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छत्तीसगढ़

अवैध कब्जे पर चला बुलडोजर…प्रशासन ने तोड़े 40 मकान:महामाया पहाड़ पर कब्जाधारियों में ज्यादातर झारखंड के मुस्लिम; फोर्स ने बल प्रयोग कर खदेड़ा

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सरगुजा ,एजेंसी। अंबिकापुर में महामाया पहाड़ी की संरक्षित वन भूमि पर करीब 440 लोगों ने अवैध कब्जा कर मकान बना लिया है। सोमवार को प्रशासन की टीम ने करीब 40 घरों को तोड़ दिया। कब्जाधारियों में ज्यादातर झारखंड के मुस्लिम समुदाय के लोग हैं। पहाड़ पर 500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। हालांकि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार दफ्तर से फोन किए जाने के बाद कार्रवाई रोक दी गई है।

महामाया पहाड़ पर अवैध अतिक्रमण हटाने के दौरान सुबह प्रशासनिक और वन अमले की टीम को जमकर विरोध का सामना करना पड़ा। अतिक्रमणकारियों ने कुछ और समय मांगा, लेकिन प्रशासन ने मना कर दिया। हंगामे के बीच पुलिस ने अतिक्रमणकारियों को हल्का बल प्रयोग कर खदेड़ा।

महामाया पहाड़ी पर हंगामे के बीच पुलिस ने हल्का बल प्रयोग भी किया।

महामाया पहाड़ी पर हंगामे के बीच पुलिस ने हल्का बल प्रयोग भी किया।

कार्रवाई रोकने के लिए हाईकोर्ट में याचिका

मामले पर स्टे के लिए हाईकोर्ट बिलासपुर में याचिका लगाई गई है। अर्जेंट हियरिंग की अपील के बाद मामले में सुनवाई का समय दिया गया है। इसके पहले तोड़फोड़ की चल रही कार्रवाई को रोकने के लिए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय से सरगुजा जिला प्रशासन को मौखिक आदेश दिया गया।

इसके बाद कार्रवाई रोक दी गई है। सुबह से चल रही कार्रवाई में करीब 40 घरों को तोड़ दिया गया है।

अब जानिए क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, सरगुजा के सिद्ध शक्तिपीठ महामाया मंदिर से लगे पहाड़ को काटकर लंबे समय से अतिक्रमण किया जा रहा है। इसमें कब्जाधारियों के मकान और बाड़ी बने हैं। 2021 में जिला प्रशासन, वन विभाग के संयुक्त अमले के सर्वे में 440 लोगों का अतिक्रमण पाया था।

15 अक्टूबर 2022 को 60 अतिक्रमणकारियों का कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन राजनीतिक दबाव में यह कार्रवाई रुक गई थी। एक्शन से पहले एक बार फिर 3 दिन की मोहलत देकर 17 जनवरी को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन कब्जा नहीं हटाया गया, जिसके बाद कार्रवाई की गई है।

  • तस्वीरों में देखिए प्रशासन की कार्रवाई…
महामाया पहाड़ी की संरक्षित वन भूमि पर करीब 440 लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है, जिनको प्रशासन हटा रहा है।

महामाया पहाड़ी की संरक्षित वन भूमि पर करीब 440 लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है, जिनको प्रशासन हटा रहा है।

प्रशासनिक और वन अमले की टीम ने अवैध मकानों पर बुलडोजर चला दिया है।

प्रशासनिक और वन अमले की टीम ने अवैध मकानों पर बुलडोजर चला दिया है।

महामाया पहाड़ी पर अब तक 30 अवैध मकान तोड़े जा चुके हैं।

महामाया पहाड़ी पर अब तक 30 अवैध मकान तोड़े जा चुके हैं।

बच्चे आज स्कूल नहीं गए, भूखे-प्यासे पड़े हैं

अतिक्रमणकारी रोशन आरा ने कहा कि घर तोड़ दिया गया है। अब बाल-बच्चे और सामान लेकर कहां जाएंगे। बच्चे आज स्कूल नहीं गए। भूखे-प्यासे पड़े हैं। हमें पीएम आवास योजना से घर दिलाया जाए। 60 घरों पर टार्गेटेड कार्रवाई की गई है। हम लोग दो-तीन दिनों से परेशान हैं।

वहीं अतिक्रमणकारी तस्लीमा परवी ने बताया कि 15-20 साल से यहां रह रहे थे, लेकिन तोड़ दिया गया है। हम गरीब हैं। कहां जाएंगे। समझ नहीं आ रहा है।

रोशन आरा ने कहा कि घर तोड़ दिया गया है। अब बाल-बच्चे और सामान लेकर कहां जाएंगे।

रोशन आरा ने कहा कि घर तोड़ दिया गया है। अब बाल-बच्चे और सामान लेकर कहां जाएंगे।

कांग्रेस नेताओं ने अधिकारियों के सामने दर्ज कराई आपत्ति।

कांग्रेस नेताओं ने अधिकारियों के सामने दर्ज कराई आपत्ति।

कांग्रेस नेता शफी अहमद ने लगाए पक्षपात के आरोप

इस दौरान कांग्रेस नेता शफी अहमद, कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता के साथ कांग्रेस नेता भी पहुंच गए। कांग्रेस नेताओं ने कार्रवाई करने में पक्षपात का आरोप लगाया। साथ ही व्यवस्थापन करने की भी मांग रखी। कब्जाधारियों ने कुछ और मोहलत मांगी, लेकिन प्रशासन ने सिर्फ घर में रखे सामानों को हटाने के लिए कुछ समय दिया।

पहले बताया गया कि, प्रशासनिक अमला आज करीब 60 कब्जाधारियों का अवैध कब्जा तोड़ेगा। वहीं, 182 कब्जाधारियों को कब्जा हटाने का नोटिस जारी किया गया है। दूसरे चरण में बचे अतिक्रमण को तोड़ा जाएगा।

अतिक्रमण के दौरान लोगों ने हटाना शुरू किया सामान।

अतिक्रमण के दौरान लोगों ने हटाना शुरू किया सामान।

बेदखली की कार्रवाई नियमानुसार की जा रही

मामले में सरगुजा डीएफओ टी. शेखर ने कहा कि, वनभूमि से बेदखली की कार्रवाई नियमानुसार पारदर्शिता के साथ की जा रही है। रेंजर निखिल पैकरा ने बताया कि यह वन भूमि है। नोटिस दिया गया था कि अतिक्रमण खाली कर दें।

आज अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। कुछ का विवाद है तो उसका निराकरण कर रहे हैं। अतिक्रमण हटाने में वन विभाग, राजस्व औक पुलिस का अमला लगा है।

रेंजर निखिल पैकरा ने बताया कि यह वन भूमि है। नोटिस देने के बाद कार्रवाई की गई है।

रेंजर निखिल पैकरा ने बताया कि यह वन भूमि है। नोटिस देने के बाद कार्रवाई की गई है।

मुस्लिम समुदाय के लोगों का ज्यादातर अवैध कब्जा

महामाया पहाड़ पर अवैध कब्जा बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। यहां झारखंड से आए मुस्लिम समुदाय के लोगों का ज्यादातर अवैध कब्जा है। इनमें से बड़ी संख्या में लोगों ने नोटिस मिलने के बाद दूसरी जगहों पर घर बना लिया है, जो बचे हैं, वे गरीब तबके के हैं।

बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने बेजा कब्जा में बने मकानों को दूसरों को भी बेच दिया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने सभी अतिक्रमण को हटाने 5 दिन पहले के सख्त निर्देश दिए थे, जिसके बाद कार्रवाई की गई है।

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कोरबा

प्रशिक्षु आईएएस क्षितिज गुरभेले को दी गई भावपूर्ण विदाई, एक वर्ष की प्रशिक्षण अवधि पूर्ण

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कोरबा। जिले में एक वर्ष की प्रशिक्षण अवधि सफलतापूर्वक पूर्ण करने के पश्चात प्रशिक्षु आईएएस क्षितिज गुरभेले को आज भावपूर्ण विदाई दी गई। इस अवसर पर उन्हें प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि विभिन्न विभागों के साथ कार्य करते हुए गुरभेले ने एक प्रशिक्षु अधिकारी के रूप में शासकीय कार्यप्रणाली को गहराई से समझा और सीखा है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के कार्यों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने से भविष्य में प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन में उन्हें सहजता होगी। कोरबा जैसे जिले में कार्य करना और यहां की व्यवस्थाओं को समझना उनके आगामी प्रशासनिक जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। कलेक्टर ने इस अवसर पर उन्हें सिविल सेवा दिवस की भी शुभकामनाएं दीं।

प्रशिक्षु आईएएस क्षितिज गुरभेले ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक वर्ष की प्रशिक्षण अवधि उनके लिए अत्यंत शिक्षाप्रद रही। उन्होंने बताया कि आईएएस बनने से पहले उनकी सोच एक सामान्य नागरिक की तरह थी, लेकिन प्रशासन का हिस्सा बनने के बाद उनकी दृष्टि और समझ में व्यापक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि किसी पद पर आने के साथ नई जिम्मेदारियां और दायित्व भी जुड़ते हैं, जिनका निर्वहन गंभीरता से करना होता है। राजस्व सहित विभिन्न विभागों में कार्य करते हुए और बैठकों में सहभागिता के माध्यम से उन्हें बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशिक्षण केवल एक अवधि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है जो आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कलेक्टर सहित सभी वरिष्ठ अधिकारियों से प्राप्त मार्गदर्शन को अपने भविष्य के कार्यों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग एवं एसडीएम कटघोरा तन्मय खन्ना ने गुरभेले के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अपर कलेक्टर ओंकार यादव ने उनके कार्यशैली की सराहना करते हुए उन्हें गंभीर, शांत और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी बताया।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी गुरभेले के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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कोरबा

जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के कलेक्टर ने दिए निर्देश

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सुशासन तिहार में ग्रामीण क्षेत्रों में लगेंगे शिविर

ग्रामीण युवाओं को मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना से रोजगारमूलक प्रशिक्षण प्रदान करने के दिए निर्देश

समय सीमा की बैठक

कोरबा। छत्तीसगढ़ शासन इस वर्ष “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन व्यापक स्तर पर कर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर अभियान के प्रभावी संचालन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध, पारदर्शी और त्वरित निराकरण सुशासन की नींव है तथा शासन की प्राथमिकता है कि प्रत्येक नागरिक को सरल और सुलभ सेवाएं उपलब्ध हों। पिछले वर्ष आयोजित सुशासन तिहार के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए इस वर्ष इसे और अधिक विस्तृत स्वरूप में लागू किया जा रहा है।

समय सीमा की बैठक में कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि अभियान के तहत 1 मई से 10 जून 2026 तक जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जन समस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में 10 से 15 ग्राम पंचायतों के समूहों के आधार पर तथा शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर के अनुसार शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में आम नागरिकों की समस्याओं का निराकरण करने के साथ-साथ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर जन-जागरूकता भी बढ़ाई जाएगी। कलेक्टर ने निर्देश दिया है कि पात्र हितग्राहियों को यथास्थान योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाए तथा शिविरों में प्राप्त सभी आवेदनों का निराकरण अधिकतम एक माह के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए। प्रत्येक आवेदक को उसके आवेदन की अद्यतन स्थिति से अवगत कराने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री, मंत्रीगण, सांसद, विधायक, मुख्य सचिव एवं प्रभारी सचिव समय-समय पर शिविरों का निरीक्षण करेंगे और आमजन से सीधा संवाद स्थापित करेंगे। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही और अधिक मजबूत होगी।
कलेक्टर ने विभिन्न विभागों को निर्देशित करते हुए कहा कि राजस्व संबंधी सभी लंबित प्रकरणों, जैसे सीमांकन, फौती, नामांतरण आदि का 30 अप्रैल तक पूर्ण निराकरण किया जाए। मनरेगा की लंबित मजदूरी भुगतान, खराब बिजली ट्रांसफार्मरों के बदलीकरण, हैंडपंपों की मरम्मत, पेंशन तथा राशन कार्ड से संबंधित समस्याओं का त्वरित समाधान करने को भी कहा गया है। इसके साथ ही सभी हितग्राही मूलक योजनाओं के पात्रता चयन, सामग्री वितरण और ग्रामवार जानकारी संकलन की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। जनसमस्याओं के तत्पर समाधान के लिए जिला पंचायत सीईओ को एक कंट्रोल रूम स्थापित करने को भी कहा गया है। सुशासन तिहार अवधि में शासकीय कर्मचारियों के अनावश्यक अवकाश पर रोक रहेगी तथा ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। शासन की योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी विशेष बल दिया गया है।
समय-सीमा बैठक में कलेक्टर ने जनपद सीईओ से बेसलाइन सर्वे और ग्राम विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी विभागों को निर्माण पोर्टल में मांगी गई जानकारी फ़ोटो सहित एक सप्ताह के भीतर अपलोड करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत पूर्ण हो चुके आवासों में हितग्राहियों का गृह प्रवेश जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में आयोजित कराने को कहा गया है। महतारी वंदन योजना के ई-केवाईसी सत्यापन के लिए अधिकृत सीएससी केंद्रों और आंगनबाड़ी केंद्रों में निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही जनगणना 2027 के लिए सभी अधिकारियों को स्वगणना फार्म ऑनलाइन भरने के लिए कहा गया है। पीडीएस व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उन्होंने माह के अंत तक सभी सोसायटियों में मई माह के खाद्यान्न का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने निर्देश दिए।
कौशल विकास पर विशेष ध्यान देते हुए कलेक्टर ने मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर बल दिया। उन्होंने लाइवलीहुड कॉलेज में प्रशिक्षण के दौरान दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं के लिए भोजन और आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। ग्रामीण युवाओं के चयन हेतु राष्ट्रीय आजीविका मिशन और महिला स्व-सहायता समूहों की सहायता लेने को कहा गया। 24 अप्रैल को आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं में कौशल प्रशिक्षण संबंधी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने तथा रोजगार अधिकारी और एसडीएम को समन्वय स्थापित कर इच्छुक युवाओं को प्रशिक्षण के लिए प्रेरित करने के निर्देश भी प्रदान किए गए।
बैठक में कलेक्टर ने “ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान” की समीक्षा, 275(क) के तहत जानकारी प्रेषित करने, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्यघर योजना सहित समय-सीमा के लंबित प्रकरणों पर प्रगति लाते हुए शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने पीएमओ, मुख्यमंत्री जनदर्शन, मानवाधिकार आयोग, कलेक्टर जनदर्शन सहित अन्य महत्वपूर्ण लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निराकृत करने के निर्देश दिए।

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छत्तीसगढ़

भूपेश बोले- कौशल्या भाभी को सीएम बना दीजिए:महिला आरक्षण बिल पर छत्तीसगढ़ सरकार बुलाएगी विशेष सत्र, विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी

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रायपुर,एजेंसी। महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि विष्णु जी, अगर आपको तकलीफ है तो कौशल्या भाभी को मुख्यमंत्री बना दीजिए। बघेल ने आरोप लगाया कि जनसंघ, RSS, विहिप और भाजपा ने कभी महिलाओं को शीर्ष नेतृत्व में मौका नहीं दिया।

महिलाओं को आरक्षण देने की पहल सबसे पहले राजीव गांधी ने की थी, लेकिन भाजपा ने उस समय अड़ंगा लगाया, नहीं तो 1989 में ही यह कानून पास हो जाता। पंचायत राज व्यवस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में इसे लागू किया गया, जिसके बाद 1995 में पहला चुनाव हुआ।

इससे लाखों महिलाएं राजनीति में आईं और आज बड़ी संख्या में महिलाएं नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण की समर्थक रही है। भूपेश ने ये बातें अपने घर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही हैं।

बता दें कि लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरने पर भाजपा ने आक्रोश रैली निकाली थी। साय सरकार एक दिन का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है, जो इसी महीने आयोजित हो सकता है। सीएम साय के मुताबिक विपक्ष के रुख के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा।

विशेष सत्र बुलाने की प्रक्रिया में पहले मुख्यमंत्री और कैबिनेट सत्र आयोजित करने का निर्णय लेते हैं। इसके बाद प्रस्ताव को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाता है, और उनकी स्वीकृति के बाद ही सत्र बुलाया जाता है।

आक्रोश रैली निकलने से पहले सीएम विष्णुदेव साय ने सभा को संबोधित किया था।

आक्रोश रैली निकलने से पहले सीएम विष्णुदेव साय ने सभा को संबोधित किया था।

‘नारी शक्ति जाग गई’ के नारों के साथ स्टेडियम से निकली आक्रोश रैली।

‘नारी शक्ति जाग गई’ के नारों के साथ स्टेडियम से निकली आक्रोश रैली।

हाथों में तख्ती-पोस्टर लेकर सड़कों पर उतरीं महिलाएं।

हाथों में तख्ती-पोस्टर लेकर सड़कों पर उतरीं महिलाएं।

प्रदर्शन से पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी।

प्रदर्शन से पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी।

27 अप्रैल तक चलेगा प्रदर्शन

नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में पास नहीं होने के बाद बीजेपी अब कांग्रेस के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन करने की रणनीति बनाई है। इसी कड़ी में लगातार छत्तीसगढ़ में भी विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन की शुरूआत सोमवार 20 अप्रैल से हो गई।

  • 23 और 24 अप्रैल को प्रदेशभर में जन आक्रोश महिला सम्मेलन रखे जाएंगे।
  • 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर पुतला दहन किया जाएगा।

कांग्रेस फूट डालो और राज करो की नीति अपनाती है- साय

19 अप्रैल को रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीएम साय ने कहा था कि, वे बहुत दुखी मन से मीडिया के बीच आए हैं। 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण विपक्ष के रवैये की वजह से नहीं मिल पाया। इंडी गठबंधन ने 70 करोड़ महिला शक्ति की उम्मीदों पर पानी फेरने का काम किया है।

छत्तीसगढ़ में पंचायती राज में महिलाओं का आरक्षण 57 प्रतिशत है और विधानसभा में भी 21-22 प्रतिशत नारी शक्ति है। इंडी गठबंधन के लोग अंग्रेजों की तरह “फूट डालो और राज करो” की नीति अपनाते हैं और समाजवादी पार्टी जैसी पार्टी धर्म के नाम पर आरक्षण की बात कहकर लोगों को बरगलाती है।

उन्होंने कहा कि, आने वाले वक्त में इंडी गठबंधन को इसका खामियाजा भुगतना होगा। कांग्रेस और इंडी गठबंधन का वास्तविक चेहरा सामने आ चुका है और देश की माता-बहनें सच्चाई जान चुकी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि देश की महिलाओं की उम्मीदों पर पानी नहीं फिरने दिया जाएगा।

पीएम मोदी ने शनिवार शाम देश को सम्बोधित करते हुए बिल पास नहीं होने पर महिलाओं से माफी मांगी।

पीएम मोदी ने शनिवार शाम देश को सम्बोधित करते हुए बिल पास नहीं होने पर महिलाओं से माफी मांगी।

लोकसभा में पास नहीं हो सका महिला आरक्षण बिल

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) बिल पास नहीं हो सका। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। इसे पारित करने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी। इस बिल में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान शामिल था।

PM मोदी ने माफी मांगी, विपक्ष पर साधा निशाना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार शाम देश को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाने पर माताओं-बहनों से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि इस बिल में संशोधन नहीं हो पाया और इसके लिए वे क्षमा चाहते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके लिए देशहित सर्वोपरि है, लेकिन कुछ दलों के लिए दलहित देशहित से बड़ा हो गया, जिसका नुकसान नारी शक्ति को उठाना पड़ा। उन्होंने कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी जैसे दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि इनकी राजनीति के कारण महिलाओं के अधिकारों को झटका लगा है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण प्रस्ताव गिरने के बाद विपक्षी दलों द्वारा खुशी जताई गई, जबकि देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर थी। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति अपने अपमान को नहीं भूलती और इस पूरे घटनाक्रम को देश की महिलाएं याद रखेंगी।

विशेष सत्र में लाया गया था प्रस्ताव

महिला आरक्षण से जुड़े इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए केंद्र सरकार ने संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया था। मतदान के दौरान आवश्यक बहुमत नहीं मिलने के कारण यह बिल पारित नहीं हो सका।

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