बिलासपुर
छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 18 ट्रेनें फिर कैंसिल:1 से 8 जून तक नहीं चलेंगी गाड़ियां; MP-UP, बिहार और दिल्ली जाने वाले यात्री होंगे परेशान
बिलासपुर,एजेंसी। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ से होकर चलने वाली 18 ट्रेनों को कैंसिल कर दिया है। बिलासपुर रेल मंडल के झलवारा स्टेशन में नॉन इंटरलॉकिंग का काम होगा, जिसके चलते 1 जून से 8 जून तक ट्रेनें नहीं चलेंगी। इससे MP, UP, बिहार और दिल्ली जाने वाले यात्रियों की मुसीबतें बढ़ गई हैं।
इसके साथ ही गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस के मार्ग में बदलाव किया गया है। 2 से 6 जून तक ये गाड़ी गोंदिया, बालाघाट, नैनपुर, जबलपुर, कटनी होते हुए बरौनी जाएगी। बता दें कि इससे पहले 9 ट्रेनें कैंसिल की गई थी।
झलवारा में नॉन इंटरलॉकिंग का काम
रेलवे प्रशासन की ओर से बताया गया है कि बिलासपुर जोन के अलग-अलग मंडल में इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम तेजी से चल रहा है। इसके तहत ए झलावारा स्टेशन पर IRCON द्वारा कटनी ग्रेड सेपरेटर लाइन (कटनी-मुड़वारा से) और सिंगरौली दिशा की ओर टाई-लाइन की कनेक्टिविटी के कमीशनिंग के लिए नॉन-इंटरलॉकिंग का काम होना है।
रेलवे ने नहीं की वैकल्पिक व्यवस्था
रेल प्रशासन ने ट्रेनें कैंसिल होने से यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए खेद जताया है। लेकिन, सुविधा के कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया है। इस दौरान असुविधा से बचने के लिए रेलवे ने आधिकारिक रेलवे पूछताछ सेवा NTES/139 से गाड़ी की सही स्थिति की जानकारी लेकर यात्रा करने की सलाह दी है।
डायवर्टेड रूट से चलने वाली गाड़ियां
- 2 से 6 जून को गाड़ी संख्या 15231 बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस व्हाया बरौनी, कटनी, जबलपुर, नैनपुर, बालाघाट और गोंदिया से होते हुए चलेगी।
- 2 से 6 जून को गाड़ी संख्या 15232 गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस व्हाया गोंदिया, बालाघाट, नैनपुर, जबलपुर, कटनी और बरौनी से होते हुए चलेगी।
इससे पहले 9 ट्रेनें हुई थी कैंसिल
इससे पहले छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 9 ट्रेनों को 21 मई यानी आज से 28 जून तक रद्द कर दिया गया था। ट्रेनों के रद्द होने पर दैनिक रेल यात्री संघ ने नाराजगी जताई है। संघ के अध्यक्ष अश्वनी शुक्ला ने आरोप लगाया है कि लोकल और पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर एक्सप्रेस ट्रेनों, वंदे भारत, दूरंतो और मालागाड़ी को रवाना किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़
बिलासपुर : 28 जून को जिले में पल्स पोलियो अभियान : 2.78 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी पोलियो की खुराक
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने तैयारियों की समीक्षा कर अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश
बिलासपुर। अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान में वाइल्ड पोलियो वायरस के संक्रमण की स्थिति को देखते हुए भारत सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के अंतर्गत बिलासपुर जिले में 28 जून 2026 को विशेष पोलियो टीकाकरण अभियान संचालित किया जाएगा। अभियान की तैयारियों की समीक्षा हेतु कलेक्टर संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स इम्यूनाइजेशन (डीटीएफआई) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर ने अभियान के प्रभावी एवं शत-प्रतिशत क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

बैठक में बताया गया कि जिले में 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के कुल 2 लाख 78 हजार 149 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए जिले में 1,520 पोलियो बूथ स्थापित किए जाएंगे। बूथ दिवस 28 जून को प्रातः 8 बजे से सायं 5 बजे तक सभी बूथों पर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जाएगी। इसके बाद 29 एवं 30 जून को मॉप-अप दिवस के रूप में घर-घर जाकर उन बच्चों को पोलियो की खुराक दी जाएगी, जो बूथ दिवस पर छूट गए होंगे।
विकासखंडवार लक्ष्य के अनुसार बिल्हा में 54,322 बच्चों के लिए 290 बूथ, कोटा में 39,075 बच्चों के लिए 263 बूथ, मस्तूरी में 50,945 बच्चों के लिए 278 बूथ, तखतपुर में 45,166 बच्चों के लिए 274 बूथ तथा शहरी बिलासपुर में 88,641 बच्चों के लिए 415 बूथ स्थापित किए जाएंगे। अभियान के सफल संचालन हेतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा बूथ, ट्रांजिट, मोबाइल एवं सुपरवाइजरी टीमों का गठन किया गया है। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मेला स्थल तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी विशेष व्यवस्था की जाएगी, ताकि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बैठक में निर्देश दिए कि अभियान के दौरान सूक्ष्म कार्ययोजना के अनुरूप कार्य किया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि जिले का कोई भी पात्र बच्चा पोलियो की खुराक से न छूटे। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं आम नागरिकों से अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शुभा गढ़ेवाल ने बताया कि पोलियो जैसी गंभीर एवं स्थायी विकलांगता उत्पन्न करने वाली बीमारी से बचाव के लिए प्रत्येक बच्चे को बार-बार पोलियो की खुराक देना आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो बूथ तक अवश्य लेकर आएं और पोलियो की दो बूंद पिलाकर उन्हें सुरक्षित भविष्य प्रदान करें। “दो बूंद जिंदगी की” के संदेश के साथ जिले में पोलियो मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में यह अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
छत्तीसगढ़
हाईकोर्ट बोला-बिना वजह 6 साल की देरी प्रताड़ना के समान:FIR और चार्जशीट खारिज, पुलिस प्रताड़ना की शिकार महिला पत्रकार को मिला न्याय
बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि बिना किसी ठोस वजह के जांच और चार्जशीट में 6 साल से अधिक की देरी करना आरोपी को प्रताड़ित करने जैसा है।
यह संविधान के आर्टिकल 21 के तहत मिलने वाले जल्द सुनवाई के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। इस टिप्पणी के साथ ही डिवीजन बेंच ने महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को निरस्त कर दिया है।

क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, बिलासपुर के सरकंडा निवासी याचिकाकर्ता श्रिया पांडेय साल 2018 में एक न्यूज चैनल में बतौर रिपोर्टर काम कर रही थीं। तब पुलिसकर्मियों का आंदोलन चल रहा था। इस दौरान 20 जून 2018 को पुलिस अफसरों ने आंदोलनकारी पुलिसकर्मियों की पत्नी को महिला थाने में बैठा लिया था।
उन्हें बिना वजह हिरासत में रखे जाने की खबर मिलने पर श्रिया अपनी टीम के साथ पड़ताल करने के लिए देर रात महिला थाना पहुंची थीं।
पुलिसकर्मियों ने किया मिसबिहेव, FIR भी दर्ज
आरोप है कि जब उन्होंने पुलिस से इस मामले में जानकारी मांगी, तो पुलिसकर्मियों ने सहयोग करने के बजाय उनके साथ मिसबिहेव किया। बाद में पुलिस ने उनके खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने (धारा 186, 353), मारपीट (धारा 323) और मिलीभगत (धारा 34) के तहत झूठा केस दर्ज कर दिया था।
न्याय के लिए हाईकोर्ट में लगाई याचिका
पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ श्रिया पांडेय ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि घटना 2018 की है, जबकि पुलिस ने चार्जशीट नवंबर 2024 में पेश की। इस 6 साल की लंबी देरी का पुलिस विभाग के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था।
हाईकोर्ट बोला- याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई सबूत नहीं
सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि केस डायरी और चार्जशीट देखने से साफ है कि पूरा मामला सिर्फ पुलिसकर्मियों और उनके जुड़े हुए गवाहों के बयानों पर टिका है, मौके पर कोई भी स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था।
बयानों में काफी विरोध है और पत्रकार के खिलाफ किसी भी अपराध का कोई सीधा सबूत नहीं मिला है। ऐसे में मामले को आगे बढ़ाना कानून का गलत इस्तेमाल माना जाएगा।
छत्तीसगढ़
बिलासपुर : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहायक है, मानव बुद्धि का विकल्प नहीं – डेका
समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन किया राज्यपाल ने

बिलासपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका आज डॉ सी.वी. रमन विश्वविद्यालय बिलासपुर एवं आईसेक्ट इंडिया ग्रुप के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर श्री डेका ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ तकनीक भी निरंतर विकसित हो रही है। ऐसे समय में तकनीक का उपयोग मानव कल्याण, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए होना चाहिए।

’एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित में करें’
राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक युग की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो चिकित्सा, कृषि, अर्थव्यवस्था और शिक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में मानव की सहायक बन सकती है, लेकिन यह मानव बुद्धि, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का स्थान नहीं ले सकती। तकनीक को जीवन में सहायक के रूप में अपनाया जाना चाहिए न कि उसे किसी खतरे के रूप में स्थान दिया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित के कार्यों में करें। अपने संबोधन में उन्होंने इंटरनेट के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ नकारात्मक पहलुओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। डिजिटल एडिक्शन न हो यह कोशिश करनी चाहिए।

’आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग’
राज्यपाल ने कहा कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नवाचार और वैज्ञानिक खोजों के माध्यम से हुआ है। जिस प्रकार अग्नि की खोज ने मानव जीवन को नई दिशा दी, उसी प्रकार आधुनिक विज्ञान और तकनीक भविष्य के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग है। स्टार्टअप और नवाचार केवल आर्थिक प्रगति के साधन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम भी हैं। नवाचार के जरिए दिव्यांगजनों के जीवन को सरल बनाया जा सकता है, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं तथा समाज को नई संभावनाओं से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और इको-फ्रेंडली जीवनशैली को अपनाने पर जोर दिया। पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को अपनाना आज की आवश्यकता है।

’भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता’
छत्तीसगढ़ की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक समृद्ध आदिवासी संस्कृति और अपार संभावनाओं वाला राज्य है। यहां के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और अवसरों से जोड़ने की है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कृषि, वन उत्पाद, उद्योग और सेवा क्षेत्र सहित प्रत्येक क्षेत्र में वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर देना होगा। राज्यपाल ने कहा कि भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
’सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का कर रही है प्रयास’
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई की पढ़ाई प्रारंभ की गई है। जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है इस तरह तकनीकी क्षेत्र में भी राज्य को आगे बढ़ा रहे हैं। आज कंपनियों को जिस तरह के कोर्स की आवश्यकता है उसी के अनुरूप तकनीकी संस्थानों में कोर्स संचालित करने के प्रयास हो रहे हैं। सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का प्रयास कर रही है जिससे युवा जाब मांगने वाले नहीं बल्कि देने वाले बने।
’राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को दिखाई हरी झंडी’
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार घोष ने एआई के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव में पद्मश्री अजय मांडवी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भी अपना प्रेरक उदबोधन दिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा आम नागरिकों को एआई की उपयोगिता, संभावनाओं और रोजगार के अवसरों की जानकारी देगा, विशेष कर ग्रामीण युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव एआई की निशुल्क व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब तैयार किया गया है।
कौशल रथ व एआइ पर आधारित पुस्तक का विमोचन
इस अवसर पर राज्यपाल ने आईसेक्ट के वार्षिक प्रतिवेदन एवं कौशल रथ व एआइ पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम का संचालक डॉ. ज्योति बाला गुप्ता और आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. अरविंद कुमार तिवारी ने किया। इस कॉन्क्लेव में विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्राध्यापक, उद्योग एवं बैंक के अधिकारी, आईसेक्ट इंडिया ग्रुप के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उद्यमी उपस्थित रहे।
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