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विश्व युद्ध से रहा है बीकानेर के एयरबेस का नाता:कच्चे रनवे से फाइटर जेट भरते थे उड़ान, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार आ रहे PM

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जयपुर,एजेंसी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद गुरुवार (आज) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार राजस्थान आएंगे। बीकानेर स्थित नाल एयरफोर्स स्टेशन पर वायुसेना के जवानों से मुलाकात करेंगे।

हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में पाकिस्तान ने नाल एयरफोर्स स्टेशन को भी निशाना बनाया था। भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए उसके सभी हमलों को नाकाम कर दिया था। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नाल एयरबेस का प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध से भी नाता रहा है।

इंडियन एयरफोर्स को यह एयरबेस 1950 में मिला था। आजादी से पहले यहां की कच्ची हवाई पट्टी से ब्रिटिश सेना के फाइटर जेट उड़ा करते थे। आज पाकिस्तान के 6 बड़े शहर नाल एयरबेस की रेंज में आते हैं। पढ़िए यह रिपोर्ट….

नाल पर विफल हुआ था दुश्मन का हमला

बीकानेर जिले की 168 किलोमीटर लंबी सीमा इंटरनेशनल बॉर्डर पर पाकिस्तान से लगती है। इसकी वजह से बीकानेर शहर से महज 15 किलोमीटर और पाकिस्तान बॉर्डर से करीब 150 किलोमीटर दूर नाल एयरबेस सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

नाल एयरबेस स्टेशन पर वायुसेना के जंगी जहाज सीमा क्षेत्र की रक्षा करते हैं।

नाल एयरबेस स्टेशन पर वायुसेना के जंगी जहाज सीमा क्षेत्र की रक्षा करते हैं।

हाल ही में भारत-पाकिस्तान के बीच जब तनाव बढ़ा तो पाकिस्तान ने 7 व 8 मई 2025 को भारत के 15 एयरबेस स्टेशन पर ड्रोन व मिसाइल से हमला बोला था। उनमें फलोदी, बाड़मेर स्थित उत्तरलाई एयरबेस, बीकानेर का नाल एयरबेस शामिल था। पाकिस्तान के इस हमले का भारतीय वायुसेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया था।

पाकिस्तान की सीमा के बेहद नजदीक होने के कारण इस एयरफोर्स स्टेशन पर दुश्मन देश की पैनी निगाह रहती है। नाल एयरबेस में वायुसेना के पायलटों और अन्य कर्मियों को ट्रेनिंग देने के साथ-साथ कई प्रकार के सैन्य ऑपरेशन भी किए जाते हैं।

दोनों विश्व युद्ध से भी नाल एयरबेस का नाता

नाल एयरबेस की महत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रथम व द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भी यहां बनी स्ट्रिप पर जंगी विमान उतारे गए थे। आजादी से पहले बीकानेर स्टेट ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना की यहां से मदद की थी। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना ने इस रनवे का उपयोग किया था। बाद में ब्रिटिश सेना ने इस एयरस्ट्रिप को पूर्व बीकानेर राजपरिवार के सुपुर्द कर दिया था।

पूर्व बीकानेर रियासत के समय यहां कच्ची एयरस्ट्रिप तैयार की गई थी, जहां फ्लाइंग क्लब के जरिए रॉयल फैमिली के सदस्यों को पायलट बनने की ट्रेनिंग दी जाती थी।

पूर्व बीकानेर रियासत के समय यहां कच्ची एयरस्ट्रिप तैयार की गई थी, जहां फ्लाइंग क्लब के जरिए रॉयल फैमिली के सदस्यों को पायलट बनने की ट्रेनिंग दी जाती थी।

पूर्व बीकानेर रियासत के महाराजा गंगासिंह ने नाल में वर्ष 1942 में खुद का एक नया कच्चा रनवे बनाया था। भविष्य में एयरफोर्स की जरूरतों को देखते हुए यहां पर फ्लाइंग क्लब की स्थापना की थी। इस फ्लाइंग क्लब में बीकानेर राजघराने से जुड़े सदस्यों को ब्रिटिश एयरफोर्स के अफसर विमान उड़ाने का अभ्यास करवाते थे। पूर्व राजपरिवार ने साल 1942 से लेकर 1950 के बीच यहां फ्लाइंग क्लब चलाया।

उस दौर में सिंगल इंजन वाले विदेशी हवाई जहाज उपयोग में लिए जाते थे। उनमें से एक हेरिटेज विमान डीएच-9 बीकानेर के जूनागढ़ फोर्ट के म्यूजियम में रखा हुआ है। इसे पर्यटक देखकर इतिहास की यादें ताजा करते हैं।

1920 में ब्रिटेन ने भारत को ‘इंपीरियल गिफ्ट स्कीम’ के तहत 60 डीएच-9 विमान दिए थे। ये विमान ब्रिटेन ने अपने उपनिवेश देशों को खुद की वायुसेना तैयार करने के लिए दिए थे, ताकि जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल किया जा सके। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि बीकानेर में कितने डीएच-9 विमान आए थे।

बीकानेर के जूनागढ़ फोर्ट के म्यूजियम में रखा DH-9DE विमान कभी ब्रिटिश एयरफोर्स का हिस्सा हुआ करता था।

बीकानेर के जूनागढ़ फोर्ट के म्यूजियम में रखा DH-9DE विमान कभी ब्रिटिश एयरफोर्स का हिस्सा हुआ करता था।

आजादी के बाद भारतीय वायुसेना के सुपुर्द किया

आजादी के बाद राजस्थान राज्य का गठन होने पर 1950 में यह एयरस्ट्रिप भारतीय वायुसेना के सुपुर्द कर दी गई थी। करीब 13 साल की लंबी प्लानिंग के बाद साल 1963 में वायुसेना ने कच्चा रनवे हटाकर खुद का रनवे तैयार किया। बॉर्डर से लगे होने के कारण वायुसेना ने यहां पर अपना एयरबेस स्टेशन स्थापित किया। फिर फाइटर जेट की स्क्वॉड्रन तैनात की।

तब इसका नाम 9 केयर एंड मेंटेनेंस यूनिट्स (C & MU) रखा। जुलाई 1972 में, नाम बदलकर नंबर 3 फॉरवर्ड बेस सपोर्ट यूनिट्स कर दिया गया। करीब 17 साल बाद, 17 अप्रैल 1989 को इस हवाई क्षेत्र का नाम 46 विंग रखा गया।

फरवरी 2024 में नाल एयरबेस से भारतीय वायुसेना की सूर्य किरण एयरोबेटिक टीम ने एयर शो के जरिए बहादुरी का परिचय दिया था।

फरवरी 2024 में नाल एयरबेस से भारतीय वायुसेना की सूर्य किरण एयरोबेटिक टीम ने एयर शो के जरिए बहादुरी का परिचय दिया था।

पाकिस्तान के 6 बड़े शहर नाल एयरबेस की रेंज में

नाल एयरबेस से पाकिस्तान सीमा करीब 150 किलोमीटर दूर है। यह सामरिक लिहाज से इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि दुश्मन देश के 6 बड़े शहर इसकी रेंज में आते हैं। जैसे- मुल्तान 294 किमी, लाहौर 402 किमी, इस्लामाबाद 630 किमी, पेशावर 687 किमी, मुजफ्फराबाद 704 किमी और कराची 719 किमी की रेंज में हैं।

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खेल

BCCI टीम इंडिया को ₹131 करोड़ देगा:यह पैसा खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ में बंटेगा, भारत तीसरी बार टी-20 वर्ल्ड कप चैंपियन

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मुंबई, एजेंसी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने पर टीम इंडिया के लिए 131 करोड़ रुपए के इनाम का ऐलान किया है। यह पैसा खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ में बंटेगा।

भारत ने रविवार को टी-20 वर्ल्ड चैंपियन का खिताब अपने नाम किया था। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 96 रन से हराया और ट्रॉफी जीती थी। इसके साथ ही टीम इंडिया ने अपना खिताब बरकरार रखा और टी-20 वर्ल्ड कप के इतिहास में लगातार दो बार ट्रॉफी जीतने वाली पहली टीम बन गई।

BCCI ने खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ और सिलेक्टर्स को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी है। बोर्ड ने उम्मीद जताई कि टीम भविष्य में भी इसी तरह शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करती रहेगी।

भारतीय टीम को 27.5 करोड़ प्राइज मनी मिली

रिपोर्ट के मुताबिक, टी-20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने के बाद भारतीय टीम को 3 मिलियन डॉलर (करीब 27.5 करोड़ रुपए) की इनामी राशि मिली।

वहीं, रनर-अप न्यूजीलैंड को 1.6 मिलियन डॉलर (करीब 14.7 करोड़ रुपए) दिए गए। हालांकि, इस बार ICC ने प्राइज मनी की आधिकारिक घोषणा नहीं की थी, जबकि आमतौर पर हर टूर्नामेंट में इसकी जानकारी पहले ही दे दी जाती है।

भारत 3 टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाला पहला देश

भारतीय टीम 2024 के बाद 2026 में भी चैंपियन बनी और टी-20 वर्ल्ड कप का खिताब डिफेंड करने वाली पहली टीम बन गई। इसके साथ ही इंडिया तीन टी-20 वर्ल्ड कप (2007, 2024 और 2026) जीतने वाली दुनिया की पहली टीम भी बन गया।

अहमदाबाद में खेले गए फाइनल में जीत के साथ भारत ने पहली बार अपने घरेलू मैदान पर टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी भी जीती। इससे पहले टीम ने 2007 में साउथ अफ्रीका और 2024 में वेस्टइंडीज में खिताब जीता था।

अब भारत के नाम तीन टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी हो गई हैं, जबकि वेस्टइंडीज और इंग्लैंड दो-दो बार ही यह खिताब जीत सके हैं।

सूर्या ने गांधीनगर में 500 साल पुरानी बावड़ी में फोटोशूट किया

टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद टीम इंडिया के खिलाड़ियों के जश्न के अलग-अलग अंदाज देखने को मिले। कप्तान सूर्यकुमार यादव गुजरात के गांधीनगर स्थित 500 साल पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी अडालज नी वाव में ट्रॉफी के साथ फोटोशूट करते नजर आए।

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देश

ईरान जंग से सेंसेक्स 1353 अंक गिरकर 77,566 पर बंद:रुपया 92.33 के ऑलटाइम लो पर पहुंचा, कच्चा तेल 10 दिन में 50% चढ़ा

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मुंबई,एजेंसी। अमेरिका-इजराइल और ईरान के कारण शेयर बाजार में आज यानी 9 मार्च को बड़ी गिरावट रही। सेंसेक्स 1353 अंक (1.71%) नीचे 77,566 के स्तर पर बंद हुआ।

वहीं निफ्टी में भी 422 अंक (1.73%) की गिरावट रही, ये 24,028 पर बंद हुआ। आज बैंक, ऑटो, मेटल, एनर्जी और FMCG शेयरों में ज्यादा बिकवाली रही।

जियोपॉलिटिकल तनाव और जंग जैसी स्थिति में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इससे कंपनियों का मुनाफा कम हो सकता है। ऐसे में निवेशक अपने शेयर बेचना शुरू कर देते हैं और सुरक्षित जगह निवेश करते हैं। इससे बाजार में गिरावट आती है।

बाजार गिरने की 3 मुख्य वजहें

  1. ईरान-इजराइल युद्ध से सप्लाई चेन बिगड़ने का डर।
  2. कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल और महंगाई बढ़ेगी।
  3. अमेरिका और एशियाई बाजारों में गिरावट का असर भारत पर।

निवेशकों की वेल्थ ₹22 लाख करोड़ से ज्यादा घटी

ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग से निवेशकों की वेल्थ 22 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा घट गई है। जंग शुरू होने से पहले यानी 27 फरवरी को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹4.63 लाख करोड़ था। लेकिन युद्ध की वजह से बाजार में भारी बिकवाली के कारण 9 मार्च तक यह घटकर ₹4.41 लाख करोड़ पर आ गया है।

कच्चा तेल 10 दिन में 50% चढ़ा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम साढ़े तीन साल के हाई पर पहुंच गए। आज यानी 9 मार्च को कारोबार के दौरान ये 25% बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।

हालांकि बाद में ये थोड़ा नीचे आया और ये अब 105 डॉलर के करीब है। 10 दिन में ये करीब 50% चढ़ा है। इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन जंग से कच्चा तेल 100 डॉलर के पार निकला था।

जानकारों का मानना है कि तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल पर दिख सकता है। ये 5 से 6 रुपए लीटर तक महंगा हो सकता है। हालांकि भारत सरकार का कहना है कि हमारे पास पर्याप्त तेल है।

डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल टाइम लो पर

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 46 पैसे कमजोर होकर 92.33 के स्तर पर पहुंच गया है। यह रुपए का अब तक का सबसे निचला स्तर है। मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी की वजह से रुपए में यह कमजोरी आई है।

चांदी 2000 हजार और सोना 800 रुपए महंगा

सोने और चांदी के दामों में आज यानी 9 मार्च को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 800 रुपए बढ़कर 1.60 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं एक किलो चांदी 2000 रुपए बढ़कर 2.63 लाख रुपए पर पहुंच गई है।

एशियाई बाजारों में गिरावट रही

  • साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 5.96% गिरकर 5,251 पर बंद हुआ।
  • जापान का निक्केई 2,892 अंक या 5.20% गिरकर 52,728 पर बंद हुआ।
  • हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 348 अंक या 1.35% गिरकर 25,408 पर बंद हुआ।
  • चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 27 अंक या 0.67% नीचे 4,096 पर बंद हुआ।

अमेरिकी बाजार में 6 मार्च को गिरावट रही

  • डाउ जोन्स 453 अंक (0.95%) गिरकर 47,501 के स्तर पर बंद हुआ।
  • टेक बेस्ड इंडेक्स नैस्डैक कंपोजिट 1.59% गिरकर 22,387 पर बंद हुआ।
  • S&P 500 इंडेक्स 90 अंक (1.33%) गिरकर 6,740 पर बंद हुआ।

शुक्रवार को सेंसेक्स 1097 पॉइंट गिरकर बंद हुआ था

इससे पहले शुक्रवार यानी 6 मार्च को सेंसेक्स 1097 अंक (1.37%) गिरकर 78,919 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 315 अंक (1.27%) की गिरावट रही थी। ये 24,450 पर आ गया।

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देश

ईरान जंग पर विपक्ष का दोनों सदनों में हंगामा:चर्चा की मांग, सरकार बोली- स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर बहस के लिए तैयार

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नई दिल्ली,एजेंसी। संसद के बजट सत्र के दूसरे फेज के पहले दिन की लोकसभा की कार्यवाही खत्म हुई। विपक्ष ने अमेरिकी-इजराइल और ईरान जंग पर जमकर हंगामा किया। विपक्ष जंग के बाद पश्चिम एशिया में बने हालातों का भारत पर असर पर चर्चा की मांग करता रहा।

सरकार ने कहा कि विपक्ष स्पीकर ओम बिड़ला के खिलाफ नो कॉन्फिडेंस मोशन लाई है, हम इस पर चर्चा करने पर तैयार हैं, विपक्ष चर्चा करे, लेकिन विपक्ष दूसरा मोशन ले आया है, जिसका विदेश मंत्री ने बहुत अच्छे से जबाव दिया है। इसके बाद सदन मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित किया गया।

वहीं, आज विदेश मंत्री ने पहले राज्यसभा में और फिर लोकसभा में गल्फ देशों से भारतीयों की वापसी और एनर्जी संकट को लेकर तैयारियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा- इस समय ईरान की लीडरशिप से कॉन्टैक्ट मुश्किल है, लेकिन भारत शांति और बातचीत के पक्ष में है।

राज्यसभा में जब जयशंकर संबोधन दे रहे थे तब विपक्ष ने राज्यसभा का वॉक आउट किया। लोकसभा में उनके संबोधन के दौरान विपक्ष ने वी वॉन्ट डिस्कशन के नारे लगाए, खबू हंगामा किया। चेयर के बार-बार बोलने पर भी विपक्षी सांसद शांत नहीं हुए थे। राज्यसभा की कार्यवाही अभी जारी है।

विदेश मंत्री ने कहा- 67,000 नागरिक इंटरनेशनल बॉर्डर पार कर चुके, 5 बड़ी बातें

  • मौजूदा संघर्ष भारत के लिए भी चिंता की बात है। हम पड़ोसी हैं, और वेस्ट एशिया में स्थिरता बनाए रखना हमारी भी जिम्मेदारी है। खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं।
  • ईरान में भी, कुछ हजार भारतीय पढ़ाई या नौकरी के लिए हैं। यह इलाका हमारी एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बहुत जरूरी है और इसमें तेल और गैस के कई जरूरी सप्लायर शामिल हैं। सप्लाई चेन में रुकावटें और अस्थिरता गंभीर मुद्दे हैं।
  • हमने दो भारतीय नाविकों (मर्चेंट शिपिंग) को खो दिया है, और एक अभी भी लापता है। मुंबई के शिपिंग डायरेक्टरेट जनरल ने 14 जनवरी को भारतीय नाविकों से कहा था कि वे एम्बेसी की एडवाइजरी मानें और किनारे पर बेवजह आने-जाने से बचें।
  • वेस्ट एशिया से हमारे लोगों को वापस लाने की पूरी कोशिश की जा रही है। 8 मार्च तक हमारे लगभग 67,000 नागरिक इंटरनेशनल बॉर्डर पार कर चुके हैं। संबंधित मंत्रालय जवाब देने के लिए कोऑर्डिनेट कर रहे हैं। लड़ाई लगातार बढ़ रही है। इलाके में सुरक्षा की स्थिति काफी खराब हो गई है। असल में, लड़ाई दूसरे देशों में भी फैल गई है। इससे तबाही और मौतें बढ़ रही हैं।
  • इजराइल-यूएस और ईरान के बीच लड़ाई जारी है, बल्कि कुछ खाड़ी देशों पर हमले भी हुए हैं। ईरान में लीडरशिप लेवल पर कई लोग मारे गए हैं, साथ ही इस इलाके में इंफ्रास्ट्रक्चर भी तबाह हुआ है।
  • इस समय लीडरशिप लेवल पर ईरान के साथ कॉन्टैक्ट करना साफ तौर पर मुश्किल है। ईरान के विदेश मंत्री ने ईरानी वॉरशिप लावन को कोच्चि पोर्ट पर डॉक करने की इजाजत देने के भारत का शुक्रिया अदा किया है।

राहुल बोले- पश्चिम एशिया के युद्ध से हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा- पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध हमारी अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है, लेकिन हमारे कॉम्प्रोमाइज्ड प्रधानमंत्री में इस पर चर्चा करने का साहस नहीं है। शेयर बाजार गिर रहा है, LPG की कीमतें बढ़ रही हैं और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच रही हैं। इसका सीधा असर आम आदमी, घरेलू बजट और छोटे व मध्यम व्यवसायों पर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी को ब्लैकमेल किया जा रहा है। उनके पास भारतीय जनता के हितों को बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। मेरी बात याद रखिए, वे संसद में नहीं आएंगे।

गिरिराज सिंह बोले- विपक्ष से ऐसी उम्मीद नहीं थी

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा- विपक्ष से सदन में इस तरह के व्यवहार की उम्मीद कभी नहीं थी। सदन को चलने नहीं देना जनता के अधिकारों को छीनने जैसा है। आप ‘अबोध बालक’ हैं और आप ऐसे ही रह सकते हैं। सदन में प्लेकार्ड दिखाने का मतलब है कि आपको जवाब नहीं चाहिए, बल्कि आप सिर्फ हंगामा करना चाहते हैं।

गोयल बोले- कांग्रेस बहस से भाग रही

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा- यह बहुत बुरा है कि कांग्रेस बहस से भाग रही है। स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन के लिए कांग्रेस के कहने पर एक नोटिस एडमिट किया गया था, जिसे उन्होंने ठीक से ड्राफ्ट भी नहीं किया था। इसे ठीक किया गया और फिर एडमिट किया गया। आज की तारीख डिस्कशन के लिए सोच-विचार के बाद तय की गई थी। जब एक मोशन एडमिट हो गया और यह तय हो गया कि आज इस पर डिबेट होगी, तो वे उसी समय दूसरा मोशन ले आए।

गोयल ने कहा कि कांग्रेस को पार्लियामेंट्री प्रोसेस या प्रोसीजर समझ नहीं आता, न ही वे कॉन्स्टिट्यूशन की रिस्पेक्ट करते हैं। जब से राहुल गांधी लीडर ऑफ अपोजिशन बने हैं, उन्होंने डिबेट में हिस्सा लेने की कोई इच्छा नहीं दिखाई है। उन्होंने पहले ही मुद्दों की एक लिस्ट बना ली है, प्लेकार्ड लाए हैं, हाउस को डिस्टर्ब किया है और बेबुनियाद मामलों पर पार्लियामेंट का समय बर्बाद किया है।

उन्होंने कहा कि जिस दिन इतने जरूरी मुद्दे पर डिस्कशन होना था, विपक्ष ने डिबेट से भागने का फैसला किया, क्योंकि वे साफ तौर पर जानते हैं कि स्पीकर को पूरे हाउस का कॉन्फिडेंस है। यहां तक ​​कि उनके अपने अलायंस के मेंबर भी इस डिबेट से बच रहे हैं।

I.N.D.Iअलायंस के अंदर अफरा-तफरी है और कोई भी कांग्रेस को सपोर्ट करने को तैयार नहीं है। इसीलिए वे एक और मोशन लाकर आज की बहस से भागने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी विपक्ष के एक फेल लीडर हैं। उन्हें संविधान या नैतिकता की समझ नहीं है। उन्हें पार्लियामेंट्री प्रोसेस, प्रोसीजर या रूल बुक में कोई दिलचस्पी नहीं है। जिस तरह से वे काम करते हैं, उससे साफ पता चलता है कि कांग्रेस एक दिशाहीन और पूरी तरह से फेल विपक्षी पार्टी है।

जोशी बोले- विपक्ष चर्चा की मांग करता है, फिर हंगामा करता है

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन पर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा- आज की काम की लिस्ट में साफ लिखा है कि हम इस पर चर्चा करेंगे। विपक्ष को प्रस्ताव लाना है। क्या प्रोसेस है? जब प्रस्ताव लाया जाता है, तो उसके सपोर्ट में 50 लोग खड़े होने चाहिए, आज जब चेयर पर बैठे जगदंबिका पाल ने बार-बार कहा कि अगर आप प्रस्ताव लाना चाहते हैं, तो मैं चर्चा की इजाजत देता हूं। जब स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन एजेंडा में है, तो आप बीच में दूसरा प्रस्ताव, दूसरा एडजर्नमेंट मोशन कैसे ला सकते हैं? कोई नियम है या नहीं? क्या कोई संविधान नहीं है? अगर हमें राहुल गांधी के कहे अनुसार सदन चलाना है, तो नियम क्यों होना चाहिए? यह कैसी थ्योरी है कि ये लोग पहले मांग करते हैं और बाद में रुकावट डालते हैं? जब मैं पार्लियामेंट अफेयर्स मिनिस्टर था तो ऐसा कई बार होता था, उनका मानना ​​है कि वे जो कहते हैं वही नियम है। जिस भी चीज पर चर्चा होनी है, वह पहले BAC में तय होनी चाहिए।

शांभवी चौधरी बोलीं- विपक्ष चर्चा को तैयार नहीं है

LJP सांसद शांभवी चौधरी ने कहा- जिस जियोपॉलिटिकल सिचुएशन पर विदेश मंत्री पहले ही बयान दे चुके थे, उस पर हंगामा करना विपक्ष का गैर-जिम्मेदाराना बर्ताव दिखाता है। वे उसी मुद्दे पर उनका बयान सुनने को भी तैयार नहीं थे जिस पर वे चर्चा की मांग कर रहे थे।

वेणगोपाल बोले- सरकार को विपक्ष को भरोसे में लेना होगा

कांग्रेस MP केसी वेणुगोपाल ने कहा- हमें वेस्ट एशिया में युद्ध के हालात और फ्यूल की बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर चर्चा करने की जरूरत है। यह पार्टी का मामला नहीं है। सरकार को विपक्ष को भी भरोसे में लेना होगा।

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