के नए नेता एंडी बर्नहम ने ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाल लिया है।  प्रधानमंत्री पद छोड़ने से पहले केअर स्टार्मर ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वह जिम्मेदारी एंडी बर्नहम को सौंप रहे हैं और उन्हें अपना पूरा समर्थन देते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल को देश की सेवा का महत्वपूर्ण अवसर बताया।

सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया 
संवैधानिक परंपरा के अनुसार स्टार्मर ने बकिंघम पैलेस जाकर राजा चार्ल्स तृतीय को अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद लेबर पार्टी के नवनिर्वाचित नेता एंडी बर्नहम को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया। राजा से मुलाकात के बाद बर्नहम ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की और फिर 10 डाउनिंग स्ट्रीट पहुंचकर राष्ट्र को अपना पहला संबोधन दिया।

एंडी बर्नहम का परिचय
7 जनवरी 1970 में जन्मे  एंडी बर्नहम का पूरा नाम एंड्रयू मरे बर्नहम (Andrew Murray Burnham) है। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के फिट्जविलियम कॉलेज से अंग्रेजी (English) में स्नातक की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही उनकी राजनीति और सामाजिक मुद्दों में रुचि रही। 56 वर्षीय एंडी बर्नहम लंबे समय से लेबर पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं।  वह ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर भी रह चुके हैं और स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण तथा क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में भारत-ब्रिटेन के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों में निरंतरता बनी रह सकती है।

बर्नहम का राजनीतिक सफर

  • वर्ष 2001 में पहली बार ली (Leigh) संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए।
  • टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन की सरकारों में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।
  • 2008 से 2009 तक संस्कृति, मीडिया और खेल मंत्री रहे।
  • 2009 से 2010 तक ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री (Health Secretary) रहे।
  • 2017 से 2026 तक ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहे, जहां उन्होंने परिवहन, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास के क्षेत्र में कई पहल कीं।
  • जुलाई 2026 में लेबर पार्टी के नेता चुने गए और इसके बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने।
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विदेश

टूटने की कगार पर पाकिस्तानः बलूचिस्तान से PoK तक भड़की बगावत की आग, देश के हो सकते 4 टुकड़े

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इस्लामाबाद,एजेंसी।पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा संकटों में से एक का सामना कर रहा है। एक ओर बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के हमले तेज हो गए हैं, तो दूसरी ओर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) खैबर पख्तूनख्वा में लगातार सुरक्षा बलों को निशाना बना रही है। इसके साथ ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में विरोध प्रदर्शन और अफगानिस्तान सीमा पर तालिबान के साथ बढ़ते तनाव ने इस्लामाबाद की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के “चार टुकड़े होने” या “तत्काल गृहयुद्ध” जैसी बातें अभी दावे और अटकलें हैं। मौजूदा हालात गंभीर जरूर हैं, लेकिन ऐसा होने की पुष्टि किसी आधिकारिक या स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्था ने नहीं की है।

बलूचिस्तान में हमले
बलूचिस्तान में बीएलए लगातार पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले कर रही है। हाल के महीनों में कई सैन्य काफिलों, पुलिस चौकियों और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया गया है। बलूच संगठनों का आरोप है कि पाकिस्तान ने दशकों से क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया है और स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी की है। वहीं पाकिस्तान सरकार इन संगठनों को आतंकवादी संगठन मानती है।

खैबर पख्तूनख्वा में TTP का खूनी अभियान
खैबर पख्तूनख्वा और पूर्व कबायली इलाकों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) लगातार पुलिस और सेना पर हमले कर रही है। हाल के महीनों में कई पुलिस चौकियों पर हमले, आत्मघाती विस्फोट और घात लगाकर किए गए हमलों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी को अफगानिस्तान की सीमा पार से समर्थन मिल रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है।

PoK में भी बढ़ रहा असंतोष
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में महंगाई, बिजली संकट और प्रशासनिक नीतियों के विरोध में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं।
कुछ स्थानीय संगठनों ने अधिक स्वायत्तता और कुछ समूहों ने पाकिस्तान से अलग होने की मांग भी उठाई है। हालांकि पूरे क्षेत्र में अलगाववाद की एक जैसी स्थिति नहीं है और हालात अलग-अलग इलाकों में अलग हैं।

अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ा तनाव
डूरंड लाइन पर पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीमा पार हमलों और आतंकियों को संरक्षण देने के आरोप लगाते रहे हैं। कई बार सीमा पर गोलीबारी और ड्रोन हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 के अनुसार पाकिस्तान में वर्ष 2025 के दौरान आतंकवादी घटनाओं और मौतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान अब एक साथ कई सुरक्षा मोर्चों पर लड़ रहा है, जिससे सेना और सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक टिप्पणियों में पाकिस्तान के चार टुकड़े होने के दावे किए जा रहे हैं। पाकिस्तान गंभीर सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक संकट से जरूर गुजर रहा है, लेकिन उसके तत्काल विघटन या गृहयुद्ध की घोषणा जैसी कोई विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार इन आंतरिक चुनौतियों का समाधान नहीं कर पाती तो अस्थिरता और बढ़ सकती है।

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