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छत्तीसगढ़

आचार संहिता से 3 घंटे पहले सरकार की बड़ी घोषणाएं:स्वच्छता दीदियों का मानदेय 800 रुपए बढ़ा, भूमिहीन मजदूरों को मिलेंगे 10 हजार, योजना लॉन्च

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रायपुर ,एजेंसी। छत्तीसगढ़ सरकार ने आचार संहिता लगने से ठीक पहले करोड़ों के काम जनता के नाम किए हैं। सोमवार को दोपहर 3 बजे राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव की घोषणा की। हालांकि इससे पहले ही 11 से 12 बजे के बीच 2 बड़े आयोजनों में योजनाओं को लॉन्च किया गया।

425 करोड़ से ज्यादा के कामों का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया। सफाईकर्मी महिलाओं का मानदेय बढ़ा दिया गया है। माना जा रहा है कि निकाय चुनाव से ठीक पहले भाजपा सरकार शहरी और ग्रामीण वोटर्स काे ध्यान में रखकर ये घोषणाएं की है।

अनुकम्पा नियुक्ति के आदेश मृत कर्मचारियों के परिजनों को दिए गए। हाल ही में कैबिनेट बैठक में इसका फैसला लिया गया था।

अनुकम्पा नियुक्ति के आदेश मृत कर्मचारियों के परिजनों को दिए गए। हाल ही में कैबिनेट बैठक में इसका फैसला लिया गया था।

इनको मिलेगा फायदा

भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना में भूमिहीन कृषि मजदूरों के साथ वनोपज संग्राहक भूमिहीन परिवार, चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी आदि पौनी-पसारी से जुड़े भूमिहीन परिवार भी शामिल हैं।

इनके अलावा अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के देवस्थल में पूजा करने वाले पुजारी, बैगा, गुनिया, मांझी परिवारों को भी शामिल किया गया है।

करोड़ों के प्रोजेक्ट, 353 नए पद भी मंजूर

सिविल लाइंस के न्यू सर्किट हाउस में योजना की लॉन्चिंग हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री दीनदयाल ऑडिटोरियम पहुंचे। यहां 425 करोड़ के प्रोजेक्ट जनता के नाम हुए। इसमें 270 करोड़ के 6 वॉटर सप्लाई प्रोजेक्ट रहे। 155.38 करोड़ के 813 कामों का शिलान्यास, 15.25 करोड़ के 70 कामों का लोकार्पण किया गया।

कार्यक्रम में स्वच्छता दीदियों का सम्मान किया गया। नगरीय निकायों में काम करने वाले ऐसे कर्मचारी जिनका निधन हुआ, उनके परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति का आदेश सौंपा गया। 353 नए पद भी मंजूर किए गए हैं।

सफाईकर्मी महिलाओं का सम्मान किया गया। ये डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करती हैं।

सफाईकर्मी महिलाओं का सम्मान किया गया। ये डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करती हैं।

मिशन क्लीन सिटी के तहत क्लीन टायलेट कैंपेन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 14 नगरीय निकायों अंबिकापुर, छुरा, छुरिया, डोंगरगढ़, कोरबा, महासमुंद, रायपुर, राजनांदगांव, बिलासपुर, मंदिर हसौद और चंदखुरी को सम्मानित किया गया। स्वच्छ भारत मिशन में प्रदेशभर के नगरीय निकायों में 9232 स्वच्छता दीदियां काम कर रही हैं। ये रोजाना डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन और उससे जुड़े काम में लगी हुई हैं।

800 रुपए बढ़ा मानदेय

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में स्वच्छता दीदियों का मानदेय प्रतिमाह 800 रुपए बढ़ाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों में स्वच्छता और डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने में स्वच्छता दीदियों का बड़ा योगदान है। इनके लगन और मेहनत से ही स्वच्छता मिशन सफल हो पा रहा है।

9 हजार से ज्यादा स्वच्छता दीदी को 7200 रुपए मानदेय दिया जाता है। इसमें अब 800 रुपए बढ़ाकर 8 हजार रुपए मानदेय किया गया है। दीनदयाल ऑडिटोरियम में हुए इस कार्यक्रम का नाम नगरीय विकास के सोपान कार्यक्रम रखा गया था।

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छत्तीसगढ़

​रायपुर : राष्ट्रीय मंच पर चमकी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर

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72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में रामनामी फिल्म सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री के लिए नामांकित

​रामनामी समुदाय में उत्सव का माहौल, निर्देशक भरतबाला गणपति की कृति ने लोक-संस्कृति को दी अंतरराष्ट्रीय पहचान

​रायपुर। छत्तीसगढ़ के रामनामी समुदाय पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री’ के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस फिल्म का निर्देशन भारतबाला गणपति ने किया है, जो इस समुदाय की अनूठी संस्कृति को राष्ट्रीय पटल पर लेकर आई है।

छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पटल पर मिली नई पहचान

           72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में डॉक्यूमेंट्री फिल्म रामनामी को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म श्रेणी में नामांकित किया गया है। इस उपलब्धि से पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर रामनामी समुदाय में अभूतपूर्व हर्ष और उल्लास का माहौल है। ​प्रसिद्ध निर्देशक भरतबाला गणपति के निर्देशन और उनकी पूरी निर्माण टीम के समर्पण से बनी यह डॉक्यूमेंट्री छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और भगवान श्रीराम की भक्ति विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान दिला रही है।

सादगी, भक्ति और अनूठी परंपरा का सजीव चित्रण

          ​छत्तीसगढ़ के बिलासपुर संभाग विशेषकर सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ति और जांजगीर-चांपा जिलें में बहुतायत में निवास करने वाला रामनामी समाज अपनी अनूठी आध्यात्मिक जीवन शैली के लिए पूरे देश में जाना जाता है। पूरे शरीर पर राम नाम का गोदना (टैटू), सादगीपूर्ण जीवन और भगवान श्रीराम के प्रति अखंड आस्था इस समाज की विशिष्ट पहचान है। यह समाज सदियों से भक्ति, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक संरक्षण की मिसाल पेश करता आ रहा है। डॉक्यूमेंट्री फिल्म रामनामी ने इस समाज के गूढ़ जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक चमत्कार को बेहद प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उकेरा है, जिसने देश-दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

​प्रदेश की सांस्कृतिक अस्मिता को मिला नया आयाम

        ​इस राष्ट्रीय नामांकन से न केवल रामनामी समाज की सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान मिला है, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संरचना और सांस्कृतिक अस्मिता भी राष्ट्रीय मंच पर और अधिक मजबूत होकर उभरी है। राज्य भर के बुद्धिजीवियों और संस्कृति प्रेमियों ने इसे छत्तीसगढ़ की लोक-परंपरा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया है।

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छत्तीसगढ़

बिलासपुर : उप मुख्यमंत्री अरुण साव की घोषणा पर अमल, महामाया गेट के लिए 24.53 लाख स्वीकृत

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बिलासपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने बिलासपुर जिले के तखतपुर नगर पालिका में महामाया गेट के निर्माण के लिए 24 लाख 53 हजार रुपए मंजूर किए हैं। उप मुख्यमंत्री अरुण साव द्वारा की गई घोषणा के अनुपालन में विभाग द्वारा चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट से अधोसंरचना मद से यह राशि स्वीकृत की गई है। उप मुख्यमंत्री श्री साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने संचालनालय से इसकी मंजूरी के आदेश जारी कर दिए हैं। 

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छत्तीसगढ़

तहसीलदार को नहीं है जाति प्रमाण-पत्र जारी करने का अधिकार:हाईकोर्ट बोला- SDM सक्षम अधिकारी, याचिकाकर्ता को दोबारा आवेदन करने दी छूट

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस पीपी साहू ने कहा है कि जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार तहसीलदार को नहीं, बल्कि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी SDM को है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आवश्यक दस्तावेजों के साथ सक्षम अधिकारी के समक्ष नया आवेदन पेश करने को कहा है।

दरअसल, बिलासपुर के राजकिशोर नगर निवासी शैली सोनकर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जाति प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश देने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ही सक्षम प्राधिकारी हैं।

साथ ही यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने सक्षम अधिकारी के समक्ष आवेदन किया था।

याचिकाकर्ता ने कहा- तहसीलदार को दी थी आवेदन

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसीलदार बिलासपुर के पास आवेदन किया था। तहसीलदार ने इस पर मामला दर्ज कर प्रक्रिया शुरू भी की, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी उन्हें जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया।

30 दिन के भीतर सक्षम अधिकारी के पास आवेदन करें याचिकाकर्ता

मामले में दिए गए आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक स्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम, 2013 और राज्य सरकार के 24 सितंबर 2013 के सर्कुलर के तहत जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के पास है।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को छूट दी गई है कि वे 30 दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ सक्षम अधिकारी के पास नया आवेदन जमा कर सकती हैं। आवेदन पेश करने पर सक्षम अधिकारी को नियम और कानून के तहत उस पर जल्द से जल्द विचार कर निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।

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