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छत्तीसगढ़

नई औद्योगिक नीति से छत्तीसगढ़ में बेहतर,औद्योगिक वातावरण का होगा निर्माण

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औद्योगिक विकास नीति 2024-2030

विशेष लेख : उप संचालक: छगनलाल लोन्हारे 

रायपुर। प्रदेश की नई औद्योगिक नीति 1 नवंबर 2024 से लागू हो गई है, जो 31 मार्च 2030 तक प्रभावशील रहेगी। राज्य के औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने के लिए राज्य में औद्योगिक नीतियों की परिकल्पना राज्य गठन के उपरान्त लगातार की जा रही है। छत्तीसगढ़ में अब तक पांच औद्योगिक नीतियां क्रमशः – 2001, 2004-09, 2009-14, 2019-24 प्रवाशील रही एवं अब नई औद्योगिक नीति 2024 लागू की गई है। उपरोक्त औद्योगिक नीति को लागू किये जाने के साथ ही इन नीतियों में तत्कालीन आवश्यकताओं को तथा औद्योगिक विकास के निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नीतियों में यथा आवश्यकता विभिन्न प्रकार के औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन यथा- ब्याज अनुदान, राज्य लागत पूंजी अनुदान, (अधोसंरचना लागत पूंजी अनुदान), स्टाम्प शुल्क छूट, विद्युत शुल्क छूट, प्रवेश कर छूट, मूल्य संवर्धित कर प्रतिपूर्ति, मंडी शुल्क छूट, परियोजना लागत पूंजी अनुदान इत्यादि प्रदान की जाती रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि हमने इस नई नीति को रोजगार परक और विजन-2047 के अनुरूप विकसित भारत के निर्माण की परिकल्पना को ध्यान में रखते हुए विकसित छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण का लक्ष्य तय किया है। हमारा राज्य देश के मध्य मेें स्थित है, आने वाले वर्षो में हम अपनी भौगोलिक स्थिति आवागमन के आधुनिक साधनों और आप सबकी भागीदारी से प्रदेश को ‘‘हेल्थ हब‘‘ बनाने मे सफल होंगे। जगदलपुर के नजदीक हम लगभग 118 एकड़ भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र का निर्माण प्रारभ करने जा रहे है।

प्रदेश के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन का कहना है कि निश्चित तौर पर हमारी सरकार की मंशा है कि प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा उद्योग कैसे स्थापित हो इसे ध्यान में रखकर यह उद्योग नीति तैयार की गई है। हमने पहली बार इस नीति के माध्यम से राज्य में पर्यटन एवं स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं में निवेश को भी प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। हाल ही में आयोजित केबिनेट बैठक में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है।

इसमें छत्तीसगढ़ सरकार ने भारत सरकार के विजन 2047 की परिकल्पना को साकार करने तथा राज्य के औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से कई प्रावधान किए हैं। राज्य के प्रशिक्षित व्यक्तियों को औपचारिक रोजगार में परिवर्तित करने के लिए उद्योगों हेतु प्रति व्यक्ति 15 हजार रूपए की प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। यह नीति 31 मार्च 2030 तक के लिए होगी। नई औद्योगिक नीति में निवेश प्रोत्साहन में ब्याज अनुदान, लागत पूंजी अनुदान, स्टाम्प शुल्क छूट, विद्युत शुल्क छूट. मूल्य संवर्धित कर प्रतिपूर्ति का प्रावधान है। नई नीति में मंडी शुल्क छूट, दिव्यांग (निःशक्त) रोजगार अनुदान, पर्यावरणीय प्रोजेक्ट अनुदान, परिवहन अनुदान, नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर की प्रतिपूर्ति के भी प्रावधान किये गये हैं।

इस नीति में राज्य के युवाओं के लिये रोजगार सृजन को लक्ष्य में रखकर एक हजार से अधिक स्थानीय रोजगार सृजन के आधार पर बी-स्पोक पैकेज विशिष्ट क्षेत्र के उद्योगों के लिये प्रावधानित है। राज्य के निवासियों विशेषकर अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला उद्यमियों, सेवानिवृत्त अग्निवीर सैनिक, भूतपूर्व सैनिकों, जिनमें पैरामिलिट्री भी शामिल है, को नई औद्योगिक नीति के तहत अधिक प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान है। नक्सल प्रभावित लोगों, कमजोर वर्ग, तृतीय लिंग के उद्यमियों के लिए नई औद्योगिक पॉलिसी के तहत विशेष प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान किया गया है। नई औद्योगिक नीति में पहली बार सेवा क्षेत्र अंतर्गत एमएसएमई सेवा उद्यम एवं वृहद सेवा उद्यमों के लिये पृथक-पृथक प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

छत्तीसगढ़ संभवतः देश में पहला राज्य है, जिसने युवा अग्निवीरों एवं नक्सल पीड़ित परिवारों को स्वयं के रोजगार धन्धे स्थापित करने पर विशेष अनुदान एवं छूट का प्रावधान किया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं को स्वयं का रोजगार उपलब्ध कराने हेतु भी कटिबद्ध हैं। इसके लिए हम इन वर्गों के उद्यमियों को मात्र 1 रूपये प्रति एकड़ की दर पर औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि दे रहे है। सरकार का प्रयास होगा  कि उद्योग स्थापना एवं संचालन में सरकारी हस्तक्षेप न्यूनतम हो एवं यथासंभव सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा ऑनलाइन माध्यम से हो ताकि आपके उद्योग हेतु आपको सरकार के पास आने की आवश्यकता ना हो।

औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के विशेष प्रावधान

यह नीति उद्योगों को निवेश करने, नये रोजगार सृजन करने और आर्थिक विकास को गति देने के लिये एक मजबूत आधार प्रदान करेगी। इस नीति के माध्यम से राज्य के युवाओं के लिए कौशलयुक्त रोजगारों का सृजन करते हुये अगले 5 वर्षों में 5 लाख नए औपचारिक क्षेत्रों में रोजगार का लक्ष्य रखा गया है। इस नीति मैं स्थानीय श्रमिकों को औपचारिक रोजगार में परिवर्तित करने के लिए प्रशिक्षण कर प्रोत्साहन का प्रावधान करते हुये 1000 से अधिक रोजगार प्रदाय करने वाली इकाईयों को प्रोत्साहन के अतिरिक्त विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान में सहभागिता के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला उद्यमियों, सेवानिवृत्त अग्निवीर, भूतपूर्व सैनिकों (जिनमें पैरा मिलेट्री फोर्स भी सम्मिलित है), नक्सल प्रभावित, आत्म-समर्पित नक्सलियों एवं तृतीय लिंग के उद्यमों का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने का प्रावधान किया गया है। औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की परिभाषा को भारत सरकार द्वारा परिभाषित एम.एस.एम.ई. के अनुरुप किया गया है। इसी के अनुसार ही इन उद्यमों को प्राप्त होने वाले प्रोत्साहनों को अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धी बनाया गया है।

राज्य सरकार द्वारा देश में सेवा गतिविधियों के बढ़ते हुये। रुझान को दृष्टिगत रखते हुये इस नीति में पहली बार सेवा क्षेत्र अंतर्गत एमएसएमई सेवा उद्यम एवं वृहद सेवा उद्यमों के लिये पृथक-पृथक प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। सेवा क्षेत्र अंतर्गत इंजीनियरिंग सर्विसेस, रिसर्च एंड डेव्हलपमेंट, स्वास्थ्य सेक्टर, पर्यटन एवं मनोरंजन सेक्टर आदि से संबंधित गतिविधियों को सम्मिलित किया गया है। औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में विशिष्ट श्रेणी के उद्योगों जैसे फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाईल, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोंपज प्रसंस्करण, कम्प्रेस्ड बॉयो गैस, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू), आई.टी., आई.टी.ई.एस./डेटा सेंटर जैसे नवीन सेक्टरों के लिए विशेष पैकेज का प्रावधान है।

4 दिसम्बर 2024 को नवा रायपुर में स्टेक होल्डर कनेक्ट वर्कशॉप के दौरान राज्य के 27 बड़े औद्योगिक समूहों को नवीन पूंजी निवेश के प्रस्ताव के संबंध में 32 हजार 225 करोड़ रुपए के निवेश के लिए इंटेंट टू इन्वेस्ट लेटर प्रदान किए। इनमें राज्य के कोर सेक्टर के साथ ही नये निवेश क्षेत्रों जैसे आईटी, एआई, डाटा सेंटर, एथेनॉल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, कम्प्रेस्ड बायो गैस जैसे क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा। इनमें शिवालिक इंजीनियरिंग, मां दुर्गा आयरन एण्ड स्टील, एबीआरईएल ग्रीन एनर्जी, आरएजी फेरो एलायज, रिलायंस बायो एनर्जी, यश फैंस एण्ड एप्लायंसेस, शांति ग्रीन्स बायोफ्यूल, रेक बैंक डाटा सेंटर आदि सम्मिलित हैं।

इसके साथ ही थ्रस्ट सेक्टर के ऐसे उद्योग जहां राज्य का प्रतिस्पर्धात्मक लाभ है और जहां भविष्य के रोजगार आ रहे हैं, उन क्षेत्रों के लिये अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान है। नीति में प्रोत्साहनों की दृष्टि से राज्य के विकासखण्डों को 03 समूहों में रखा गया है। समूह-1 में 10. समूह 2 में 61 एवं समूह 3 में 75 विकासखण्डों को वर्गीकृत किया गया है।

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कोरबा

SECL गेवरा परियोजना के प्रभावित ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, 27 मार्च से संपूर्ण कार्य ठप्प करने का ऐलान

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​कोरबा/गेवरा। एसईसीएल गेवरा परियोजना से प्रभावित ग्राम नरईबोध एवं अन्य ग्रामों के विस्थापितों ने प्रबंधन पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाते हुए, आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ग्रामीणों ने घोषणा की है कि यदि उनकी नियुक्तियों और पुनर्वास की मांगों को तुरंत पूरा नहीं किया गया तो 27 मार्च 2026 से गेवरा परियोजना और पी.एन.सी. कंपनी का समस्त कार्य पूर्णतः बाधित कर दिया जाएगा ।

​क्या है मुख्य विवाद?

​ग्रामीणों का कहना है कि एसईसीएल प्रबंधन ने लिखित आश्वासन दिया था कि 18 मार्च 2026 को 5 ड्राइवरों और 5 जनरल मजदूरों को तत्काल जॉइनिंग दी जाएगी, साथ ही 5 अन्य व्यक्तियों को एक सप्ताह के भीतर कार्य पर रखा जाएगा। प्रबंधन के लिखित वादे के बावजूद 25 मार्च तक किसी भी ग्रामीण को जॉइनिंग नहीं दी गई है ।

आंदोलन की चेतावनी
​लगातार मिल रहे झूठे आश्वासनों से त्रस्त होकर ग्रामीणों ने अब सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है:-

​कार्य बंदी:- 27 मार्च से गेवरा परियोजना के साथ-साथ सहयोगी पी.एन.सी. कंपनी के कार्यों को भी रोका जाएगा ।
जवाबदेही:- ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि कार्य बाधित होने से होने वाले किसी भी नुकसान की समस्त जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी ।
प्रशासन को सूचना:- इस संबंध में जिलाधीश (कोरबा) पुलिस अधीक्षक एसडीएम (कटघोरा) और स्थानीय थाना प्रभारी को लिखित सूचना दे दी गई है ।

​प्रमुख मांगें:-

लिखित समझौते के अनुसार सभी 15 व्यक्तियों को तत्काल जॉइनिंग दी जाए, स्थायी रोजगार मुआवजा और पुनर्वास की समस्याओं का त्वरित निराकरण हो, विस्थापितों के साथ किए गए वादों को समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए ।

​हम वर्षों से अपनी जमीन और आजीविका खोकर न्याय का इंतजार कर रहे हैं, प्रबंधन ने लिखित वादा करके भी हमें ठगा है। अब हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है ।

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कोरबा

कोरबा की पावन धरा पर सजेगा दिव्य आध्यात्मिक महाकुंभ, बागेश्वर धाम सरकार के आगमन से भक्तिमय होगा वातावरण

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ग्राम ढपढप में 28 मार्च से 1 अप्रैल तक दिव्य श्री हनुमंत कथा, 27 मार्च को 21 हजार मातृशक्ति की भव्य कलश यात्रा बनेगी आस्था का विराट प्रतीक
कोरबा। औद्योगिक नगरी कोरबा अब एक ऐतिहासिक और अलौकिक आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनने जा रही है। बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री महाराज के पावन आगमन से कोरबा की धरती भक्ति, श्रद्धा और सनातन चेतना से सराबोर होने वाली है। बांकीमोंगरा-कटघोरा मार्ग स्थित ग्राम ढपढप में 28 मार्च से 1 अप्रैल 2026 तक आयोजित होने जा रही दिव्य श्री हनुमंत कथा को लेकर पूरे जिले में जबरदस्त उत्साह, श्रद्धा और उमंग का वातावरण है।

यह आयोजन केवल एक कथा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सेवा, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का विराट महापर्व बनने जा रहा है। आयोजन की भव्यता, व्यवस्थाओं की व्यापकता और भक्तों की अपार आस्था को देखकर स्पष्ट है कि यह कार्यक्रम कोरबा के धार्मिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने वाला है।

27 मार्च को निकलेगी 21 हजार माताओं-बहनों की भव्य कलश यात्रा
दिव्य श्री हनुमंत कथा से पूर्व 27 मार्च को सुबह 11 बजे मरही दाई मंदिर से कथा स्थल तक 21 हजार माताओं और बहनों की विशाल कलश यात्रा निकाली जाएगी। यह कलश यात्रा आस्था, नारी शक्ति और सनातन गौरव का अद्भुत प्रतीक होगी। आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि कलश यात्रा पूरी तरह नि:शुल्क है, इसमें किसी प्रकार का शुल्क लिया जाना पूरी तरह भ्रामक और निराधार है।

प्रेस क्लब तिलक भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक जुड़ावन सिंह ठाकुर ने जानकारी देते हुए कहा कि यह आयोजन कोरबा की धार्मिक चेतना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इस पुण्य अवसर का भागीदार बनने की अपील की।
बागेश्वर धाम सरकार के आगमन से भक्तों में अपार उत्साह
जैसे ही पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री महाराज के कोरबा आगमन की घोषणा हुई, पूरे जिले में भक्तों के बीच हर्ष और उत्साह की लहर दौड़ गई। अपने ओजस्वी प्रवचनों, श्री हनुमंत भक्ति और सनातन जागरण के लिए देशभर में पूज्यनीय बागेश्वर धाम सरकार का यह आगमन कोरबा के लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं माना जा रहा। श्रद्धालुओं का मानना है कि महाराज के चरण स्पर्श से कोरबा की पावन धरा और भी धन्य हो जाएगी।

पांच दिवसीय कार्यक्रम में भक्ति, सेवा और संस्कार का अद्भुत संगम
इस विराट धार्मिक आयोजन का संचालन अपना घर सेवा आश्रम परिवार द्वारा किया जा रहा है। कथा के दौरान प्रतिदिन अलग-अलग आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे यह आयोजन केवल कथा तक सीमित न रहकर समाज जागरण और लोकसेवा का अभियान बन जाएगा।

कार्यक्रम की प्रमुख रूपरेखा इस प्रकार रहेगी—
28 मार्च – पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री महाराज का भव्य आगमन एवं स्वागत, साथ ही पंच दिवसीय विशाल रक्तदान शिविर का शुभारंभ।
दिव्य श्री हनुमंत कथा के प्रथम दिवस – सफाई कर्मियों द्वारा आरती, जो समाज के सम्मान और सेवा भाव का अद्भुत संदेश देगी।
29 मार्च – अपना घर सेवा आश्रम के नवीन भवन निर्माण का संकल्प।
30 मार्च – दिव्य दरबार का भव्य आयोजन।
31 मार्च – बजरंग दल त्रिशूल दीक्षा संकल्प एवं घर वापसी कार्यक्रम।
1 अप्रैल – 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याओं का नम: सामूहिक विवाह, जो इस आयोजन की सामाजिक ।संवेदनशीलता और सेवा भावना का सबसे पावन स्वरूप होगा
कोरबा में होगा अब तक का सबसे विशाल कथा आयोजन

कार्यक्रम के संयोजक एवं विश्व हिन्दू परिषद जिलाध्यक्ष अमरजीत सिंह ने बताया कि यह आयोजन कोरबा में अब तक होने वाली सबसे बड़ी और सबसे भव्य कथा के रूप में इतिहास रचने जा रहा है। उन्होंने कहा कि तैयारियों के लिए समय भले ही कम मिला, लेकिन प्रशासन के सहयोग, कार्यकर्ताओं की निष्ठा और ईश्वर की कृपा से सभी तैयारियां लगभग पूर्ण कर ली गई हैं।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि कोरबा भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है, और यही कारण है कि बागेश्वर धाम सरकार स्वयं भी भगवान श्रीराम के ननिहाल कोरबा आने को लेकर विशेष उत्साहित हैं। यह बात श्रद्धालुओं के लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

छत्तीसगढ़ में महाराज की पांचवीं कथा, कोरबा को मिला विशेष सौभाग्य
बताया गया कि छत्तीसगढ़ में पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री महाराज की यह पांचवीं कथा होगी, लेकिन कोरबा का यह आयोजन अपने स्वरूप, श्रद्धालुओं की संख्या और सामाजिक सरोकारों के कारण विशेष महत्व रखता है। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हिंदू समाज के जागरण, संगठन और सांस्कृतिक एकात्मता का विराट मंच बनने जा रहा है।
व्यवस्थाओं की भव्यता देखकर हर कोई होगा अभिभूत
इतने विशाल आयोजन को सफल बनाने के लिए 32 सदस्यीय कोर कमेटी लगातार दिन-रात जुटी हुई है। आयोजन समिति के अनुसार कथा आयोजन में 1 करोड़ से सवा करोड़ रुपए तक खर्च होने का अनुमान है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।
कथा स्थल पर रहेंगी विशेष व्यवस्थाएं—
10 एंबुलेंस
20 वाटर टैंकर
5 फायर ब्रिगेड
नि:शक्त एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधा
सुचारु यातायात एवं सुरक्षा प्रबंधन
श्रद्धालुओं के बैठने, पेयजल और सेवा व्यवस्था की व्यापक तैयारी
इन व्यवस्थाओं से स्पष्ट है कि आयोजन समिति इस दिव्य कार्यक्रम को केवल भव्य ही नहीं, बल्कि सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सर्वसमावेशी बनाने के लिए पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है।
आस्था चैनल पर होगा लाइव प्रसारण
जो श्रद्धालु किसी कारणवश कथा स्थल तक नहीं पहुंच पाएंगे, वे भी इस आध्यात्मिक महायज्ञ से जुड़ सकेंगे। आयोजन समिति ने बताया कि दिव्य श्री हनुमंत कथा का लाइव प्रसारण आस्था चैनल पर किया जाएगा, जिससे देशभर के भक्त इस पावन आयोजन का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री, मंत्री और जनप्रतिनिधियों को भी भेजा गया आमंत्रण
इस महाआयोजन की गरिमा को देखते हुए मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों सहित अनेक विशिष्ट जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। इससे यह आयोजन न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है।
पत्रकार वार्ता में ये रहे उपस्थित
प्रेस वार्ता के दौरान कार्यक्रम से जुड़े अनेक प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें संरक्षक मंडल प्रमुख सुबोध सिंह, कार्यक्रम सचिव एवं जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह, कार्यक्रम संयोजक अमरजीत सिंह जिला अध्यक्ष विश्व हिन्दू परिषदमातृ शक्ति प्रमुख ऋतु चौरसिया, अपना घर सेवा आश्रम के राणा मुखर्जी, पवन गर्ग सहित अन्य गणमान्यजन शामिल रहे।
कोरबा तैयार, भक्त तैयार… अब बस इंतजार बागेश्वर धाम सरकार के पावन आगमन का
कोरबा की फिजाओं में अब भक्ति का स्वर गूंज रहा है। गांव-गांव, शहर-शहर, चौक-चौराहों से लेकर श्रद्धालुओं के हृदय तक एक ही नाम की चर्चा है—बागेश्वर धाम सरकार।
यह आयोजन निश्चित रूप से श्रद्धा, सनातन संस्कार, सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक जागरण का ऐसा विराट पर्व सिद्ध होगा, जिसे कोरबा की जनता वर्षों तक याद रखेगी।
दिव्य श्री हनुमंत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति के माध्यम से समाज को जोड़ने, संस्कारों को सशक्त करने और सनातन चेतना को जागृत करने का अनुपम प्रयास है।

28 मार्च से 1 अप्रैल तक ग्राम ढपढप में सजने वाला यह दिव्य दरबार, कोरबा की धरती को आध्यात्मिक गौरव के नए शिखर पर स्थापित करने जा रहा है।

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कोरबा

जर्जर 437 भवनों में से 113 को मिली मंजूरी, 94 में काम ही शुरू नहीं हुआ

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कोरबा। प्रशासनिक कवायद के बाद भी स्कूलों की दशा नहीं सुधर पा रही है। 1 अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू हो जाएगा। हालांकि 30 अप्रैल के बाद गर्मी की छुट्टी लग जाएगी। 16 जून से स्कूलों में बच्चों की हलचल फिर से शुरू हो जाएगी। ऐसे में यह समय स्कूलों की दशा सुधारने के लिए काफी अहम होता है।

जिले में 437 स्कूल भवन ऐसे हैं जिनके मरम्मत की जरूरत है या फिर जर्जर हो चुके हैं। जर्जर हो चुके भवनों के स्थान पर नए भवन बनाए जाने हैं। 3 माह पहले जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए 113 प्रायमरी व मिडिल स्कूलों के भवनों को गिराकर उनके स्थान पर नए भवन बनाने की मंजूरी दे दी थी। वर्तमान स्थिति यह है कि इसमें से 19 स्कूलों की ही दशा सुधारने तेजी से काम हो रहा है, जबकि 94 स्कूल ऐसे हैं जो आज भी यथास्थिति में खड़े हैं। इसके बाद भी उन भवनों में कक्षाएं लगानी पड़ती है। जो वहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए जोखिम बने हुए हैं। मंजूरी के बाद यह उम्मीद बंधी थी कि नए सत्र में बच्चों को नया भवन मिल जाएगा पर यह संभव होता नहीं दिख रहा है।

केस-1: कटघोरा ब्लाक के गवर्नमेंट गर्ल्स प्रायमरी स्कूल छुरी, बालक प्रायमरी स्कूल भाठापारा छुरी का भवन बच्चों को बिठाने के योग्य नहीं है। पूरी तरह जर्जर हो चुके इस भवन के स्थान पर नया भवन बनाया जाना है, पर आज भी खंडहर के रूप में भवन खड़ा है।

केस-2: करतला ब्लाक के गवर्नमेंट प्रायमरी व मिडिल स्कूल केरवाद्वारी में प्रायमरी व मिडिल स्कूल भवन जर्जर हैं। भवन की छत व दीवारों से होकर बारिश का पानी कमरे में जमा हो जाता है। छत व दीवारें जर्जर हो चुकी हैं। बावजूद इसके वहां कक्षाएं लगती हैं। यहां काम नहीं शुरू हो सका है।

केस-3: पाली ब्लाक के कोरबी के आश्रित मोहल्ला में संचालित गवर्नमेंट प्रायमरी स्कूल भवन में बच्चों को बिठाकर पढ़ाने की मजबूरी है। बारिश के समय वहां छुट्‌टी देनी पड़ती है। कमरे के अंदर छत का प्लास्टर गिर चुका है, जंग लगी सरिया नजर आती है। यहां भी काम कराने की जरूरत है।

जर्जर स्कूल भवनों की सूची दी जा चुकी है : उपाध्याय

जिले के जर्जर व मरम्मत योग्य स्कूल भवनों की जानकारी प्रशासन द्वारा मांगी गई थी। जिसे उपलब्ध करा दिया गया है। कुछ स्कूलों में काम शुरू भी हो गया है। जिन स्कूलों में काम नहीं हो रहा है उसके बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान स्कूलों को व्यवस्थित कर लिया जाएगा।

टीपी उपाध्याय, डीईओ, कोरबा

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